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गाज़ा और फिलिस्तीन पर सियापा करने वाले हिन्दू विरोधी ‘No, No, No’ बांग्लादेशी हिंदुओं की हत्या पर सवाल पर प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर भागे जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल

                पत्रकार से बांग्लादेशी हिंदुओं से जुड़ा सवाल ना पूछने को कहते जयराम (साभार: X/INC India)

बांग्लादेश में हिंदू इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालने से लेकर गोलीबारी और आग लगाए जाने तक हिंदुओं को मिटाने की हर साजिश मोहम्मद युनूस के राज में कट्टरपंथी कर रहे हैं। गाजा-फिलिस्तीन से लेकर दुनियाभर के मुद्दे पर खुलकर संसद तक में बोलने वाली कॉन्ग्रेस से इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछा गया तो उसके नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर ही भाग गए।

शनिवार (3 जनवरी 2025) को कांग्रेस नेता जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल VB-G RAM G बिल को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए थे। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिर में एक पत्रकार ने कांग्रेस नेताओं से बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं को लेकर प्रतिक्रिया जाननी चाही तो दोनों नेता बिना जवाब दिए उठकर चले गए। यहाँ तक की कांग्रेस ने अपने यूट्यूब चैनल से उस हिस्से को भी हटा दिया है जहाँ पर दोनों नेताओं से यह सवाल पूछा गया था। हालाँकि, पार्टी के X अकाउंट पर वीडियो के आखिरी 30 सेकेंड में यह हिस्सा अब भी मौजूद है।

इस पर बीजेपी ने कड़ा रुख अपनाया है और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने X पर दोनों नेताओं के जाने का वीडियो शेयर करते हुए कहा, “वे गाजा के लिए रोते हैं लेकिन ढाका में हिंदुओं की हत्याओं को सही ठहराते हैं। जब जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल से इस्लामवादियों द्वारा बांग्लादेशी हिंदुओं पर की गई क्रूरता के बारे में पूछा गया, तो वे भाग गए।”

पूनावाला ने आगे कहा, “वे मुसलमानों, ईसाइयों और फिलिस्तीनियों के लिए लगातार रोते हैं लेकिन हिंदुओं के लिए नहीं! असल में दिग्विजय सिंह और अन्य लोगों ने हत्याओं को सही ठहराया। उन्होंने CAA का भी विरोध किया था! वे हिंदू विरोधी हैं।”

बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने X पर अपने पोस्ट में लिखा, “जब बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत पर सवाल पूछा गया, तो जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल जवाब देने के बजाय वहाँ से उठकर चले गए। सोचने वाली बात है कि अगर यही सवाल गाजा को लेकर होता, तो बड़ा हंगामा होता, लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस होतीं और बयानबाजी की बाढ़ आ जाती।” कांग्रेस की इस खामोशी को लेकर सोशल मीडिया पर ही जमकर पार्टी की आलोचना हो रही है।

'अंग्रेजों' से खतरनाक रहा "कांग्रेस का शासन" ।  हिंदुओं के खिलाफ एक से बढ़कर एक, कई काले कानून लाये गये। हिन्दूओं को कमजोर करने के लिए लिया संविधान का सहारा .....

1- दूरदर्शन से सत्यम शिवम सुंदरम श्लोक हटवाया कांग्रेस ने

2- केंद्रीय विद्यालय से 'असते मां सद्गमय' का श्लोक हटवाया कांग्रेस ने

3- वंदे मातरम को राष्ट्रगान बने नहीं दिया कांग्रेस ने

4- किसी भी रैली में भारत माता की जय वंदे मातरम के नारे लगे नहीं दिया कांग्रेस ने

5- 30000 सिखों का हत्याकांड करवाया कांग्रेस ने

6- इमरजेंसी लगवाई कांग्रेस ने

7- नसबंदी करवाई सिर्फ हिंदुओं की कांग्रेस ने

8- बाल विवाह पर रोक लगाई सिर्फ हिंदुओं की कांग्रेस ने

9- राम को काल्पनिक बताया कांग्रेस ने

10- रामसेतु को जोड़ने वाले को काल्पनिक बताया कांग्रेस ने

11- हज को सब्सिडी दिया कांग्रेस ने

12- अमरनाथ मंदिर पर टैक्स लगाया कांग्रेस ने

13- सोमनाथ मंदिर का निर्माण करने वाले वल्लभभाई पटेल का विरोध किया कांग्रेस ने

14- मंदिर का उद्घाटन करने पर राजेंद्र प्रसाद का विरोध किया कांग्रेस ने

15- हिंदुओं को हम दो हमारे दो का चुना चटाए कांग्रेस ने

16- साधु संतों और गौरव गौ रक्षा पर गोलिया सलाई कांग्रेस ने

17- आतंकी के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खुलवाया कांग्रेस ने

18- 26/11 के पीछे 11 हिंदुओं की साजिश बताई कांग्रेस ने

19- आधा कश्मीर पाकिस्तान को दे दिया कांग्रेस ने

20- सिंधु नदी का 80% पानी पाकिस्तान को दे दिया कांग्रेस ने

21- लाखों घुसपैठियों को भारत में बसाया कांग्रेस ने

22- किताबों में सिर्फ मुगलों के बारे में पढ़ाया कांग्रेस ने

23- 2013 में कांग्रेस संसद में बिल लेकर आई थी कम्युनल वायरलेस बिल इसका मतलब था दंगा कोई भी करें जिम्मेदार सिर्फ हिंदू होगा कांग्रेस ने

24- पाकिस्तान और कांग्रेस दोनों एक दूसरे को पाल रहे थे दोनों मिलकर भारत व हिंदुओं का को मिटा रहे थे कांग्रेस ने

25- हिंदुओं की दो शादी पर रोक लगाई कांग्रेस ने

26- आर्टिकल 25 धर्म परिवर्तन को मान्यता दी गई

27- आर्टिकल 28 स्कूलों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी

28- आर्टिकल 30 मुसलमान और अल्पसंख्यक धार्मिक शिक्षा ले सकते हैं

29- HRCE -AXE- सरकार ने मंदिरों को सरकारी कब्जे में लिया

30- आरक्षण लाकर हिंदुओं को  बाटा कांग्रेस ने

31- सेकुलर शब्द जोड़ा गया संविधान में कांग्रेस ने

32- वक्त बोर्ड कानून लाया कांग्रेस ने

33- धर्म के आधार पर भारत के दो टुकड़े किए कांग्रेस ने

34- राहुल गांधी राहुल खान है फिर भी ब्राह्मण है

35- राहुल खान को सट्टा नहीं मिल रही है इसलिए देश में नफरत फैला रहा है

36- कांग्रेस सिर्फ पाकिस्तान रोंगिया और बांग्लादेशी घुसपैठ के लिए लड़ रही है हिंदुओं के लिए नहीं

37- गांधी देश के लिए नहीं मरे थे देश बचाने के लिए गांधी को मारा था नाथूराम गोडसे

38- हिंदू काफिर होता है और उसकी हत्या इस्लाम में जायज है यह पढ़ने के लिए कांग्रेस 70 सालों से मदरसा को पैसा दे रही है

39- जब पाकिस्तान के अंदर हिंदू यूनिवर्सिटी नहीं है तो भारत के अंदर मुस्लिम यूनिवर्सिटी किसने बनाई कांग्रेस ने

40- कांग्रेस की रैली में कांग्रेस का झंडा और पाकिस्तान का झंडा दिखाई देता है

और भी कई  काले कारनामे है कांग्रेस के फिर भी कई हिंदू कांग्रेस के साथ है धिक्कार है ऐसे हिंदुओं पर .....अगर देश बसाना है तो कांग्रेस को जड़ से खत्म करना होगा .....हिंदू एक हो जाओ अब तो जाग जाओ हिंदुओं.....70 सालों से हिंदुओं पर कांग्रेस ने अत्याचार किए हैं और कर रहे हैं फिर भी कई नपुंसक हिंदू कांग्रेस को वोट दे रहे हैं

वोट चोरी का दांव फिर उल्टा पड़ा, विदेशी ताकतों से जुड़े कांग्रेस के ‘युवराज’ की कॉन्फ्रेंस के तार

                                                                                                                                          साभार 
ऐसा लगता है जब तक देश से कांग्रेस की अर्थी नहीं निकल जाएगी, गाँधी परिवारभक्त कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे। अगर परिवारभक्तों जरा भी आत्मसम्मान बचा है तुरन्त परिवार को दरकिनार कर बिना रिमोट के चलने वाले को पार्टी को अध्यक्ष बनाएं। अगर राहुल और परिवारभक्त भारत को बांग्लादेश, नेपाल या फ्रांस बना देंगे, गलतफमी हैं। वैसे CAA विरोध में शाहीन बनाकर से लेकर तथाकथित किसान आंदोलन और पहलवानों के धरने से नाकाम कोशिश की जा चुकी है। हर षड़यंत्र बेनकाब होता गया।    

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जानबूझकर देश-विरोधी बयानबाजी करते हैं और फिर उनका दांव उल्टा पड़ जाता है। झूठ का प्रपंच रचकर वे मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन खुद ही घिर जाते हैं। पहले राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में वोट चोरी के खुलेआम आरोप लगाए और इसके पक्ष में सीएसडीएस के डेटा देकर यह साबित करने का प्रयास किया कि महाराष्ट्र चुनाव में कितनी धांधली हुई है। यह अलग बात है कि जिस CSDS के डेटा के आधार पर आरोप लगाए थे, उसी ने अपनी गलती और बड़ी गड़बड़ी के लिए माफी मांग ली। इसके बाद फिर राहुल गांधी पिछले माह प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वोट चोरी का नया शिगूफा लाए हैं। बेहद हैरतअंगेज बात है कि राहुल गांधी की इस वोट चोरी प्रेस कॉन्फ़्रेंस के पीछे Myanmar के ट्रेस मिले हैं। इसका कनेक्शन म्यांमार और काठमांडू तक से जुड़ने के बाद बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वोट चोरी का यह नैरेटिव भारत को बांग्लादेश-नेपाल जैसे हालात में धकेलने की साजिश है? क्या कोई विदेशी ताकतें भारत में लोकतंत्र को अस्थिर करने की प्लानिंग कर रही हैं? क्या राहुल गांधी महज एक Puppet Rahul बन चुके हैं, जिनके पीछे और लोग धागे खींच रहे हैं? यदि ऐसा है तो वोट चोरी का शोर सिर्फ एक बहाना है। राहुल समेत विदेशी ताकतों का असली मकसद भारत की मजबूत सरकार को अस्थिर करना है। यह अलग बात है वे इसमें कभी भी कामयाब नहीं हो पाएंगे।

महाराष्ट्र में वोट चोरी के आरोपों पर खुद घेरे में आ चुके हैं राहुल
आपको याद होगा कि राहुल गांधी ने पहले महाराष्ट्र में वोट चोरी के आरोप लगाए थे। फिर कर्नाटक में यही कहानी दोहराई गई। दोनों ही जगह उनकी कलई खुल गई। राहुल ने दावा किया था कि लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र की रामटेक विधानसभा में कुल 4,66,203 वोटर्स थे, जबकि विधानसभा चुनाव के दौरान यहां वोटर घटकर केवल 2,86,931 हो गए। यहां लोकसभा के बाद हुए विधानसभा चुनाव में वोटरों की संख्या में 38 फीसदी की कमी हुई। देवलाली विधानसभा सीट को लेकर भी ऐसे ही दावे किए।

CSDS कोओर्डिनेटर संजय कुमार ने माफी से राहुल का दावा फुस्स

उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान यहां 4,56,072 वोटर थे, जबकि विधानसभा चुनाव में ये घटकर 2,88,141 हो गए। यह अलग बात है कि जिस CSDS के आंकड़ों का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने बवंडर खड़ा किया था, उसके कोओर्डिनेटर संजय कुमार ने अपने ट्वीट को डिलीट करते हुए कहा कि महाराष्‍ट्र चुनाव को लेकर किए गए पोस्‍ट के लिए मैं ईमानदारी से माफी मांगता हूं। उन्होंने कहा कि पिछले साल हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव के आंकड़ों की तुलना करते समय गड़बड़ी हो गई थी। CSDS के ट्वीट डिलीट करते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) कांग्रेस पर हमलावर हो गई है। बीजेपी ने राहुल गांधी से भी माफी मांगने की बात की। इस पर कांग्रेस ने तर्क दिया कि उसने जरूर CSDS के आंकड़ों का इस्तेमाल किया, लेकिन अलग से रिसर्च से इकठ्ठे किए गए सबूतों के आधार पर अपने निष्कर्षों पर पहुंची थी।

अब राहुल गांधी के प्रजेंटेशन का ट्रेस Myanmar में भी मिले
अब कांग्रेस के अलग से किए रिसर्च की भी बात कर लेते हैं। पिछले माह 7 अगस्त को विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा वोट चोरी को फिर मुद्दा बनाते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेस की गई। इसमें उन्होंने बकायदा एक प्रजेंटेशन पेश किया। इन कॉंफ्रेंस में मीडिया के अलावा देश के कई बड़े सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर्स ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। लेकिन अब एक पड़ताल में यह दावा किया गया है कि राहुल गांधी के प्रजेंटेशन का ट्रेस Myanmar में मिले हैं, जो वाकई हर किसी के लिए बहुत shocking हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या वोट चोरी का शोर असल में जनता की लड़ाई है, या फिर कहीं से इंपोर्ट किया गया नैरेटिव है? क्या सचमुच लोकतंत्र खतरे में है या फिर TRP और टूलकिट चल रही है? राहुल गांधी सच में विपक्ष के नेता का फर्ज निभा रहे हैं, या बस विदेशी ताकतों के हाथों की कठपुतली बने हैं। उनके जॉर्ज सोरेस से कनेक्शन पहले ही एक्सपोज हो चुके हैं। एक ट्विटर हैंडल खुरपैंच ने अपनी इंवेस्टिगेशन में दावा किया है कि राहुल की प्रेस कांफ्रेंस के तार म्यांमार और काठमांडू तक जुड़े हैं? इसलिए वोट चोरी का नारा सिर्फ एक बहाना है, असली मक़सद भारत को अस्थिर करना है।

आइए, इस थ्रेड के माध्यम से जानते हैं कि क्या यह भारत के लोकतंत्र में संक्रमण की तरह फैल रही साज़िश है? क्या ये विदेशी वायरस हमारी राजनीतिक सेहत को कमजोर कर रहा है? खुरपैंच की तहकीकात में यह सामने आया है कि सबसे पहले कांग्रेस पार्टी ने http://RahulGandhi.in वेबसाइट पर वोट चोरी से सम्बन्धित PDFs Upload की।

इस ट्विटर हैंडल की टीम ने pdf फाइल का metadata निकाला, जिसमे यह पाया यह तीनों भाषाओं की PDF में Create Date में “Myanmar” का timezone +6:30 पाया गया। जो कि English pdf : 29 सेकेंड Hindi pdf : 31 सेकेंड Kannada pdf : 37 सेकेंड के अंतराल पे की गईं।

जिसकी एक Summary Table कुछ ऐसी है। जिसमे किस समय क्या हुआ है ये बताया गया है। इस pdf को adobe illustrator सॉफ्टवेयर द्वारा बनाया गया है ,जो की इस्तेमाल हो रहे कंप्यूटर का Timezone लेता है। Metadata से साफ़ पता चल रहा है जब ये फ़ाइल Export की गई उसका timezone +6:30 MMT है।

PDFs गूगल ड्राइव के लिंक के माध्यम से शेयर की गई हैं जिससे pdf के Metadata पे कोई फरक नहीं पड़ता है।

अब आते हैं VPN पे, इन pdfs को बनाने में जो सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल हुआ है वो system clock का timezone लेता है और VPN system के Timezone को नहीं चेंज कर सकता।

इस हैंडल की टीम की पड़ताल ने हैरान कर दिया। इस पूरे अभियान में Myanmar के डिजिटल ट्रेस मिले। अब सवाल यह उठता है क्या भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पड़ोसी मुल्क की दखलअंदाजी हो रही है? प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर सोशल मीडिया प्रचार तक, क्या यह सब पहले से तय स्क्रिप्ट थी? बड़े इन्फ़्लुएंसर्स ने क्या अनजाने में किसी बाहरी नैरेटिव को amplify किया? और अगर हां, तो इसका फायदा किसे मिल रहा है और नुकसान किसका हो रहा है? क्या वोट चोरी का नैरेटिव सिर्फ घरेलू राजनीति का हिस्सा है या इसके पीछे कोई और बड़ी साज़िश छुपी है?  

इस हैंडल की टीम की पड़ताल ने हैरान कर दिया। इस पूरे अभियान में Myanmar के डिजिटल ट्रेस मिले। अब सवाल यह उठता है क्या भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पड़ोसी मुल्क की दखलअंदाजी हो रही है? प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर सोशल मीडिया प्रचार तक, क्या यह सब पहले से तय स्क्रिप्ट थी? बड़े इन्फ़्लुएंसर्स ने क्या अनजाने में किसी बाहरी नैरेटिव को amplify किया? और अगर हां, तो इसका फायदा किसे मिल रहा है और नुकसान किसका हो रहा है? क्या वोट चोरी का नैरेटिव सिर्फ घरेलू राजनीति का हिस्सा है या इसके पीछे कोई और बड़ी साज़िश छुपी है?

  

बांग्लादेश-नेपाल के पैटर्न पर लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश
पिछले कुछ सालों में भारत के पड़ोसी मुल्कों (श्रीलंका,बांग्लादेश और अब नेपाल) में जो हालात हुए हैं उनमे एक सेट पैटर्न देखने को मिलता है जो कि बेहद चिंताजनक है। लेकिन कल नेपाल में जो हुआ और भारत में लोगों को खुश देखकर हमें चिंता महसूस हुई , क्या हमारा स्मूथ ट्रांजिशन ऑफ पावर से भरोसा उठता जा रहा है? हमें लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार को घेरते रहना चाहिए लेकिन हम किसी भी प्रकार की देशविरोधी गतिविधियों का पुरजोर विरोध करते हैं। देश की सरकार, विपक्षी पार्टियों,संस्थाओं और सुरक्षा एजेंसियों से हमारा निवेदन है कि मिल जुलकर देश को एक स्वस्थ्य लोकतंत्र बनाइए, उससे ही देश का भविष्य उज्ज्वल होगा।

कांग्रेस और राहुल की इस खुरपेंच का म्यांमार तक से संबंध
खुरपेंच की पड़ताल में यह शीशे की तरह साफ है कि कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ से जुड़ी जो पीडीएफ अपलोड कीं, उसके metadata में उन्हें मिला कि उस pdf को adobe illustrator सॉफ्टवेयर द्वारा बनाया गया है, जो की इस्तेमाल हो रहे कंप्यूटर का Timezone लेता है। Metadata से साफ पता चल रहा है जब ये फाइल Export की गई उसका timezone +6:30 MMT है। यानी म्यांमार का था। खुरपेंच के अनुसार ये पीडीएफ म्यांमार में बनाई गई हैं, इसलिए कांग्रेस की इस खुरपेंच का म्यांमार तक से संबंध है।

वोट चोरी को लेकर ट्विटर हैंडल की यह पड़ताल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। नेटिजंस इस बारे में और जानकारी एकत्र कर अपने विचार शेयर कर रहे हैं। एक ट्वीट में दावा किया गया है कि इसे सीएनएन की रिपोर्टर ने तैयार किया।

सवाल बड़ा है कि क्या लोकतंत्र बचाने की असली लड़ाई दिल्ली में हो रही है या फिर इसके तार विदेशी ताकतों के इशारे पर म्यामार और नेपाल के काठमांडू तक से जुड़े हुए हैं।

वोट चोरी में पहले भी राहुल गांधी का झूठ पकड़ा गया
इससे पहले भी राहुल गांधी का वोट चोरी को लेकर झूठ पकड़ा गया है। आजतक ने अपनी इस रिपोर्ट में लिखा था, ‘कर्नाटक की वोटर लिस्ट में ‘Aditya Shrivastava’ नाम का एक व्यक्ति दर्ज है। लेकिन लखनऊ और महाराष्ट्र, दोनों स्थानों पर जब उसी नाम और एपिक नंबर से खोज की गई, तो ‘No result found’ दिखाया गया।’ राहुल ने देश को गुमराह करते हुए दावा किया कि ‘आदित्य श्रीवास्तव’ नाम का वोटर कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र, तीनों राज्यों की वोटर लिस्ट में दर्ज है। सच्चाई यह है कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में यह नाम सिर्फ कर्नाटक में पंजीकृत है। राहुल गांधी ने झूठ बोलकर जनता को भड़काने और चुनाव आयोग जैसी लोकतांत्रिक संस्था की साख पर कीचड़ उछालने का काम किया। यह केवल एक झूठ नहीं, बल्कि भारत के चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता पर सीधा हमला है।

राहुल को नोटिस भेजकर आयोग ने मांगे थे  दस्तावेज
दरअसल, राहुल गांधी बिहार से कर्नाटक तक वोट चोरी के अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। राहुल के झूठे दावे करने के कारण अब कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी ने राहुल गांधी से सबूत मांगे हैं, जिनके आधार पर उन्होंने दावा किया था कि एक महिला ने दो बार वोट डाला। आयोग ने कहा कि बिना प्रमाण ऐसे आरोप चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं। राहुल गांधी ने यह बयान हाल ही में दिया था। यह मामला राजनीतिक और चुनावी नियमों के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं। नोटिस में कहा गया कि आपसे अनुरोध है कि आप वे प्रासंगिक दस्तावेज उपलब्ध कराएं जिनके आधार पर आपने यह निष्कर्ष निकाला है कि श्रीमती शकुन रानी या किसी और ने दो बार मतदान किया है, ताकि इस कार्यालय द्वारा विस्तृत जांच की जा सके।

राहुल का दावा गलत- शकुन रानी ने दो नहीं, एक बार किया मतदान- आयोग
राज्य के शीर्ष निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक ये दस्तावेज उनके कार्यालय को विस्तृत जांच करने में मदद करेंगे। गांधी ने पिछले हफ्ते राष्ट्रीय राजधानी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये दस्तावेज दिखाए थे। आयोग ने कहा कि राहुल गांधी ने यह दावा भी किया था कि मतदान अधिकारी द्वारा दिए गए रिकॉर्ड के अनुसार, श्रीमती शकुन रानी ने दो बार मतदान किया था। जांच करने पर, श्रीमती शकुन रानी ने कहा है कि उन्होंने केवल एक बार मतदान किया है, दो बार नहीं, जैसा कि राहुल गांधी ने आरोप लगाया है। नोटिस में कहा गया है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि कांग्रेस नेता द्वारा प्रस्तुत प्रस्तुति में दिखाया गया सही का निशान वाला दस्तावेज मतदान अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया था।

राहुल गांधी की मतदाता सूची को आयोग ने बताया भ्रामक
कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने सख्त रुख दोहराया है। आयोग ने कहा है कि राहुल गांधी या तो समय रहते इस मामले में एक घोषणा पत्र दें या फिर अपने आरोपों के लिए देश से माफी मांगें। भारत के चुनाव आयोग ने रविवार को कांग्रेस राहुल गांधी की तरफ से जारी उस मतदाता सूची को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है, जिसमें 30,000 मतदाताओं के पते फर्जी होने का दावा किया है। चुनाव आयोग ने फैक्ट चेक के बाद कहा कि विधि सम्मत प्रक्रिया को ध्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं और जितना भी संभव हो सकता है, उतना ज्यादा लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक एक्स सोशल मीडिया पर कांग्रेस की पोस्ट को साझा करते हुए लिखा, यह बयान पूरी तरह भ्रामक है। अगर राहुल गांधी को लगता है कि उनकी तरफ से साझा की जा रही सूची वाकई सही है तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्हें बिना देरी कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को जवाब भेजना चाहिए।

क्या फिर गिरफ्तार होंगे AAP के सांसद सजय सिंह? जिन शर्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने की थी ‘कृपा’, दूसरे ही दिन उसकी उड़ा दी धज्जियाँ

आम आदमी पार्टी (AAP) से सांसद संजय सिंह 2 दिन पहले कई शर्तों पर 6 महीने बाद जेल से रिहा हुए थे। उन शर्तों में एक शर्त यह भी थी कि उन्हें शराब घोटाला मामले में कोई बयान नहीं देना। हालाँकि, जेल से निकलते ही उन्होंने अपनी बयानबाजी शुरू कर दी। उन्होंने आज (5 अप्रैल 2024) प्रेस कॉन्फ्रेंस करके शराब घोटाले का सारा ठीकरा भारतीय जनता पार्टी पर फोड़ा।

संजय सिंह ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि दिल्ली शराब घोटाले में जिन लोगों को आरोपितों के रूप में को पकड़ा गया था, उन्होंने जब तक केजरीवाल का नाम नहीं लिया, ईडी ने उनके बयान को भरोसे लायक नहीं माना लेकिन जैसे ही उन्होंने अरविंद केजरीवाल का नाम ले लिया उस बयान को मान लिया गया।

संजय सिंह के अनुसार, ऐसे ही लोगों के बयान के आधार पर केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया है। आगे संजय सिंह ने दावा किया कि भाजपा नेता मगुंटा रेड्डी और उसके बेटे राघव मगुंटा इसमें शामिल हैं। इन्होंने दबाव में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयान दिया। इनके नौ बयानों में कहीं कुछ नहीं था जबकि दसवें बयान में अरविंद केजरीवाल का नाम आ जाता है।

फिर हो रही गिरफ्तारी की माँग

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने पर या उसमें जो उन्होंने किसी नेता पर इल्जाम लगाए हैं उसकी चर्चा से ज्यादा इस बात पर चर्चा हो रही है कि आखिर उन्होंने जेल से रिहा होने के बाद ये बयान दिए कैसे।
वॉयस ऑफ असम ने अपने ट्वीट में संजय सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस की क्लिप को शेयर करते हुए लिखा कि संजय सिंह खुलेआम कोर्ट के ऑर्डर की अवहेलना कर रहे हैं। ऐसा करके ये सिर्फ अपना पक्ष कमजोर कर रहे हैं। क्या ऐसी हरकत करने पर इनकी बेल कैंसिल नहीं होनी चाहिए।
इसी तरह अक्षत देउरा ने ईडी को टैग करते हुए लिखा, “संजय सिंह ने सिर्फ अपनी बेल की शर्तों का उल्लंघन किया। अगर अब आप इन्हें गिरफ्तार नहीं करते तो हमें मानना होगा कि ये आपके मुखबिर हैं।”
सुप्रीम कोर्ट ने जिन शर्तों पर संजय सिंह को बेल दी उनमें मीडिया में बयान न देने के अलावा, कुछ और शर्तें थीं। जैसे उन्हें साफ-साफ कहा गया कि वह सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश न करें। इसके अलावा जाँच में पूरा सहयोग दें। इसके अतिरिक्त उन्हें कहा गया कि अगर वह दिल्ली-एनसीआर से बाहर आते-जाते हैं तो उन्हें इसकी सूचना कोर्ट को दें। बिना अदालत के इजाजत के वो विदेश यात्रा भी न करें। कोर्ट ने कहा था कि संजय सिंह जहाँ भी जाएँगे उन्हें जाँच अधिकारी को गूगल लोकेशन देनी होगी। इस दौरान वह अपना फोन नंबर नहीं बदल सकते हैं।

शिव सेना नेता संजय राउत की गन्दी भाषा : गा^%*डू, नामर्द, दलाल, चप्पल मारेंगे…

बीजेपी नेताओं को जेल भेजने की धमकी देने वाले शिवसेना नेता संजय राउत आज (15 फरवरी 2022) प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आपा खो बैठे और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर डाला। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना कभी भी उन लोगों से नहीं डरती जो लोग नामर्दों की तरह वार करते हैं। बालासाहेब ठाकरे के नाम पर राउत ने कहा, “अगर तुमने कोई पाप नहीं किया है, अगर तुम्हारा मन साफ है तो किसी के बाप से मत डरो। आज के इस पत्रकार परिषद से हम संदेश देना चाहते हैं कि महाराष्ट्र गा^%* की औलाद नहीं है। मराठी मानुस ईमानदार है और हम आपसे डरने वाले नहीं हैं।”

राउत ने केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर अपना गुस्सा निकाला। वह बोले, “पिछले कई दिनों से शिवसेना, ठाकरे परिवार, आनंदराव अडसुल, रविंद्र वायकर, अनिल परब, भावना गवली, एनसीपी प्रमुख शरद पवार के परिवार समेत कई लोगों पर केंद्रीय एजेंसियों का हमला हो रहा है। यह चिंता की बात है।”

सरकार गिराए जाने की बात से बौखलाए राउत ने बंगाल और महाराष्ट्र की स्थिति की तुलना की। बीजेपी पर निशाना साधने के लिए उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र की सरकार उन्हें गिरानी है और इसलिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। झूठे आरोप लगाकर दबाव देने की कोशिश हो रही है।” राउत ने कहा कि कुछ बीजेपी नेताओं की ओर से उनको सरकार गिराने की तारीख दी जा रही है। वह पूछते हैं कि बीजेपी नेताओं ने कहा कि 10 मार्च को यह सरकार गिरेगी, ये बात उन्होंने किस आधार पर कही है।

वैंकया नायडू को लिखा पत्र, बीजेपी नेता को गाली

कॉन्फ्रेंस में राउत ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में वैंकया नायडू को पत्र लिखा है। उन्होंने दावा किया कि 20 दिन पहले बीजेपी के कुछ प्रमुख लोग उन्हें 3 बार मिले और बार-बार यह बताना चाहा कि वो इस सरकार से निकल जाएँ क्योंकि राष्ट्रपति शासन आने वाला है। राउत ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं ने उनसे कहा था कि अगर वो साथ नहीं देते, मदद नहीं करते तो केंद्रीय एजेंसियों से उन्हें टाइट करवाया जाएगा। राउत ने कॉन्फ्रेंस में बिन किसी भाजपा नेता का नाम लिए कहा, “मैं उन लोगों का नाम अभी नहीं ले रहा, भविष्य में लूँगा। उनसे मैंने कह दिया है कि ठाकरे सरकार को कुछ नहीं होगा। आप देखिए, उसी समय पवार परिवार पर भी दबाव बनाया जा रहा है।”
बाला साहेब ठाकरे का नाम लेकर राउत ने कहा कि उन्होंने शिवसेना को झुकना नहीं सिखाया। राउत बोले, “मुझपर दबाव बनाने के लिए बार बार मेरे परिवार पर प्रेशर बनाया गया। मराठी मानुस को यह कोई काम नहीं करने देना चाहते। मेरे बच्चों को फोन करके कहा गया कि ईडी कल सुबह 4 बजे तुम्हारे घर आएगी और तुम्हारे पिता को अरेस्ट करेगी। ऐसी राजनीति कभी महाराष्ट्र में नहीं हुई लेकिन अब बीजेपी कर रही है। पिछले कुछ सालों से शिवसेना और उद्धव ठाकरे पर लगातार हमला हो रहा है।” अपनी कॉन्फ्रेंस में संजय राउत ने भाजपा नेता किरीट सोमैया को दलाल तक कहा और कहा कि जो सोमैया ने ठाकरे परिवार के अलीबाग में 19 बंगले होने के आरोप लगाए हैं, अगर वहाँ जाकर वो झूठे निकले तो वो राजनीति छोड़ देंगे और उस ‘दलाल’ को चप्पल से मारेंगे।