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‘तुम पूरी तरह पागल हो, मेरी वजह से जेल जाने से बचे’: ट्रंप का दिमाग अब नेतन्याहू पर खिसका

             डोनाल्ड ट्रम्प (बाएँ) और बेंजामिन नेतन्याहू (दाएँ)(फोटो साभार: टाइम्स ऑफ इजरायल, न्यूजवीक)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भारी नाराजगी जताई है। 1 जून 2026 को दोनों के बीच फोन पर बहुत तीखी बातचीत हुई। ट्रंप ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू लेबनान में जानबूझकर जंग भड़का रहे हैं। इससे अमेरिका और ईरान की शांति बातचीत खतरे में पड़ रही है।

ट्रंप ने नेतन्याहू को सीधे क्या-क्या कहा?

‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप इजरायल के हमलों से बेहद गुस्से में थे। ट्रंप ने नेतन्याहू को ‘पूरी तरह पागल’ कह दिया। ट्रंप ने गुस्से में चिल्लाते हुए कहा, “तुम आखिर कर क्या रहे हो?” उन्होंने आगे कहा, “अगर मैं नहीं होता तो तुम जेल में होते। मैं तुम्हें बचा रहा हूँ। अब हर कोई तुमसे नफरत करता है। इस वजह से हर कोई इजरायल से भी नफरत करता है।”

क्यों गुस्से में थे अमेरिकी राष्ट्रपति?

ट्रंप लेबनान में इजरायल की लगातार सैन्य कार्रवाई से नाराज थे। इजरायल बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े हमले की तैयारी में था। वह दक्षिणी लेबनान में भी सेना बढ़ा रहा था। ट्रंप को लगा कि इजरायल जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो रहा है। वे लेबनान में आम नागरिकों की मौतों और हिजबुल्लाह कमांडरों पर बड़े हमलों से परेशान थे। उन्हें डर था कि इससे अमेरिका-ईरान के कूटनीतिक प्रयास बर्बाद हो जाएँगे।

ईरान की सीधी चेतावनी

यह तीखी बहस तब हुई जब ईरान ने अमेरिका को खुली चेतावनी दी। ईरान ने कहा कि अगर लेबनान पर इजरायली हमले नहीं रुके, तो वह वाशिंगटन के साथ चल रही बातचीत रोक देगा। तेहरान ने साफ किया कि किसी भी समझौते के लिए लेबनान में युद्धविराम पहली शर्त है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने भी लेबनान को भरोसा दिया कि हमला जारी रहने पर वे अमेरिका से बातचीत सस्पेंड कर सकते हैं।

फोन कॉल के बाद क्या बदला?

इस डांट के बाद एक इजरायली अधिकारी ने बताया कि इजरायल ने बेरूत पर हमले की योजना टाल दी है। ट्रंप ने बाद में दावा किया कि बातचीत सकारात्मक रही। उन्होंने कहा कि बेरूत की तरफ बढ़ रहे इजरायली सैनिकों को वापस मोड़ दिया गया है। मध्यस्थों के जरिए हिजबुल्लाह भी इजरायल पर हमले रोकने को तैयार हो गया है।

नेतन्याहू की जिद और आंशिक युद्धविराम

दूसरी तरफ नेतन्याहू ने जनता के सामने अलग बयान दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल का रुख नहीं बदला है। वे दक्षिणी लेबनान में अभियान जारी रखेंगे। अगर हिजबुल्लाह ने हमला किया, तो बेरूत पर फिर बमबारी होगी। इस बीच, 1 जून को लेबनान ने एक आंशिक युद्धविराम की घोषणा की। इसके तहत इजरायल बेरूत पर हमले नहीं करेगा और हिजबुल्लाह इजरायल पर रॉकेट नहीं दागेगा।

ईरान के मौलवी शिराजी ने दिया फतवा: ‘ट्रंप और नेतन्याहू अल्लाह के दुश्मन’: कहा- इस्लाम के लिए लड़ने वाले को मिलेगा इनाम


ईरान-इजरायल जंग की चिंगारी अभी भी भड़की हुई है
 ईरान के शीर्ष धर्मगुरू ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ फतवा जारी किया है उन्होंने दोनों नेताओं को खुदा का दुश्मन कहा गया है यह फरमान अयातुल्ला नासर मकरम शिराजी की ओर से सुनाया गया है, जिसमें दुनिया भर के मुसलमानों से एकजुट होकर अमेरिकी और इजरायली नेताओं को गिराने का आह्वान किया गया 

देखना है कि शिराजी द्वारा दिए फतवा कितने मुस्लिम देश और मुसलमान मानते हैं? खासकर पाकिस्तान जिसे कहते हैं कि ट्रम्प के साथ खाना खाते जो असीम मुनीर ने पाकिस्तान ही नहीं गुप्त रूप से ईरान के खिलाफ भी सौदेबाज़ी की है क्योकि उसी के बाद अमेरिका ने ईरान पर गोलाबारी की। दूसरे, अगर ये आग भड़की तो इसके बहुत ही भयंकर नतीजे होंगे। अगर किसी भी मुस्लिम देश ने ईरान का साथ नहीं दिया उससे फतवे ही बेअसर नहीं होगा, बल्कि ईरान बर्बादी की कगार पर भी पहुँच सकता है। देखते हैं भविष्य के गर्भ क्या छिपा है?    

ईरान के शिया मौलवी अयातुल्ला मकरम शिराजी ने सोमवार (30 जून 2025) को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ फतवा जारी किया है। शिराजी ने उन्हें ‘अल्लाह का दुश्मन’ बताया गया है।

शिराजी ने फतवा जारी करते हुए विश्वभर के मुसलमानों से एक होने की अपील की है। शिराजी ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के नेताओं को सत्ता से बाहर करने की बात भी कही है। फतवे में कहा गया है कि मुस्लिमों या इस्लामी राज्यों द्वारा अल्लाह के इन दुश्मनों को दिया गया कोई भी समर्थन या सहयोग निषिद्ध माना जाएगा।

फतवे में दुनिया भर के मुस्लिमों को कहा गया है “इस्लाम की राह पर चलते हुए मुस्लिम को अपने मिशन में कठिनाई या नुकसान का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें अल्लाह की इच्छा से, अल्लाह की राह में एक लड़ाके के रूप में इनाम दिया जाएगा।”

किसे कहा जाता है मोहरेब 
ईरान की न्यूज एजेंसी 'मेहर' के मुताबिक मकरम ने अपने आदेश में कहा,' कोई भी व्यक्ति या शासन जो नेता या खुदा को धमकी देता है उसे मोहरेब माना जाता है
 'फॉक्स' न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोहरेब उस व्यक्ति को कहा जाता है, जो खुदा के खिलाफ युद्ध छेड़ता है ईरानी कानून के मुताबिक मोहरेब के रूप में पहचाने जाने वाले लोगों को सूली पर चढ़ाने, मृत्युदंड और अंग विच्छेदन या निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है 

क्या होता है फतवा? 
बता दें कि फतवा का अर्थ है फैसला लेना
 यह मुफ्ती द्वारा इस्लामी कानून के किसी मुद्दे पर दी जाने वाली कानूनी राय होती है इस्लामी सरकारों की ओर से कई लोगों पर फतवा जारी किया गया है फतवे का सबसे कुख्यात मामला साल 1989 में प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी के खिलाफ जारी किया गया था उनके उपन्यास 'द सैटेनिक वर्सेज' को पब्लिश होने के बाद कई मुसलमानों को इससे आपत्ति हुई थी किताब को आपत्तिजनक मानते हुए रुश्दी की हत्या का आदेश दिया गया था रुश्दी की कई बार हत्या की कोशिश की गई साल 2023 में उन पर चाकू से हमला हुआ था, जिसमें उनकी एक आंख चली गई थी

हमास चीफ याह्या सिनवार को 72 हूरों के पास पहुंचा इजरायल ने गाजा में शांति का दिया खुला ऑफर, बोले नेतन्याहू- बंधकों को वापस करो, हथियार डालो, कल समाप्त हो जाएगा युद्ध

नेतन्याहू ने सिनवार को 7 अक्टूबर हमले का जिम्मेदार ठहराया है (चित्र साभार; Times of israel)
इजरायल में नरसंहार के मास्टरमाइंड याहया सिनवार को ठिकाने लगाए जाने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना बयान जारी किया है। नेतन्याहू ने कहा है कि सिनवार की मौत गाजा में चल रहे युद्ध का अंत नहीं बल्कि युद्ध के अंत की शुरुआत है।

बेंजामिन नेतन्याहू ने याहया सिनवार के मारे जाने के बाद शुक्रवार (18 अक्टूबर, 2024) को एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, “एक साल पहले 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के आतंकी सरगना याहया सिनवार ने एक नरसंहार की शुरुआत की थी। यह इजरायल की आजादी और होलोकॉस्ट के बाद अब तक का सबसे खतरनाक हमला था।”

नेतन्याहू ने आगे बताया, “सिनवार के आतंकियों ने 1200 निर्दोष लोगों को मार दिया। इनमें बच्चे, बूढ़े, होलोकॉस्ट से बचने वाले लोग शामिल थे। उन्होंने महिलाओं का रेप किया, पुरुषों के सर काटे। उन्होंने बच्चों को जलाया और 251 लोगों को बंधक बना लिया। अब इस आतंकी हमले का सरगना मारा जा चुका है, याहया सिनवार मर चुका है।”

बेंजामिन नेतन्याहू ने सिनवार की मौत के बारे में बताते हुए कहा, “उसे राफा के भीतर इजरायली सुरक्षा बलों के बहादुर जवानों ने मार गिराया। यह गाजा के भीतर युद्ध का अंत नहीं है बल्कि यह युद्ध के अंत की शुरुआत है। मेरा गाजा के लोगों के लिए एक सीधा संदेश है, यह युद्ध आज कल सकता है अगर हमास अपने हथियार डाल दे और हमारे बंधको को लौटा दे।”

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बताया कि हमास ने अभी 101 लोगों को बंधक बना रखा है, इनमें इजरायली नागरिकों के अलावा दूसरे देशों के नागरिक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल सबको वापस छुडवा कर उनके घर पहुंचाएगा, यह उसकी गारंटी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई हमास की मदद करेगा तो ढूंढ कर मारा जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ ईरान ने एक आतंक की धुरी बनाई थी, जो अब खत्म हो रही है। उन्होंने कहा, “नसरल्लाह की मौत हो चुकी है, उसके डिप्टी मोहसिन की मौत हो चुकी है। हनियेह की मौत हो चुकी है और दाईफ की भी मौत हो चुकी है और अब सिनवार भी मारा जा चुका है। ईरान की आतंकी रिजीम जल्द ही खत्म होगी।”

इससे पहले बुधवार (17 अक्टूबर, 2024) को इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) ने राफा के भीतर एक इमारत में हमास के मुखिया याहया सिनवार को मार गिराया। याहया सिनवार के मारे जाने का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में वह इजरायली सुरक्षाबलों से घिरा हुआ दिखाई पड़ता है।

सिनवार को जुलाई, 2024 में ही हमास का मुखिया बनाया गया था। सिनवार, इस्माइल हानियेह की मौत के बाद हमास का मुखिया बना था। खान युनिस के एक कैंप में पड़ा होने वाला सिनवार 7 अक्टूबर के हमले का मास्टरमाइंड था और हमास-ईरान को नजदीक लाने में उसकी प्रमुख भूमिका थी।

गाजा पट्टी पहुँचे इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू, ‘हमास का खात्मा हमारा लक्ष्य, कोई रोक नहीं सकता’: ‘युद्ध विराम’ बढ़ाने के लिए गिड़गिड़ाया इस्लामी आतंकी संगठन

गाजा पट्टी में घुसे इजरायली पीएम नेतन्याहू (तस्वीर साभार: CNN)
इजरायल और हमास के बीच तकरीबन डेढ़ महीने तक चले युद्ध पर 4 दिन का विराम था। इस बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी का दौरा किया। अपनी फौज से मिलकर उन्होंने यह साफ कर दिया कि भले ही अभी सीजफायर हो गया, लेकिन ये युद्ध आतंक के खात्मे तक जारी रहेगा।

इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते की शुरुआत शुक्रवार (24 नवंबर 2023) से हुई थी। पहले दिन हमास द्वारा 24 बंधकों को रिहा किया गया। जिनमें 13 इजरायली, थाईलैंड के 10 और फिलीपिंस का एक नागरिक शामिल था।

इसके बाद तीसरे दिन 17 लोग हमास आतंकियों की चंगुल से रिहा हुए। इनमें 14 इजरायली और 3 थाईलैंड के नागरिक थे। हमास ने गाजा के एक अस्पताल में इन बंधकों को रेड क्रॉस इंटरनेशनल सोसायटी के वॉलंटियर्स के हवाले किया, जिन्होंने बाद में सभी को बंदियों को इजरायली सुरक्षा बलों को सौंप दिया।

इनकी रिहाई देखकर हमास से बचाए गए सैंकड़ों लोग खुशी मनाते दिखे। उन्होंने एक हॉल में पूरी रिहाई की खबर देश जश्न मनाया, जिसकी वीडियो भी सामने आई है।

इजरायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम में कतर ने बिचौलिए की भूमिका निभाई। फैसला हुआ कि हमास 50 बंधकों को रिहा करेगा और फिलीस्तीन के भी 150 कैदी छोड़े जाएँगे। इस डील के बाद भले ही कुछ लोग घर लौट आए हैं, लेकिन अब भी खबर है कि 183 लोग अभी भी हमास द्वारा बंदी बनाकर रखे गए हैं। इनमें 18 बच्चे जबकि 43 तो महिलाएँ ही हैं।

हमास ने रविवार (26 नवंबर 2023) को एक बयान में सीजफायर बढ़ाने की भी माँग की। हालाँकि इजरायल ने शर्त रखी कि अगर हमास रोज 10 बंधक छोड़ेगा तो वह इस बात को मान लेंगे। इसी बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर ऐसे माहौल में गाजा पट्टी का दौरा किया। उन्होंने अपने सैनिकों से मुलाकात करने के बाद यह साफ कर दिया कि गाजा पट्टी पर अब इजरायल का कब्जा है। उन्होंने सैनिकों की हौसला अफजाही करते हुए यहाँ तक कहा कि जब तक आतंक का सफाया नहीं होगा तब तक युद्ध नहीं रुकेगा।

सैनिकों के साथ खड़े होकर उन्होंने कहा, “हम अपने बंदियों को वापस लाने के लिए हर प्रयास करेंगे और अंततः हम उन सभी को वापस लाएँगे। नेतन्याहू ने कहा, “इस युद्ध में हमारे तीन लक्ष्य हैं- सभी बंधकों की वापसी, हमास का खात्मा और यह सुनिश्चित करना कि गाजा फिर कभी इजरायल के लिए खतरा ना बने।” उन्होंने आगे कहा, “कोई भी हमें नहीं रोक सकता है। हमारे पास ताकत है और हम लक्ष्यों को पाकर रहेंगे।”

ये चार दिन के युद्ध विराम के बाद और बेंजामिन नेतन्याहू की बातें सुनकर ऐसा लगता है जैसे बंधकों की अदला-बदली का काम पूरा होने के बाद हमास आतंकियों के खिलाफ इजरायल अपनी लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने पहले भी कहा था और अब भी इशारा किया है कि जब तक हमास है तब तक वो अपना युद्ध नहीं रोकेंगे।


‘हमास आतंकी संगठन नहीं, नेतन्याहू को गोली मार देनी चाहिए’: इजरायली प्रधानमंत्री की हत्या के लिए कांग्रेस सांसद ने उकसाया

     'नेतन्याहू को सीधे गोली मार देनी चाहिए': फिलिस्तीन समर्थक रैली में कांग्रेस सांसद ने की माँग (साभार-इंडिया टुडे)
जिस तरह भारत में हो रहे आतंकी हमलों को कांग्रेस 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' का नाम देकर इस्लामिक आतताइयों को संरक्षण दे रही थी, वही काम आज कांग्रेस आतंकी हमास को समर्थन देकर कर रही है। 
केरल के कांग्रेस सांसद ने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को गोली मारने की बात कही। दरअसल, कांग्रेस सांसद ने राजमोहन उन्नीथन ने इज़राइल-हमास युद्ध के बीच केरल के कासरगोड में फिलिस्तीन और हमास के समर्थन रैली में हिस्सा ले रहे थे। इस रैली कांग्रेस नेता ने हमास की निंदा तो छोड़िए उल्टा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक युद्ध अपराधी बताते हुए उन्हें बिना मुकदमे के सीधे गोली मारने की बात कही।

कांग्रेस नेता ने कहा कि हमास बंदूक उठाकर केवल अपनी जमीन, वहाँ के लोगों की रक्षा कर रही है। हमास आतंकी नहीं है। यदि कोई हमास को आतंकी कहता है तो उसका कड़ाई से विरोध करना है। कांग्रेस नेता यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे अमेरिका का उदाहरण देते हुए यह भी कहा, “यदि हमास आतंकी है तो हम सब भी आतंकी है।”

कांग्रेस नेता ने नेतन्याहू को गोली मारने को सही साबित करने के लिए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, न्यूरमबर्ग ट्रायल (Nuremberg trials) का उपयोग युद्ध अपराधों में शामिल लोगों के लिए किया गया था। इसमें युद्ध अपराधियों को बिना किसी मुकदमे के गोली मार दी गई थी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अब समय आ गया है कि न्यूरमबर्ग मॉडल का पुनः उपयोग किया जाए। बेंजामिन नेतन्याहू दुनिया के सामने युद्ध अपराधी बनकर खड़े हैं। नेतन्याहू को बिना किसी मुकदमे के गोली मारकर हत्या करने का समय आ गया है क्योंकि वह इस स्तर की क्रूरता कर रहे हैं।

कांग्रेस नेता खुलेआम फिलिस्तीन के समर्थन में बयानबाजी करते हुए नेतन्याहू के खिलाफ जहर उगला। उन्होंने कहा कि जिनेवा कन्वेंशन के सभी समझौतों को तोड़ने वालों को दंडित किया जाना चाहिए।

केरल की प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) 23 नवंबर इज़राइल-हमास युद्ध के बीच फिलिस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता की घोषणा करने के लिए कोझिकोड समुद्र तट पर एक रैली आयोजित करने जा रही है। ऐसे में मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल फिलिस्तीन समर्थक इस रैली का उद्घाटन करेंगे।

हालाँकि, केरल में हमास और फिलिस्तीन का समर्थन नया नहीं है। वहाँ वामपंथी पार्टियों के साथ ही कट्टरपंथी मुस्लिम भी खुलेआम आतंकियों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। 

इजरायल-हमास युद्ध 43वें दिन में प्रवेश कर गया है और अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं। इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह, हमास ने इज़रायल पर हमला किया और 1400 से अधिक इजरायलियों को बेरहमी से मार डाला था। वहीं जवाबी कार्रवाई में इजरायली सेना ने गाजा पट्टी और फिलिस्तीन के कुछ हिस्सों पर हमले कर रही है। 

भारत की विदेश नीति और इजरायल संकट

 

डॉ राकेश कुमार आर्य 

इसरायल और फिलिस्तीनियों के बीच दुश्मनी की आग दशकों पुरानी है। इसराइल के अस्तित्व को मिटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर षड़यंत्र चलते रहते हैं । जिनके चलते यह आग भीतर ही भीतर सुलगती ही रहती है। अनुकूल अवसर आते ही यह आग भड़क उठती है। अब भी ऐसा ही हुआ है। इस बार पूर्व नियोजित तैयारी के अंतर्गत फिलिस्तीन मिलिटेंट ग्रुप हमास ने गाजा इलाके से इजरायल पर रॉकेटों से धुआंधार हमला करते हुए सारी दुनिया को यह संदेश दे दिया कि आतंकवाद अपने घृणित स्वरूप में जिंदा है। इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि दुनिया को इस गफलत में नहीं रहना चाहिए कि आतंकवाद को शांति सम्मेलनों और उपदेशों से समाप्त किया जा सकता है। इसके समूल विनाश के लिए दुनिया को एकजुट होना पड़ेगा। उधर इसराइल ने भी अपने स्वभाव के अनुसार मजबूती से डटे रहकर आतंकवाद का जवाब देना आरंभ कर दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इजरायल के साथ है। 

इधर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट कह दिया है कि वह इस हमले के समय अपने मित्र इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है। यद्यपि अबसे पूर्व ऐसे अवसर भी आए जब भारत ने फिलीस्तीन के साथ खड़े रहने में अपनी भलाई देखी थी, पर अब परिस्थितियां बदल गई हैं और भारत की विदेश नीति में भी व्यापक परिवर्तन हुआ है। समय की आवश्यकता को देखते हुए भारत ने इस समय इजराइल का साथ देना उचित माना है।

भारत की वर्तमान विदेश नीति इस बात पर अडिग है कि जो भी देश कहीं पर आतंकवाद की घटना को अंजाम देगा या उसका समर्थन करेगा या इसका प्रत्यक्ष - अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करेगा, भारत उसका विरोध करेगा। संपूर्ण मानवता के हित में भारत की यह विदेश नीति पूर्णतः न्यायसंगत और समय के अनुकूल है। यदि इसी प्रकार की मानवतावादी विदेश नीति को सभी देश अपना लें तो निश्चित रूप से संसार से आतंकवाद जैसे भयानक शत्रु को मिटाया जा सकता है। कुछ लोग आतंकवाद का संप्रदाय के आधार पर समर्थन करते हैं, कुछ किसी आतंकवादी देश से अपने मित्रतापूर्ण संबंधों के चलते हुए ऐसा करते हैं तो कुछ आतंकवाद से पीड़ित किसी देश से अपना कोई पुराना वैर साधने के लिए आतंकवाद का समर्थन करते हैं। भारत ने अपने स्टैंड से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल और केवल आतंकवाद के विरुद्ध है और इसके लिए वह कुछ भी नहीं देखेगा। 

भारत ने अपने इस स्टैंड से यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस बात की केवल घोषणा ही नहीं करता है कि वह किसी भी किस्म के आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा बल्कि वह इस पर चलकर भी दिखाना चाहता है। सारे संसार के देशों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि एक आतंकवादी संगठन हमास किस प्रकार ताकत प्राप्त करता है और इस स्थिति में आ जाता है कि संसार भर के देशों की तमाम कोशिशों के उपरांत भी वह एक देश पर आतंकवादी हमला कर देता है। बात स्पष्ट है कि या तो संसार के देशों की ये घोषणाएं खोखली थीं कि वह आतंकवाद का डटकर एकजुटता के साथ सामना करेंगे या फिर अंदर ही अंदर इस आतंकवादी संगठन को वही देश दूध पिलाने का काम करते रहे जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद की आलोचना करते रहे हैं ? इन दोगली चालों के कारण ही अंतरराष्ट्रीय शांति की स्थिति बन नहीं पाती है। आज भारत की नीतियों को अपनाकर चलने का समय आ गया है। जब हर देश को अपनी घोषणाओं के अनुसार अपनी योजनाओं को भी बनाने के लिए सोचना पड़ेगा। अबकी बार जिस प्रकार से इसराइल पर आक्रमण किया गया है वह अपने आप में एक अप्रत्याशित घटना है। यदि इस प्रकार की कार्यवाही को किसी भी प्रकार से वैधानिक या उचित ठहराने का प्रयास किया जाता है तो यह कतई गलत होगा। यही कारण है कि भारत इस प्रकार की घटनाओं के विरोध में इसराइल के साथ खड़ा है।

हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि अभी कुछ समय पहले ही दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन हुआ था। उसमें इंडिया मिडल ईस्ट इकोनामिक कॉरिडोर बनाने की घोषणा भी की गई थी। उस घोषणा में इसराइल भी सम्मिलित है। भारत इजरायल विरोधी शक्तियां उस घोषणा से तिलमिला गई हैं। अतः इसराइल पर किया गया इस प्रकार का हमला भारत के लिए भी एक संकेत हो सकता है। इसराइल ने अपनी मजबूती दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह प्रतिशोध लेगा और प्रतिक्रियास्वरूप किसी भी स्थिति तक जाने के लिए तैयार है, अपनी घोषणा के अनुसार इजरायल ने ऐसा ही करना भी आरंभ कर दिया है। इससे स्पष्ट है कि गाजा पट्टी की यह घटना भविष्य में कहां तक जाएगी और क्या स्वरूप लेगी ? - इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा जा सकता।

यह एक भयंकर महाविनाश की चिंगारी भी हो सकती है। यह सब इजरायल के धैर्य और महाशक्तियों की कूटनीतिक चालों पर लगने वाले विराम या संभावित रूप से उनमें आने वाली तेजी पर निर्भर करता है कि हम भयंकर विनाश की ओर जा रहे हैं या कुछ समय बाद इन परिस्थितियों में ठहराव आ जाएगा। वर्तमान परिस्थितियों में इतना स्पष्ट हो रहा है कि मिडिल ईस्ट एक गंभीर संकट में फंस चुका है।

  इस ताजा घटनाक्रम के संदर्भ में हमें यह भी समझना चाहिए कि कुछ समय पहले तक यह संभावना व्यक्त की जा रही थी कि इसराइल और सऊदी अरब के बीच नए सिरे से नए संबंधों की परिभाषा को गढ़ा जा सकता है। अमेरिका का वर्तमान नेतृत्व इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा था। इसराइल पर किए गए इस आतंकी हमले के पीछे इसराइल और सऊदी अरब के बीच बन रहे नए संबंधों को झटका देने का उद्देश्य भी हो सकता है।

जो लोग जो देश शांतिपूर्वक अपने काम पर नजर रखते हैं और शांति को ही वैश्विक विकास की एकमात्र गारंटी मानते हैं , उनके लिए वर्तमान स्थिति बड़ी परेशानकुन है, पर वे कुछ कर नहीं सकते। उन्हें अपने क्षेत्र में स्थिरता की आवश्यकता है , क्योंकि किसी भी प्रकार की अस्थिरता व्यापार और लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होती है।

  वैश्विक राजनीति और कूटनीति का यह तकाजा होता है कि शत्रु हमेशा आप पर उस समय वार करता है जब आप सर्वाधिक असावधान होते हैं। तो क्या यह माना जा सकता है कि इजरायल जो कि अपने चारों ओर से शत्रुओं से घिरा हुआ है, वह वर्तमान में असावधान हो गया था? जिस इजराइल से बड़े देश भय खाते हैं , बड़े बड़े देश हथियार खरीदते देखे जाते हैं और जो अपने पौरुष और पराक्रम के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है उसका इस प्रकार असावधान होना जंचता नहीं, पर लगता यही है कि वह असावधान था। उसका इंटेलिजेंस बुरी तरह निष्फल सिद्ध हो गया। इतने बड़े हमले को आतंकवादी अंजाम देते हैं और इजरायल की पूरी इंटेलिजेंस उस पर कुछ नहीं कर पाती या उसकी सूचना उसके पास पहले से उपलब्ध नहीं होती , इसका कोई ना कोई तो कारण है। आज नहीं तो कल यह सवाल इजराइल में अवश्य पूछा जाएगा कि वहां की सुरक्षा एजेंसियां आखिर इतने बड़े हमले के प्रति असावधान क्यों रहीं ?

 इस प्रकार के सवालों से वर्तमान इजरायली नेतृत्व भी अछूता नहीं रहेगा। समय आने पर उसे भी जवाब देना होगा।

(लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं।)

इजरायल : प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गौतम अडानी को सौंपा अपना बंदरगाह, : FPO भी सारा का सारा हुआ सब्स्क्राइब

                                  इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मिले गौतम अडानी
एक तरफ भारत विरोधी ताकतें गौतम अडानी पर प्रहार कर देश को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अडानी निरंतर भारत का मान बढ़ा रहा हैं। विरोध के बावजूद इजराइल में बंदरगाह मिलने को बड़ी उपलब्धि ही माना जाएगा। 

अडानी समूह ने इजराइल के हाइफा बंदरगाह (Israel’s Haifa port) का अधिग्रहण कर लिया है। इस मौके पर अधिग्रहण समारोह का भी आयोजन किया। इस समारोह में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी भी शिरकत करने पहुँचे। गौतम अडानी ने पीएम नेतन्याहू के साथ अपनी तस्वीर ट्वीटर पर साझा की और हाइफा बंदरगाह के अधिग्रहण पर खुशी जताई।

हिंडनबर्ग रिपोर्ट के आने के बाद से अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में गिरावट की खबरों के बीच गौतम अडानी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। पीएम नेतन्याहू ने मुलाकात के दौरान पोर्ट ऑफ हाइफा अडानी पोर्ट को हैंडओवर कर दिया। गौतम अडानी ने बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मुलाकात की एक तस्वीर ट्विटर पर शेयर की है। गौतम ने ट्विटर पर लिखा, “हाइफा पोर्ट अब अडानी ग्रुप को सौंप दिया गया है।”

उन्होंने लिखा, “इस गौरवशाली दिन पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भूमध्य सागर क्षेत्र (Mediterranean region) में लॉजिस्टिक की सुविधा के लिए ‘अब्राहम अकॉर्ड’ गेम चेंजर साबित होगा। अडानी गैडोट सबकी प्रशंसा का पात्र बनने के लिए हाइफा पोर्ट की सूरत बदलने को तैयार है।”

अब्राहम अकॉर्ड भूमध्य सागर क्षेत्र के तीन देशों इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने का एक संयुक्त दस्तावेज है। अमेरिकी की मदद से इसे तैयार किया गया है।

पोर्ट ऑफ हाइफा को डेवलप करने के लिए अडानी पोर्ट ने इजराइल के गैडोट ग्रुप के साथ समझौता किया है। हाइफा पोर्ट कंपनी लिमिटेड के सभी शेयरों के लिए 1.8 अरब डॉलर की बोली लगाई गई थी। समझौते के अनुसार अडानी पोर्ट की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत और गैडोट ग्रुप की 30 प्रतिशत है। इसी के साथ भारतीय कंपनी अब यूरोपीय पोर्ट सेक्टर में अपने पाँव फैलाने लगी है।

दूसरी तरफ अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Adani Enterprises Limited) की ओर से शुक्रवार (27 जनवरी 2023) को फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) जारी किया गया था। FPO के आखिरी दिन मंगलवार (31 जनवरी, 2023) को इसे पूरी तरह से सब्सक्राइब कर लिया गया है। शेयर बाजार के आँकड़ों के मुताबिक, 20 हजार करोड़ रुपए के FPO को आखिरी दिन गैर-खुदरा निवेशकों से भारी समर्थन मिला। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बावजूद अडानी पर निवेशकों ने भरोसा दिखाया उनपर नकारात्मक प्रचार का कोई असर नहीं दिखा।