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उत्तराखंड : ‘जमीन हड़पने के लिए 90 वर्षीय नसरीन को धमकी दे रहे कांग्रेसी’: बीजेपी का प्रियंका और रॉबर्ट वाड्रा पर आरोप, कहा- सायरा वाड्रा कर रहीं कब्जे की कोशिश

                                                   प्रतिकात्मक तस्वीर (साभार- Dall-E)
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी जो कहते हैं 'Congress is Muslim, Muslim is Congress' लेकिन वही कांग्रेस ही वृद्ध मुस्लिम महिला की जमीन हड़पने में लगी है। यानि मुस्लिम सुरक्षा के नाम ढोंग। ऐसा इसलिए हो रहा परिवार पर लम्बित घोटाले केस। परिवार को लगता है कि केंद्र में अगर बीजेपी सरकार है तो क्या हुआ मनमानी तो हमारी ही चलेगी।   

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा पर उत्तराखंड के किच्छा में 90 वर्षीय मुस्लिम महिला की जमीन हड़पने की कोशिश का समर्थन करने का आरोप लगाया है। बीजेपी ने इस विवाद की तुलना ‘गाँधी-वाड्रा परिवार’ के कथित भ्रष्टाचार से करते हुए ‘नेशनल हेराल्ड मामले’ से की है।

एक प्रेस ब्रीफिंग में भंडारी ने बताया कि उधम सिंह नगर के किच्छा में खान फार्म एस्टेट में मौजूद प्रॉपर्टी के असली कागजात स्वर्गीय कुलसुम खान के नाम पर थे। उनकी 90 साल की बहन नसरीन खान अभी उसी जमीन पर बने मकान में रहती हैं।

भंडारी के मुताबिक, प्रियंका की भाभी और रॉबर्ट वाड्रा के परिवार की सदस्य सायरा वाड्रा उस प्रॉपर्टी पर कब्जा करने में लगी हुई हैं, जबकि प्रॉपर्टी के कागजात उनके नाम पर नहीं हैं।

कांग्रेस विधायक ने बुज़ुर्ग महिला को धमकाया- भंडारी

भंडारी ने बताया कि किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहर देर रात करीब 100 पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विवादित जमीन पर गए और नसरीन खान को धमकाया। विधायक तिलक राज प्रियंका गाँधी वाड्रा के करीबी माने जाते हैं।

भंडारी ने नसरीन खान का बयान दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस के कुछ लोग यहाँ आए हैं। वे मेरे फार्म का कब्जा कर वाड्रा परिवार को सौंपने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि खान ने सिर्फ सायरा वाड्रा का नाम लेने के बजाय पूरे वाड्रा परिवार का जिक्र किया था। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या कांग्रेस विधायक ने प्रियंका वाड्रा या रॉबर्ट वाड्रा के कहने पर महिला को धमकाया था। उन्होंने यह भी कहा कि सायरा और उनके पति सिकंदर आलम ने नसरीन की बहन पर झूठे हलफनामे पर दस्तखत करने का दबाव डाला और एक फर्जी वसीयत बनवाने की कोशिश की।

भंडारी ने कहा कि तरीका यह था कि असली संपत्ति के मालिक को तब तक डराया-धमकाया जाए जब तक वह उसे छोड़कर चली न जाए, जिसके बाद कोई दूसरी पार्टी सिविल विवाद में कब्जे का दावा कर सके।

नेशनल हेराल्ड मामले से घटना की तुलना की

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस विधायक की हरकतें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351 के दायरे में आती हैं, जो आपराधिक धमकी से संबंधित है। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार गैर-कानूनी था। उन्होंने कहा, “बात सिर्फ कांग्रेस विधायक तक सीमित नहीं है। जिम्मेदारी प्रियंका वाड्रा की है।

भंडारी ने रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े जमीन के मामलों का भी जिक्र किया, जिनमें गुरुग्राम का शिकोहपुर मामला और स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी से जुड़ा बीकानेर-कोलायत जमीन का मामला शामिल है।

उन्होंने नेशनल हेराल्ड मामले से भी तुलना की और गाँधी परिवार पर आजादी की लड़ाई लड़ने वालों से जुड़ी संपत्तियों को निजी संपत्ति में बदलने का आरोप लगाया। गाँधी-वाड्रा परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए भंडारी ने पूछा कि क्या प्रियंका ने कांग्रेस विधायक को उस प्रॉपर्टी पर जाने के लिए कहा था और मुसलमानों, महिलाओं और गरीबों का समर्थन करने का दावा करने वाली पार्टी एक 90 साल की मुस्लिम महिला को उसकी जमीन के मामले में क्यों निशाना बना रही थी।

प्रियंका वाड्रा ने आतंकवाद को बताया फिजूल का मुद्दा, तो क्या राजीव-इंदिरा की हत्या फिजूल की बात थी?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। न्यूज एजेंसी ANI के साथ बातचीत वाले इस वीडियो में प्रियंका वाड्रा आतंकवाद को फिजूल का मुद्दा बता रही हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने फरवरी 21 को लखनऊ में कहा कि आतंकवाद का मुद्दा फिजूल है और बीजेपी वाले चुनाव की वजह से इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन फिजूल की बातों का जवाब देने की मुझे जरूरत ही नहीं है। मैं समझती हूं कि ये फिजूत की बातें हैं। 

जिस परिवार की बेटी ने अपनी दादी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और अपने पिता भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को आतंकवाद की भेंट चढ़ते देखा हो, वही जब आतंकवाद को "फ़िज़ूल की बात" कहा जाए, फिर किस आधार पर इन दोनों की मौत के नाम पर वोट वोट मांगी जाती है? अगर आतंकवाद को "फ़िज़ूल की बात" कहे, फिर ऐसे लोगों की सुरक्षा पर सरकारी धन खर्च करना, क्या धन की बर्बादी नहीं? दूसरे, जब बाटला हाउस में मारे गए आतंकियों पर कांग्रेस अध्यक्ष आंसू बहाती हो, उसकी बेटी द्वारा आतंकवाद को "फ़िज़ूल की बात" बताना कोई बड़ी बात नहीं। इतना ही नहीं, जब यूपीए कार्यकाल में आतंकवादी हमले हो रहे थे, तब कांग्रेस पार्टी इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने के लिए कभी "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से हिन्दू को बदनाम करने में व्यस्त थी। 

 

प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘प्रियंका गांधी कहती हैं कि आतंकवाद जैसी फिजूल बातों के लिए उनके पास टाइम नहीं है। ये कांगेस, सपा और बसपा वालों ने हमेशा आतंकवादियों को बचाने के लिए कोर्ट के दरवाजे खटखटाएं हैं। इन्होने वोटबैंक के लालच में देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई को कमजोर किया है।’

कांग्रेसी शासन काल में देश आंतकवाद से सबसे ज्यादा पीड़ित रहा है और देश कि दो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी इसके शिकार बने हैं। यूपीए शासनकाल में अक्सर कहीं ना कहीं आतंकी वारदात होते रहते थे। ऐसे में प्रियंका गांधी वाड्रा के आतंकवाद को फिजूल की बात बताए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इसी की बारे में चर्चा हो रही हैं। प्रियंका के बयान का वीडियो शेयर करते हुए बीजेपी नेता केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट किया, “आतंकवाद फ़िज़ूल की बात कहना देश रक्षा और सुरक्षा आतंकवादियों से लोहा लेते हुए बलिदानी सुरक्षा बलों का और हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों के घावों में नमक डालने का काम किया है। श्रीमती प्रियंका गांधी जी आपने इसके लिए देश माफ़ नहीं करेगा।”

सोशल मीडिया पर यूजर्स प्रियंका वाड्रा को लताड़ लगा रहे हैं।

मुख्यमंत्री चन्नी ने उड़ाया बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों का मजाक, प्रियंका गाँधी खड़ी मुस्कुराती रहीं

अनेकता में एकता का राग रागने वाली कांग्रेस का असली चेहरा उस नाजुक मोड़ पर सामने आया जब पंजाब के साथ उत्तर प्रदेश में भी  चुनाव हो रहे हैं, और ऐसे समय उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों का मजाक उड़ाना कांग्रेस को बहुत भारी पड़ने वाला है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो राहुल और प्रियंका कांग्रेस को पाताललोक में पहुंचाकर ही चैन की बांसुरी बजाएंगे। 
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार में कांग्रेस के अभियान का नेतृत्व करते हुए खुद को ‘उत्तर प्रदेश की बेटी’ बताती हैं, लेकिन पंजाब में घुसने के बाद उनका नजरिया बदल जाता है। पंजाब में पहुँचकर उनके लिए बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग बाहरी हो जाते हैं। वह उनके मजाक में साझेदार बन जाती हैं। पंजाब में जब कांग्रेस  मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के खिलाफ घृणा बढ़ाने वाली बात कर रहे थे, उन्हें प्रदेश से बाहर निकालने की बात कर रहे थे, तब प्रियंका गाँधी वाड्रा उनकी टिप्पणी का समर्थन करती नजर आईं।

15 फरवरी को चन्नी ने कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी के साथ पंजाब के रोपड़ में एक रैली को संबोधित किया था। अपने संबोधन के दौरान, चन्नी ने पंजाब में रहने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के खिलाफ नफरत फैलाई और उन्हें राज्य से बाहर निकालने का आह्वान किया। दिलचस्प बात यह है कि जब वह उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के खिलाफ नफरत का प्रचार कर रहे थे, कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गाँधी उनके बयान पर तालियाँ बजा रही थीं।

प्रियंका गाँधी ने चन्नी की सराहना करते हुए कहा, “समझदारी का इस्तेमाल करो। चुनाव का समय है। लंबी-लंबी बाते नहीं कहना चाहती। लेकिन पंजाब के लोगों, बहनों-भाइयों जो आपके सामने है, उसे ठीक से पहचानो। आपमें बहुत विवेक है। समझदारी है। उस समझदारी का इस्तेमाल करो। जो लोग बाहर से आकर आपको पंजाबियत सिखाते हैं, उन्हें पंजाबियत क्या है ये सिखाएँ। पंजाब, पंजाबियों का है। पंजाब को पंजाबी चलाएँगे। अपनी सरकार बनाओ। यहाँ कोई नई राजनीति नहीं मिलेगी। ये बाहर से जो आते हैं आपके पंजाब में उन्हें सिखाइए पंजाबियत क्या है। पंजाब मेरे ससुरालियों का गृह राज्य है।”

प्रियंका के इतना बोलते ही चन्नी अपने हाथ में माइक लेते हैं और कहते हैं, “प्रियंका पंजाबियाँ दी बहू है। यूपी दे, बिहार दे, दिल्ली दे भईए आके इते राज नई कर दे। यूपी के भइयों को पंजाब में फटकने नहीं देना है।” चन्नी के इतना कहते ही वहाँ मौजूद लोग जो बोले सो निहाल के नारे लगाने लगते हैं। इस दौरान प्रियंका हँसती रहती हैं और खुद भी नारे लगाना शुरू कर देती हैं। फिर तालियाँ बजाती हैं। पंजाबी में ‘भइए’ एक अपमानजनक शब्द है। यह शब्द उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए एक गाली की तरह है। 

अमित मालवीय ने साधा निशान

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “मंच से पंजाब के मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, बिहार वालों को अपमानित करते हैं और प्रियंका वाड्रा बगल में खड़े होकर हँस रही है, तालियाँ बजा रही हैं। ऐसे करेगी कांग्रेस उत्तर प्रदेश और देश का विकास? लोगों को आपस में लड़ाकर?”
पंजाब में 20 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं। वोटिंग एक ही चरण में होगी। परिणाम 10 मार्च को चार अन्य राज्यों उत्तर प्रदेश, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड के साथ घोषित किए जाएँगे।

अपने ससुर एवं दादा फिरोज जहांगीर गाँधी की कब्र पर फूल चढ़ाने नहीं जाओगे?”

आज इंदिरा गांधी के पति, राजीव गांधी के पिता, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के ससुर, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के दादा फिरोज खान गांधी की पुण्यतिथि है। लेकिन आज उनकी मजार सूनी पड़ी हुई है। इलाहाबाद प्रयाग के ममफोर्डगंज इलाके में स्थित पारसी कब्रिस्तान के उनकी मजार पर परिवार से ना कोई सजदा करने पहुंचा, ना ही कोई श्रद्धांजलि अर्पित करने आया। पुण्यतिथि पर फिरोज गांधी की कब्र को परिवार की ओर से एक फूल तक नसीब नहीं हुई। बात-बात पर ट्वीट करने वाले राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा ने अपने दादा की पुण्यतिथि पर एक भी ट्वीट नहीं किया है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि उनकी कब्र पर फूल चढ़ाने नहीं जाओगे?
फ़िरोज़ वो सांसद थे, जिनके संसद में खड़े होते ही ससुर जवाहर लाल नेहरू के पसीने बहने लगते थे, जबकि सांसद कांग्रेस से ही थे। फिरोज जहांगीर ने भ्रष्टाचार से कभी कोई समझौता नहीं किया। यदि इंदिरा गाँधी से लेकर राहुल और प्रियंका वाड्रा ने फिरोज जहांगीर का अनुसरण किया होता, परिवार की इतनी दुर्गति नहीं होती। लेकिन हैरानी इस बात पर है कि मेनका और वरुण तक अपने ससुर और दादा तक को स्मरण नहीं करते। इन नकली गांधियों द्वारा अपने ससुर एवं दादा को भूल जाने का कारण है, ये नकली गाँधी नहीं चाहते कि इनके मुस्लिम परिवार से होने की बात उजागर हो और हिन्दू बन जनता को पागल बनाकर वोट लेकर अपनी कुर्सी बचाए रखें। सास एवं दादी इंदिरा की समाधि पर फूलों के टोकरे लेकर पहुँच जाते हैं लेकिन दादा एवं ससुर की कब्र पर फूल की एक पत्ती तक नहीं। जो अपने पूर्वजों का नहीं हुआ, किसका होगा? सब बातें संस्कारों की होती हैं, जब मोती लाल ने अपने बाप और जवाहर ने अपने दादा मुग़ल युग में दिल्ली के कोतवाल ग्यासुद्दीन उर्फ़ गंगा धर के नहीं हुए, वही गंदे संस्कार उनकी फुलवारी में भी विराजमान हैं। जो अपने पूर्वजों को अपमानित करेगा/करेगी वही पूर्वज उनको दुनियां में उनको करेंगे, अपनी खुली आँखों से सब देख भी रहे हैं। 

पारसी परिवार से ताल्लुक रखने वाले फिरोज गांधी की शादी 1942 में इंदिरा गांधी से हुई थी।

प्रियंका वाड्रा ने फिर से देश को पप्पू बनाया, मोदी विरोध में रेलवे का नया नामकरण कर दिया

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज मोदी और योगी विरोधियों की हालत इतनी पतली हो गयी है कि अर्थ का अनर्थ करने को तुले हुए हैं।  
सोनिया, प्रियंका और राहुल को कम से कम इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में विपक्ष की भूमिका निभाते सत्तारूढ़ इंदिरा के दिल-ओ-दिमाग में ऐसी जगह बनायी की विषम परिस्थितियों में विपक्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी से जरूर परामर्श करती थी। लेकिन इंदिरा गाँधी और पी.वी.नरसिम्हा राव के बाद से कांग्रेस से राजनीतिक दृष्टि लुप्त होती चली गयी। जिस कारण विपक्ष में आते-आते कांग्रेस में कोई ऐसा नेता नहीं, जिससे सत्तारूढ़ भाजपा के नरेंद्र मोदी विषम परिस्थितियों में किसी भी विपक्षी पार्टी से परामर्श कर सके। 
जिसे देखो दुश्मन देश से गुप्त मंत्रणा कर जनता को मूर्ख बनाकर, मोदी पर एक के बाद दूसरा प्रहार करने से नहीं चूक रहे। कोई मोदी को हराने पाकिस्तान जा रहा है, कोई चीन, क्या ये लोग संविधान की शपथ लेकर संविधान के विरुद्ध काम कर संविधान को अपमानित नहीं कर रहे, क्यों ऐसे नेताओं को मान-सम्मान दिया जाए, यह निर्णय जनता को करना है। भारत के गौरवमयी वास्तविक इतिहास को धूमिल करने वाले भी ये ही लोग हैं। 
लोकतंत्र है विरोध करें या समर्थन ये उनका अपना हक है पर मोदी का विरोध करके आप समर्थन किसका कर रहे हो? ये बडा गंभीर सवाल है इसलिए निर्णय भी गंभीरता पूर्वक ही होना चाहिए। 
इनकी राजनीति नहीं बल्कि सियासत का नमूना देखिए:

क्या मुलायम, लालू, मायावती, सोनिया, राहुल, केजरीवाल, ममता बनर्जी, वामपंथी ये सब क्या नरेन्द्र मोदी से बेहतर है? या इनका रिकॉर्ड बेहतर?
क्या नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्रीकाल की तुलना मे ममता बनर्जी, अखिलेश आदि बेहतर नजर आता है? तुलना करनी है तो देखिए :
राजनीति मे प्रवेश के समय लालू और मुलायम,
दोनों के घर की ऐसी स्थिति थी की, 1 के घर पर साइकिल और एक के घर पर लालटेन खरीदने तक के पैसे नहीं थे, जाति के नाम पर चलने वाले नेता, आज अरबपति है। 
रामगोपाल चार्टर्ड प्लेन में घूमता है, तो शिवपाल महँगी ऑडी मे कहाँ से आया इतना अकुत धन? क्या ये लोग नरेन्द्र मोदी और योगी से बेहतर है ?
* सोनिया के बेटा-बेटी और दामाद आज सभी अरबपति है, 10 साल का  इनका राज हाल में ही  बीता है, क्या ये नरेन्द्र मोदी और योगी से बेहतर है?
* 35 साल बंगाल में राज करने वाले वामपंथी, नरेन्द्र मोदी से बेहतर है ?
* 5 साल केजरीवाल, 5 साल केजरीवाल, का विज्ञापन चलाकर दिल्ली के लोगों को चुना लगाने वाला, WIFI, CCTV, 150 कॉलेज, 500 स्कूल, मजहब देखकर सियासत करने वाला क्या ये नरेंद्र मोदी और योगी से बेहतर है?
* जब मायावती राजनीती करने निकली थी, और कांशीराम की साथी थी, तब उसके घर में दिया जलाने का धन नहीं था, साईकल से प्रचार करती थी, आज उसका सैंडल भी प्लेन से आता है, उसके भाई के पास 497 कंपनिया है, क्या मायावती नरेंद्र मोदी और योगी से बेहतर है?
Image may contain: 4 people, text that says 'दादी की नाक के दम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाली प्रियंका का दोगलापन भाजपा सरकार में गैंगस्टर विकास दुबे मारा गया कांग्रेस सरकार में जहरीली शराब पीने से 120 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई जिन कांग्रेसी सांसदों ने अपनी सरकार पर सवाल उठाए, उन्हें पार्टी से निकालने की तैयारी शुरु कर दी प्रियंका गांधी ने उसकी मौत पर घटिया राजनीति शुरु कर दी लेकिन प्रियंका के मुंह से एक शब्द नहीं फूटा'मोदी और योगी का विरोध करने वालो, विरोध करो, पर समर्थन किसका करना है ये तो तय करो। 
थोड़ा देश का भी सोचो, कितना बर्बाद करवाना है, कितना लूटवाना है? अरे बाहर निकलो जातियो के बंधनो से इसे उबारकर ये लूटेरे जनता को ही लूटते है। 
कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सियासत चमकाने का कोई मौका नहीं चूकती। लेकिन इस कोशिश में वह देश को पप्पू बनाने से भी बाज नहीं आती है। जिस तरह से इनके जुमले आ रहे हैं, निश्चित रूप से राहुल गाँधी को बहुत पीछे छोड़ बची-कुची कांग्रेस को एकदम हाशिये से भी नीचे लाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। इस दृष्टि से परिवार गुलाम ठीक काम कर रहे हैं कि अध्यक्ष परिवार का ही सदस्य रहेगा, चाहे कांग्रेस गड्ढे में ही क्यों न चली जाए। वैसे गद्दे में जाने से ज्यादा दूर नहीं। 
आज फिर प्रियंका वाड्रा ने ऐसा कुछ किया, जिससे उनके चमचे कुछ ज्यादा ही उछलने लगे। दरअसल मैडम वाड्रा ने अटके हुए रिजल्ट और परीक्षाओं को लेकर केंद्र पर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने एक ट्वीट किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में रेलवे का नया नामकरण कर दिया।
वाड्रा ने जुमले से बनाया पप्पू
प्रियंका वाड्रा ने कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा के परिणाम घोषित करने और रेलवे की परीक्षा को लेकर छात्रों की मांग का समर्थन करते हुए ट्वीट किया। प्रियंका ने अपने ट्वीट में लिखा, “SSC और रेलवे ने कई सारी परीक्षाओं के परिणाम सालों से रोक कर रखे हैं। किसी का रिजल्ट अटका हुआ है, किसी की परीक्षा। कब तक सरकार युवाओं के धैर्य की परीक्षा लेगी, कब तक? युवाओं की बात सुनिए सरकार। युवा को भाषण नहीं नौकरी चाहिए।
रेलवे का नामकरण ‘SSCRaliwaystudents’

इस ट्वीट के साथ मैडम वाड्रा ने #speakupforSSCRaliwaystudents शेयर किया। इसमें रेलवे का एक नया नाम ‘SSCRaliwaystudents’ दिया गया है। इस नाम के सामने आते ही सोशल मीड‍िया पर कांग्रेस के चमचे उछलने लगे। कांग्रेस के जो चमचे कल तक कोरोना काल में JEE और NEET की परीक्षा आयोजित करने का विरोध कर रहे थे, वे अचानक रेलवे की परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया में सक्रिय हो गए। 
प्रियंका के इस ट्वीट पर ट्विटर पर भी बहार आ गयी:





इससे पूर्व, ट्विटर पर आज प्रियंका का #SpeakUpForStudentSaftey ट्रेंड होता देख पूरी दुनिया हैरान-परेशान हो गई कि आखिर ये कौन सा शब्द है। यूजर्स ने पता लगाने की कोशिश कि ये ट्रेंड कहां से हो रहा है तो पता चला कि ये तो वाड्रा भौजी है। असल में नीट और जेईई परीक्षाओं को लेकर राबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक ट्वीट किया। प्रियंका ने ट्वीट के साथ हैशटैग SpeakUpForStudentSaftey इस्तेमाल किया। प्रियंका वाड्रा ने गलत अंग्रेजी लिखकर #SpeakUpForStudentSaftey को ट्रेंड करा पूरे भारतीयों को पप्पू बनाने की किस तरह कोशिश की आप भी देखिए- 



दिल्ली : हिन्दू युवक की मॉब लिंचिंग, मुस्लिम युवकों ने डंडों से पीट-पीट कर मार डाला, सेक्युलर गैंग ने साधी चुप्पी

                                                                    प्रतीकात्मक 
अगर किसी को दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, राहुल गाँधी, प्रियंका वाड्रा, #mob lynching, #not in my name, #award vapasi, #intolerance या फिर गंगा-जमुनी तहजीब राग-अलापने वाला गैंग कहीं दिखाई पड़े तो उनको बता दो कि विकासपुरी में डॉ नारंग, लाल कुआँ में मंदिर और घरों में घुसकर हिन्दू महिलाओं को प्रताड़ित करने और पूर्वी दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगों के बाद अब पश्चिमी दिल्ली में उनके शांतिदूतों ने एक हिन्दू लड़के की पीट-पीटकर हत्या कर दी। क्योकि अभी तक इन बिकाऊ गैंगस्टरों की कोई आवाज़ नहीं आयी, और पुलिस कार्यवाही पर जितने भी ये साम्प्रदायिक गैंग है, Victim Card खेलने मैदान में उतर आएंगे। कहेंगे कि गरीब है, मजलूम हैं, नासमझ हैं, जवानी के जोश में बहक गए थे, माफ़ कर, मामला ख़त्म करो। वैसे ये घटना अगस्त 28 की है। लेकिन क्षेत्रीय सांसद को चाहिए की, किसी भी हाल में इन गरीब, मजलूम हत्यारों पर कोई नरमी न बढ़ती जाए। मजे की बात, कोई लिबरल गैंग मीडिया भी नहीं बोल रहा, शायद इनके सूचना तंत्र कहीं आने-जाने योग्य नहीं है, इसलिए बिना किसी सबूत के उनकी TRP को संतुलित रखने वालों के खिलाफ बोल भी तो नहीं सकते, सर जी।    
दिल्ली मुख्यमंत्री केजरीवाल तो इसलिए चुप है कि ये घटनाएं दिल्ली में घटित हो रही हैं, उत्तर प्रदेश या फिर किसी भाजपा शासित राज्य में नहीं, जो इनका मुंह खुले। ये तो बस चुपचाप उपद्रवियों को सुरक्षा कवच देते रहेंगे। जैसाकि जेएनयू, लाल कुआँ, विकासपुरी और पूर्वी दिल्ली में देखने को मिला। दिल्लीवालों ने मुफ्त की रेवड़ियां खाने के चक्कर में कांग्रेस से अधिक विवादित पार्टी के हाथ में सत्ता थमा दी। वैसे केजरीवाल और जितने भी उपरोक्त गैंगस्टर हैं ये सब मजहब देखकर सियासत करने वाले हैं, क्योकि धर्म देख राजनीति करने में इन्हें साम्प्रदायिकता नज़र आने लगती है।    
पश्चिमी दिल्ली के नारायणा में एक हिन्दू युवक की मॉब लिंचिंग का मामला सामने आया है। शुक्रवार को चार मुस्लिम युवकों ने एक 32 वर्षीय राहुल को मोबाइल चोरी करने के आरोप में पीट-पीट कर मार डाला। लेकिन मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति की मॉब लिंचिंग पर तूफान खड़ा करने वाला तथाकथित सेक्युलर मीडिया इस घटना पर मौन है। इन लोगों को हिंदुओं की हो रही मॉब लिंचिंग दिखाई नहीं देती है। देश में हिंदुओं, दलितों, आदिवासियों के साथ मॉब लिंचिंग की घटनाएं आम हैं, लेकिन हिंदू विरोधी ताकतों को ये दिखाई नहीं देता है।
मॉब लिंचिंग की इस घटना को अंजाम देने वाले चार आरोपितों की पहचान मुश्ताक अहमद, उसके भाई शिराज अहमद, अनीश और इश्तिहार के रूप में हुई है, जिन्होंने राहुल को एक पेड़ से बांधकर डंडों और लोहे के छड़ों से उसे बेहरहमी से मारा। जिससे उसकी मौत हो गई। 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को चश्मदीद शेष कुमार ने बताया कि सुबह उसके पड़ोसी मुश्ताक अहमद, उसका भाई सिराज अहमद, अनीश और इश्तिहार (चारो लोहा मंडी के निवासी थे।) पार्क में इस लड़के की बुरी तरह से पिटाई कर रहे थे। उन्होंने लड़के को पेड़ से बाँधा हुआ था। और लाठी डंडों, पाइप और लोहे की रॉड से उसकी पिटाई कर रहे थे। उन लोगों ने उस व्यक्ति को तब तक मारा जब तक उसकी हालत बदतर नहीं हो गई। उसके बाद वे उसे छोड़ कर भाग गए।
डीसीपी दीपक पुरोहित ने बताया 28 अगस्त को पीसीआर कॉल से नारायणा के लोहा मंडी के एमसीडी पार्क में एक शख्स की हत्या की सूचना मिली थी। जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए नारायणा पुलिस स्टेशन की एक टीम घटना स्थल पर पहुँची तो उन्हें 32 साल के लड़के का शव पड़ा हुआ मिला। लड़के के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे।

पुलिस के मुताबिक, चारो आरोपितों को घटना के तुरंत बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया। राहुल और उसके साथियों ने मिलकर शिराज के सेलफोन को उसके ट्रक से चुरा लिया था। जिसके बाद राहुल के दोस्त फ़ोन लेकर भाग गए लेकिन राहुल उन लोगों के हत्थे चढ़ गया। जिस पर चारों आरोपितों ने उसकी इतनी पिटाई की कि उसे जान से हाथ धोना पड़ा।
हैरानी बात यह है कि मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति की मॉब लिंचिंग होने पर मोदी सरकार को कोसने वाला सेक्युलर मीडिया इस घटना को लेकर मैन है। उसे हिन्दू युवक का यह मॉब लिंचिंग दिखाई नहीं दे रहा है। अगर यह घटना किसी मुस्लिम युवक के साथ हुई होती, तो सेक्युलर गैंग टीवी चैनलों में बहस और सोशल मीडिया पर पोस्ट करते नजर आता। दिल्ली से लेकर बॉलीवुड तक सभी के हाथों में प्लेकार्ड और पोस्टर नजर आता। लेकिन आज सभी गायब है।
किसी भी व्यक्ति की हत्या मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख देती है, मरने वाला चाहे किसी भी धर्म, जाति या रंग का हो। लेकिन सेक्युलर गैंग और बुद्धिजीवी व्यक्ति के धर्म, जाति और रंग को आधार बनाकर विरोध करते हैं। महज क्षुद्र राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण कुछ लोग मोदी सरकार के खिलाफ मॉब लिंचिंग के नाम पर झूठ फैलाने से बाज नहीं आते हैं। सेक्युलर और टुकड़े-टुकड़े गैंग हमेशा पक्षपाती चिंता जाहिर कर अपना हित साधने की कोशिश करता है।  

‘बाबरी विध्वंस’ के लिए प्रियंका पर ओवैसी का कटाक्ष -- खुशी है कि अब नाटक नहीं कर रहे

ओवैसी प्रियंका गाँधी
अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन पाँच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगा। इस भूमि पूजन से पहले लगातार राजनीतिक बयानबाजी भी हो रही है। लेकिन इस सभी के बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने बयान जारी करते हुए कहा कि भूमि पूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रियंका के इस ट्वीट को लेकर उनकी खिंचाई की। ओवैसी ने कांग्रेस पार्टी पर उस ‘आंदोलन में योगदान देने का आरोप लगाया जिसने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।’ 
ओवैसी इस बात को भी भूल रहे हैं कि ताला भी कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के कार्यकाल में खुला था, और शिलान्यास भी। क्यों? उस समय ऐसी कौन-सी मजबूरी आ गयी थी, जो ताला खुलवाने से लेकर शिलान्यास तक हो गया? कुछ स्मरण भी आ रहा है कि विरोध का एक भी स्वर नहीं निकला था। ये नाटक क्या था? और आज चीख-चिल्लाट? उस समय शाहबानो के अलावा वो कौन-सा दबाव था, जिसने तब राम विरोधियों की आवाज़ बंद कर दी थी? और उस संगीन मामले के ठंठा होते ही वापस मंदिर मुद्दा कोर्ट में ले गए, ओवैसी साहब दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है, क्यों ठीक कहा ना? क्यों मुस्लिम होकर मुस्लिम के खून की होली खेली जा रही है? दंगे में हिन्दू ही नहीं मुसलमान भी मरता है 
ओवैसी ने प्रियंका गाँधी के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “खुशी है कि वे अब और नाटक नहीं कर रहे हैं। यह अच्छी बात है कि वो भी अतिवादी विचारधार को गले से लगा रही हैं। लेकिन भाईचारे के मुद्दे पर वो खोखली बातें क्यों करती हैं। शर्म मत कीजिए, आप इस बात पर गर्व महसूस करिए कि किस तरह से आपकी पार्टी ने उस आंदोलन में योगदान दिया, जिसकी वजह से हमारे बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।”

प्रियंका गाँधी वाड्रा ने अपने ट्वीट में लिखा था, “सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।” इसके साथ प्रियंका गाँधी ने अपना वक्तव्य भी शेयर किया है, जिसके अंत में उन्होंने ‘जय सियाराम’ लिखा है।
प्रियंका गाँधी वाड्रा की ओर से ये बयान तब आया, जब कांग्रेस की ओर से राम मंदिर को लेकर अलग-अलग तरह के बयान सामने आ रहे थे। एक तरफ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भूमि पूजन का समर्थन किया, साथ ही स्वागत भी किया। उन्होंने लोगों को भूमि पूजन की बधाई भी दी। इतना ही नहीं कमलनाथ ने अपने ट्विटर पर प्रोफाइल फोटो भी बदल ली है और भगवा वस्त्र में नज़र आ रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर दिग्विजय सिंह की ओर से भूमि पूजन के वक्त पर सवाल खड़े किए गए थे, उन्होंने कहा था कि अभी शुभ मुहूर्त नहीं है ऐसे में इसे कुछ वक्त के लिए टाल देना चाहिए।
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उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान राम के मंदिर बनाने की औपचारिक शुरुआत बुधवार (अगस्त 5, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र .....
इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह ने शुभ मुहूर्त ना होने और भाजपा नेताओं को कोरोना होने के कनेक्शन को जोड़ दिया था जिस पर काफी विवाद हुआ था। इन बयानों के बाद ही भाजपा की ओर से आरोप लगाया जा रहा था कि कॉन्ग्रेस एक बार फिर मंदिर निर्माण में अड़ंगा लगा रही है।

राममंदिर भूमि पूजन एकता का कार्यक्रम बनेगा: प्रियंका गाँधी

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान राम के मंदिर बनाने की औपचारिक शुरुआत बुधवार (अगस्त 5, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन में मंदिर की नींव रखने के साथ ही हो जाएगी। इसी क्रम में अब कांग्रेस नेता भी एक-एक कर के रामभक्त बनते जा रहे हैं। जो राम के अस्तित्व को काल्पनिक कहते थे, मन्दिर मुक्ति आंदोलन को साम्प्रदायिकता का नाम दिया जाता था, खुदाई में सबूतों को छुपाकर मंदिर में अवरोध उत्पन्न किये जा रहे थे, आज उसी कांग्रेस जनता की नब्ज को पढ़ हिन्दुओं के आराध्य पुरुषोत्तम श्रीराम को स्वीकार कर रहे हैं। इसमें नया नाम प्रियंका गाँधी का जुड़ा है, जिन्हें राज्य में पार्टी के पुनरुद्धार की कमान सौंपी गई है। प्रियंका गाँधी ने अयोध्या में राम मंदिर बनने के स्वागत किया है।
प्रियंका गाँधी ने कहा कि सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने। बता दें कि कांग्रेस पर अक्सर आरोप लगते हैं कि उसने सत्ता में रहते राम के अस्तित्व को नकार दिया था।
इतना ही नहीं, प्रियंका गाँधी ने तो यहाँ तक कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति में रामायण की गहरी और अमिट छाप है। उन्होंने कहा कि भगवान राम और सीता की गाथा हज़ारों वर्षों से भारत की संस्कृति और इतिहास का हिस्सा रही हैं। उन्होंने नीति, कर्तव्यपरायणता, धर्म, प्रेम, पराक्रम, सेवा और उदात्तता का प्रेरणास्रोत रामायण को ही करार दिया। उन्होंने राम ही नहीं बल्कि श्रीहरि के अन्य रूपों का भी गुणगान किया।

उन्होंने यहाँ तक कहा कि भगवान राम का चरित्र युगों-युगो से लोगों को जोड़ने का माध्यम रहा है। उन्होंने शबरी, सुग्रीव, वाल्मीकि, भास, कम्बन, कबीर, तुलसीदास, रैदास और वारिस अली शाह का जिक्र करते हुए कहा कि राम सबके हैं, सबके दाता हैं। मैथिलीशरण गुप्त और महाप्राण निराला जैसे कवियों का जिक्र करते हुए प्रियंका गाँधी ने राम के लिए उनके द्वारा दिए गए वक्तव्यों को याद किया।
जहाँ एक तरफ दिग्विजय सिंह और प्रमोद कृष्णन सरीखे कांग्रेस नेता बुधवार को होने वाले अयोध्या भूमिपूजन का विरोध करते हुए मुहूर्त पर सवाल उठा रहे हैं, प्रियंका ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि रामलला का ये कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व, सांस्कृतिक समागम का कार्यक्रम बनेगा। प्रियंका गाँधी ने कहा कि चारों दिशाओं में रामकथा अनगिनत रूपों में लोकप्रिय होती आ रही है।
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ आज 4 अगस्त के दिन एक बड़ा आयोजन कर रहे हैं। 5 अगस्त के दिन होने वाले राम मंदिर के भूमि पूजन से एक दिन पहले वह भोपाल स्थित अपने आवास पर हनुमान चालीसा का पाठ कराएँगे। इतना ही नहीं, इस दिन मध्य प्रदेश कांग्रेस के तमाम नेता अपने घरों या स्थानीय मंदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं।