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कर्नाटक : ठेके वाली नौकरियों में भी अब आरक्षण, कांग्रेस सरकार ने बिना चर्चा पास किया बिल


कांग्रेस शुरू से ही विवाद खड़े करने वाली पार्टी है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार अब ठेके वाली नौकरियों में भी आरक्षण लागू करेगी। कांग्रेस  सरकार ने इसके लिए कर्नाटक विधानसभा में बिल भी पास कर दिया है। सरकार में ठेके पर रखे जाने वाले लोगों को अब आरक्षण के आधार पर रखा जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस सरकार ने गुरुवार (25 जुलाई, 2024) को राज्य विधानसभा में 6 बिल बिना चर्चा पास करवाए। इस दौरान भाजपा और जेडीएस ने विधानसभा में चर्चा की माँग की। इन 6 बिल में एक राज्य की ठेके वाली नौकरियों में SC/ST और OBC को आरक्षण का प्रावधान करने वाला बिल भी था।

यानी अब जो भी लोग सरकार के लिए ठेके पर काम करेंगे, उनको भी आरक्षण के आधार पर भर्ती किया जाएगा। कर्नाटक में वर्तमान में लगभग 55,000 लोग सरकार के लिए ठेके पर काम करते हैं। इनकी भर्ती निजी रोजगार एजेंसियाँ करती हैं।

अब इन एजेंसियों को लोगों की भर्ती में आरक्षण लागू करना पड़ेगा। हालाँकि, इन भर्तियों के जरिए जिन लोगों को नौकरियाँ दी जाएँगी, उनको स्थायी ना करने की बात भी बिल में कही गई है। इसी के साथ इन नौकरियों की सँख्या विभाग के 10% से अधिक ना होने की बात भी बिल में कही गई है।

कर्नाटक सरकार के इस बिल के पास किए जाने से पहले मई, 2024 में इसको लेकर कुछ दिशानिर्देश भी जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि जो नौकरियाँ 45 दिनों से कम के लिए दी जाएंगी, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा। इसके अलावा आरक्षण वाली भर्तियों में कम से कम 33% महिलाएँ भर्ती की जानी चाहिए।

कर्नाटक विधानसभा में इस बिल के पास होने के दौरान JDS और भाजपा चर्चा की माँग करते रहे। JDS और भाजपा ने इस दौरान कर्नाटक सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। भाजपा ने MUDA, वाल्मीकि और अन्य मामलों की जाँच की माँग भी की।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार का आरक्षण को लेकर एक महीने के भीतर यह दूसरा निर्णय है। इससे पहले कर्नाटक कैबिनेट ने निर्णय लिया था कि राज्य की प्राइवेट नौकरियों में कर्नाटक के लोगों को 50-75% आरक्षण मिलेगा। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने ऐलान किया था कि कनिष्ठ नौकरियों में 75% जबकि वरिष्ठ नौकरियों में 50% आरक्षण कन्नड़ भाषियों को मिलेगा।

हालाँकि, IT समेत अन्य उद्योगों के भारी विरोध और राज्य से बाहर जाने की चेतावनी के बाद इस निर्णय को स्थगित कर दिया गया था। कर्नाटक सरकार ने कहा था कि वह इस बिल को लेकर सबकी आशंकाओं का समाधान करेंगे।

कर्नाटक : कांग्रेसी सरकार द्वारा हिंदू मंदिरों की कमाई पर टैक्स लगाने वाले बिल को राज्यपाल ने किया नामंजूर: पूछा – दूसरे मजहबों पर क्यों नहीं?

      राज्यपाल थावरचंद गहलोत (बाएँ) और मुख्यमंत्री सिद्दारमैया (दाएँ) (साभार :News18 & The South First)
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मंदिरों की कमाई पर टैक्स लगाने वाले कानून पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है। राज्यपाल ने पूछा है कि सिर्फ मंदिरों पर ही टैक्स क्यों लगाया जा रहा है, अन्य मजहबी स्थलों को ऐसे कानूनों से बाहर क्यों रखा गया है? यह कानून कर्नाटक की कांग्रेस सरकार लाई है और इसे हाल ही में राज्य की विधायिका से पास किया गया था।

रिपब्लिक की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्यपाल थावरचंद गहलोत को यह बिल उनकी स्वीकृति के लिए भेजा गया था। उन्होंने इसे मंजूरी देने से मना कर दिया। उन्होंने इस कानून को एक धर्म के साथ पक्षपात करने वाला बताया है। राज्यपाल ने पूछा कि सिर्फ मंदिरों पर ही टैक्स क्यों लगाया जा रहा है? राज्यपाल ने कहा है कि नए कानून के अंतर्गत सभी धार्मिक स्थलों पर टैक्स लगाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा है कि क्या इस कानून के अंतर्गत अन्य धार्मिक स्थल भी टैक्स के दायरे में लाए जाएँगे?

राज्य की कांग्रेस सरकार फरवरी माह में राज्य के हिन्दू मंदिरों की कमाई पर टैक्स लगाने वाला यह कानून लाई थी। इस कानून को ‘कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक 2024’ नाम दिया गया था।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार इस विधेयक के जरिए वार्षिक 1 करोड़ रूपए से अधिक दान पाने वाले मंदिरों से उनकी कमाई का 10% जबकि 10 लाख से 1 करोड़ रूपए तक दान पाने वाले मंदिरों से 5% टैक्स वसूलना चाहती थी।

इस कानून को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने फरवरी, 2024 में राज्य विधानसभा में पास करवा लिया था। हालाँकि, कर्नाटक की विधान परिषद में इस विधेयक को भाजपा और जेडीएस के गठबंधन ने गिरा दिया था और पास नहीं होने दिया था।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 1 मार्च, 2024 को कर्नाटक विधान परिषद में यह विधेयक दुबारा पेश करके पास करवा लिया था। इस दिन भाजपा और जेडीएस के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया था। इस विधेयक के दोनों सदनों से पास होने के बाद इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था।

अब इसे राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मंजूर करने से मना कर दिया है और साथ ही सरकार से प्रश्न भी पूछे हैं। इससे पहले विधेयक के लाए जाने पर राज्य की विपक्षी पार्टी भाजपा और जेडीएस ने भी प्रश्न उठाए थे कि कांग्रेस सरकार मंदिरों से कमाई क्यों करना चाहती है?