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फ्रांस में भारत के खिलाफ ज़हर उगलने वाले प्रोफेसर क्रिस्टोफ जैफरलॉट से मिले राहुल गाँधी, हिन्दू संगठनों को बताता है ‘हिंसक’

राहुल गाँधी के साथ क्रिस्टोफ जैफरलॉट (फोटो साभार: X/ @INCIndia)
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी यूरोप दौरे पर हैं। इस बीच उन्होंने 8 सितंबर को पेरिस की एक यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित किया। इस दौरान लेखक और कॉलमिस्ट क्रिस्टोफ जैफरलॉट उनके साथ मंच पर नजर आया। क्रिस्टोफ जैफरलॉट भारत और हिंदुओं के खिलाफ नफरत उगलने के लिए कुख्यात रहा है। राहुल के इस कार्यक्रम की फोटो कांग्रेस के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट्स से शेयर की गई थीं।
अब प्रश्न यह है संविधान की शपथ लेने वाले राहुल भारत विरोधियों से क्यों मिल रहे हैं? क्या संविधान देश विरोधियों से साठगांठ की इजाजत देता है? दूसरे, यह कि चीन से किए गुप्त समझौते का कब संज्ञान लिया जाएगा? यदि इसी तरह कोई गुप्त समझौता बीजेपी ने किया होता, सड़क से लेकर संसद तक हंगामा किया जा होता, संसद की कार्यवाही बाधित की जा रही होती। क्या देश को उस गुप्त समझौते की जानकारी नहीं लेनी चाहिए? आखिर केंद्र सरकार उस गुप्त समझौते पर क्यों चुप है? क्या देश विरोधियों से मिलने वाला कोई भी नेता और उसकी पार्टी वोट की हक़दार है? 

भारत विरोधी बयानों को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाले राहुल गाँधी के साथ मंच पर नजर आया क्रिस्टोफ जैफरलॉट का भारत के खिलाफ लिखने का लंबा इतिहास रहा है। वह आमतौर पर केंद्र की भाजपा सरकार और उसके नेतृत्वकर्ता प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करता रहा है।

हिंदू संगठनों का विरोध

क्रिस्टोफ जैफरलॉट ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को भारत की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ करार दिया था। उसने CAA की तुलना इजरायल और वहाँ के यहूदियों से तुलना करते हुए कहा था, “इस तरह का दृष्टिकोण जातीय और धार्मिक आधार पर किसी भी देश की दृष्टि को दर्शाता है। जहाँ बहुसंख्यक आबादी के अलावा बाकी सभी दोयम दर्जे की जिंदगी जीने को मजबूर होते हैं। यह इजरायल की तरह है, जहाँ यहूदी बहुतायत में हैं।”
दिलचस्प बात यह है कि अल्पसंख्यकों को (मुस्लिमों को छोड़ कर) नागरिकता देने के भारतीय कानून में जैफरलॉट को समस्या तो नजर आती है। लेकिन, भारत के 3 पड़ोसी इस्लामी मुल्कों में अल्पसंख्यकों खासतौर से हिंदुओं की दयनीय स्थिति दिखाई नहीं देती।
क्रिस्टोफ जैफरलॉट हिंदुओं में आत्मसम्मान की कमी होने और भाजपा नेताओं पर मुस्लिम जनसंख्या विस्फोट का ‘झूठ’ फैलाने का भी आरोप लगाता रहा है। उसे यह नहीं दिखता कि भारत में मुस्लिम आबादी 20 करोड़ की दहलीज पर खड़ी है। वहीं पड़ोसी मुल्कों में हिंदू शून्य की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं, वह भारत विभाजन के लिए अंग्रेजों को तो जिम्मेदार ठहराता है। लेकिन, इस्लामिक चरमपंथियों और मुस्लिम लीग जैसे कट्टरपंथी संगठनों के नापाक इरादों का जिक्र करना भूल जाता है।
राहुल गाँधी ने व्यक्ति के साथ मंच साझा किया वह भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश करते और निर्दोष लोगों की हत्या करने वाले आतंकियों को दोषी नहीं ठहराता। बल्कि वह यह कहता है कि भारत में 1993 से लेकर 2008 तक जो आतंकी हमले हुए उसका फायदा भाजपा को मिला। वह कहता है कि भाजपा ने भय की राजनीति कर चुनाव जीता है। क्रिस्टोफ जैफरलॉट को दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खुद को ‘संघ परिवार’ कहने से भी समस्या है।
जैफरलॉट ने राष्ट्रवादी संगठन ‘बजरंग दल’ पर हिंसा करने, चर्च और मुस्लिमों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया। वह हिंदुओं द्वारा किए गए किसी पलटवार का हर बार जिक्र करता है। लेकिन, इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा आए दिन हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा और मिशनरी चर्च के माध्यम से हिंदुओं के खिलाफ रची जा रही साजिशों पर चुप्पी साध लेता है।

मोदी पर हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साल 2014 और 2019 में केंद्र में भाजपा सरकार सत्ता में है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि पीएम मोदी के केंद्र की सत्ता में आने से पहले और बाद में विरोधियों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। इनमें से एक नाम क्रिस्टोफ जैफरलॉट का भी है। भाजपा की लगातार जीत पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए उसने ‘मोदीज इंडिया: हिंदू नेशनलिज्म एंड द राइज ऑफ एथनिक डेमोक्रेसी’ नामक अपनी पुस्तक में लिखा है, “पिछले दो दशकों में नरेंद्र मोदी की वजह से हिंदू राष्ट्रवाद को एक तरह के राष्ट्रीय लोकप्रियता के साथ जोड़ा गया है। इससे चुनावों में पहले गुजरात में और फिर भारत में बड़े पैमाने पर सफलता मिली है।”
उसने अपनी इस किताब में भारतीय जनता पार्टी पर विकास का वादा करने के साथ ही जातीय-धार्मिक आधार पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण कर देश की जनता को बहकाने का आरोप लगाया। हालाँकि, जैफरलॉट ने अपनी किताब में पीएम मोदी की लोक-कल्याणकारी, विकासवादी और महत्वाकांक्षी योजनाओं डिजिटल इंडिया, जन धन योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र नहीं किया। क्योंकि सच्चाई यह है कि देश की जनता अब किसी बहकावे की जगह विकास के नाम पर वोट देती है।
क्रिस्टोफ जैफरलॉट ने दावा किया है कि उसने पीएम मोदी को लेकर भारतीयों का इंटरव्यू किया है। इस इंटरव्यू के आधार पर उसने लिखा है, “मोदी सरकार ने भारत को लोकतंत्र के एक नए रूप में बदल दिया है। यह एक तरह का जातीय लोकतंत्र है, जिसमें बहुसंख्यक समुदाय के साथ देश में समानता का व्यवहार होता है। लेकिन मुस्लिम और ईसाइयों को दोयम दर्ज के नागरिकों की तरह ट्रीट किया जाता है।” जैफरलॉट ने दावे तो बड़े-बड़े किए हैं। लेकिन, भारत के अन्य विरोधियों की तरह उसके पास भी इस दावे की पुष्टि के लिए कोई सबूत नहीं है। इसके अलावा, अनुच्छेद-370 को लेकर सुनवाई में देरी के लिए उसने भारत की न्यायपालिका पर लांछन लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट पर भी हमला बोला।

डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व इंवेट

साल 2021 में आयोजित ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व इंवेट’ में क्रिस्टोफ जैफरलॉट को बतौर वक्ता आमंत्रित किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदुत्व के खिलाफ लड़ना और हिंदू धर्म को टारगेट करना था। जैफरलॉट ने इस कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदुत्व हमला किया था।

पेरिस: फ़्रांस ने की मृतक शिक्षक को सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ला लिगियन डी ऑनर’

भारत में तुष्टिकरण के चलते छद्दम धर्म-निरपेक्षी जनता को वास्तविकता से भ्रमित करने वीर सावरकर, नाथूराम गोडसे, आरएसएस, हिन्दू महासभा और अन्य हिन्दू संगठनों को बदनाम करने सेकुलरिज्म के नाम पर इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने के लिए "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम हिन्दुत्व को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। 
इतना ही नहीं, अयोध्या में हिन्दू और मुसलमानों को गुमराह करने खुदाई में मिले मंदिर के मिले सबूतों को कोर्ट से छुपा लिया और खानापूर्ति के लिए मात्र एक खम्बा कोर्ट में दिखा दिया, राम और रामायण को काल्पनिक बता देने से भी गुरेज नहीं किया। यदि स्थिति विपरीत होती यानि इस्लाम के विरुद्ध ऐसा हलफनामा कोर्ट में दे दिया होता, हालत काबू से बाहर होते। लेकिन भारत में कुर्सी के भूखे नेता और पार्टियां कुर्सी की खातिर हिन्दू को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। 
कुर्सी की खातिर किस तरह भारत में अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानियों, बांग्लादेशियों और रोहिंग्यों को बचाने नागरिकता संशोधक कानून के विरुद्ध हुए धरनों और प्रदर्शनों की आड़ में हिन्दुत्व के विरुद्ध नारेबाजी हुई, किसी से नहीं छुपा। और बेशर्म हिन्दू भी हिन्दुत्व विरोधी नारों में इन अराजकों का साथ दे रहे थे। लेकिन फ्रांस में किस तरह जेहादी द्वारा के शिक्षक की हत्या करने पर इस्लामिक संगठनों के विरुद्ध कार्यवाही करने के साथ-साथ उस मृतक शिक्षक को मरोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान से आभूषित किया जा रहा है। क्योंकि वहां कोई #intolerance, #freedom of express, आदि सरकार के विरुद्ध गैंग नहीं है। भारत में तुष्टिकरण कर रहे समस्त नेताओं और पार्टियों को फ्रांस से शिक्षा लेनी चाहिए। 
पेरिस में आतंकी घटना में जान गँवाने वाले 47 वर्षीय इतिहास के शिक्षक सैमुअल पैटी (Samuel Paty) को फ्रांस ने अपना सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार देने का फैसला किया है। यह घोषणा मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) की सुबह बीएफएम टीवी को दिए एक इंटरव्यू में वहाँ के शिक्षा मंत्री जीन-मिशेल ब्लैंकर (Jean-Michel Blanquer) ने की है। इस सर्वोच्च पुरस्कार का नाम ‘ला लिगियन डी ऑनर’ (Legion d’Honneur) है।

पेरिस में अक्टूबर 16, 2020 को सैम्युल पैटी नामक शिक्षक की हत्या की गई थी। उनकी गलती बस ये थी कि उन्होंने क्लास के दौरान ‘शार्ली एब्दो’ अख़बार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया, जिसके बाद एक लड़के ने दिन दहाड़े उनका सिर कलम कर के उनकी हत्या कर दी। बाद में पुलिस ने भी हत्यारे छात्र को मार गिराया।

पड़ताल में पता चला कि उसने एक किचेन नाइफ का प्रयोग करते हुए शिक्षक का सिर कलम किया। पुलिस ने जानकारी दी कि इस घटना की जाँच एंटी-टेरर जज द्वारा की जा रही थी। पुलिस ने बताया है कि हत्यारा मॉस्को चेचन्या मूल का मुस्लिम था।

मामले की जाँच में जुटी पुलिस ने अब तक इस संबंध में 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 4 स्कूल के छात्र हैं। इसके अतिरिक्त पुलिस ने सोमवार को 40 जगहों पर रेड भी मारी है। शिक्षक की हत्या की निंदा हर ओर से की जा रही है। शार्ली एब्दो की ओर से भी मृतक के परिवार के साथ संवेदनाएँ व्यक्त की गई।

शिक्षक की हत्या करने वाले ‘छात्र’ की उम्र महज 18 साल थी। रिपोर्ट्स में घटना को लेकर बताया गया कि 47 वर्षीय इतिहास-भूगोल के प्रोफेसर स्कूल में क्लास ले रहे थे। फ्राँस में ये दोनों ही विषय साथ में ही पढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा उन्हें ‘नैतिक और व्यवहार विषयक शिक्षा’ का भी दायित्व सौंपा गया था। क्लास में सारे विद्यार्थी लगभग 12-14 वर्ष के थे। क्लास के दौरान ही शिक्षक ने ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ (FoE) के बारे में समझाते हुए ‘शार्ली एब्दो’ में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया।

इसके बाद कई छात्रों के परिवार इससे नाराज हो गए और उन्होंने पुलिस में औपचारिक शिकायत दायर की। ‘नाराज’ आरोपित ने उक्त शिक्षक पर हमला बोल दिया और उन्हें मार डाला। उसने हमले की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर भी अपलोड किया। स्थानीय पुलिस ने राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों को इस पर सूचित किया कि पेरिस सबअर्ब स्थित य्वेलिनेस कंफ्लॉस-सेंट-हॉरोनिन में एक लाश मिली है। ये इलाका पेरिस के नार्थ-वेस्ट में स्थित है।

इसके बाद पुलिस ने तत्काल हत्यारे का पीछा करना शुरू किया और उस पर कई गोलियाँ दागी गईं। पुलिस द्वारा कई बार चेतावनी देने के बावजूद उसने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया और उल्टा पुलिस को धमकी भी दी। उसने सुसाइड वेस्ट भी पहन रखा था, जिस कारण पुलिस को उस पूरे एरिया को सील करना पड़ा। शिक्षक का हत्यारा ‘अल्लाहु अकबर’ भी चिल्ला रहा था।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इस घटना पर रोष जताते हुए कहा था, “यह एक इस्लामी आतंकवादी हमला है। देश के हर नागरिक को इस चरमपंथ के विरोध में एक साथ आगे आना होगा। इसे किसी भी हालत में रोकना ही होगा क्योंकि यह हमारे देश के लिए बड़ा ख़तरा साबित हो सकता है।”

शिक्षक का गला रेतने के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों के विरुद्ध फ्रांस का सख्त एक्शन: 231 कट्टरपंथी किए जाएँगे देश से बाहर

इस्लामी कट्टरपंथी द्वारा शिक्षक का गला काटने की घटना के बाद फ्रांस ने इस तरह की समस्याओं का सामना करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। फ्रांस 231 विदेशी कट्टरपंथी नागरिकों को बाहर निकालने की तैयारी कर रहा है। फ्रांस सरकार की तरफ से होने वाली यह कार्रवाई कट्टरपंथ और आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में एक अहम कदम माना जा रहा है।

रायटर्स में प्रकाशित ख़बर में इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी गई है। फ्रांस सरकार में मंत्री गेरल्ड डरमानिन (Gerald Darmanin) ने कहा, “निष्कासन की यह कार्रवाई 47 वर्षीय इतिहास शिक्षक सैमुएल पैटी की गला काटकर हत्या करने के बाद की जा रही है। जिन्होंने पढ़ाने के दौरान कक्षा में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाए थे।” 

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्क्रों ने भी इस घटना पर रोष जताया था। उन्होंने कहा था, “यह एक इस्लामी आतंकवादी हमला है। देश के हर नागरिक को इस चरमपंथ के विरोध में एक साथ आगे आना होगा। इसे किसी भी हालत में रोकना ही होगा क्योंकि यह हमारे देश के लिए बड़ा ख़तरा साबित हो सकता है।” 

फ्रांस कट्टरपंथियों को कुछ इस तरह परिभाषित करता है, “इस तरह के लोग जो कट्टरता को बढ़ावा देने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। जो देश के बाहर जाकर आतंकवादी समूहों में शामिल होते हैं और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।” फ़ाइल ऑफ़ अल्टर्सफ़ॉर द प्रिवेंशन ऑफ़ टेररिस्ट अटैक्स (एफ़एसपीआरटी) की रिपोर्ट के अनुसार 231 विदेशी नागरिकों में से 180 कारावास में कैद हैं। इसके अलावा बचे हुए 51 को अगले कुछ घंटों में गिरफ्तार किया जाना था। एफ़एसपीआरटी की रिपोर्ट के तहत कुल 850 गैर क़ानूनी अप्रवासी पंजीकृत हैं। 

इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जो फ़िलहाल पूरी दुनिया में संकट का सामना कर रहा है : इमैनुएल मैक्क्रों, फ्रांस राष्ट्रपति

इस महीने की शुरुआत में फ्रांस के राष्ट्रपति ने फ्रांस के धर्म निरपेक्ष मूल्यों को कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों से सुरक्षित रखने की योजना का ऐलान किया था। इसके बाद उन्होंने कहा था कि इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जो फ़िलहाल पूरी दुनिया में संकट का सामना कर रहा है। हाल ही में मैक्रों ने कहा था कि उनकी सरकार दिसंबर में एक विधेयक (बिल) लेकर आएगी जो साल 1905 के एक क़ानून को और मज़बूत करेगा। 

यह क़ानून चर्च और स्टेट को अलग करता है जिससे देश में धर्म के प्रति उदासीनता बनी रहे। उन्होंने अपने भाषण में यहाँ तक कहा कि आगामी कुछ समय में इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा कि मज़हब, फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक क्षेत्र (पब्लिक सेक्टर) से दूर रहे। मैक्रों के मुताबिक़ यह सभी निर्णय कट्टरपंथ और अलगाववाद को रोकने के लिए लिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं फ्रांस के इमामों को फ्रांसीसी भाषा भी सीखनी होगी। उन्होंने कहा कि इस्लाम को विदेशी प्रभाव से मुक्ति पानी होगी।

मैक्रों ने कहा, “इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जिस पर पूरी दुनिया में संकट है, ऐसा सिर्फ हम अपने देश में नहीं देख रहे हैं।” इसके बाद उन्होंने युवाओं की शिक्षा पर भी ज़ोर दिया जिससे उन्हें धर्मनिरपेक्ष आदर्शों वाला बनाया जा सके। इसकी शिक्षा बच्चों को शुरूआती स्तर से या उनके स्कूल के समय से ही देनी होगी। उन्होंने इस बात के भी संकेत दिए कि फ्रांस इस्लाम को विदेशियों के प्रभाव से भी आज़ाद करेगा, इसके लिए मस्जिदों को मिलने वाली फंडिंग में सुधार किया जाएगा।

राष्ट्रपति मैक्रों ने यह बातें उस घटना के ठीक कुछ दिन बाद कही हैं जिसमें एक आदमी ने धारदार हथियार से दो लोगों पर हमला कर दिया था। घटना ठीक उस जगह पर हुई थी जहाँ कट्टरपंथी इस्लामियों ने साल 2015 में शार्ली हेब्दो के कर्मचारियों का नरसंहार किया था। फ्रांस की सरकार ने इस हरकत को भी इस्लामी आतंकवाद का नतीजा बताया था। साल 2015 में इस्लामी कट्टरपंथियों ने शार्ली हेब्दो के कार्यालय पर आतंकवादी हमला किया था जिसमें कई मशहूर कार्टूनिस्ट समेत कुल 12 लोगों की मौत हो गई थी।

भारत के कारण पाकिस्तान को FATF दे सकता है बड़ा झटका

Pakistan FM
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी   तस्वीर साभार: BCCL
पुलवामा में आतंकी हमला पहली बार नहीं हुआ, इससे पहले भी इतने वर्षों से भारत के किसी न किसी हिस्से में हमले करते रहे थे, जिस पर पाकिस्तान और भारत में रह रहे, पाकिस्तान और आतंकवादी समर्थक जश्न मनाते थे। लेकिन कोई आतंकवादियों और उनके संरक्षणों पर नकेल डालने की बजाए मगरमछी आँसू ही बहाते रहे। वर्तमान प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने कई बार समझाने का प्रयत्न किया, परन्तु किसी की कान में जूं तक नहीं रेंगा। अंत में मोदी को आतंकवादियों और उनको संरक्षण देने वालों पर चाबुक चलाने से सबकी नींद हराम हो गयी। आतंकवादियों को संरक्षण देने वालों को विश्व स्तर पर घेरना शुरू कर दिया। परिणामस्वरुप, आज विश्व में पाकिस्तान अकेला पड़ गया और भारत में पल रहे उनके हिमायतियों की भी हवा निकलनी शुरू हो गयी।     
भारत की लॉबिंग की वजह से पाकिस्तान को वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) द्वारा काली सूची में डाला जा सकता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अप्रैल 2 को यह बात कही। कुरैशी ने कहा कि यदि पाकिस्तान एफएटीएफ की निगरानी सूची में रहता है तो उसे सालाना 10 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। 10 अरब डॉलर भारतीय रुपए में 70 हजार करोड़ रुपए होते हैं। 1 डॉलर की कीमत 70 रुपए।
पेरिस के एफएटीएफ ने पिछले साल जून में पाकिस्तान को निगरानी वाले देशों की सूची में डाला था। इस सूची में वे देश शामिल हैं जो मनी लांड्रिंग तथा आतंकवाद के वित्तपोषण की चुनौतियों से निपटने में कमजोर माने जाते हैं।
एफएटीएफ आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लांड्रिंग पर अंकुश के लिए काम कर रहा है। उसने पाकिस्तान से देश में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के परिचालन का नए सिरे से आकलन करने को कहा था। पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद से पाकिस्तान पर जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों पर अंकुश लगाने के लिए भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव है। 
कुरैशी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि विदेश विभाग यह गणना कर रहा है कि यदि पाकिस्तान को एफएटीएफ की खाली सूची में डाला जाता है तो कितना नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि भारत इसके लिए लॉबिंग कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का आकलन है कि यदि उसे निगरानी सूची में कायम रखा जाता है तो सालाना 10 अरब डॉलर का नुकसान होगा।