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राहुल गाँधी हिम्मत है तो लिखित में क्यों नहीं शिकायत देते? : ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा का निकला दम : हवा में तीर चला रहे नेता प्रतिपक्ष

राहुल गाँधी क्यों कांग्रेस का समय से पहले ही शमशान/कब्रिस्तान पहुँचाने में लगे हो? तुम्हारे भ्रमित और भड़काऊ बयानों की वजह से अब कांग्रेस की छवि राष्ट्रवादी नहीं राष्ट्र विरोधी पार्टी की बननी शुरू हो चुकी है। राहुल को पार्टी अध्यक्ष बनाने की चर्चा शुरू होने पर जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि "जितनी जल्दी हो राहुल बाबा को अध्यक्ष बनाइये" शत-प्रतिशत चरितार्थ हो रहा है। आखिर योगी की बात गलत कैसे गलत हो सकती है। क्योकि अपनी विदेश यात्रा से आने के बाद तुम्हारे झूठे बयानों कांग्रेस ने अपना जनाधार भी खोना शुरू कर दिया है। जहाँ तक वोट चोरी का सवाल है इतना मालूम होना चाहिए कि चुनाव आयोग की साठगांठ से बीजेपी वोट चोरी कर रही होती तुम भाई बहन का संसद जाना तो दूर, कांग्रेस का कोई सदस्य नगर निगम से लेकर लोकसभा नहीं पहुँचता। कांग्रेस की नितरोज गिरती साख में गाँधी परिवार जिम्मेदार है कोई और नहीं। चुनाव आयोग को लिखित में देने का मतलब राहुल अच्छी तरह जानते है कि आरोप झूठे निकलने पर कोई जेल जाने से नहीं रोक सकता।  

राहुल तो क्या कांग्रेस भी अच्छी तरह जानती है कि जाँच में आरोप गलत मिलते ही धरने/प्रदर्शन भी राहुल को 7 सालों के लिए जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता और 7 साल का मतलब जिन्दगी में कभी चुनाव नहीं लड़ सकते। इसलिए INDI गठबंधन को राहुल या कांग्रेस की वकालत करने की बजाए जितनी जल्दी हो अपने अस्तित्व की खातिर कांग्रेस से दूरी बनाए क्योकि कांग्रेस डूबेगी तो तुम्हे भी डूबने से कोई बचा नहीं पाएगा। 

वैसे तो कांग्रेस के जनाधार का उसी दिन से गिरना शुरू हो चुका था जब सोनिया गाँधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने के लिए परिवार के गुलामों ने तत्कालीन दलित अध्यक्ष सीताराम केसरी को दफ्तर से बाहर फेंक दिया था और उनकी धोती भी खुल गयी थी। और कांग्रेस को तेजी से नीचे गिराने में राहुल और अब प्रियंका वाड्रा लगी हुई है। देश जानना चाहता है कि आखिर राहुल की विदेश यात्राओं का क्या रहस्य है? विदेशों में जाकर किन देश विरोधियों के साथ मुलाकातें होती है? चीन के साथ क्या MoU किया है? इन गंभीर मुद्दों पर कांग्रेस गुलाम मीडिया भी क्यों खामोश है?    
राहुल गाँधी ने 5 नवंबर 2025 को दावा किया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में जिन सीटों पर पोस्टल बैलट में कांग्रेस आगे थी, वहाँ वोट चोरी हुई क्योंकि फाइनल रिजल्ट में हार गए। उनका कहना था कि पोस्टल बैलट काउंटिंग में कांग्रेस कुछ सीटों पर बीजेपी से आगे थी, लेकिन ईवीएम वोटिंग के बाद बीजेपी जीत गई। अगर उनका दावा सही होता तो हर सीट पर यही होता। लेकिन सच इससे बहुत दूर है।

ऑपइंडिया ने हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के सभी सीटों के फाइनल रिजल्ट चेक किए और पाया कि चार सीटें ऐसी थीं जहाँ बीजेपी पोस्टल बैलट में आगे थी लेकिन फाइनल में कॉन्ग्रेस से हार गई।

                                             चुनाव आयोग द्वारा जारी डाटा का स्क्रीनशॉट

चुनाव आयोग की वेबसाइट के डेटा के मुताबिक जुलाना, हाथिन, नाँगल चौधरी और आदमपुर में बीजेपी पोस्टल बैलट में कांग्रेस से आगे थी। लेकिन अंत में पार्टी कांग्रेस से हार गई।

राहुल गाँधी के दावों पर विचार करते हुए सिर्फ वो उदाहरण चुनना जहाँ कांग्रेस पोस्टल बैलट में आगे थी और जहाँ पीछे थी उन्हें नजरअंदाज करना… जैसा राहुल गाँधी ने किया। यह दिखाता है कि पोस्टल बैलट फाइनल रिजल्ट एनालिसिस के लिए भरोसेमंद आधार नहीं हैं।

फाइनल रिजल्ट एनालिसिस के लिए भरोसेमंद आधार नहीं पोस्टल बैलट

अब जब राहुल गाँधी के दावे गलत साबित हो गए हैं, तो समझना जरूरी है कि पोस्टल बैलट को फाइनल रिजल्ट एनालिसिस का आधार क्यों नहीं बनाया जा सकता। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “दूसरी हैरान करने वाली बात यह थी कि हरियाणा में पहली बार पोस्टल वोट रिजल्ट से अलग थे। पोस्टल बैलट में कांग्रेस को 73 सीटें मिलीं जबकि बीजेपी को 17 सीटें।”

सबसे पहले ज्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में पोस्टल बैलट की संख्या कुल वोटों की तुलना में बहुत कम होती है। ज्यादातर मामलों में यह 1% से भी कम होती है। इसलिए कुल रिजल्ट पर इनका कोई खास असर नहीं पड़ता जब तक जीत-हार का अंतर बहुत कम न हो।

उदाहरण के लिए गुहला सीट पर कुल पोस्टल बैलट 589 थे, जबकि ईवीएम वोट 1,33,287 थे, यानी पोस्टल बैलट सिर्फ 0.44% थे। कांग्रेस के देवेंद्र हंस ने 22,880 वोटों के अंतर से बीजेपी के कुलवंत राम बाजीगर को हराया। ऐसे सीटों पर पोस्टल बैलट का बड़ा रोल बताना बेवकूफी होगी।

उदाहरण के लिए गुहला सीट पर कुल पोस्टल बैलट 589 थे, जबकि ईवीएम वोट 1,33,287 थे, यानी पोस्टल बैलट सिर्फ 0.44% थे। कांग्रेस के देवेंद्र हंस ने 22,880 वोटों के अंतर से बीजेपी के कुलवंत राम बाजीगर को हराया। ऐसे सीटों पर पोस्टल बैलट का बड़ा रोल बताना बेवकूफी होगी।

तीसरे पोस्टल बैलट पहले गिने जाते हैं, लेकिन ये ग्राउंड लेवल वोटर टर्नआउट पैटर्न या बूथों पर देर से होने वाले उछाल को नहीं दिखाते जहाँ लोकल फैक्टर बहुत असर डालते हैं।

‘वोट चोरी’ की कहानी फर्जी

इन उदाहरणों और पोस्टल बैलट की प्रकृति को नजरअंदाज न करें। जिसमें राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ कहानी सिर्फ कहानी ही लगेगी, न कि फैक्ट बेस्ड। वही डेटा पॉइंट्स जिनका वे जिक्र करते हैं, आसानी से उल्टा साबित करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिससे उनका तर्क आँकड़ों के आधार पर भी खोखला हो जाता है।

‘जिंदा जला देंगे’: I Love Muhammad पोस्टर हटाने वाले को ढूँढ रहा RJD प्रत्याशी (ओसामा, शहाबुद्दीन का बेटा) का समर्थक- बिहार से ग्राउंड रिपोर्ट; चुनाव आयोग खामोश क्यों?

   बिहार के सीवान में 'I Love Muhammad' पोस्टर हटाने पर जिंदा जलाने की धमकी (फोटो साभार : Opindia Ground Report Video Snip)

उत्तर प्रदेश के कानपुर से शुरू हुआ ‘I Love Muhammad’ पोस्टर का विवाद देश भर में दंगा, फसाद और हंगामे के बाद भी अब तक शांत नहीं हुआ है। अब भी इस्लामी कट्टरपंथियों के मन में इसे लेकर एक चिंगारी सुलग रही है। बिहार के सिवान में एक शख्स ने ‘ऑपइंडिया’ के कैमरे पर यह दावा किया है कि वो कथित तौर पर ‘I Love Muhammad’ का पोस्टर फाड़ने वाले एक युवक को ढूँढ रहे हैं और मिल गया तो उसे जिंदा जला दंगे।

चुनावी हलचल के दौरान इस तरह की धमकियों का चुनाव आयोग को संज्ञान लेकर सख्त से सख्त से कार्यवाही करनी चाहिए। इस धमकी पर तेजस्वी यादव का भी खामोश रहना दोबारा जंगल राज का खुला सन्देश दे रहे है। इस धमकी के आने पर अगर बिहार की जनता RJD के किसी भी उम्मीदवार को एक भी वोट देती है उसे उनका निकम्मापन ही कहा जाएगा। ये धमकी अपने आपमें बहुत कुछ कह रही है, जिसे बिहार की जनता को बहुत गंभीरता से लेने की जरुरत है। किसी भी मौलाना/मौलवी/मुस्लिम बुद्धिजीवी और  मुस्लिम कट्टरपंथी द्वारा इसका विरोध नहीं करना इस धमकी के पीछे छिपे उपद्रव का इशारा है। जब तक बिहार में योगी बुलडोज़र जैसी कार्यवाही नहीं होगी, दंगाई शांत नहीं होंगे।   

दरअसल, ‘ऑपइंडिया’ की टीम बिहार चुनाव की कवरेज को दौरान सिवान पहुँची थी। इस जिले की रघुनाथपुर सीट पर RJD ने बाहुबली शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब को विधानसभा चुनाव का टिकट दिया है। कवरेज के दौरान हमारी मुलाकात ओसामा शहाब के एक समर्थक से हो गई।

खुली धमकी और शहाबुद्दीन का खौफ

ऑपइंडिया के रिपोर्टर अनुराग मिश्रा से बातचीत में मुस्लिम युवक ने कहा कि “भाईजान (ओसामा) बोले- पोस्टर फाड़ने वाले को जिंदा जला देंगे।” उसने यह भी बताया कि पोस्टर फाड़ने वाले को वे ढूँढ़ रहे हैं और अगर वह मिला तो उसे सीधे शहाबुद्दीन के घर ले जाया जाएगा। युवक ने यह भी कहा कि शहाबुद्दीन के रहते किसी की हिम्मत नहीं होती कि कोई पोस्टर हटा दे।

‘I Love Muhammad’ विवाद कहाँ-कहाँ हुआ था

‘आई लव मुहम्मद’ वाले पोस्टर का विवाद केवल सीवान तक सीमित नहीं है। इससे पहले, इस तरह के पोस्टर कई अन्य राज्यों में भी विवाद का कारण बने हैं। यह विवाद सबसे पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर में शुरू हुआ था, जब बारावफात जुलूस के दौरान ‘I Love Muhammad’ लिखा साइन बोर्ड लगाया गया। इसके बाद यह विवाद यूपी के कानपुर, उन्नाव, बरेली, बागपत, कौशांबी, लखनऊ, महाराजगंज, शाहजहाँपुर तक फैला। इसके अलावा, उत्तराखंड के काशीपुर, महाराष्ट्र के नागपुर, गुजरात के गोधरा, तेलंगाना के हैदराबाद तक हुआ।

सत्ता में आने पर चुनाव आयोग को देख लेने की धमकी दे रहे हैं राहुल गाँधी, ऐसी धमकी को LoP की मानी जाए या किसी सड़क छाप की? कभी केरल में फेक वोटर कार्ड के साथ पकड़े गए थे यूथ कांग्रेस के नेता

                                                                                                                       साभार: दैनिक जागरण
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने गुरुवार (7 अगस्त) को चुनाव आयोग पर वोटर फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें राहुल गाँधी ने सबूतों के नाम पर सिर्फ एक लोकसभा सीट के एक क्षेत्र का डेटा दिखाकर खानापूर्ति करने की कोशिश की और चुनाव आयोग के अधिकारियों को परिणाम भुगतने की धमकी दी। राहुल गाँधी फर्जी वोटरों के जैसे आरोपों के जरिए चुनाव आयोग को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, वैसे ही एक मामले में 2023 में यूथ कॉन्ग्रेस के नेताओं को फर्जी वोटर कार्ड के साथ गिरफ्तार किया गया था।
समझ नहीं आता ये LoP कब गंभीर होगा? वाकई विरासत में पार्टी में स्थान तो मिल सकता है लेकिन अक्ल नहीं। और ये LoP जितना ज्यादा उल्टा-पुल्टा बोलता रहेगा बीजेपी उतनी मजबूत होती जाएगी और ये अपनी पार्टी के साथ-साथ INDI गठबंधन को लेकर डूबेगा। समझ नहीं आता वामपंथी को बुद्धिजीवियों की पार्टी कहा जाता है क्या उनकी भी बुद्धि भी भ्रष्ट हो गयी है? क्या INDI में कोई राहुल को रोकने वाला नहीं? कांग्रेस को तो मान लिया अब कांग्रेस कोई पार्टी नहीं गुलामों का एक समूह है। जिस मुद्दे पर संसद से बाहर हंगामा(उपद्रव) किया जा रहा है वही सवाल संसद के पटल पर रखे जा सकते है, लेकिन हंगामा कर जनता को गुमराह किया जा रहा है। दूसरे, जो मुद्दे उठाये जा रहे हैं SIR में इसी काम को किया जा रहा है।           

EC के अधिकारियों को धमकाते हुए क्या बोले राहुल गाँधी?

राहुल गाँधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई ऐसे दावे किए जिनका तथ्यों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। हालाँकि, चुनाव आयोग के अधिकारियों को धमकाने में राहुल गाँधी ने कोई कसर नहीं छोड़ी, उन्होंने अधिकारियों को धमकाते हुए कहा कि आयोग को अब उन्हें और देश के लोगों को जानकारी देनी ही होगी।

राहुल ने आगे कहा, “अगर वे जानकारी नहीं देते हैं तो उन्हें परिणाम भुगतने होंगे। इसमें शामिल हर पोलिंग अधिकारी को परिणाम भुगतने होंगे, चाहे वो सीनियर हो या जूनियर। एक दिन विपक्ष सत्ता में आएगा और तब आप देखेंगे कि हम क्या करेंगे।”

जब फर्जी वोटर आईडी के साथ गिरफ्तार हुए यूथ कांग्रेस के नेता

राहुल गाँधी की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के केंद्र में फर्जी वोटरों से जुड़ा मुद्दा ही रहा। हालाँकि, जैसे फर्जी वोटरों के मामले में राहुल गाँधी चुनाव आयोग को अब घेरना चाहते हैं, वैसे ही एक मामले में उनकी पार्टी की युवा इकाई यूथ कांग्रेस के नेताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है।

नवंबर 2023 में केरल में यूथ कांग्रेस के नेता विक्रम, फैनी और बिनिल बीनू को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था। इन तीनों ने यूथ कांग्रेस के संगठन के चुनावों में मोबाइल ऐप की मदद से फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनाए थे। यह ऐप यूथ कांग्रेस के नेता जैसन द्वारा बनाई गई थी और उसने भी पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था।

इन संगठन चुनावों में यूथ कांग्रेस के नेता राहुल ममकोटातिल को राज्य इकाई का अध्यक्ष चुना गया था। बाद में पुलिस ने उससे भी पूछताछ की थी। पुलिस ने यूथ कांग्रेस के नेताओं के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन और चुनाव के फर्जी आईडी कार्ड जब्त किए थे। चुनाव आयोग के एक अधिकारी की शिकायत पर यह केस दर्ज किया गया था।

पुलिस ने रेड के दौरान तब 24 फर्जी आईडी कार्ड बरामद किए थे जिनमें तमिल ऐक्टर अजित का फर्जी वोटर आईडी कार्ड भी शामिल थी। बीजेपी ने तब आरोप लगाया था कि इस मामले की जानकारी केसी वेणुगोपाल जैसे बड़े कांग्रेस नेताओं को भी थी।

बिहार : SIR से अभी ‘पूर्ण स्वच्छ’ नहीं हुआ है वोटर लिस्ट? चुनाव आयोग ने 65 लाख ‘मुर्दा-फ्रॉड-घुसपैठिए’ पहचाने, IIM प्रोफेसरों के रिसर्च ने 77 लाख ‘फर्जी मतदाताओं’ का लगाया है अनुमान

                  बिहार के वैशाली जिले वोटर पुनरीक्षण अभियान में लगे BLO (फोटो साभार: CEOBihar/X)
बिहार में चुनाव आयोग की ओर से चलाए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान का पहला चरण पूरा हो चुका है। 24 जून से 25 जुलाई 2025 तक चले इस अभियान के दौरान राज्य के कुल 7.89 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 7.24 करोड़ ने अपने फॉर्म जमा किए, जो कुल का 91.69% है।

लेकिन इस प्रक्रिया में करीब 65 लाख मतदाताओं के नामों पर सवाल उठे हैं, जिनमें से 36 लाख का कोई अता-पता नहीं है, 22 लाख की मौत हो चुकी है और 7 लाख नामों में दोहराव पाया गया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये आँकड़े अंतिम नहीं हैं, क्योंकि 1 अगस्त से 1 सितंबर तक दावे और आपत्तियाँ स्वीकार की जाएँगी।

इसी बीच, आईआईएम के दो प्रोफेसरों की हालिया स्टडी ने दावा किया है कि बिहार की वोटर लिस्ट में असली फर्जीवाड़ा 77 लाख तक हो सकता है, जो SIR के नतीजों से भी ज्यादा है। इससे सवाल उठता है कि क्या चुनाव आयोग ने अब तक कोई कड़ा कदम उठाया है?

इसी बीच, आईआईएम के दो प्रोफेसरों की हालिया स्टडी ने दावा किया है कि बिहार की वोटर लिस्ट में असली फर्जीवाड़ा 77 लाख तक हो सकता है, जो SIR के नतीजों से भी ज्यादा है। इससे सवाल उठता है कि क्या चुनाव आयोग ने अब तक कोई कड़ा कदम उठाया है?

चुनाव आयोग की प्रेस नोट के मुताबिक, SIR का मुख्य उद्देश्य सभी योग्य मतदाताओं को शामिल करना और कोई भी पात्र व्यक्ति को छूटने न देना था। राज्य में 38 जिलों, 243 विधानसभा क्षेत्रों और 77,855 पोलिंग बूथों पर यह अभियान चलाया गया।

                                      चुनाव आयोग ने दिए ये आँकड़े (फोटो साभार: चुनाव आयोग)

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) बिहार, जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO), असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की टीम ने घर-घर जाकर फॉर्म बांटे और कम से कम तीन बार विजिट की। इसके अलावा 12 प्रमुख राजनीतिक दलों के 1.60 लाख बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। BLA की संख्या SIR के दौरान 18% बढ़ गई, जो दलों की भागीदारी को दर्शाता है।

आयोग ने विशेष रूप से प्रवासी, शहरी और युवा मतदाताओं पर फोकस किया। प्रवासियों के लिए हिंदी में पूरे देश के 246 अखबारों में विज्ञापन दिए गए, जिनकी कुल सर्कुलेशन 2.60 करोड़ थी। साथ ही, CEO बिहार ने अन्य राज्यों के CEO को पत्र लिखकर बिहार के प्रवासियों तक पहुँचने का अनुरोध किया। प्रवासियों ने ऑनलाइन पोर्टल voters.eci.gov.in या ECI ऐप के जरिए 16 लाख फॉर्म भरे, जबकि 13 लाख ने फॉर्म डाउनलोड किए।

हरी इलाकों में विशेष कैंप लगाए गए और युवाओं (18-19 साल) को शामिल करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए गए। कुल 5.7 करोड़ मोबाइल नंबरों पर SMS भेजे गए और राजनीतिक दलों के साथ कई मीटिंग्स हुईं। BLO ने BLA के साथ बूथ लेवल मीटिंग्स कीं और BLA को प्रति दिन 50 फॉर्म जमा करने की अनुमति दी गई।

आईआईएम के 2 प्रोफेसरों के रिसर्च पेपर में आँकड़े अलग

लेकिन SIR के इन नतीजों से ठीक पहले जुलाई 2025 में आईआईएम कलकत्ता के पूर्व छात्र और वर्तमान प्रोफेसर डॉ. विदु शेखर (एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च) और डॉ. मिलन कुमार (आईआईएम विशाखापत्तनम) की स्टडी ने बड़ा खुलासा किया। “Estimating Legitimate Voter Numbers in Bihar (2025): A Demographic and Migration-Based Reconstruction” नाम की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिहार में असली योग्य मतदाताओं की संख्या सिर्फ 7.12 करोड़ हो सकती है, जबकि आधिकारिक रोल में 7.89 करोड़ हैं। यानी 77 लाख (9.7%) का अंतर है।

यह स्टडी डेमोग्राफिक और माइग्रेशन डेटा पर आधारित है, जिसमें 2003 के वोटर लिस्ट से सर्वाइवर्स, 1985-2007 में जन्मे नए वोटर्स और 2003-2025 के बीच पर्मानेंट आउटमाइग्रेशन को कैलकुलेट किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2003 में 4.6 करोड़ वोटर्स थे, जिनमें से 2025 तक सिर्फ 4.1 करोड़ जिंदा बचे हैं (मोर्टैलिटी रेट को ध्यान में रखकर)। 1985-2007 में जन्मे नए वोटर्स 4.83 करोड़ हैं। लेकिन पर्मानेंट आउटमाइग्रेशन (अन्य राज्यों में स्थाई रूप से बस जाना) 1.12 करोड़ है, जो मुख्य रूप से रोजगार, शादी और फैमिली मूवमेंट के कारण है।

                                                     फोटो साभार: रिसर्च पेपर का स्क्रीनशॉट

स्टडी ने 2011 की जनगणना, जीवित बचे लोगों की अनुमानित संख्या और अन्य सरकारी विभागों के डेटा का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट कहती है कि वोटर लिस्ट में इन्फ्लेशन की वजहें हैं- माइग्रेंट्स का नाम नहीं हटना, डुप्लिकेट एंट्रीज और अनडॉक्यूमेंटेड रजिस्ट्रेशन। स्टडी ने कंजर्वेटिव एस्टिमेट्स इस्तेमाल किए, जैसे माइग्रेशन रेट को 2011 के बाद नहीं बढ़ाया, ताकि आँकड़ा ज्यादा न लगे।

SIR के 65 लाख संदिग्ध नामों और आईआईएम स्टडी के 77 लाख के अंतर को जोड़कर देखें, तो साफ है कि समस्या गहरी है। SIR में 36 लाख लापता, 22 लाख मृत और 7 लाख डुप्लिकेट पाए गए, लेकिन स्टडी कहती है कि ये संख्या और बड़ी हो सकती है, क्योंकि माइग्रेशन को पूरी तरह अकाउंट नहीं किया गया।

उदाहरण के लिए, बिहार से हर साल लाखों लोग दिल्ली, मुंबई, गुजरात जैसे राज्यों में जाते हैं, लेकिन उनका नाम लिस्ट से नहीं हटता। इससे डबल रजिस्ट्रेशन होता है और चुनाव में फ्रॉड का खतरा बढ़ता है।

                                                             फोटो साभार: रिसर्च पेपर का स्क्रीनशॉट

बिना आदेश के नहीं हटाए जाएँगे नाम

बता दें कि चुनाव आयोग ने SIR के 10 उद्देश्यों का जिक्र किया है, जिनमें सभी मतदाताओं की भागीदारी, कोई पात्र न छूटे, प्रवासियों और युवाओं को शामिल करना शामिल है। आयोग ने दावा किया कि हर शिकायत का व्यक्तिगत समाधान किया गया, चाहे वो प्रिंट, टीवी या सोशल मीडिया से आई हो। अब 1 अगस्त को ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल जारी होगा, जो सभी दलों को प्रिंट और डिजिटल फॉर्म में दिया जाएगा। CEO की वेबसाइट पर भी यह उपलब्ध होगा।

1 अगस्त से 1 सितंबर तक कोई भी व्यक्ति या दल फॉर्म भरकर नाम जोड़ने या हटाने की अपील कर सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई नाम ड्राफ्ट रोल से बिना नोटिस और ERO/AERO के स्पष्ट आदेश के नहीं हटाया जा सकता। अगर कोई असंतुष्ट होता है, तो वो डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या CEO के पास अपील कर सकता है। अपील के लिए स्टैंडर्ड फॉर्म तैयार किया जा रहा है और वॉलंटियर्स को ट्रेनिंग दी जाएगी।

चुनाव आयोग ने SIR को एक बड़ा कदम बताया है, लेकिन अब तक कोई हार्ड स्टेप नहीं दिख रहा। जैसे, मृतकों और लापता वोटर्स को तुरंत हटाने के लिए कोई सख्त डेडलाइन नहीं है।

रिसर्च में सुझाव दिया गया है कि डेमोग्राफिक मॉडलिंग को इलेक्टोरल प्रशासन में शामिल किया जाए। राजनीतिक दलों ने भी SIR की सराहना की, लेकिन कुछ ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में BLO की पहुँच कम थी। विपक्षी दलों ने माँग की है कि ड्राफ्ट रोल में पारदर्शिता बरती जाए।

कुल मिलाकर SIR एक सकारात्मक कदम है, लेकिन आईआईएम स्टडी से साफ है कि बिहार की वोटर लिस्ट में सुधार की जरूरत और गहरी है। अगर 77 लाख फर्जी नाम रह गए, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे। आयोग को अब माइग्रेशन डेटा को लिंक करने और Aadhaar जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए। 1 अगस्त का ड्राफ्ट रोल देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि ये तय करेगा कि बिहार के लोकतंत्र में कितने ‘भूत’ वोटर्स बचे हैं।

विदेशी-घुसपैठिए ही नहीं, बिहार में 12.5 लाख ऐसे भी वोटर जो अब नहीं हैं जिंदा: 35.5 लाख लोगों को लिस्ट से बाहर करेगा चुनाव आयोग

                                                                      बिहार में वोटर वैरिफिकेशन जारी ( फोटो साभार- X @ECI)
बिहार में वोटर वेरिफिकेशन का काम जोर शोर से चल रहा है। अब तक करीब 7.90 करोड़ लोगों में से 6.60 करोड़ मतदाताओं का गणना फॉर्म जमा कराया जा चुका है यानी करीब 88 फीसदी मतदाताओं का वेरिफिकेशन हो चुका है। अब तक 5.74 करोड़ फॉर्म चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है। बीएलओ अभी भी घर-घर जाकर फॉर्म जमा कर रहे हैं और 963 एईआरओ लगातार इस पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।

चुनाव आयोग ने कहा, “करीब 1 लाख बीएलओ जल्द ही घर-घर जाकर तीसरे राउंड का दौरा शुरू करेंगे। सभी राजनीतिक दलों के 1.5 लाख बूथ-स्तर के एजेंट हर दिन 50 मतदाता पहचान पत्र सत्यापित और जमा कर सकते हैं। बिहार के 261 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के सभी 5,683 वार्डों में विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं ताकि कोई भी मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल होने से वंचित न रह जाए”

                                                                                                              (ग्राफिक्स साभार- न्यूज 18)

किसके नाम कटे हैं?

अब तक की कवायद में ही करीब 35.50 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं जिनमें मृतकों के नाम, डुप्लिकेट मतदाता या प्रवासियों के नाम शामिल हैं। इनमें 1.59 फीसदी मृत मतदाता, 2.2 फीसदी स्थायी रूप से राज्य से बाहर गए मतदाता, 0.73 फीसदी ऐसे मतदाता हैं जिन्होंने एक से अधिक जगहों पर अपना नाम वोटर लिस्ट में रखा हुआ है। ये पूरा आँकड़ा 4.52 फीसदी है जिसे संख्या के हिसाब से बात की जाए तो ये 35.69 लाख से ज्यादा हैं।

चुनाव आयोग को नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों के कुछ विदेशी नागरिक भी मिले, जो मतदाता के रूप में पंजीकृत थे। जाँच के बाद उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएँगे।

राज्य से बाहर रहने वाले मतदाता ऐसे भरें फॉर्म

जो मतदाता अस्थायी रूप से राज्य से बाहर हैं, उनसे या तो सीधे संपर्क किया जा रहा है या उन्हें अखबारों में विज्ञापन देकर जानकारी दी है ताकि वे अपने गणना फॉर्म भर सकें।

चुनाव आयोग ने कहा, “अस्थायी रूप से राज्य से बाहर रहने वाले मतदाता अपने मोबाइल फोन का उपयोग करके ECINet ऐप या https://voters.eci.gov.in पर ऑनलाइन गणना फॉर्म भर सकते हैं। अगर उनके परिवार का कोई सदस्य राज्य में मौजूद है तो व्हाट्सएप या किसी अन्य माध्यम से एप्लिकेशन फॉर्म लेकर ऑनलाइन BLO को भेज सकते हैं।”

चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर कोई गलती सुधारना चाहता है या कोई अपडेट करना चाहता है तो ऑनलाइन कर सकता है।

विपक्ष पहुँचा सुप्रीम कोर्ट

बिहार में मतदाता सूची संशोधन का विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है। इसको लेकर चुनाव आयोग भी विपक्ष के निशाने पर है। महुआ मोइत्रा, योगेंद्र यादव, मनोज झा और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) सहित कई विपक्षी नेताओं और संगठनों ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग ने नागरिकों पर ही पहचान साबित करने का भार डाल दिया है। राज्य में प्रवासियों की संख्या और गरीबी को देखते हुए ये गलत है। चुनाव आयोग ने जिन दस्तावेजों की माँग की है इससे लाखों मतदाता वोटिंग प्रक्रिया से वंचित रह जाएँगे। उन्होंने मतदाता प्रमाण पत्र के रूप में आधार कार्ड को शामिल नहीं करने पर भी सवाल उठाए।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (10 जुलाई 2025) को एसआईआर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हालाँकि सुझाव दिया कि चुनाव आयोग आधार कार्ड, ईपीआईसी कार्ड और राशन कार्ड को भी पहचान पत्र के लिए शामिल करे। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

सीमांचल राज्यों में मिले थे जनसंख्या से ज्यादा आधार कार्ड

बिहार के सीमांचल 4 जिलों कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज और अररिया में आधार कार्ड की संख्या आबादी से अधिक मिली है। इन सीमांचल इलाकों में 100 लोगों पर 120-126 आधार कार्ड मिले हैं। इससे आधार कार्ड की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठ गए हैं। ऐसे में आधार कार्ड को पहचान पत्र में शामिल नहीं करने के फैसले पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया है कि 2025 में जनवरी से मई तक हर महीने औसतन 26 हजार से लेकर 28 हजार आवेदन निवास प्रमाण पत्र के लिए किशनगंज में आ रहे थे। उन्होंने बताया कि जैसे ही चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया चालू हुई यह संख्या तेजी से बढ़ गई।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि जुलाई के 6 दिनों में ही निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 1.28 लाख से अधिक आवेदन किशनगंज में आ गए। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि किशनगंज में घुसपैठिए बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

बिहार : वोटर लिस्ट में मिले घुसपैठियों के नाम, बांग्लादेश-नेपाल-म्यांमार से आकर बनाई फर्जी पहचान: EC सबको करेगा बाहर, राज्य में कुल 7.89 करोड़ वोटर

                            बेगूसराय में SIR करते चुनाव आयोग से जुड़े कर्मी (फोटो साभार: FB/BIHARCEO)
बिहार में चल रही विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) ने एक बड़ी खोज की है। उन्होंने चुनावी सूची में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए कई लोगों के नाम पाए हैं। चुनाव आयोग के सूत्रों ने रविवार (13 जुलाई 2025) को बताया कि जाँच के बाद इन नामों को अंतिम सूची से हटाया जा सकता है। यह खबर ऐसे समय आई है जब बिहार में मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने का काम जोरों पर है।

सूत्रों के मुताबिक, नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों के नाम 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित होने वाली अंतिम चुनावी सूची में शामिल नहीं किए जाएँगे। लेकिन यह फैसला 1 अगस्त 2025 के बाद ठीक से जाँच करने के बाद ही लिया जाएगा। अभी तक चुनाव आयोग ने ऐसे कितने मतदाताओं की संख्या नहीं बताई है।

यह पता चला है कि बीएलओ घर-घर जाकर लोगों से नामांकन फॉर्म बाँट रहे थे और इकट्ठा कर रहे थे। यह फॉर्म उन मतदाताओं के लिए हैं जो 24 जून 2025 तक वोटर के रूप में रजिस्टर्ड हो चुके हैं। बिहार में कुल करीब 7.89 करोड़ वोटर हैं। यह पूरी प्रक्रिया मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए चलाई जा रही है।

एसआईआर के टाइमलाइन के अनुसार, लोग अपनी नागरिकता और जन्म तिथि साबित करने वाले दस्तावेज 25 जुलाई तक जमा कर सकते हैं। अगर कोई 25 जुलाई तक दस्तावेज नहीं दे पाता, तो उसके पास 30 अगस्त तक का समय है, जब दावे और आपत्तियाँ दाखिल करने की आखिरी तारीख है। 1 अगस्त को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होगी, जिसमें शामिल होने के लिए नामांकन फॉर्म जमा करना जरूरी है। अगर फॉर्म बिना दस्तावेज के जमा किया गया, तो 30 अगस्त तक दस्तावेज देकर अंतिम सूची में नाम शामिल करवाया जा सकता है।

इसके लिए इन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी-

  • मान्यता प्राप्त बोर्ड या विवि द्वारा निर्गत शैक्षिक प्रमाण पत्र
  • जाति प्रमाण पत्र
  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी)
  • पासपोर्ट
  • राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकार द्वारा तैयार पारिवारिक रजिस्टर
  • बैंक, डाकघर, एलआईसी आदि द्वारा 1 जुलाई 1987 के पूर्व निर्गत किया गया कोई भी प्रमाण पत्र
  • वन अधिकार प्रमाण पत्र
  • नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी कर्मियों का पहचान पत्र
  • स्थाई निवास प्रमाण पत्र
  • सरकार की कोई भी भूमि या मकान आवंटन का प्रमाण पत्र
  • सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत जन्म प्रमाण पत्र
विपक्षी पार्टियों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह अभियान गरीबों और प्रवासी मजदूरों को वोट से वंचित करने की साजिश है। वे दावा करते हैं कि कई गरीब लोग दस्तावेज जमा करने में मुश्किल महसूस करते हैं, जिससे उनका नाम सूची से कट सकता है। चुनाव आयोग ने कहा है कि यह सिर्फ सही मतदाताओं को सुनिश्चित करने के लिए है, ताकि फर्जी नाम न रहें।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार जैसे बड़े राज्य में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहते हैं। नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोग अक्सर सीमा पार करके भारत में रहते हैं और काम करते हैं। लेकिन वोटर बनने के लिए भारतीय नागरिकता जरूरी है। अगर जाँच में साबित हो गया कि ये लोग विदेशी हैं, तो उनके नाम हटाए जाएँगे। चुनाव आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे समय पर दस्तावेज जमा करें, ताकि कोई समस्या न आए।

बेलगाम LoP राहुल गाँधी महाराष्ट्र चुनाव के नाम पर कब तक ‘गंध’ फैलाते रहेंगे? कोर्ट से लेकर EC तक, हर जगह मुँह की खाई : संविधान के मूल स्वरुप को बिगाड़ कर संविधान बचाने का स्वांग कर जनता को गुमराह किया जा रहा है; कितनी बार आग पर चढ़ेगी काठ की हाँडी?


‘आप किसी सोते हुए व्यक्ति को जगा सकते हैं, लेकिन जो जागते हुए सोने का नाटक कर रहा हो, उसे नहीं जगा सकते’ यह कहावत मौजूदा भारतीय राजनीतिक परिदृश्य पर बिल्कुल सटीक बैठती है।

LoP राहुल गाँधी जितना ज्यादा बेलगाम रहेंगे कांग्रेस ही नहीं INDI गठबंधन के भी नासूर बन रहे हैं। खटाखट के चक्कर में अगर 99 सीटें आ गयीं का यह मतलब नहीं कि बार-बार आग पर नहीं चढ़ेगी काठ की हाँडी। आज अब तक छुपा कांग्रेस का चुनावों का काला इतिहास सामने आने से कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा गिरना शुरू हो चूका है, जिस पर सोने पर सुहागे का काम कांग्रेस द्वारा संविधान में छेड़छाड़ कर उसके मूल स्वरुप को ही बिगाड़ दिया फिर रोते फिर रहे संविधान की रक्षा करने के लिए साथ दो। आज कांग्रेस ही नहीं पूरा INDI गठबंधन राष्ट्र को बताए कि आज जो संविधान है यह वही संविधान जिसे निर्माताओं ने लिखा था? सिर्फ मुस्लिम वोटों की खातिर संविधान का मूल स्वरुप ही बिगाड़ कर संविधान बचाने का स्वांग कर जनता को गुमराह किया जा रहा है।  

खैर, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पिछली हार के बाद से कांग्रेस पार्टी लगातार ईवीएम और वीवीपैट में गड़बड़ी के आरोप लगा रही है। विशेष रूप से राहुल गाँधी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बार-बार सवाल उठा रहे हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि शाम 6 बजे के बाद डाले गए लगभग 76 लाख वोटों की वैधता संदिग्ध है और उनका इशारा साफ है कि चुनाव आयोग ने बीजेपी गठबंधन को अनुचित लाभ पहुँचाया।

चुनाव आयोग ने 2024 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विपक्ष के नेता राहुल गाँधी को बातचीत के लिए आमंत्रित किया। इसके जवाब में कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार (26 जून 2025) को एक आधिकारिक पत्र भेजा।

पत्र में कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने दो प्रमुख माँग रखी। इसमें महाराष्ट्र की मतदाता सूची की मशीन से पढ़े जाने वाली डिजिटल कॉपी और महाराष्ट्र और हरियाणा में मतदान दिवस के वीडियो फुटेज शामिल था। कांग्रेस ने अनुरोध किया कि यह डेटा उन्हें पत्र की तारीख से एक सप्ताह के भीतर ही उपलब्ध कराया जाए।

पार्टी ने कहा कि यह कोई नया अनुरोध नहीं है, बल्कि लंबे समय से किया जा रहा है, जिसे चुनाव आयोग के लिए पूरा करना कठिन नहीं होना चाहिए। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें जैसे ही ये जानकारियाँ प्राप्त होगी, वे चुनाव आयोग से मिलने को तैयार हैं और उस बैठक में अपने डेटा विश्लेषण के निष्कर्ष भी पेश करेंगे।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने 288 में से 235 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी। इससे कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना (यूबीटी) के गठबंधन- महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को बड़ा झटका लगा।

चुनाव के नतीजों के बाद कॉन्ग्रेस लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग से महाराष्ट्र समेत सभी राज्यों के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए एक साथ डिजिटल और मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूची प्रकाशित करने की माँग की। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को ‘सच बोलकर’ अपनी विश्वसनीयता को बनाए रखना चाहिए।

राहुल गाँधी ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्वाचन क्षेत्र में सिर्फ पाँच महीनों में मतदाता सूची में 8 प्रतिशत की अचानक बढ़ोतरी हुई, जिसे उन्होंने ‘वोट चोरी’ करार दिया।

उन्होंने एक्स पर लिखा कि कुछ मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या में 20 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) ने अज्ञात लोगों द्वारा वोट डालने की शिकायत की है और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हजारों वोटर्स ऐसे पाए गए जिनके पते ही सत्यापित नहीं थे।

राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “और चुनाव आयोग? चुप्पी या फिर मिलीभगत। ये गड़बड़ियाँ अलग-थलग नहीं हैं, यह साफ तौर पर वोट चोरी है और जब गड़बड़ियों को छिपाया जाता है तो वह खुद एक कबूलनामा बन जाता है।” उन्होंने चुनाव आयोग से मशीन से तत्काल पढ़ी जा सकने वाली डिजिटल मतदाता सूची और सीसीटीवी फुटेज जारी करने की माँग की है।

कांग्रेस पार्टी न्यूजलॉन्ड्री की हाल ही में छपी एक रिपोर्ट के आधार पर चुनाव में बड़े स्तर पर धांधली के आरोप लगा रही है। राहुल गाँधी ने इस रिपोर्ट का हवाला देकर दावा किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्वाचन क्षेत्र नागपुर पश्चिम में महज पाँच महीनों में 29,219 नए मतदाता जोड़े गए। रिपोर्ट के अनुसार, यह आँकड़ा प्रतिदिन औसतन 162 नए मतदाताओं का है, जो कुल मिलाकर 8.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि नागपुर पश्चिम के 378 बूथों में से 263 बूथों पर मतदाताओं की संख्या में 4 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई। इनमें से 26 बूथों पर 20 प्रतिशत से ज्यादा और 4 बूथों पर 40 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई।

इन दावों के आधार पर कांग्रेस चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रही है और इसे ‘वोट चोरी’ और ‘साजिश’ का हिस्सा बता रही है, जबकि अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग इन गड़बड़ियों पर चुप्पी साधे हुए है। दूसरी ओर आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भरोसा जताया है।

राहुल गाँधी ने हाल ही में चुनाव आयोग पर हमला करते हुए जो एक्स पोस्ट लिखा था, उसमें न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था

न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट के आधार पर राहुल गाँधी द्वारा लगाए गए आरोपों का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट रूप से खंडन किया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सिर्फ नागपुर पश्चिम ही नहीं, बल्कि 25 से ज्यादा ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं जहाँ लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मतदाताओं की संख्या में 8% से ज्यादा की वृद्धि हुई है और इनमें से कई सीटों पर कॉन्ग्रेस ने जीत हासिल की है।

फडणवीस ने राहुल गाँधी को सीधे संबोधित करते हुए कहा, “राहुल गाँधी जी, मैं समझता हूँ कि महाराष्ट्र में मिली करारी हार का दर्द दिन-ब-दिन बढ़ रहा है, लेकिन आप कब तक बिना तथ्यों के हवा में तीर चलाते रहेंगे?” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नागपुर पश्चिम से सटे दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में 7% यानी 27,065 मतदाता बढ़े, और वहाँ से कॉन्ग्रेस के विकास ठाकरे जीते।

इसी तरह, उत्तर नागपुर में 7% (29,348) मतदाता बढ़े और वहाँ भी कांग्रेस के नितिन राउत विजयी रहे। पुणे जिले के वडगाँव शेरी में 10% (50,911) मतदाता बढ़े और वहाँ शरद पवार गुट के बापूसाहेब पठारे ने जीत दर्ज की। मालाड पश्चिम में 11% (38,625) और मुंब्रा में 9% (46,041) मतदाता बढ़े, जहाँ कांग्रेस के असलम शेख और शरद पवार गुट के जितेंद्र आव्हाड ने जीत हासिल की।

फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गाँधी को कम से कम ट्वीट करने से पहले अपनी ही पार्टी के नेताओं से बात कर लेनी चाहिए थी। इससे कांग्रेस के अंदर की संवादहीनता इतनी साफ तौर पर उजागर न होती।

झूठ, चिल्लाहट, माँगें: कॉन्ग्रेस का तरीका या लोकतंत्र खतरे में?

राहुल गाँधी ने पहले भी चुनाव आयोग की पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह आरोप लगाया कि आयोग सबूत नष्ट कर रहा है, जिसमें 45 दिनों की सीसीटीवी फुटेज भी शामिल है।

राहुल गाँधी ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, “वोटर लिस्ट? मशीन-पठनीय प्रारूप नहीं मिलेगा। सीसीटीवी फुटेज? कानून बदलकर उसे छिपा दिया गया। चुनाव की फोटो और वीडियो? अब 1 साल नहीं, सिर्फ 45 दिनों में नष्ट कर दी जाएँगी। जिससे जवाब चाहिए था, वही सबूत नष्ट कर रहा है। यह साफ है, मैच फिक्स है। और फिक्स चुनाव लोकतंत्र के लिए जहर है।”

राहुल गाँधी ने माँग की कि मतदान केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाए। हालाँकि चुनाव आयोग ने इस माँग को खारिज करते हुए कहा कि मतदान केंद्रों की वेबकास्टिंग फुटेज सार्वजनिक करना मतदाताओं की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

चुनाव आयोग ने कांग्रेस पार्टी की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की माँगें दिखने में तो लोकतांत्रिक पारदर्शिता के लिए लगती हैं, लेकिन इनका असली मकसद उल्टा है। आयोग के अनुसार, राहुल गाँधी जैसे नेता चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर फुटेज जारी करवाना चाहते हैं ताकि मतदाताओं और गैर-मतदाताओं की पहचान की जा सके।

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि अगर किसी पार्टी को किसी बूथ पर कम वोट मिले हों, तो वो सीसीटीवी फुटेज से यह पता लगा सकती है कि किसने वोट डाला और किसने नहीं। इससे मतदाताओं की पहचान उजागर हो सकती है और उन्हें डराया-धमकाया जा सकता है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि सीसीटीवी फुटेज को सिर्फ 45 दिनों तक इसलिए रखा जाता है क्योंकि यही चुनाव याचिका दाखिल करने की कानूनी अवधि होती है। यह फुटेज सिर्फ आंतरिक प्रशासनिक जरूरतों के लिए होती है। यदि किसी ने 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दाखिल की हो, तो फुटेज सहेजा जाता है और कोर्ट के आदेश पर उपलब्ध कराया जा सकता है।

चुनाव आयोग ने कहा कि 45 दिनों से अधिक समय तक यह फुटेज रखने से इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है, जैसे झूठी सूचनाएँ फैलाना या राजनीतिक साजिश रचना। इसलिए सुरक्षा, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अखंडता बनाए रखने के लिए यह नीति अपनाई गई है।

कांग्रेस नेता ने शिरडी में 7,000 फर्जी वोटर का दावा किया, झूठ पकड़ा गया

इस साल फरवरी में संसद में बोलते हुए राहुल गाँधी ने एक और गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि पिछले लोकसभा चुनाव के बाद सिर्फ पाँच महीनों में महाराष्ट्र के शिरडी निर्वाचन क्षेत्र की एक ही इमारत से 7,000 फर्जी मतदाता पंजीकृत किए गए थे। उनका कहना था कि एक सामान्य पते का उपयोग कर वोटर लिस्ट में गलत तरीके से नाम जोड़े गए।

हालाँकि बाद में जाँच से पता चला कि राहुल गाँधी का यह दावा काफी हद तक भ्रामक था। असल में यह संख्या 7,000 नहीं, करीब 3,000 थी और वह भी किसी एक इमारत से नहीं। ये मतदाता शिरडी सीट के तहत आने वाले लोनी शहर के छात्रावासों में रहने वाले छात्र थे। इन छात्रों ने अपने कॉलेज या छात्रावास का पता मतदाता पंजीकरण फॉर्म में दिया था, जो पूरी तरह से वैध है।

इस मामले में और जानकारी देते हुए अहमदनगर के जिला कलेक्टर सिद्धराम सलीमथ ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब किसी राजनीतिक दल ने शिकायत की, तो उन्होंने चुनाव आयोग को स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि लोनी क्षेत्र में कई शैक्षणिक संस्थान हैं और नए मतदाता उन्हीं संस्थानों के छात्र हैं, जो छात्रावासों में रहते हैं।

कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई व्यक्ति 18 वर्ष से अधिक आयु का है और उसके पास वैध दस्तावेज हैं, तो वह यह चुन सकता है कि उसे कहाँ से वोट डालना है। छात्र चूंकि छात्रावास में रह रहे थे, इसलिए उनके कॉलेज के प्रवेश पत्रों को निवास प्रमाण के रूप में स्वीकार किया गया।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि यह सुनिश्चित करने के लिए गहराई से जाँच की गई कि कोई भी मतदाता दो बार पंजीकृत न हो, लेकिन ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं मिली। इस तरह राहुल गाँधी का यह दावा भी तथ्यों की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका और भ्रामक साबित हुआ।

राहुल गाँधी ने अमेरिका यात्रा में महाराष्ट्र चुनाव के 65 लाख फर्जी वोटों पर झूठ बोला

अप्रैल 2025 में अमेरिका की दो दिवसीय यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को जीत दिलाने के लिए चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई। उन्होंने दावा किया, ‘सिस्टम में कुछ बहुत गड़बड़ है।’

राहुल गाँधी ने उदाहरण देते हुए कहा कि शाम 5:30 बजे तक चुनाव आयोग ने जो वोटिंग डेटा दिया, उसके बाद सिर्फ दो घंटों यानी 5:30 से 7:30 बजे के बीच में अचानक 65 लाख नए वोट जुड़ गए। उन्होंने इस आँकड़े को असंभव बताया और कहा, “हमारे लिए यह बिल्कुल साफ है कि चुनाव आयोग ने समझौता किया है। महाराष्ट्र में जितने वयस्क हैं, उससे ज्यादा लोगों ने मतदान किया।”

उन्होंने आगे कहा कि एक व्यक्ति को वोट डालने में औसतन 3 मिनट लगते हैं और अगर इतने कम समय में इतने सारे वोट पड़े होते, तो दोपहर 2 बजे तक भी मतदान केंद्रों पर लंबी लाइनें होनी चाहिए थीं लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

राहुल गाँधी ने यह भी आरोप लगाया कि जब उनकी पार्टी ने चुनाव की वीडियोग्राफी की माँग की, तो न केवल चुनाव आयोग ने इस माँग को खारिज कर दिया, बल्कि बाद में कानून भी ऐसा बना दिया गया जिससे अब पार्टियाँ वीडियोग्राफी की माँग भी नहीं कर सकती।

इंडियन एक्सप्रेस ने राहुल गाँधी को महाराष्ट्र और लोकसभा चुनावों पर झूठ फैलाने का मंच दिया

राहुल गाँधी ने जून 2025 में द इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिखा, जिसमें उन्होंने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार को ‘औद्योगिक पैमाने’ पर धांधली का नतीजा बताने की कोशिश की। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया, चुनाव आयोग और मतदाता पंजीकरण से लेकर मतदान प्रतिशत तक लगभग हर पहलू पर सवाल उठाए।

गाँधी ने न सिर्फ चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर शक जताया, बल्कि मतदाता पंजीकरण में हुए इजाफे को भी संदिग्ध बताया। उन्होंने दावा किया कि मतदान में अचानक हुई बढ़ोतरी असामान्य थी और बिना किसी ठोस आधार के लोकसभा और विधानसभा चुनाव नतीजों को एक साथ जोड़कर दोनों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को धांधली से जोड़ा।

उनकी पूरी कोशिश यही दिखी कि वे हार की जिम्मेदारी ‘सिस्टम’ पर डालें। या तो ये एक रणनीतिक राजनीति का हिस्सा हो सकता है या पिर अपनी पार्टी की विफलताओं से ध्यान भटकाने का बेहतर तरीका भी कहा जा सकता है।

हालाँकि, ऑपइंडिया ने राहुल गाँधी के इस लेख और उनके दावों का तथ्यों के जरिए खंडन किया। रिपोर्ट में बताया गया कि उन्होंने कई भ्रामक और गलत आँकड़े पेश किए और चुनाव प्रक्रिया को लेकर जो सवाल उठाए। असल में वे वास्तविकता से मेल नहीं खाते।

चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र चुनाव में मतदान प्रतिशत के कॉन्ग्रेस के झूठ दावों को किया खारिज

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों 2024 के बाद,  भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने कांग्रेस पार्टी को एक विस्तृत पत्र भेजकर उनके लगाए गए आरोपों को बिंदुवार तरीके से खारिज किया और तथ्यों के साथ उनकी गलतियों को उजागर किया।
कांग्रेस का दावा था कि मतदान के आखिरी घंटों में अचानक वोटिंग प्रतिशत बढ़ा, जिसे उन्होंने गड़बड़ी बताया। इस पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदान के आखिरी घंटों में वोटिंग प्रतिशत में बढ़ोतरी होना एक सामान्य प्रक्रिया है।
आयोग ने यह भी बताया कि वोटिंग खत्म होने के समय फॉर्म 17C वहीं मौजूद उम्मीदवारों के अधिकृत एजेंटों को दे दिया जाता है। इसमें हर मतदान केंद्र का सटीक वोटिंग आँकड़ा होता है। ऐसे में मतदान प्रतिशत में हेरफेर करना संभव ही नहीं है।
चुनाव आयोग ने कांग्रेस के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि मतदाताओं की संख्या को मतदाता सूची में मनमाने तरीके से जोड़ा या हटाया गया।
इतना ही नहीं, कांग्रेस ने नवंबर 2024 में भी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ की एक संदिग्ध रिपोर्ट के आधार पर भी चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव के दौरान 5,04,313 अतिरिक्त वोट डाले गए। लेकिन महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) ने इस रिपोर्ट को झूठा बताया। उन्होंने बताया कि यह संख्या दरअसल 5,38,225 डाक मतपत्रों की थी, जो चुनाव आयोग की ओर से पहले से जारी आँकड़ों का हिस्सा थे। रिपोर्ट में इन्हें गलत तरीके से ‘अतिरिक्त वोट’ के रूप में दिखाया गया था।
इसके बाद अब कांग्रेस न्यूजलॉन्ड्री की एक और इसी तरह की रिपोर्ट का सहारा ले रही है, जिसमें तथ्य न के बराबर और प्रचार 100 प्रतिशत तक शामिल है। इन सभी मामलों में देखा गया है कि राहुल गाँधी बार-बार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं, लेकिन वे कभी अपने आरोपों को ठोस तथ्यों से साबित नहीं कर पाते। चुनाव आयोग ने हर बार उनके दावों को तथ्यों के आधार पर खारिज किया है। इसके बावजूद राहुल गाँधी इन आरोपों को दोहराते रहते हैं।
दरअसल, ऐसा लगता है कि राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी का उद्देश्य पारदर्शिता या जवाबदेही लाना नहीं है, बल्कि बार-बार मिल रही चुनावी हार का दोष किसी और पर डालकर खुद को बचाना है। यही वजह है कि उनके ये आरोप अब एक पुराने, घिसे-पिटे बहाने बन चुके हैं, जो अब भारत में चुनाव हारने वाली हर पार्टी के लिए एक  ‘स्टैंडर्ड स्क्रिप्ट’ की तरह इस्तेमाल होने लगे हैं।

कांग्रेस ने महाराष्ट्र मतदाता सूची में अनियमितताओं का दावा किया, चुनाव आयोग ने बेनकाब किया झूठ

इस साल अप्रैल में चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र की मतदाता सूची में लगे अनियमितताओं के आरोपों को साफ तौर पर खारिज किया। आयोग ने बताया कि जनवरी 2025 में प्रकाशित मतदाता सूची के विशेष सारांश संशोधन (6-7 जनवरी को) के दौरान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 22, 23 और 24 के तहत बहुत ही कम आपत्तियाँ या सुधार के अनुरोध मिले।
चुनाव आयोग के अनुसार, 9.7 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से केवल 89 अपील जिला चुनाव कार्यालयो में और सिर्फ 1 अपील मुख्य निर्वाचन कार्यालय में दर्ज की गई।
आयोग ने इस बेहद कम संख्या को आधार बनाकर कहा कि यह आँकड़ा संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए बड़े-बड़े दावों को गलत साबित करता है। यानी, जो अनियमितता और धांधली के आरोप लगाए जा रहे थे, उनकी कोई ठोस पुष्टि नहीं हुई। आयोग ने जोर देकर कहा कि यह संख्या दर्शाती है कि मतदाता सूची में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2024 महाराष्ट्र चुनाव की याचिका खारिज कर कांग्रेस को दिया झटका

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (25 जून 2025) को नवंबर 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कथित मतदान अनियमितताओं के आधार पर चुनाव के नतीजे रद्द करने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया।
यह याचिका मुंबई निवासी चेतन चंद्रकांत अहिरे ने दायर की थी। इसकी पैरवी वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता प्रकाश अंबेडकर ने की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शाम 6 बजे की समय सीमा के बाद लगभग 76 लाख वोट डाले गए। इनकी वैधता पर सवाल थे। याचिका में चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और देर से मतदान में असामान्य वृद्धि का दावा किया गया था।
हालाँकि, जस्टिस जीएस कुलकर्णी और आरिफ डॉक्टर की पीठ ने इस दावे में कोई ठोस आधार नहीं पाया। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों समेत पिछले सभी चुनावोंमें भी शाम 6 बजे के बाद वोटिंग के इसी तरह के रुझान देखे गए थे और उन्हें कभी चुनौती नहीं दी गई। अदालत ने साफ कहा कि जब तक शाम 6 बजे के बाद डाले गए वोटों को किसी उम्मीदवार की जीत से जोड़ने वाले स्पष्ट सबूत नहीं मिलते, तब तक ये आरोप निराधार हैं।
याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने सुनवाई में काफी समय लगने के बाद भी जुर्माना नहीं लगाया। चुनाव आयोग के वकील ने याचिकाकर्ता के अधिकार क्षेत्र और विजयी उम्मीदवारों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए, जिनसे कोर्ट ने सहमति जताई।
कोर्ट ने कहा, “यह याचिका पूरी तरह से आधारहीन है। इसे खारिज न करने का कोई आधार नहीं मिल रहा। हमने याचिका की सुनवाई में पूरा दिन लगा दिया, इसलिए यह निश्चित रूप से जुर्माने के साथ खारिज करने योग्य है, लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे।”
दरअसल, यह पूरा मामला न्यायिक समय की बर्बादी साबित हुआ, क्योंकि चुनाव आयोग ने कई बार इन आरोपों को खारिज किया था और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भरोसा जताया था। 1 लाख से ज्यादा बूथ अधिकारियों, 288 रिटर्निंग अधिकारियों और कॉन्ग्रेस के 28,421 एजेंटों समेत 1 लाख से अधिक बूथ एजेंटों ने चुनावों की निगरानी की।
फिर भी कांग्रेस और उसके प्रधानमंत्री पद के अघोषित उम्मीदवार राहुल गाँधी डिजिटल मतदाता सूची, सीसीटीवी फुटेज जैसी माँगे कर रहे हैं और नियमित चुनावी प्रक्रियाओं को भ्रामक तरीके से अनियमितताओं के रूप में पेश कर रहे हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उनकी पार्टी चुनाव जीतने में असफल रही।

"केजरीवाल हाजिर हो"; ‘यमुना में जहर’ का दावा कर चौतरफा घिरे केजरीवाल, हरियाणा की अदालत ने हाजिर होने का भेजा नोटिस: ‘जनहित’ वाले जवाब से चुनाव आयोग भी संतुष्ट नहीं, कहा- सबूत दो

झूठ बोल-बोलकर दिल्लीवासियों को पागल बनाने वाले अरविन्द केजरीवाल द्वारा यमुना नदी में जहर मिलाने के भ्रामिक आरोप में केजरीवाल खुद फंस गए। यमुना नदी में जहर मिलाए जाने के अति गंभीर आरोप से I.N.D.I. गठबंधन तक हिल गया है। फिर भी जो पार्टियां दिल्ली चुनाव में केजरीवाल पार्टी से अपना समर्थन वापस नहीं लेती है तो साफ जाहिर है कि विदेशी चंदे पर पलने वाली पार्टियों को जनता की लेशमात्र भी चिंता नहीं। 

चुनाव आयोग को केजरीवाल द्वारा दिए जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर केजरीवाल से कल (31 जनवरी) 11 बजे तक 5 प्रश्नों का जवाब देने को कहा है। 

1. जहर कहाँ पाया गया ?

2. किन इंजीनियरों ने टेस्ट किया ? 

3. जहरीले पानी को कैसे रोका ?

4. यमुना नदी में कैसा जहर मिलाया? 

5. जहर की पहचान कैसे की?  
आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक अरविन्द केजरीवाल हरियाणा यमुना में ‘जहर मिलाने’ के आरोप पर फंस गए हैं। उन्हें हरियाणा की एक अदालत ने हाजिर होने का आदेश दिया है। यह आदेश हरियाणा सरकार की तरफ से दाखिल एक मुकदमे में दिया गया है।

वहीं चुनाव आयोग भी इस मामले पर केजरीवाल के जवाब से संतुष्ट नहीं है। उसने केजरीवाल से उनके ‘जहर मिलाने’ के दावे के सबूत देने को कहा है। केजरीवाल ने अपने जवाब में अमोनिया की मात्रा ज्यादा होने को बयान का आधार बताया था।

बुधवार (29 जनवरी, 2025) को हरियाणा के सोनीपत में कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा, “अरविंद केजरीवाल को 17 फरवरी, 2025 के लिए नोटिस जारी किया जाता है। उन्हें निर्देश दिया जाता है कि अगर उन्हें कुछ कहना है तो वे अगली सुनवाई की तारीख को इस अदालत के सामने हाजिर हों।”

अदालत ने कहा, “यदि वह अगली सुनवाई की तारीख को इस अदालत के सामने हाजिर नहीं होते तो यह माना जाएगा कि उन्हें कुछ नहीं कहना। ऐसे में आगे की कार्यवाही कानून के अनुसार की जाएगी।” सोनीपत की अदालत ने यह आदेश हरियाणा सरकार द्वारा दायर किए गए एक केस में दिया गया है।

हरियाणा सरकार ने हरियाणा राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकार (HSDMA) के माध्यम से यह केस दायर किया है। हरियाणा सरकार ने कहा है कि केजरीवाल ने यमुना में जहर मिलाने को लेकर झूठे दावे किए और लोगों को भ्रम में डाला। इसके बाद सोनीपत के कुछ गाँव वालों ने भी इस पर प्रश्न उठाए।

जब गाँव वालों से प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने केजरीवाल के उस वीडियो का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि हरियाणा सरकार यमुना में जहर मिलाकर दिल्ली में भेज रही है। केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि हरियाणा की भाजपा सरकार दिल्ली के निवासियों का नरसंहार करना चाहती थी और इसे दिल्ली जल बोर्ड ने रोक लिया।

उनके इस बयान पर सीएम नायब सिंह सैनी ने मानहानि का मुकदमा करने का ऐलान किया था। इस मामले में चुनाव आयोग ने भी केजरीवाल से जवाब माँगा था कि आखिर उन्होंने जहर मिलाने की बात किस आधार पर कही थी। केजरीवाल ने अपने जवाब में दावा किया कि उन्होंने यह बयान ‘जनहित’ में दिया था।

केजरीवाल ने दावा किया कि हरियाणा से आने वाले पानी में अमोनिया की मात्रा ज्यादा थी, ऐसे में उन्होंने लोगों को चेताने को यह बयान दिया था। उनके इस जवाब से चुनाव आयोग पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि चुनाव आयोग ने केजरीवाल से कहा है कि वह ‘जहर मिलाने’ का सबूत पेश करें।

हरियाणा की हार क्यों नहीं पचा पा रही कांग्रेस? :चुनाव आयोग पर केस करेगी कांग्रेस, कहा- इज्जत से बात नहीं करते; क्या कोर्ट की धमकी से डराने का काम कर रही है; सच्चाई बताने पर अपने ही पक्षधर पत्रकार पर कार्यवाही

कांग्रेस कोर्ट की धमकी देकर क्या साबित करना चाहती है? अगर खटाखट के नाम पर 99 लोक सभा आ गयीं है का मतलब ये नहीं जनता कांग्रेस को पसंद करती है। अगर 'खटाखट नहीं होता कांग्रेस 30/35 से ज्यादा सीट नहीं आती। इस कटु सच्चाई को कांग्रेस को समझना होगा, दूसरे पत्रकार अशोक वानखेड़े ने हरियाणा हार के लिए कांग्रेस के इश्क को सामने लाने पर अपनी ही पक्षधर रहे पत्रकार पर क्यों कार्यवाही की जा रही है। देखिए नीचे लिंक।    
हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपनी हार पचा नहीं पा रही है। उसने हरियाणा चुनाव के बाद चुनाव आयोग के साथ पत्र युद्ध चालू कर दिया है। चुनाव आयोग को कांग्रेस ने कानूनी एक्शन तक की धमकी दे डाली है। चुनाव आयोग ने हाल ही में कांग्रेस के आरोपों पर कहा था कि पार्टी बिना सबूत के हवा हवाई दावे कर रही है।

शुक्रवार (1 नवम्बर, 2024) को कांग्रेस ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिख कर जवाब दिया है। कॉन्ग्रेस ने लिखा, “हमने हमारी शिकायतों पर आपके जवाब को पढ़ा है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि चुनाव आयोग ने खुद को क्लीन चिट दे दी है। हम आमतौर पर इस मामले को आगे नहीं बढ़ाते। हालाँकि, चुनाव आयोग के लहजे के चलते हम इसका जवाब दे रहे हैं।”

कांग्रेस ने आगे लिखा, “हम नहीं जानते कि आयोग को कौन सलाह दे रहा है या उसका मार्गदर्शन कर रहा है, लेकिन ऐसा लगता है कि आयोग यह भूल गया है कि वह संविधान के तहत स्थापित एक संस्था है और इसे कुछ महत्वपूर्ण काम सौंपे गए हैं।” कांग्रेस ने कहा कि चुनाव आयोग ने उन्हें जवाब देकर कोई जहमत नहीं उठाई बल्कि उनका यह कर्तव्य है।

अवलोकन करें : -

जनता में संविधान खतरे में का डर और मीडिया पर मुक़दमे के डर ने खोली कांग्रेस की असलियत ; हरियाणा मे

कांग्रेस ने कहा कि वह चुनाव आयोग को जब कुछ लिखती है तो सम्मान से बात करती है जबकि चुनाव आयोग उसे इज्जत नहीं देता। कांग्रेस ने कहा कि चुनाव आयोग उसके नेताओं और पार्टी पर निजी हमले करता है। कांग्रेस ने कहा कि अगर चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता खोने का प्रयास कर रहा है, तो वह एकदम सही राह पर है।

चुनाव आयोग को कांग्रेस ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अख्तियार करने की धमकी भी दे दी। कांग्रेस ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने पार्टी के प्रति अपनी भाषा नहीं बदली तो उसके पास कानूनी रास्ता अपनाने के अलावा कोई चारा नहीं होगा।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उसकी शिकायतों पर चुनाव आयोग पीएम मोदी पर कोई एक्शन नहीं लेता है। कांग्रेस ने हरियाणा चुनाव के दौरान EVM की बैटरी 99% होने वाला मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस का कहना है कि बैटरी के मुद्दे पर चुनाव आयोग के जवाबों से संतुष्ट नहीं है। पत्र में कांग्रेस ने लिखा कि चुनाव आयोग ने खुद को क्लीन चिट दी है, जो कि संभावित था।

यह जवाब कांग्रेस ने चुनाव आयोग के जवाब पर दिया है। चुनाव आयोग ने कांग्रेस को 29 अक्टूबर, 2024 को एक पत्र भेजा था जिसमें हरियाणा चुनाव पर उठाए गए प्रश्नों का जवाब दिया गया था। चुनाव आयोग ने कांग्रेस को ऐसे आधारहीन आरोप लगाने से बचने को कहा था।

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कांग्रेस को लिखा था कि आयोग चुनाव प्रक्रिया करवाने के लिए कर्तव्यबद्ध है लेकिन गिनती के दिन आधारहीन दावों के सहारे उसकी छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। आयोग ने कहा था कि इससे माहौल बिगड़ने की आशंका रहती है।

कांग्रेस ने हरियाणा चुनाव के बाद EVM की बैटरी की चार्जिंग और परिणामों को धीमे अपडेट किए जाने का मुद्दा उठाया था। हालाँकि, चुनाव आयोग ने इस पर कारण सहित जवाब दे दिया था। हालाँकि, कांग्रेस अब इस मामले को लगातार खींच रही है।

आने वाले 4 राज्यों के चुनाव, चुनाव आयोग वोटर लिस्ट से फर्जी वोटरों को हटाए; इसके अलावा कुछ अन्य सुझाव: चुनाव अधिकारी के सामने वोटर का चेहरा खुला हो ; बुर्के में मर्द करते हैं फर्जी वोट

मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश, में बुर्के पहन फर्जी वोट डालते
पुलिस ने पकड़ा  
 सुभाष चन्द्र 

इसी वर्ष हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और जम्मू कश्मीर में होने वाले विधानसभाओं के चुनावों के लिए चुनाव आयोग आज से मतदाता पुनरीक्षण का काम शुरू करेगा। पुनरीक्षण करते हुए बोगस मतदाताओं को मतदाता सूचियों से बाहर निकाला जाना सबसे जरूरी है वैसे अगले साल दिल्ली में भी चुनाव होने हैं

अभी हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में एक गंभीर जानकारी सामने आई थी कि हैदराबाद के 15 विधानसभा क्षेत्रों में जनवरी, 2023 से मतदाता सूची से 5,41,201 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे इसका मतलब भाजपा उम्मीदवार माधवी लता का दावा गलत नहीं था कि हैदराबाद में 6 लाख फर्जी वोटर हैं। जो चौकाने वाला है। जब एक संसदीय क्षेत्र का यह हाल है बाकी 542 में क्या होगा, चुनाव आयोग को कठोर कदम उठाने होंगे। जब तक फर्जी वोट डालने वालों को कम से कम 2/3 साल की जेल नहीं होगी, फर्जी मतदान रुकने वाला नहीं।  

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अभी हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने माधवी लता की शिकायत पर हैदराबाद संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची से 5,41,201 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे इनमें 47,141 मृत वोटर थे, 4,39,801 shifted voter थे और 54259 duplicate voter थे

वोटर लिस्ट की ऐसी जांच हर राज्य में होनी चाहिए लोकसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र ओखला में 20% वोटर बढ़ गए थे और इतने वोटरों का बढ़ना साबित करता है कि बोगस वोटर बढे हैं जो बांग्लादेश से आए हुए हैं या रोहिंग्या है

चुनाव आयोग को ऐसे बांग्लादेशी और रोहिंग्या वोटरों को केवल आधार कार्ड के अनुसार ही सही नहीं मानना चाहिए बल्कि कुछ और तरीके अपनाने चाहिए जिससे साबित हो कि वे भारतीय हैं ही नहीं यह प्रक्रिया पूरे देश के लिए अमल में लानी चाहिए क्योंकि विपक्ष अब केवल मुस्लिम वोटरों की राजनीति कर रहा है और करेगा 

जब फर्जी आधार कार्ड बन सकते हैं तो फर्जी वोट भी उसके सहारे बन सकता है जिन प्राइवेट एजेंसियों ने पिछले कुछ वर्षों में आधार कार्ड बनाए हैं उनकी जांच होनी चाहिए जब लट्ठ बजेगा तो अपने आप उगलेंगे कितने फर्जी कार्ड बनाए थे उन्होंने

वोट किसी हाल में शुक्रवार, शनिवार और सोमवार को नहीं होना चाहिए या अन्य किसी ऐसे दिन पर जो सरकारी छुट्टी के आगे पीछे हो इससे मतदान प्रतिशत पर असर पड़ सकता है

अगर वोटर राज्य के बाहर गए हुए हैं अपने काम के लिए तो उनके लिए Postal Ballot का प्रबंध किया का सकता है तो आयोग उस पर विचार करे

चुनाव अधिकारी के सामने किसी भी वोटर को चेहरा ढकने की अनुमति नहीं होनी चाहिए मतलब साफ़ वोट करने के लिए चुनाव अधिकारी के सामने बुरखा पहनने की अनुमति नहीं होनी चाहिए और अगर यह किसी के मज़हब के खिलाफ है तो घर में रहें, वोट देने की जरूरत नहीं है चुनाव आयोग को इस मामले में सख्त होना चाहिए बुरखा पहन कर पुरुष वोट करते हैं, छोटी छोटी स्कूल जाने वाली बच्चिया भी वोट कर जाती है