नेतन्याहू ने सिनवार को 7 अक्टूबर हमले का जिम्मेदार ठहराया है (चित्र साभार; Times of israel)
इजरायल में नरसंहार के मास्टरमाइंड याहया सिनवार को ठिकाने लगाए जाने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना बयान जारी किया है। नेतन्याहू ने कहा है कि सिनवार की मौत गाजा में चल रहे युद्ध का अंत नहीं बल्कि युद्ध के अंत की शुरुआत है।
बेंजामिन नेतन्याहू ने याहया सिनवार के मारे जाने के बाद शुक्रवार (18 अक्टूबर, 2024) को एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, “एक साल पहले 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के आतंकी सरगना याहया सिनवार ने एक नरसंहार की शुरुआत की थी। यह इजरायल की आजादी और होलोकॉस्ट के बाद अब तक का सबसे खतरनाक हमला था।”
नेतन्याहू ने आगे बताया, “सिनवार के आतंकियों ने 1200 निर्दोष लोगों को मार दिया। इनमें बच्चे, बूढ़े, होलोकॉस्ट से बचने वाले लोग शामिल थे। उन्होंने महिलाओं का रेप किया, पुरुषों के सर काटे। उन्होंने बच्चों को जलाया और 251 लोगों को बंधक बना लिया। अब इस आतंकी हमले का सरगना मारा जा चुका है, याहया सिनवार मर चुका है।”
Yahya Sinwar is dead.
He was killed in Rafah by the brave soldiers of the Israel Defense Forces.
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) October 17, 2024
बेंजामिन नेतन्याहू ने सिनवार की मौत के बारे में बताते हुए कहा, “उसे राफा के भीतर इजरायली सुरक्षा बलों के बहादुर जवानों ने मार गिराया। यह गाजा के भीतर युद्ध का अंत नहीं है बल्कि यह युद्ध के अंत की शुरुआत है। मेरा गाजा के लोगों के लिए एक सीधा संदेश है, यह युद्ध आज कल सकता है अगर हमास अपने हथियार डाल दे और हमारे बंधको को लौटा दे।”
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बताया कि हमास ने अभी 101 लोगों को बंधक बना रखा है, इनमें इजरायली नागरिकों के अलावा दूसरे देशों के नागरिक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल सबको वापस छुडवा कर उनके घर पहुंचाएगा, यह उसकी गारंटी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई हमास की मदद करेगा तो ढूंढ कर मारा जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ ईरान ने एक आतंक की धुरी बनाई थी, जो अब खत्म हो रही है। उन्होंने कहा, “नसरल्लाह की मौत हो चुकी है, उसके डिप्टी मोहसिन की मौत हो चुकी है। हनियेह की मौत हो चुकी है और दाईफ की भी मौत हो चुकी है और अब सिनवार भी मारा जा चुका है। ईरान की आतंकी रिजीम जल्द ही खत्म होगी।”
इससे पहले बुधवार (17 अक्टूबर, 2024) को इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) ने राफा के भीतर एक इमारत में हमास के मुखिया याहया सिनवार को मार गिराया। याहया सिनवार के मारे जाने का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में वह इजरायली सुरक्षाबलों से घिरा हुआ दिखाई पड़ता है।
सिनवार को जुलाई, 2024 में ही हमास का मुखिया बनाया गया था। सिनवार, इस्माइल हानियेह की मौत के बाद हमास का मुखिया बना था। खान युनिस के एक कैंप में पड़ा होने वाला सिनवार 7 अक्टूबर के हमले का मास्टरमाइंड था और हमास-ईरान को नजदीक लाने में उसकी प्रमुख भूमिका थी।
ईरान द्वारा ईरानी दूतावास पर हमले के बाद पर किये गए भीषण हमले से पूरा विश्व खौफ में है।
ईरान-इजरायल के बीच छिड़ा यह युद्ध न्याय, नीति और धर्म के लिए नहीं हो रहा है। वास्तव में यह युद्ध वर्चस्व की लड़ाई है। सत्ता के लिए किए जाने वाला संघर्ष है। जिसमें धर्म को केवल एक ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
दरअसल, यह युद्ध ईरान के इस्लामिक देशों का ख़लीफ़ा बनने की महत्वाकांक्षा का दुष्परिणाम है। जिसे चंद इस्लामिक कट्टरपंथी और चरमपंथी गुटों का आश्रय मिला हुआ है।
इस्लामिक जगत की ख़िलाफ़त की इस जंग में टर्की, पाकिस्तान, सऊदी अरब और ईरान शामिल हैं। जो प्रत्यक्ष रूप में तो भले ही एकजुट नज़र आ रहे हैं, लेकिन अंदरखाने सब एक-दूसरे की मुख़ालफ़त में हैं।
सऊदी अरब, टर्की और पाकिस्तान किसी भी सूरत में ईरान को अपना ख़लीफ़ा नहीं मानेगा। यह बात पूरे इस्लामिक जगत में खुली किताब की तरह है।
ईरान की मंशा है कि वह येन-केन प्रकारेण इजरायल को दबाव में लेकर सम्पूर्ण इस्लामिक जगत में अपनी धाक जमा लेगा। परन्तु वह भूल रहा है कि इजरायल में भी नेतृत्व परिवर्तन की बड़ी लहर चल रही है, और बेंजामिन नेतन्याहू किसी भी सूरत में इजरायल में चुनाव नहीं चाहते हैं।
उनकी भी यही मंशा है कि वह इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों को मुहंतोड़ जवाब देकर इजरायली जनता के मन में जगह बना लें, और इजरायल में नेतन्याहू के विरोध में उठ रही आवाजों को मिसाइलों और फाइटर प्लेनों के शोर में दबा दिया जाए।
पूरे विश्व के समक्ष यही चिंता का सबसे बड़ा प्रश्न है कि दोनों ही ओर से कोई भी शांति की पहल करने को तैयार नहीं है।
उधर यूक्रेन भी अपनी रक्षा चाहता है और वह लगातार अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है।
चीन और रूस इस परिस्थिति का लाभ उठाने की हरसम्भव कोशिश में हैं। चीन और रूस अमेरिका की दादागिरी को ख़त्म तो करना चाहते हैं लेकिन सीधे रूप से कोई टकराव नहीं चाहते।
लेकिन ईरान को यह समझना होगा कि यदि इजरायल और ईरान में युद्ध होता है तो सबसे ज़्यादा नुकसान ईरान का ही होगा। और सऊदी अरब, टर्की और पाकिस्तान जैसे देश यही चाहते हैं।
उत्तरी इजरायल स्थित लेबनान की सीमा के पास इजरायल का सैनिक (साभार: The Jerusalem Post/AYAL MARGOLIN/FLASH90)
इजरायल ने हमास ने वायुसेना अध्यक्ष को मार गिराया है। साथ ही जिस आतंकी सरगना के आदेश पर नरसंहार हुआ, उसे बह ढेर कर दिया गया है। इजरायल की सेना IDF ने जानकारी दी है कि अली क़ादी नामक अमानवीय और बर्बर आतंकवादी को मार गिराया गया है, जिसके आदेश पर 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल में नरसंहार हुआ। इजरायल ने कहा है कि उसे ढेर कर दिया गया है। साथ ही ऐलान किया कि हमास के जितने भी आतंकी होंगे, उन सबका यही हश्र होगा।
Ali Qadi led the inhumane, barbaric October 7 massacre of civilians in Israel.
We just eliminated him. All Hamas terrorists will meet the same fate.
IDF ने बताया कि लगातार 7वें दिन इजरायली परिवारों को बम शेलटर्स का सहारा लेना पड़ा, ताकि वो गाज़ा की तरफ से की जा रही बमबारी से बच सकें। दक्षिणी इजरायल में एक बार फिर सायरन बज रहे हैं, यानी हमास फिर से रॉकेट दाग रहा है। सेन्ट्रल इजरायल में भी शनिवार (14 अक्टूबर, 2023) को ऐसे ही सायरनों की आवाज़ सुनाई दी। गाज़ा में अब भी इजरायल के 120 नागरिकों को बंधक बना कर रखे जाने की पुष्टि की गई है।
इजरायल ने हमास की वायुसेना के मुखिया अल मुराद को भी मार गिराया है। हमास अपने जिस मुख्यालय से सारे हवाई हमलों को मैनेज कर रहा था, उसे ही इजरायल ने निशाना बनाया है। 7 अक्टूबर को हुए नरसंहार में उसका भी बड़ा हाथ था। हमास के कमांडो फ़ोर्स के भी दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इजरायल की तरफ से हताहतों की बात करें तो अब तक 1300 की हत्या की गई है। वहीं 3300 लोग घायल भी हैं।
वहीं IDF ने हमास के 1000 ठिकानों को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी है। जहाँ तक अली क़ादी की बात है, वो ‘नकबा फ़ोर्स’ का मुख्य सरगना था। 2005 में भी उसे गिरफ्तार किया गया था लेकिन गिलाद शालित एक्सचेंज डील के तहत उसे लौटा दिया गया था। इजरायल ने गाजा में रहने वाले 6 लाख लोगों को वहाँ से हटने के लिए कह दिया है। इजरायल ने कहा है कि आम नागरिक हमारे दुश्मन नहीं हैं और हम उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा रहे।
इजरायल में कई लोगों को उनके घर सहित ज़िंदा फूँक दिया गया (फोटो साभार: X/Israel) इजरायल ने तस्वीरें जारी कर के बताया है कि कैसे हमास के आतंकियों ने देश में घुस कर आम लोगों के साथ क्रूरता की। वो घर-घर गए और लोगों को ज़िंदा जला दिया। घरों को ही फूँक दिया गया। कई जगह पूरे परिवार को ही खत्म कर दिया गया, छोटे-छोटे बच्चों को भी। किब्बुत्ज़ बीरी में सबसे ज़्यादा तबाही मचाई गई। इजरायल में अब इस आपात स्थिति से निपटने के लिए वहाँ का विपक्ष भी सरकार में शामिल हो गया है। बेन्नी गांट्ज़ की ‘नेशनल यूनिटी पार्टी’ सरकार में शामिल होगी और एक नई ‘वॉर कैबिनेट’ का निर्माण होगा।
भारत के विपक्ष को इजराइल के विपक्ष से सीखने की जरुरत है, जहाँ समूचा विपक्ष मुसीबत के समय सरकार के साथ आतंकवाद से लड़ने के लिए खड़ा है, लेकिन भारत में विपक्ष अपनी कुर्सी की खातिर सरकार द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में सरकार की ही आलोचना करता है, सरकार को मुस्लिम विरोधी बता आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई को मुस्लिम विरोधी बता दुष्प्रचार किया जाता है।
वहीं हमास की तरफ से रॉकेट दाग कर अब सीधे इजरायल की राजधानी तेल अवीव को निशाना बनाया जा रहा है। एक बार फिर से इजरायल में सायरनों की आवाज़ गूँज रही है। वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि हमास, ISIS से भी ज़्यादा बुरा है। दक्षिणी इजरायल के सेदेरोट में एक स्कूल को भी निशाना बनाया गया है। वहीं मिस्र ने UN के साथ मिल कर गाज़ा में रफह सीमा के जरिए मदद पहुँचाने की योजना बनाई है।
वहीं अब इजरायल की सेना IDF ने लेबनान के आतंकी संगठन हिज़्बुल्ला के ठिकानों को भी तबाह किया गया है। IDF ने बताया है कि गाज़ा स्थित आतंकियों पर हजारों बम लगातार गिराए जा रहे हैं, दिन और रात की परवाह किए बिना। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन ने इजरायल को पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है। गाज़ा की सीमा पर इजरायल की सेना और हमास आतंकियों के बीच भयंकर गोलीबारी हुई है। कई देशों के विदेश अधिकारी भी इजरायल पहुँचे हैं और अपना समर्थन दिया है।
Just when you think it can't get worse. A Hamas terrorist admits their true motive for kidnapping women and children — rape. pic.twitter.com/tk8BgfG1R9
इजरायल के किब्बुत्ज़ में 40 बच्चों को हमास के आतंकियों ने मार डाला था। इजरायल के आधिकारिक ट्विटर हैंडल द्वारा शेयर की गई एक तस्वीर में एक घर का कमरा अस्त-व्यस्त दिख रहा है, साथ ही खून के धब्बे चारों तरफ फैले हुए हैं। वहीं एक वीडियो सामने आया है जिसके बारे में बताया जा रहा है कि उसमें मौजूद फिलिस्तीनी कह रहा है कि वो महिलाओं को अपने साथ ले जाते हैं, ताकि उनके साथ बलात्कार कर सकें। इसमें वो बच्चों तक के साथ बलात्कार करने की बात कर रहा है।
अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज(CSIS) ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि चीन में तानाशाही शासन कर रही चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की स्थापना को वर्ष 2027 में 100 साल पूरे हो जाएंगे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी पार्टी के शताब्दी वर्ष से पहले एक बड़ा काम करके इतिहास में अपना नाम लिखवाना चाहते हैं। वे वर्ष 2027 से पहले ताइवान पर हमला कर उसे चीन में मिलाना चाहते हैं। अगर उन्होंने इस सपने को पूरा करने के लिए ताइवान पर हमला कर दिया तो उसका अंजाम क्या होगा।
चीन अगर ताइवान पर हमला करता है तो जापान इस युद्ध में कूद पड़ेगा और ताइवान का साथ देगा। इसके साथ ही अमेरिका भी ताइवान की तरफ होगा। इस युद्ध से जहां चीन काफी कमजोर होकर तबाही के कगार पर पहुंच जाएगा वहीं अमेरिका भी उतना मजबूत नहीं रह जाएगा। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि क्या भारत 1962 की युद्ध में अपनी खोई हुई जमीन को दोबारा चीन से छुड़ाकर वापस पा सकता है? भविष्य की राहें इस ओर भी इशारा कर रही है कि वह भारत का स्वर्णिम युग होगा जब वह पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान भी वापस हासिल कर लेगा। अब देखना है कि वक्त किस कदर करवट लेता है।
शी जिनपिंग ताइवान पर हमला उसे चीन में मिलाना चाहते हैं
अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी पार्टी के शताब्दी वर्ष से पहले एक बड़ा काम करके ‘इतिहास’ में अपना नाम लिखवाना चाहते हैं ओर वे वर्ष 2027 से पहले ‘ताइवान’ पर हमला कर उसे चीन में मिलाना चाहते हैं। अगर उन्होंने इस ख्वाब को पूरा करने के लिए ताइवान पर हमला किया तो, उसका अंजाम बहुत बुरा होगा। युद्ध के बाद चीन की क्या स्थिति होगी। इसे पढ़कर आप भविष्य में होने वाले हालात का अंदाजा लगा पाएंगे।
चीन अगर ताइवान पर हमला करता है तो युद्ध दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा
अमेरिका के एक थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने “The First Battle of Next War” के नाम से इस रिपोर्ट को तैयार किया है। इस रिपोर्ट में ताइवान के मुद्दे पर, China Taiwan War पर एक वॉर गेम जैसी स्थिति को दर्शाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो यह युद्ध केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसमें अमेरिका और उसके सहयोगी, जापान भी खुलकर शामिल होंगे।
अमेरिका की ताकत काफी हद तक कम हो जाएगी
इस युद्ध में भाग लेने की वजह से अमेरिका की ताकत काफी हद तक कम हो जाएगी और वह दुनिया की ‘एकमात्र’ महाशक्ति का दर्जा कई सालों तक के लिए गंवा बैठेगा, वहीं जापान और ताइवान लगभग पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। तीन सप्ताह तक चलने वाले इस युद्ध में अमेरिका के 3200 जवान मारे जाएंगे जो कि पिछले दो दशकों में अफगानिस्तान और इराक में मारे गए अमेरिकी जवानों की संख्या का आधा है।
चीन काफी कमजोर हो जाएगा, कई शहर तबाह हो जाएंगे
चीन की हालत भी बहुत अच्छी नहीं होगी। जिस नेवी पर वह बहुत घमंड करता है, वह पूरी तरह बर्बाद हो चुकी होगी। उसके कई शहर तबाह हो चुके होंगे। उसकी अर्थव्यवस्था और बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान तबाह हो चुके होंगे। जंग में उसके 138 युद्धपोत और 155 फाइटर एयरक्राफ्ट पूरी तरह तबाह हो जाएंगे। इस युद्ध में चीन के करीब 10 हजार से ज्यादा सैनिक मारे जाएंगे और लगभग इतने ही युद्ध बंदी बना लिए जाएंगे।
शी जिनपिंग 2026 में कर सकते हैं ताइवान पर हमला
अमेरिकी थिंक टैंक के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग वर्ष 2026 में ताइवान पर हमले को अंजाम दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह युद्ध बेहद विनाशकारी होगा। ताइवान की रक्षा के लिए जापान की सेना आगे बढ़ेगी, जिससे चीन उस पर भी हमला कर देगा। इसके बाद जापान के साथ रक्षा संधि होने की वजह से अमेरिका भी युद्ध में कूद पड़ेगा। इसके चलते यह युद्ध हजारों सैनिकों और आम नागरिकों की मौत की वजह बन जाएगा। इस युद्ध में अमेरिका, जापान, ताइवान और चीन को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
केवल 3 हफ्ते में खत्म हो जाएगी जंग
थिंक टैंक के अनुसार इस युद्ध में चीन के मिसाइल अटैक के कारण कम से कम दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर प्रशांत महासागर में डूब जाएंगे। उसके करीब 3200 सैनिकों को युद्ध में जान गंवानी पड़ेगी और करीब इतने ही सैनिक युद्धबंदी बना लिए जाएंगे। अमेरिका और जापान के सैकड़ों युद्धपोत, फाइटर जेट और ड्रोन इस हमले में तबाह हो जाएंगे। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि यह युद्ध बहुत तेज और भीषण होगा। यह जंग केवल 3 हफ्ते चलेगी और उसमें अमेरिका महाशक्ति का दर्जा कई साल तक के लिए खो देगा।
चीन में मिट जाएगा CCP का शासन, लोकतंत्र आएगा
चीन इतनी भारी कीमत चुकाने के बावजूद ताइवान पर कब्जा नहीं कर पाएगा। इस विफलता और देश में भारी तबाही की वजह से लोग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ सड़कों पर निकल आएंगे और शी जिनपिंग समेत CCP से जुड़े नेताओं के खिलाफ विद्रोह कर देंगे। बड़ी संख्या में सीसीपी नेता इस विद्रोह में मारे जाएंगे। अंतत: देश में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का शासन खत्म हो जाएगा और दुनिया में एक नए लोकतांत्रिक देश का उदय होगा।
भारत करेगा नए युग का निर्माण
इस रिपोर्ट में भारत की भूमिका के बारे में कुछ नहीं बताया गया है लेकिन माना जाता है कि भारत इस जंग में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेगा। युद्ध के बाद चीन और जापान खस्ताहाल हो जाएंगे, जबकि अमेरिका का महाशक्ति का दर्जा छिन जाएगा। ऐसे में वह समय भारत के लिए स्वर्ण युग हो सकता है। जिसमें भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनी बुद्धिमता और समझदारी से दुनिया का नेतृत्व करते हुए एक नए युग का निर्माण करेगा।
भारत की 38,000 वर्ग किलोमीटर पर चीन का अवैध कब्जा
चीन अगर ताइवान पर हमले करता है युद्ध की स्थिति बनती है तो भारत के लिए यह उचित समय होगा जब वह चीन से अपनी जमीन वापस ले ले। चीन पिछले छह दशकों से लद्दाख में लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा किए हुए है। पाकिस्तान ने 1963 में शक्सगाम घाटी में 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र को अवैध रूप से अपने कब्जे से चीन को सौंप दिया था। 1963 में हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान ‘सीमा समझौते’ के तहत पाकिस्तान ने लद्दाख में अवैध रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों से शक्सगाम घाटी में 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र को चीन को सौंप दिया था। भारत सरकार ने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान ‘सीमा समझौते’ को कभी मान्यता नहीं दी और लगातार इसे अवैध और अमान्य बताया है।
POK और गिलगित-बाल्टिस्तान भारत में मिल जाएगा
वैसे तो यह अनुमान जताया जाता रहा है कि भारत जल्द ही POK और गिलगित-बाल्टिस्तान को अपने कब्जे में ले लेगा लेकिन अगर यह काम 2026 तक नहीं हो पाता है तो चीन के ताइवान पर हमले के बाद यह माकूल समय होगा जब पाकिस्तान के कब्जे से अपनी भूमि वापस ले ले।