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उत्तर प्रदेश : शिया वक्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन पर वसीम रिज़वी पर FIR


सीबीआई ने उत्तर प्रदेश शिया वक्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी के विरुद्ध दो एफ़आईआर दर्ज की है। दोनों एफ़आईआर वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति को प्रयागराज और कानपुर में ग़ैरकानूनी रूप से बेचने, खरीदने और स्थानांतरित करने के संबंध में दर्ज की गई हैं। इन संपत्तियों की बिक्री, खरीद और स्थानांतरण को लेकर धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। फ़िलहाल सीबीआई ने इस मामले में जाँच भी शुरू कर दी है। 
वक़्फ़ बोर्ड का मसला केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में एक विवादित बना हुआ है। लेकिन तुष्टिकरण के चलते किसी भी सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया। हैरानी की बात तो यह वक़्फ़ को ही नहीं पता कि उसकी कितनी जमीन अथवा सम्पत्तियाँ हैं। और सरकार खुले दिल से सरकारी खजाना अल्पसंख्यक आयोग के नाम पर पानी में बहा रही है। रसूकदार वक़्फ़ संपत्ति/जमीन को बेच वक़्फ़ दूसरे शब्दों में कहा जाएं सरकार के माल को बेच मालामाल हो कर, आम मुसलमानों पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर सरकारों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। 
जिस दिन सरकार ने दरगाहों और मस्जिदों को होने वाली आय का हिसाब लेना और वक़्फ़ सम्पत्तियों का हिसाब लेने का निर्णय लिया, उसी क्षण से ये ही लोग मुसलमानों को भड़काने सडकों पर उतर आएंगे। जिसका अंजाम 90 के दशक में दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड झेल चूका है। जिसका अनुभव 1993 में किसी विषय की जानकारी लेने दरिया गंज स्थित वक़्फ़ बोर्ड जाने पर अधिकारीयों की जुबानी सुनने को मिली थी। शायद यही कारण है कि उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त अभी भी सरकार ने वक़्फ़ बोर्ड को छूने तक का साहस नहीं किया। अब प्रश्न यह है कि क्या उत्तर प्रदेश के इस कदम को केंद्र और अन्य राज्य सरकारें आगे बढ़ाएंगी? यदि उत्तर प्रदेश योगी सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से जाँच करवाने में सफल हो गयी, सरकार को अल्पसंख्यक के नाम पर हर वर्ष कितने करोडो का चूना लगाया जा रहा है।  

दरअसल, साल 2016 के अगस्त महीने के दौरान प्रयागराज में वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति की बिक्री को लेकर एफ़आईआर दर्ज की गई थी। यह मामला इमामबाड़ा गुलाम हैदर में ग़ैरकानूनी दुकानों के निर्माण और अतिक्रमण को लेकर था। इसके अलावा साल 2017 के मार्च महीने के दौरान लखनऊ में कानपुर स्थित वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति के स्थानांतरण को लेकर एफ़आईआर दर्ज की गई थी।

यह मामला कानपुर स्थित स्वरूप नगर की ज़मीन पर कब्ज़ा करने को लेकर था। सीबीआई ने प्रयागराज और लखनऊ में दर्ज मामलों में आधार बनाते हुए उत्तर प्रदेश शिया वक्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज की है। इसमें स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया गया है कि वसीम रिज़वी ने चेयरमैन रहते हुए वक्फ़ बोर्ड की संपत्तियों की खरीद और बिक्री में धोखाधड़ी की है। 

लखनऊ में दर्ज किए गए मामले में वक्फ़ बोर्ड के दो अधिकारियों समेत 5 अन्य को नामजद किया गया है। शिया वक्फ़ बोर्ड की संपत्तियों में अनियमितता की बात सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इन मामलों में जाँच के आदेश जारी किए थे। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित सीबीआई की भ्रष्टाचार रोधी शाखा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420 और 506 के तहत एफ़आईआर दर्ज की है। वसीम रिज़वी के अलावा वक्फ़ बोर्ड प्रशासनिक अधिकारी गुलाम सैयदन रिज़वी, वक्फ़ बोर्ड के इंस्पेक्टर वाकर रज़ा, नरेश कृष्ण सोमानी और विजय कृष्ण सोमानी को भी नामजद किया गया है। 

इसके पहले वसीम रिज़वी समेत दो अन्य पर उत्तर प्रदेश के ही बिजनौर स्थित जोगीपुरा श्राइन के केयरटेकर को धमकाने और उससे जबरन वसूली करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। एडिशनल न्यायिक मजिस्ट्रेट की तरफ से आदेश जारी होने के बाद इस संबंध में एफ़आईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में शिकायतकर्ता सैयद कैसर बाकरी का कहना था कि 2018 में शिया वक्फ़ बोर्ड का चेयरमैन रहते हुए वसीम रिज़वी ने उन्हें श्राइन का एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया था।

नियुक्ति के बाद वसीम रिज़वी और उनके सहयोगी रुपए की माँग करने लगे। बाकरी ने आरोप लगाया कि श्राइन में हर साल लाखों करोड़ों रुपए का आर्थिक सहयोग दिया जाता है लेकिन इसमें से एक बड़ी धनराशि वसीम रिज़वी के खाते में जाती थी। बाकरी का यहाँ तक कहना था कि साल 2019 के जून महीने में वसीम रिज़वी ने धमकी दी कि उन्हें 10 लाख रुपए नहीं मिले तो उन्हें उठवा लिया जाएगा।  


हिन्दुस्तान की जमीन पर बाबरी ढांचा कलंक--सैयद वसीम रिजमी, अध्यक्ष, शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजमी ने अक्टूबर 5 को एक बयान जारी कर कहा कि हिन्दुस्तान की जमीन पर बाबरी ढांचा कलंक है। उस कलंक को मस्जिद कहना गुनाहे अजीम (सबसे बड़ा पाप) है।
वसीम रिजवी ने कहा कि मस्जिद के नीचे की खुदाई 137 मजदूरों ने की थी जिसमें 52 मुसलमान थे। खुदाई के दौरान 50 मंदिर के स्तंभों के नीचे ईंटों का बनाया गया चबूतरा मिला था। मंदिर से जुड़े कुल 265 पुराने अवशेष भी मिले थे। इसी आधार पर भारतीय पुरातत्व विभाग इस निर्णय पर पहुंचा था कि ऊपरी सतह पर बनी बाबरी मस्जिद के नीचे एक मंदिर दबा हुआ है।
वसीम रिजवी ने दावा करते हुए कहा है केके मोहम्मद द्वारा लिखी किताब मैं भारतीय हूं में साफ तौर से ये जिक्र किया गया है कि विवादित ढ़ांचे पर पहले मंदिर था। अब ऐसे में उस कलंकित ढांचे को मस्जिद कहना इस्लाम सिद्धांत के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि बाबर को अपना आदर्श मानने वाले मुल्ला अपने गुनाहों से तौबा करें और राम मंदिर को बनाने में दिल खोलकर हिस्सा लें। यही उनके भविष्य के लिए सही होगा।
इससे पहले वसीम रिजवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालकर शिया बोर्ड को पैरोकार बनाने की मांग की थी। साथ ही यह भी ऐलान कर रखा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट अयोध्या की विवादित जमीन शिया बोर्ड को वापस करता है तो वो इसे मंदिर बनाने के लिए दे देंगे। क्योंकि उस पर सिर्फ और सिर्फ हिंदू लोगों का हक है।
इस सन्दर्भ में अवलोकन करें:--
VHP के साथ साधु-संत राममंदिर का रास्ता निकालेंगे
अयोध्या से श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अगुवाई में कई संत दिल्ली आए हैं. वहीं, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए तपस्वी छावनी मंदिर के महंत राम परमहंस दास सोमवार से आमरण अनशन कर रहे हैं.
दिल्ली में होने वाली संत उच्चाधिकार समिति की बैठक में केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य महंत कमलनयन दास, न्यास सदस्य पूर्व सांसद रामविलासदास वेदांती, महंत सुरेश दास, संत समिति अध्यक्ष महंत कन्हैया दास शामिल हैं.
श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि मोदी के सत्ता में आने से हिंदू समाज को राममंदिर निर्माण की उम्मीद जागी धी, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है.
देश के प्रमुख साधु-संत बैठक कर अब अपनी भावनाओं से अवगत ही नहीं कराएंगे बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए आगे ठोस कदम उठाएंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र में मोदी और राज्य में योगी सरकार के रहते हुए अब इंतेजार नहीं करना संतों को अखर रहा है. ऐसे में मोदी सरकार को राम मंदिर निर्माण का समाधान का हल जल्द से जल्द निकालना चाहिए.
राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने दिल्ली में साधु संतों की बैठक कर रहा है. वीएचपी में पिछले काफी समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि अयोध्या में राम का भव्य मंदिर बनना चाहिए और जल्दी बनना चाहिए. वीएचपी और संतों की तरफ से बार बार इस बात को लेकर बयान भी आते रहे हैं.

nigamrajendra.blogspot.com
राम मंदिर निर्माण को लेकर शिवसेना ने अक्टूबर 5 को बड़ा बयान दिया है. शिवसेना के…

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि सीधे तौर से माना जाए कि बाबरी ढांचा इन मंदिरों को तोड़कर इनके मलबे पर बनाई गई है। उन्होंने कहा कि इस बात का उल्लेख केके मोहम्मद ने अपनी किताब “मैं भारतीय हूं” में भी किया है। ऐसी स्थिति में बाबरी कलंक को जायज मस्जिद कहना इस्लाम के सिद्धांतों के विपरीत है।
वसीम रिजवी ने अपील की कि अभी भी वक्त है बाबरी मुल्ला अपने गुनाहों की तौबा करें। पैगंबर मोहम्मद साहब के इस्लाम को मानें। उन्होंने कहा कि एक समझौते की मेज पर बैठकर हार-जीत के बगैर राम का हक हिंदुओं को वापस करो और एक नई अमन की मस्जिद लखनऊ में जायज पैसों से बनाने की पहल करो।