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‘मुस्लिम पक्ष साबित नहीं कर पाए बाबर का दावा

सुप्रीम कोर्ट, राम मंदिरदशकों से अटके पड़े अयोध्या विवाद की बुधवार(अक्टूबर 16) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। 40 दिनों की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। 23 दिनों के भीतर फैसला आने की उम्मीद है। पीठ ने संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिए 3 दिन का समय दिया है।
सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चन्द्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई की है। हाई कोर्ट ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बॉंटने का आदेश दिया था।
सुनवाई के 40वें दिन एक हिन्दू पक्षकार ने दलील दी कि सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पक्षकार यह साबित करने में विफल रहे हैं कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित स्थल पर मुगल बादशाह बाबर ने मस्जिद का निर्माण किया था। वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष का यह दावा था कि मस्जिद का निर्माण शासन की जमीन पर हुकूमत (बाबर) द्वारा किया गया था, लेकिन वे इसे सिद्ध नहीं कर पाए हैं।
वैद्यनाथन सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम व्यक्तियों द्वारा अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि पर मालिकाना हक के लिए 1961 में दायर मुकदमे का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष प्रतिकूल कब्जे के सिद्धांत के तहत विवादित भूमि पर मालिकाना हक का दावा कर रहे हैं तो उन्हें यह स्वीकार करना होगा कि मूर्तियॉं या मंदिर पहले इसके असली मालिक थे।
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इतिहासविद् और लेखिका मीनाक्षी जैन ने अयोध्या विवाद पर दो किताबें Rama and Ayodhya (2013) और The Battle for Rama: Case of the Temple at Ay...

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार अयोध्या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन तक चलने के बाद खत्म हो गई है। सुप्रीम क...

वैद्यनाथन ने कहा कि अयोध्या में मुसलमानों के पास नमाज पढ़ने के लिए अनेक स्थान हो सकते हैं, लेकिन हिन्दुओं के लिए तो भगवान राम का जन्मस्थान एक ही है जिसे बदला नहीं जा सकता। एक अन्य हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की ओर से वकील रंजीत कुमार ने कहा कि इस जगह श्रद्धालुओं का पूजा-अर्चना करने पहले से ही अधिकार था। मुस्लिमों की आस्था के स्थान पर इस जमीन का स्वरूप नहीं बदला जा सकता है।
कभी पांडवों ने पाई थी जीत, अब राम मंदिर के लिए हुआ मां बगलामुखी मंदिर में 'शत्रु विजय यज्ञ'
बगलामुखी मंदिर में 'शत्रु विजय यज्ञ' 
बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो भी हो, मध्य प्रदेश के आगर मालवा स्थित मां बगलामुखी मंदिर के पंडितों का मानना है कि फैसला राम मंदिर के पक्ष में ही आएगा। दरअसल, मां बगलामुखी मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पांडवों ने कौरवों पर विजय पाने के लिए शत्रु विजय यज्ञ किया था।शत्रु विजय यज्ञ के बाद पांडवों को महाभारत के युद्ध में जीत हासिल हुई थी
तंत्र की देवी हैं मां बगलामुखी
वहीं, राम मंदिर को लेकर जल्द ही फैसला आए इसे लेकर आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में मौजूद पंडितों ने मां बगलामुखी के दरबार में शत्रु विजय यज्ञ किया। मां बगलामुखी मूलत: तंत्र की देवी हैं। मान्यता है कि मध्य प्रदेश के नलखेड़ा में चमत्कारिक मां बगलामुखी मंदिर द्वापर काल से मौजूद है। मां बगलामुखी मंदिर तांत्रिक क्रियाओं के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि महाभारत से पहले यहां पर पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से कौरवों पर जीत हासिल करने के लिए तंत्र साधना की थी। ऐसा माना जाता है कि यहां यज्ञ करने पर शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है। तंत्र-मंत्र क्रियाओं के साथ यज्ञ करने के लिए यह मंदिर विश्व भर में प्रसिद्ध है
कई दिग्गज करवा चुके हैं तंत्र साधना
आपको बता दें कि मां बगलामुखी मंदिर में कई दिग्गज भी तंत्र साधना करवा चुके हैं। यहां तंत्र साधना करवा चुके लोगों में अभिनेता से लेकर बड़े नेताओं के नाम शामिल हैं। मां बगलामुखी मंदिर में तंत्र साधना करवाने वालों में केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी, पूर्व सांसद उमा भारती, राजमाता विजयाराजे सिंधिया, अमर सिंह समेत कई नाम शामिल हैं। माना जाता है कि इनमें से सभी को विजय हासिल हुई है। 
राम मंदिर के लिए किया गया 'शत्रु विजय यज्ञ'
वहीं, मां बगलामुखी मंदिर में राम मंदिर के लिए शत्रु विजय यज्ञ करने वाले पंडितों का कहना है कि राम मंदिर के पक्ष में फैसला आए, जल्द से जल्द राम मंदिर बने और जल्द से जल्द इस देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान हो। इसी को लेकर सिद्धपीठ मां बगलामुखी में हवन किया गया है। बता दें कि इस मंदिर में दस पीढ़ियों से पुजारी तंत्र साधना करवाते आए हैं। नलखेड़ा में लखुंदर नदी के तट पर बना यह मंदिर श्मशान क्षेत्र में स्थित है। यहां तंत्र साधना के लिए विशेष प्रकार के यज्ञ, हवन या पूजा-पाठ किए जाते हैं
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार अयोध्या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन तक चलने के बाद खत्म हो गई है। सुप्रीम क...

महारुद्र की मूलशक्ति के रूप में होती है पूजा
मां बगलामुखी को महारुद्र (मृत्युंजय शिव) की मूल शक्ति के रुप में पूजा जाता है। तीन मुखों वाली मां के मस्तक पर तीसरा नेत्र व मणि है। मंदिर में मां बगलामुखी के साथ श्रीकृष्ण, हनुमान, भैरव, लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाएं भी हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर की स्थापना युधिष्ठिर ने की थी। युधिष्ठिर द्वारा किए गए शत्रु विजय यज्ञ के दौरान स्वयंभू मां बगलामुखी की प्रतिमा प्रकट हुई थी