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‘मुस्लिम पक्ष साबित नहीं कर पाए बाबर का दावा

सुप्रीम कोर्ट, राम मंदिरदशकों से अटके पड़े अयोध्या विवाद की बुधवार(अक्टूबर 16) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। 40 दिनों की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। 23 दिनों के भीतर फैसला आने की उम्मीद है। पीठ ने संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिए 3 दिन का समय दिया है।
सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चन्द्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई की है। हाई कोर्ट ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बॉंटने का आदेश दिया था।
सुनवाई के 40वें दिन एक हिन्दू पक्षकार ने दलील दी कि सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पक्षकार यह साबित करने में विफल रहे हैं कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित स्थल पर मुगल बादशाह बाबर ने मस्जिद का निर्माण किया था। वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष का यह दावा था कि मस्जिद का निर्माण शासन की जमीन पर हुकूमत (बाबर) द्वारा किया गया था, लेकिन वे इसे सिद्ध नहीं कर पाए हैं।
वैद्यनाथन सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम व्यक्तियों द्वारा अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि पर मालिकाना हक के लिए 1961 में दायर मुकदमे का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष प्रतिकूल कब्जे के सिद्धांत के तहत विवादित भूमि पर मालिकाना हक का दावा कर रहे हैं तो उन्हें यह स्वीकार करना होगा कि मूर्तियॉं या मंदिर पहले इसके असली मालिक थे।
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इतिहासविद् और लेखिका मीनाक्षी जैन ने अयोध्या विवाद पर दो किताबें Rama and Ayodhya (2013) और The Battle for Rama: Case of the Temple at Ay...

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार अयोध्या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन तक चलने के बाद खत्म हो गई है। सुप्रीम क...

वैद्यनाथन ने कहा कि अयोध्या में मुसलमानों के पास नमाज पढ़ने के लिए अनेक स्थान हो सकते हैं, लेकिन हिन्दुओं के लिए तो भगवान राम का जन्मस्थान एक ही है जिसे बदला नहीं जा सकता। एक अन्य हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की ओर से वकील रंजीत कुमार ने कहा कि इस जगह श्रद्धालुओं का पूजा-अर्चना करने पहले से ही अधिकार था। मुस्लिमों की आस्था के स्थान पर इस जमीन का स्वरूप नहीं बदला जा सकता है।
कभी पांडवों ने पाई थी जीत, अब राम मंदिर के लिए हुआ मां बगलामुखी मंदिर में 'शत्रु विजय यज्ञ'
बगलामुखी मंदिर में 'शत्रु विजय यज्ञ' 
बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो भी हो, मध्य प्रदेश के आगर मालवा स्थित मां बगलामुखी मंदिर के पंडितों का मानना है कि फैसला राम मंदिर के पक्ष में ही आएगा। दरअसल, मां बगलामुखी मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पांडवों ने कौरवों पर विजय पाने के लिए शत्रु विजय यज्ञ किया था।शत्रु विजय यज्ञ के बाद पांडवों को महाभारत के युद्ध में जीत हासिल हुई थी
तंत्र की देवी हैं मां बगलामुखी
वहीं, राम मंदिर को लेकर जल्द ही फैसला आए इसे लेकर आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में मौजूद पंडितों ने मां बगलामुखी के दरबार में शत्रु विजय यज्ञ किया। मां बगलामुखी मूलत: तंत्र की देवी हैं। मान्यता है कि मध्य प्रदेश के नलखेड़ा में चमत्कारिक मां बगलामुखी मंदिर द्वापर काल से मौजूद है। मां बगलामुखी मंदिर तांत्रिक क्रियाओं के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि महाभारत से पहले यहां पर पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से कौरवों पर जीत हासिल करने के लिए तंत्र साधना की थी। ऐसा माना जाता है कि यहां यज्ञ करने पर शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है। तंत्र-मंत्र क्रियाओं के साथ यज्ञ करने के लिए यह मंदिर विश्व भर में प्रसिद्ध है
कई दिग्गज करवा चुके हैं तंत्र साधना
आपको बता दें कि मां बगलामुखी मंदिर में कई दिग्गज भी तंत्र साधना करवा चुके हैं। यहां तंत्र साधना करवा चुके लोगों में अभिनेता से लेकर बड़े नेताओं के नाम शामिल हैं। मां बगलामुखी मंदिर में तंत्र साधना करवाने वालों में केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी, पूर्व सांसद उमा भारती, राजमाता विजयाराजे सिंधिया, अमर सिंह समेत कई नाम शामिल हैं। माना जाता है कि इनमें से सभी को विजय हासिल हुई है। 
राम मंदिर के लिए किया गया 'शत्रु विजय यज्ञ'
वहीं, मां बगलामुखी मंदिर में राम मंदिर के लिए शत्रु विजय यज्ञ करने वाले पंडितों का कहना है कि राम मंदिर के पक्ष में फैसला आए, जल्द से जल्द राम मंदिर बने और जल्द से जल्द इस देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान हो। इसी को लेकर सिद्धपीठ मां बगलामुखी में हवन किया गया है। बता दें कि इस मंदिर में दस पीढ़ियों से पुजारी तंत्र साधना करवाते आए हैं। नलखेड़ा में लखुंदर नदी के तट पर बना यह मंदिर श्मशान क्षेत्र में स्थित है। यहां तंत्र साधना के लिए विशेष प्रकार के यज्ञ, हवन या पूजा-पाठ किए जाते हैं
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार अयोध्या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन तक चलने के बाद खत्म हो गई है। सुप्रीम क...

महारुद्र की मूलशक्ति के रूप में होती है पूजा
मां बगलामुखी को महारुद्र (मृत्युंजय शिव) की मूल शक्ति के रुप में पूजा जाता है। तीन मुखों वाली मां के मस्तक पर तीसरा नेत्र व मणि है। मंदिर में मां बगलामुखी के साथ श्रीकृष्ण, हनुमान, भैरव, लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाएं भी हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर की स्थापना युधिष्ठिर ने की थी। युधिष्ठिर द्वारा किए गए शत्रु विजय यज्ञ के दौरान स्वयंभू मां बगलामुखी की प्रतिमा प्रकट हुई थी

राम मंदिर पर मुसलमानों की विचित्र शर्तें: सरकार करे अयोध्या के मस्जिदों का रखरखाव

राम मंदिर, सुन्नी वक़्फ़ बोर्डमुस्लिम पक्षकार सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने राम मंदिर मामले में विवादित जमीन पर अपने मालिकाना हक़ का दावा छोड़ दिया है। इस सम्बन्ध में आज ही सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया जाएगा। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं। बोर्ड ने माँग की है कि ‘THE PLACES OF WORSHIP (SPECIAL PROVISIONS) ACT, 1991 ACT NO. 42 OF 1991’ को पूर्णरूपेण लागू कर इसे अभेद्य बनाया जाए। साथ ही सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने यह भी कहा है कि अयोध्या में 22 मस्जिदों के रख-रखाव की जिम्मेदारी सरकार उठाए।
सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने राम मंदिर पर अपने मालिकाना हक़ के दावों को छोड़ने के लिए अंतिम शर्त रखी है कि एएसआई के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए। इन तीन शर्तों के साथ ही बोर्ड राम मंदिर मामले से पीछे हट गया है। हालाँकि, यहाँ ये बात बतानी ज़रूरी है कि मुस्लिम पक्ष में कुल 6 पार्टियाँ हैं जो बाबरी मस्जिद के लिए अदालती लड़ाइयाँ लड़ रही हैं, लेकिन सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के पीछे हटने से उन सब के लिए भी दबाव वाली स्थिति होगी।


सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के नेताओं और साधु-संतों के बीच एक बैठक भी हुई, जिसमें इस फ़ैसले को लेकर चर्चा हुई थी। इस बैठक में एक-दूसरे को मिठाई भी खिलाई गई। अयोध्या मामले में आज बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को सुनवाई का अंतिम दिन है और सुप्रीम कोर्ट इस मामले को और लम्बा खींचने के पक्ष में नहीं है क्योंकि नवम्बर में सीजेआई गोगोई रिटायर होने वाले हैं और वह उससे पहले इस मामले को निपटना चाहते हैं। मुस्लिम पक्ष ने कुछ दिनों पहले ही अदालत में कहा था कि सारी की सारी विवादित ज़मीन पर दावा नहीं छोड़ा जाएगा लेकिन अब सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने दावा छोड़ दिया है।
उधर राम मंदिर मामले की अदालती सुनवाई को लेकर सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा है कि आज शाम 5 बजे तक इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने सभी पक्षों को अंतिम दलील रखने के लिए समयावधि प्रदान की है, जिसके बाद सुनवाई समाप्त हो जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार(अक्टूबर 16) को अयोध्या विवाद की अंतिम दिन की सुनवाई होनी थी। उससे पहले तेजी से बदले घटनाक्र...

ऐसे में प्रश्न होता है कि मथुरा, काशी, ताजमहल आदि हज़ारों धार्मिक स्थल हैं जिनका मुग़ल आतताइयों ने मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान आदि बनाएं हैं, उनका क्या होगा? 

राम मंदिर पर मुसलमानों ने दावा छोड़ा, सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में दायर कर सकती है हलफनामा

राम मंदिरसुप्रीम कोर्ट में बुधवार(अक्टूबर 16) को अयोध्या विवाद की अंतिम दिन की सुनवाई होनी थी। उससे पहले तेजी से बदले घटनाक्रम में मुस्लिम पक्ष ने विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ दिया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस संबंध में हलफनामा शीर्ष अदालत में दायर कर दिया है। मध्यस्थता पैनल ने इसकी पुष्टि की है।
इससे पहले सोशल मीडिया पर बड़े पत्रकारों से लेकर कई अन्य लोगों ने भी इस समबन्ध में अपुष्ट सूचनाएँ दी थी , जिनके आधार पर कहा जा रहा था कि राम में आस्था रखने वालों के अच्छे दिन आ गए हैं और आक्रांता बाबर द्वारा की गई ऐतिहासिक भूल को सुधारने का क्षण आन खड़ा है। अपुष्ट ख़बरों में कहा जा रहा है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड विवादित स्थल पर अपने दावे से पीछे हट गया है और आज ही हलफनामा दायर कर अदालत को इस बात की सूचना दे दी जाएगी।
चर्चा है कि कई साधु-संतों के साथ सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें काफ़ी सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई। इस दौरान साधु-संतों ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के लोगों को मिठाई भी खिलाई। पत्रकार अमीर अब्बास ने बताया कि यह उन मुस्लिमों की भावनाओं के अनुरूप है, जो राम मंदिर पर भाईचारा कायम रखने के लिए विवादित जमीन हिन्दुओं को देने की बात कहते हैं। अगर यह सच है तो बहुत बड़ी ख़बर है। हालाँकि, अभी इन सूचनाओं की पुष्टि होनी बाकी है।

लेकिन इस बात पर कोई मुँह खोलने को तैयार नहीं है कि किन शर्तों पर सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड राम मंदिर वाली भूमि पर दावा छोड़ने को तैयार हुआ है। बदले में उसकी क्या माँगे और शर्तें हैं? वैसे अपुष्ट ख़बरें आ रही हैं कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने सशर्त रूप से ऐसा करने का फ़ैसला लिया है। वहीं, सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के एक वकील ने इससे इनकार किया है।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने साफ़ कर दिया है कि राम मंदिर मामले की अंतिम सुनवाई बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को होगी और उसके बाद अदालत फ़ैसला लिखने के लिए कुछ समय लेगी। भाजपा भी क़ानूनी तरीके से राम मंदिर बनवाने की बात अपने हर घोषणा-पत्र में शामिल करती रही है। अपुष्ट सूचनाओं का कहना है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड अयोध्या में 2.77 एकड़ ज़मीन पर अपने मालिकाना हक़ का दावा छोड़ देगा और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में आज ही हलफनामा दायर किया जाएगा। 
इससे पहले भी कई बार राम मंदिर पर मध्यस्थता की प्रक्रिया अपनाई गई लेकिन बात नहीं बनी। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की नियमित सुनवाई शुरू की और कहा जा रहा है कि सीजेआई रंजन गोगोई नवम्बर में अपने रिटायरमेंट से पहले इस मामले को निपटाने के इच्छुक हैं। जब सुनवाई के लिए दोनों पक्षों ने अतिरिक्त समय माँगा तो नाराज़ गोगोई ने अदालत में यहाँ तक कहा कि क्या आप दिवाली तक सुनवाई जारी रखना चाहते हैं? हालाँकि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के ह्रदय परिवर्तन (जैसा कि अपुष्ट सूत्रों का कहना है) का कारण अभी तक साफ़ नहीं हुआ है।
मंगलवार(अक्टूबर 15) को सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रामलला के वकील सीएस वैधनाथन से कहा कि वे बुधवार को 45 मिनट बहस कर सकते हैं. मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने पूछा कि क्या मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ पर भी बुधवार को ही बहस होगी? कोर्ट ने कहा बुधवार को एक घंटा मुस्लिम पक्षकार जवाब देंगे. चार पक्षकारों को 45-45 मिनट मिलेंगे. अयोध्या मामले की सुनवाई बुधवार को ही खत्म होने की उम्मीद है. मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर भी आज ही सुनवाई हो सकती है.
अयोध्या मामले पर सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि अब बहुत हो चुका, हम पांच बजे उठ जाएंगे
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ अन्य अर्जियों पर सुनवाई से किया इनकार
मंगलवार को सुनवाई के दौरान एक हिन्दू पक्ष ने दलील दी कि भारत विजय के बाद मुगल शासक बाबर द्वारा करीब 433 साल पहले अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थान पर मस्जिद का निर्माण कर ‘ऐतिहासिक भूल' की गयी थी और अब उसे सुधारने की आवश्यकता है.
पीठ के समक्ष एक हिन्दू पक्षकार की ओर से पेश पूर्व अटार्नी जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरण ने कहा कि अयोध्या में कई मस्जिदें हैं जहां मुस्लिम इबादत कर सकते हैं लेकिन हिन्दू भगवान राम का जन्म स्थान नहीं बदल सकते. सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य द्वारा 1961 में दायर मामले में प्रतिवादी महंत सुरेश दास की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि विदेशी शासक बाबर द्वारा की गयी ऐतिहासिक भूल को सुधारने की जरूरत है. बाबर ने भगवान राम के जन्म स्थान पर मस्जिद का निर्माण कर ऐतिहासिक भूल की और कहा कि मैं बादशाह हूं और मेरा आदेश ही कानून है.

हिन्दू सन 1886 में ही मंदिर बनाना चाहते थे :मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट में

Ayodhya Case : मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- हिन्दू सन 1886 में ही मंदिर बनाना चाहते थेअयोध्या केस (Ayodhya Case) में सितम्बर 24 को 30 वें दिन की सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर निरंतर सुनवाई हो रही है. मुस्लिम पक्ष की ओर से उसके वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हिन्दू 1886 केफैसले में पूजा का अधिकार मिलने के बाद विवादित स्थल पर बने चबूतरे पर ही मंदिर बनाना चाहते थे. पर तब के जिला कोर्ट ने इसकी इजाज़त नहीं दी थी. मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में स्वीकार किया कि राम चबूतरे पर भगवान राम का जन्म हुआ था. उन्होंने कहा कि बाद में गुंबद वाले स्थान पर भी हिंदू दावा करने लगे. मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने आज अपनी दलीलें पूरी कर लीं.     
मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि मुस्लिम वहां पर नमाज पढ़ते थे, इस पर सवाल उठाया जा रहा है. स्थल पर 22-23 दिसंबर की रात को जिस तरह से मूर्ति को रखा गया, वह हिन्दू नियम के अनुसार सही नहीं है. धवन ने कहा कि 40 गवाहों की गवाही को क्रास इक्जामिनेशन नहीं किया गया. गोपाल सिंह विशारद की याचिका में भी भगवान राम के जन्मस्थान के बारे में नहीं बताया गया. मस्जिद के बीच के गुम्बद के नीचे जन्मस्थान होने का दावा किया गया और पूजा के अधिकार की मांग की गई.
धवन ने कहा कि जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने माना था कि राम चबूतरे पर पूजा की जाती थी. धवन ने हाईकोर्ट के एक जज के ऑब्जर्वेशन का विरोध किया जिन्होंने कहा था कि मुस्लिम वहां पर अपना कब्जा साबित नहीं कर पाए थे. धवन ने कहा कि हम इसका  विरोध करते हैं, हमारा वहां पर कब्ज़ा था. उन्होंने शीतल दुबे की रिपोर्ट का ज़िक्र किया जिसमें कहा गया था कि मस्जिद के परिसर में हवन और पूजा होती थी और नमाज नहीं होती थी. इस पर धवन ने कहा कि वह हवन और पूजा भी हो सकती है. इस रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया कि पूजा और हवन मस्जिद के अंदरूनी आंगन में होती थी.
धवन अयोध्या विवाद से जुड़ी कई पुरानी याचिकाओं का जिक्र करते हुए साबित करने की कोशिश कर रहे थे कि मस्जिद पर मुस्लिम पक्ष का कब्ज़ा था. धवन ने कहा कि मुतावल्ली ने अर्ज़ी दाखिल की थी जिस पर सरकार ने आदेश दिया था. गर मस्जिद पर मुस्लिमों का कब्ज़ा नहीं होता तो वह मुतावल्ली अर्ज़ी क्यों लगाता और सरकार फैसला क्यों देती. इससे साबित होता है कि मस्जिद पर मुस्लिमों का कब्ज़ा था. उन्होंने कहा कि मोहम्मद अजगर ने कब्रिस्तान पर कब्ज़े के लिए अर्ज़ी लगाई थी.
राजीव धवन ने हिन्दू पक्ष के एक गवाह का बयान पढ़ते हुए कहा कि भगवान राम की मूर्ति गर्भ गृह में नहीं थी. गर्भ गृह के अंदर कोई भी भगवान की तस्वीर नहीं थी, लेकिन तब भी जो लोग पूजा करने आते वे रेलिंग की तरफ जाकर गर्भगृह  की तरफ जाते थे. राजीव धवन ने कहा कि गर्भ गृह के भीतर कभी पूजा नहीं हुई. गलत तरीके से रखी गई मूर्ति से दावे का अधिकार नहीं हो सकता. अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष की तरफ से राजीव धवन ने बहस पूरी कर ली.
मुस्लिम पक्ष की तरफ से जफरयाब जिलानी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि जन्मस्थल पर राम जन्म का विश्वास तो है, पर सबूत नहीं. उन्होंने कहा कि रामचरित मानस और वाल्मीकि रामायण, यह तो याचिकाकर्ताओं को साबित करना है कि और कौन-कौन सी किताबों में ज़िक्र है! मानस और रामायण में कहीं विशिष्ट तौर पर राम जन्म स्थान का कोई जिक्र नहीं. सन 1949 से पहले मध्य गुंबद के नीचे राम जन्म, पूजा का कोई अस्तित्व या सबूत नहीं मिलता.
जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि आप यह सबूत भी देंगे कि 1949 से पहले वहां नियमित नमाज़ होती थी? जिलानी ने कहा इसके लिखित नहीं ज़बानी सबूत हैं. जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि हिन्दू पक्ष भी, रामायण और मानस में अयोध्या में दशरथ महल में राम जन्म का ज़िक्र है लेकिन स्थान का नहीं. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि दोनों ग्रंथों में अयोध्या में रामजन्म का ज़िक्र है. इसका मतलब क्या यह है कि अयोध्या में कहीं भी राम जन्मभूमि का दावा कर दें?
जिलानी ने कहा कि राम चबूतरा मंदिर से पुराना नहीं है. उन्होंने रामानंदाचार्य और रामभद्राचार्य के हवाले से कहा कि उनकी मानस टीका में भी अवधपुरी का ज़िक्र है, किसी खास स्थान का नहीं. दोहा शतक के सबूत को जिलानी ने खारिज करते हुए कहा कि इसके तुलसीकृत होने का सबूत नहीं दिया गया. स्कन्दपुराण में अयोध्या खण्ड में राम जन्मस्थान को लेकर चौहद्दी और दूरी का जिक्र है, लेकिन अब वह जगह नहीं मिल रही जिसका जिक्र पुराण में है.
जस्टिस बोबड़े ने कहा कि अयोध्या में राम जन्म को लेकर आपका विवाद नहीं? सिर्फ जन्मस्थान को लेकर है? इस पर जिलानी ने कहा जी बिल्कुल. जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि आप राम चबूतरे को राम जन्मस्थान मानते हैं? तो जिलानी ने कहा जी हां, पहले सभी यही मानते रहे हैं. स्कन्दपुराण कहता है कि जन्मस्थान अमुक-अमुक स्थान से अमुक दूरी पर है. लेकिन अब वो स्थान अस्तित्व में नहीं है.
जिलानी ने कहा  कि सन 1886 में जिला जज ने भी अपने फैसले में राम चबूतरा को जन्मस्थान मानते हुए वहां पूजा करने की इजाज़त दी थी. 1886 के फैसले में ये भी कहा गया कि चबूतरा ही जन्मस्थान है. पर बाद में हिन्दू जन्मस्थान मंदिर बताते हुए आंतरिक अहाते और गुंबद वाली इमारत पर दावा करने लगे. बोबड़े ने पूछा - आप मानते हैं कि इस फैसले को किसी ने चुनौती नहीं दी? जिलानी ने कहा कि हमने तो चुनौती नहीं दी. पर बाद में बहुत सी रिट दाखिल हुईं. पर वे इसे चुनौती देते हुए नहीं बल्कि अधिकार को लेकर थीं.
जिलानी ने कहा कि हिन्दू 1886 के फैसले में पूजा का अधिकार मिलने के बाद वहां चबूतरे पर ही मंदिर बनाना चाहते थे. पर तब के जिला कोर्ट ने इसकी इजाज़त नहीं दी थी. गवाह सत्यनारायण त्रिपाठी के बयान का हवाले देते हुए जिलानी ने कहा कि मानस में भी सिर्फ अयोध्या का ज़िक्र है राम जन्मस्थान का नहीं. एक गवाह ने दशरथ के महल में रामजन्म होने का ज़िक्र किया है, पर महल की स्थिति का पता नहीं.
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि गवाहों ने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा है कि सीताकूप के अग्निकोण में 200 कदम दूर श्री राम का जन्मस्थान है. जिलानी ने नक्शा बताते हुए कहा कि जन्मस्थान और सीता कूप के उत्तर-दक्षिण का भी जिक्र है, लेकिन जन्मस्थान मंदिर, और चबूतरे को मान रहे थे. फिर हिंदुओं ने अपना विश्वास बदल दिया और दोनों जगहों पर दावा करने लगे.
जिलानी ने कहा कि एक गवाह ने भी बताया कि कवितावली और अन्य ग्रंथों में भी राम जन्म अयोध्या या अवधपुरी या साकेत में होने का जिक्र है, पर विशिष्ट जन्मस्थान का नहीं. गवाह भी वशिष्ठ कुंड, लोमश कुंड, विध्नेश्वर गणेश और पिण्डारक से विवादित स्थल की दूरी और दिशा के बारे में कुछ नहीं बता पाए. वाल्मीकि रामायण में भी कोई विशिष्ट स्थान नहीं बताया गया. रामचरित मानस की रचना मस्जिद बनने के करीब 70 साल बाद हुई, लेकिन कहीं यह जिक्र नहीं है कि राम जन्म स्थान वहां है जहां मस्जिद है. यानी जन्म स्थान को लेकर हिंदुओं की आस्था भी बाद में बदल गई.
जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई, पहले कभी मंदिर था उस जगह मस्जिद बनाई या खाली जगह पर मस्जिद बनी? इस सवाल पर जिलानी बोले बाबर ने खाली प्लाट पर मस्जिद बनाई थी. अगर पहले मंदिर रहा होगा, तो बाबर को इसकी जानकारी न हो.
जिलानी ने कहा कि आईन-ए-अकबरी में भी राम जन्मभूमि का नहीं लेकिन पवित्र शहर अवध का जिक्र है, जहां हिन्दू राम की पूजा करते हैं. जस्टिस भूषण ने जिलानी को टोका कि स्कन्दपुराण का हवाला तो आपके गवाह ने भी दिया है जिसमें उसने राम जन्मस्थान की बात कही है. जिलानी ने कहा कि स्कन्दपुराण तो 18 वीं सदी में पब्लिश हुआ था. जस्टिस भूषण ने कहा कि बात पब्लिश की नहीं, पुराण के लेखन की बात करें. आपके गवाह ने ही छठी सदी में लिखे जाने की बात कहते हुए कहा था कि शायद ये उससे भी पहले अस्तित्व में आया होगा.
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आपकी दलील जन्मस्थान का ज़िक्र नहीं होने से है? जिलानी ने कहा कि हां वहां मस्जिद को बाबरी कहा जाए या नहीं. यह ज़्यादा ज़रूरी है कि उस ढांचे में हिन्दू पूजा नहीं करते थे. जिलानी ने कहा कि मस्जिद जहां बनी वहां मंदिर नहीं था, मंदिर सरयू के किनारे था. उनका भी कहना है कि जन्मस्थान मंदिर रामकोट, यानी किले में था.
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पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी ने अयोध्या के रामजन्मूभि पर राम मंदिर बनाने का निर्णय ले लिया था। राजीव गांधी को ....

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अयोध्या मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। दरअसल अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज वर्तिका स....

जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि आईन-ए-अकबरी में मस्जिद का ज़िक्र नहीं है? जिलानी ने कहा कि हिंदुओं का यह दावा गलत है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई. जस्टिस बोबड़े ने पूछा रामकोट, कहां है वो किला? जिलानी ने कहा कि वह तो पूरे शहर के चारों ओर बनी दीवार थी. लेकिन अब तो वह एक मोहल्ला का नाम है. किला तो नक्शे में ही है. नक्शे में दुर्ग भी लिखा है. इस पर कोर्ट ने नक्शा दिखाते हुए कहा कि नक्शे में तो एक छोटे से हिस्से को दुर्ग बताया गया है. जिलानी ने कहा कि नदी के किनारे एक बंगला था. उसे ही फोर्ट्रेस कहा गया होगा. ट्रेफेन थेलर जैसे कुछ यात्रियों ने भी फोर्टेस का जिक्र किया है लेकिन वो और है. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि क्या राम जन्मस्थान की एक्ज़ेक्ट कोई लोकेशन है? जिलानी ने कहा नहीं. बोबड़े ने फिर पूछा कि तो राम चबूतरे को जन्मस्थान मानते हैं? जिलानी ने कहा कि हां, हिन्दू भी यही मानते हैं.

बहुमत से दूर रह सकता है NDA

Image result for मनमोहन सिंह pngआर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
चुनावों की तारीख का ऐलान हो चुका है। 7 चरणों में होने वाले चुनावों के नतीजे 23 मई को सामने आएंगे लेकिन उससे पहले प्री पोल सर्वे में दावा किया गया है कि बीजेपी नीत एनडीए बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे रह सकता है यूपीए तमाम कोशिशों के बाद भी 141 तक ही पहुंच पाएगा. सी-वोटर-आईएएनएस के मत सर्वेक्षण में एनडीए को 264 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जो सरकार बनाने के लिए आवश्यक 272 सीटों के आंकड़े से आठ कम है 
लोकसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राजग और राहुल गांधी के नेतृत्व वाले संप्रग के बीच बना हुआ है, लेकिन अगली सरकार के गठन में गैर भाजपा और गैर कांग्रेस क्षेत्रीय दलों का गठबंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा एनडीए में जनता दल युनाइटेड और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) बिहार में 20 सीटें जीत सकते हैं, जबकि 14 सीटों के साथ शिवसेना एक दूसरा मजबूत साझेदार बनकर उभर सकती है मोदी सरकार की एक सर्वाधिक मुखर आलोचक शिवसेना चार सीटें गंवा सकती है
सरकारी कर्मचारियों की पेंशन 
अटल बिहारी वाजपेयी कारगिल युद्ध जीतने के बाद भी सत्तामुक्त हो गए थे, उसका कारण था, सरकारी कर्मचारियों की पेंशन का बंद होना, जिस कारण सरकारी कर्मचारियों में वाजपेयी सरकार के प्रति काफी रोष था। लेकिन आज वही रोष पुनः सरकारी कर्मचारियों में घर कर रहा है। उनका कहना है कि जब हम इतने वर्ष नौकरी करने उपरान्त भी पेंशन के अधिकारी नहीं, फिर निगम पार्षद से लेकर सांसद तक को किस आधार पर पेंशन दी जाती है। इन्दिरा गाँधी ने प्रिवी पर्स समाप्त किया था, लेकिन ये आज के आधुनिक राजा बने हुए हैं। आज मोबाइल कम्पनियां इतनी सुविधाएँ दे रही है, उसके बावजूद इनको हज़ारों में टेलीफोन फ्री है, बिजली, पानी फ्री आदि आदि। परन्तु सरकारी कर्मचारियों को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि यदि वाजपेयी सरकार ने उनकी पेंशन बंद की थी, तो उसे अटल बिहारी के बाद रही किसी सरकार ने नहीं दी। जो स्पष्ट करता है, कि सरकारी बाबू तो क्या किसी की किसी सरकार अथवा नेता को चिन्ता नहीं।   
भाजपा के विरुद्ध हो सकता है प्रचार 
जनता लोकसभा चुनावों में भाजपा को सफाई अभियान, अयोध्या में राममन्दिर, कश्मीरी पंडितों का मसला, कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35A के विषय में घेर सकती है। सफाई अभियान से भाजपा विरोधी तो क्या भाजपा के ही अधिकतर कार्यकर्ता/नेता खुश नहीं थे। अपने घरों में जो एक ग्लास पानी भी नौकर अथवा अपनी पत्नी से माँगकर पीते हैं, उन्हें सड़क पर झाड़ू लगानी पड़ी; हालाँकि जिस क्षेत्र में सफाई होती थी, वहाँ जनता के उठने से पूर्व ही नगर निगम के सफाई कर्मचारी झाड़ू लगा चूकते थे, अन्यथा अगली बार उनके फ़रिश्ते भी इस अभियान में भाग नहीं लेते। प्रमाण के लिए कभी भी उन क्षेत्रों में कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। 
अयोध्या मुद्दा 
जहाँ तक अयोध्या में राममन्दिर की बात है, अन्य सरकारों की भाँति पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार भी लॉलीपॉप देकर मुर्ख बनाती रही। जो 5 सालों में अयोध्या, काशी और मथुरा लम्बित समस्याओं को नहीं सुलझा सकी, उस सरकार से हिन्दू क्या अपेक्षा कर सकता है? विपक्ष चुनावों तक इन समस्याओं को लटकाने में सफल रहा और बहुमत वाली सरकार असफल। 
कश्मीर समस्या 
कश्मीर समस्या भी लगभग ज्यूँ की त्यूं बनी हुई है। न वहाँ से धारा 370 और धारा 35A समाप्त हुई और न ही घाटी से निकाले गए कश्मीरी पंडितों को पुर्नवास करवाया जा सका। हुर्रियत नेताओं पर भी कार्यवाही अपने शासन के अन्तिम पड़ाव पर की, यदि यही कदम, एक वर्ष पूर्व उठाया गया होता, कश्मीर के हालात कुछ सुधर गए होते, जिसका अब चुनावों में भाजपा को लाभ भी मिलता।   
एनडीए को दक्ष‍िण में खोजने होंगे साझेदार
एनडीए को अगले चुनावों में 300 के पार जाने के लिए दक्ष‍िण के राज्‍यों में नए साझीदार बनाने होंगेअनुमान जाहिर किया गया है कि आंध्र में जगन रेड्डी की वाईएसआरसीपी, केसीआर की टीआरएस और ओडि‍शा में बीजेडी 36 सीटें जीत सकती हैं इसमें वाईएसआरसीपी को आंध्र प्रदेश में 11 सीटें मिल सकती हैं, बीजद को ओडिशा में नौ और टीआरएस तेलंगाना में 17 में से 16 सीटें जीत सकती है इन तीनों पार्टियों के समर्थन से राजग न केवल बहुमत पा सकता है, बल्कि लोकसभा में 300 का आंकड़ा पार कर सकता है 
चुनाव बाद गठबंधन से भी संप्रग के पास पर्याप्त सीटें नहीं
चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से पिछड़ने के बाद कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की नजर उत्तर प्रदेश में महागठबंधन पर और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पर टिकी है, जिससे वह अपने खाते में कुछ सीटें जोड़ सके सी-वोटर-आईएएनएस सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के महागठबंधन को 47 सीटें मिल सकती हैं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस 34 सीटों पर जीत बरकरार रख सकती है संप्रग को 141 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जिसमें कांग्रेस की 86 और सहयोगी दलों की 55 सीटें शामिल हैं 
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बस, जनता के सम्मुख नरेन्द्र मोदी के समक्ष कोई कद्दावर नेता न होने के कोई अन्य विकल्प नहीं। केन्द्र और राजधानी दिल्ली में सत्ता परिवर्तन होने पर जनता को भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलने की पूरी उम्मीद थी, जिस पर दोनों पार्टियों-भाजपा और आप- ने पूर्णरूप से निराश किया। दिल्ली नगर निगम हो, बिजली विभाग हो(जब दिल्ली में बिजली विभाग का निजीकरण हुआ है, बिजली चोरी और भ्रष्टाचार बड़ा है, कम नहीं हुआ। उपभोक्ता को नाम बदलवाने में कितनी परेशानी होती है, अधिकारीयों को कोई मतलब नहीं, नया मीटर मिल जायेगा, लेकिन नाम बदलने में परेशानी। बहुत है समस्याएँ, जिनके बारे में बाद में।), या कोई अन्य सार्वजनिक उपक्रम भ्रष्टाचारी बिना रिश्वत लिए काम करने को तैयार नहीं। जहाँ तक अदालतों की बात है वहाँ तो एक कहावत तब से मशहूर है, --जब भारत ब्रिटिश सरकार के अधीन था, हाई कोर्ट लाहौर में होती थी और दिल्ली में कश्मीरी गेट स्थित रिट्ज सिनेमा के निकट कोर्ट होती थी, जहाँ मात्र 4 अथवा 5 जज होते थे, तब से-- "कोर्ट में केवल वही खड़ा हो सकता है, जिसके पैरों में लोहे का जूता हो और सोने(स्वर्ण) के हाथ", अन्यथा मुवक्किल जीता हुआ मुकदमा भी हार जाएगा। आज तक कोई भी सरकार झूठा केस दर्ज़ करने वालों के विरुद्ध कोई सख्त कानून नहीं बना सकी, यदि ऐसा कोई कानून है, तो उस पर अमल नहीं होता, और वह क्यों नहीं होता, पाठक मुझसे अधिक समझदार हैं।