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ट्रंप प्रशासन ने रोकी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की 18000 करोड़+ रूपए की फंडिंग, बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ के चलते रुका पैसा: आतंक समर्थकों पर कार्रवाई को तैयार नहीं था विश्वविद्यालय

                                    हार्वर्ड की फंडिंग राष्ट्रपति ट्रंप ने रोक ( फोटो साभार: जागरण )
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की 2.2 अरब डॉलर (लगभग 18 हजार करोड़ रूपए) की फंडिंग रोक दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ये फैसला यूनिवर्सिटी में लगातार बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ के चलते किया है। यूनिवर्सिटी में लगातार यहूदियों के खिलाफ घृणा फ़ैलाने की शिकायतें सामने आ रहीं थी।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यूनिवर्सिटी में हमास के समर्थन में प्रदर्शन हुए है और यूनिवर्सिटी का प्रशासन इन्हें रोक नहीं पाया है। ट्रम्प प्रशासन ने यूनिवर्सिटी पर यहूदी प्रोफ़ेसर और छात्रों के साथ भेदभाव करने का आरोप भी लगाया है।

ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि यूनिवर्सिटी का यह रवैया अमेरिका के कानूनों का उल्लंघन है। इसी पर कदम उठाते हुए उन्होंने यूनिवर्सिटी की फंडिंग तत्काल प्रभाव से रोक दी है। उसको अलग से दी जाने वाली 9 अरब डॉलर की फंडिंग रोकने पर भी विचार चल रहा है।

यह फैसला लेने से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से कई बड़े बदलाव करने को कहा था। उन्होंने कहा था प्रशासन को उन छात्रों को पहचानना होगा जो आतंकियों के समर्थक हैं, इसके अलावा यूनिवर्सिटी के भीतर आतंक की वकालत बंद करने को भी ट्रंप ने कहा था।

यूनिवर्सिटी में एडमिशन प्रक्रिया में भी सुधार करने की माँग ट्रंप ने की थी। शुक्रवार (11 अप्रैल, 2025) को हार्वर्ड ने यह माँगे मानने से इनकार कर दिया। आतंक समर्थक छात्रों को ढूँढने को यूनिवर्सिटी ने स्वतंत्रता पर हमला बताया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला लिया।

इस बीच हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के कुछ प्रोफेसरों ने राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया है। प्रोफेसरों का कहना है कि ये यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता पर हमला है और असंवैधानिक है। प्रोफेसरों के दो ग्रुप ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मैसाचुसेट्स की फेडरल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस दर्ज कराया है। इसमें कहा गया है कि यूनिवर्सिटी की फंडिंग रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।

गौरतलब है कि इजरायल और हमास के बीच युद्ध के दौरान हार्वर्ड में कई रैलियाँ निकाली गई थीं। इनमें अमेरिका के इजरायल से दोस्ती तोड़ने को कहा गया था। कई जगहों पर यहूदियों को गैस चैम्बर में डाल कर मार देने की बातें भी कही गईं थी। राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में आने के बाद ऐसे तत्वों पर कार्रवाई हो रही है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर हाल के दिनों में यह भी आरोप लगे हैं कि यहाँ गैर यहूदी और गैर माइनॉरिटी को वरीयता दी जा रही है। ट्रंप प्रशासन ने ऐसे रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन वाले कार्यक्रमों को खत्म करने की मांग की है और दाखिले के लिए पूरी तरह मेरिट बेस्ड सिस्टम अपनाने को कहा है।

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि हार्वर्ड जैसी जानी-मानी यूनिवर्सिटी को जवाबदेह होना चाहिए और जब ये निष्पक्ष नहीं हैं तो उन्हें सरकारी फंडिंग नहीं दी जानी चाहिए।

अलीगढ़ : ‘ये हिंदू है, मारो सा@ को’: VHP कार्यकर्ता को अकेला देख ईद पर शराब पी रहे मुस्लिमों ने चाकुओं से गोदा

                                                      पीड़ित हिन्दू विकास (बाएँ) के आई चोटें
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में ईद पर शराब पी रहे मुस्लिमों ने एक विश्व हिन्दू परिषद (VHP) कार्यकर्ता पर जानलेवा हमला किया। हिन्दू व्यक्ति ने मुस्लिम युवकों को शराब पीने से रोका था। मुस्लिमों ने पूरे शरीर पर चाकू मारे और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। पीड़ित हिन्दू का इलाज चल रहा है। मामले में FIR दर्ज करवाई गई है।

यह घटना अलीगढ़ के छर्रा थाना क्षेत्र के सलगवाँ गाँव में हुई है। इस मामले में पीड़ित विकास सिंह के मामा ने बताया है कि उनका भांजा ईद (31 मार्च, 2025) के दिन काम निपटा कर गाँव आ रहा था। गाँव के ही मोड़ पर उसे 3-4 लोग शराब पीते हुए दिखाई दिए।

विकास ने उन्हें सार्वजनिक स्थल पर शराब पीने से मना किया। इसके बाद मुस्लिम भड़क गए। उनमें से एक अमन ने विकास का नाम पूछा। विकास ने जब अपना नाम बताया तो अमन ने कहा कि यह व्यक्ति हिन्दू है और इसे मारो। इसके बाद अमन ने अपने साथी फरहत और अरबाज के साथ मिलाकर हमला कर दिया।

उन्होंने विकास को पकड़ कर चाकू मारे। इससे विकास गंभीर रूप से घायल हो गया। विकास इसके बाद किसी तरह यहाँ से बच कर निकला। उसके मामा ने बताया है कि मुस्लिम विकास को जान से मार देना चाहते थे। इसके बाद विकास को अस्पताल ले जाया गया। विकास को इस हमले में गंभीर चोटें आई हैं।

मामले में छर्रा थाने में FIR लिखवाई गई है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है। पीड़ित विकास को गंभीर चोटों के चलते अलीगढ़ के एक अस्पताल रेफर किया गया है। मामले में अब पुलिस कार्रवाई कर रही है। उसने 2 मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है।

मामले में छर्रा थाना CO धनंजय कुमार ने बताया है कि इस संबंध में FIR दर्ज कर ली गई है और 2 मुख्य आरोपितों को हिरासत में लिया गया है और उन्हें जेल भेजा जा रहा है। पुलिस ने बताया है कि वह अब आगे की कार्रवाई कर रही है।

ऑपइंडिया ने इस विषय में विश्व हिन्दू परिषद के बृज प्रांत के मीडिया प्रभारी प्रतीक रघुवंशी से भी बात की। उन्होंने बताया कि पीड़ित विश्व हिन्दू परिषद का कार्यकर्ता है और उस पर हमला करने वाले मुस्लिम उसे पहले से जानते रहे हैं। प्रतीक रघुवंशी ने बताया कि पीड़ित ड्राइवर का काम करता है और मुस्लिम उस पर शराब पीने से रोके जाने के चलते हमला किया।

प्रतीक रघुवंशी ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई किए जाने की माँग की है। उन्होंने कहा है कि विश्व हिन्दू परिषद इस मामले में कार्रवाई ना होने पर सड़कों पर भी उतरेगा।

उत्तराखंड : मौलाना को नहीं कबूल UCC, क्योंकि मामू की बेटी को नहीं बना सकते बेगम: कहा- इस्लाम हमारी रगों में घुसा है, इसे हम नहीं छोड़ सकते…

                   UCC के बाद चचेरी-ममेरी बहन से निकाह नहीं हो सकता है (फोटो साभार: Grok AI)
उत्तराखंड के मौलाना समान नागरिक संहिता (UCC) कानून से नाखुश हैं। सगे रिश्तों में निकाह करने पर UCC में लगाई गई पाबंदी को लेकर मौलाना गुस्सा हैं। मौलानाओं का कहना है कि यह मुस्लिमों की हैसियत कम करने का प्रयास है। उन्होंने दावा किया है कि UCC उन पर लादा जा रहा है।

पत्रकार अदिति त्यागी से बातचीत करते हुए मौलानाओं ने यह बातें कही हैं। इसका वीडियो अब वायरल है। इस वीडियो में मौलाना कहता है, “UCC लागू करने से पहले उलेमा से राय ली गई थी, अलग जगह-जगह पर मीटिंग हुई थी। हमने इन बैठक में साफ़ कर दिया था कि इस्लाम हमारी रगों में घुसा है और इसे हम नहीं छोड़ सकते।”

आगे मौलाना ने कहा, “उसमे एक कानून बनाया है कि मामू की लड़की और फूफी की लड़की से निकाह नहीं कर सकते लेकिन हमारी शरीयत में इसकी इजाजत है। किसी ने अपनी बीवी को तलाक दिया है तो उसे (महिला) 3 महीने इद्दत करनी है, इसमें यह खत्म कर दिया गया है… यह शरीयत के भीतर दखल है। हम ये नहीं बर्दाश्त कर सकते।”

मौलाना ने कहा कि अगर राय ली गई तो मानी क्यों नहीं गई। मौलाना ने दावा किया UCC कानून उन पर लादा गया है और यही करना था तो राय लिए जाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। मौलाना ने दावा किया कि इस्लाम पूरा मजहब है और इसमें कोई शक नहीं बचा है।

उत्तराखंड में पास किए गए UCC कानून में शादी, तलाक और विरासत को लेकर कई नियम बनाए गए हैं। इनमें विशेष तौर पर शादी को लेकर स्पष्ट नियम हैं कि किस रिश्ते में शादी हो सकती है और किसके अंतर्गत शादी मानी नहीं जाएगी।

किन रिश्तों में नहीं हो सकता निकाह

UCC के अंतर्गत किन रिश्तों में निकाह को कानूनी रूप से निषिद्ध किया गया है, इसे आप नीचे दी गई सूची से समझ सकते हैं। ये सूची बताती है कि UCC लागू होने के बाद पुरुष किन महिलाओं और महिलाएँ किन पुरुषों से विवाह नहीं कर सकेंगी।
कोई भी पुरुष इन महिलाओं से विवाह नहीं कर सकेगाकोई भी महिला इन पुरुषों से विवाह नहीं कर सकेगी
बहनभाई
भांजीभांजा
भतीजीभतीजा
मांचाचा/ताऊ
मामीससुर
चाचीसाला/साडू
चचेरी बहनसौतेला भाई
फुफेरी बहनसौतेला भाई
मौसेरी बहनमौसेरा भाई
पत्नी की बहनपत्नी का भाई
सौतेली मांसौतेला पिता
सौतेली बहनसौतेला भाई
नानीदादा
सौतेली नानीसौतेला दादा
पत्नीपतिव्रता
सौतेली पत्नीसौतेला पतिव्रता
माता की बहनपत्नी का पिता (ससुर)
माता की सौतेली बहनसौतेला ससुर
दादीनाना
सौतेली दादीसौतेला नाना
पिता की सौतेली नानीसौतेला पतिव्रता (माता का सौतेला पतिव्रता)
नाती की नानीमाता का दादा
पिता की सौतेली पत्नीमाता का सौतेला दादा
पत्नी की सौतेली बहनसौतेला बेटा
पत्नी की पत्नीपोता
बहू (विधवा)बेटा का ससुर
नातिननाती
पोतीबेटी का ससुर
पोते की सौतेली बहूपोते का ससुर
बेटे की सासबेटी का ससुर
पत्नी की विधवासास का ससुर
बेटे की विधवाबेटी का ससुर
पत्नी की विधवानाती का ससुर
नाती की विधवानाना का नाना

 इन सभी रिश्तों में किए गए विवाह को UCC के अंतर्गत वैध रिश्ते नहीं माना जाएगा। गौरतलब है कि हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत यह बंदिशें पहले से देश की बहुसंख्यक आबादी पर लागू थीं। अब यह उत्तराखंड के भीतर पूरी जनता पर और हर समुदाय पर लागू होंगी।

जिस अमेरिका के भरोसे जंग में कूद गया यूक्रेन, अब वही निपटाने में जुटा: जेलेंस्की-ट्रंप फाइट के बाद हथियार-पैसा सब बंद


रूस से बीते तीन वर्षों से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के अड़ियल रवैये के चलते अब उनके देश की मदद रुक गई है। जेलेंस्की के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से बहस और झगड़ा करने के बाद यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद पर विराम लग गया है। जेलेंस्की लगातार ट्रम्प के दबाव के बाद भी युद्ध जारी रखना चाहते हैं। जेलेंस्की ने सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ही नहीं बल्कि अपने पुराने एक समर्थक सीनेटर से भी झगड़ा कर लिया है।

अमेरिका नहीं देगा अब सैन्य मदद

मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया है कि व्हाइट हाउस ने यूक्रेन को जाने वाली सारी सैन्य मदद पर रोक लगाई है। फॉक्स न्यूज को व्हाइट हाउस के एक कर्मचारी ने बताया, “राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि उनका पूरा ध्यान सीजफायर पर है। हमें चाहिए कि हमारे बाकी मित्र देश भी इसी के प्रति प्रतिबद्ध हों। हम अपनी सहायता रोक रहे हैं और इसकी समीक्षा भी ताकि शान्ति बहाली का रास्ता आसानी से निकल सके।” व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि मदद अस्थायी तौर पर ही रोकी गई है।
फरवरी, 2022 में युद्ध चालू होने के बाद अमेरिका लगातार यूक्रेन को मिसाइल, छोटे हथियार, टैंक, तोपें, गोला बारूद और बख्तरबंद गाड़ियाँ तक दे रहा था। लेकिन अब इस पर विराम लग गया है। 2022 के बाद से तीन साल के भीतर अमेरिका यूक्रेन को लगभग 175 बिलियन डॉलर (₹15 लाख करोड़ से अधिक) के सैन्य साजोसामान देने की मंजूरी दे चुका है। इसमें से 90% से अधिक मदद दी भी जा चुकी है। यह सारी मदद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के राष्ट्रपति रहते हुए दी गई थी।
बायडेन ने दिसम्बर, 2024 में लगभग ₹50 हजार करोड़ से अधिक की मदद का भी ऐलान किया था। यूक्रेन को लगातार अमेरिकी हथियार भेजे जा रहे थे। कई मौकों पर यूक्रेन की हार को अमेरिकी हथियारों ने ही रोका। जेलेंस्की के नेतृत्व वाला यूक्रेन 2022 में अमेरिका और पश्चिमी देशों के दम पर ही युद्ध लड़ने गया था। इसमें भी यूरोपियन देशों ने उसके आर्थिक सहायता ज्यादा दी है। हथियार अमेरिका से ही आए हैं। लेकिन अब यह बंद हो गई है। इसका रूस से चल रहे युद्ध पर गंभीर प्रभाव हो सकता है।

ट्रम्प से जेलेंस्की ने की थी खुले में लड़ाई

अमेरिका का यह मदद बंद करने का फैसला जेलेंस्की के व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वांस के साथ झगड़ा करने के बाद हुआ है। 28 फरवरी, 2025 को व्हाइट हाउस में यह झगड़ा मीडिया के सामने हुआ था। बैठक के दौरान उपराष्ट्रपति वांस ने आरोप लगाया था कि जेलेंस्की प्रोपेगेंडा कर रहे हैं और कैमरा लाकर युद्ध दिखा रहे हैं।
वहीं जेलेंस्की ने कहा था कि रूस कल को अमेरिका पर भी हमला कर सकता है। ट्रम्प ने बैठक में उनसे स्पष्ट कर दिया था कि वह कोई भी डील करने की स्थिति में नहीं हैं। ट्रम्प ने बैठक में ही जेलेंस्की को कसके लताड़ लगाई थी। ट्रम्प ने यह भी कहा था कि जेलेंस्की रूस के राष्ट्रपति पुतिन से इतनी घृणा करते हैं कि कोई डील करना मुश्किल है।
ट्रम्प ने आरोप लगाया था कि जेलेंस्की ने अमेरिका सम्मान नहीं किया है। उन्होंने कहा था कि जेलेंस्की अमेरिकी मदद का फायदा उठाना चाहते हैं। इस तू-तू मैं-मैं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था। इसके बाद से साफ़ हो गया था कि अमेरिका अब यूक्रेन को समर्थन नहीं देने वाला और जल्द शांति का पक्षधर है।

पुराने समर्थक सीनेटर से भी कर लिया झगड़ा

जेलेंस्की ने अपने अड़ियल रवैये के चलते सिर्फ ट्रम्प से ही लड़ाई नहीं की। उन्होंने अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम से भी झगड़ा मोल ले लिया है। लिंडसे ग्राहम लगातार यूक्रेन के समर्थक रहे हैं। वह रूस के खिलाफ बोलते रहे हैं और जेलेंस्की की प्रशंसा करते रहे हैं। लेकिन उनकी हरकतों पर हाल ही में उन्होंने जेलेंस्की की आलोचना की।
इतनी सी बात पर जेलेंस्की उन पर भड़क गए। उन्होंने लिंडसे ग्राहम की आलोचना कर डाली। उन्होंने कहा, “मैं उन्हें यूक्रेन की नागरिकता दे सकता हूँ। वह हमारे देश का नागरिक बन जाएँगे, और फिर उनकी बात में दम होगा। और मैं उन्हें यूक्रेन के नागरिक के तौर पर उनसे जानना चाहूंगा कि राष्ट्रपति कौन बने।”
2015 के एक कानून के अनुसार यूक्रेन में जब तक युद्ध होगा तब तक देश में चुनाव नहीं हो सकते। इसी कानून का सहारा उठा कर जेलेंस्की लगातार राष्ट्रपति बने हुए हैं। उन पर राष्ट्रपति पद हथियाने का आरोप लग रहा है। यूक्रेन में चुनाव की माँग भी तेज हो रही है।

इजरायल ने शुरू किया घर में घुस कर मारना… बिजली-राशन-पानी-गैस सब बंद : प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का ऐलान – हमने स्टार्ट कर दिया

लेबनान की तरफ गोलीबारी करते इजरायली तोप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने की बड़ी बैठक (फोटो साभार: AFP/फेसबुक)
इजरायल के रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने सोमवार (9 अक्टूबर, 2023) को कहा कि इजरायल ने गाजा पट्टी का ‘सीज’ शुरू कर दिया है। गाजा पट्टी से आतंकवादी समूह हमास द्वारा इजरायल के खिलाफ दशकों में सबसे घातक हमला शुरू करने के 3 दिन बाद उनका देश फिलीस्तीनी क्षेत्र पर ‘घेराबंदी’ के हिस्से के रूप में गाजा पट्टी को ब्लॉक कर दिया है। इस बीच, इजरायल के तीन लाख से अधिक रिजर्व सैनिकों ने अपनी पोजिशन सँभाल ली है और गाजा सीज की कार्रवाई शुरू कर दी है।

योव गैलेंट ने कहा कि उन्होंने गाजा पट्टी पर ‘पूर्ण घेराबंदी’ का आदेश दिया है, उन्होंने कहा कि ‘कोई बिजली, कोई भोजन, कोई गैस’ फिलिस्तीनी क्षेत्र तक नहीं पहुँचेगी। इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा कि हम बर्बर आतंकियों से लड़ रहे हैं और उसी के हिसाब से जवाब देंगे। इसके लिए अब पूरी तरह से ‘गाजा पट्टी को सीज’ किया जाता है। योव गैलेंट ने एक वीडियो मैसेज में ये ऐलान किया। गैलंड इजरायली सेना के पूर्व कमांडर रह चुके हैं और बेंजामिन नेतन्‍याहू सरकार में अपने सख्‍त रुख के लिए जाने जाते हैं।

गाजा पट्टी से सटे इलाकों में तीन लाख से अधिक रिजर्व सैनिकों ने मोर्चा सँभाल लिया है और गाजा के सीज के आदेश को मानने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी गाजा में हवाई हमलों की तस्वीरें शेयर करते हुए कहा, “हमने शुरू कर दिया है। इजरायल की विजय होगी।”

गाजा पट्टी में करीब 23 लाख लोग रहते हैं। यह तीन तरफ से इजरायल और एक तरफ से मिस्र से घ‍िरा हुआ है। इजरायल और हमास के बीच युद्ध में अब तक 1000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों की तादाद में लोग ज़ख़्मी हुए हैं।

येरुशलम पर भी हमला

इस बीच, हमास ने सोमवार को कई इजरायली शहरों पर रॉकेट हमलों किए, जिसका इजरायली सेना मुँहतोड़ जवाब दे रही है। सोमवार सुबह के बाद शाम को इजरायल पर रॉकेट बरसाए गए हैं। इजरायली डिफेंस फोर्स ने एक्स पर इसकी सूचना दी है। इसमें बताया गया है कि अब येरूशलम पर भी हमले हो रहे हैं और सायरन बज रहे हैं।
इजरायली रक्षा बलों ने कहा कि उसने रविवार रात गाजा पट्टी में हमास और इस्लामी जिहाद के ठिकानों पर 500 हमले किए। वहीं, गाजा से सटे हुए सारे इलाकों में जहाँ हमास के लड़ाके घुस आए थे, सारे इलाके मुक्त करा लिए गए हैं। सेना ने पूरे इलाके को कंट्रोल में ले लिया है। हालाँकि, छिटपुट लड़ाई अब भी जारी है।

लेबनान की तरफ से इजरायल में घुसने वाले कई हमलावर ढेर

इस बीच, इजरायली सेना ने जानकारी दी है कि लेबनान से लगने वाले ब्लू-जोन को पारकर इजरायल में घुस रहे कई हमलावरों को मार गिराया गया है। बता दें कि लेबनान में ताकतवर मिलिशिया संगठन हिज्बुल्ला, जो हमास को मदद देता है, उसने इजरायल पर हमले की घोषणा की थी। हिज्बुल्ला ने कहा था कि वो हमास के संघर्ष में उसके साथ है। इसी क्रम में उसकी तरफ से आतंकियों ने इजरायल में घुसने की कोशिश की, तो इजरायली सेना ने ऐसे कई आतंकियों को ढेर कर दिया है। इजरायली सेना ने कहा कि वो मजबूती से अपनी जमीन की सुरक्षा कर रही है।

ऑस्ट्रिया, जर्मनी के बाद पूरे ईयू ने बंद की फिलीस्तीन को मिलने वाली मदद

हमास के आतंकियों की ओर से इजरायल पर किए गए हमले के बाद यूरोपियन देशों इजरायल से एकजुटता दोहराई है। गाजा पट्टी की सीज की घोषणा के कुछ ही समय बाद ऑस्ट्रिया और जर्मनी ने फिलीस्तीन को जाने वाली मदद पूरी तरह से रोक दिया है। यही नहीं, यूरोपीय यूनियन ने फिलीस्तीन को मिलने वाली ‘हरेक पाई’ को रोकने की घोषणा कर दी है और सभी प्रकार की वित्तीय सहायता को रिव्यू करने के निर्देश दे दिए हैं।

योम कुप्पुर युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला

इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर अचानक हमला किया। इसमें 700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। 100 से अधिक लोगों अब भी बंधक हैं। इजरायल पर हमास लगातार रॉकेट हमले कर रहा है। बताया जा रहा है कि इस हमले को अंजाम देने से पहले इजरायल को हमास यह विश्वास दिलाने में सफल रहा था कि वह शांति चाहता है। हमास का यह हमला वर्ष 1973 में योम किप्पुर युद्ध के बाद इजरायल पर हुआ सबसे बड़ा हमला है। वहीं, इजरायली पलटवार में 500 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।