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खुद Video कॉल पर काशी देखती थी ‘नफीसा’, तुफैल से करवाती थी रेकी… ‘बाबरी का बदला’ लेने को भड़काती रहती थी: 4 मुस्लिम देशों में फैला है ISI एजेंट का नेटवर्क

                   ISI एजेंट तुफैल और पाक फौजी की बीवी नफीसा की प्रताीकात्मक तस्वीर (फोटो- grokAI)
वाराणसी में पकड़े गए ISI एजेंट तुफैल को लेकर एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (ATS) की जाँच में रोजाना नई बातें सामने आ रही हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, तुफैल ने चार देशों में आतंकी नेटवर्क फैला रखा था।

 ATS तुफैल के मोबाइल के जरिए कई अहम सुरागों तक पहुँची है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एटीएस ने तुफैल के मोबाइल से लगभग 70% तक डेटा रिकवर किया है। इसमें उसके आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने की कई बातें सामने आई हैं। इसके अलावा तुफैल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बने अकाउंट्स की भी जाँच की जा रही है।

सोशल मीडिया की जाँच में पता चला कि तुफैल सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि 4 अन्य मुस्लिम देशों से भी जुड़ा हुआ है। वहाँ के लोगों से लगातार संपर्क में था। गौरतलब है कि तूफैल एक पाकिस्तानी फौजी की बीवी नसीफा के हनीट्रैप में भी फँसा था।

नफीसा ने वीडियो कॉल के जरिए वाराणसी देखा था। उसके लिए तुफैल ने कपड़े भी पाकिस्तान भिजवाए थे। इन्हें भिजवाने के लिए तुफैल ने नेपाल और पंजाब के रास्ते चुने। पुलिस जाँच में तुफैल के साथ जुड़े 4-5 लोगों के नाम सामने आए हैं। ATS उनसे भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।

विदेशी दोस्तों ने तोड़ा नाता

उत्तर प्रदेश एटीएस ने वाराणसी से तुफैल को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गुरुवार (22 मई 2025) को गिरफ्तार किया। एटीएस का शिकंजा जैसे ही तुफैल पर कसा, वैसे ही उसके विदेशी दोस्तों ने उससे सारे संपर्क तोड़ दिए हैं। इसकी जानकारी भी उसके मोबाइल से ही मिली है।
उसने तहरीक-ए-लब्बैक के नेता मौलाना शाह रिज़वी के वीडियो वॉट्सऐप ग्रुप में साझा किए। इन संदेशों में ‘गज़वा-ए-हिंद’ (भारत पर इस्लामी कब्ज़ा), बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने और भारत में शरिया कानून लागू करने जैसी भड़काऊ बातें शामिल थीं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसके गिरफ्तार होने के बाद व्हाट्सएप पर 19 ग्रुपों से में से 7 से उसे हटा दिया गया। साथ ही इस ग्रुप की पूरी हिस्ट्री और चैट्स डिलीट कर दी गई हैं। हालाँकि ATS के पास इसका क्लोन मौजूद है।
इसके अलावा ATS को ये भी पता चलास कि तुफैल ने पाकिस्तान के व्हाट्सएप ग्रुप का लिंक वाराणसी के अन्य लोगों को भी भेजा था। इसके जरिए वह मुस्लिम लोगों से समर्थन माँग रहा था। उसने राजघाट, नमोघाट, ज्ञानवापी, रेलवे स्टेशन, जामा मस्जिद, लाल किला, निजामुद्दीन औलिया की तस्वीरें और उनसे जुड़ी जानकारियों पाकिस्तान के कुछ नंबरों पर शेयर की हैं।
इसी तरह नफीसा से तुफैल की दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई। वाराणसी से जुड़े भारतीय होने पर नफीसा ने तुफैल को अपना नंबर दिया और उसे कुछ पाकिस्तानी ग्रुप में जुड़वाया। इसके बाद तुफैल कुछ और लोगों के संपर्क में आ गया। जाँच में सामने आया कि तुफैल 600 से अधिक पाकिस्तानी नंबरों के संपर्क में था। 
तुफैल का संबंध पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक से था। वह संगठन के नेता मौलाना शाद रिजवी का समर्थक था और उसके वीडियो व्हाट्सएप ग्रुपों में भेजा करता था। वह ‘गजवा -ए – हिन्द’, शरीयत लागू करने और बाबरी मस्जिद का बदला लेने जैसे उत्तेजक और भड़काऊ मैसेज शेयर करता था।

दिल्ली कांग्रेस : केजरीवाल सरकार करवा रही थी नेताओं की जासूसी, होता था कैश पेमेंट, दो चाबियों से खुलती थी तिजोरी

                                                                                                                           साभार 
अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से पैदा हुई आम आदमी पार्टी अब भ्रष्टाचार के आरोपों से इस कदर घिर चुकी है कि उसका किला ढहने ही वाला है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार घोटालों और भ्रष्टाचार के दलदल में धंस चुकी है। आम आदमी पार्टी के फाइनेंसर माने जाने वाले केजरीवाल के करीबी कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन पहले से ही जेल में थे और अब शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया भी जेल पहुंच चुके हैं। केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार भ्रष्टाचार में इस कदर आकंठ डूब चुकी है कि अब उनके खिलाफ जासूसी कांड में जांच का आदेश भी दे दिया गया है।

जासूसी मामले में सिसोदिया के खिलाफ जांच को मंजूरी

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ मामला दर्ज करने के सीबीआई के अनुरोध को मंजूरी दे दी। उनपर आरोप है कि दिल्ली सरकार ने राजनीतिक खुफिया जानकारी जुटाने के लिए विजिलेंस डिपार्टमेंट के तहत फीडबैक यूनिट का गठन किया था।

राजनीतिक जासूसी के लिए बनाई गई फीडबैक यूनिट

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार फीडबैक यूनिट का इस्तेमाल राजनीतिक जासूसी के लिए कर रही थी, सीबीआइ ने अपनी रिपोर्ट में इस बार से पर्दा उठाया है।सीबीआइ ने कहा है कि यह यूनिट वैसे तो दिल्ली सरकार के विभागों में कामकाज की निगरानी के लिए बनाई गई थी। लेकिन असल मकसद कुछ और निकला।

सत्ता में आने के बाद AAP ने बनाई थी फीडबैक यूनिट

2015 में सत्ता में आने के बाद आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने सतर्कता विभाग को मजबूत करने के लिए फीडबैक यूनिट बनाई थी। आरोप है कि इसके माध्यम से नेताओं की कराई गई जासूसी थी।

जासूसी के लिए तिजोरी में रखा था कैश, दो चाबियों से खुलता था

केजरीवाल सरकार ने विजिलेंस डिपार्टमेंट में बनाए गए ‘फीडबैक यूनिट’ से नेताओं की जासूसी कराई। दिलचस्प बात यह है कि इस सीक्रेट ऑपरेशन में खर्च होने वाले पैसे के भुगतान के लिए ‘सीक्रेट सर्विस फंड’ बनाया गया था। वहीं इस फंड को रखने के लिए एक ऐसी तिजोरी का इस्तेमाल हुआ जोकि दो चाबियों को एक साथ घुमाने पर खुलता था।

सीक्रेट ऑपरेशंस के लिए होता था नकद में पेमेंट

फीडबैक यूनिट (FBU) को 2015 में AAP सरकार द्वारा गठित किया गया था। इस यूनिट के तहत सीक्रेट ऑपरेशंस के लिए नकद में पेमेंट किया जाता था और इसकी डिटेल एक रजिस्टर में रखी जाती थी। इसमें ‘S’ के आगे नंबर लिखा जाता था।

सतर्कता विभाग के अधिकारी ने की जासूसी की शिकायत

फीडबैक यूनिट का गठन 2015 में किया गया था। 2016 में सतर्कता विभाग के एक अधिकारी ने शिकायत दर्ज करायी थी कि इसकी आड़ में जासूसी की जा रही है। 2015 में ही इस यूनिट के खिलाफ आवाज उठी थी और बाद में मामला सीबीआई को सुपुर्द कर दिया गया था।

सीक्रेट सर्विस फंड की तिजोरी पर अधिकारी ने उठाया सवाल

2016 में फीडबैक यूनिट की शिकायत करने वाले विजिलेंस डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने अपने पत्र में यह सब बातें लिखी हैं। जिसे सीबीआई ने सबूत के तौर पर शामिल किया है। इस यूनिट के कथित रूप से गठन होने के सात महीने बाद और इसमें शामिल होने के चार महीने बाद दो में से एक अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक शम्स अफरोज ने सीक्रेट सर्विस फंड की तिजोरी की दो चाबियों में से एक को अपने पास रखने का दावा किया। अफरोज ने विजिलेंस विभाग के विशेष सचिव को तीन पेज का पत्र लिखकर इसकी वित्तीय कार्यप्रणाली के संबंध में सवाल खड़े किए। अफरोज को दिल्ली सरकार में उप निदेशक (प्रशासन और वित्त) के रूप में नियुक्त किया गया था। वो 30 मई को कथित रूप से गठित की गई यूनिट में शामिल हुए थे और उन्होंन 22 सितंबर 2016 को पत्र लिखा था।

मामला उठा तो CBI को सौंपा गया जांच का जिम्मा

उपराज्यपाल अनिल बैजल ने परियोजनाओं की फीडबैक लेने और कर्मचारियों के भ्रष्टाचार की जानकारी देने के लिए आप सरकार द्वारा गठित फीडबैक यूनिट के कर्मचारियों को बर्खास्त कर इसके दफ्तर को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था। इससे पूर्व उपराज्यपाल रहे नजीब जंग ने उपराज्यपाल की मंजूरी लिए बिना गोपनीय तरीके से फीडबैक यूनिट बनाने के जांच का मामला सीबीआइ को सौंपा था और उस समय से सीबीआइ इस मामले की जांच कर रही है।

फीडबैक यूनिट को करना था विजिलेंस विभाग के अधीन काम

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक फीडबैक यूनिट को भले ही परियोजनाओं की फीडबैक लेने और भ्रष्टाचार की जानकारी देने के नाम पर गठित की गई थी लेकिन इसकी गतिविधियां रहस्यमयी थीं। सतर्कता विभाग के सचिव ने सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन काम करने वाली फीडबैक यूनिट की जानकारी कई बार पत्र लिखकर मांगी थी लेकिन उन्हें कभी जानकारी नहीं दी गई। जबकि फीडबैक यूनिट को विजिलेंस विभाग के अधीन काम करना था। सूत्र बताते हैं कि इसके फंड व खर्च आदि को लेकर भी गोपनीयता बरती गई।

फीडबैक यूनिट के स्टाफ को दी जा रही थी गाड़ी, आफिस, टेलिफोन 

उपराज्यपाल द्वारा फीडबैक यूनिट पर कड़े तेवर दिखाने के बाद दिल्ली सरकार का विजिलेंस विभाग भी सतर्क हो गया।उसने कई कर्मचारियों के काम को एक साल का मियाद पूरी होने के बाद कांट्रैक्ट को आगे नहीं बढ़ाया। वहीं कई कर्मचारियों ने यूनिट को लेकर बढ़ते विवाद को देखते हुए नौकरी छोड़ दी। बाकी बचे कर्मचारियों को बर्खास्त कर यूनिट को हमेशा के लिए बंद करने का आदेश जारी किया गया।एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यूनिट के स्टाफ को वेतन के अलावा गाड़ी, आफिस व टेलिफोन आदि की सुविधा दी गई थी।

राजनीतिक खुफिया जानकारी जुटाने में लग गई यूनिट

सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि FBU को जो काम दिया गया था, वह उसके अलावा खुफिया राजनीतिक जानकारियां जुटाने में भी लग गई। वह किसी व्यक्ति की राजनीतिक गतिविधियों, उससे जुड़े संस्थानों और AAP के राजनीतिक फायदे वाले मुद्दों के लिए जानकारी जुटाने लगी।

सीबीआई की जांच में क्या-क्या पाया?

सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि फीडबैक यूनिट (एफबीयू) को जो काम दिया गया था, वह उसके अलावा खुफिया राजनीतिक जानकारियां जुटाने में भी जुटी थी। वह किसी व्यक्ति की राजनीतिक गतिविधियों, उससे जुड़े संस्थानों और आम आदमी पार्टी के राजनीतिक फायदे वाले मुद्दों के लिए जानकारी जुटाने लगी थी।

एफबीयू ने कुल 700 केसों की जांच की। इनमें 60% राजनीतिक निकले। जिनका सरकार के कामकाज से कोई लेनादेना नहीं था। सीबीआई के अनुसार, अभी यह साफ नहीं कि एफबीयू अभी भी एक्टिव है या नहीं।

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी खजाने में नुकसान का भी जिक्र किया। एजेंसी की मानें तो फीडबैक यूनिट के गठन और काम करने के गैरकानूनी तरीके से सरकारी खजाने को लगभग 36 लाख रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई ने कहा था कि किसी अधिकारी या विभाग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सीबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, एफबीयू की स्थापना के लिए कोई प्रारंभिक मंजूरी नहीं ली गई थी, लेकिन अगस्त 2016 में सतर्कता विभाग ने अनुमोदन के लिए फाइल तत्कालीन एलजी नजीब जंग के पास भेजी थी। जंग ने दो बार फाइल को खारिज कर दिया।

फीडबैक यूनिट पर देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता का आरोप

फीडबैक यूनिट (एफबीयू) मामले में दिल्ली सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एलजी कार्यालय ने पूर्व सांसद संदीप दीक्षित और दो पूर्व मंत्रियों के पत्र को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव को भेज दिया है। खुफिया जानकारियां इकट्ठा करने के लिए एफबीयू के गठन पर सवाल उठने के बाद पूर्व सांसद सहित दो पूर्व मंत्री मंगत राम सिंघल और किरण वालिया ने एलजी को पत्र लिखकर एनआईए या सीबीआई से जांच करवाने की मांग की थी।

इसे भ्रष्टाचार से अलग मानते हुए देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता का आरोप लगाते हुए दिल्ली सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ राजद्रोह की कार्रवाई की मांग की गई थी। इस मामले में आम आदमी पार्टी ने भी एलजी, कांग्रेस और भाजपा पर निशाना साधते हुए कई सवाल उठाए हैं।

जिस पाकिस्तानी पत्रकार ने की भारत की जासूसी, उसे नहीं बुलाने पर भड़क गए थे हामिद अंसारी: आयोजक का दावा, कहा- झूठ बोल रहे पूर्व उपराष्ट्रपति, सरकार करे जाँच

                           हामिद अंसारी और नुसरत मिर्जा (लाल घेरे में) (फोटो साभार: @adishcaggarwala)
पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) द्वारा भारत आकर जासूसी करने के मामले में नया खुलासा हुआ है। ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आदिश अग्रवाल ने एक विस्तृत बयान जारी कर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर जानकारी छिपाने और झूठ बोलने का आरोप लगाया है। सरकार से इसकी जाँच की माँग की है। डॉ. अग्रवाल इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स के अध्यक्ष भी हैं।

बयान में बताया गया है कि अंसारी का कार्यालय चाहता था कि मिर्जा को सम्मेलन में बुलाया जाए। इसे स्वीकार नहीं किए जाने पर वे नाराज भी हो गए थे। डॉ. अग्रवाल ने जिस सम्मेलन को लेकर यह दावा किया है ​वह दिल्ली के विज्ञान भवन में 11 और 12 दिसंबर 2010 को आयोजित हुआ ​था।

उन्होंने आतंकवाद के मसले पर जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम द्वारा 27 अक्टूबर 2009 को दिल्ली के ओबेरॉय होटल में आयोजित एक सम्मेलन की तस्वीर भी शेयर की है। इसमें अंसारी और मिर्जा को एक साथ मंच साझा करते हुए दिखाया है। बताया है कि इस सम्मेलन में हामिद अंसारी, दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला और अन्य मुस्लिम नेताओं ने भाग लिया था। डॉ अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि हामिद अंसारी और उनके दोस्त जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के सम्मेलन में पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा के साथ दोस्ती कर रहे थे।

बयान में कहा गया है कि कि ऐसा लगता है कि हामिद अंसारी और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकारी एजेंसियों और जनता को गुमराह करने के लिए जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के सम्मेलन के बारे में खुलासा नहीं किया है। ऐसे में सरकार से अनुरोध है कि वह इस मामले की जाँच करे, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और जासूसी से संबंधित है।

बयान में कहा गया है कि अंसारी और रमेश ने केवल 11 और 12 दिसंबर 2010 को विज्ञान भवन में आयोजित न्यायविदों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का ही उल्लेख किया है। इस सम्मेलन में अंसारी ने हिस्सा लिया था। लेकिन नुसरत मिर्जा इसमें आमंत्रित नहीं थे। यहाँ तक ​​कि नुसरत मिर्जा ने भी अपने साक्षात्कार में इस सम्मेलन का उल्लेख नहीं किया है।

डॉ. अग्रवाल का दावा है कि जब इस सम्मेलन का आयोजन हो रहा था तो तत्कालीन हामिद अंसारी को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था। अशोक दीवान उस समय उपराष्ट्रपति सचिवालय के निदेशक थे। बयान में कहा गया है, “दीवान ने मुझे बताया था कि उपराष्ट्रपति (हामिद अंसारी) चाहते हैं कि पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाए। लेकिन हम इस अनुरोध को स्वीकार नहीं कर सके क्योंकि मिर्जा पाकिस्तानी मीडिया से थे और हमने पाकिस्तान से जजों या वकीलों को आमंत्रित नहीं किया था।”

डॉ अग्रवाल के अनुसार जब दीवान को यह बात पता चली कि हमने मिर्जा को आमंत्रित नहीं किया है, तो उन्होंने सम्मेलन से एक दिन मुझे फोन कर नाराजगी जताई। यह भी बताया कि हामिद अंसारी को यह बुरा लगा है और अब वे केवल बीस मिनट के लिए समारोह में शामिल होंगे। अग्रवाल के अनुसार शुरुआत में अंसारी ने एक घंटे के लिए कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सहमति दी थी।

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भारत के 15 राज्यों में घूम कर ISI के लिए जुटाई सूचनाएँ’: भारत के 56 मुस्लिम सांसद थे मददगार-- लेखक का खु
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नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) ने 10 जुलाई, 2022 को एक इंटरव्‍यू में कई हैरान करने वाले खुलासे किए थे। पाकिस्तानी पत्रकार और YouTuber शकील चौधरी (Shakil Chaudhary) को दिए इंटरव्यू में नुरसत मिर्जा ने दावा किया था कि उन्होंने 2005 से 2011 के बीच भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए कई जानकारियाँ एकत्र की थीं। उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और ‘मिल्‍ली गैजेट’ अखबार के मालिक जफरुल इस्लाम खान ने भारत में आमंत्रित किया था।

नेहरू से लेकर मनमोहन तक फोन टैपिंग के पाप से रंगे है कांग्रेस के हाथ

जिस तरह एक चोर अपने साये से भी डरता है, ठीक वही स्थिति आज कांग्रेस और अन्य मोदी विरोधियों की है। जिस पार्टी ने राष्ट्रपति और सेना तक को नहीं बक्शा, वही पार्टी किस मुंह से वर्तमान पर फोन टैपिंग का आरोप लगा रही। सूची लम्बी है। जरुरत है, बस थोड़ा पीछा इतिहास जानने की। इसीलिए शुरू में कहा है कि चोर अपने साए तक से डरता है। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया में अपनी नई और मजबूत साख बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की बढ़ती लोकप्रियता से कांग्रेस और देश विरोधी ताकतें परेशान हैं। क्योंकि उनका अस्तित्व अब खतरे में दिखाई दे रहा है। इसलिए कांग्रेस एक खास एजेंडे और साजिश के तहत मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। लेकिन कांग्रेस का इतिहास ही विरोधियों के खिलाफ साजिश करने, जासूसी करने और सरकार गिराने का रहा है। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने करीब दो दशकों तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रिश्तेदारों की जासूसी करवाई थी। 2015 में गुप्त सूची से हटाई गईं इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की दो फाइलों से खुलासा हुआ कि 1948 से 1968 के बीच सुभाष चंद्र बोस के परिवार पर अभूतपूर्व निगरानी रखी गई थी।

फोन टैपिंग की शुरूआत भी जवाहरलाल नेहरू के जमाने में ही हो गई थी। उस समय यह आरोप खुद संचार मंत्री रफी अहमद किदवई ने लगाए थे। इसी तरह आपाताकल के दौरान विपक्षी दलों के नेताओं की जासूसी की गई और उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाला गया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने लोकसभा में आपातकाल की 20वीं वर्षगांठ पर 25 जून, 1975 के अटलबिहारी वाजपेयी के एक वक्तव्य का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने इंदिरा गांधी पर चन्द्रशेखर सहित कुछ नेताओं और पत्रकारों के फोन टैप किए जाने का आरोप लगाया था। प्रधानमंत्री रहते हुए राजीव गांधी पर राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह का फोन टैप करने का आरोप लगा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के शासनकाल में सारे नियमों को ताक पर रखकर फोन टैपिंग के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए गए। 2013 में दायर एक आरटीआई के जवाब से पता चला कि केंद्र की यूपीए सरकार 9,000 फोन और 500 ईमेल अकाउंट्स की बारीकी से निगरानी कर रही थी । यहां तक कि मनमोहन सरकार ने तो अपनों तक को नहीं बख्शा।

कांग्रेस का फोन टैपिंग और जासूसी का काला इतिहास

  • सेना प्रमुख जनरल केएस थिमाया ने 1959 में अपने और आर्मी ऑफिस के फोन टैप होने का आरोप लगाया था।
  • नेहरू सरकार के मंत्री टीटी कृष्णामाचारी ने 1962 में फोन टैप होने का आरोप लगाया था।
  • लालकृष्ण आडवाणी ने इंदिरा गांधी सरकार पर आपातकाल के दौरान विपक्षी नेताओं का फोन टेप करने का आरोप लगाया।
  • ज्ञानी जैल सिंह ने राष्ट्रपति रहते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर राष्ट्रपति भवन के फोन टैप करने का आरोप लगाया था।
  • अमर सिंह ने 2006 में दावा किया था कि इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) उनका फोन टैप कर रही है।
  • अक्टूबर 2007 में सरकार ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फोन भी टेप करवाए।
  • 2008 में सीपीएम नेता प्रकाश करात ने अपना फोन टेप करने का आरोप लगाया था।
  • 2009 में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह के बीच एक बातचीत टेप की गई थी।
  • पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वित्तमंत्री रहते हुए उस वक्त के गृहमंत्री चिदम्बरम के खिलाफ जासूसी का आरोप लगाया था।
  • 22 मई, 2011 को यूपीए सरकार ने सीबीडीटी को फोन टैपिंग जारी रखने का आदेश दिया।
  • 23 जून 2011 को सीबीईसी के चेयरमैन एस. दत्त ने डीआरआई पर अपने फोन टैप करने का आरोप लगाया।
  • 6 फरवरी, 2013 को एसपी लीडर अमर सिंह ने यूपीए पर फोन टैप करने का आरोप लगाया।
  • फरवरी 2013 में अरुण जेटली ने अपना फोन टैप करने का आरोप लगाया था। इस मामले में करीब दस लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
  • 13 जून, 2021 को बीजेपी ने राजस्थान की गहलोत सरकार पर फोन टैप करने का आरोप लगाया।
राहुल गाँधी हो रहे ट्रोल 
कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मंगलवार को एक बार फिर सोशल मिडिया प्लेटफॉर्म ट्वीटर पर ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा। दरअसर अपनी आदत के मुताबिक राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए ट्वीट कर उसे भारतीय जासूस पार्टी करार दिया।
लेकिन ट्वीटर यूजर्स को राहुल गांधी का यह ट्वीट रास नहीं आया और बड़ी संख्या में लोगों ने गांधी परिवार और कांग्रेस के विरोध में ट्वीट करना शुरू कर दिया। विद्यापति ठाकुर नाम के एक यूजर्स ने तो गांधी परिवार की पूरी जन्मकुंडली ही खोलकर रख दी। उसने ट्वीट किया- “आपदा मे अवसर ढूंढना काग्रेंस से सीखे, आखिर 70year का अनुभव है। सत्ता गई, दलाली गई, कमीशन गया, कुछ नहीं मिला तो विदेशी वैक्सीन के लिए लॉबिंग करने लगे।” उसने आगे लिखा कि राहुल का नाना हिटलर का जासूस, मां रूस की एजेंट थी, बेटा चीन का जासूस, जाशूसी करना पुश्तैनी धंधा है।

पूर्व रॉ अधिकारी यादव ने हामिद अंसारी को किया बेनकाब

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर रॉ के एक पूर्व अधिकारी आर.के. यादव ने कुछ ऐसे हैरान करने वाले खुलासे किए हैं, जिनसे पता चलता है कि भारत में उच्च पदों पर बैठ चुका यह व्यक्ति केवल एक कट्टरपंथी ही नहीं, बल्कि एक देशद्रोह भी है। यादव ने अपनी पुस्तक "मिशन आर एन्ड डब्लू(Mission R&AW) " में कुछ ऐसी घटनाओं का उल्लेख किया है, जो हामिद की निष्ठां पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस सबके बावजूद 2007 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी की पसंद पर उन्हें भारत का उपराष्ट्रपति बना दिया गया। इस पद पर वह 10 वर्ष तक आसीन रहे। हाल ही में, हामिद अन्सारी ने मुसलमानों के लिए अलग शरिया अदालतों का समर्थन कर सबको चौंका दिया था। तब यह सवाल उठा कि देश की एक संवैधानिक पद पर रहा आदमी कैसे इस्लामिक कोर्ट की वकालत कर सकता है? हामिद अन्सारी पहले भी अपनी कट्टरपंथी सोंच के कई संकेत दे चुके हैं। कुछ समय पूर्व वह केरल के कट्टरपंथी संगठन पीएफआई की बैठक में गए थे।
रॉ के लिए काम कर चुके आर के यादव ने Mission R&AW के नाम से एक किताब भी लिखी हैयादव का बड़ा खुलासा
आर के यादव ने अपनी पुस्तक में उस घटना का उल्लेख किया है, जब 1990 में ईरान में भारत के राजदूत थे। उन्होंने लिखा है कि कैसे ईरान में हामिद के राजदूत रहते वहां पर काम कर रहे रॉ जासूसों और खबरियों की शामत आ गयी थी। यादव ने अपनी पुस्तक में एक "कपूर" नाम के एक जासूस का जिक्र किया है, जिसको   ईरान की ख़ुफ़िया एजेंसी ने अगवा कर लिया था। उसको कहाँ ले जाया गया, इस बारे में भारतीय दूतावास को कोई जानकारी नहीं दी गयी। तीन दिनों तक ईरान ख़ुफ़िया एजेंसी ने कपूर को अमानवीय यातनाएं दीं और फिर मरने के लिए एक खाली जगह पर फेंक दिया था। एक राजदूत के तौर पर हामिद की जिम्मेदारी थी कि वो ईरान सरकार से इस घटना की औपचारिक शिकायत दर्ज करवाते। जो उन्होंने नहीं किया, जिस कारण राजदूत अधिकारियों में हामिद के प्रति काफी रोष था। इसी दौरान एक और जासूस "माथुर" को अगवा कर लिया गया। वह भी दो दिन तक गायब रहा, लेकिन अन्सारी ने तब भी चुप्पी साधे रखी।
दूतावास कर्मचारियों की बगावत
हामिद अन्सारी के रहस्यमय रवैये से दूतावास कर्मचारियों का सब्र टूट गया। माथुर की पत्नी और दूतावास कर्मचारियों की पत्नियों ने राजदूत हामिद अंसारी से मिलने का समय माँगा। लेकिन हामिद अंसारी ने मिलने से मना कर दिया। हामिद के मना करने के बाद लगभग 30 महिलाओं ने हमीद अंसारी के कक्ष में हमला बोल, उन्हें घेराव किया। उनका केवल इतना ही कहना था कि आखिर किस कारण भारतीयों को अगवा किए जाने पर क्यों चुप्पी साधे हो? क्यों नहीं ईरानी अधिकारियों से विरोध दर्ज करवाया जा रहा? मामले की गम्भीरता को देखते हुए और राजदूत हामिद अंसारी के रवैये को देखते हुए, ईरान में सक्रीय अन्य रॉ अधिकारीयों ने तुरन्त नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय को अतिशीघ्र संज्ञान लेने को कहा। उस समय विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी से भी हस्ताक्षेप करने का अनुरोध किया। इसके बाद विदेश मंत्रालय के तुरंत हरकत में आने पर माथुर को रिहा कर दिया। पता चला कि माथुर को दो दिन हिरासत में थर्ड डिग्री की यातनाएँ दी थीं। राजदूत हामिद के इस रवैये ने ईरान में भारतीय खुफ़ियों को बुरी तरह से हिला कर रख दिया था। कपूर और माथुर दोनों ही भारतीय दूतावास में बतौर कर्मचारी सक्रीय थे।
हमीद अंसारी की नियत
हामिद अंसारी भारतीय विदेश सेवा(आई एफ एस ) के अधिकारी थे और इस हैसियत से वह ईरान के अलावा सऊदी अरब और कई दूसरे खाड़ी देशों में भारतीय राजदूत रहे। ईरान में घटित इन घटनाओं ने हामिद अंसारी की निष्ठां पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया था। कहते हैं, रॉ एवं अन्य सूचना एजेन्सियां हामिद पर संदेह करने लगी थीं। ईरान में रॉ के जासूस इसलिए भेजे जाते थे, ताकि वहां रहकर पाकिस्तान पर निगाह रखी जा सके, क्योकि पाकिस्तान और ईरान की सीमाएँ आपस में लगी हुई हैं। जिस माथुर को पकड़ा गया था, वह तेहरान में कश्मीरी आतंकवादियों के नेटवर्क का भांडा भोड़ने को ही था कि उसे अगवा कर लिया गया। वह अपने ख़ुफ़िया इनपुट नियमित समय पर भारत भेजता था और इसकी जानकारी राजदूत अंसारी को भी रहती थी। आर के यादव की पुस्तक के अनुसार राजदूत हामिद अंसारी को माथुर की इन इनपुट्स पर ऐतराज था। जिस दिन माथुर को अगवा किया गया था, उस दिन राजदूत हामिद अंसारी ने अपनी रोटिन रपट भेजी कि वह गायब है, लेकिन इस मुद्दे पर कोई कार्यवाही नहीं की।
हामिद अंसारी के विरुद्ध रिपोर्ट
आर के यादव ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि तेहरान से रॉ अधिकारी एन के सूद ने दिल्ली में उनके पास फोन किया और पुरे घटनाक्रम की जानकारी दी। अगले ही दिन यादव ने विपक्षी नेता अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात की। वाजपेयी ने प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव से मिलकर घटनाक्रम पर गम्भीरता से चर्चा की। इस पर प्रधानमंत्री राव ने, विषय की गम्भीरता को देखते हुए, तुरन्त कार्यवाही की। परिमाणस्वरुप, ईरानी अफसरों ने माथुर को छोड़ दिया। जिसके बाद माथुर को दिल्ली बुला लिया गया। दोनों जासूसों के इनपुट्स के आधार पर रॉ के वरिष्ठ अधिकारी को जाँच के लिए तेहरान भेजा गया। जिसने रॉ के सचिव को दी रिपोर्ट में हामिद अंसारी के रवैये को संदेहस्पद बताया।
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बायीं तस्वीर कांग्रेस सांसद अहमद पटेल की और दायीं तस्वीर रॉ के पूर्व अधिकारी आरके यादव की है। आर.बी.एल.निगम कांग्र.....

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बात 1990 के दशक के आखिरी वर्षों का है जब, H. Ansari ईरान मे भारत के Ambassador हुआ करते थे । उस समय तेहरान मे पोस्टेड RAW के जासूस Mr. Kapo...
एक और अफसर हुआ अगवा
मामला शांत होने के कुछ ही दिन बाद तेहरान में भारतीय दूतावास के सिक्योरिटी अफसर मोहम्मद उमर से ईरान की खुफ़िआ एजेंसी ने सम्पर्क किया। और अपने(ईरान) के लिए काम करने का ऑफर दिया। उमर ने ऐसा करने से मना कर दिया, और इसके बारे में राजदूत हामिद अंसारी को औपचारिक रूप से जानकारी दी गयी।लेकिन कुछ ही दिनों के अंदर उसे भी अगवा कर लिया गया। उसे बुरी तरह से मारा-पीटा गया। और बाद में तेहरान के बाहरी इलाके में फेंक दिया गया। इस बार भी राजदूत हामिद ने ईरान सरकार से विरोध दर्ज नहीं करवाया। इतना ही नहीं, कर्मचारियों को हिदायत दी कि इस मसले पर अपना मुँह बन्द रखें। जब बुरी तरह घायल मोहम्मद उमर को दूतावास लाया गया, तो हामिद अंसारी ने उसे दिल्ली भेजने की कवायत शुरू कर दी। इस पर रॉ के बाकि ऑपरेटिव्स ने विरोध दर्ज कराया। जिस पर वहां के रॉ के स्टेशन चीफ वेणुगोपाल ने राजदूत हामिद का आदेश मानने से साफ मना कर दिया।
क्या अंसारी गद्दारी कर रहे थे?
इस बारे में पुस्तक में बताया गया है कि ईरान के साथ हामिद अंसारी के साथ बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। हैरानी है कि इसके बावजूद उन्होंने कभी अपने कर्मचारियों के अगवा और टार्चर किये जाने का विरोध तक नहीं किया। रॉ अधिकारी यादव ने अपनी पुस्तक में इन घटनाओं का केवल उल्लेख किया है, लेकिन इन घटनाक्रमों पर किसी राजदूत द्वारा चुप्पी साधना बहुत कुछ व्यक्त कर रही हैं। हामिद राजदूत के तौर पर ईरान में क्या कर रहे थे? यह भी सम्भावनाएं व्यक्त की जा रहीं है कि रॉ जासूसों को पकड़वाने में हामिद अंसारी की ही गुप्त भूमिका रही हो? क्योकि राजदूत को सब जानकारी होती है कि कौन क्या है और क्या कर रहा है? ईरान में सक्रिय जासूसों की ईरान में कोई दिलचस्पी नहीं, बल्कि पाकिस्तान पर निगाह रखना है। अगर उन्हें रोकना चाहते थे तो यह भी समझना मुश्किल नहीं कि वो भारत के राजदूत होते हुए पाकिस्तान की सहायता कर रहे हो? इससे पूर्व आर के यादव कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल की सच्चाई भी उजागर कर चुके हैं।        
हामिद अंसारी की सोंच शुरू से ही राष्ट्र विरोधी 
10 अगस्त 2017 को उपराष्ट्रपति का पद छोड़ने के बाद से हामिद अंसारी लगातार अपने बयानों के कारण विवादों में बने हुए हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीर का मामला हो, तीन तलाक के कानून का विरोध हो या देश के हर जिले में शरिया अदालतें स्थापित करने का ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड का प्रस्ताव हो, सभी का हामिद अंसारी ने समर्थन किया है। हामिद अंसारी लगातार कह रहे हैं कि देश के मुसलमानों के मन में भय पैदा हो रहा है। हामिद अंसारी की इस देश विरोधी सोच की कुछ और परतों को रॉ के पूर्व अधिकारी आर के यादव ने Mission R&AW में  उजागर किया है।
हामिद अंसारी के चरित्र के बारे में रॉ के अधिकारी आर के यादव ने यह बात लंबी जांच पड़ताल और अनुभव के आधार पर कही है। अपने अनुभवों के आधार पर लिखी गई किताब Mission R&AW में हामिद अंसारी के दोहरे चरित्र पर एक पूरा अध्याय- Bizarre R&AW Incidents- ही लिखा है।
हामिद अंसारी ने ईरान में कश्मीर आंदोलनकारियों  का साथ दिया
आर के यादव –Bizarre R&AW Incidents में लिखते हैं कि रॉ के अधिकारी डी बी माथुर, तेहरान के करीब कौम में कश्मीर के युवकों के लिए चल रहे ट्रेनिंग कैंप पर नियमित रुप से दिल्ली को रिपोर्ट भेजते रहते थे। ये सभी रिपोर्ट्स राजदूत हामिद अंसारी के पास से होकर गुजरती थीं, इनमें से कई रिपोर्ट्स को लेकर हामिद अंसारी काफी विरोध में रहते थे। इसी दौरान, एक सुबह डी बी माथुर को ईरान की गुप्तचर संस्था ने अगवा कर लिया, लेकिन हामिद अंसारी ने ईरान की सरकार से इस बारे में कोई बात नहीं की और बहुत ही साधारण रिपोर्ट दिल्ली भेज कर शांत हो गए। दो दिनों तक डी बी माथुर के बारे में कोई जानकारी न मिलने पर भारतीय दूतावास के करीब 30 अधिकारियों की पत्नियों ने हामिद अंसारी के चैम्बर में जबरदस्ती घुसकर विरोध भी दर्ज कराया था।
कांग्रेस ने ऐसे व्यक्ति को उपराष्ट्रपति बनाया
विभिन्न देशों में भारत के राजदूत रह चुके हामिद अंसारी ने ऐसे काम किए हैं, जिससे भारत की सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों की पहचान दूसरे देशों के सामने आ गई। हामिद अंसारी ने ऐसा एक बार नहीं कई बार किया, जिससे स्पष्ट होता है कि हामिद अंसारी की सोच ही भारत विरोधी है। ऐसे भारत विरोधी चेहरे को कांग्रेस ने देश का उपराष्ट्रपति बनाया। आजकल हामिद अंसारी कांग्रेस की तरफ से मुसलमानों के पैरोकार बन कर सामने आ रहे हैं।