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फर्जी वीडियो शेयर करने से नोएडा हिंसा में RJD नेताओं का भी हाथ, प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ FIR: ‘मैनेजर को मारो और सुलगाओ शहर’: मानेसर से नोएडा तक मजदूरों की आड़ में छिपकर हो रही हिंसा की साजिश, वॉट्सऐप-इंस्टा-X पर मिले सबूत?

                                                नोएडा में हिंसक प्रदर्शन (साभार- दैनिक भास्कर)
नोएडा में सैलरी की माँग को लेकर कर्मचारियों के प्रदर्शन में भड़की हिंसा को लेकर भड़काऊ पोस्ट करने पर RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इन्होंने मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के एक पुराने वीडियो को नोएडा का बताकर शेयर किया था। इस पुराने वीडियो में पुलिस को प्रदर्शनकारी को पीटते दिखाया गया था।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले ही इन वीडियो का फैक्टचेक किया था। पुलिस ने वीडियो को गलत बताते हुए कहा कि यह वीडियो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की घटना का है। इसे गौतमबुद्ध नगर का बताकर सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया जा रहा है, जो बिल्कुल झूठ है।

पुलिस ने RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के अलावा भी भड़काऊ पोस्ट करने वाले कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है।

ऐसे में अदालतों से भी प्रश्न है कि हिंसा भड़काने वालों पर कानूनी डंडा चलेगा? ऐसे फेक वीडियो फैलाकर हिंसा भड़काने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। देश में अशांति फैलाना बहुत ही संगीन अपराध माना जाना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई नेता या पार्टी ऐसा घिनौना काम नहीं कर सके। लेकिन देश का दुर्भाग्य यह है कि जिस अपराध के लिए आम नागरिक को आसानी से जमानत नहीं मिलती उसी अपराध में नेताओं को मिल जाती है, क्यों?    

नोएडा में मजदूरों के वेतन वृद्धि समेत ज्यादातर माँगों को सरकार ने मान लिया है और उसे 1 अप्रैल 2026 से लागू भी कर दिया है। इसके बावजूद मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन जारी है। मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को प्रदर्शनकारियों ने 2 से 3 जगहों पर पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया और आगजनी की।

अब सवाल उठ रहा है कि सरकार जब मजदूरों के असंतोष का पता चलते ही एक्शन में आ गई, उनके साथ संवाद किया और सुनिश्चित किया कि उनकी माँगे पूरी हों, इसके बाद भी आगजनी और पथराव की घटनाएँ हो रही है, तो सवाल उठता है कि इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं…

हिंसा का नक्सली और पाकिस्तानी कनेक्शन की आशंका

साजिश का तो जाँच के बाद में पता चलेगा, लेकिन मुख्यमंत्री ने आशंका जताई है कि ये नक्सलवाद को फिर से जीवित करने का प्रयास हो सकता है। सीएम ने कहा कि देश में नक्सलवाद खात्मे के कगार पर है, लेकिन इसे पुनर्जीवित करने की कोशिश हो सकती है।

प्रदर्शनकारियों में भ्रामक और विघटनकारी तत्व भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो वास्तव में मजदूर हैं, उनसे ही बातचीत की जानी चाहिए। अक्सर बाहरी लोग मजदूर के प्रतिनिधि बनकर आंदोलन में घुसपैठ करते हैं।

वहीं श्रम मंत्री अनिल राजभर ने हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर पाकिस्तान लिंक की भी जाँच करने की बात कही थी। उन्होंने हिंसा को सुनियोजित साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि मेरठ और नोएडा से 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनका पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है।

सरकार के आला अधिकारी आलोक कुमार ने कहा है कि मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक होने के पीछे खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ अराजक तत्व मजदूरों की आड़ में हिंसा फैला रहे हैं। राज्य में उद्योगों को लेकर योगी सरकार ने सकारात्मक माहौल बनाया है। कानून व्यवस्था दुरुस्त किया गया है। साजिश कर इसे बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

गलत वीडियो और जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की गई

डीजीपी राजीव कृष्ण, जो लखनऊ कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ने कहा है कि अफवाह फैलाने वाले कई ग्रुप को चिन्हित किया गया है। कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो अलग-अलग जगहों पर भी पाए गए हैं। अफवाहें फैलाने वाले दो एक्स हैंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 50 से अधिक एक्स हैंडल की पहचान की गई है, जिनमें से कई पिछले 24 घंटों में बनाए गए हैं। अब उनकी जाँच होगी।
इतना ही नहीं, यूपी पुलिस ने सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो को गलत बताते हुए कहा है कि यह वीडियो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की घटना का है। इसे गौतमबुद्ध नगर का बताकर सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया जा रहा है, जो पूर्णतः असत्य है।
यूपी पुलिस ने किसी भी वीडियो या जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जानने की जरूरत पर बल दिया है। इसके अलावा NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऑडियो क्लिप में एक शख्स लोगों से कहता सुनाई दे रहा है कि मंगलवार को फिर से पुलिस पर हमला करना है और लाठीचार्ज करवाना है, क्योंकि कई लोग पहले दिन घायल हुए थे। इस ऑडियो में शख्स कह रहा है कि हमारे बहुत से बहन-भाई घायल हुए हैं और इसीलिए आप लोग सुबह आने की कृपा करें।
इसी के साथ कुछ चैट्स में प्रदर्शनकारियों को मिर्ची पाउडर साथ लाने की सलाह दी गई ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। एक मैसेज में लिखा गया कि अगर पुलिस लाठी उठाए तो मिर्ची पाउडर काम आएगा और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे लेकर आएँ। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होंगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

अब नोएडा का मामले में साजिश का पता तो जाँच पूरी होने के बाद चलेगा, लेकिन मानेसर को लेकर जो रिपोर्ट आई है उसने साफ हो गया है कि यहाँ मजदूरों की आड़ में साजिश के तहत हिंसा भड़काई गई।

मानेसर में रची गई गहरी साजिश का हुआ खुलासा

9 अप्रैल 2026 को गुरुगाम के मानेसर में आईएमटी कंपनी में वेतन वृद्धि की माँग लेकर मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान 300 से 400 की भीड़ जमा हो गई और कंपनी प्रबंधन के साथ-साथ पुलिस पर पथराव किया। घटना की जाँच के दौरान पता चला है कि व्हाट्स एप पर ग्रुप बनाई गई थी, जिसमें मैनेजर रामबीर को मारने की बात थी और फिर दंगा भड़काने की साजिश की गई थी। इस मैसेज में लिखा था कि रामबीर को बाहर लेकर आओ।

दूसरे मैसेज में रात तक इंतजार करने और फिर आग लगाने को कहा गया था। दरअसल साजिशकर्ता चाहते थे कि रात के अंधेरे का फायदा उठा कर काम को अंजाम दिया जाए। इतना ही नहीं मैसेज से पता चलता है कि पेट्रोल बम से हमले की तैयारी की गई थी। मैसेज में कहा गया है कि ठेके से बीयर की बोतल लेकर आना और पेट्रोल भरकर कंपनी पर फेंक देना। इससे पता चलता है कि साजिश कर मजदूरों की आड में कंपनियों को जलाने और मैनेजर को मारने की योजना थी।

पुलिस का कहना है कि व्हाट्स एप में जिस तरह के मैसेज मिले हैं, उससे पता चलता है कि कितनी बड़ी साजिश रची गई थी। पुलिस इस मामले की गहनता से जाँच कर रही है। जल्द ही ऐसे नकाबपोशों को बेनकाब किया जाएगा, जिन्होंने मजदूरों की आड में हिंसा फैलाने की कोशिश की। इस घटना ने बता दिया है कि कैसे भोलेभाले मजदूरों को भड़का कर, उन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए उकसा कर अपनी रोटी सेंकने की कोशिश अराजक तत्व करते हैं।

खुद Video कॉल पर काशी देखती थी ‘नफीसा’, तुफैल से करवाती थी रेकी… ‘बाबरी का बदला’ लेने को भड़काती रहती थी: 4 मुस्लिम देशों में फैला है ISI एजेंट का नेटवर्क

                   ISI एजेंट तुफैल और पाक फौजी की बीवी नफीसा की प्रताीकात्मक तस्वीर (फोटो- grokAI)
वाराणसी में पकड़े गए ISI एजेंट तुफैल को लेकर एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (ATS) की जाँच में रोजाना नई बातें सामने आ रही हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, तुफैल ने चार देशों में आतंकी नेटवर्क फैला रखा था।

 ATS तुफैल के मोबाइल के जरिए कई अहम सुरागों तक पहुँची है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एटीएस ने तुफैल के मोबाइल से लगभग 70% तक डेटा रिकवर किया है। इसमें उसके आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने की कई बातें सामने आई हैं। इसके अलावा तुफैल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बने अकाउंट्स की भी जाँच की जा रही है।

सोशल मीडिया की जाँच में पता चला कि तुफैल सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि 4 अन्य मुस्लिम देशों से भी जुड़ा हुआ है। वहाँ के लोगों से लगातार संपर्क में था। गौरतलब है कि तूफैल एक पाकिस्तानी फौजी की बीवी नसीफा के हनीट्रैप में भी फँसा था।

नफीसा ने वीडियो कॉल के जरिए वाराणसी देखा था। उसके लिए तुफैल ने कपड़े भी पाकिस्तान भिजवाए थे। इन्हें भिजवाने के लिए तुफैल ने नेपाल और पंजाब के रास्ते चुने। पुलिस जाँच में तुफैल के साथ जुड़े 4-5 लोगों के नाम सामने आए हैं। ATS उनसे भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।

विदेशी दोस्तों ने तोड़ा नाता

उत्तर प्रदेश एटीएस ने वाराणसी से तुफैल को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गुरुवार (22 मई 2025) को गिरफ्तार किया। एटीएस का शिकंजा जैसे ही तुफैल पर कसा, वैसे ही उसके विदेशी दोस्तों ने उससे सारे संपर्क तोड़ दिए हैं। इसकी जानकारी भी उसके मोबाइल से ही मिली है।
उसने तहरीक-ए-लब्बैक के नेता मौलाना शाह रिज़वी के वीडियो वॉट्सऐप ग्रुप में साझा किए। इन संदेशों में ‘गज़वा-ए-हिंद’ (भारत पर इस्लामी कब्ज़ा), बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने और भारत में शरिया कानून लागू करने जैसी भड़काऊ बातें शामिल थीं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसके गिरफ्तार होने के बाद व्हाट्सएप पर 19 ग्रुपों से में से 7 से उसे हटा दिया गया। साथ ही इस ग्रुप की पूरी हिस्ट्री और चैट्स डिलीट कर दी गई हैं। हालाँकि ATS के पास इसका क्लोन मौजूद है।
इसके अलावा ATS को ये भी पता चलास कि तुफैल ने पाकिस्तान के व्हाट्सएप ग्रुप का लिंक वाराणसी के अन्य लोगों को भी भेजा था। इसके जरिए वह मुस्लिम लोगों से समर्थन माँग रहा था। उसने राजघाट, नमोघाट, ज्ञानवापी, रेलवे स्टेशन, जामा मस्जिद, लाल किला, निजामुद्दीन औलिया की तस्वीरें और उनसे जुड़ी जानकारियों पाकिस्तान के कुछ नंबरों पर शेयर की हैं।
इसी तरह नफीसा से तुफैल की दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई। वाराणसी से जुड़े भारतीय होने पर नफीसा ने तुफैल को अपना नंबर दिया और उसे कुछ पाकिस्तानी ग्रुप में जुड़वाया। इसके बाद तुफैल कुछ और लोगों के संपर्क में आ गया। जाँच में सामने आया कि तुफैल 600 से अधिक पाकिस्तानी नंबरों के संपर्क में था। 
तुफैल का संबंध पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक से था। वह संगठन के नेता मौलाना शाद रिजवी का समर्थक था और उसके वीडियो व्हाट्सएप ग्रुपों में भेजा करता था। वह ‘गजवा -ए – हिन्द’, शरीयत लागू करने और बाबरी मस्जिद का बदला लेने जैसे उत्तेजक और भड़काऊ मैसेज शेयर करता था।

अगर वो CD चल जाती प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार गिर जाती… अब साथी पत्रकार ने खोली राजदीप सरदेसाई की पोल, कहा- उन्होंने ही ‘कैश फॉर वोट स्कैम’ का स्टिंग दबाया

                                          राजदीप सरदेसाई ने छिपाया था यूपीए सरकार के खिलाफ स्टिंग
अपने आपको ‘निष्पक्ष’ कहकर कांग्रेस के लिए रोना रोने वाले राजदीप सरदेसाई का एक बार फिर काला सच सामने आया है। उनके पूर्व साथी और वरिष्ठ पत्रकार मनोज रंजन त्रिपाठी ने कहा है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय में राजदीप ने ‘कैश फॉर वोट स्कैम’ का स्टिंग दबा दिया था। त्रिपाठी ने यह बात शुभांकर मिश्रा के पॉडकॉस्ट के दौरान की। बातचीत 1 घंटे 22 मिनट से लेकर 1 घंटे 26 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

2014 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार के जाने और मोदी सरकार आने के बाद से प्रसून वाजपेयी और राजदीप सरदेसाई आदि कई महारथी पत्रकारों की बहुत किरकिरी हो रही है। कांग्रेस के हाथ का खिलौना रहे इन पत्रकारों का एजेंडा सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करते रहते हैं। हालाँकि कई बार जनता के बीच मोदी विरोध करने पर अपमानित भी होना पड़ा। लेकिन जो पत्रकार एक सेट एजेंडे पर काम कर अपने आकाओं को खुश करना ही अपनी योग्यता मानते हों, फिर उन्हें किसी तरह की बेइज्जती की परवाह नहीं होती।   

मनोज रंजन त्रिपाठी ने मीडिया इंडस्ट्री के ‘दिग्गज’ पत्रकार को लेकर बताया कि कैसे संसद में जब ये स्कैम उजागर हुआ, उससे पहले 2008 में इस पर स्टिंग हो चुका था। लेकिन, तब राजदीप सरदेसाई उनके बॉस थे और उन्होंने इस स्टिंग ऑपरेशन को दबा दिया।

मनोज रंजन ने कहा कि अगर वो सीडी चल जाती तो अमर सिंह से लेकर कई बड़े नेता इसमें फँसते… लेकिन राजदीप बॉस थे। मनोज रंजन ने बातचीत में साफ तौर पर कहा कि अगर ये पॉडकॉस्ट राजदीप देख लें तो भी उन्हें कोई दिक्कत नहीं, क्योंकि जो वो बोल रहे वो सच हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजदीप ने स्टिंग को दबाया और वो ऐसे सौ लोग को जानते हैं जिन्हें पता है राजदीप ने स्टिंग को दबाया।

इस खुलासे के बाद अब लोग राजदीप सरदेसाई से जवाब माँग रहे हैं।

ये पहली बार नहीं है कि राजदीप के ऊपर यूपीए काल में इस स्टिंग को दबाने का आरोप लगा हो। इससे पूर्व दूरदर्शन न्यूज़ के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को लेकर खुलासा किया था।

उन्होंने कहा था, जब कैश फॉर वोट कांड हुआ था, राजदीप सरदेसाई जिस चैनल के हेड थे अगर वो उस स्टिंग ऑपरेशन को प्रसारित कर देता तो शायद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार गिर जाती।

अशोक श्रीवास्तव ने आगे बताया, “मनमोहन सिंह की सरकार को बचाने के लिए पैसों का जो लेनदेन हुआ था, उस पर एक स्टिंग ऑपरेशन हो गया था। राजदीप सरदेसाई उस स्टिंग ऑपरेशन को देखने के बाद एक संपादक के रूप में निर्णय लिया कि इसे टेलीकास्ट करने से पहले वो इसकी जाँच करेंगे। आपने जाँच के नाम पर कई महीनों तक उसे रोक कर रखा। मनमोहन सिंह की सरकार बन गई, उसके बाद राजदीप सरदेसाई को पद्मश्री सम्मान दिया जाता है।”

अशोक श्रीवास्तव के बाद ये खुलासा मनोज रंजन त्रिपाठी ने किया है जो बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों में बतौर पत्रकार सेवा दे चुके हैं और राजदीप के साथ काम करने का अनुभव रखते हैं। इस पॉडकॉस्ट में उन्होंने मीडिया इंडस्ट्री पर भी बात की। बताया कि उनके सामने ऐसा हुआ है कि वो लाशों के बीच खड़े रहे और उन्हें कैमरे पर आने से पहले TIE पहनने को कहा गया है कि कितने भी वीभत्स विजुअल हों, पहले टाई पहनकर ही सामने आएँगे।

राहुल क्या अब जर्मनी तय करेगा भारत की न्याय प्रणाली कितनी स्वतंत्र? विदेशी टूलकिट और कांग्रेस के बीच संबंध का राज


कांग्रेस समर्थक विदेशी टूलकिट का राज खुल गया है। राहुल गांधी ने लंदन में कहा था कि भारत में लोकतंत्र खत्म हो रहा है और अमेरिका और यूरोप से गुहार लगाई थी कि वे इसमें हस्तक्षेप करें। इसके बाद सबसे पहले अमेरिका ने बयान दिया कि उसकी राहुल गांधी मामले पर नजर है। अब जर्मनी ने बयान दिया है कि हम उम्मीद करते हैं कि राहुल गांधी मामले में न्यायिक स्वतंत्रता और मौलिक लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन किया जाएगा। तो क्या अब जर्मनी तय करेगा भारत की न्याय प्रणाली कितनी स्वतंत्र है? कायदे से अमेरिका और जर्मनी के बयान की भारत में आलोचना होनी चाहिए कि आखिर भारतीय न्यायिक प्रणाली पर और देश के आंतरिक मामले में जर्मनी का क्या काम? इसके उलट राहुल गांधी के करीबी कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जर्मनी के बयान का स्वागत किया है। इससे कांग्रेस समर्थक विदेशी टूलकिट का राज खुल गया है।

टूलकिट के समर्थन से भारत को कमजोर वाले राहुल गाँधी और इनको समर्थन देने वाली पार्टियों से देश यह भी जानना चाहता है कि सोनिया गाँधी, राहुल, प्रियंका और अन्य पार्टियों के पास इतनी दौलत होने का क्या राज है? भाजपा और इसके समर्थक दलों को इस गंभीर मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाना चाहिए।  

देश ने मोदी को दिल में बसाया, 2024 में विदेशी ताकतों का सपना होगा चकनाचूर

जिस तरह 2014 के बाद से भारत विकास के पथ पर अग्रसर है उसे देखते हुए देशवासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिल में बसाया है। इसकी झांकी पीएम मोदी के रोड शो में साफ देखने को मिलती है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं भारतीय मतदाताओं को प्रभावित करने वाले ये विदेशी ताकतें कौन होता है। भारतीय मतदाता निश्चित रूप से 2024 में मोदी जी को फिर से वापस लाएगा! 2024 में विदेशी ताकतों का सपना चकनाचूर होगा। देशों में शासन परिवर्तन के उसके मंसूबे का अंत भारत में होगा। भारत में ऐसा कुछ करने की कोशिश करना मुश्किल है। अब देश ने मोदी को दिल में बसा लिया है।

राहुल ने कहा था – देश में लोकतंत्र समाप्त हो रहा, अमेरिका और यूरोप चुपचाप देख रहे

राहुल ने लंदन में जर्नलिस्ट एसोसिएशन नाम के संगठन की ओर से आयोजित कार्यकम में कहा था, ”यदि यूरोप से तीन या 4 गुना बड़े देश में लोकतंत्र खत्म हो जाता है, तो आप कैसे रिएक्ट करेंगे। असल में भारत में ऐसा हो चुका है, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। इसकी वजह यह है कि कारोबार और पैसे का मामला है। अमेरिका से आबादी में तीन से 4 गुना बड़े देश में लोकतंत्र समाप्त हो रहा है और इसकी रक्षा करने का दावा करने वाले अमेरिका और यूरोप चुपचाप देख रहे हैं।” राहुल ने कहा था, विपक्ष के तौर पर हम लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन यह अकेले भारत की जंग नहीं है। यह पूरे लोकतंत्र का एक संघर्ष है।

राहुल खुद को समझते देश से ऊपर, देश को नीचा दिखाने का मौका नहीं छोड़ते

राहुल खुद को देश से ऊपर समझते हैं, राहुल गांधी को नियम तोड़ने की आदत हो गई है। यही वजह है कि उनके कर्म ने यह सजा दी है। लंदन जाकर देश को नीचा दिखाना, लोकतंत्र खतरे में है बताना और विदेशी ताकतों से हस्तक्षेप करने की बात करना इस तरह के अनगित उदाहरण हैं जब राहुल गांधी पीए मोदी बदनाम करने के लिए देश को नीचा दिखाते रहे हैं। ऐसा लगता है कि 9 साल से सत्ता सुख से वंचित राहुल इस कदर विचलित हो गए हैं कि वे अनाप-शनाप कुछ भी बोल देते हैं।

मोदी-विरोध से भारत विरोध पर उतरे राहुल

राहुल गांधी को जब भारत जोड़ो यात्रा में सफलता नहीं मिली तो वह विदेश की धरती पर जाकर मोदी-विरोधी प्रचार करने लगे। मोदी-विरोध करते-करते वे भारत विरोध भी उतर आए हैं जो कि काफी गंभीर बात है। राहुल गांधी को देश की सरकार या पीएम मोदी से चाहे कितनी भी घृणा, तथा नफरत क्यों ना हो, लेकिन उन्हें देश के बाहर जाकर देश की बुराई नहीं करनी चाहिए। राहुल को यह समझना चाहिए कि विदेश वाले उन्हें वोट देने नहीं आयेंगे। वोट तो उन्हें भारतवासी ही देंगे।

अमेरिका भी रख रहा राहुल गांधी विवाद पर नजर

अमेरिका ने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि कानून के शासन और न्यायिक स्वतंत्रता के लिए सम्मान किसी भी लोकतंत्र की आधारशिला है। अमेरिका भारतीय अदालतों में गांधी के मामले को देख रहा है। उनका कहना है कि भारत के साथ अमेरिका लोकतांत्रिक मूल्यों पर साझा प्रतिबद्धता को लेकर जुड़ा हुआ है।

भारत में राहुल गांधी की संसद से सदस्यता जाने के एक सवाल में उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा, हम हमारे दोनों लोकतंत्रों को मजबूत करने के अहम पहलू के तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी के साथ लोकतांत्रिक सिद्धांतों की सुरक्षा की जरुरतों को दिखाना जारी रखते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका भारत या राहुल गांधी के साथ बातचीत कर रहा है। इसपर उन्होंने कहा कि इसपर कहने के लिए फिलहाल उनके पास कुछ नहीं है।

जर्मनी ने कहा- उम्मीद है न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों का पालन किया जाएगा

जर्मनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, “हम भारत में विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी के खिलाफ आए अदालत के फैसले और उनकी संसद सदस्यता रद्द होने के मामले पर नजर बनाए हुए हैं। राहुल गांधी फैसले के खिलाफ अपील करने की स्थिति में हैं। अपील के बाद स्पष्ट होगा कि फैसला कायम रहेगा या नहीं और उनकी संसद सदस्यता रद्द करने का कोई आधार है या नहीं। हम उम्मीद करते हैं कि न्यायिक स्वतंत्रता और मौलिक लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन किया जाएगा।”

आंतरिक मामले में दखल के लिए दिग्विजय ने जर्मनी का जताया आभार

ओबीसी समाज को अपमानित करने के मामले में कोर्ट ने राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई। इसके बाद संसद ने कानून के तहत उनकी सदस्यता खत्म की। लेकिन दूसरे देशों की प्रतिक्रिया ने भारत को हैरान कर दिया है। भारत के आंतरिक मामले में जर्मनी की दखल के बाद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आभार जताते हुए ट्वीट किया। उन्होंने भारत में लोकतंत्र के कमजोर होने का आरोप लगाया। दिग्विजय सिंह ने लिखा, “धन्यवाद, जर्मनी विदेश मंत्रालय और रिचर्ड वॉकर, जिन्होंने इस पर ध्यान दिया कि किस तरह से राहुल गांधी को निशाना बनाने के लिए लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है।”

क्या भारत में जनतंत्र और न्यायपालिका चलाने के लिए विदेशी ताकतें आएंगी

जिस तरह राहुल गांधी ने अमेरिका और यूरोप से भारत में हस्तक्षेप करने की मांग की और उसके बाद अमेरिका और जर्मनी का बयान देना यह साबित करता है कांग्रेस विदेशी ताकतों से मिली हुई है। भारत में पीएम मोदी के नेतृत्व में जिस तरह देश लगातार तरक्की के रास्ते पर जा रहा है ऐसे में कांग्रेस के पास देश में मोदी सरकार का विरोध करने का कोई मुद्दा नहीं है। यही वजह है कि वे विदेशी ताकतों की शरण में पहुंच गए हैं। लेकिन यहां सवाल उठता है कि क्या अब भारत में जनतंत्र और न्यायपालिका चलाने के लिए विदेशी ताकतें आएंगी?

राहुल की विदेशी सांठगांठ और आमंत्रण की खुली पोल

राहुल गांधी से पहले कोर्ट की सजा के बाद 15 से अधिक सांसदों की सदस्यता खत्म हुई। लेकिन किसी भी मामले में दूसरे देशों ने कोई बयान जारी नहीं किया। लेकिन राहुल के मामले में बयान जारी करना और इस पर अमेरिका और जर्मनी द्वारा नजर बनाये रखना यह साबित करता है कि कांग्रेस की सरकारें रूस, अमेरिका, जर्मनी, चीन जैसे विदेशी सरकारों के इशारों पर चल रही थी। भारत की नीतियां इन देशों के अनुरूप बनाई जा रही थीं। कांग्रेस की सरकारें दूसरे देशों को खुश करने के लिए राष्ट्रीय हितों को तिलांजलि दे रही थी। चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के बीच इसका प्रमाण है। मोदी सरकार की स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों की प्राथमिकता ने इन देशों को परेशान कर दिया है। इसलिए ये देश भारत में एक ऐसी कठपुतली सरकार चाहते हैं, जो इनके इशारों पर काम कर सके।

कांग्रेस को देश के लोगों पर नहीं, विदेशी पर ज्यादा भरोसा

कांग्रेस क्यों विदेशी ताकतों से मदद ले रही है, इसकी तह में जाएं तो पाएंगे कि कांग्रेस पार्टी को देश के लोगों पर कभी भरोसा ही नहीं रहा। इसीलिए वे लगातार देश विरोधी बातें करते हैं। वे लगातार देश को नीचा दिखाने का कृत्य करते हैं। सनातन धर्म का वे अनादर करते हैं। दशकों तक देश के लोगों को विकास से वंचित रखा। सीमा के गांवों में सड़कें इसलिए नहीं बनाई कि विदेशी सेना इसका उपयोग कर लेगी, यानि देश की सेना पर भी भरोसा नहीं था। 60 सालों तक देश लूटने वाली कांग्रेस ने देश भ्रष्टाचार जरूर दिया है। अब चूंकि उनका देश के लोगों में भरोसा नहीं है, इसीलिए वे फिर से सत्ता में लौटने और लूट को अंजाम देने के लिए विदेशी ताकतों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।

गांधी परिवार की चीन से नजदीकी का राज क्या है?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी लंदन यात्रा के दौरान कम्युनिस्ट राष्ट्र चीन की तारीफ़ करते हुए कहा कि चीन शांति का पक्षकार है। चीन की तारीफ करने से पूर्व अगर तारीखों पर नजर डालेंगे पाएंगे कि सिर्फ़ राहुल गांधी ही नहीं बल्कि पूरा गांधी परिवार चीन की कम्युनिस्ट विचारधारा की गिरफ़्त में रहा है। जब देश में डोकलाम विवाद चल रहा था, उस समय राहुल गांधी चीन के अधिकारियों से साथ मुलाकात कर रहे थे। उसी दौरान गांधी परिवार को चीनी राजदूत के साथ डिनर पर देखा जा सकता है। सवाल यह है कि गांधी परिवार किस हैसियत से चीनी राजदूतों के साथ यह मेलज़ोल कर रहा था? गांधी परिवार और कम्युनिस्ट राष्ट्र चीन की जुगलबंदी का राज क्या है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सकारात्मक छवि भारत में बनाने पर गांधी परिवार क्यों काम कर रहा था। आज देश की 140 करोड़ जनता यह जानना चाहती है कि राहुल गांधी और उनके परिवार के सदस्यों ने मिलकर चीनी सरकार से कौन सा गुप्त समझौता किया है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सोनिया गांधी की यह तस्वीर 7 अगस्त 2008 की है, जब चीन बीजिंग ओलंपिक का आयोजन कर रहा था। इसमें हैरान करने वाली बात यह थी कि भारत के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की जगह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष को ठीक 7 अगस्त, 2008 के दिन ही सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। 2008 में CCP और कॉन्ग्रेस के बीच यह MoU तब हुआ जब भारत में वामपंथी दलों ने कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA-1 सरकार में विश्वास की कमी प्रकट की थी।

विदेशी ताकतें भारत में चाहती है कमजोर और गठबंधन सरकार

विदेशी ताकतें और जार्ज सोरोस जैसे लोग भारत में एक कमजोर और गठबंधन सरकार को पसंद करते हैं, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उसे चला सकें। एक स्थिर, पूर्ण बहुमत वाली सरकार से वे डरते हैं और इसीलिए उसे हटाना चाहते हैं। यह एक सर्वविदित तथ्य है कि राहुल गांधी 2022 में जब ब्रिटेन में थे उसी समय सोरोस भी ब्रिटेन में था। यह डीपस्टेट का षड़यंत्र है जिसमें कांग्रेस सहित लेफ्ट लिबरल मिले हुए हैं।