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मध्य प्रदेश : कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी घिरे, मप्र की महिलाओं का अपमान कर बताया सबसे ज्यादा शराबी, अपनी पार्टी में कमियां बताई

गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर अब प्रधानमंत्री बनने तक कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ क्या-क्या प्रपंच नहीं किए, सबके सब गंदे नाले में गिर गए। मोदी है कि कांग्रेस और इसके अंधभक्तों के रास्ते में एक पहाड़ बन खड़ा है। और उस पहाड़ को गिराने में कांग्रेस अपना संतुलन खोती जा रही है। मोदी विरोध में कभी सेना का अपमान, कभी nation के खिलाफ लड़ाई। जब कहीं कोई बस नहीं चला तो मध्य प्रदेश अध्यक्ष ने महिलाओं को ही शराबी बता दिया। जबकि बिहार में चुनाव निकट है।   
मध्य प्रदेश कांग्रेस में इस वक्त सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य के कांग्रेस छोड़कर जाने के मुद्दे पर परोक्ष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर निशाना साधा था। प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरे मामले को दो करीबियों के बीच का मुद्दा बताकर दबाने की नाकाम कोशिश की। अब पटवारी ने खुद ही ऐसे बयान दिए हैं, जिसने वे बीजेपी और नारीशक्ति के साथ-साथ अपनी पार्टी के भी निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, जीतू पटवारी ने कहा है कि देशभर में मध्य प्रदेश की महिलाएं सबसे ज्यादा शराब पीती हैं। उनके इस बयान पर बवाल शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और महिला नेत्रियों ने इसे महिलाओं का अपमान बताया है और माफी मांगने के लिए कहा है। इस बीच पटवारी ने एक इंटरव्यू में कहा है कि कां ग्रेस अपनी हार के लिए बार-बार भाजपा को दोषी नहीं ठहरा सकती। हमारी खुद की भी कमियां हैं, जिनके चलते पार्टी हार रही है। पटवारी का यह बयान राहुल गांधी की हर हार के लिए भाजपा को कोसने की नीति के विपरीत है।

हरतालिका तीज के दिन प्रदेश की बहनों का किया अपमान- सीएम
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के महिलाओं को लेकर दिए बयान पर सियासत गरमा गई है। भाजपा ने इसे लाड़ली बहनों का अपमान बताया है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बेशर्मी की हद होती है। हरतालिका तीज पर दिए गए इस तरह के बयान का जनता पूरा हिसाब चुकाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पटवारी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि लाडली बहनों को शराबी बताना दुर्भाग्यपूर्ण है। बहनों का यह अपमान मध्य प्रदेश बर्दाश्त नहीं करेगा। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उनके ही एक कांग्रेस नेता ने कहा था कि लाडली बहनों को बोरे में बंद कर देंगे। आज हरतालिका तीज है। तीज के त्योहार के दिन बहनों का अपमान हमारी सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी प्रदेश की महिलाओं से माफी मांगें
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बयान पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जीतू पटवारी ने प्रदेश की मातृशक्ति को ‘शराबी’ कहकर अपमानित किया है। खंडेलवाल ने कहा कि आज जब करोड़ों बहनें सात्विक श्रद्धा के साथ हरतालिका तीज का व्रत कर रही हैं, ऐसे पावन अवसर पर इस तरह की अभद्र भाषा भारतीय संस्कृति और करोड़ों महिलाओं की आस्था का घोर अपमान है। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार लाड़ली बहनों को सम्मानपूर्वक आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है, इसी वजह से कांग्रेस बौखलाई हुई है। उन्होंने मांग की कि जीतू पटवारी तुरंत प्रदेश की महिलाओं से माफी मांगें।

कांग्रेस की कुत्सित मानसिकता का अशोभनीय उदाहरण- सुधांशु त्रिवेदी
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी पटवारी के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस का चेहरा कितना महिला विरोधी है, इसका एक अत्यंत निंदनीय उदाहरण मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बयान से सामने आया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में अधिकांश महिलाएं शराब पीती हैं, और सर्वाधिक शराब पीती हैं। यह बयान न केवल मध्य प्रदेश की महिलाओं का अपमान है, बल्कि कांग्रेस की महिला विरोधी कुत्सित मानसिकता का एक अशोभनीय उदाहरण है।

सोनिया गांधी की इटली से आंकड़े लेकर आए हैं पटवारी : सारंग
प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने भी जीतू पटवारी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि महिलाओं का अपमान करना कांग्रेस की संस्कृति है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि क्या जीतू पटवारी आंकड़े उसी इटली से लेकर आए हैं? जहां की उनकी नेता सोनिया गांधी हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की बहन बेटियों को इस तरह से बदनाम करना बहुत आपत्तिजनक है। अब प्रियंका गांधी कहां हैं, जो कहती थीं कि लड़की हूं, लड़ सकती हूं। इस तरह महिलाओं का अपमान हो रहा है और सोनिया तथा प्रियंका गांधी मूकदर्शक बनी देख रही हैं। वहीं, पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस ने कहा कि आज जब महिलाएं हरतालिका तीज पर व्रत रख रही हैं और पानी तक ग्रहण नहीं कर रही हैं, ऐसे दिन जीतू पटवारी का यह बयान हर बेटी और बहन का अपमान है। यह परिवार व्यवस्था, संस्कार और पहचान का भी अपमान है। कांग्रेस हार की कुंठा निकालने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रही है।

सरकार नशे के खिलाफ सख्त, पांच गुना महंगा किया नशा
मध्यप्रदेश में नशे के खिलाफ सरकार की मुहिम तेज होती जा रही है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने रविवार को बड़ा बयान देते हुए दावा किया कि प्रदेश में नशे के कारोबार पर अब तक की सबसे बड़ी चोट की गई है। उन्होंने कहा कि पहले जो नशे की शीशी 100 रुपये में आसानी से उपलब्ध हो जाती थी, आज 500 रुपये देने पर भी मिलना मुश्किल हो गया है। यह स्थिति सरकार की सख़्ती और लगातार चल रही कार्रवाई का नतीजा है। डिप्टी सीएम ने जानकारी दी कि अब तक 500 से ज्यादा अपराधियों को पकड़कर जेल भेजा गया है। नशे का धंधा करने वाले माफ़िया और सप्लायरों को पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। जगह-जगह लगातार छापेमारी की जा रही है, ताकि नशे की जड़ों को पूरी तरह से खत्म किया जा सके। उन्होंने साफ कहा कि सरकार का मक़सद केवल अपराधियों पर शिकंजा कसना ही नहीं, बल्कि समाज को नशे की लत से पूरी तरह मुक्त कराना है। इस कड़ी में युवाओं से भी उन्होंने अपील की कि वे इस अभियान का हिस्सा बनें और नशामुक्त समाज बनाने में सक्रिय सहयोग दें।

हार के लिए भाजपा को दोषी नहीं ठहरा सकते,हमारी खुद की कमियां-जीतू
बीजेपी नेताओं के इस पलटवार के बीच जीतू पटवारी अपने एक और बयान से घिरे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया कि कांग्रेस अपनी हार के लिए बार-बार भाजपा को दोषी नहीं ठहरा सकती। हमारी खुद की भी कमियां हैं, जिनके चलते पार्टी लगातार हार रही है। पटवारी का यह बयान राहुल गांधी की हर हार के लिए भाजपा को कोसने की नीति के विपरीत है। पटवारी ने कहा कि विशेषकर राज्य में पार्टी की लगातार चुनावी हार के लिए भाजपा नहीं, बल्कि हमारी अपनी कमजोरियां भी जिम्मेदार हैं। हम राज्य में लगातार तीन-चार चुनाव हार चुके हैं, जिसमें 2023 का विधानसभा चुनाव भी शामिल है। इसका मतलब है कि हम अपनी चुनावी हार के लिए हमेशा भाजपा को दोष नहीं दे सकते। हमारी कमज़ोरियां भी ज़िम्मेदार हैं और उन्हें अभी सुधारना ही होगा।

कांग्रेस की मानसिकता ही महिला विरोधी- कंगना रनौत
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बयान पर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने जीतू पटवारी और कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। कंगना ने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता महिला विरोधी है। मेरे लिए भी कांग्रेस ने काफी कुछ गलत कहा था। भाजपा सांसद कंगना रनौत का कहना है कि कांग्रेस की हमेशा से महिला विरोधी मानसिकता रही है। क्या भाव चल रहे हैं, मंडी की बेटियां मेरे लिए कहा गया था। इसलिए यह कोई बड़ी बात नहीं है कि कांग्रेस ने एक बार फिर महिलाओं का अपमान किया है। मंडी से सांसद कंगना ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने महिलाओं पर टिप्पणी कर अपनी छोटी मानसिकता को दर्शाया है। यही कांग्रेस का चाल-चरित्र है। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को माफी मांगने और पटवारी को पद से हटाने की मांग की है।

बांग्लादेश : ‘1 घंटे में इस्तीफा दो, नहीं तो परिणाम भुगतो’: मुख्य न्यायाधीश को धमकी, सुप्रीम कोर्ट सहित हाई कोर्ट को मुस्लिम भीड़ ने घेरा

                   बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश और उनका आवास (दाएँ) (साभार: Dhaka Tribune)
बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्ता पलटने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों के वेश में कट्टरपंथियों ने अब सर्वोच्च न्यायालय को निशाना बनाया है। प्रदर्शनकारी शनिवार (10 अगस्त 2024) की सुबह सुप्रीम कोर्ट को घेर लिए और मुख्य न्यायाधीश सहित सभी न्यायाधीशों से इस्तीफे की माँग की। कहा जा रहा है कि मुख्य न्यायाधीश सहित सभी जज कोर्ट से भाग गए हैं।

दरअसल, शेख हसीना के इस्तीफा देकर भारत चले जाने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया है। मुख्य न्यायाधीश ने अंतरिम सरकार से परामर्श किए बिना ही न्यायालय के सभी जजों की एक बैठक बुला ली थी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की भीड़ न्यायालय परिसर पहुँचकर उसे घेर लिया।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि न्यायालय के न्यायाधीश एक साजिश रच रहे थे, जिसके कारण लोगों में आक्रोश फैल गया और उनसे जवाबदेही की माँग की गई। तनाव बढ़ने पर न्यायालय की बैठक रद्द कर दी गई। हालाँकि, प्रदर्शनकारी रूके नहीं सुप्रीम कोर्ट को घेरना जारी रखा। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को पद छोड़ने के लिए एक घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

इस बैठक से पहले कार्यवाहक सरकार के सलाहकार आसिफ महमूद ने मुख्य न्यायाधीश को ‘फासीवाद का मित्र’ बताते हुए उनके इस्तीफे की माँग की थी। इसके साथ ही उन्होंने पूर्ण न्यायालय की बैठक को रद्द करने का अल्टीमेटम भी जारी किया था। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पूर्ण न्यायालय की बैठक में आम तौर पर न्यायपालिका की प्रशासनिक गतिविधियों सहित विभिन्न एजेंडों पर चर्चा होती है।

दरअसल, मुख्य न्यायाधीश ने 10:30 बजे पूर्ण कोर्ट की बैठक बुलाई थी, ताकि मौजूदा परिस्थितियों में न्यायालय कैसे काम कर सकता है, इस पर एवं अन्य मुद्दों पर चर्चा की जा सके। प्रदर्शनकारियों ने इसे न्यायिक तख्ता पलट बता दिया। अंतरिम सरकार में युवा एवं खेल मंत्रालय के सलाहकार आसिफ महमूद ने फेसबुक पर पोस्ट करके मुख्य न्यायाधीश को तत्काल इस्तीफे की चेतावनी दी।

आसिफ महमूद ने कहा, “फासीवाद से पोषित और विभिन्न कुकृत्यों में शामिल सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से कोई चर्चा किए बिना पूर्ण न्यायालय की बैठक बुलाई है। पराजित ताकतों द्वारा कोई भी साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्र और वकील पहले ही विरोध में इकट्ठा होना शुरू कर चुके हैं।” प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ हाई कोर्ट को भी घेर लिया है।

छात्र आंदोलन के एक अन्य समन्वयक हसनत अब्दुल्ला ने शनिवार की सुबह फेसबुक लाइव पर आकर कहा, “छात्रों और नागरिकों के विद्रोह की रक्षा और न्यायपालिका के तख्तापलट को रोकने के लिए उच्च न्यायालय को घेर लें।” इस आह्वान के बाद हजारों की संख्या में पहुँचे छात्र प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट को घेर लिया।

इसके बाद में फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा, “हमने पहले ही मुख्य न्यायाधीश के इस्तीफे की माँग की थी। अगर वे छात्रों के खिलाफ रुख अपनाते हैं और उन्हें भड़काते हैं तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।” उनके तत्काल और बिना शर्त इस्तीफे की माँग करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, “हसीना को सत्ता से हटाने वाली जनता आपको कुर्सी से उतारने में आधा घंटा भी नहीं लगाएगी।”

इतना ही नहीं, मुख्य न्यायाधीश के आधिकारिक आवास पर भी प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया और वहाँ रखे सारे सामान को अपने साथ ले गए। हालाँकि, उन्होंने इस भवन में आग नहीं लगाई। हमले के दौरान किसी ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश नहीं की। 5 अगस्त को बांग्लादेश में तख्ता पलट के बाद से ही वहाँ कोई सुरक्षाकर्मी नहीं है। सभी भाग गए हैं।

पुलिस की गैर मौजूदगी में कोई भी व्यक्ति बिना रोक-टोक मुख्य द्वार से अंदर आ-जा सकता है। शुक्रवार (9 अगस्त 2024) को राजधानी के हरे रोड स्थित मुख्य न्यायाधीश के आवास के मुख्य द्वार पर कोई सुरक्षा गार्ड ड्यूटी पर नहीं दिखा। अंदर घर का सामान बिखरा पड़ा था। घटना के बाद से उस मकान में कहीं कोई नहीं दिख रहा है और ना ही कोई सुरक्षाकर्मी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 5 अगस्त की दोपहर को अचानक हुए हमले के कुछ देर पहले ही मुख्य न्यायाधीश ओबैदुल हसन घर से निकल गए थे। उस दिन मुख्य न्यायाधीश के आवास के सामने जज कॉम्प्लेक्स आवासीय इमारत पर भी हमला हुआ था और भीड़ न्यायाधीशों को गालियाँ दे रही थीं। उनमें से कुछ लोग बाड़ फाँदकर अंदर घुस गए थे और इमारत पर हमला कर तोड़फोड़ की थी।

अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार की अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण बांग्लादेश (ICT-B) में पूर्व मुख्य अभियोजक बैरिस्टर तूरीन अफरोज पर भी हमला किया गया है। तूरीन ने साल 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए कई रजाकरों के खिलाफ मुकदमों की पैरवी की थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामी भीड़ ने उनके घर को घेर लिया और उन पर हमला किया। हमलावरों ने उन्हें पकड़कर जबरन उनके बाल काट दिए और उनके पैरों को घायल कर दिया। सोशल मीडिया पर इस घटना की कई परेशान करने वाली तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसे पीड़िता की बताई जा रही हैं। हालाँकि, ऑपइंडिया इन तस्वीरों की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सका।

तूरीन अफ़रोज़ ने 6 अगस्त 2024 को इंडिपेंडेंट टेलीविज़न से कहा, “उन्होंने (हमलवारों ने) पूछा- ‘तुमने हिजाब क्यों नहीं पहना है? तुम्हारी माँ देश छोड़कर चली गई है। तुम क्यों नहीं गईं?’ उन्होंने लगातार मेरे पैरों पर पेंसिल से वार किया। मैं मधुमेह से पीड़ित हूँ। मेरी 16 वर्षीय बेटी मेरे साथ थी। मैं बहुत डरी हुई थी। अगर उन्होंने उसके साथ बलात्कार किया होता तो एक माँ के तौर पर मैं क्या करती?”

उत्तर प्रदेश : सरकार सजा रही अयोध्या को, लेकिन भूमि जेहादियों ने पौराणिक मणि पर्वत की तीन तरफ बना दी गई दरगाह, गणेश कुंड के पास नई मजार बनाने की तैयारी: ईरान और बगदाद के नाम पर हैं कब्रें

अयोध्या का मणिपर्वत घिरा हुआ है हजरत शीष, कोतवाल बाबा और शमशुद्दीन की दरगाह से,(दाएँ- दरगाह हजरत शीष के खादिम)
अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को रामजन्मभूमि पर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। देश और दुनिया के विशिष्ट लोग इस अवसर पर अयोध्या पहुँच रहे हैं। ये सभी लोग अन्य दर्शनार्थियों के साथ कड़ी सुरक्षा में अयोध्या में मौजूद विभिन्न स्थलों का दर्शन करेंगे। इन्हीं दर्शनीय स्थलों में से एक है मणिपर्वत, जो कि मुख्य अयोध्या तीर्थ के विद्याकुंड से सटा हुआ है।

भगवान राम से जुड़े और पौराणिक रूप से अति महत्वपूर्ण इस स्थान के 3 तरफ दरगाहें बना दी गई हैं। इन दरगाहों पर रंग-रोशन एकदम नया दिखाई देता है। इसके अलावा, एक नई दरगाह भी बनाने की तैयारी चल रही है। आसपास तमाम पक्की कब्रों को भी देखा जा सकता है, जिसके नीचे पुराने समय के निर्माण मौजूद हैं।

क्या है मणिपर्वत का इतिहास

ऑपइंडिया की टीम ने मणिपर्वत का दौरा किया। यह पवित्र स्थल भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा संरक्षित है। मंदिर ऊँचाई पर बना हुआ है और वहाँ जाने के लिए कई सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। यहाँ के पुजारी ने हमें बताया कि इसी स्थान पर कभी भगवान राम और माँ सीता एक साथ झूला झूलते थे। साथ ही माँ सीता के विवाह के बाद उनके पिता जनक ने उपहार में इतनी मणियाँ भेंट की थीं कि उससे एक पहाड़ खड़ा हो गया था। कालांतर में बाहरी लुटेरों के आक्रमण में इस जगह को विकृत करने का प्रयास किया गया।
                                                                       मणिपर्वत अयोध्या
आज भी अयोध्या और आसपास के गाँवों में मणिपर्वत से जुड़े लोकगीत महिलाओं द्वारा गए जाते हैं। इन्हीं में से एक लोकगीत के बोल हैं, “झलुआ पड़ा मणि पर्वत पय। हम सखि झूलय जाबय ना।” अर्थात ‘मणिपर्वत पर झूला पड़ा है और मैं अपनी सहेलियों के साथ वहाँ झूलने जाऊँगी।’ पहले के समय में इन गीतों को टेपरिकॉर्डर से घर-घर में बजाया जाता था। इन प्राचीन लोकगीतों को आज भी यूट्यूब पर सुना जा सकता है। मणिपर्वत पर आज भी हर सावन को मेला लगता है जहाँ देश भर के श्रद्धालु आते हैं।

मणिपर्वत के दक्षिण में हजरत शीष अलहै सलाम की दरगाह

मणिपर्वत के दक्षिण में हजरत शीष की दरगाह है। मणिपर्वत से इस दरगाह की दूरी 100 मीटर से भी कम है। कहना गलत नहीं होगा कि मणिपर्वत की बाउंड्री से ये दरगाह लगभग सटी हुई है। बाकायदा मुख्य सड़क पर इसका बोर्ड भी लगाया गया है। बोर्ड में हलाल अहमद और मौलाना मोहम्मद आसिफ फिरदौसी का नाम और मोबाइल नंबर लिखा हुआ है।
दरगाह के बाहर हमें गुजरात के रजिस्ट्रेशन नंबर की एक मारुति अर्टिगा गाडी खड़ी मिली। सफ़ेद रंग की इस दरगाह को चारों तरफ से पक्की दीवालों से घेर दिया गया है। दरगाह के आसपास हिस्सों की साफ-सफाई भी लगातार जारी है। साफ किए जा रहे इन हिस्सों से दरगाह का आकार बढ़ता जा रहा है।
                                                                दरगाह हजरत शीष

बाउंड्री में आधे दर्जन से अधिक मजार

जब ऑपइंडिया की टीम इस दरगाह के अंदर गई तो वहाँ मुस्लिम समुदाय के लगभग 5 लोग मौजूद थे। कम-से-कम 5 अलग-अलग हिस्सों में बाँटी गई इस दरगाह में 6 से अधिक कब्रें हैं। इन कब्रों में कुछ तो सामान्य इंसानों की साइज की हैं, जबकि एक की लम्बाई 10 फुट के करीब है।
इन कब्रों के नाम हजरत बाबा जलील नक्शबंदी, नजीरुद्दीन कादरी बगदादी मजार, ईरान की शहजादी हजरात बीवी सैयदा जाहिदा, मजार हजरत शीष, हजरत शीष की बेगम और उनके बच्चे आदि रखे गए हैं। ईरान की शहजादी सैयदा जाहिदा के बारे में हमें मजार पर बताया गया कि वो जियारत करने आईं थीं और वहीं बस गईं।
                                                               एक ही दरगाह के अंदर कई कब्रें

जिस दिन कायनात बनी उस दिन से दरगाह का दावा

यहाँ के खादिम ने दावा किया कि दरगाह जब से दुनिया बनी तब से है। हजरत शीष को उन्होंने संसार के पहले इंसान और अपने पैगंबर हजरत आदम का तीसरा बेटा बताया। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि हजरत शीष की लम्बाई 70 गज थी। इस लम्बाई को उन्होंने मणिपर्वत तक फैला बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि तारीखों के हिसाब से हजरत शीष की कब्र मणि पर्वत तक होनी चाहिए। खादिम का यह भी कहना है कि देश और विदेश तक लोग उस दरगाह पर आते हैं। इन लोगों में खादिम ने स्थानीय नेताओं के भी शामिल होने का दावा किया। हर साल यहाँ उर्स भी होता है। इस दरगाह के रख-रखाव के लिए यहाँ के खादिम को चंदा मिलता है।
                                                     दरगाह के खादिम और उनके सहयोगी

पूर्वी कोने पर कोतवाल बाबा की दरगाह

ऑपइंडिया ने मणिपर्वत के पूर्वी हिस्से की पड़ताल की तो वहाँ एक और दरगाह मिली। यह दरगाह एक पेड़ को घेर कर बनाई गई है। बाकायदा ऊँचा सा चबूतरा बनाकर उस पर एक पक्की मजार खड़ी कर दी गई है। इसे हरे रंग से रंगा गया है। इस पर नई चादर आदि भी चढ़ाई गई है। इसे कोतवाल बाबा की दरगाह नाम दिया गया है। मजार पर नल भी लगाया गया है।
इसी मजार के पास एक नई मजार खड़ी की गई है, जिसका नाम सैयद शाह बाबा रखा गया है। इन दोनों दरगाहों की देखभाल एक मुस्लिम महिला करती है। महिला ने बताया कि दोनों दरगाह उसके शौहर ने अपने जीवित रहते बनवाई थी। फ़िलहाल महिला अब सरकार से विधवा पेंशन ले रही है।
                                              पेड़ को घेरकर बनी कोतवाल बाबा की दरगाह
कोतवाल बाबा के बारे में पता चला कि वो कोई पूर्व पुलिस अधिकारी था, जो किसी जमाने में अयोध्या कोतवाली में तैनात था। जो महिला इन दोनों दरगाहों की देखभाल करती है, उसका घर वहाँ से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। यहाँ भी हर साल उर्स होता है, जिसमें काफी चंदा जमा हो जाता है। इस दरगाह पर भी नेपाल तक के लोगों के आने का दावा किया जाता है। इस दरगाह के बगल भी मौजूद जंगलों की साफ-सफाई यहाँ के संरक्षकों द्वारा जारी है।
                                             कोतवाल बाबा दरगाह के पास सैयद शाह मजार

उत्तरी कोने पर शमशुद्दीन शाह बाबा की दरगाह

मणिपर्वत के उत्तरी कोने पर एक और दरगाह बनी हुई है। इसका नाम हजरत अली सैयद शमशुद्दीन शाह बाबा है। यह दरगाह भी एक पेड़ को घेरकर बनाई गई है। मणिपर्वत से उतरने वाली सीढ़ियाँ जहाँ खत्म होती हैं, वहीं ये दरगाह बनाई गई है। इसे हरे रंग से पेंट किया गया है। सीमेंट के ऊँचे चबूतरे पर चढ़ने के लिए बाकायदा सीढ़ियाँ बनाई गईं हैं।
दरगाह के ऊपर मौजूद कब्र को हरे रंग की चादर से ढँका गया है। इसका रख-रखाव और मेंटिनेंस भी अनवरत जारी है। दरगाह हजरत अली सैयद शमशुद्दीन शाह बाबा से सटी हुई खुले मैदान में एक और दरगाह बनाई गई है। इसके नाम का बोर्ड आदि नहीं दिखा। इन दोनों दरगाहों पर कोई खादिम भी हमें मौजूद नहीं मिला।
                                                               उत्तर दिशा में शमशुद्दीन शाह दरगाह

सैकड़ों की तादाद में पक्की कब्रें

उपरोक्त तीनों दरगाह- शीष, शमशुद्दीन और कोतवाल बाबा के बीच में सैकड़ों कब्रें मौजूद हैं। इन कब्रों पर ऊपर हाल ही में पक्का निर्माण किया गया है। नीचे प्राचीन काल की ईंटें दिखाई देती हैं। पक्की कब्रों पर अरबी भाषा में कुछ लिखा गया है। नव निर्माणों को हरे रंग से कलर किया जा रहा है।
हरजत शीष दरगाह के खादिम का कहना है कि वो जगह पहले से ही कब्रिस्तान है। उसका कहना है कि आज भी वहाँ आसपास के मुस्लिमों को दफनाया जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो मणि पर्वत के पश्चिमी और दक्षिणी कोने के हिस्सों में सामूहिक कब्रों का अम्बार लगा है।
                                          पुराने निर्माण के ऊपर बनी नई कब्रें और रंग-रोशन

गणेश कुंड पर नई दरगाह भी बनाने की तैयारी

जिस अयोध्या तीर्थ के नवनिर्माण में वर्तमान सरकार दिन-रात एक किए हुए है, वहाँ अंदर ही अंदर नई दरगाहों को भी बनाने की तैयारी चल रही है। जब ऑपइंडिया की टीम दरगाह कोतवाल बाबा पर मौजूद थी तो उसके पास हमें गणेश कुंड दिखा। गणेश कुंड का हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार पर्यटन विभाग द्वारा सौंदर्यीकरण करवाया गया है।
हमने गणेश कुंड के पास एक जगह मिट्टी का उभार देखा। मिट्टी का ये उभार एक कब्र के आकार का था। जब हम इस जगह को देख रहे थे, उसी समय कोतवाल शाह दरगाह की देखरेख करने वाली महिला हमारे पास पहुँच गई। उसने हमें मिट्टी से दूर रहने के लिए कहा।
                                            गणेश कुंड (पीछे) के पास नई दरगाह बनाने की तैयारी
महिला ने बताया कि वो उस जगह पर नई दरगाह बनाना चाहती है, जिसके लिए पैसे जुटाए जा रहे हैं। दरगाह का नाम पहले से ही सोचकर रहमतुल्लाह रखा गया है। महिला ने यह भी दावा किया कि रहमतुल्लाह की दरगाह बनाने का सपना उसके मरहूम (मृत) शौहर का है, जिसे वो पूरा करना चाहती है।
                                                       दरगाह की केयर टेकर मुस्लिम महिला

दरगाहों से सटा हुआ सुरक्षाबलों का कैम्प

ऑपइंडिया की टीम ने मणिपर्वत के साथ आसपास के इलाकों को भी खंगाला। कोतवाल शाह की देखरेख करने वाली महिला ने दावा किया कि झाड़ियों के अंदर अभी और भी कई मजार मौजूद हैं। इन मजारों के पास गणेश और विद्याकुंड जैसे पवित्र और पौराणिक धर्मस्थल भी मौजूद हैं, जिनका संबंध सीधे भगवान राम से है। ये सभी अयोध्या मुख्य तीर्थ क्षेत्र अथवा धर्मनगरी इलाके में आते हैं।
इन मजारों से एकदम सटकर उत्तर प्रदेश पुलिस की PAC विंग का बड़ा-सा कैम्प है। इस कैम्प में जवानों के आवास, वाहनों की पार्किंग के साथ-साथ उनके हथियारों को भी रखा जाता है। कहना गलत नहीं होगा कि 3 तरफ मजारों से घिरा यह क्षेत्र न सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी काफी संवेदनशील है।

दशरथ समाधि और मणिपर्वत वाली दरगाह का एक ही खादिम

ऑपइंडिया ने 2 जनवरी 2024 की अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में अयोध्या शहर से 14 किलोमीटर दूर स्थित महाराजा दशरथ की समाधि के पास एक दरगाह होने का खुलासा किया था। तब ऑपइंडिया ने बताया था कि उस दरगाह को पौराणिक क्षेत्र बिल्वहरि शरीफ से जोड़कर बेलहरी शरीफ कहा जाने लगा है।
मणिपर्वत के पास मौजूद बड़ी दरगाह हजरत शीष की पड़ताल में एक नई जानकारी निकल कर सामने आई है। इस दरगाह के खादिम के परिवार द्वारा ही दशरथ समाधि के बगल वाले दरगाह को संचालित किया जाता है। दूसरे शब्दों में एक ही मुस्लिम परिवार द्वारा अयोध्या के 2 अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर बनी दरगाहों को चलाया जा रहा है। (साभार)