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BSP नेता मुख्तार अंसारी के बेटे के घर में छापेमारी, 6 विदेशी बंदूकों सहित 4431 कारतूस बरामद

अब्बास अंसारी
अब्बास अंसारी के घर से मिले कई अवैध हथियार
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अभी दो ही दिन पूर्व लेख शीर्षक "जनसेवा के नाम लूट मचाते नेता" लिखा था, लेकिन अभी प्राप्त समाचार के अनुसार नेता गुण्डागर्दी भी करते हैं, क्या ऐसे नेताओं से देश अथवा जनसेवा की कामना की जा सकती है? वैसे अक्सर जमीन से जुड़े मुद्दों पर लिखता ही रहता हूँ, उसमें से कुछ का लिंक नीचे दे रहा हूँ।  
लगभग तीन दशक निस्स्वार्थ भाव से जनसेवा एवं राजनीति में आते थे, परन्तु आज स्थिति एकदम विपरीत है। इसमें दोषी राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ चुनाव आयोग भी बराबर के दोषी हैं। 
चुनाव आयोग आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के नामांकन रद्द क्यों नहीं करता?
अगर किसी पार्टी ने सत्ता के लालच में किसी आपराधिक छवि वाले को टिकट दिया है, चुनाव ऐसे अपराधियों के नामांकन रद्द क्यों नहीं करता? क्या चुनाव आयोग जनता की बजाए राजनीतिक दलों के हित में काम करता है? चुनाव में ऐसे ही लोग बूथ कैप्चर कर भरी मतों से जीत कर जनता और सरकार पर अपना राज चलाते हैं। ऐसे में एक और ज्वलंत प्रश्न होता है जब आपराधिक छवि वाले सरकारी सदन पहुँच सकते हैं, फिर आपराधिक छवि वाले सरकारी नौकरी में क्यों नहीं नियुक्त हो सकते? फिर किस कारण आपराधिक छवि वालों को सरकारी नौकरी क्यों नहीं मिलती? यह बात इस बात को भी प्रमाणित करती है कि देश में दो कानून चलते हैं, एक जनमानस के लिए और दूसरा राजनीतिक पार्टियों के लिए। 
उत्तर प्रदेश के बहुजन समाजवादी पार्टी के नेता मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के दिल्ली स्थित घर पर लखनऊ पुलिस ने गुरुवार (अक्टूबर 17, 2019) को छापेमारी करके 6 बंदूक और 4,431 कारतूस बरामद किए।
बरामद हथियारों की कीमत लाखों में बताई जा रही है। इनमें इटली, ऑस्ट्रिया और स्लोवेनिया मेड रिवॉल्वर, बंदूक और कारतूस शामिल हैं। इसके अलावा अब्बास के पास से मैंग्नम की रायफल, अमेरिका मेड रिवॉल्वर, ऑस्ट्रिया की स्लाइड और ऑटो बोर पिस्टल भी इस छापेमारी में जब्त हुई है।
जानकारी के मुताबिक अभी हाल ही अब्बास पर एक लाइसेंस पर एक से ज्यादा हथियार खरीदने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसे यूपी पुलिस ने महानगर कोतवाली में दर्ज किया था। इसके अलावा उस पर फर्जी तरीके से आर्म्स लाइसेंस को दिल्ली ट्रांसफर कराने का भी मुकदमा दर्ज था।

पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट
इन शिकायतों के आधार पर ही लखनऊ पुलिस ने अब्बास के दिल्ली में वसंत कुंज स्थित घर पर छापेमारी की और विदेशी हथियारों के साथ 4,431 के करीब कारतूसें बरामद कीं। इसके अलावा कई अन्य प्रकार के संदिग्ध उपकरण भी अब्बास के घर से बरामद हुए हैं।
मामले से संबंधित जारी प्रेस नोट के अनुसार पुलिस ने मुख्तार अंसारी के बेटे पर धारा 420, 467, 468, 471, और 30 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इन नोट में हथियार बरामदगी के संबंधित सभी जानकारी दी गई हैं।
इसके अनुसार पुलिस ने इस छापेमारी में इटली से लाई गई एक 12 बोर की डबल बैरल, स्लोवेनिया से लाई गई 12 बोर सिंगल बैरल गन, इंडियन आर्म्स कॉर्प लखनऊ से खरीदी हुई 300 बोर रायफल, दिल्ली से खरीदी हुई 12 बोर डबल बैरल गन, शस्त्रागार मेरठ से खरीदी गई 357 बोर रिवॉल्वर Ruger, GP100 भी शामिल है।
उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार अब्बास अंसारी ने साल 2012 में लखनऊ से ही डबल बैरल बंदूक का लाइसेंस प्राप्त किया था। इसके बाद उसने इसी के आधार पर अन्य हथियारों का भी सौदा किया और पुलिस को सूचित किए बिना दिल्ली पहुँच गया।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आज हर कांग्रेस विरोधी कांग्रेस का विरोध करता नज़र आता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि कांग्रेस...



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मतदान वाले दिन सड़कों पर आम दिनों की अपेक्षा इतनी अधिक भीड़ होती है कि जनता को इधर से उधर जाने में बड़ी कठिनाई होती है। ....

लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद अब्बास के ख़िलाफ कार्रवाई करने के लिए विभिन्न टीमें गठित की गई और जानकारी के आधार पर अब्बास के निवास स्थान पर छापेमारी हुई। जिसमें अब्बास पर लगाए आरोप सही मिले।

उत्तर प्रदेश : बिजनौर में मदरसे से 5 पिस्टल और कारतूस बरामद, 6 लोग गिरफ्तार

क्या उत्तर प्रदेश सरकार इन दंगों
की फाइलों को भी खोलेगी?
बिजनौर में एक मदरसे से हथियार और कारतूस बरामद हुए हैं। हथियार की बरामदगी के बाद मदरसे की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने इस मदरसे में छापा मारकर यहां से पांच पिस्टल और सात कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस ने यहां से छह लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि मदरसे में दवा के डिब्बों में हथियार एवं कारतूस छिपाकर रखे गए थे। 
पुलिस अधिकारी ने बताया, 'हमें जानकारी मिली कि मदरसे में असमाजिक और संदिग्ध लोग आते हैं। ये लोग कुछ असमाजिक कार्य और कुछ लेन-देन भी करते हैं। इस जानकारी पर हमने उस मदरसे की तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक कमरे में दवाओं के कम से कम 100 डिब्बे मिले। इन्हीं डिब्बों में हथियार छिपाकर रखा गया था। मदरसे में मौके पर छह लोग भी मिले जिन्हें हिरासत में लिया गया। इनके पूछताछ करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।'
हिरासत में लिए गए छह लोगों में से दो व्यक्ति लूट और हत्या के मामले में आरोपी हैं। इनमें से एक व्यक्ति बिहार का रहने वाला है। इस मदरसे में बिहार के कुछ छात्रों ने पढ़ाई भी की है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में पाया गया है कि मदरसे के जरिए हथियार तस्करी का एक रैकेट काम कर रहा था। इन हथियारों को बिहार से लाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में उन्हें 30 से 50 हजार रुपए के बीच बेचा जा रहा था। पुलिस का कहना है कि इस हथियारों की तस्करी में संलिप्त लोगों के लिए यह मदरसा छिपने की एक जगह बना हुआ था।
योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद अवैध एवं अनुचित रूप से चल मदरसों पर कार्रवाई की गई। पिछले ढाई साल के दौरान योगी सरकार ने करीब 20 हजार मदरसों की जांच की और नियमों के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर इनमें से 2600 से ज्यादा मदरसों को बंद किया गया। यह मदरसा पिछले 10 सालों से अवैध रूप से चल रहा था। ऐसे में सवाल है कि स्थानीय पुलिस-प्रशासन की इस मदरसे पर नजर क्यों नहीं पड़ी। मदरसे से हथियार की बरामदगी के बाद स्थानीय पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में आती है।
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद देश विरोधी एवं अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई तेज हुई है। गैर-कानूनी में संलिप्त मदरसों पर जरूर कार्रवाई होनी चाहिए। मदरसों की भूमिका पर पहले भी सवाल उठे हैं।



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| 5 pistols,7 cartridges were seized during a raid at a UP madrassa. Listen in to the clerics who choose to downplay the threat. |
मौलवी मुफ्ती मुकर्रम ने कहा, 'मदरसे से हथियारों का कोई संबंध नहीं। मदरसों में तालीम दी जाती है। हो सकता है कि यह किसी की साजिश हो। यह भी हो सकता है कि इस मदरसे को बदनाम करने के लिए किसी ने कोई हरकत की हो। किसी भी मदरसे का आतंकवाद से कोई ताल्लुक नहीं है।' मौलवी साजिद रशीदी ने कहा कि ये हथियार मदरसे तक कैसे पहुंचे इसकी जांच होनी चाहिए। रामनवमी के दौरान हथियार लहराए जाते हैं वे भी तो अवैध हैं, उन पर सवाल क्यों नहीं उठता।