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मुख्यमंत्री चन्नी ने उड़ाया बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों का मजाक, प्रियंका गाँधी खड़ी मुस्कुराती रहीं

अनेकता में एकता का राग रागने वाली कांग्रेस का असली चेहरा उस नाजुक मोड़ पर सामने आया जब पंजाब के साथ उत्तर प्रदेश में भी  चुनाव हो रहे हैं, और ऐसे समय उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों का मजाक उड़ाना कांग्रेस को बहुत भारी पड़ने वाला है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो राहुल और प्रियंका कांग्रेस को पाताललोक में पहुंचाकर ही चैन की बांसुरी बजाएंगे। 
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार में कांग्रेस के अभियान का नेतृत्व करते हुए खुद को ‘उत्तर प्रदेश की बेटी’ बताती हैं, लेकिन पंजाब में घुसने के बाद उनका नजरिया बदल जाता है। पंजाब में पहुँचकर उनके लिए बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग बाहरी हो जाते हैं। वह उनके मजाक में साझेदार बन जाती हैं। पंजाब में जब कांग्रेस  मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के खिलाफ घृणा बढ़ाने वाली बात कर रहे थे, उन्हें प्रदेश से बाहर निकालने की बात कर रहे थे, तब प्रियंका गाँधी वाड्रा उनकी टिप्पणी का समर्थन करती नजर आईं।

15 फरवरी को चन्नी ने कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी के साथ पंजाब के रोपड़ में एक रैली को संबोधित किया था। अपने संबोधन के दौरान, चन्नी ने पंजाब में रहने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के खिलाफ नफरत फैलाई और उन्हें राज्य से बाहर निकालने का आह्वान किया। दिलचस्प बात यह है कि जब वह उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के खिलाफ नफरत का प्रचार कर रहे थे, कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गाँधी उनके बयान पर तालियाँ बजा रही थीं।

प्रियंका गाँधी ने चन्नी की सराहना करते हुए कहा, “समझदारी का इस्तेमाल करो। चुनाव का समय है। लंबी-लंबी बाते नहीं कहना चाहती। लेकिन पंजाब के लोगों, बहनों-भाइयों जो आपके सामने है, उसे ठीक से पहचानो। आपमें बहुत विवेक है। समझदारी है। उस समझदारी का इस्तेमाल करो। जो लोग बाहर से आकर आपको पंजाबियत सिखाते हैं, उन्हें पंजाबियत क्या है ये सिखाएँ। पंजाब, पंजाबियों का है। पंजाब को पंजाबी चलाएँगे। अपनी सरकार बनाओ। यहाँ कोई नई राजनीति नहीं मिलेगी। ये बाहर से जो आते हैं आपके पंजाब में उन्हें सिखाइए पंजाबियत क्या है। पंजाब मेरे ससुरालियों का गृह राज्य है।”

प्रियंका के इतना बोलते ही चन्नी अपने हाथ में माइक लेते हैं और कहते हैं, “प्रियंका पंजाबियाँ दी बहू है। यूपी दे, बिहार दे, दिल्ली दे भईए आके इते राज नई कर दे। यूपी के भइयों को पंजाब में फटकने नहीं देना है।” चन्नी के इतना कहते ही वहाँ मौजूद लोग जो बोले सो निहाल के नारे लगाने लगते हैं। इस दौरान प्रियंका हँसती रहती हैं और खुद भी नारे लगाना शुरू कर देती हैं। फिर तालियाँ बजाती हैं। पंजाबी में ‘भइए’ एक अपमानजनक शब्द है। यह शब्द उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए एक गाली की तरह है। 

अमित मालवीय ने साधा निशान

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “मंच से पंजाब के मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, बिहार वालों को अपमानित करते हैं और प्रियंका वाड्रा बगल में खड़े होकर हँस रही है, तालियाँ बजा रही हैं। ऐसे करेगी कांग्रेस उत्तर प्रदेश और देश का विकास? लोगों को आपस में लड़ाकर?”
पंजाब में 20 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं। वोटिंग एक ही चरण में होगी। परिणाम 10 मार्च को चार अन्य राज्यों उत्तर प्रदेश, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड के साथ घोषित किए जाएँगे।

‘रात के 1-2 बजे फोन करके महिला IAS को परेशान करता था चन्नी’: कैप्टन अमरिंदर सिंह का खुलासा

                                     कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने लगाया सीएम चन्नी पर आरोप
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रदेश के वर्तमान सीएम चन्नी को लेकर गंभीर खुलासे किए हैं। उन्होंने इंडिया टुडे को दिए अपने साक्षात्कार में बताया की सीएम चन्नी पर एक महिला अधिकारी को परेशान करने के आरोप थे, जिसे लेकर महिला ने उनसे शिकायत भी की थी। जब इस संबंध में चन्नी से सवाल-जवाब हुआ तो उन्हें महिला अधिकारी से माफी माँगनी पड़ी थी।

इंडिया टुडे को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, “एक बार जब मैं रात में घर आया तो दो आईएएस पति-पत्नी मेरे घर में बैठे थे। उन्होंने मुझसे कहा कि उन्हें बात करनी है। मैंने कहा-बताएँ। वो बोले कि ये जो चन्नी है न, जब मैं रोपड़ में एसडीएम थी, मुझे ये तंग करता था। रात के एक-दो बजे फोन करता था। मैंने कहा कि ये तो बहुत बुरी चीज है। मैंने अगले दिन चन्नी को बुलाया और पूछा कि तू ये बात करता है क्या ऑफिसर्स के साथ। पहले मुकरा। फिर बोला मेरे से गलती हो गई। मैंने कहा- जा उनसे माफी माँग कर आ। अगर वो दोनों माफी देते हैं तो ठीक वरना मुझे एक्शन लेना होगा। तो ये गया और उन्होंने माफी दे दी। लेकिन ये सवाल कि ये मीटू का हिस्सा था या नहीं। ये तो साफ ही है अधिकारियों ने जब बोला है तो।”

कैप्टन अमरिंदर सिंह कहते हैं कि अगर इस मामले में महिला अधिकारी चन्नी को माफी नहीं देती तो फिर वो एक्शन लेते। मालूम हो कि इस इंटरव्यू में चन्नी के ऊपर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बालू खनन के आरोप भी मढ़े थे और कहा था कि जो जाँच हो रही है, उसे छोड़ भी दें, तो उनकी रिपोर्ट बताती है कि बालू खनन में चन्नी का नाम भी होना चाहिए।

चन्नी के अलावा पंजाब के पूर्व सीएम ने बीते रविवार को कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू पर भी निशाना साधा है। उन्होंने सिद्धू को लेकर कहा कि उनके पास कोई दिमाग नहीं है। कैप्टन ने कहा कि उन्होंने 5 साल पहले इस अक्षम व्यक्ति को पार्टी में शामिल नहीं करने के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को सलाह दी थी।

पंजाब : केजरीवाल ने भगवंत मान को आगे नहीं किया है बल्कि हालात देख अपने पैर पीछे खींचे हैं

राकेश सैन, उगता भारत 

पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियों का सिंहावलोकन करने पर सामने आएगा कि राज्य में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता का खजाना सिकुड़ता-सा नजर आ रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी पंजाब में आन्धी की तरह आई।

सांसद भगवंत मान को पंजाब में आम आदमी पार्टी का मुख्यमन्त्री का चेहरा घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रश्न पूछा जा रहा है कि पार्टी के सर्वेसर्वा दिल्ली के मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवाल ने इस राज्य में अपने पैर पीछे क्यों खींच लिए ? पिछले तीन-चार महीनों से पंजाब की दीवारें इस नारे के साथ पाट दी गईं कि ‘इक मौका-केजरीवाल नूं’ तो यकायक नया नारा क्यों दे दिया कि ‘इक मौका-भगवंत मान नूं ?’

पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियों का सिंहावलोकन करने पर सामने आएगा कि राज्य में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता का खजाना सिकुड़ता-सा नजर आ रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी पंजाब में आन्धी की तरह आई। राज्य के बड़े राजनीतिक चेहरों के साथ-साथ दूसरे दलों के असन्तुष्टों, युवाओं, विदेशों में बड़ी संख्या में रह रहे अनिवासी भारतीयों, यहां तक कि सिविल सोसाइटी व बुद्धिजीवी वर्ग ने भी दिल्ली की इस सनसनी को हाथों-हाथ लिया। विगत चुनावों में तत्कालीन अकाली दल बादल और भारतीय जनता पार्टी गठजोड़ वाली सरकार के खिलाफ जनाक्रोश भी काफी था जिसको चलते लग रहा था कि आम आदमी पार्टी बाजी मार जाएगी। केजरीवाल भी दिल्ली जैसे आधे-अधूरे राज्य को छोड़ पंजाब जैसे पूर्ण प्रान्त को अपनी राजनीति का केन्द्र बनाने को लालायित दिखे। नारा दिया गया कि ‘केजरीवाल-केजरीवाल सारा पंजाब तेरे नाल।’ इस दावे का आधार भी था क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनावों में पंजाब से आम आदमी पार्टी के चार सांसदों ने पहली बार अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। परन्तु इस सारी कवायद का परिणाम निकला वही ढाक के तीन पात, राज्य की 117 विधानसभा सीटों में 100 सीटों का दावा करने वाली दिल्ली की इस पार्टी को मात्र 20 सीटों पर संतोष करना पड़ा। केजरीवाल के नारे को लेकर पंजाब के लोग उपहास में कहने लगे ‘केजरीवाल-केजरीवाल एह की होया तेरे नाल।’
पंजाब में पिछले पांच सालों में आम आदमी पार्टी की राजनीतिक ताकत कमजोर हुई है। विगत विधानसभा चुनावों के बाद बड़े-बड़े चेहरे पार्टी को छोड़ गए। इस दौरान राज्य में हुए आधा दर्जन विधानसभा उपचुनावों में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अपनी जमानतें तक नहीं बचा पाए। 2019 के लोकसभा चुनावों में लोकसभा सांसदों की संख्या चार से घट कर केवल एक रह गई और भगवंत मान ही पार्टी की थोड़ी बहुत इज्जत बचा पाए। ग्रामीण व निकाय चुनावों में भी पार्टी फिसड्डी रही। केवल इतना ही नहीं, पार्टी के 20 विधायकों में भी पार्टी नेतृत्व को लेकर असन्तोष पनपने लगा और पांच सालों में आधा दर्जन विधायक आम आदमी पार्टी को छोड़ गए। केवल इतना ही नहीं कुछ दिन पहले फिरोजपुर (ग्रामीण) विधानसभा क्षेत्र के आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार ने ही पार्टी छोड़ दी। देश के इतिहास में शायद यह पहली बार सुनने को मिला कि किसी उम्मीदवार ने भाग-दौड़ करके किसी पार्टी की टिकट प्राप्त की हो और मतदान की तारीख की घोषणा होते ही पार्टी छोड़ दी हो। यह सब आम आदमी पार्टी की गिरती साख व लोकप्रियता की निशानियां बताई जा रही हैं।

अब पंजाब को एक बार फिर जीतने की मंशा से निकले केजरीवाल ने तीन-चार महीने पहले रैलियां, रोड शो और विभिन्न वर्गों के साथ बैठकें आयोजित करनी शुरू कर दीं परन्तु ये आयोजन उनके पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान किए गए कार्यक्रमों के मुकाबले फीके दिखे। शायद यही कारण है कि केजरीवाल ने अब अपने पैर खींच कर भगवंत मान को आगे कर दिया है। भगवंत मान को मुख्यमन्त्री का चेहरा घोषित करने के लिए चाहे केजरीवाल ने चिर-परिचित राजनीतिक स्टण्ट किया और लोकमत से नाम घोषित करने का दावा किया परन्तु वे इस मोर्चे पर भी गच्चा खा गए और उन्होंने स्वयं स्वीकार कर लिया कि पंजाब में पार्टी की ताकत पहले जैसी नहीं रही।
पंजाब के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेण्ट एण्ड कम्यूनिकेशन के निदेशक डॉक्टर प्रमोद कुमार कहते हैं कि इस बार विधानसभा चुनाव में पाँच पार्टियों की लड़ाई है। हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता कम हुई है क्योंकि भगवंत मान को मुख्यमन्त्री बनाने के लिए केवल 21 लाख लोगों ने वोट डाले जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए 36.62 लाख लोगों ने वोट किया था, जो कुल मतों का 23.28 प्रतिशत था। अगर उनकी लोकप्रियता बढ़ी होती तो 36 लाख से ज़्यादा लोगों को मुख्यमन्त्री के नाम पर मुहर लगाने के लिए हुए वोट में हिस्सा लेना चाहिए था। ज्ञात रहे कि मान को 21 लाख लोगों द्वारा पसन्द किए जाने का आंकड़ा भी खुद केजरीवाल का ही है, किसी निष्पक्ष एजेंसी का नहीं। अगर इस आंकड़े को सही भी मान लें तो इसमें वर्गीकरण किया जाना सम्भव नहीं कि फोन के माध्यम से अपना मत रखने वाले लोग पंजाब के ही थे या किसी दूसरे राज्य के भी। फिलहाल केजरीवाल का 21 लाख का स्वघोषित आंकड़ा भी बताता है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता घटी है।

केजरीवाल चाहे भगवंत मान को अपनी व लोगों की पसन्द बता रहे हैं परन्तु सच्चाई अलग ही सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मान न मान, केजरीवाल की मजबूरी बन गए थे भगवंत मान वाली हालत बन गई थी। किसी बड़े चेहरे की तलाश में पूरी जोड़तोड़ के बाद ही अन्त में सांसद भगवंत मान को मुख्यमन्त्री का चेहरा बनाया गया। बॉलीवुड कलाकार सोनू सूद से लेकर दुबई के होटल कारोबारी एसपीएस ओबेरॉय और किसान नेता बलबीर राजेवाल के नाम मुख्यमन्त्री चेहरे के लिए चले। चर्चा यही रही कि आम आदमी पार्टी और इनके बीच बात नहीं बनी और आखिर में भगवंत मान को आगे करना पड़ा। पंजाब का मुख्यमन्त्री बनने की इच्छा दिल्ली वाले नेताओं की भी चर्चा में रही लेकिन पंजाबी किसी बाहरी नेता को स्वीकार नहीं करते। इसलिए यह विकल्प पिट गया। हर तरह की कोशिशों के बीच चुनाव सिर पर आ गए तो केजरीवाल की मजबूरी बन गई कि मान के नाम की घोषणा कर दे। कहीं चोकोणीय तो कहीं पांच कोणीय चुनाव होने के कारण पंजाब की राजनीति प्याज के छिलके जैसी होती जा रही है जिसमें कोई दल छाती ठोक कर अपनी जीत का दावा नहीं कर सकता। 

अवलोकन करें:-

जब 5 मिनट तक फ्लाइंग किस देते भगवंत मान बार-बार गिर रहे थे: AAP ने बनाया चेहरा तो बोले लोग – ‘उड़ते पंज
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कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के अलावा, बीजेपी से नाता तोड़ कर अकाली दल और बीएसपी गठबन्धन मैदान में है। वहीं पंजाब के पूर्व मुख्यमन्त्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबन्धन किया है। इतना ही नहीं किसान आन्दोलन में शामिल रहे 22 संगठन भी संयुक्त समाज मोर्चा के मंच पर चुनाव लड़ रहा है। ऐसी अनिश्चितता के दौर में केजरीवाल ने अपना राजनीतिक भविष्य दांव पर लगाना उचित नहीं समझा और पंजाब से अपने पैर वापिस खींच लिए। पंजाब में आम आदमी पार्टी के लोग अब ‘इक मौका केजरीवाल नूं’ का नारा भुला कर ‘इक मौका भगवन्त मान नूं’ का नया नारा याद कर रहे हैं। 

पंजाब :चुनाव आयोग ने थमाया नोटिस, ‘दूसरों से पैसे लें, पर वोट AAP को दें’: आचार संहिता को पंजाब में ‘आप’ ने दिखाया ठेंगा

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा चुनाव आयोग ने आठ जनवरी को की थी। इसके बाद से ही इन पाँच राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके उल्लंघन का पहला मामला सामने आया है जिसको लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) को आयोग ने नोटिस दिया है। आयोग ने रविवार (9 जनवरी, 2022) को AAP को नोटिस जारी किया। पटियाला के जिला निर्वाचन अधिकारी संदीप हंस ने यह नोटिस समाचार पत्रों में पैम्फलेट बाँटने के लिए जारी किया। कथित तौर पर पैम्फलेट में अन्य पार्टियों से पैसे लेकर AAP को वोट देने की बात कही गई है।

डीसी ने नोटिस में सोमवार (10 जनवरी 2022) शाम तक पार्टी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, “हमने AAP जिलाध्यक्ष मेघ राज को नोटिस जारी किया है। पैम्फलेट बाँटने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पैम्फलेट में पब्लिशर या प्रिंटर का नाम नहीं है।”

इसकी शिकायत भारत के चुनाव आयोग द्वारा लॉन्च किए गए eVigil ऐप का उपयोग करके दर्ज करवाई गई थी। बता दें कि इस ऐप के जरिए नागरिक चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में राजनीतिक नेताओं और पार्टियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

पैम्फलेट का कंटेंट

पंजाबी में प्रकाशित पैम्फलेट में मतदाताओं से राजनीतिक पार्टियों द्वारा वोट के बदले दिए जाने वाले पैसे या अन्य सामग्री लेने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है, “इन पार्टियों ने पंजाब को लूटा है। इसलिए, यदि कोई राजनीतिक दल आपको पैसे की पेशकश करता है, तो इसे ले लें। लेकिन वोट आम आदमी पार्टी को ही दें। उन्हें पता नहीं चलेगा कि आपने किसे वोट दिया है।” 
इसमें आगे कहा गया है, “आम आदमी पार्टी पैसे की पेशकश नहीं कर सकती क्योंकि उसके पास फंड नहीं है। लेकिन अगर आम आदमी पार्टी पंजाब में सरकार बनाती है, तो यह आपके जीवन को बेहतर बनाएगी। मुफ्त बिजली मिलेगी। आपके घर की हर महिला को 1000 रुपए मिलेंगे। नए स्कूल और अस्पताल खुलेंगे। दिल्ली की तरह ही मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाएगा।”
इसमें आगे आरोप लगाया गया है कि पार्टियाँ चुनाव से पहले पैसा देती हैं, लेकिन सरकार बनाने के बाद ठीक से काम नहीं करती हैं। कहा गया है, “एक काम करो। चुनाव से पहले और बाद दोनों में लाभ उठाओ। चुनाव से पहले दूसरे दलों से पैसे ले लो। आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद, सरकार से लाभ उठाओ। ‘झाड़ू’ (AAP का पार्टी चिन्ह) चुनें।”
                                  कथित तैर पर AAP द्वारा बाँटा गया पैम्फलेट (साभार: Tribune)
पैम्फलेट में मतदाताओं से फर्जी शपथ लेने का आग्रह किया गया था। इसमें कहा गया है, “यदि अन्य दल आपसे पैसे के बदले उन्हें वोट देने की शपथ लेने के लिए कहते हैं, तो झूठी शपथ लें। लेकिन अपने दिल में गुरु महाराज या भगवान के नाम पर शपथ लें और कहें, ‘इन चुनावों में, मैं इन पार्टियों से पैसे ले रहा हूँ, लेकिन मैं पंजाब की भलाई के लिए आम आदमी पार्टी को वोट दूँगा’। दूसरी पार्टियों को पता नहीं चलेगा कि आप अपने मन में क्या कह रहे हैं।”
आम आदमी पार्टी के नेता बलबीर सिंह ने द ट्रिब्यून के हवाले से कहा कि AAP ने ऐसा कोई पैम्फलेट जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा, “हमने पैम्फलेट जारी नहीं किया है और इसे सही नहीं ठहराते। जाहिर तौर पर किसी ने हमें बदनाम करने की चाल चली है।”
आम आदमी पार्टी पहले भी इस तरह की टिप्पणी कर चुकी है। यह पहली बार नहीं है जब आप ने मतदाताओं से अन्य पार्टियों से पैसे लेने के लिए कहा है, लेकिन AAP को वोट देने के लिए कहा है। अरविंद केजरीवाल खुद भी इसी तरह की टिप्पणी कर चुके हैं।
2015 में, केजरीवाल ने एक रैली को संबोधित करते हुए लोगों से भाजपा और कॉन्ग्रेस से पैसे लेने और AAP को वोट देने के लिए कहा था।
2017 में गोवा चुनाव के दौरान भी उन्होंने यही बात कही थी। तब भी चुनाव आयोग ने आचार संहिता उल्लंघन मामले में जवाब माँगा था। 2019 में आम चुनावों से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने AAP उम्मीदवार राघव चड्ढा के रोड शो के दौरान भी इसी तरह की टिप्पणी की थी।