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‘तुम पूरी तरह पागल हो, मेरी वजह से जेल जाने से बचे’: ट्रंप का दिमाग अब नेतन्याहू पर खिसका

             डोनाल्ड ट्रम्प (बाएँ) और बेंजामिन नेतन्याहू (दाएँ)(फोटो साभार: टाइम्स ऑफ इजरायल, न्यूजवीक)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भारी नाराजगी जताई है। 1 जून 2026 को दोनों के बीच फोन पर बहुत तीखी बातचीत हुई। ट्रंप ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू लेबनान में जानबूझकर जंग भड़का रहे हैं। इससे अमेरिका और ईरान की शांति बातचीत खतरे में पड़ रही है।

ट्रंप ने नेतन्याहू को सीधे क्या-क्या कहा?

‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप इजरायल के हमलों से बेहद गुस्से में थे। ट्रंप ने नेतन्याहू को ‘पूरी तरह पागल’ कह दिया। ट्रंप ने गुस्से में चिल्लाते हुए कहा, “तुम आखिर कर क्या रहे हो?” उन्होंने आगे कहा, “अगर मैं नहीं होता तो तुम जेल में होते। मैं तुम्हें बचा रहा हूँ। अब हर कोई तुमसे नफरत करता है। इस वजह से हर कोई इजरायल से भी नफरत करता है।”

क्यों गुस्से में थे अमेरिकी राष्ट्रपति?

ट्रंप लेबनान में इजरायल की लगातार सैन्य कार्रवाई से नाराज थे। इजरायल बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े हमले की तैयारी में था। वह दक्षिणी लेबनान में भी सेना बढ़ा रहा था। ट्रंप को लगा कि इजरायल जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो रहा है। वे लेबनान में आम नागरिकों की मौतों और हिजबुल्लाह कमांडरों पर बड़े हमलों से परेशान थे। उन्हें डर था कि इससे अमेरिका-ईरान के कूटनीतिक प्रयास बर्बाद हो जाएँगे।

ईरान की सीधी चेतावनी

यह तीखी बहस तब हुई जब ईरान ने अमेरिका को खुली चेतावनी दी। ईरान ने कहा कि अगर लेबनान पर इजरायली हमले नहीं रुके, तो वह वाशिंगटन के साथ चल रही बातचीत रोक देगा। तेहरान ने साफ किया कि किसी भी समझौते के लिए लेबनान में युद्धविराम पहली शर्त है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने भी लेबनान को भरोसा दिया कि हमला जारी रहने पर वे अमेरिका से बातचीत सस्पेंड कर सकते हैं।

फोन कॉल के बाद क्या बदला?

इस डांट के बाद एक इजरायली अधिकारी ने बताया कि इजरायल ने बेरूत पर हमले की योजना टाल दी है। ट्रंप ने बाद में दावा किया कि बातचीत सकारात्मक रही। उन्होंने कहा कि बेरूत की तरफ बढ़ रहे इजरायली सैनिकों को वापस मोड़ दिया गया है। मध्यस्थों के जरिए हिजबुल्लाह भी इजरायल पर हमले रोकने को तैयार हो गया है।

नेतन्याहू की जिद और आंशिक युद्धविराम

दूसरी तरफ नेतन्याहू ने जनता के सामने अलग बयान दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल का रुख नहीं बदला है। वे दक्षिणी लेबनान में अभियान जारी रखेंगे। अगर हिजबुल्लाह ने हमला किया, तो बेरूत पर फिर बमबारी होगी। इस बीच, 1 जून को लेबनान ने एक आंशिक युद्धविराम की घोषणा की। इसके तहत इजरायल बेरूत पर हमले नहीं करेगा और हिजबुल्लाह इजरायल पर रॉकेट नहीं दागेगा।

उत्तर प्रदेश : समाजवादी पार्टी प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने ब्राह्मणों को बताया वेश्याओं से भी बुरा

लगता है समाजवादी पार्टी की भी उल्टी गिनती शुरू हो गयी है। वह किसी और ने नहीं समाजवादी पार्टी ने खुद ही शुरू की है। यह समाजवादी पार्टी का कसूर नहीं बल्कि सौबत का है। INDI गठबंधन में जितनी भी पार्टियां है सभी सनातन विरोधी हैं। सभी मुसलमानों के वोट खींचने में सनातन पर प्रहार कर रहे हैं। जबकि मुसलमान भी इन पाखंडियों को समझ रहा है कि जो अपने धर्म नहीं हुआ हमारा क्या होगा। इन सबकी हालत धोबी का कुत्ता घर का न घाट का होने वाली है। 
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता राजकुमार भाटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह ब्राह्मणों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। बीजेपी की उत्तर प्रदेश इकाई ने राजकुमार भाटी का यह वीडियो X पर शेयर किया है।

इस वीडियो में राजकुमार भाटी कह रहे हैं, “ब्राह्मण भला ना वेश्या, इनमें भला ना कोई। कोई-कोई वेश्या तो भली, ब्राह्मण भला ना कोई।”

अवलोकन करें:-

BJP ने X पर लिखा, “सपा में बयान नहीं, बदजुबानी की प्रतियोगिता चल रही है। कभी सनातन पर हमला, कभी समाज के सम्मानित वर्गों पर अपमानजनक टिप्पणी, यही सपाई राजनीति की असली पहचान बन चुकी है।” BJP ने आगे लिखा, “भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज का अपमान करने वाला बयान केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं बल्कि उस मानसिकता का आईना है, जहाँ वोटबैंक के अहंकार में मर्यादा, संस्कार और सामाजिक सम्मान सब कुचल दिए जाते हैं।”

‘आतंकवादी हैं PM मोदी’: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे

                                    मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी को कहा 'आतंकवादी' (साभार : NDTV)

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘आतंकवादी’ कह दिया। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से ठीक पहले चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी बराबरी और न्याय के सिद्धांतों में विश्वास नहीं करते हैं।

हालाँकि, बयान पर बवाल बढ़ने के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके शब्द का अर्थ यह था कि प्रधानमंत्री विपक्षी नेताओं को ‘आतंकित’ कर रहे हैं, न कि वे स्वयं आतंकवादी हैं।

मल्लिकार्जुन खरगे के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस गिरते स्तर की राजनीति कर रही है। गोयल ने इसे 142 करोड़ भारतीयों और लोकतंत्र का अपमान बताते हुए खड़गे से माफी की माँग की। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से ठीक पहले इस बयान ने चुनावी माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है।

अवलोकन करें:-

‘मुझे झाँ* फर्क नहीं पड़ता’: ममता बनर्जी ने मोदी के लिए किया अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल; और कितनी
‘मुझे झाँ* फर्क नहीं पड़ता’: ममता बनर्जी ने मोदी के लिए किया अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल; और कितनी

 

क्या दलवई जैसे कांग्रेस नेताओं की वजह से कश्मीर से आतंकवाद ख़त्म नहीं हो रहा? दिल्ली ब्लास्ट को कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने किया जस्टिफाई; देखिए वीडियो, आतंकवादियों को जेल से छुड़ाने मेहबूबा के अब्बू ने अपनी ही बेटी के किडनैप का ड्रामा किया था


जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने और पत्थरबाज़ी पर अंकुश लगाने से जनता को वहां से आतंकवाद के ख़त्म होने पर राहत की साँस ली थी कश्मीर जाने से वहां के पर्यटन को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को सुधारने में लग गयी। लेकिन जिसे भीख मांगने की आदत हो राज्य को आत्मनिर्भर होते कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं। हुसैन दलवई जैसे नेताओं ने आतंकवादियों को राज्य से बाहर जाकर अपने काम को अंजाम देने के लिए शायद भेज रहे हैं? वैसे आतंकवादियों पर होती कार्यवाही से अब्दुल्ला परिवार और मेहबूबा मुफ़्ती भी पीछे नहीं। केंद्र में मोदी सरकार को आतंकवाद को समर्थन देने वालों पर भी सख्ती करनी होगी। शंका है, शंका गलत भी हो सकती है, कश्मीर से लेकर भारत के शेष भागों में फैले आतंकवादियों की शायद इनको जानकारी हो? जब तक आतंकवाद के इन sleeper cells पर कार्यवाही नहीं होगी सच्चाई सामने नहीं आ सकती। देखना है कि सरकार कब कार्यवाही करती है।      

मेहबूबा मुफ़्ती परिवार की आतंकवादियों को समर्थन देना बहुत पुराना है। तत्कालीन वी पी सिंह की सरकार में गृह मंत्री रहे इनके अब्बू मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने जेलों में बंद आतंकवादियों को छुड़ाने के लिए अपनी ही बेटी रुपैया सईद के अपहरण का ड्रामा खेला था। क्या ऐसे नेताओं से राज्य में शांति की उम्मीद की जा सकती है? आखिर किस लालच में मेहबूबा दामाद की तरह आतंकवादियों को संरक्षण दे रही है। देखिए रुबैया अपहरण कांड वीडियो: 

        

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने लाल किले में हुए कार ब्लास्ट में शामिल जिहादी और आतंकी डॉक्टर मॉड्यूल के प्रति सहानुभूति जताई है। उन्होंने कहा है कि कश्मीर में जिस तरह से ‘अन्याय’ हुआ है, उसका असर तो दिखेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही बम फटते हैं इसकी जाँच होनी चाहिए। आरएसएस जिस तरह से प्रचार करते हैं इसकी भी जाँच होनी चाहिए।

ऐसा कहते हुए उन्होंने आतंकियों के देश विरोधी और मानवता विरोधी कार्यों को सही ठहराने की कोशिश की है।

क्या कहा हुसैन दलवई ने?

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने आतंकियों के पास मिले 2900 किलो विस्फोटक, उनकी साजिश पर पर्दा डालने की कोशिश की है। राम मंदिर को उड़ाने और देश के अहम हिस्सों में धमाका करने की साजिश को नजरअंदाज किया है। इनके मन में लालकिले में हुए कार विस्फोट में मारे गए 12 निर्दोष लोगों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है, कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और जिंदगी-मौत के बीच झूल रहे हैं, ये भी मायने नहीं रखता।

सैन जैसे लोगों को सिर्फ कश्मीर में ‘अत्याचार’ नजर आता है। कश्मीर में निर्दोष पर्यटकों को मारा गया, उस वक्त इनकी बोलती बंद हो जाती है। इसमें भी इन्हें सीमा पार से मिल रहे आतंकी सहयोग नजर नहीं आते। आतंकियों की बर्बरता नजर नहीं आती। दिखाई देती है तो कथित ‘अत्याचार’ और वह भी सिर्फ कश्मीरी इस्लामिक कट्टरपंथियों के प्रति। वरना 90 के दशक में कश्मीरी हिन्दुओं पर हुए अत्याचार पर भी उनके मुँह से कभी कुछ निकल गया होता, तो ये समझा जा सकता था।

हुसैन दलवई का कहना है कि कश्मीरियों पर जो अत्याचार हुए हैं उसकी वजह से लालकिल पर कार विस्फोट हुआ। उन्होंने बिहार चुनाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि चुनाव आते ही बम फटते हैं, इसकी जाँच होनी चाहिए। आरएसएस जिस तरह से प्रचार करते हैं इसकी भी जाँच होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता ने पहले कश्मीरियों पर ‘अत्याचार’ की बात कही। कार विस्फोट में शामिल डॉक्टरों के गैंग को देश में क्या-क्या ‘अत्याचार’ हुए। मामूली फीस देकर सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई, सरकारी नौकरी और बाकी सभी सुविधाएँ। हालाँकि कई डॉक्टरों ने सरकारी नौकरी छोड़ कर जिहाद फैलाने के लिए अल फलाह यनिवर्सिटी ज्वाइन किया। अब इन डॉक्टरों पर किस तरह के ‘अत्याचार’ हुए हैं, जिसकी वजह से कट्टरपंथ और जिहाद का रास्ता इनलोगों ने चुना, ये तो हुसैन दलवई ही बता पाएँगे।

आरएसएस को आतंकी संगठन कह जाँच की बात कही

आरएसएस पर हुसैन दिलवई हमेशा विवादित बयान देते रहे हैं। कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को आतंकवादी संगठन तक कह डाला और इसके कामकाज की जाँच करने की बात कही। उन्होंने कहा कि आरएसएस लोगों को हिंसा सिखाते हैं। इससे पहले नवंबर 2024 में दलवई RSS को आतंकी संगठन कहते हुए लोगों को हिंसा सिखाने की बात कही थी।

दलवई को दुनिया के सबसे अनुशासित समाज सेवी संगठन के काम आतंकी दिखते हैं और ‘खतरनाक’ लगते हैं, लेकिन आतंकी कार्रवाई, हिंसक घटनाएँ ‘अन्याय का बदला’ नजर आता है।

मुंबई हमले के वक्त भी आरएसएस को घसीटा गया

दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े डॉक्टर जिहादी कंपनी के प्रति ये ‘प्यार’ कांग्रेस नेताओं का कोई नया नहीं है। पहले भी मुंबई ब्लास्ट के वक्त कॉन्ग्रेस नेता एआर अंतुले ने आतंकवादियों के प्रति नरमी बरतते हुए आरएसएस को इसमें घसीटा था।

कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण का ये असर था कि 26/11 मुंबई हमले में अगर कसाब नहीं पकड़ा जाता तो शायद सारे सबूत होने के बावजूद इस घटना को ‘भगवा आतंकवाद’ कह दिया जाता। पाकिस्तान को ये चाहता ही था, कांग्रेस ने भी इसकी तैयारी कर रखी थी। इसलिए कसाब का नाम समीर अजमल कसाब को ‘समीर दिनेश चौधरी’ नाम दिया गया था, उसकी पहचान बेंगलुरु के एक छात्र की बनाई गई थी और उसे कलावा पहनाया गया था। ये सब इसीलिए, ताकि वो हिन्दू दिखे।

अजमल कसाब को ‘अरुणोदय डिग्री कॉलेज’ के छात्र की नकली पहचान दी गई थी। वो हमले से कुछ दिन पहले सिद्धिविनायक मंदिर भी पहुँचा था, वहाँ तस्वीरें क्लिक करवाई थी और 15-20 कलावा खरीदे थे। उसने पाकिस्तान जाकर साजिशकर्ता साजिद मीर को ये सारा कलावा दिया था और उसे भी लगा कि ये एक अच्छा विचार है। सोचिए, अगर अजमल कसाब नहीं पकड़ा जाता तो फिर पाकिस्तान की साजिश सफल हो जाती, कॉन्ग्रेस का साथ उसे मिल तो रहा ही था।

दिसंबर 2008 में, अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री ए.आर. अंतुले ने 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के प्रमुख हेमंत करकरे की हत्या का संबंध 2006 के मालेगांव विस्फोटों में हिंदू दक्षिणपंथी समूहों की करकरे द्वारा की गई जांच से जुड़ी हो सकती है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय नामदेव वडेट्टीवार ने यहाँ तक कह दिया था कि IPS हेमंत करकरे की जिस गोली से हत्या हुई वो अजमल कसाब या अन्य आतंकियों ने नहीं चलाई थी, बल्कि एक RSS के समर्पित पुलिस अधिकारी के हथियार से चली थी।

ये मस्जिद है या समाजवादी पार्टी का ऑफिस? संसद के बगल वाली मस्जिद में अखिलेश यादव की पार्टी मीटिंग, इमाम है समाजवादी पार्टी का सांसद

                  संसद मार्ग स्थित मस्जिद में अखिलेश यादव की बैठक ( फोटो साभार- @jamalsidhhiqi)
दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट में मौजूद एक मस्जिद में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बैठक की। इसके बाद अखिलेश यादव की आलोचना हो रही है। उन पर राजनीतिक फायदे के लिए मस्जिद के इस्तेमाल के आरोप लग रहे हैं।

बीजेपी नेता और उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि समाजवादी पार्टी हमेशा संविधान का उल्लंघन करती है। हमारा संविधान किसी धार्मिक स्थल का राजनीतिक इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता है। उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव राजनीतिक मकसद साधने के लिए एक मस्जिद का इस्तेमाल किया है। वह एक समाजवादी नहीं बल्कि नमाजवादी हैं। ” उन्होंने कहा कि वह हमेशा नमाजवादी बने रहना चाहते हैं।

मस्जिद को राजनीतिक मंच बनाए जाने पर बीजेपी का कहना है कि इससे अल्पसंख्यकों की भावना भी आहत हुई हैं साथ ही सियासी मर्यादाएँ टूटी हैं। बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने कहा कि एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव ने मस्जिद को राजनीतिक गतिविधि के लिए इस्तेमाल कर मुस्लिम समाज की भावनाओं से खिलवाड़ किया है।

उन्होंने डिंपल यादव के बैठने के तरीके की भी आलोचना की और इसे परंपरा के खिलाफ बताया। साथ ही मस्जिद के इमाम मोहिबुल्लाह नदवी को समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता करार दिया। जमाल सिद्दीकी ने अखिलेश यादव और डिंपल यादव पर बैठक को लेकर एफआईआर दर्ज करने की बात कही। उन्होंने एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी के अब तक चुप रहने पर भी सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा कि संसद मार्ग स्थित उसी मस्जिद में नमाज के बाद 25 जुलाई को बैठक करेंगे, जिसकी शुरुआत राष्ट्रीय गीत से और समापन राष्ट्रीय गान से होगी। जमाल सिद्दीकी ने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव की बैठक का फोटो शेयर करते हुए ये बातें कही हैं।

दरअसल 22 जुलाई को अखिलेश यादव ने मस्जिद में समाजवादी पार्टी की बैठक बुलाई थी। राजनीति को धर्म को जोड़ने का जवाब तो अखिलेश यादव नहीं दे रहे हैं, बल्कि उल्टे बीजेपी पर ही धर्म को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं।

बीजेपी पर आरोप लगाकर अखिलेश यादव अपने मुस्लिमपरस्त राजनीति को सही साबित करने की कोशिश करते रहे हैं।

राणा सांगा को कहा ‘गद्दार’, बाबर के लिए दिखाया ‘प्यार’: सपा सांसद ने राज्यसभा में उगला जहर, उपसभापति ने फटकारा

                                                          सपा सांसद रामजी लाल सुमन
आखिर मुस्लिम वोटों की खातिर कब तक कुर्सी के भूखे नेता और उनकी पार्टियां इतिहास को झुठलाते रहेंगे? केंद्र सरकार क्यों नहीं गलत इतिहास लिखने वाले इतिहासकारों को ब्लैकलिस्ट कर उनकी सरकारी सुविधाएं छीनी जाती? अगर किसी भी विदेश में वहां के असली इतिहास से छेड़छाड़ की गयी होती सख्त कार्यवाही हो गयी होती, लेकिन ये भारत है जहाँ ऐसे लोग ऐश करते देखे जाते हैं। असली इतिहास बताने वाले को सांप्रदायिक करार कर दिया जाता है। जब तक जनता के सामने असली इतिहास नहीं लाया जाएगा उपद्रवी उपद्रव करते रहेंगे।      

उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा के नाम से विख्यात महाराणा संग्राम सिंह को गद्दार बताया है। सदन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा वाले मुस्लिमों को बदनाम करने के लिए कहते हैं कि उनमें बाबर का डीएनए है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान का मुस्लिम बाबर को अपना आदर्श नहीं मानता है। वह मोहम्मद शाह और सूफी संतों को अपना आदर्श मानता है।

सुमन ने कहा, “मैं जानना चाहूँगा कि बाबर को लाया कौन? इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को राणा सांगा लाया था। अगर मुस्लिम बाबर की औलाद हैं तो तुम (हिंदू और भाजपा) गद्दार राणा सांगा की औलाद हो। ये हिंदुस्तान में तय हो जाना चाहिए। हम बाबर की आलोचना तो करते हैं, लेकिन राणा सांगा की आलोचना नहीं करते। ये देश की एकता का सवाल है।” इसके बाद उपसभापति हरिवंश ने उन्हें संसदीय मर्यादाओं का पालन करने की नसीहत देकर बैठा दिया।

रामजी लाल सुमन ने इससे पहले दिसंबर 2018 में देश का बँटवारा करके अलग पाकिस्तान बनाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना को देशभक्त बताया था और वीर सावरकर को गद्दार कहा था। उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में जिन्ना के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। तब उन्होंने कहा था, “विनायक दामोदर सावरकर तो बहुत ही बड़ा गद्दार था।”

आंबेडकर पर कांग्रेस के ढोंग की खुली पोल : 1946 का पत्र आया सामने, नेहरू ने लगाया था अंबेडकर पर अंग्रेज के साथ मिल ‘गद्दारी’ करने का आरोप; जब तक आंबेडकर कांग्रेस से माफ़ी नहीं मांगते कोई बात नहीं होगी : नेहरू

कांग्रेस तो क्या उसकी लग्गू-बग्गू INDI गठबंधन में शामिल पार्टियां अपने ही बुने जाल में फंस रही है। आज आंबेडकर को भगवान कहने वाले देश को बताए इतने वर्षों तक क्यों अपमानित कर जनता को पागल बनाते रहे हैं? हकीकत यह है कि आंबेडकर ने इस्लाम के विरुद्ध अपने विचार रखे थे। जो मुस्लिम तुष्टिकरण करने वालों को रास नहीं आने के कारण कांग्रेस द्वारा उनका अपमान किया जाता रहा। अगर जवाहर लाल नेहरू ने एक नहीं दो संसदीय चुनावों में उनके विरुद्ध प्रचार किया, क्यों? 

अगर डॉ आंबेडकर संसद पहुँच गए होते, शायद देश के हालात कुछ और ही होते। नेहरू से लेकर वर्तमान कांग्रेस तक केवल चापलूस ही पसंद हैं। नेहरू सोनिया गाँधी के ससुर और राहुल प्रियंका के दादा फिरोज जहांगीर खान के विरुद्ध इसलिए नहीं बोल पाए कि वह इंदिरा गाँधी के शौहर थे। जबकि फिरोज संसद में जब भी बोलने के लिए खड़े होते ससुर नेहरू के पसीने छूटते थे।  

पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस अपना प्रेम बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति दिखाने की हर संभव कोशिश कर रही है और ऐसा जता रही है कि उनके अतिरिक्त कोई बाबा साहेब को सम्मान नहीं देता…।

वो गृहमंत्री अमित शाह की आधी-अधूरी क्लिप को साझा करके अपना प्रोपगेंडा फैला रहे थे लेकिन इसी बीच जवाहर लाल नेहरू का एक पत्र सामने आया जो बताता है कि कांग्रेस शुरुआती समय से बाबा साहेब के लिए कैसी विचार रखती थी।

ये पत्र जवाहरलाल नेहरू ने 20 जनवरी 1946 को अमृत कौर के नाम लिखा था। इसे वैसे तो nehruselectedworks.com पर पढ़ा जा सकता है लेकिन आज इसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर भी वायरल है।

इस पत्र में जवाहर लाल नेहरू ने बाबा साहेब के बारे में बात करते हुए कहा था “…मुझसे पूछा गया कि आखिर कांग्रेस क्यों अंबेडकर के पास नहीं जाती और उनसे सुलह कर लेती। मैंने उनसे कहा कि कांग्रेस ऐसा कुछ नहीं करने वाली। अंबेडकर ने लगातार कांग्रेस और कांग्रेस नेताओं का अपमान किया है। जब तक वह माफी नहीं माँगते तब तक कांग्रेस का उनसे लेना-देना नहीं है। मैंने निश्चित तौर पर ये नहीं कहा कि अनुसूतिच जाति के लोगों को पूना पैक्ट के तहत राजनैतिक लाभ नहीं मिलेंगे। लेकिन मेरा पूरा जोर इस बात पर था कि अंबेडकर ने ब्रिटिश सरकार के साथ गठजोड़ किया था और कांग्रेस के खिलाफ थे। हम उनसे डील नहीं कर सकते।”

इसी पत्र के अंश को हाईलाइट करके अब सोशल मीडिया पर कांग्रेस से सवाल हो रहे हैं। भाजपा नेता अमित मालवीय ने लिखा, ” ये सोच से भी परे है कि नेहरू ने अमृत कौर को लिखे पत्र में बाबा साहेब को ‘गद्दार’ कहा और उनपर ब्रिटिशों के साथ गठजोड़ करने का आरोप लगाया… संविधान के रचयिता बाबा साहेब और दलित समुदाय की इससे बड़ी बेइज्जती नहीं हो सकती।”

अमिताभ चौधरी लिखते हैं, “1946 में अमृत कौर को लिखे गए पत्र में नेहरू ने अंबेडकर को ‘गद्दार’ कहा था और उन पर ब्रिटिशों के साथ गठजोड़ करने का आरोप लगाया था। आज उन्हीं का खून राहुल गाँधी और कांग्रेस के लोग वीर सावरकर को भी ब्रिटिश एजेंट बोलते हैं।”

इस पत्र के साथ सोशल मीडिया पर लोग ये सवाल भी कर रहे हैं कि कांग्रेस आज जितना प्यार बाबा साहेब के लिए दिखा रही है, तो उन्हें ये भी बताना चाहिए कि क्या बाबा साहेब ने नेहरू के रवैये से तंग आकर 1951 में कानून मंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया था? क्या जब बाबा साहेब देश के पहले कानून मंत्री बने थे उस समय उन्हें रक्षा संबंधी, विदेश संबंधी और वित्त संबंधी हर प्रमुख निर्णय लेने में शामिल करने की बजाय, किनारे नहीं किया गया था? क्या नेहरू ने उनपर ब्रिटिशों के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाकर गद्दार नहीं कहा गया था?

‘स्पष्ट कीजिए आप किस धर्म को मानते हैं’: सांसद बनने के बाद पहली बार रायबरेली पहुँचे राहुल गाँधी के विरोध में पोस्टर, पूछा – क्या आपको वोट देने वाले हिन्दू हिंसक हैं?

                               उत्तर प्रदेश के रायबरेली में राहुल गाँधी के खिलाफ लगे पोस्टर
राहुल के दादा फिरोज जहांगीर खान  
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के अपने ही संसदीय क्षेत्र में उनके खिलाफ पोस्टर लग गए हैं, वो भी तब तब वहाँ से उनकी जीत हुए अभी डेढ़ महीने भी नहीं बीते हैं। राहुल गाँधी ने केरल के वायनाड और उत्तर प्रदेश के रायबरेली से जीत दर्ज की थी, हालाँकि, उन्होंने वायनाड की सीट बहन प्रियंका गाँधी के लिए खाली कर दी थी और रायबरेली अपने पास रखी। अब रायबरेली में उनके दौरे के दौरान ‘राहुल गाँधी जवाब दो’ के पोस्टर दिखाई दे रहे हैं।

इस पोस्टर में राहुल गाँधी से पूछा गया है कि क्या आपको अपना अमूल्य मत देने वाला रायबरेली का हिन्दू मतदाता हिंसक है? साथ ही सवाल दागा गया है कि आप हिन्दू धर्म को मानते हैं या नहीं। राहुल गाँधी को ये स्पष्ट करने को कहा गया है कि वो किस धर्म के हैं। लोगों ने सांसद से सवाल पूछा है कि क्या भविष्य में सायबरेली का हिन्दू मतदाता उन्हें गाली खाने के लिए वोट दे? राहुल गाँधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने हैं, पहली बार वो किसी संवैधानिक पद पर बैठे हैं।

उन्होंने बतौर नेता प्रतिपक्ष अपने पहले ही भाषण में न सिर्फ हिन्दुओं को हिंसक बता दिया, बल्कि भगवान शिव को लेकर भी गलतबयानी की। उधर राहुल गाँधी लगातार डैमेज कंट्रोल में लगे हैं और उन्होंने रायबरेली के चुरुवा हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की है। इस दौरान उन्होंने गले में भगवा साफा लगा रखा था और तिलक भी लगाया हुआ था। बलिदानी अंशुमान सिंह की माँ से भी उन्होंने मुलाकात की। बताया जा रहा है कि लोकसभा में हुई फजीहत के बाद वो ये सब डैमेज कंट्रोल के लिए कर रहे हैं।

राहुल गाँधी को लोकसभा चुनाव 2024 में 6.87 लाख वोट मिले थे। यहाँ से पिछली बार उनकी माँ सोनिया गाँधी ने जीत दर्ज की थी, जो अब राज्यसभा संसद हैं। राहुल गाँधी ने भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह को 3.90 लाख मतों से मात दी है। रायबरेली से सोनिया गाँधी 5 बार और इंदिरा गाँधी 3 बार सांसद रही हैं। वहीं राहुल गाँधी के पिता फिरोज गाँधी भी यहाँ से 2 बार सांसद बने थे। मात्र 3 बार ही यहाँ विरोधी दलों को कामयाबी मिली है।