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गजराज पर सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के आदेश पर लगाई रोक, कहा- मंदिर में हाथियों का उपयोग हमारी संस्कृति

                          केरल के मंदिरों में हाथियों को पूजा जाता है (फोटो साभार: Onmanorama)
सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाई है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केरल के मंदिरों के भीतर हाथी जुलूस और उनके धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग में रोक को लेकर था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाथियों का मंदिरों में उपयोग हमारी संस्कृति का हिस्सा है और हाई कोर्ट का आदेश इसे रोकने की क्षमता रखता है।

हाथी संस्कृति का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट

सोमवार (17 मार्च, 2025) को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने यह रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश गज सेवा समिति नाम के एक NGO की याचिका पर दिया है। केरल हाई कोर्ट ने मंदिरों में हाथियों के उपयोग को लेकर यह आदेश जनवरी, 2025 में दिया था।
यह याचिका लगाने वाले गज सेवा समिति ने आरोप लगाया है कि हाथियों पर रोक लगाने की माँग करने वाले कथित एक्टिविस्ट हिन्दुओं की 2 हजार साल से अधिक पुरानी परमपराएं बंद करवाना चाहते हैं। गज सेवा समिति ने आरोप लगाया कि यह एक्टिविस्ट विदेशी फंड के सहारे काम करते हैं और यह हिन्दुओं की परंपराओं को रोक रहे हैं।
गज सेवा समिति ने कहा कि हाथियों को केरल के भीतर पवित्र माना जाता है और उन्हें शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। गज सेवा समिति ने आरोप लगाया कि कथित पशु अधिकार वाले पूरी तरह से मंदिरों में उनका इस्तेमाल रोकना चाहते हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर दिए हैं। गौरतलब है कि जनवरी, 2025 में दिए गए आदेश में केरल हाई कोर्ट ने मंदिर के उत्सवों में हाथियों के उपयोग को लेकर कई बातें कहीं थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि 31 मई, 2022 से पहले रजिस्टर नहीं हुए मंदिर और देवासम हाथियों का जुलूस नहीं करवा सकेंगे।

हाई कोर्ट ने लगाई थी बंदिशें

केरल हाई कोर्ट ने इसे पहले नवम्बर, 2024 में ‘पशु अधिकार’ कार्यकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाथियों के मंदिर में इस्तेमाल पर कई बंदिशें लगा दी थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि मंदिरों में इस्तेमाल किए जाने वाली हाथी किसी ‘नाजी कैम्प’ जैसी जिन्दगी गुजारते हैं।
केरल हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि किसी भी उत्सव में हाथियों को 30 किलोमीटर से अधिक नहीं चलवाया जाएगा। इसके अलावा उन्हें एक दिन में 125 किलोमीटर से अधिक दूर नहीं ले जाया जाएगा। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि उन्हें 6 घंटे से अधिक किसी वाहन में नहीं रखा जाएगा।
केरल हाई कोर्ट ने दिन में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच भी सार्वजनिक रोड पर हाथियों के जुलूस भी करने पर रोक लगा दी थी, उनको रात में भी इस्तेमाल करने पर बंदिशें थीं। जुलूस के दौरान भी हाथियों के बीच 3 मीटर की दूरी रखी जानी थी। हाई कोर्ट ने यहाँ तक कहा था कि कोई ऐसी धार्मिक परंपरा नहीं है, जिसमे हाथियों का उपयोग अनिवार्य हो।
इस आदेश के बाद केरल के बड़े मंदिरों ने कहा था कि अब हाथियों का उपयोग लगभग असंभव हो जाएगा। कई मंदिरों ने इस आदेश के बाद रोबोट वाले हाथी मँगाए थे। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने दिसम्बर, 2024 में रोक दिया था। हालाँकि, इसके बाद भी जनवरी, 2025 में हाई कोर्ट ने नया ऐसा ही आदेश दिया। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अब रोक लगाई है।

कस्टडी से मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली के जल मंत्री को कैसे जारी किया आदेश? ED करेगी जाँच, आतिशी से हो सकती है पूछताछ

दिल्ली शराब नीति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहा था कि वे जेल से सरकार चलाएँगे। इसके बाद सीएम केजरीवाल ईडी की हिरासत से रविवार (24 मार्च 2024) को अपना पहला आदेश जारी किया है। यह आदेश जल मंत्रालय से संबंधित था। अब इस आदेश का ईडी ने संज्ञान लिया है।

दरअसल, मुख्यमंत्री केजरीवाल के आदेश के बाद दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने आदेश का जिक्र करते हुए कहा था कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के कुछ इलाकों में पानी और सीवर से जुड़ी समस्याओं का जिक्र किया है। उन्होंने गर्मी के मौसम में पानी के टैंकरों की पर्याप्त व्यवस्था करने का आदेश दिया है।

केजरीवाल ने अपने नोट में लिखा था, “मुझे पता चला है कि दिल्ली के इलाकों में पानी और सीवर की काफी समस्या हो रही है। इसको लेकर मैं चिंतित हूँ। चूँकि मैं जेल में हूँ, इस वजह से लोगों को जरा भी तकलीफ नहीं होनी चाहिए। गर्मियाँ आ रही हैं। जहाँ पानी की कमी है, वहाँ उचित संख्या में टैंकरों का इंतजाम कीजिए। मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों को आदेश दीजिए ताकि जनता को किसी तरह की परेशानी ना हो।”

उन्होंने अपने नोट में आगे लिखा था, “जनता की समस्याओं का तुरंत और समुचित समाधान होना चाहिए। जरूरत पड़ने पर उपराज्यपाल महोदय का भी सहयोग लें। वे भी आपकी मदद जरूर करेंगे।” आतिशी ने बताया था कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने यह नोट अपने वकील के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा था। बता दें कि सीएम केजरीवाल को 28 मार्च तक ईडी की रिमांड पर हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ED अपनी जाँच में पता लगाने की कोशिश करेगी कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के आदेश उनकी हिरासत अवधि के दौरान विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के आदेश के अनुरूप थे। इसके साथ ही केंद्रीय एजेंसी इसकी भी जाँच करेगी कि सीएम केजरीवाल ने इस पत्र को लिखा कैसे।

ईडी ने कहा कि वह पार्टी के दावे की जाँच करेगी, क्योंकि हिरासत में लिए गए लोगों के लिए किसी भी स्टेशनरी की अनुमति नहीं है। सूत्रों ने कहा कि आतिशी से कथित ‘आदेश’ के स्रोत और इसे किसने लाया और उन्हें कब और दिया इसके बारे में पूछताछ करेगी। सूत्रों ने कहा कि एजेंसी सीसीटीवी फुटेज के जरिए दावे की पुष्टि करेगी।

55 साल के अरविंद केजरीवाल को हिरासत में भेजते समय अदालत ने उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल और निजी सहायक बिभव कुमार को हर दिन शाम 6 बजे से 7 बजे के बीच मिलने की अनुमति दी है। इसके साथ ही उन्हें अपने वकील से मिलने के लिए आधे घंटे का समय निर्धारित किया है।

अरविंद केजरीवाल द्वारा भेजे गए निर्देश को पढ़ने के बाद भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर हमला बोला था। भाजपा ने कहा था कि यह चिंताजनक है कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उनके कार्यालय से एक आदेश जारी किया गया है। भाजपा के मनजिंदर सिंह सिरसा ने पत्र के फर्जी होने का दावा करते हुए उपराज्यपाल से इस पर गौर करने का आग्रह किया।

सिरसा ने कहा, “सीएम ईडी की हिरासत में हैं और उन्हें बाहर का भोजन और दवा लेने के लिए भी अदालत से अनुमति लेनी होगी। इस स्थिति में, कौन मुख्यमंत्री से संपर्क किया गया था? और यह अधिकार वह केवल अपने प्रमुख सचिव को ही दे सकते हैं। फिर आदेश आतिशी जी तक कैसे पहुँचा? मुख्यमंत्री कार्यालय को हाईजैक कर लिया गया है।”

सिरसा ने आगे कहा, “आतिशी जी, यह कोई शराब की दुकान नहीं है, जहाँ कोई भी बोतल ले सके। यह मुख्यमंत्री का कार्यालय है, जिसे केवल मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा अनुमति प्राप्त अधिकारी द्वारा ही संचालित किया जा सकता है। इस आदेश में कोई संख्या नहीं है और किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं। शराब घोटाला की तरह, यह एक पत्र घोटाला है।”

दिल्ली हाई कोर्ट की MCD को फटकार : पब्लिक पार्क वापस लो, पुलिस चाहिए तो देंगे: सरकारी जमीन पर जामा मस्जिद ने कर रखा है कब्जा; जामा मस्जिद को हो रही लाखों की कमाई पर कार्यवाही कब?

जामा मस्जिद ने कर रखा है आसपास के पार्कों पर कब्जा
दिल्ली के जामा मस्जिद ने पास के एक पब्लिक पार्क पर अवैध कब्जा किया हुआ है। इसे लेकर मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति ने याचिका दायर की थी। अब मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने ये कब्जा वापस न ले पाने के लिए MCD को फटकारा है। कोर्ट ने कहा है- “हम ऐसी सदी में नहीं रह रहे हैं जहाँ कानून का शासन नहीं है फिर आखिर क्यों MCD ये कब्जा वापस नहीं ले पाई।”

सुनवाई के दौरान MCD ने हाईकोर्ट को बताया कि पब्लिक पार्क पर जामा मस्जिद की अथॉर्थी और शाही इमाम ने कब्जा कर रखा है। उन लोगों ने अवैध रूप से उसे अपने कब्जे में किया हुआ है और उस पर वे ताला भी लगा देते हैं। एमसीडी की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि वजूखाने के पास बने पार्क में वह लोग एमसीडी अधिकारियों को प्रवेश नहीं करने देते और दिल्ली वक्फ बोर्ड भी पार्क को अपनी संपत्ति बताता है।

MCD की ओर से पेश वकील की बात सुनने के बाद एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और मिनी पुष्कर्ण ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि आखिर कैसे पब्लिक पार्क पर कब्जा कर लिया गया और अब एमसीडी इतनी मजबूर है कि उसे वापस भी नहीं ले पा रही। पीठ ने कहा- “सार्वजनिक पार्कों पर कैसे भी कब्जा नहीं हो सकता…आप हमें 21वीं सदी में क्या बताने की कोशिश कर रहे हो? ये सब कैसे हो सकता है। हम हर दिन पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कह रहे हैं। हम साँस नहीं ले पा रहे हैं, और आप पार्कों पर कब्ज़ा खो रहे हैं?आप इस पर कब्ज़ा नहीं खो सकते यदि आप पार्क के मालिक हैं, तो आप पार्क को दिल्ली के नागरिकों के लिए सार्वजनिक ट्रस्ट में रखते… ऐसा लगता है कि आपके अधिकारी किसी और दुनिया में रह रहे हैं… आप इस तरह सार्वजनिक पार्क का कब्जा नहीं खो सकते। हम ऐसे देश में नहीं रह रहे हैं, जहाँ कानून का शासन नहीं है…हम 21वीं सदी में रह रहे हैं।”

कोर्ट ने इस केस की सुनवाई करने के बाद कहा है कि MCD कानून के अनुसार सार्वजनिक पार्क पर कब्जा वापस पाने के लिए कदम उठाए। कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस की जरूरत होगी तो उनकी सहायता भी प्रदान की जाएगी। इस तरह पब्लिक पार्क पर प्रशासन पर अपना अधिकार नहीं छोड़ सकता।

जिस पार्क पर जामा मस्जिद के प्रशासन ने कब्जा किया हुआ है। वो नॉर्थ पार्क है। जहाँ एमसीडी को घुसने तक नहीं दिया जाता। उनके मुताबिक साउथ पार्क को भी लेकर विवाद है लेकिन वहाँ वह आ जा पाते हैं और पार्क की देख रेख कर पाते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति द्वारा याचिका दायर की गई थी।

कोर्ट के इस कदम से जनता में अब यह प्रश्न पूछा जा रहा है कि जामा मस्जिद को होने वाली लाखों/करोड़ों की कमाई का कब हिसाब माँगा जाएगा? जबकि इसके रख-रखाव पर सरकारी धन खर्च किया जाता है। दूसरे, सर्विस लेन और सीढ़ियों पर लगने वाली दुकानों की कमाई किसकी जेब में जा रही है, जबकि कई बार कोर्ट के आदेश के बाद इनको हटाया जाता रहा है, फिर किसके इशारे पर दुकाने लग जाती हैं? नीचे मीना बाजार में भी अतिक्रमण हुआ है।  

दिल्ली : ‘प्रचार पर 1100 करोड़ रूपए खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी पैसे देने होंगे’: रैपिड रेल के लिए केजरीवाल सरकार को 415 करोड़ रूपए देने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश

                                                                                                                  फोटो साभार: TOI/ABP
अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) यानी रैपिड रेल के लिए 415 करोड़ रुपए देने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है। यह रकम देने के लिए केजरीवाल सरकार को शीर्ष अदालत ने दो महीने की मोहलत दी है। विज्ञापन पर दिल्ली सरकार के 1100 करोड़ रुपए खर्च करने का हवाले देते हुए यह आदेश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने सोमवार (24 जुलाई 2023) को कहा, “यदि पिछले 3 सालों में विज्ञापन पर 1100 करोड़ रुपए खर्च किए जा सकते हैं तो इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए निश्चित रूप से पैसा दिया जा सकता है। या तो आप (दिल्ली सरकार) पैसा दें या हम आपका विज्ञापन बजट कुर्क कर लेंगे।” कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार के फंड देने से हाथ खड़े करने के कारण उसे यह आदेश देना पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार और चेतावनी के बाद दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि RRTS के लिए फंड दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कोर्ट से फंड किश्त में जमा करने और इसके लिए थोड़ा समय देने की माँग की। इस पर कोर्ट ने उन्हें दो महीने की मोहलत दी। अब केजरीवाल सरकार को RRTS के लिए 2 महीने के भीतर 415 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा।

RRTS प्रोजेक्ट की फंडिंग को लेकर इससे पहले 3 जुलाई 2023 को सुनवाई हुई थी। इस दौरान दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि RRTS के लिए उसके पास फंड नहीं है। जवाब से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को बीते 3 सालों में विज्ञापन पर हुए खर्च का ब्यौरा 2 सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर बताया था कि बीते 3 सालों में उसने विज्ञापन पर 1073 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

क्या है RRTS प्रोजेक्ट

RRTS प्रोजेक्ट के जरिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को हरियाणा और राजस्थान से जोड़ने की प्लानिंग है। इसके तहत कम्प्यूटर संचालित हाई स्पीड ट्रेनें चलेंगी। पीक टाइम नहीं होने पर इन ट्रेनों से माल ढुलाई की भी योजना है। 180 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से ये ट्रेनें चलेंगी। RRTS के अंतर्गत दिल्ली-मेरठ-गाजियाबाद रूट का काम अंतिम चरण में है। इससे यात्रियों को सहूलियत के साथ प्रदूषण और जाम से भी राहत मिलेगी। रैपिड रेल की सेवा मेंट्रो से अलग होगी। मेट्रो के मुकाबले इसकी स्पीड अधिक और स्टॉपेज कम होगा।

The Kashmir Files जैसा विरोध : The Kerala Story को रोकने के लिए एक हुए वामपंथी-कांग्रेसी

अदा शर्मा अभिनीत 'द केरल स्टोरी' में महिलाओं की तस्करी और
धर्मांतरण कोउजागर किया गया है
(फोटो साभार: अदा शर्मा का इंस्टाग्राम )
जैसे द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) के विरोध में सेकुलर-लिबरल खेमा एक हो गया था, वैसा ही द केरल स्टोरी (The Kerala Story) को लेकर भी देखने को मिल रहा है। दोनों ही फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है। विवेक अग्निहोत्री ने अपनी फिल्म में कश्मीर में हिंदुओं दमन को पर्दे पर उतारा था तो विपुल अमृतलाल शाह की फिल्म केरल की उन महिलाओं की पीड़ा दिखाती है जो इस्लामी धर्मांतरण और तस्करी की शिकार हुईं।

द केरल स्टोरी का टीजर गुरुवार (3 नवंबर 2022) को यूट्यूब पर रिलीज किया गया था। टीजर में एक ऐसी महिला की कहानी दिखाई गई है जो नर्स बनने का सपना देखती थी। लेकिन घर से अगवा कर उसे आईएसआईएस आतंकवादी बना दिया गया। फिल्म में एक्ट्रेस अदा शर्मा लीड रोल में हैं। टीजर में बुर्का पहने हुए वह कहती हैं, “मेरा नाम शालीनी उन्नीकृष्णन था। मैं नर्स बनकर लोगों की मदद करना चाहती थी। अब मैं फातिमा बा हूँ। एक आईएसआईएस (ISIS) आतंकवादी, जो अफगानिस्तान की जेल में बंद है। मैं अकेली नहीं हूँ। मेरी जैसी 32000 और लड़कियाँ कन्वर्ट होकर सीरिया और यमन में दफन हो चुकी हैं।”

इसके बाद से ही इस फिल्म को रोकने के लिए पूरा गिरोह सक्रिय हो गया है। केरल में राजनीतिक तौर पर कांग्रेस और वाम दल भले दो छोर पर खड़े दिखते हों, लेकिन इस फिल्म के विरोध पर दोनों एक सुर में बात कर रहे हैं। वे इस फिल्म को राज्य की छवि को धूमिल करने का प्रयास बता रहे हैं।

कांग्रेस ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की माँग की है। केरल विधानसभा में कांग्रेस के नेता वीडी सतीशन ने कहा कि फिल्म गलत सूचना फैलाती है और इसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैंने टीज़र देखा है। यह गलत सूचना का एक स्पष्ट मामला है। केरल में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। यह अन्य राज्यों के सामने केरल की छवि खराब करने के लिए है। यह नफरत फैला रहा है, इसलिए इसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। सामान्य तौर पर, हम फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ हैं, लेकिन इस प्रकार की गलत सूचना से सांप्रदायिक मुद्दे पैदा होंगे। राज्य पुलिस के पास भी ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है।”

वहीं सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर ‘द केरल स्टोरी’ के टीजर के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि फिल्म का टीजर झूठी सूचना का प्रसार कर रहा है। यह सार्वजनिक शांति को भंग कर सकता है और इसके पीछे केरल को बदनाम करने की मंशा है।

वहीं केरल के पुलिस महानिदेशक अनिल कांत ने मंगलवार (7 अक्टूबर 2022) को तिरुवनंतपुरम के पुलिस आयुक्त स्पर्जन कुमार को फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के क्रू मेंबर के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। इससे पहले सोमवार को तमिलनाडु के एक पत्रकार बीआर अरविंदक्षण ने फिल्म प्रमाणन बोर्ड के प्रमुख प्रसून जोशी और अन्य को पत्र लिखकर फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी । उन्होंने कहा था कि जब तक कि निर्माता अपने दावों के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं करते, फिल्म पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए।