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स्ट्रिंग ब्रा : ब्राह्मणों को d*cks कहने वाली ‘एक्टिविस्ट’ ने सचिन तेंदुलकर के जनेऊ पर उगला जहर

                                       ब्राह्मण विरोधी 'एक्टिविस्ट' मीना कंदस्वामीकी जनेऊ पर अभद्र टिप्पणी

2014 चुनावों से पूर्व हिन्दू, हिन्दुत्व, तत्कालीन भारतीय जनसंघ वर्तमान भारतीय जनता पार्टी, हिन्दू महासभा, विश्व हिन्दू परिषद् और आरएसएस को साम्प्रदायिक, फिरकापरस्त और मुस्लिम विरोधी कहने वाले खुद ही सिद्ध करने में लगे हैं कि वास्तव में साम्प्रदायिक, फिरकापरस्त और मुस्लिम विरोधी कौन है? बस जनता को ही ऐसे दोगले लोगों को पहचानना होगा। ये ही लोग देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंककर बेगुनाह हिन्दू-मुसलमानों की लाशों पर माल-पुए खाकर अपनी तिजोरियां भर "संविधान खतरे में" और "गंगा-जमुनी तहजीब" आदि भ्रमिक नारों से मासूम जनता को गुमराह करते रहे। 

दूसरा प्रमाण, देश में नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में जगह-जगह हुए शाहीन बाग़ों में "हिन्दू तेरी कब्र खुदेगी", "योगी तेरी कब्र खुदेगी" और "मोदी तेरी कब्र खुदेगी" आदि नारे साबित कर रहे थे कि इनका विरोध CAA के विरुद्ध नहीं बल्कि हिन्दुत्व के विरुद्ध था, जिसे जनता ने न समझने की सबसे भयंकर भूल की थी। और अभी किसान आंदोलन में भी "मोदी तू मरेगा" आदि उत्तेजक नारों की गूंज सुनी गयी।  

पिछले कुछ समय से काफी विवादों में रहने वाली ब्राह्मण विरोधी तथाकथित एक्टिविस्ट मीना कंदस्वामी (Meena Kandasamy) हाल में क्रिकेट लीजेंड सचिन तेंदुलकर की एक तस्वीर में उन्हें जनेऊ धारण किए देख भड़क गईं।

परन्तु यही मीना राहुल गाँधी द्वारा कोट पर जनेऊ पहनने पर चुप्पी लगा जाती है। जिस मीना को महिला होते हुए ब्रा और जनेऊ में ही अंतर नहीं पता हो उसकी संकुचित सोंच और हिन्दू विरोधी होना का और क्या प्रमाण दे सकती है।   

मीना ने अपने ट्वीट में जनेऊ के लिए पहले लिखा, “ओह माय गॉड…क्या ये असली तस्वीर है। क्या ये जनेऊ हल्के (एक विशेष समूह के लिए आरक्षित) अंतर्वस्त्र जैसा कुछ नहीं है, जिसे कपड़ों के अंदर पहना जाता है।” इस ट्वीट के अगले थ्रेड में मीना ने जनेऊ पर अभद्र टिप्पणी करते हुए इसकी तुलना ‘स्ट्रिंग ब्रा’ से भी की।

मीना ने जनेऊ के प्रति अपनी घृणा जिस तस्वीर पर निकाली है, उसे सचिन तेंदुलकर ने गणेश चतुर्थी के मौके पर इंस्टाग्राम पर साझा किया था। यह तस्वीर उनके अकाउंट पर 22 अगस्त 2020 को शेयर की गई थी। 

                                                                                        (साभार: इन्स्टाग्राम)
ब्राह्मणों को कहा था ‘Brahmin d*cks’

ब्राह्मण विरोधी मीणा कंदस्वामी हाल में फर्जी दलित पहचान और अपने डायवोर्स केस में वसूली करने को लेकर चर्चा में आई थी। इसके पहले तथाकथित एक्टिविस्ट ने ब्राह्मणों को ‘Brahmin d*cks’ कहा था। मीना के पूर्व पति डॉक्टर गुनशेखरन धर्मराज ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी ने उन पर प्रताड़ित करने का फ़र्ज़ी मामला दर्ज कराया था। इसके बाद ही उन्होंने मीना के पिता पर हमला करने का मामला दर्ज कराया। धर्मराज ने यहाँ तक कहा था कि उनके पास इस बात के पूरे सबूत (ईमेल पर) मौजूद हैं कि तलाक की असली वजह क्या थी। 

बचाव में आया था मीडिया समूह

इन आरोपों के चर्चा में आने के बाद एक मीडिया समूह तथाकथित एक्टिविट के बचाव में कूद कर आया था। वहीं मीना ने दावा किया था कि ‘ट्रॉल्स’ उसे प्रताड़ित कर रहे हैं। इस बीच यह दावा भी किया गया था कि मीना के पति ने जितने भी आरोप लगाए हैं वह असल में ट्रॉल्स के आरोप हैं। इसके बाद धर्मराज को ही ट्रोल घोषित कर दिया गया था।

लता मंगेश्कर : महेन्द्र सिंह धोनी जी रिटायरमेंट का विचार आप मन में मत लाइए


आर.बी.एल.निगम 
ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 के सेमीफाइनल मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय टीम की हार के बाद अब महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास को लेकर चर्चाएं खूब जोर पकड़ रही हैं। मैनचेस्टर में खेले गए पहले सेमीफाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड ने टीम इंडिया को 18 रनों से हरा दिया।
इसी के साथ ही भारत का तीसरी बार वर्ल्ड चैम्पियन बनने का सपना भी टूट गया। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी वर्ल्ड कप खत्म होने के बाद अपने संन्यास का ऐलान कर देगे। मगर अभी तक धोनी की तरफ से कोई ऐसी बात सुनने को नहीं मिली है, लेकिन सभी फैंस का ऐसा ही मानना है कि धोनी ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला अब खेल लिया है।
इस विश्व कप में एम एस धोनी की स्ट्राइक रेट को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच लता मंगेशकर ने धोनी के संन्यास पर उठ रहे सवालों के बीच कुछ ऐसा ट्वीट किया जिसे पढ़ने के बाद एक बार फिर से पूरे देश की भावनाएं धोनी के साथ नजर आईं।
लता मंगेशकर ने लिखा- नमस्कार महेन्द्र सिंह धोनी जी। आज कल मैं सुन रही हूं कि आप रिटायर होना चाहते हैं। कृपया आप ऐसा मत सोचिए। देश को आपके खेल की जरूरत है और ये मेरी भी रिक्वेस्ट है कि रिटायरमेंट का विचार आप मन में मत लाइए।
लता मंगेशकर के इस ट्वीट को फैंस का भी पूरा साथ मिल रहा है। एक यूजर ने लिखा- बहुत ही भावुक क्षण था जब धोनी आउट हुआ। दिल को झकझोर गया उसका रन आउट होना। अभी तक वो दृश्य आंखों में मंडरा रहा है। एक यूजर ने लिखा- आपने पूरे देश की मन की बात बोल दी।
एक यूजर ने लिखा- धोनी अब लता दीदी ने बोला है कुछ टाइम और खेल लो। एक ने लिखा- धोनी आप हमेशा हमारे कैप्टन रहोगे। एमएस धोनी ने इस मैच में 72 गेंदों पर एक चौके और एक छक्के की मदद से 50 रन बनाए। उनके आउट होने के बाद से मैच कीवी टीम की तरफ चला गया था। बता दें कि भारत को न्यूजीलैंड ने पहले सेमीफाइनल मैच में 18 रनों से हरा दिया।
Related imageअभी धोनी के संन्यास की बात मत करो, उनका सम्मान करो--सचिन तेंदुलकर 
धोनी के संन्यास को लेकर सचिन तेंदुलकर ने कहा, ’50 ओवर के खेल में उनका करियर खत्म हुआ है या नहीं यह उनका अपना निजी निर्णय होगा। हम सभी को धोनी के फैसले का आदर करना चाहिए।’
तेंदुलकर ने कहा, ‘भारतीय क्रिकेट टीम में उनका जो योगदान रहा वो सदा मूल्यवान रहेगा और हमें उनके संन्यास के बारे में बात करने से अच्छा उनके द्वारा बढ़ाए गए देश का सम्मान का आदर करना चाहिए। इतना योगदान देने के बाद इस बारे में अब उन्हें खुद निर्णय लेना चाहिए।’
सचिन ने कहा, ‘कितने लोग ऐसे हैं, जिनका करियर ऐसा रहा हो? धोनी का बहुत ही स्पेशल करियर रहा है। लोगों ने जो भरोसा और विश्वास उन पर दिखाया, वह उनके खेल में भी नजर आया। फैंस को अभी भी यह यकीन होता है कि धोनी आएंगे और मैच फिनिश करने में सफल रहेंगे। जब तक धोनी आउट नहीं हो जाते, तब तक मैच खत्म नहीं होता।’
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारतीय क्रिकेट टीम को एक नई पहचान देने वाले, टीम इंडिया को दो बार विश्व चैंपियन और पहल.....

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भारत की हार से खुश हुआ पाकिस्तान आर्मी का मेजर जनरल. India Vs New Zealand SF1: वर्ल्ड कप का पहला सेमीफाइनल भारत और न्यूजीलैंड (India Vs...

न्यूजीलैंड के खिलाफ महेंद्र सिंह धोनी ने नंबर 7 पर बल्लेबाजी करते हुए 72 गेंदों में 50 रन बनाए। एक समय ऐसा लग रहा था कि धोनी टीम इंडिया को मैच जिताकर ही लौटेंगे लेकिन ऐसा ना हो सका। मार्टिन गप्टिल द्वारा मारे गए एक थ्रो ने ना सिर्फ एमएस धोनी को रन आउट किया, बल्कि पूरे देश का दिल भी तोड़ दिया।

देश का एकलौता सांसद जिसने 9 वर्षों से नहीं ली सैलरी, बोले-पैसे कमाने के लिए नहीं होती राजनीति

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारतीय राजनीति में ऐसी मिसाल कम ही देखने को मिलती हैं, जिनमें नेता जो कहें, उन पर खुद भी अमल करें। लेकिन एक नेता ने अपने कहे पर अमल करके राजनीति में नई मिसाल कायम की है। बीजेपी सांसद वरुण गांधी अमीर सांसदों द्वारा अपना वेतन छोड़ने की मांग करते रहे हैं।
ऐसा नहीं है कि वे केवल दूसरे सांसदों को वेतन नहीं लेने की सलाह देते हैं बल्कि वे खुद भी वेतन नहीं ले रहे हैं। ZEE NEWS की रिपोर्ट के अनुसार, वरुण गांधी ने पिछले 9 साल से सांसद के रूप में मिलने वाले वेतन को गरीब और जरूरतमंदों में बांट रहे हैं। वेतन का एक पैसा भी वह अपने लिए इस्तेमाल नहीं करते हैं। वरुण गांधी सुल्तानपुर से सांसद हैं। वे अक्सर संसद सत्रों में जनहित के मुद्दों पर बहस नहीं होने और सांसदों के वेतन व भत्ते में होने वाले इजाफे पर चिंता जाहिर करते रहते हैं।
वरुण की गतिविधियों को देख सत्ता गलियारों में हमेशा से यह चर्चा रही है कि इन में अपने पिता संजय गाँधी के संस्कार बोलते हैं। क्योकि वरुण ही शायद ऐसे सांसद हैं, जो सांसदों के वेतन, वेतन वृद्धि एवं मिलने वाली पेंशन का विरोध करते रहे हैं। इतना जरूर है कि यदि भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने वरुण को थोड़ा भी आगे करने का प्रयत्न किया, संभव है मोदी-योगी-अमित को अपने प्रोग्राम किर्याविन्त करने में सहायक सिद्ध हों।
इतिहास पर दृष्टि डालने पर ऐसी ही घटना भारत के प्रथम महामहिम डॉ राजेन्द्र प्रसाद की मिलती है, जो अपने खर्चे से अधिक मिले शेष वेतन को प्रति माह राष्ट्रीय सुरक्षा फण्ड में देते थे। फिर चर्चित क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की, जिन्होंने अपने 6 वर्षीय राज्य सभा सांसद के रूप में मिले वेतन को अपने कार्यकाल की समाप्ति पर वापस कर दिया यानि बिना वेतन के सांसद।   
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई है। भारत में हर नागरिक को आवाज उठानी चाहिए,...

उन्होंने इस साल के शुरू में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से अपील की थी कि आर्थिक रूप से सम्पन्न सांसदों द्वारा 16वीं लोकसभा के बचे कार्यकाल में अपना वेतन छोड़ने के लिए आंदोलन शुरू करें। लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में वरुण गांधी ने कहा था कि भारत में असमानता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। भारत में एक प्रतिशत अमीर लोग देश की कुल संपदा के 60 प्रतिशत के मालिक हैं। भारत में 84 अरबपतियों के पास देश की 70 प्रतिशत संपदा है। यह खाई हमारे लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।
उन्होंने पत्र में लिखा था, ‘स्पीकर महोदया से मेरा निवेदन है कि आर्थिक रूप से सम्पन्न सांसदों द्वारा 16वीं लोकसभा के बचे कार्यकाल में अपना वेतन छोड़ने के लिए आंदोलन शुरू करें। ऐसी स्वैच्छिक पहल से हम निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता को लेकर देशभर में एक सकारात्मक संदेश जाएगा।’ वरुण गांधी ने इस बात पर खुद ही शुरू से अमल कर रहे हैं। वह पिछले 9 वर्षों से सांसद के तौर पर वेतन के रूप में मिलने वाले पैसे का अपने ऊपर इस्तेमाल नहीं करते हैं, बल्कि वेतन की पूरी रकम को गरीबों पर खर्च कर देते हैं।
इसमें कोई दो राय भी नहीं कि किसी भी सदन में निर्वाचित या चुनाव लड़ने वाला आर्थिक रूप से कमजोर नहीं होता। किसी न किसी व्यापार से आते हैं। लेकिन जब जनसेवा के नाम पर वेतन और मुफ्त सेवाओं पर खर्च होने वाला धन देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। ऊपर से निर्वाचित होने पर मिलने वाली पेंशन एक बोझ बन रही हैं, जिस पर किसी जनसेवक ने मन्थन करने का साहस तक नहीं किया। शायद यही कारण है बजट का घाटे में होना। महंगाई पर कोई लगाम नहीं। आखिर तेल तो तिलों में से ही निकलेगा।  
अभी हाल ही में उन्होंने एक ऐसे ही जरूरतमंद रामजी गुप्ता को ढाई लाख रुपये की आर्थिक मदद की थी। रामजी गुप्ता को कैंसर से जूझ रहे अपने पिता के इलाज के लिए पैसे की जरूरत थी और उन्होंने इसके लिए वरुण गांधी से आर्थिक मदद की अपील की। वरुण गांधी ने रामजी गुप्ता की जरूरत को देखते हुए उन्होंने तत्काल ढाई लाख रुपये की मदद महैया कराई। इससे पहले वरुण गांधी ने सुल्तापुर के एक किसान को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराई थी।
जानकारी के मुताबिक, बीजेपी सांसद 13 जिलों के जरूरतमंद किसानों को मदद पहुंचा चुके हैं। सुल्तानपुर में वह दो दर्जन गरीब लोगों का घर भी अपने पैसों से बनवा चुके हैं। इस मदद के पीछे वरुण गांधी तर्क देते हैं कि वह राजनीति में पैसा कमाने के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद की जा सकती है।