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अपने ससुर एवं दादा फिरोज जहांगीर गाँधी की कब्र पर फूल चढ़ाने नहीं जाओगे?”

आज इंदिरा गांधी के पति, राजीव गांधी के पिता, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के ससुर, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के दादा फिरोज खान गांधी की पुण्यतिथि है। लेकिन आज उनकी मजार सूनी पड़ी हुई है। इलाहाबाद प्रयाग के ममफोर्डगंज इलाके में स्थित पारसी कब्रिस्तान के उनकी मजार पर परिवार से ना कोई सजदा करने पहुंचा, ना ही कोई श्रद्धांजलि अर्पित करने आया। पुण्यतिथि पर फिरोज गांधी की कब्र को परिवार की ओर से एक फूल तक नसीब नहीं हुई। बात-बात पर ट्वीट करने वाले राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा ने अपने दादा की पुण्यतिथि पर एक भी ट्वीट नहीं किया है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि उनकी कब्र पर फूल चढ़ाने नहीं जाओगे?
फ़िरोज़ वो सांसद थे, जिनके संसद में खड़े होते ही ससुर जवाहर लाल नेहरू के पसीने बहने लगते थे, जबकि सांसद कांग्रेस से ही थे। फिरोज जहांगीर ने भ्रष्टाचार से कभी कोई समझौता नहीं किया। यदि इंदिरा गाँधी से लेकर राहुल और प्रियंका वाड्रा ने फिरोज जहांगीर का अनुसरण किया होता, परिवार की इतनी दुर्गति नहीं होती। लेकिन हैरानी इस बात पर है कि मेनका और वरुण तक अपने ससुर और दादा तक को स्मरण नहीं करते। इन नकली गांधियों द्वारा अपने ससुर एवं दादा को भूल जाने का कारण है, ये नकली गाँधी नहीं चाहते कि इनके मुस्लिम परिवार से होने की बात उजागर हो और हिन्दू बन जनता को पागल बनाकर वोट लेकर अपनी कुर्सी बचाए रखें। सास एवं दादी इंदिरा की समाधि पर फूलों के टोकरे लेकर पहुँच जाते हैं लेकिन दादा एवं ससुर की कब्र पर फूल की एक पत्ती तक नहीं। जो अपने पूर्वजों का नहीं हुआ, किसका होगा? सब बातें संस्कारों की होती हैं, जब मोती लाल ने अपने बाप और जवाहर ने अपने दादा मुग़ल युग में दिल्ली के कोतवाल ग्यासुद्दीन उर्फ़ गंगा धर के नहीं हुए, वही गंदे संस्कार उनकी फुलवारी में भी विराजमान हैं। जो अपने पूर्वजों को अपमानित करेगा/करेगी वही पूर्वज उनको दुनियां में उनको करेंगे, अपनी खुली आँखों से सब देख भी रहे हैं। 

पारसी परिवार से ताल्लुक रखने वाले फिरोज गांधी की शादी 1942 में इंदिरा गांधी से हुई थी।

देश का एकलौता सांसद जिसने 9 वर्षों से नहीं ली सैलरी, बोले-पैसे कमाने के लिए नहीं होती राजनीति

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारतीय राजनीति में ऐसी मिसाल कम ही देखने को मिलती हैं, जिनमें नेता जो कहें, उन पर खुद भी अमल करें। लेकिन एक नेता ने अपने कहे पर अमल करके राजनीति में नई मिसाल कायम की है। बीजेपी सांसद वरुण गांधी अमीर सांसदों द्वारा अपना वेतन छोड़ने की मांग करते रहे हैं।
ऐसा नहीं है कि वे केवल दूसरे सांसदों को वेतन नहीं लेने की सलाह देते हैं बल्कि वे खुद भी वेतन नहीं ले रहे हैं। ZEE NEWS की रिपोर्ट के अनुसार, वरुण गांधी ने पिछले 9 साल से सांसद के रूप में मिलने वाले वेतन को गरीब और जरूरतमंदों में बांट रहे हैं। वेतन का एक पैसा भी वह अपने लिए इस्तेमाल नहीं करते हैं। वरुण गांधी सुल्तानपुर से सांसद हैं। वे अक्सर संसद सत्रों में जनहित के मुद्दों पर बहस नहीं होने और सांसदों के वेतन व भत्ते में होने वाले इजाफे पर चिंता जाहिर करते रहते हैं।
वरुण की गतिविधियों को देख सत्ता गलियारों में हमेशा से यह चर्चा रही है कि इन में अपने पिता संजय गाँधी के संस्कार बोलते हैं। क्योकि वरुण ही शायद ऐसे सांसद हैं, जो सांसदों के वेतन, वेतन वृद्धि एवं मिलने वाली पेंशन का विरोध करते रहे हैं। इतना जरूर है कि यदि भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने वरुण को थोड़ा भी आगे करने का प्रयत्न किया, संभव है मोदी-योगी-अमित को अपने प्रोग्राम किर्याविन्त करने में सहायक सिद्ध हों।
इतिहास पर दृष्टि डालने पर ऐसी ही घटना भारत के प्रथम महामहिम डॉ राजेन्द्र प्रसाद की मिलती है, जो अपने खर्चे से अधिक मिले शेष वेतन को प्रति माह राष्ट्रीय सुरक्षा फण्ड में देते थे। फिर चर्चित क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की, जिन्होंने अपने 6 वर्षीय राज्य सभा सांसद के रूप में मिले वेतन को अपने कार्यकाल की समाप्ति पर वापस कर दिया यानि बिना वेतन के सांसद।   
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई है। भारत में हर नागरिक को आवाज उठानी चाहिए,...

उन्होंने इस साल के शुरू में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से अपील की थी कि आर्थिक रूप से सम्पन्न सांसदों द्वारा 16वीं लोकसभा के बचे कार्यकाल में अपना वेतन छोड़ने के लिए आंदोलन शुरू करें। लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में वरुण गांधी ने कहा था कि भारत में असमानता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। भारत में एक प्रतिशत अमीर लोग देश की कुल संपदा के 60 प्रतिशत के मालिक हैं। भारत में 84 अरबपतियों के पास देश की 70 प्रतिशत संपदा है। यह खाई हमारे लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।
उन्होंने पत्र में लिखा था, ‘स्पीकर महोदया से मेरा निवेदन है कि आर्थिक रूप से सम्पन्न सांसदों द्वारा 16वीं लोकसभा के बचे कार्यकाल में अपना वेतन छोड़ने के लिए आंदोलन शुरू करें। ऐसी स्वैच्छिक पहल से हम निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता को लेकर देशभर में एक सकारात्मक संदेश जाएगा।’ वरुण गांधी ने इस बात पर खुद ही शुरू से अमल कर रहे हैं। वह पिछले 9 वर्षों से सांसद के तौर पर वेतन के रूप में मिलने वाले पैसे का अपने ऊपर इस्तेमाल नहीं करते हैं, बल्कि वेतन की पूरी रकम को गरीबों पर खर्च कर देते हैं।
इसमें कोई दो राय भी नहीं कि किसी भी सदन में निर्वाचित या चुनाव लड़ने वाला आर्थिक रूप से कमजोर नहीं होता। किसी न किसी व्यापार से आते हैं। लेकिन जब जनसेवा के नाम पर वेतन और मुफ्त सेवाओं पर खर्च होने वाला धन देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। ऊपर से निर्वाचित होने पर मिलने वाली पेंशन एक बोझ बन रही हैं, जिस पर किसी जनसेवक ने मन्थन करने का साहस तक नहीं किया। शायद यही कारण है बजट का घाटे में होना। महंगाई पर कोई लगाम नहीं। आखिर तेल तो तिलों में से ही निकलेगा।  
अभी हाल ही में उन्होंने एक ऐसे ही जरूरतमंद रामजी गुप्ता को ढाई लाख रुपये की आर्थिक मदद की थी। रामजी गुप्ता को कैंसर से जूझ रहे अपने पिता के इलाज के लिए पैसे की जरूरत थी और उन्होंने इसके लिए वरुण गांधी से आर्थिक मदद की अपील की। वरुण गांधी ने रामजी गुप्ता की जरूरत को देखते हुए उन्होंने तत्काल ढाई लाख रुपये की मदद महैया कराई। इससे पहले वरुण गांधी ने सुल्तापुर के एक किसान को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराई थी।
जानकारी के मुताबिक, बीजेपी सांसद 13 जिलों के जरूरतमंद किसानों को मदद पहुंचा चुके हैं। सुल्तानपुर में वह दो दर्जन गरीब लोगों का घर भी अपने पैसों से बनवा चुके हैं। इस मदद के पीछे वरुण गांधी तर्क देते हैं कि वह राजनीति में पैसा कमाने के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद की जा सकती है।

प्रियंका का मास्टरस्ट्रोक! जल्दी एक होना वाला है गाँधी परिवार

लंबे इंतज़ार के बाद प्रियंका गाँधी का सक्रीय राजनीति में पदापर्ण हो ही गया है. प्रियंका का राजनीती में आना कांग्रेस पार्टी के लिए संजीवनी बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि, प्रियंका के आने से पार्टी को और मज़बूती मिलेगी और कई राज्यों में जनाधार खो चुकी पार्टी उठ खड़ी होगी. सूत्र तो ये तक बता रहे हैं की प्रियंका जल्द बड़ा धमाका भी कर सकतीं हैं.
फिलहाल वो अपना राजनितिक सफर अपने भाई राहुल गाँधी की तर्ज पर सॉफ्ट हिंदुत्व कि राह पर चलकर आगे बढ़ेंगी. अपना पदभार ग्रहण करने से पहले प्रियंका कुंभ में डुबकी भी लगाएंगी. कहा तो ये भी जा रहा है कि पदभार ग्रहण करते ही प्रियंका गाँधी का भी एक मास्टरस्ट्रोक सामने आने वाला हैं. सूत्र बताते है कि प्रियंका अपने चचेरे भाई वरुण गाँधी को कांग्रेस में लाने के लिए पूरी जुगत लगा ली हैं. सिर्फ कुछ मुद्दों पर ही बातचीत बाकी है. कोंग्रेसी के अंदरूनी सूत्र तो ये तक बता रहे हैं की बहन प्रियंका ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को भी मना लिया है. बात सिर्फ वरुण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पुराने पारिवारिक भेदभाव भुला कर चाची मेनका को भी वापस बुलाने की कोशिशें तेज हो चुकी है. और इनको माध्यम बनाकर मेनका के प्रभाव में कुछ छोटी पार्टियों को भी एनडीए से अपनी ओर खींचने का प्रयास हो रहा है. अब यही देखना है कि औपचारिक घोषणा कब होती है.
गली-कूचे से लेकर भाजपा उच्च पदाधिकारी तक प्रियंका पर वाद-प्रतिवाद करते नज़र आते हैं, लेकिन घर में लगने वाली आग को नहीं देख रहे। .उस समय सत्ता के लालच में जनसंघ के कार्यकाल से कमर्ठ कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज कर अवसरवादियों को सिर का ताज बनाकर मस्ती में मस्त हो गए.  और यही मस्ती चुनाव दिनों में संकट उत्पन्न कर रातों की नींद हराम कर देती है.
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बीजेपी के युवा नेता वरुण गांधी पिछले कुछ समय में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर आलोचक रहे हैं। कई मौकों पर उन्‍हो.....

खबर ये भी है कि, प्रियंका और वरुण के बीच इसको लेकर कई बार बात भी हुई हैं. वैसे यह सब जानते है कि प्रियंका और वरुण के बीच रिश्ते हमेशा से अच्छे रहे हैं. इसलिए ये कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी 10 फ़रवरी को लखनऊ में होने वाले रैली वरुण गाँधी उपस्थित रहे रहेंगे. कहा जा रहा है उसी मंच से वरुण गाँधी रैली को सम्बोधित भी करेंगे .

पिछले कई सालों से बीजेपी ने वरुण गाँधी को अलग-थलग कर दिया हैं, ना ही उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई ना ही कोई बड़ा पद दिया गया है. खुद वरुण गाँधी पार्टी से नाराज चल रहे हैं. इन सब के बीच वरुण का कांग्रेस में शामिल होने कि खबर काफी तेज़ हो गयी हैं. अगर प्रियंका वरुण गाँधी के गुस्से को भुनाने में कामयाब हुई तो ये कोंग्रेस के किये उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ी जीत होगी. साथ ही उत्तर प्रदेश में मर चुकी कांग्रेस अपने पैरों पर उठ खड़ी होगी.
कांग्रेस नेता के भी आपत्तिजनक बोल : BJP के पास चिकने नहीं खुरदरे चेहरे
अब कांग्रेस के नेता ने ही उनको लेकर अजीबो-गरीब प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर जवाब देते हुए मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री सज्जन सिंह वर्मा कुछ ऐसा बोल गए, जो कि उनकी पार्टी को भी पसंद ना आए। 
सज्जन सिंह वर्मा ने कहा, 'बीजेपी का दुर्भाग्य है कि उनकी पार्टी में खुरदरे चेहरे हैं, ऐसे चेहरे जिनको लोग नापसंद करते हैं। एक हेमा मालिनी है, उसको जगह-जगह साहित्य नृत्य कराते रहते हैं, वोट कमाने की कोशिश करते हैं। चिकने चेहरे उनके पास नहीं हैं।' 
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Sajjan Singh Verma, MP minister: Mera ye kehna hai ki eshwar ke pradatt manav hota hai...Arey sarahna karo ki eshwar ne Priyanka Gandhi ko itna sundar banaya hai jisse mamatva, sneh jhalakta hai. Aise shabdon ka istemal karke apni garima Kailash ji aur BJP gira rahi hai. (2/2) pic.twitter.com/YrzKzlSPTA
उन्होंने कहा, 'मेरे ये कहना है कि ईश्वर के प्रदत्त मानव होता है...अरे सराहना करो कि ईश्वर ने प्रियंका गांधी को इतना सुंदर बनाया है, जिससे ममत्व, स्नेह झलकता है। ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करके अपनी गरिमा कैलाश जी और बीजेपी गिरा रहे हैं।'

क्या वरुण भाजपा को छोड़ कांग्रेस में वापस जाएंगे?

Varun Gandhiबीजेपी के युवा नेता वरुण गांधी पिछले कुछ समय में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर आलोचक रहे हैं। कई मौकों पर उन्‍होंने सरकार पर अपरोक्ष हमला बोला, जिसके बाद ऐसी अटकलें लगाई जाने लगीं कि वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व से खफा हैं। इस बीच ऐसी अटकलों ने भी खूब जोड़ पकड़ा कि वह बीजेपी को छोड़ कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं, जिस पार्टी के आलाकमान से उनका पारिवारिक नाता है।
वरुण के कांग्रेस से जुड़ने की अटकलों को प्रियंका गांधी के दो दिन पहले जनवरी 23 को राजनीति में आने के औपचारिक ऐलान के बाद और बल मिला, जिनके साथ उनके संबंध 'अच्‍छे' बताए जाते हैं। इस बारे में कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी से भी सवाल किया गया, जो ओडिशा के दौरे पर हैं। भुवनेश्‍वर में पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि क्‍या गांधी-नेहरू परिवार की मौजूदा पीढ़ी के सभी सदस्‍य साथ आने वाले हैं तो इस पर कुछ भी साफ-साफ कहने से बचते हुए उन्‍होंने सिर्फ इतना कहा, 'मैंने इस तरह की अटकलों के बारे में नहीं सुना।'
राहुल ने वरुण के कांग्रेस से जुड़ने की अटकलों को खारिज नहीं किया। वरुण फिलहाल उत्तर प्रदेश में सुल्‍तानपुर से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा सांसद हैं और उनकी मां मेनका गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र की सरकार में महिला एवं विकास मंत्री हैं।
वरुण के कांग्रेस में जाने की अटकले अब कोई नयी बात नहीं,वास्तव में 2014 चुनाव सम्पन्न होने के बाद से ही यह समाचार सुर्ख़ियों में है। हालाँकि मेनका भी चर्चा में रही। लेकिन सूत्रों के अनुसार मेनका का घर से निकलवाने में सोनिया गाँधी का हाथ होने के कारण, मेनका के उस पीड़ा को स्मरण करने पर, अब तक यह इसलिए संभव नहीं हो पाया। लेकिन राजनीति में कोई किसी का दुश्मन नहीं होता, बंद कमरे में सब एक थाली में बैठकर खाते-पीते हैं। कौन कब किस पाले में जा बैठे, कहना असम्भव है। 

सोशल मीडिया पर वरुण गाँधी की आपत्तिजनक फोटोज

Embeddedसेक्स बहुत गन्दी चीज है, इसके बावजूद आज हम डेढ़ सौ करोड़ तक पहुँच गये है। बच्चों को सेक्स की शिक्षा देना चाहिए, तर्कपूर्ण सहमति है। लेकिन सेक्स की ताकत देखिये और उसका अंतर्विरोध, जब तक गोपनीय है, ग्राह्य है, परम आनंद की पराकाष्ठा है, उघर गया तो आपको समूल नष्ट कर देगा।
जो समाज इस अंतर्द्वंद पर खड़ा है, उसकी भ्रूण हत्या तय है। एक वाक्या सुनिये। बाबू जगजीवन राम बहुत बड़ी शख्सियत थे, उनके बेटे सुरेश राम किसी होटल में अपनी महिला मित्र के साथ नग्न अवस्था में देखे गए। दुनिया में समय से बड़ा बलवान कोई नहीं। एक समय था जब मेनका ने अगस्त, 1978 में मेनका गांधी के संपादन में छपने वाली सूर्या मैगजीन में बाबू जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम का कथित 'सैक्स स्कैंडल' छापा गया। मैगजीन के दो पन्नों में सुरेश राम और दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा के अंतरंग पलों को बिना सेंसर किये हुए छापा गया था। खास बात यह है कि सुरेश राम अपने पिता की तरह राजनीति में नहीं थे।
इस खबर का नकारात्मक असर तब के रक्षा मंत्री और दलित नेता बाबू जगजीवन राम पर पड़ना था और पड़ा भी। यह खबर सिर्फ तत्कालीन रक्षामंत्री और उस समय देश से सबसे बड़े दलित नेता जगजीवन राम को बदनाम करने की साजिश थी।
इतना ही नही आज वरुण पर आरोप लग रहा है कि वरुण इस फोटो के बदले देश की सारी गुप्त बातें आर्म्स डीलर को देते रहे। यानी वरुण देश द्रोही हैं। पीएमओ के पास इसका खुलासा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपातकाल में मेनका गांधी की भूमिका का बदला इस तरह लिया जा रहा है। नहले पर दहला तो आना स्वाभाविक है। उस समय मेनका गाँधी ने सुरेश राम की आपत्तिजनक अवस्था में चित्र प्रकाशित कर जगजीवन राम के रास्ते में काँटों का जाल बिछाकर प्रधानमंत्री बनने से वंचित तो कर दिया, परन्तु उनके विरोधियों ने उन्ही के सांसद पुत्र वरुण की आपत्तिजनक चित्रों को उजागर कर दिया। शायद यही कारण है, इतना ओजस्वी वक्ता होने के कारण इनको चुनाव प्रचार में पीछे रखा जाता है। और माँ-बेटा 
"वरुण गाँधी: नामी पिता का नामी पुत्र.......! मोदी की पार्टी का सच्चा सेनानी...!"
पत्रकारों पर सरकारी डंडा चलाने की इच्छा रखने वाली मेनका गांधी का अपना पत्रकारिता का इतिहास ज्यादा उज्ज्वल नहीं है. मेनका गांधी की पत्रिका सूर्या मैगजीन ने अपने समय में जिस तरह की पत्रकारिता की उसे पत्रकारिता के दामन पर काला धब्बा कहा जा सकता है.
1977 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी चुनाव हार चुकी थीं. केंद्र में जनता पार्टी के नेतृत्व में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ था. मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री थे और बाबू जगजीवन राम रक्षामंत्री.
sureshsex2.jpgसूर्या मैगजीन में छपी फोटो
अगस्त, 1978 में मेनका गांधी के संपादन में छपने वाली सूर्या मैगजीन में बाबू जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम का कथित 'सैक्स स्कैंडल' छापा गया. मैगजीन के दो पन्नों में सुरेश राम और दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा सुमन चौधरी (काल्पनिक नाम) के अंतरंग पलों को बिना सेंसर किये हुए छापा गया था. खास बात यह है कि सुरेश राम अपने पिता की तरह राजनीति में नहीं थे.
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राजनीति और पत्रकारिता के इतिहास में ऐसे कम ही मौके आए होंगे जब निहित स्वार्थों के कारण विरोधियों की छवि खराब करने के लिए उसके निजी जीवन और अंतरंग पलों को सार्वजनिक कर दिया गया. 
जिस आधार पर आज मेनका गांधी रॉयटर्स के पत्रकारों की मान्यता रद्द करवाना चाहती हैं उस आधार पर किसी जमाने में मेनका की सूर्या मैगजीन को प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए था. 
इस खबर का नकारात्मक असर बाबू जगजीनवन राम के राजनीतिक जीवन पर पड़ा. आज इस तरह की पत्रकारिता को अपराध की श्रेणी में रखा जाता है और छापने वाले की जगह जेल में हो सकती है. उस समय जिस व्यक्ति ने यह स्टिंग किया वे आज एक नेता और राज्यसभा सदस्य हैं. बाद में उन्होंने कहा था कि यह साफ-साफ एक अपराध है. यह खबर सिर्फ तत्कालीन रक्षामंत्री और उस समय देश से सबसे बड़े दलित नेता जगजीवन राम को बदनाम करने की साजिश थी.
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सेक्स बहुत गन्दी चीज है, इसके बावजूद आज हम डेढ़ सौ करोड़ तक पहुँच गये है। बच्चों को सेक्स की शिक्षा देना चाहिए, तर्कपू.....

रॉयटर्स की रिपोर्ट से मेनका गाांधी असहमत हो सकतीं हैं, लेकिन मेनका गांधी ने जो आज से 38 साल पहले जो किया था वह अपराध की श्रेणी में रखा में जा सकता है. मेनका गांधी को और ज्यादा लोकतांत्रिक और उदारमना होने की जरूरत है.
पत्रकारिता में जब किसी भी व्यक्ति या संस्थान को खबर से आपत्ति होती है तो वह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) का दरवाजा खटखटाता है या कोर्ट की शरण में जा सकता है.
उन्होंने पीसीआई और कोर्ट में अपनी बात रखने की जगह सीधे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के जरिए फरमान जारी कर दिया. एक तरह से उन्होंने सरकारी डंडा फटकारने की कोशिश पत्रकारों के साथ की.