Showing posts with label robert vadra. Show all posts
Showing posts with label robert vadra. Show all posts

कांग्रेस का एक और घोटाला : दलित हॉस्टल की जमीन पर किया कब्जा

Seven Big Scandals Of Congress And Nehru Family - 7 घोटाले ...
लगता है, कांग्रेस और घोटालों का चोली-दामन का साथ है, एक घोटाले से मुक्ति मिल नहीं पाती, दूसरा घोटाला सिर उठा लेता है। गनीमत है, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने तो कांग्रेस की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 घोटालों का पुलंदा ऐसे लिए घूम रहे थे, मानो सत्ता हाथ आते ही सारे घोटाले उड़नछू हो गए। केजरीवाल ने दिल्लीवालों को मुफ्त रेवड़ियों बांटने के चक्कर में राष्ट्र धर्म नहीं निभाया, क्योकि शायद स्वयं घोटाले करने सत्ता में आए हैं। इनके घोटालों की पोटली तो सत्ता परिवर्तन होने पर ही खुलेगी।  
कांग्रेस काल का एक और घोटाला सामने आया है। अंग्रेजी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ ने कांग्रेस कार्यकाल में हुए एक और काले कारनामे की पोल खोली है। इसके साथ ही एक बार फिर गांधी परिवार का नाम उभरा है। टाइम्स नाउ रिपोर्ट के अनुसार मुंबई के बांद्रा ईस्ट इलाके में गांधी परिवार की ओर से खरीदी गई जमीन में काफी गड़बड़ी है।
सन 1983 में यह जमीन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को दलितों के हॉस्टल बनाने के लिए मिली थी। दलितों के हॉस्टल के लिए आरक्षित 3478 वर्ग मीटर को कमर्शियल प्रॉपर्टी में कन्वर्ट कर दिया गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कि 20,000 वर्गफीट पर ही निर्माण करने की अनुमति थी, लेकिन कांग्रेस ने 80,000 वर्ग फुट जमीन पर निर्माण कर लिया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जहां सरकार को कमर्शियल प्रॉपर्टी से 50 प्रतिशत राजस्व प्राप्त होता है, वहीं इस प्रॉपर्टी से सिर्फ 30 प्रतिशत मिला।




टाइम्स नाउ के अनुसार मुंबई के पॉश बांद्रा ईस्ट इलाके की इस जमीन की कीमत सन 2017 के हिसाब से 262 करोड़ रुपए होती है।
देश के आजाद होने के बाद कांग्रेस और गांधी परिवार ने 60 सालों तक देश को जमकर लूटा है। कांग्रेस की सरकारों के तहत हुए घोटालों की सूची इतनी लंबी है कि कभी खत्म ही नहीं होती। सबसे पहला घोटाला जीप घोटाला था, लेकिन उसके बाद से कांग्रेस और इसके नेताओं द्वारा किये घोटालों की सूची पूरी होने को ही नहीं आ रहे। अगस्ता वेस्टलैंड स्कैम, बोफोर्स घोटाला, नेशनल हेराल्ड घोटाला, जमीन घोटाला… न जाने कितने ऐसे स्कैम हैं, जो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े हैं। 
सोनिया गांधी क्या वाक़ई 'ब्रिटेन की ...नेशनल हेराल्ड स्कैंडल
गांधी परिवार पर अवैध रूप से नेशनल हेराल्ड की मूल कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की संपत्ति हड़पने का आरोप है। वर्ष 1938 में कांग्रेस ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई थी। यह कंपनी नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज नाम से तीन अखबार प्रकाशित करती थी। एक अप्रैल, 2008 को ये अखबार बंद हो गए। मार्च 2011 में सोनिया और राहुल गांधी ने ‘यंग इंडिया लिमिटेड’ नाम की कंपनी खोली और एजेएल को 90 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन दिया। एजेएल यंग इंडिया कंपनी को लोन नहीं चुका पाई। इस सौदे की वजह से सोनिया और राहुल गांधी की कंपनी यंग इंडिया को एजेएल की संपत्ति का मालिकाना हक मिल गया। इस कंपनी में मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के 12-12 प्रतिशत शेयर हैं, जबकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के 76 प्रतिशत शेयर हैं। गांधी परिवार पर अवैध रूप से इस संपत्ति का अधिग्रहण करने के लिए पार्टी फंड का इस्तेमाल करने का आरोप लगा। गांधी खानदान के मौजूदा दोनों नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड केस में कोर्ट से जमानत पर हैं। इन दोनों ने अपनी सरकारों के जरिए देश के विभिन्न शहरों में नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के नाम पर कई एकड़ जमीन आवंटित करा ली। इसकी प्रॉपर्टी की कीमत करीब 5 हजार करोड़ है।

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला
वर्ष 2013 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर इटली की चॉपर कंपनी ‘अगस्ता वेस्टलैंड’ से कमीशन लेने के आरोप लगे। दरअसल अगस्ता वेस्टलैंड से भारत को 36 अरब रुपये के सौदे के तहत 12 हेलिकॉप्टर ख़रीदने थे, जिसमें 360 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी की बात सामने आई। इतालवी कोर्ट ने माना कि इस मामले में भारतीय अफसरों और राजनेताओं को 15 मिलियन डॉलर रिश्वत दी गई। इतालवी कोर्ट ने एक नोट में इशारा किया था कि सोनिया गांधी सौदे में पीछे से अहम भूमिका निभा रही थीं। कोर्ट ने 225 पेज के फैसले में चार बार सोनिया का जिक्र किया।

बोफोर्स घोटाला
बोफोर्स कंपनी ने 1437 करोड़ रुपये के होवित्जर तोप का सौदा हासिल करने के लिए भारत के बड़े राजनेताओं और सेना के अधिकारियों को 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। आरोप है कि इसमें दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को को स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने कमीशन के बतौर 64 करोड़ रुपये दिये थे। इस सौदे में गांधी परिवार के करीबी और इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी के अर्जेंटीना चले जाने पर सोनिया गांधी पर भी आरोप लगे।

वाड्रा-डीएलएफ घोटाला
वर्ष 2012 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी और उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ घोटाले का आरोप लगा। उनपर शिकोहपुर गांव में कम दाम पर जमीन खरीदकर  भारी मुनाफे में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को बेचने का आरोप लगा। रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ से 65 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन लेने का आरोप लगा। बिना ब्याज पैसे की अदायगी के पीछे कंपनी को राजनीतिक लाभ पहुंचाना मूल उद्देश्य था। यह तथ्य भी सामने आया है कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते रॉबर्ट वाड्रा ने देश के कई और हिस्सों में भी बेहद कम कीमतों पर जमीनें खरीदीं। इस मामले में हाल ही में हरियाणा सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

बीकानेर में जमीन घोटाले का मामला
राजस्थान के बीकानेर में हुए जमीन घोटालों में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों के जमीन सौदे भी शामिल हैं। अंग्रेजी न्यूज पोर्टल इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार गलत जमीन सौदों के सिलसिले में 18 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से 4 वाड्रा की कंपनियों से जुड़े हैं। ये सारी एफआईआर 1400 बीघा जमीन जाली नामों से खरीदे जाने से जुड़ी हैं, जिनमें से 275 बीघा जमीन वाड्रा की कंपनियों के लिए जाली नामों से खरीदे जाने के आरोप हैं।

मारुति घोटाला
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी को यात्री कार बनाने का लाइसेंस मिला था। वर्ष 1973 में सोनिया गांधी को मारुति टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लि. का एमडी बनाया गया, हालांकि सोनिया के पास इसके लिए जरूरी तकनीकी योग्यता नहीं थी। बताया जा रहा है कि कंपनी को सरकार की ओर से टैक्स, फंड और कई छूटें मिलीं थी।

मूंदड़ा स्कैंडल
कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा को स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे घोटाले के तौर पर याद किया जाता है। इसके छींटें प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर भी पड़े। दरअसल 1957 में मूंदड़ा ने एलआईसी के माध्यम से अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपये का निवेश कराया था। यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इंवेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया। तब तक एलआईसी को पता चला उसे कई करोड़ का नुक़सान हो चुका था। इस केस को फिरोज गांधी ने उजागर किया, जिसे नेहरू ख़ामोशी से निपटाना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें अंतत: पद छोड़ना पड़ा। 

अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
सचिन पायलट के नर्म पड़ते रुख पर अशोक गहलोत ने खुल कर हमला किया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि उनके यहाँ उपमुख....

और कितना उठेगा गांधी परिवार के काले कारनामों का पर्दा?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कांग्रेस द्वारा किए घोटाले सुन-सुनकर जनता के कान पक गए हैं। चुनाव आने से पूर्व लगभग हर पार्टी कांग्रेस अथवा यूपीए घोटालों का झुनझुना लेकर बजाने लगती हैं, लेकिन चुनाव उपरांत परिणाम वही ढाक के तीन पात। 
दिल्ली सत्ता हथियाने आम आदमी पार्टी के "अरविन्द केजरीवाल तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 आरोप लेकर नाच रहे थे, कहते थे शीला जेल जाएगी, क्या हुआ?" आज तक एक घोटाले की जाँच तो क्या नाम तक नहीं लिया और अब तो शीला दीक्षित स्वर्गवासी हो चुकी हैं। 
2019 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते थे कि "भ्रष्टाचारी जमानत पर बाहर हैं, जेल के दरवाजे तक पहुंचा दिया, बस दरवाजे की दूसरी तरफ भेजना है।" क्या हुआ बाबाजी का ढुल्लू। यदि इतने घोटाले किसी आम नागरिक अथवा अधिकारी ने किए होते, पता नहीं कब का जेल में पटक दिया होता। बस दामन बचाने के लिए लालू यादव जैसे को जेल भेज दिया, हो गया भ्रष्टाचार दूर, हो गयी भ्रष्टाचार पर कार्यवाही। मायावती, मुलायमसिंह, अखिलेश याद आएंगे उत्तर प्रदेश चुनावों में।  
यह सत्ता पक्ष पर आरोप नहीं, कटु सच्चाई है। भ्रष्टाचार का यह हाल है कि "कल जो काम 100 रूपए देकर होता था, आज 1000 रूपए में होता है। बिना रिश्वत दिए नगर निगम का भवन विभाग नक्शा पास नहीं करता। चलिए नक्शा पास हो गया, फिर ??।" यानि आम आदमी कहाँ-कहाँ रिश्वत से बचे। सब्जीवाला बिना रिश्वत दिए सड़क पर बैठ नहीं सकता। सीमेंट से भरे एक विक्रम टैम्पो 600 रूपए देता है। 
सरकार यदि भ्रष्टाचार पर गंभीर है तो सबसे पहले नेताओं की मोटी होती तिजोरियों, चुनावों में शराब और नोट बंटवारे पर लगाम लगानी होगी। अन्यथा जनता फ़िल्मी गीत "सपने सुहाने लड़कपन के...." याद रखे।   
खैर अब, राजीव गाँधी फाउंडेशन समेत 3 ट्रस्टों की फंडिंग को लेकर उपजे विवाद पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सख्त है और अंतर-मंत्रालय जाँच बिठा दी गई है, जिससे गाँधी परिवार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ख़ुद गृह मंत्रालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर के इस बात की सूचना दी गई है। ये कमिटी फाउंडेशन द्वारा ली गई फंडिंग और नियमों के उल्लंघन को लेकर जाँच करेगी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के डायरेक्टर इस कमिटी की अध्यक्षता करेंगे।
गृह मंत्रालय ने अपनी ट्वीट में कहा– “केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय कमिटी का गठन किया है, जो राजीव गाँधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की जाँच करेगी।” गृह मंत्रालय द्वारा गठित कमिटी PMLA एक्ट, इनकम टैक्स एक्ट और FCRA एक्ट के नियम-क़ानूनों के उल्लंघन के सम्बन्ध में जाँच करेगी, जिसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीन से फंडिंग मिलने का खुलासा होने के बाद हंगामा शुरू हो गया था। इस फाउंडेशन के शीर्ष अधिकारियों में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राहुल गाँधी के नाम शामिल हैं। 
भारती फाउंडेशन द्वारा गृह मंत्रालय को प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि इसे कतर फाउंडेशन एंडोमेंट से वित्त वर्ष 2018-19 में लगभग 14 करोड़ रुपए मिले थे। बता दें कि कतर फाउंडेशन एक प्राइवेट चैरिटी संस्थान है, जो पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी और उनकी पत्नी शेखा मोझा बिंत नासिर द्वारा स्थापित किया गया था। कॉन्ग्रेस का यहूदी अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस के साथ भी काफी नजदीकी संबंध रहा है।


फाउंडेशन को पंजाब नेशनल बैंक में हज़ारों करोड़ रुपए के घोटाले के अभियुक्त मेहुल चोकसी से भी दान मिला था। उसने 2014-15 में सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाले इस फाउंडेशन में अघोषित दान किया था। दान नवराज एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड (Naviraj Estates Private Limited) के नाम से किया गया था और मेहुल चोकसी इस कंपनी के निदेशकों में से एक है। इसके बाद से ही भाजपा इन आरोपों को लेकर हमलावर है।
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समय मूंदड़ा घोटाला हो, इंदिरा गांधी के समय मारूति घोटाला या फिर राजीव गांधी के समय में बोफोर्स घोटाला या सोनिया गांधी के समय डॉ मनमोहन सिंह के नाम पर घोटाला ही घोटाला। आजादी के बाद से ही देश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में कांग्रेस आगे रही है। अपने स्वार्थ को साधने के लिए सत्ता का कैसे दुरुपयोग हो सकता है, ये कांग्रेस सरकारों की करतूतों से सामने आता रहा है। सत्ता का दुरुपयोग का ही एक मामला हाल में सामने आया है कि राजीव गांधी फाउंडेशन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से पैसा दिया गया था। इसके साथ ही कई सरकारी कंपनियों पर भी पैसा देने के लिए दवाब बनाया गया था। इतना ही नहीं राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से फंडिंग मिलती थी। इस सबका खुलासा होने के बाद गृह मंत्रालय ने एक अंतरमंत्रालय कमेटी बनाई है। अंतरमंत्रालय समिति राजीव गांधी फाउंडेशन के साथ राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट, इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की भी जांच करेगी। कमेटी इन फाउंडेशन की फंडिंग, इनके द्वारा किए गए उल्लंघनों की जांच करेगी। इस जांच में पीएमएलए एक्ट, इनकम टैक्स एक्ट, एफआरसीए एक्ट के नियमों के उल्लंघन की जांच शामिल है। इस कमेटी की अगुवाई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के स्पेशल डायरेक्टर करेंगे।
देश के आजाद होने के बाद कांग्रेस और गांधी परिवार ने 60 सालों तक देश को जमकर लूटा है। कांग्रेस की सरकारों के तहत हुए घोटालों की सूची इतनी लंबी है कि कभी खत्म ही नहीं होती।अगस्ता वेस्टलैंड स्कैम, बोफोर्स घोटाला, नेशनल हेराल्ड घोटाला, जमीन घोटाला… न जाने कितने ऐसे स्कैम हैं, जो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े हैं। डालते हैं नेहरू-गांधी परिवार के घोटालों पर एक नजर-
अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला
वर्ष 2013 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर इटली की चॉपर कंपनी ‘अगस्ता वेस्टलैंड’ से कमीशन लेने के आरोप लगे। दरअसल अगस्ता वेस्टलैंड से भारत को 36 अरब रुपये के सौदे के तहत 12 हेलिकॉप्टर ख़रीदने थे, जिसमें 360 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी की बात सामने आई। इतालवी कोर्ट ने माना कि इस मामले में भारतीय अफसरों और राजनेताओं को 15 मिलियन डॉलर रिश्वत दी गई। इतालवी कोर्ट ने एक नोट में इशारा किया था कि सोनिया गांधी सौदे में पीछे से अहम भूमिका निभा रही थीं। कोर्ट ने 225 पेज के फैसले में चार बार सोनिया का जिक्र किया।

2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला (2008)
भारत में सबसे बड़ा घोटाला 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला था, जिसमें दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर निजी दूरसंचार कंपनियों को 2008 में बहुत सस्ते दरों पर 2 जी लाइसेंस जारी करने का आरोप लगाया गया था। नियमों का पालन नहीं किया गया था, लाइसेंस जारी करते समय केवल पक्षपात किया गया था। इसमें 1.96 लाख करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। दरअसल सरकार ने 2001 में स्पेक्ट्रम लाइसेंस के लिए प्रवेश शुल्क रखा था। इसमें दूरसंचार के बारे अनुभवहीन कंपनियों को लाइसेंस जारी किया गया था। भारत में 2001 में मोबाइल उपभोक्ता 4 मिलियन थे जो 2008 में बढ़ोतरी करके 350 मिलियन तक पहुंच गये।

सत्यम घोटाला (2009)
सत्यम कंप्यूटर सर्विसेजस के घोटाले से भारतीय निवेशक और शेयरधारक बुरी तरह प्रभावित हुए। यह घोटाला कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े घोटालों में से एक है, इसमें 14,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था। पूर्व चेयरमैन रामलिंगा राजू इस घोटाले में शामिल थे, जिन्होंने सब कुछ संभाला हुआ था। बाद में उन्होंने 1.47 अरब अमेरिकी डॉलर के खाते को किसी प्रकार के संदेह के कारण खारिज कर दिया। उस साल के अंत में, सत्यम का 46% हिस्सा टेक महिंद्रा ने खरीदा था, जिसने कंपनी को अवशोषित और पुनर्जीवित किया।

कॉमनवेल्थ गेम घोटाला (2010)
राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी और संचालन के लिए लिये लिया गया धन भारी मात्रा में घोटाले में चला गया। इसमें लगभग 70,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इस घोटाले में कई भारतीय राजनेता नौकरशाह और कंपनियों के बड़े लोग शामिल थे। इस घोटाले के प्रमुख पुणे के निर्वाचन क्षेत्र से 15 वीं लोकसभा के लिए कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि सुरेश कलमाड़ी थे। उस समय, कलमाड़ी दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन समिति के अध्यक्ष थे। इसमें शामिल अन्य बड़े लोगों में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री- शीला दीक्षित और रॉबर्ट वाड्रा हैं। इसका गैर-अस्तित्व वाली पार्टियों के लिए भुगतान किया गया, उपकरण की खरीद करते समय कीमतों में तेजी आई और निष्पादन में देरी हुई थी।

कोयला घोटाला (2012)
कोयला घोटाले के कारण भारत सरकार को 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। सीएजी ने एक रिपोर्ट पेश की और कहा कि 194 कोयला ब्लॉकों की नीलामी में अनियमितताऐं शामिल हैं। सरकार ने 2004 और 2011 के बीच कोयला खदानों की नीलमी नहीं करने का फैसला किया था। कोयला ब्लॉक अलग-अलग पार्टियों और निजी कंपनियों को बेच दिये गये थे। इस निर्णय से राजस्व में भारी नुकसान हुआ था।

टाट्रा ट्रक घोटाला (2012)
वेक्ट्रा के अध्यक्ष रवि ऋषिफॉर्मर और सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह के खिलाफ मनी लॉन्डरिंग प्रतिबंध अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला पंजीकृत किया था। इसमें सेना के लिए 1,676 टाटा ट्रकों की खरीद के लिए 14 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई थी।

आदर्श घोटाला (2012)
इस घोटाले में मुंबई की कोलाबा सोसायटी में 31 मंजिल इमारत में स्थित फ्लैटों को बाजार की कीमतों से कम कीमत पर बेचा गया था। इस सोसायटी को सैनिकों की विधवाओं और भारत के रक्षा मंत्रालय के कर्मियों के लिए बनाया गया था। समय की अवधि में, फ्लैटों के आवंटन के लिए नियम और विनियमन संशोधित किए गए थे। इसमें महाराष्ट्र के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों- सुशील कुमार शिंदे, विलासराव देशमुख और अशोक चव्हाण के खिलाफ आरोप लगाये गये थे। यह जमीन रक्षा विभाग की थी और सोसायटी के लिये दी गई थी।

सोनिया-राहुल-वाड्रा के पास 5 बिलियन डालर से अधिक की संपत्ति कहां से आई?



आजादी के बाद देश को अपनी व्यक्तिगत संपत्ति समझने वाले गांधी परिवार ने किसानों की जमीन खरीदने-बेचने से लेकर रक्षा सौदे में दलाली से अकूत संपदा अर्जित की है। गांधी खानदान के मौजूदा दोनों नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड केस में कोर्ट से जमानत पर हैं। इन दोनों ने अपनी सरकारों के जरिए देश के विभिन्न शहरों में नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के नाम पर कई एकड़ जमीन आवंटित करा ली। इसकी प्रॉपर्टी की कीमत करीब 5 हजार करोड़ है। दोनों मां-बेटे ने एक कंपनी बनाकर नेशनल हेराल्ड की सारी जमीन को अपने नाम करवा ली। जब कोर्ट में मामला खुला तो दोनों को जमानत लेना पड़ा। अमेरिका की business insider और जर्मनी के द वेल्ट के मुताबिक सोनिया दुनिया की चौथी सबसे धनी महिला हैं।उनकी संपत्ति 10 हजार से 45 हजार करोड़ के बीच हो सकती है। राहुल गांधी कुछ नहीं करते लेकिन उनकी घोषित संपत्ति 9.40 करोड़ है।
Celebrity Net Worth के अनुसार कांग्रेस की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के पास लगभग 2 बिलियन डालर की संपदा है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पास भी 100 मीलियन डालर की संपदा है।
प्रमुख घोटालों की सूची और उसकी रकम-

कोयला घोटाला1.86 लाख करोड़ रुपये
2जी घोटाला1.76 लाख करोड़ रुपये
महाराष्ट्र सिंचाई घोटाला70,000करोड़ रुपये
कामनवेल्थ घोटाला35,000 करोड़ रुपये
स्कार्पियन पनडुब्बी घोटाला1,100 करोड़ रुपये
अगस्ता वेस्ट लैंड घोटाला3,600 करोड़ रुपये
टाट्रा ट्रक घोटाला14 करोड़ रुपये
अब चलते हैं पीछे 
बोफोर्स घोटाला
बोफोर्स कंपनी ने 1437 करोड़ रुपये के होवित्जर तोप का सौदा हासिल करने के लिए भारत के बड़े राजनेताओं और सेना के अधिकारियों को 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। आरोप है कि इसमें दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को को स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने कमीशन के बतौर 64 करोड़ रुपये दिये थे। इस सौदे में गांधी परिवार के करीबी और इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी के अर्जेंटीना चले जाने पर सोनिया गांधी पर भी आरोप लगे।

वाड्रा-डीएलएफ घोटाला
वर्ष 2012 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी और उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ घोटाले का आरोप लगा। उनपर शिकोहपुर गांव में कम दाम पर जमीन खरीदकर  भारी मुनाफे में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को बेचने का आरोप लगा। रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ से 65 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन लेने का आरोप लगा। बिना ब्याज पैसे की अदायगी के पीछे कंपनी को राजनीतिक लाभ पहुंचाना मूल उद्देश्य था। यह तथ्य भी सामने आया है कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते रॉबर्ट वाड्रा ने देश के कई और हिस्सों में भी बेहद कम कीमतों पर जमीनें खरीदीं। इस मामले में हाल ही में हरियाणा सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

बीकानेर में जमीन घोटाले का मामला
राजस्थान के बीकानेर में हुए जमीन घोटालों में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों के जमीन सौदे भी शामिल हैं। अंग्रेजी न्यूज पोर्टल इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार गलत जमीन सौदों के सिलसिले में 18 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से 4 वाड्रा की कंपनियों से जुड़े हैं। ये सारी एफआईआर 1400 बीघा जमीन जाली नामों से खरीदे जाने से जुड़ी हैं, जिनमें से 275 बीघा जमीन वाड्रा की कंपनियों के लिए जाली नामों से खरीदे जाने के आरोप हैं।

मारुति घोटाला
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी को यात्री कार बनाने का लाइसेंस मिला था। वर्ष 1973 में सोनिया गांधी को मारुति टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लि. का एमडी बनाया गया, हालांकि सोनिया के पास इसके लिए जरूरी तकनीकी योग्यता नहीं थी। बताया जा रहा है कि कंपनी को सरकार की ओर से टैक्स, फंड और कई छूटें मिलीं थी।

अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार चुनावी दंगल में आरोप-प्रत्यारोप लगाना कोई नई बात नहीं। लेकिन उन आरोप-प्रत्यारोपों का...
मूंदड़ा स्कैंडल
कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा को स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे घोटाले के तौर पर याद किया जाता है। इसके छींटें प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर भी पड़े। दरअसल 1957 में मूंदड़ा ने एलआईसी के माध्यम से अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपये का निवेश कराया था। यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इंवेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया। तब तक एलआईसी को पता चला उसे कई करोड़ का नुक़सान हो चुका था। इस केस को फिरोज गांधी ने उजागर किया, जिसे नेहरू ख़ामोशी से निपटाना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें अंतत: पद छोड़ना पड़ा।

प्रियंका गांधी वाड्रा के काले कारनामे


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत की राजनीति में कई दशकों से नेहरू-गांधी परिवार का प्रभुत्व रहा है। परिवार ने राजनीतिक प्रभाव के बल पर संवैधानिक संस्थाओं का उपयोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिए किया है। इस काम में गांधी परिवार में कोई भी अपवाद नहीं है। जिसका जब मन चाहा और जहाँ चाहा जनता को भ्रमित कर लूटमार करने का कोई अवसर नहीं छोड़ा। हाल ही में राजनीति में फुलटाइम प्रोफेशनल की तरह कदम रखने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा को राहुल गाँधी द्वारा सक्रिय राजनीती में पदापर्ण करने पर स्पष्ट था कि राबर्ट वाड्रा के बाद अगला नम्बर बहन प्रियंका का ही है। जैसाकि सर्वविदित है कि कांग्रेस बहुत ही सुनियोचित ढंग से कोई कदम उठाती है। गाँधी परिवार को पूर्व ज्ञान हो गया था कि मोदी सरकार की वापसी हो रही है और राबर्ट के बाद प्रियंका भी निशाने पर आने वाली है, इसलिए सडकों पर शोर-शराबा की तैयारी हो रही है। परदे के पीछे प्रियंका के भी काले कारनामों की एक लंबी सूची है।
व्यापारिक जगत में जमीन की दलाली करने वाले राबर्ट वाड्रा, प्रियंका गांधी के पति हैं। प्रियंका गांधी के काले कारनामें -
*शिमला से 13 किलोमीटर दूर छरबड़ा में 2007 में नियमों को ताक पर रखकर गैरकानूनी तरीके से अतिसंवेदनशील क्षेत्र में कई एकड़ जमीन लेकर अपना मकान बनाया। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में जमीन खरीदने के लिए यूपीए सरकार की वजह से प्रियंका गांधी को कानूनी रूप से विशेष ढील दी गई थी
*पति राबर्ट वाड्रा पर आरोप है कि उसने राजस्थान और हरियाणा में कांग्रेस सरकारों के सहयोग से कौड़ियों के भाव किसानों की जमीन खरीद कर हजारों करोड़ में बड़े व्यापारियों को बेच दिया। कहा जाता है कि दलाली के इसी पैसे से उसने लंदन जैसे शहरों में आलीशन घर खरीदे हैं। इन्ही मामलों में वाड्रा अभी जमानत पर चल रहे हैं।
*श्रीलंका में आतंकी घटना के लिए जिम्मेदार जाकिर नाईक केदान से चल रहे राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट की संचालक हैं प्रियंका वाड्रा
*यह वही जाकिर नाईक है जिसके इस्लामिक कट्टरपंथी विचारों को सुनकर श्रीलंका में कुछ सिरफिरे मुस्लिम लोगों ने आत्मघाती हमले में 380 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
*प्रियंका वाड्रा के इस ट्रस्ट पर जमीन हेराफेरी करने का आरोप है। जिला प्रशासन ने अमेठी के रोखा गांव में 1.0360 हेक्टेयर जमीन व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को दिया था। लेकिन कागजों में हेराफेरी कर राजीव गांधी ट्रस्ट के नाम कर दिया गया। जिसे बाद में ट्रस्ट ने उस जमीन को एक निजी कंपनी के हाथों बेच दिया।
*इसी तरह प्रियंका गांधी के ट्रस्ट ने हरियाणा के उल्लावास गांव की 4.8 एकड़ जमीन हरियाणा की कांग्रेसी हुड्डा सरकार से मिलकर 2009 में लीज के नाम पर हड़प ली।
*इसी तरह राजीव गांधी ट्र्स्ट के नाम पर प्रियंका वाड्रा ने राय बरेली में भी 10,000 वर्गमीटर जमीन की हेराफेरी की। उन्होंने कागजों में हेराफेरी कर उस जमीन को ट्रस्ट के नाम करा लिया।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के महासचिव पद पर अपनी बहन प्रियंका गांधी की नियुक्ति

प्रियंका गांधी वाड्रा को पूर्वी उत्तर प्रदेश का महासचिव बनाए जाने पर उनके पति रॉबर्ट वाड्रा ने बधाई दी है। प्रियंका की इस ताजपोशी पर खुशी जाहिर करते हुए वाड्रा ने फेसबुक पर लिखा कि वह नई राजनीतिक पारी के लिए प्रियंका को शुभकामनाएं देते हैं। वाड्रा ने कहा कि वह जीवन के हर मोड़ पर प्रियंका का साथ देंगे। प्रियंका गांधी अभी विदेश दौरे पर हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जनवरी 23 को पूर्वी उत्तर प्रदेश के महासचिव पद पर अपनी बहन प्रियंका गांधी की नियुक्ति की। कांग्रेस ने प्रियंका की राजनीतिक भूमिका लोकसभा चुनावों से पहले बढ़ाई है। वाड्रा ने फेसबुक पर लिखा, 'बधाई....मैं हमेशा और जीवन के हर मोड़ पर आपके साथ हूं। अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।'

क्या कांग्रेस को होगा फायदा?

लगता है, कांग्रेस पार्टी में केवल गाँधी परिवार की जी-हजूरी करने वालों की कोई कमी नहीं, जिन्हें इस परिवार के बिना अपना जीवन अंधकारमय दिखता प्रतीत होता है। यानि 1972 में जन्मी प्रियंका में कांग्रेस पार्टी अपना भविष्य देख रही है, जबकि पार्टी में एक से बढ़कर एक बुद्धिजीवी और प्रतिष्ठावान विराजमान है, जिन्हें पार्टी ने दरकिनार कर रखा है, जिस कारण पार्टी इतनी दुर्दशा से गुजर रही है। अनुभवहीनों के हाथ बाग़डोर होने का ही प्रमाण है कि पिछली सरकार में अपने भ्रष्टाचार आदि अपराधों से बचने वाली पार्टियाँ 2019 लोक सभा चुनावों में गठबन्धन में कांग्रेस से दूरी बनाकर रख रही हैं।  
प्रियंका को सक्रिय राजनीती में लाने का दूसरा कारण है, प्रियंका और उनके पति रोबर्ट वाड्रा के विरुद्ध चल रहे घोटालों की जाँच।   
प्रियंका गांधी की अब तक सक्रिय राजनीति से दूरी रही है। वह अब तक अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करती रही हैं। अमेठी से उनके भाई राहुल गांधी सांसद हैं जबकि रायबरेली से उनकी मां सोनिया गांधी सांसद हैं। समझा जाता है कि कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को यूपी की राजनीति में उतारकर सपा और बसपा पर दबाव बनाने एवं मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है।
Congratulations P... always by your side in every phase of your life.
Give it your best. 😊👍
पूर्वांचल सहित उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हालत ठीक नहीं है। 2014 के लोकसभा चुनावों में उसे महज दो सीटें मिली थीं। जबकि 2017 के विधानसभा चुनावों में उसे सात सीटें मिलीं। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव सपा के साथ मिलकर लड़ा था। यूपी में सपा-बसपा का गठबंधन हो जाने के बाद उसके पास अकेले चुनाव लड़ने के सिवाय कोई और विकल्प नहीं बचा है। ऐसे में कांग्रेस अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ना चाहती है। राहुल गांधी ने भी स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी।राजनीति में प्रियंका की एंट्री को कई तरीके से देखा जा रहा है। कुछ का मानना है कि यह कदम उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के लिए उठाया गया है जहां लोकसभा की 80 सीटें हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे ज्यादा अंदर नहीं आना है। वहीं बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी की फेल होने पर ये फैसला किया गया है। 
कांग्रेस पार्टी के इसी फैसले पर Times Now Hindi ने ट्विटर पर लोगों से सवाल किया। लोगों से पूछा गया कि 'प्रियंका गांधी को मैदान में उतारने से क्या कांग्रेस को फायदा होगा?' 2 घंटे में करीब 1450 लोगों ने इस पर अपनी राय दी। 
प्रियंका गांधी को मैदान में उतारने से क्या कांग्रेस को फायदा होगा?
इस सवाल के जवाब में 28% लोगों ने हां में जवाब दिया, जबकि 72% ने ना में जवाब दिया। यानी कि 28 फीसदी लोग ही मानते हैं कि प्रियंका के मैदान में उतरने से कांग्रेस को फायदा होगा, जबकि 72 फीसदी लोगों का मानना है कि कोई फायदा नहीं होगा।
Can Priyanka Gandhi counter PM Modi's appeal?
19 hours left 
वहीं Times Now के ट्विटर हैंडल पर पूछा गया कि 'क्या प्रियंका गांधी पीएम मोदी की अपील का मुकाबला कर सकती हैं?' इसके जवाब में 25% लोगों ने हां कहा, जबकि 75% ने ना कहा। यानी कि सिर्फ 25 फीसदी लोगों ने माना कि प्रियंका पीएम मोदी का मुकाबला कर सकती हैं, जबकि 75 फीसदी ने माना कि नहीं कर सकती है। 3 घंटे में इस पोल में करीब 2500 लोगों ने वोट किया। 
कांग्रेस इसे ट्रम्प कार्ड बता रही है, वहीं भाजपा का दावा है कि इससे 2019 के चुनावी नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस बीच, यह जानना रोचक होगा कि प्रियंका की कुंडली क्या कहती है?
प्रियंका की कुंडली कहती है कि उन्होंने अपनी जिंदगी के सर्वश्रेष्ठ समय में राजनीति में प्रवेश किया है। कुंडली के मुताबिक, 2003 से 20 साल के लिए प्रियंका शुक्र की दशा से गुजर रही हैं और यह उनके जीवन का सबसे अच्छा समय रहेगा। 21वीं सदी में वे जीवन का नया मुकाम देखेंगी।
प्रियंका का जन्म 12 जनवरी 1972 को हुआ है। उनके जन्म के समय मिथुन का उदय हो रहा था जो आध्यात्मिक और विशिष्ट रूप से बुद्धिमत्ता का प्रतिनिधित्व करता है।
कुंडली के मुताबिक, प्रियंका के राजनीति में आने की संभावना बहुत कम थी, लेकिन यह भी तय है कि एक बार जब उन्होंने सियासत में कदम रख लिया तो पीछे मुडकर नहीं देखेंगी। लोग उन्हें अगाध प्रेम देंगे और पार्टी के लिए वे शानदार काम करेंगी।
कांग्रेस में प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग
कांग्रेस में प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग जो़र पकड़ती जा रही थी। कई बड़े नेता अब इस अभियान में शामिल होकर चाहते थे कि प्रियंका को पार्टी में महत्वपूर्ण रोल दिया जाए। पार्टी की लोक सभा चुनाव में दुर्गति देखने के बाद वहां यह बात जो़र पकड़ रही है कि शीर्ष नेतृत्व में कुछ बदलाव हो। लोक सभा चुनाव में पार्टी को महज 44 सीटें मिलीं
अवलोकन करें:--


इस वेबसाइट का परिचय
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
यूपीए की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में एक बार फिर से पोस्टर की राजनीति देखी जा रही है. ....

मणिशंकर अय्यर बोले – पार्टी को प्रियंका गांधी का इंतजार
पहले तो कांग्रेसी कार्यकर्ता प्रियंका को लाने के पक्ष में नारे लगा रहे थे लेकिन अब कुछ पूर्व मंत्री भी इस मांग में शामिल हो गए। उन्होंने भी मांग रख दी है कि पार्टी प्रियंका गांधी की भूमिका बड़ी करे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने आज तक के साथ खास बातचीत में कहा है कि पिछले सात सालों से कार्यकर्ता से नेता तक हर कोई प्रियंका गांधी को पार्टी में देखना चाहता है।1998 से पहले हम चाहते थे कि सोनिया गांधी पार्टी में आएं, वो आईं और उन्होंने पार्टी का भविष्य बदल डाला
उन्होंने कहा कि प्रियंका एक बड़े राजनीतिक परिवार से हैं और राजनीति को बेहतर समझती भी हैं। हमें पार्टी में उनका इंतजार है। हमें खुशी होगी अगर वह पार्टी ज्वाइन कर सक्रिय राजनीति में आती हैं। अब ये उनका फैसला हैं कि वो कब आएंगी
उन्होंने कहा, ‘मैंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र भेजा है जिसमें लिखा है कि पार्टी को किस-किस दिशा में काम करने की जरूरत है. इसकी एक कॉपी राहुल गांधी को भी मैंने भेजी है।’
 विपक्ष का नेता कौन होगा? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को विपक्ष का नेता बनना चाहिए. लेकिन हमारे पास सोनिया गांधी का भी विकल्प है। ये पार्टी को तय करने दें।’
हार से निराश अय्यर ने कहा कि पीएम के मीडिया सलाहकार संजय बारू और पंकज पचौरी समय पर संवाद करने में नाकाम रहे। देर से जवाब देने पर गलत संदेश जाता था
मुख्य धारा में आएं प्रियंका: केवी थॉमस
पूर्व मंत्री केवी थॉमस ने मेल टुडे से कहा कि प्रियंका को अब पार्टी की मुख्य धारा में आना चाहिए और पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी के कार्यों में हाथ बंटाना चाहिए। थॉमस चुनाव जीतने वाले मुठ्ठी भर कांग्रेसियों में हैं
कांग्रेस के कई और नेता यह मानते हैं कि प्रियंका एक स्वाभाविक नेता हैं और उनका हर काम स्वाभाविक सा दिखता है। वह वोटरों से बेहतर ढंग से जुड़ सकती हैं
पूर्व मंत्री पल्लम राजू ने कहा कि प्रियंका सोनिया और राहुल का हमेशा समर्थन करती रही हैं। लेकिन वह सामने आना चाहेंगी या नहीं यह उनकी अपनी च्वाइस है। उन्होंने कहा कि उनके ख्याल से उनमें जनता से जुड़ने की स्वाभाविक योग्यता है। यह उनकी ताकत है
शोभा ओझा
महिला कांग्रेस की प्रमुख शोभा ओझा के मुताबिक पूरी पार्टी प्रियंका के लिए सक्रिय भूमिका चाहती है। लेकिन वह खुद तय करंगी कि उन्हें कब आना है
पिछले चुनाव में प्रियंका ने सिर्फ गांधी परिवार की दोनों सीटों के लिए प्रचार किया था। पार्टी नेताओं कुछ नेताओं ने उनसे वाराणसी में भी प्रचार करने को कहा था लेकिन वह नहीं गईं
प्रियंका ने नरेन्द्र मोदी पर सीधे हमला करके चुनाव प्रचार अभियान में थोड़ी हलचल मचाई जिसके बाद पीएम कैंडिडेट ने उनके प्रति नरम रुख अख्तियार कर लिया। वरिष्ठ नेता अनिल शास्त्री ने कहा कि यह सोनिया गांधी पर निर्भर करता है कि वे प्रियंका की क्या भूमिका तय करें। शशि थरूर ने इस बहस को निरर्थक बताया
कांग्रेस पार्टी ने हमेशा कि तरह इस मसले पर चुप्पी साधे रखी। उसके प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा कि प्रियंका की ओर से कोई फैसला लेने के बारे में हमसे न पूछिए