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दिल्ली : डॉक्टरों को धमका कर क्या सिद्ध करना चाहते हैं अरविन्द केजरीवाल?

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन केजरीवाल
अरविन्द केजरीवाल के चेतावनी का लहजा निंदनीय है
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (DMA) ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर निशाना साधा है और उनके द्वारा डॉक्टरों को चेतावनी दिए जाने के लहजे पर सवाल खड़ा किया है। एसोसिएशन ने कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल जिस तरह से हॉस्पिटलों को धमका रहे हैं, वो निंदनीय है। साथ ही सर गंगाराम हॉस्पिटल पर हुए एफआईआर की भी निंदा की गई है। एसोसिएशन ने कहा कि दिल्ली सरकार पूरे मेडिकल फ्रेटर्निटी को विलेन बना कर पेश कर रही है।
ये पूरा मुद्दा मरीजों को एडमिट करने और उनकी कोरोना वायरस टेस्टिंग करने से जुड़ा हुआ है। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने ध्यान दिलाया कि सभी डॉक्टर पिछले दो महीने से अपनी जान हथेली पर रख कर कोविड-19 आपदा के बीच लोगों की सेवा में लगातार लगे हुए हैं, और उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, उससे वो अपमानित महसूस कर रहे हैं। एसोसिएशन ने कहा कि अस्पताल स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं और सभी मरीजों का इलाज करता है, वो कोरोना संक्रमित हों या नहीं हों।
अब चर्चा यह भी है कि दिल्ली सरकार के हॉस्पिटलों में जगह न होने के कारण और चिकित्सकों एवं कोरोना पीड़ितों की देखभाल करने वाले हॉस्पिटल के कर्मचारियों के सुरक्षा किट के अभाव के कारण हो रही कठिनाओं पर पर्दा डालने के लिए ये खेल खेला जा रहा है। क्योकि जिस तरह से दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल डॉक्टरों को धमका रहे हैं, देश के किसी भी मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों की निष्ठा पर सवाल नहीं उठाया। जो केजरीवाल और उनकी सरकार के कार्यशैली पर ही प्रश्नचिन्ह है। लॉक डाउन और सोशल डिस्टैन्सिंग का मजाक उड़ना ही दिल्ली में बढ़ते कोरोना का मुख्य कारण है।  यदि यही हाल रहा डर है दिल्ली मुंबई के मुकाबले आ सकता है। डॉक्टरों और हॉस्पिटल पर गुस्सा उतारने की बजाए केजरीवाल सरकार इस ओर ध्यान देने की जरुरत है।  
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन का आरोप है कि अस्पतालों के जनसेवा के लिए उनकी सराहना किए जाने की बजाए दिल्ली सरकार द्वारा उनके लिए नित नए फरमान जारी किए जा रही है। एसोसिएशन का कहना है कि सर गंगाराम अस्पताल ने पिछले एक दशक में लाखों ज़िंदगियाँ बचाई हैं और आज उसे ही धमकी दी जा रही है। डीएमए ने कहा कि ये कर्मचारियों को डराने और धमकाने का मामला है, जिनकी वो निंदा करता है। उसने आगे कहा:
“आपदा की इस घड़ी में दिल्ली के सभी डॉक्टर काम के अतिरिक्त बोझ तले दबे हुए हैं और काफ़ी ज्यादा तनाव में हैं। दिल्ली सरकार बिना किसी ज़रूरत के स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बना रही है। डीएमए के 15,000 सदस्य और सभी शाखाएँ केजरीवाल सरकार के व्यवहार की निंदा करती है। हम पिछले 100 सालों से जनसेवा के प्रति समर्पित हैं और लाख रुकावटें आने के बावजूद यही करते रहे हैं। निःस्वार्थ भाव से जनसेवा कर रहे डॉक्टरों के सम्मान पर आँच नहीं आने दिया जाएगा। जो लोग ज़मीनी हकीकत से वाकिफ हैं, उन्हें पता है कि इस आपदा के समय डॉक्टरों को कितनी मेहनत करनी पड़ रही है और किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है।”

डीएमए ने माँग की है कि एक कॉर्डिनेशन कमिटी बनाई जाए, जिसमें उसके सदस्यों के साथ-साथ दिल्ली सरकार के भी अधिकारी हों। यही कमिटी कोरोना आपदा का उचित प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था की सुविधाओं की निगरानी करे और फ़ैसले ले। साथ ही कोविड-19 की टेस्टिंग कर रहे सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स में एक डेडिकेटेड लैब फैसिलिटी की माँग की गई है। एसोसिएशन ने कहा है कि अस्पतालों को कोरोना की जाँच और इलाज हेतु पर्याप्त टेस्टिंग की व्यवस्था की जाए।
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की ये भी माँग की है कि कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में शव को ले जाने और उसका अंतिम संस्कार करने के मामले में दिशा-निर्देशों के पालन के लिए एक योग्य सिस्टम बनाया जाए। ऐसा ही गंभीर रूप से बीमार मरीजों को रेफर करने के मामले में भी किया जाए। साथ ही कोरोना मामलों की निगरानी के लिए हर क्षेत्र में एक नोडल अधिकारी तैनात करने की माँग भी की गई है।
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दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे। संक्रमितों के नंबर में इजाफे के साथ इससे निपटने को लेकर .....
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवील ने कहा था कि कोई भी अस्पताल किसी भी मरीज को एडमिट करने से इनकार नहीं कर सकता और अगर कोरोना के लक्षण किसी में दिख रहे हैं तो अस्पताल को उसके इलाज की उचित व्यवस्था करनी ही है। साथ ही उन्होंने कहा था कि कुछ अस्पताल ‘दूसरी पार्टी में’ बैठे अपने आकाओं के दम पर उछल रहे हैं और मनमानी कर रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्या अरविन्द केजरीवाल दिल्ली को वुहान बनाना चाहते हैं?


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली में कोरोना संक्रमण की हालत भयावह हो चुकी है। देश की राजधानी में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 8 हजार के पार पहुंच चुका है, पिछले चौबीस घंटे में ही दिल्ली में 472 कोरोना के केस आए हैं। ऐसे में कोई भी सरकार सबसे पहले संक्रमण को रोकेगी, मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराएगी। लेकिन दिल्ली में उल्टी गंगा बह रही है। यहां के विवादित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली में बाजार, मार्केट कॉम्प्लेक्स, दफ्तर, मॉल, मेट्रो, बस सब कुछ खोलने पर आमादा हो गए हैं।
वैसे तो दफ्तर और दुकान पर जाने के लिए कर्मचारियों और मजदूरों को यातायात साधन की जरुरत है, बिना यातायात के दफ्तर और दुकान पहुंचना सबके लिए संभव नहीं। 
केंद्र सरकार पर दबाब बनाने में लगी केजरीवाल सरकार
अरविंद केजरीवाल ने लॉकडाउन-4 के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है और इसमें बाजारों को खोलने, सार्वजनिक परिवहन को सड़क पर उतारने व मजदूरों की आवाजाही पूरी दिल्ली में सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार ने केंद्र को यह प्रस्ताव भेजकर दबाब बनाया है कि17 मई के बाद बाजारों, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मॉल में दुकानों को ऑड-ईवन आधार पर खोलने की अनुमति दी जाए। इसके अलावा बसों, मेट्रो, ऑटो, टैक्सियों को पूरे शहर में चलाया जाए। दिल्ली में निर्माण कार्यों और सरकारी दफ्तर खोलने की अनुमति पहले से है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने केंद्र पर दबाब बनाने के लिए कहा है कि उसने इन सबके लिए 5 लाख से अधिक दिल्लीवालों की राय मांगी थी और उसी के आधार पर यह प्रस्ताव तैयार किया है। 

सूत्रों के अनुसार जनता से राय मांगना एक ड्रामा है, हकीकत यह है कि केजरीवाल अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए तुष्टिकरण कर रहे हैं। ईद सिर पर है। क्या किसी मुख्यमंत्री ने जनता से राय मांगी है, फिर केजरीवाल ने क्यों मांगी? 
दिल्ली में तेजी से पैर पसारता कोरोना
केजरीवाल सरकार के निकम्मेपन की वजह से दिल्ली कोरोना कैपिटल में तब्दील होती जा रही है। बीते चार दिनों की बात करें तो दिल्ली में कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। महज चार दिनों में ही करीब चार सौ रोजाना की औसत से कोरोना के साढ़े पन्द्रह सौ से ज्यादा नए संक्रमित मरीज पाए गए हैं। पिछले 24 घंटे में तो स्थिति और भी भयावह हो गई, जब लगभग पांच सौ लोग कोरोना महामारी के संक्रमण के शिकार पाए गए। कुल संक्रमितों की संख्या 8500 हो गई है।

दिल्ली में कोरोना 115 की मौत, आंकड़े छिपाने में लगे केजरीवाल
दिल्ली में कोरोना से मरने वालों का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली में 15 मई तक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कोरोना से मरने वालों की संख्या 115 के हो चुकी है। लेकिन बताया जा रहा है कि केजरीवाल सरकार कोरोना से मरने वालों के सही आंकड़े सामने नहीं आने दे रही है। कई अस्पतालों में कोरोना से मरने वालों की संख्या 30 से पचास तक पहुंच चुकी है, लेकिन केजरीवाल सरकार की तरफ से दबाब बनाया जा रहा है कि सही आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाएं। इतना ही नहीं दिल्ली में हॉटस्पॉट की संख्या भी सौ से ज्यादा हो चुकी है और यह लगातार बढ़ती ही जा रही है।

शराब की दुकानों पर नहीं किया गया सोशल डिस्टेंसिंग का पालन
पिछले दिनों जब केजरीवाल सरकार के कहने पर ही शराब की दुकाने खोलने का आदेश दिया गया था, तब भी दिल्ली प्रशासन की नाकामी सामने आई थी। दिल्ली में हर जगह शराब के ठेकों के बाहर हजारों लोग की भीड़ जमा हो गई थी। वहां सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का कोई पालन नहीं किया गया। पूरे देश ने उन तस्वीरों को देखा था कि केजरीवाल सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और कोरोना का प्रसार रोकने के लिए उसने कुछ नहीं किया। इतना ही मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में तो सोशल डिस्टन्सिंग की धज्जियां उड़ते देखा जाता है।  

मजदूरों के पलायन पर भी चुप है केजरीवाल सरकार
दिल्ली से लाखों की संख्या में मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए पलायन कर चुके हैं। पलायन का यह सिलसिला आज भी जारी है, लेकिन केजरीवाल अपने गाल बजाने के सिवा और कुछ नहीं कर रहे हैं। जब भी केजरीवाल मीडिया के सामने आते हैं तो मजदूरों को राहत देने के तमाम दावे करते हैं, लेकिन धरातर पर ये दावे झूठे साबित होते हैं। यहां तक कि केंद्र सरकार की तरफ से मजदूरों के लिए जो राशन और आर्थिक मदद दी जा रही है, उसे भी वे उन तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जिन्हे जरुरत है, बल्कि उनको वितरित किया जा रहा है जिनके घर में राशन भरा पड़ा है। जिसे सिद्ध कर रहे हैं पलायन करते मजदूर। मजदूरों का पलायन कोरोना संक्रमण को बढ़ाने वाला साबित हो रहा है।

केजरीवाल सरकार ने दिया मेडिकल स्टाफ को अपनी समस्याओं को मीडिया में हाईलाईट ना करने का ऑर्डर

कपिल मिश्रा-केजरीवाल
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की कथनी और करनी में कितना अंतर है। यह भाजपा नेता कपिल मिश्रा के एक ट्वीट से उजागर हो रहा है। आखिर किस कारण केजरीवाल मेडिकल स्टाफ को होनी वाली असुविधाओं के उजागर होने से  डर रहे हैं? कोरोना से लड़ने में भी तुष्टिकरण कर रहे हैं। भारत में जमात के फैले कोरोना पीड़ित के जमात से रिश्ते को परदे में रखा जा रहा है, जबकि कई चैनल स्पष्ट रूप से बता रहे हैं।  
वीडियो में देखिए डॉक्टरों की पीड़ा:-
दिल्ली भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अरविन्द केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के गुरु तेगबहादुर अस्पताल की ओर से कोरोना ड्यूटी में तैनात सभी मेडिकल स्टाफ को अपनी ड्यूटी में होने वाली असुविधाओं के बारे में मीडिया को बताने और सोशल मीडिया पर हाईलाईट करने से मना किया है। कपिल मिश्रा का कहना है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने ऐसा आदेश सरकार के झूठ की पोल खुलने के डर से जारी किया है।
कोई डॉक्टर, नर्स या कर्मचारी अपनी प्रॉब्लम ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक में नहीं शेयर करेगा
कपिल मिश्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा है- “केजरीवाल सरकार का आर्डर- कोई डॉक्टर, नर्स या कर्मचारी अपनी प्रॉब्लम ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक में नहीं शेयर करेगा। मीडिया को बताने पर भी प्रतिबंध। खाना, मास्क, एकोमोडेशन – कुछ भी न मिले, चुप रहो। ये आर्डर इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर सरकार के सारे झूठ की पोल खुल रही हैं।”

गुरु तेगबहादुर अस्पताल की ओर से जारी आदेश की कॉपी, जिसे कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया है –

वहीं, कुछ लोगों ने कपिल मिश्रा के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा है कि यह स्टाफ के मौलिक अधिकारों का हनन है।

इस ट्वीट के साथ कपिल मिश्रा ने गुरु तेग बहादुर अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी आदेश की कॉपी भी शेयर की है, जिसमें लिखा गया है कि ड्यूटी में आ रही किसी भी प्रकार की समस्या के लिए वह स्टाफ डिपार्टमेंट हेड के पास शिकायत भेज सकता है, लेकिन बिना उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाए सोशल मीडिया में समस्याओं को पब्लिक करना उचित नहीं है और मेडिकल स्टाफ को इससे बचना चाहिए।
अस्पताल की ओर से जारी इस आदेश की प्रति में यह भी पढ़ा जा सकता है कि अस्पताल के कर्मचारियों को देशसेवा का स्मरण करवाकर उन्हें समस्याओं को नजरअंदाज करने की राय दी गई है। हालाँकि, यह भी कहा गया है कि स्टाफ़ की वाज़िब समस्याओं पर अवश्य संज्ञान लिया जाएगा।
कपिल मिश्रा ने GTB अस्पताल द्वारा जारी किए गए इस आदेश को शेयर करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल पर आरोप लगाया है कि उनके ही आदेश पर इस प्रकार का आदेश दिया गया है।
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दिल्ली के चाँदनी महल इलाक़े को सील कर दिया गया है। देशभर में लॉकडाउन के बाच कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती...
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने झूठे वादों के लिए विख्यात है। कोरोना संक....
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सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र और दिल्ली सरकार को लेकर यह चर्चा निरंतर जारी है कि इन्होने कोरोना वायरस से निपटने में धरातल पर काम करने के बजाए सोशल मिडिया पर अपनी तारीफ में कैम्पेन करने पर ज्यादा ध्यान दिया है। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों को होने वाली असुविधाओं पर बात करने पर पाबंदी लगाने का आदेश एक बड़ा मुद्दा हो सकता है।
दूसरे यह कि मीडिया सरकार द्वारा शराब की दुकानें खोले जाने पर सोशल डिस्टन्सिंग की उड़ती धज्जियां तो दिनभर दिखाते रहते हैं, लेकिन पुरानी दिल्ली में चांदनी महल थाना क्षेत्र शब्बे रात से सील है। कारण स्पष्ट है, परन्तु लगभग 7 घंटे की दी जाने वाली ढील में बाज़ारों में सोशल डिस्टन्सिंग की किस तरह धज्जियाँ उड़ाई जा रहीं हैं, किसी मीडिया को दिखाने का साहस नहीं। पुलिस द्वारा सख्ती करने पर पुलिस पर ही कीजड़ फेंक Victim Card खेलना शुरू कर देंगे। यदि यही स्थिति नवरात्रों और अन्य पड़ने वाले अन्य हिन्दू त्यौहारों पर हिन्दू बहुल क्षेत्रों की होती, सुबह से शाम तक सब चीखते-चिल्लाते कि "कहीं ऐसी भीड़ में कोरोना विस्फोट न हो जाए? सरकार और पुलिस क्या कर रही है?" कहा जाए कि मीडिया भी तुष्टिकरण कर रही है। इतना ही नहीं, गलियों में वितरित होने राशन किट के दौरान भी उचित दूरी का ध्यान नहीं रखा जाता। पुरानी दिल्ली में गलियां कितनी चौड़ी हैं, किसी ने नहीं छुपा। ऊपर से एक तरफ जब स्कूटर खड़े होने पर कितनी जगह बचेगी, न राशन किट वितरित करने वालों को चिंता और न ही लेने वालों को। अगर दुर्भाग्य से कोरोना विस्फोट होने की स्थिति में सारा दोष पुलिस के सिर मढ़ कर सब अपना दामन बचाकर पुलिस को बलि का बकरा बना देंगे।   

केजरीवाल सरकार की लापरवाही के कारण आजादपुर मंडी से अन्य राज्यों में हो रही कोरोना की सप्लाई

आजादपुर मंडी
क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की कथनी और करनी में फर्क है, जो कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं?  
राजधानी दिल्ली में लगातार कोरोना के बढ़ते मामले सामने आ रहे हैं। वहीं केजरीवाल सरकार की लापरवाही के चलते दिल्ली के आजादपुर मंडी में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण से हड़कंप मच गया है। एशिया की इस सबसे बड़ी मंडी पर वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब आजादपुर मंडी से निकली कोरोना की बीमारी से सिर्फ दिल्लीवासी ही नही बल्कि अन्य राज्य के लोगो को भी अपने शिकंजे में ले रही हैं। जिसमें अलवर, झज्जर और बहादुरगढ़ मुख्य रुप से शामिल हैं।
पिछले दिनों मंडी की 13 दुकानें कोरोना के चलते सील कर दी गयी थी। साथ ही 43 लोगों को प्रशासन द्वारा क्वारनटीन भी किया गया। जिनके खाने का इंतजाम मंडी की तरफ से किया जा रहा है।
लॉकडाउन के वक़्त केजरीवाल सरकार द्वारा 24 घण्टे मंडी को खोले रखने के फैसले ने हालात को बद से बदतर बना दिया। कहा जा रहा था कि हालात और जरूरत को देखते हुए मंडी के कामकाज को हरी झंडी दी गई थी। मगर इस दौरान लोगो की आवाजाही बढ़ गई, और लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग को बिल्कुल नज़रंदाज कर दिया। सैनिटाइजेशन और साफ़ सफाई तो ज़मीनी स्तर पर ही धराशाही हो गए। अब बढ़ते संक्रमण को देखते हुए व्यापारियों और मजदूरों में दहशत का माहौल है।
आज़ादपुर मंडी से अलवर पहुंचा 
बहरहाल, आजादपुर मंडी का कोरोना कनेक्शन राजस्थान के अलवर तक पहुँचा गया है। अलवर में सब्जी की खेती करने वाला एक शख्स कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। कोरोना संक्रमित शख्स बानसूर सब्जी मंडी और दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी में सब्जियाँ बेचने पर पेमेंट लेने के लिए आता-जाता था। फिलहाल जिला प्रशासन, मेडिकल टीम बनाकर युवक की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाल रहा है। उसके संपर्क में सब्जी की गाड़ी ले जाने वाले ड्राइवर और उसके परिवार को क्वारनटीन किया गया है। तीन किलोमीटर के इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है। सब्जियों की खेती करने वाले यूपी से 700 से अधिक लोगों और उनके परिवार की भी स्क्रीनिंग की जा रही है।
झज्जर और बहादुरगढ़ में बढ़ा कोरोना  
आज़ादपुर मंडी के चलते बहादुरगढ़ और झज्जर में कोरोना बम फूटे है। जानकारी के मुताबिक दिल्ली से सब्जियाँ लाने और बेचने के दौरान ही संक्रमण 1 जगह से दूसरी जगह फैला है। 10 नए मामलों में 7 का सीधा संबंध सब्जी मंडी से देखते हुए जिला प्रसाशन ने मंडी को अगले आदेशों तक बंद कर दिया है। सड़क के दोनों किनारों पर बैरिकेडिंग भी कर दी गई है। नगर परिषद की टीमों ने सैनेटाइजेशन का काम शुरू कर दिया है। दिल्ली सीमा पर भी सख्ती बढ़ाते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कोरोना संक्रमति लोगों के परिजनों, संपर्क में आए लोगों की पहचान का काम शुरू कर दिया है। सब्जी मंडी और अनाज मंडी से जुड़े लोगों की सैम्पलिंग की जा रही है।
दिल्ली मे आँकड़े की बात करे तो अब तक कुल 3,515 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। जबकि 59 लोगों की इस जानलेवा वायरस से मौत हो चुकी हैं और 1094 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।
अब दिल्ली में चांदनी महल थाना क्षेत्र शब्बे रात के बाद से टीन लगाकर सील किया हुआ है, लेकिन सुबह और शाम का समय मिलाकर लगभग 7 घंटे की छूट के दौरान सोशल डिस्टैन्सिंग की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, जबकि पुलिस द्वारा लाउडस्पीकर से "दूरी बनाए रखने और बच्चों को  बाजार न लाने की सलाह देने की घोषणा की जाती है", लेकिन बच्चे "मुर्गा 130 रूपए किलो", "आलू 25 रूपए, प्याज 30 रूपए किलो" और बीड़ी बेचते देखे जाते हैं। आखिर लॉक डाउन में पुलिस द्वारा सख्ती करने पर बेचारी पुलिस को ही बलि का बकरा बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ा जाएगा। लोगों का कहना है कि जिस मौहल्ले, गली से कोरोना मरीज मिलें वहां रोकथाम की जाए, पूरे क्षेत्र को क्यों ? इस क्षेत्र में न कोई बैंक है, सब दुकानदारों को नकद भुगतान चाहिए, जब टीन लगाकर क्षेत्र को बिलकुल बंद कर दिया गया, लोग किस तरह बैंक तक जाएंगे?    
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दिल्ली बढ़ते मामलों को देखते हुए ये कहा जा सकता है की लॉकडाउन का उल्लंघन और कोरोना को लेकर लापरवाही ही दिल्ली में तेजी से फैलते संक्रमण का कारण हैं। जिसके चलते आज आजादपुर मंडी सब्जी और फलों की सप्लाई की जगह कोरोना वायरस की सप्लाई के लिए जाना जा रहा हैं।

हैदराबाद: AIMIM नेता मोहम्मद मुर्तजा अली ने मस्जिद के बाहर ड्यूटी कर रहे पुलिस को धमकाया

AIMIM नेता मोहम्मद मुर्तजा
लगता है कि अपने आपको देशप्रेमी, संविधान की दुहाई देने वाले और जनता हितैषी कहने वाले छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता कानून से ऊपर मानते हैं। इन्हे न समय की नज़ाकत की चिंता है और कोरोना संक्रामक बीमारी की गंभीरता का। बस इन्हे अपनी नेतागिरी का रौब दिखाना है। जब नेता ही सोशल डिस्टैन्सिंग का ध्यान नहीं रखेंगे, जनता को क्या समझाएंगे? बस इन छद्दमों का एक ही उद्देश्य है कानून तोड़ो और कानूनी कार्यवाही होने पर Victim Card खेलकर बेगुनाह जनता को बलि का बकरा बनाओ।  
हैदराबाद पुलिस ने AIMIM पार्टी के कॉरपोरेटर मुर्तजा अली के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मुर्तजा अली को एक वायरल वीडियो में बृहस्पतिवार (अप्रैल 30, 2020) को हैदराबाद के चवन्नी नदी अली बेग में एक मस्जिद के पास अपनी ड्यूटी कर रहे दो कॉन्स्टेबल को धमकाने और ड्यूटी में बाधा डालते हुए देखा गया था।
हैदराबाद के मदन्नपेट एरिया में एआईएमआईएम (AIMIM) के कॉरपोरेटर मोहम्मद मुर्तजा अली खुलेआम दो पुलिस कॉन्सटेबल को धमकी देते हुए नजर आ रहे थे। इन दोनों कॉन्सेबल्स की ड्यूटी कल शाम को इफ्तार के समय लगी हुई थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मदन्नपेट के SHO संतोष कुमार ने से इस खबर की पुष्टि की और कहा कि देशव्यापी लॉकडाउन के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए पुलिस कॉन्टेबल्स ने मस्जिद में अंदर जाने वाले लोगों से कहा था कि 5 लोगों से ज्यादा लोगों को अंदर जाने की अनुमति नहीं है। उस दौरान करीब 10 लोग अंदर थे, जिस पर कॉन्सटेबल्स ने आपत्ति जताई थी।

इसके बावजूद AIMIM के कॉरपोरेटर मोहम्मद मुर्तजा अली ने खुलेआम कॉन्सटेबल्स को धमकी दी और उन्हें वहाँ से जाने के लिए कहा। माहौल को देखते हुए दोनों कॉन्सटेबल वहाँ से लौट गए।
SHO संतोष कुमार ने कहा कि उन्होंने दोनों पुलिस वालों को सुबह बयान देने के लिए बुलाया है और FIR दर्ज की जा रही है।
एसवीएन शिवराम शर्मा, एसीपी संतोषनगर ने कहा कि पुलिस कॉन्स्टेबल द्वारा शिकायत दर्ज की गई है और मुर्तुजा अली के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पहले भी धमकी और हमले की ऐसी कई घटनाएँ देश के कई हिस्सों में सामने आ चुकी हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देशभर में जारी लॉकडाउन के बीच मुसलमानों का पवित्र र....
इससे पहले हैदराबाद में ही इलाज के दौरान नर्सों से दुर्व्यहार की खबर भी आई थी जहाँ तबलीगी जमाती कभी इन्हें हाथ लगाने की कोशिश करते हैं तो कभी इनको देखकर सीटी बजाते हैं, जन्नत दिखाने की बात कहते हैं। इसके अलावा भी कई अन्य तरीके से ये जमाती इनके साथ अभद्रता कर रहे थे।