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राहुल गाँधी हिम्मत है तो लिखित में क्यों नहीं शिकायत देते? : ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा का निकला दम : हवा में तीर चला रहे नेता प्रतिपक्ष

राहुल गाँधी क्यों कांग्रेस का समय से पहले ही शमशान/कब्रिस्तान पहुँचाने में लगे हो? तुम्हारे भ्रमित और भड़काऊ बयानों की वजह से अब कांग्रेस की छवि राष्ट्रवादी नहीं राष्ट्र विरोधी पार्टी की बननी शुरू हो चुकी है। राहुल को पार्टी अध्यक्ष बनाने की चर्चा शुरू होने पर जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि "जितनी जल्दी हो राहुल बाबा को अध्यक्ष बनाइये" शत-प्रतिशत चरितार्थ हो रहा है। आखिर योगी की बात गलत कैसे गलत हो सकती है। क्योकि अपनी विदेश यात्रा से आने के बाद तुम्हारे झूठे बयानों कांग्रेस ने अपना जनाधार भी खोना शुरू कर दिया है। जहाँ तक वोट चोरी का सवाल है इतना मालूम होना चाहिए कि चुनाव आयोग की साठगांठ से बीजेपी वोट चोरी कर रही होती तुम भाई बहन का संसद जाना तो दूर, कांग्रेस का कोई सदस्य नगर निगम से लेकर लोकसभा नहीं पहुँचता। कांग्रेस की नितरोज गिरती साख में गाँधी परिवार जिम्मेदार है कोई और नहीं। चुनाव आयोग को लिखित में देने का मतलब राहुल अच्छी तरह जानते है कि आरोप झूठे निकलने पर कोई जेल जाने से नहीं रोक सकता।  

राहुल तो क्या कांग्रेस भी अच्छी तरह जानती है कि जाँच में आरोप गलत मिलते ही धरने/प्रदर्शन भी राहुल को 7 सालों के लिए जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता और 7 साल का मतलब जिन्दगी में कभी चुनाव नहीं लड़ सकते। इसलिए INDI गठबंधन को राहुल या कांग्रेस की वकालत करने की बजाए जितनी जल्दी हो अपने अस्तित्व की खातिर कांग्रेस से दूरी बनाए क्योकि कांग्रेस डूबेगी तो तुम्हे भी डूबने से कोई बचा नहीं पाएगा। 

वैसे तो कांग्रेस के जनाधार का उसी दिन से गिरना शुरू हो चुका था जब सोनिया गाँधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने के लिए परिवार के गुलामों ने तत्कालीन दलित अध्यक्ष सीताराम केसरी को दफ्तर से बाहर फेंक दिया था और उनकी धोती भी खुल गयी थी। और कांग्रेस को तेजी से नीचे गिराने में राहुल और अब प्रियंका वाड्रा लगी हुई है। देश जानना चाहता है कि आखिर राहुल की विदेश यात्राओं का क्या रहस्य है? विदेशों में जाकर किन देश विरोधियों के साथ मुलाकातें होती है? चीन के साथ क्या MoU किया है? इन गंभीर मुद्दों पर कांग्रेस गुलाम मीडिया भी क्यों खामोश है?    
राहुल गाँधी ने 5 नवंबर 2025 को दावा किया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में जिन सीटों पर पोस्टल बैलट में कांग्रेस आगे थी, वहाँ वोट चोरी हुई क्योंकि फाइनल रिजल्ट में हार गए। उनका कहना था कि पोस्टल बैलट काउंटिंग में कांग्रेस कुछ सीटों पर बीजेपी से आगे थी, लेकिन ईवीएम वोटिंग के बाद बीजेपी जीत गई। अगर उनका दावा सही होता तो हर सीट पर यही होता। लेकिन सच इससे बहुत दूर है।

ऑपइंडिया ने हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के सभी सीटों के फाइनल रिजल्ट चेक किए और पाया कि चार सीटें ऐसी थीं जहाँ बीजेपी पोस्टल बैलट में आगे थी लेकिन फाइनल में कॉन्ग्रेस से हार गई।

                                             चुनाव आयोग द्वारा जारी डाटा का स्क्रीनशॉट

चुनाव आयोग की वेबसाइट के डेटा के मुताबिक जुलाना, हाथिन, नाँगल चौधरी और आदमपुर में बीजेपी पोस्टल बैलट में कांग्रेस से आगे थी। लेकिन अंत में पार्टी कांग्रेस से हार गई।

राहुल गाँधी के दावों पर विचार करते हुए सिर्फ वो उदाहरण चुनना जहाँ कांग्रेस पोस्टल बैलट में आगे थी और जहाँ पीछे थी उन्हें नजरअंदाज करना… जैसा राहुल गाँधी ने किया। यह दिखाता है कि पोस्टल बैलट फाइनल रिजल्ट एनालिसिस के लिए भरोसेमंद आधार नहीं हैं।

फाइनल रिजल्ट एनालिसिस के लिए भरोसेमंद आधार नहीं पोस्टल बैलट

अब जब राहुल गाँधी के दावे गलत साबित हो गए हैं, तो समझना जरूरी है कि पोस्टल बैलट को फाइनल रिजल्ट एनालिसिस का आधार क्यों नहीं बनाया जा सकता। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “दूसरी हैरान करने वाली बात यह थी कि हरियाणा में पहली बार पोस्टल वोट रिजल्ट से अलग थे। पोस्टल बैलट में कांग्रेस को 73 सीटें मिलीं जबकि बीजेपी को 17 सीटें।”

सबसे पहले ज्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में पोस्टल बैलट की संख्या कुल वोटों की तुलना में बहुत कम होती है। ज्यादातर मामलों में यह 1% से भी कम होती है। इसलिए कुल रिजल्ट पर इनका कोई खास असर नहीं पड़ता जब तक जीत-हार का अंतर बहुत कम न हो।

उदाहरण के लिए गुहला सीट पर कुल पोस्टल बैलट 589 थे, जबकि ईवीएम वोट 1,33,287 थे, यानी पोस्टल बैलट सिर्फ 0.44% थे। कांग्रेस के देवेंद्र हंस ने 22,880 वोटों के अंतर से बीजेपी के कुलवंत राम बाजीगर को हराया। ऐसे सीटों पर पोस्टल बैलट का बड़ा रोल बताना बेवकूफी होगी।

उदाहरण के लिए गुहला सीट पर कुल पोस्टल बैलट 589 थे, जबकि ईवीएम वोट 1,33,287 थे, यानी पोस्टल बैलट सिर्फ 0.44% थे। कांग्रेस के देवेंद्र हंस ने 22,880 वोटों के अंतर से बीजेपी के कुलवंत राम बाजीगर को हराया। ऐसे सीटों पर पोस्टल बैलट का बड़ा रोल बताना बेवकूफी होगी।

तीसरे पोस्टल बैलट पहले गिने जाते हैं, लेकिन ये ग्राउंड लेवल वोटर टर्नआउट पैटर्न या बूथों पर देर से होने वाले उछाल को नहीं दिखाते जहाँ लोकल फैक्टर बहुत असर डालते हैं।

‘वोट चोरी’ की कहानी फर्जी

इन उदाहरणों और पोस्टल बैलट की प्रकृति को नजरअंदाज न करें। जिसमें राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ कहानी सिर्फ कहानी ही लगेगी, न कि फैक्ट बेस्ड। वही डेटा पॉइंट्स जिनका वे जिक्र करते हैं, आसानी से उल्टा साबित करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिससे उनका तर्क आँकड़ों के आधार पर भी खोखला हो जाता है।

‘हाइड्रोजन बम’ फोड़ने के लिए जिस बबीता को लेकर आए राहुल गाँधी, ऑपइंडिया की पड़ताल में उससे जुड़े दावे निकले झूठे: 2 जगह वोटर, काटने के लिए खुद दिया आवेदन

                                  राहुल गाँधी का हाईड्रोजन बम फुस्स (फोटो साभार: ऑपइंडिया टीवी)
(जिस तरह पाकिस्तान परमाणु की धमकी देकर भारत को डराता रहता था और पिछली युपीए सरकार देश को डराती रहती थी। लेकिन 2014 में मोदी सरकार बनने पर पाव-पाव के परमाणु बन गए, वो भी Operation Sindoor में फुस हो गए। ठीक उसी तरह राहुल गाँधी का हर बम फुस हो रहे हैं। लगता है कोई सिरफिरा बमों को बना रहा है। )    

राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग के खिलाफ ‘हाइड्रोजन बम’ फोड़ने की बात कही थी। राहुल ने कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में वोटर लिस्ट से लोगों नाम कटने के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने एक महिला वोटर बबीता का नाम लिया और दावा किया कि उसका नाम गलत तरीके से हटा दिया गया। लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए खंडन किया है। ऑपइंडिया ने इस मामले की तहकीकात की, जिसमें राहुल गाँधी के दावों की हवा निकलती दिख रही है।

राहुल गाँधी ने बबीता का नाम वोटर लिस्ट से हटाने का दावा किया था लेकिन उस बबीता का नाम वोटर लिस्ट में अभी भी मौजूद है। आलंद विधानसभा सीट के सरसंबा बूथ पर बबीता चौधरी का नाम हमें वोटर लिस्ट में मिला।

BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर ने OpIndia को फोन पर बताया कि बबीता का नाम दो जगह दर्ज है – एक कर्नाटक के गुलबर्ग में और दूसरी आलंद में। गुलबर्ग वाले पते पर जाँच की गई तो पता चला कि बबीता ने खुद ही नाम कटवाने का फॉर्म भरा था।

चुनाव आयोग ने साफ कहा कि ऑनलाइन किसी का वोट हटाना नामुमकिन है। हर वोटर को नाम हटाने से पहले सुनवाई का मौका दिया जाता है। 2023 में आलंद में वोट कटाने की कुछ कोशिशें हुईं थीं, लेकिन वो असफल रहीं। आयोग ने खुद ही इस पर FIR दर्ज कराई और जाँच चल रही है।

आयोग ने करीब 5700 नंबर्स का डेटा कर्नाटक CID को दे दिया था। इनमें से 9 नंबर्स ट्रेस हो चुके हैं, जो महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से जुड़े हैं।

राहुल गाँधी ने 2022 में 6000 वोट कटने का दावा किया, लेकिन हकीकत ये है कि 2018 में उसी सीट पर BJP सिर्फ 700 वोटों से जीती थी। 2023 में कॉन्ग्रेस 9000 वोटों से धमाकेदार जीत हासिल की। अगर राहुल का दावा सही होता तो कॉन्ग्रेस को 6700 वोटों से हारना पड़ता, लेकिन 30 साल बाद वो सीट जीत ली। ये आँकड़े ही राहुल के दावों की हवा निकाल देते हैं।

वोट लिस्ट से कैसे कटता है नाम?

फॉर्म 7 के माध्यम से किसी का नाम हटाने की अपील की जाती है। बाकायदा फॉर्म में जानकारी भरी होती है। उसकी जाँच आखिर में बीएलओ के पास जाती है। जिसमें बीएलओ इसकी जाँच करता है। इसके बाद एसडीओ के पास मामला जाएगा। इसकी सुनवाई होगी। दस्तावेज जमा किए जाएँगे, इसकी जाँच की जाएगी। व्यक्ति से कारण पूछा जाएगा, इसके बाद नाम काटा जाएगा।

राहुल गाँधी ने जो फॉर्म दिखाए, उसमें बीएलओ का हिस्सा ही नहीं है। बीएलओ की जाँच के बाद ही मामला एसडीओ के पास जाता है, ऐसे में राहुल गाँधी ने सिर्फ फॉर्म भरे हुए ही दिखाए, एक्शन क्या हुआ, ये बताया ही नहीं।

चूँकि चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि 2023 में आलंद में 6,018 फॉर्म-7 आवेदनों में से सिर्फ 24 वैध थे, बाकी 5,994 फर्जी थे। इनकी जाँच के बाद फरवरी 2023 में ही FIR दर्ज हुई और 6 सितंबर 2023 को कलबुर्गी पुलिस को ऑब्जेक्टर का नाम, मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और फॉर्म डिटेल्स सौंप दी गईं।

इस मामले को वीडियो के इस जरिए समझ सकते हैं।

आयोग ने ये भी कहा कि चुनाव नतीजों पर आपत्ति हो तो 45 दिनों में हाईकोर्ट में याचिका डाल सकते हैं, लेकिन किसी विपक्षी नेता ने ऐसा नहीं किया। कॉन्ग्रेस ने ज्यादातर मामलों में औपचारिक शिकायत तक नहीं की। ये सब राजनीतिक रणनीति लगती है, जिसका मकसद लोगों को भड़काना और आयोग पर दबाव डालना है।

राहुल ऐसे लोगों को आगे ला रहे हैं जिनके नाम कटाने की कोशिश हुई, लेकिन नाम नहीं कटा। इससे साफ है कि ये अर्धसत्य हैं, पूरी सच्चाई नहीं। आयोग हर बार तथ्यों और रिकॉर्ड के साथ जवाब दे रहा है। 18 पत्र लिखे गए, 18 महीने बीत चुके, लेकिन कॉन्ग्रेस चुप। कुल मिलाकर राहुल का ‘हाइड्रोजन बॉम्ब’ दावा फुस्स साबित हो गया।(साभार) 

वोट चोरी का दांव फिर उल्टा पड़ा, विदेशी ताकतों से जुड़े कांग्रेस के ‘युवराज’ की कॉन्फ्रेंस के तार

                                                                                                                                          साभार 
ऐसा लगता है जब तक देश से कांग्रेस की अर्थी नहीं निकल जाएगी, गाँधी परिवारभक्त कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे। अगर परिवारभक्तों जरा भी आत्मसम्मान बचा है तुरन्त परिवार को दरकिनार कर बिना रिमोट के चलने वाले को पार्टी को अध्यक्ष बनाएं। अगर राहुल और परिवारभक्त भारत को बांग्लादेश, नेपाल या फ्रांस बना देंगे, गलतफमी हैं। वैसे CAA विरोध में शाहीन बनाकर से लेकर तथाकथित किसान आंदोलन और पहलवानों के धरने से नाकाम कोशिश की जा चुकी है। हर षड़यंत्र बेनकाब होता गया।    

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जानबूझकर देश-विरोधी बयानबाजी करते हैं और फिर उनका दांव उल्टा पड़ जाता है। झूठ का प्रपंच रचकर वे मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन खुद ही घिर जाते हैं। पहले राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में वोट चोरी के खुलेआम आरोप लगाए और इसके पक्ष में सीएसडीएस के डेटा देकर यह साबित करने का प्रयास किया कि महाराष्ट्र चुनाव में कितनी धांधली हुई है। यह अलग बात है कि जिस CSDS के डेटा के आधार पर आरोप लगाए थे, उसी ने अपनी गलती और बड़ी गड़बड़ी के लिए माफी मांग ली। इसके बाद फिर राहुल गांधी पिछले माह प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वोट चोरी का नया शिगूफा लाए हैं। बेहद हैरतअंगेज बात है कि राहुल गांधी की इस वोट चोरी प्रेस कॉन्फ़्रेंस के पीछे Myanmar के ट्रेस मिले हैं। इसका कनेक्शन म्यांमार और काठमांडू तक से जुड़ने के बाद बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वोट चोरी का यह नैरेटिव भारत को बांग्लादेश-नेपाल जैसे हालात में धकेलने की साजिश है? क्या कोई विदेशी ताकतें भारत में लोकतंत्र को अस्थिर करने की प्लानिंग कर रही हैं? क्या राहुल गांधी महज एक Puppet Rahul बन चुके हैं, जिनके पीछे और लोग धागे खींच रहे हैं? यदि ऐसा है तो वोट चोरी का शोर सिर्फ एक बहाना है। राहुल समेत विदेशी ताकतों का असली मकसद भारत की मजबूत सरकार को अस्थिर करना है। यह अलग बात है वे इसमें कभी भी कामयाब नहीं हो पाएंगे।

महाराष्ट्र में वोट चोरी के आरोपों पर खुद घेरे में आ चुके हैं राहुल
आपको याद होगा कि राहुल गांधी ने पहले महाराष्ट्र में वोट चोरी के आरोप लगाए थे। फिर कर्नाटक में यही कहानी दोहराई गई। दोनों ही जगह उनकी कलई खुल गई। राहुल ने दावा किया था कि लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र की रामटेक विधानसभा में कुल 4,66,203 वोटर्स थे, जबकि विधानसभा चुनाव के दौरान यहां वोटर घटकर केवल 2,86,931 हो गए। यहां लोकसभा के बाद हुए विधानसभा चुनाव में वोटरों की संख्या में 38 फीसदी की कमी हुई। देवलाली विधानसभा सीट को लेकर भी ऐसे ही दावे किए।

CSDS कोओर्डिनेटर संजय कुमार ने माफी से राहुल का दावा फुस्स

उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान यहां 4,56,072 वोटर थे, जबकि विधानसभा चुनाव में ये घटकर 2,88,141 हो गए। यह अलग बात है कि जिस CSDS के आंकड़ों का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने बवंडर खड़ा किया था, उसके कोओर्डिनेटर संजय कुमार ने अपने ट्वीट को डिलीट करते हुए कहा कि महाराष्‍ट्र चुनाव को लेकर किए गए पोस्‍ट के लिए मैं ईमानदारी से माफी मांगता हूं। उन्होंने कहा कि पिछले साल हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव के आंकड़ों की तुलना करते समय गड़बड़ी हो गई थी। CSDS के ट्वीट डिलीट करते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) कांग्रेस पर हमलावर हो गई है। बीजेपी ने राहुल गांधी से भी माफी मांगने की बात की। इस पर कांग्रेस ने तर्क दिया कि उसने जरूर CSDS के आंकड़ों का इस्तेमाल किया, लेकिन अलग से रिसर्च से इकठ्ठे किए गए सबूतों के आधार पर अपने निष्कर्षों पर पहुंची थी।

अब राहुल गांधी के प्रजेंटेशन का ट्रेस Myanmar में भी मिले
अब कांग्रेस के अलग से किए रिसर्च की भी बात कर लेते हैं। पिछले माह 7 अगस्त को विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा वोट चोरी को फिर मुद्दा बनाते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेस की गई। इसमें उन्होंने बकायदा एक प्रजेंटेशन पेश किया। इन कॉंफ्रेंस में मीडिया के अलावा देश के कई बड़े सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर्स ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। लेकिन अब एक पड़ताल में यह दावा किया गया है कि राहुल गांधी के प्रजेंटेशन का ट्रेस Myanmar में मिले हैं, जो वाकई हर किसी के लिए बहुत shocking हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या वोट चोरी का शोर असल में जनता की लड़ाई है, या फिर कहीं से इंपोर्ट किया गया नैरेटिव है? क्या सचमुच लोकतंत्र खतरे में है या फिर TRP और टूलकिट चल रही है? राहुल गांधी सच में विपक्ष के नेता का फर्ज निभा रहे हैं, या बस विदेशी ताकतों के हाथों की कठपुतली बने हैं। उनके जॉर्ज सोरेस से कनेक्शन पहले ही एक्सपोज हो चुके हैं। एक ट्विटर हैंडल खुरपैंच ने अपनी इंवेस्टिगेशन में दावा किया है कि राहुल की प्रेस कांफ्रेंस के तार म्यांमार और काठमांडू तक जुड़े हैं? इसलिए वोट चोरी का नारा सिर्फ एक बहाना है, असली मक़सद भारत को अस्थिर करना है।

आइए, इस थ्रेड के माध्यम से जानते हैं कि क्या यह भारत के लोकतंत्र में संक्रमण की तरह फैल रही साज़िश है? क्या ये विदेशी वायरस हमारी राजनीतिक सेहत को कमजोर कर रहा है? खुरपैंच की तहकीकात में यह सामने आया है कि सबसे पहले कांग्रेस पार्टी ने http://RahulGandhi.in वेबसाइट पर वोट चोरी से सम्बन्धित PDFs Upload की।

इस ट्विटर हैंडल की टीम ने pdf फाइल का metadata निकाला, जिसमे यह पाया यह तीनों भाषाओं की PDF में Create Date में “Myanmar” का timezone +6:30 पाया गया। जो कि English pdf : 29 सेकेंड Hindi pdf : 31 सेकेंड Kannada pdf : 37 सेकेंड के अंतराल पे की गईं।

जिसकी एक Summary Table कुछ ऐसी है। जिसमे किस समय क्या हुआ है ये बताया गया है। इस pdf को adobe illustrator सॉफ्टवेयर द्वारा बनाया गया है ,जो की इस्तेमाल हो रहे कंप्यूटर का Timezone लेता है। Metadata से साफ़ पता चल रहा है जब ये फ़ाइल Export की गई उसका timezone +6:30 MMT है।

PDFs गूगल ड्राइव के लिंक के माध्यम से शेयर की गई हैं जिससे pdf के Metadata पे कोई फरक नहीं पड़ता है।

अब आते हैं VPN पे, इन pdfs को बनाने में जो सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल हुआ है वो system clock का timezone लेता है और VPN system के Timezone को नहीं चेंज कर सकता।

इस हैंडल की टीम की पड़ताल ने हैरान कर दिया। इस पूरे अभियान में Myanmar के डिजिटल ट्रेस मिले। अब सवाल यह उठता है क्या भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पड़ोसी मुल्क की दखलअंदाजी हो रही है? प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर सोशल मीडिया प्रचार तक, क्या यह सब पहले से तय स्क्रिप्ट थी? बड़े इन्फ़्लुएंसर्स ने क्या अनजाने में किसी बाहरी नैरेटिव को amplify किया? और अगर हां, तो इसका फायदा किसे मिल रहा है और नुकसान किसका हो रहा है? क्या वोट चोरी का नैरेटिव सिर्फ घरेलू राजनीति का हिस्सा है या इसके पीछे कोई और बड़ी साज़िश छुपी है?  

इस हैंडल की टीम की पड़ताल ने हैरान कर दिया। इस पूरे अभियान में Myanmar के डिजिटल ट्रेस मिले। अब सवाल यह उठता है क्या भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पड़ोसी मुल्क की दखलअंदाजी हो रही है? प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर सोशल मीडिया प्रचार तक, क्या यह सब पहले से तय स्क्रिप्ट थी? बड़े इन्फ़्लुएंसर्स ने क्या अनजाने में किसी बाहरी नैरेटिव को amplify किया? और अगर हां, तो इसका फायदा किसे मिल रहा है और नुकसान किसका हो रहा है? क्या वोट चोरी का नैरेटिव सिर्फ घरेलू राजनीति का हिस्सा है या इसके पीछे कोई और बड़ी साज़िश छुपी है?

  

बांग्लादेश-नेपाल के पैटर्न पर लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश
पिछले कुछ सालों में भारत के पड़ोसी मुल्कों (श्रीलंका,बांग्लादेश और अब नेपाल) में जो हालात हुए हैं उनमे एक सेट पैटर्न देखने को मिलता है जो कि बेहद चिंताजनक है। लेकिन कल नेपाल में जो हुआ और भारत में लोगों को खुश देखकर हमें चिंता महसूस हुई , क्या हमारा स्मूथ ट्रांजिशन ऑफ पावर से भरोसा उठता जा रहा है? हमें लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार को घेरते रहना चाहिए लेकिन हम किसी भी प्रकार की देशविरोधी गतिविधियों का पुरजोर विरोध करते हैं। देश की सरकार, विपक्षी पार्टियों,संस्थाओं और सुरक्षा एजेंसियों से हमारा निवेदन है कि मिल जुलकर देश को एक स्वस्थ्य लोकतंत्र बनाइए, उससे ही देश का भविष्य उज्ज्वल होगा।

कांग्रेस और राहुल की इस खुरपेंच का म्यांमार तक से संबंध
खुरपेंच की पड़ताल में यह शीशे की तरह साफ है कि कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ से जुड़ी जो पीडीएफ अपलोड कीं, उसके metadata में उन्हें मिला कि उस pdf को adobe illustrator सॉफ्टवेयर द्वारा बनाया गया है, जो की इस्तेमाल हो रहे कंप्यूटर का Timezone लेता है। Metadata से साफ पता चल रहा है जब ये फाइल Export की गई उसका timezone +6:30 MMT है। यानी म्यांमार का था। खुरपेंच के अनुसार ये पीडीएफ म्यांमार में बनाई गई हैं, इसलिए कांग्रेस की इस खुरपेंच का म्यांमार तक से संबंध है।

वोट चोरी को लेकर ट्विटर हैंडल की यह पड़ताल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। नेटिजंस इस बारे में और जानकारी एकत्र कर अपने विचार शेयर कर रहे हैं। एक ट्वीट में दावा किया गया है कि इसे सीएनएन की रिपोर्टर ने तैयार किया।

सवाल बड़ा है कि क्या लोकतंत्र बचाने की असली लड़ाई दिल्ली में हो रही है या फिर इसके तार विदेशी ताकतों के इशारे पर म्यामार और नेपाल के काठमांडू तक से जुड़े हुए हैं।

वोट चोरी में पहले भी राहुल गांधी का झूठ पकड़ा गया
इससे पहले भी राहुल गांधी का वोट चोरी को लेकर झूठ पकड़ा गया है। आजतक ने अपनी इस रिपोर्ट में लिखा था, ‘कर्नाटक की वोटर लिस्ट में ‘Aditya Shrivastava’ नाम का एक व्यक्ति दर्ज है। लेकिन लखनऊ और महाराष्ट्र, दोनों स्थानों पर जब उसी नाम और एपिक नंबर से खोज की गई, तो ‘No result found’ दिखाया गया।’ राहुल ने देश को गुमराह करते हुए दावा किया कि ‘आदित्य श्रीवास्तव’ नाम का वोटर कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र, तीनों राज्यों की वोटर लिस्ट में दर्ज है। सच्चाई यह है कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में यह नाम सिर्फ कर्नाटक में पंजीकृत है। राहुल गांधी ने झूठ बोलकर जनता को भड़काने और चुनाव आयोग जैसी लोकतांत्रिक संस्था की साख पर कीचड़ उछालने का काम किया। यह केवल एक झूठ नहीं, बल्कि भारत के चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता पर सीधा हमला है।

राहुल को नोटिस भेजकर आयोग ने मांगे थे  दस्तावेज
दरअसल, राहुल गांधी बिहार से कर्नाटक तक वोट चोरी के अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। राहुल के झूठे दावे करने के कारण अब कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी ने राहुल गांधी से सबूत मांगे हैं, जिनके आधार पर उन्होंने दावा किया था कि एक महिला ने दो बार वोट डाला। आयोग ने कहा कि बिना प्रमाण ऐसे आरोप चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं। राहुल गांधी ने यह बयान हाल ही में दिया था। यह मामला राजनीतिक और चुनावी नियमों के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं। नोटिस में कहा गया कि आपसे अनुरोध है कि आप वे प्रासंगिक दस्तावेज उपलब्ध कराएं जिनके आधार पर आपने यह निष्कर्ष निकाला है कि श्रीमती शकुन रानी या किसी और ने दो बार मतदान किया है, ताकि इस कार्यालय द्वारा विस्तृत जांच की जा सके।

राहुल का दावा गलत- शकुन रानी ने दो नहीं, एक बार किया मतदान- आयोग
राज्य के शीर्ष निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक ये दस्तावेज उनके कार्यालय को विस्तृत जांच करने में मदद करेंगे। गांधी ने पिछले हफ्ते राष्ट्रीय राजधानी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये दस्तावेज दिखाए थे। आयोग ने कहा कि राहुल गांधी ने यह दावा भी किया था कि मतदान अधिकारी द्वारा दिए गए रिकॉर्ड के अनुसार, श्रीमती शकुन रानी ने दो बार मतदान किया था। जांच करने पर, श्रीमती शकुन रानी ने कहा है कि उन्होंने केवल एक बार मतदान किया है, दो बार नहीं, जैसा कि राहुल गांधी ने आरोप लगाया है। नोटिस में कहा गया है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि कांग्रेस नेता द्वारा प्रस्तुत प्रस्तुति में दिखाया गया सही का निशान वाला दस्तावेज मतदान अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया था।

राहुल गांधी की मतदाता सूची को आयोग ने बताया भ्रामक
कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने सख्त रुख दोहराया है। आयोग ने कहा है कि राहुल गांधी या तो समय रहते इस मामले में एक घोषणा पत्र दें या फिर अपने आरोपों के लिए देश से माफी मांगें। भारत के चुनाव आयोग ने रविवार को कांग्रेस राहुल गांधी की तरफ से जारी उस मतदाता सूची को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है, जिसमें 30,000 मतदाताओं के पते फर्जी होने का दावा किया है। चुनाव आयोग ने फैक्ट चेक के बाद कहा कि विधि सम्मत प्रक्रिया को ध्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं और जितना भी संभव हो सकता है, उतना ज्यादा लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक एक्स सोशल मीडिया पर कांग्रेस की पोस्ट को साझा करते हुए लिखा, यह बयान पूरी तरह भ्रामक है। अगर राहुल गांधी को लगता है कि उनकी तरफ से साझा की जा रही सूची वाकई सही है तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्हें बिना देरी कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को जवाब भेजना चाहिए।

"मोदी चोर" कहने वाले राहुल और उसके गुलामों एक नज़र इधर भी ; गली-गली में शोर है, राजीव गाँधी चोर है… जब बच्ची के चुटकुला सुनाने पर फायर हुआ AIR का पूरा स्टाफ: राहुल गाँधी याद करें 37 साल पुरानी घटना

                                   राहुल गाँधी, राजीव गाँधी (फोटो साभार: NDTV/Punekar News)
आज राहुल गाँधी और इसके गुलाम खूब "मोदी चोर" का शोर मचा कर जनता को पागल बना रहे हैं, विशेषकर युवा पीढ़ी को। राहुल, कांग्रेस और इसके गुलामों को 37 साल पुरानी घटना याद कर मोदी और मोदी सरकार के पैर धो-धोकर पीने चाहिए कि इन भटके नेताओं और उनकी पार्टियों पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही।       

साल 2019 में ‘चौकीदार चोर है’ वाला कैंपेन फेल होने के बाद राहुल गाँधी ने अब केंद्र सरकार पर नए इल्ज़ाम लगाने शुरू किए हैं। वो चाहते हैं कि किसी भी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी छिन जाए और वो सत्ता पर काबिज हो जाए। इसके लिए वो लगातार ऊल-जलूल आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजर भी रहे हैं, मगर अफसोस, हर बार वो मुँह के बल गिरते दिखते हैं।

सत्ता पाने की बौखलाहट में राहुल गाँधी न सिर्फ बिहार एसआईआर को लेकर फर्जी दावे करते दिखे और बल्कि उन्होंने फर्जी आँकड़ों के साथ प्रेस-कॉन्फ्रेंस भी कर डाली। हालाँकि जब आँकड़ों की सच्चाई दुनिया के सामने आ गई, तो उनका मुँह नहीं खुला, और न ही माफी माँगी.. बल्कि उस शर्मिंदगी को पीछे छोड़ने की कोशिश में एक और हरकत कर डाली। कभी ‘चौकीदार…’ वाले नारे पर मुँह की खाने के बाद अब ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर वो लोगों को भड़का रहे हैं।

इसी कड़ी में कांग्रेस की अगुवाई वाला पूरा INDI गठबंधन अब ‘वोट चोरी’ वाला कैंपेन चला रहा है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग, मोदी सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है और बीजेपी के फायदे के लिए आम लोगों के वोटिंग के हक को छीनने की साजिश रच रहा है।

INDI महागठबंधन भी बिहार में होने वाले चुनावों से पहले चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) मुहिम से नाराज़ है। इस मुहिम में 65 लाख फर्जी वोटरों को हटाया गया, जिससे वोटिंग की प्रक्रिया साफ-सुथरी होगी। लेकिन विपक्ष का गुस्सा इस बात पर है कि ये फर्जी वोटर उनके INDI गठबंधन के समर्थक थे।

खास बात ये है कि चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी से कहा कि वो अपने इल्ज़ामों के सबूत के साथ हलफनामा दें या फिर सार्वजनिक माफी माँगें। लेकिन राहुल ने कहा, “मैं एक नेता हूँ, जो मैं लोगों से कहता हूँ, वही मेरा वचन है। मैंने ये बात सबके सामने कही, इसे कसम मान लो। खास बात ये है कि उन्होंने मेरी बात का खंडन नहीं किया।” गौरतलब यह है कि इमरजेंसी के दौर राहुल चाचा संजय गाँधी भी एक बार मुंह से बोल देने पर पूरी सरकार और अधिकारी कानून मान लेते थे। "न लिखत न पढत जो संजय कह वही सही" राहुल और INDI महागठबंधन उसी परिपाटी को चला रहे हैं। ये विपक्ष की वही पुरानी चाल है, जिसमें वो इल्ज़ाम लगाकर भाग जाते हैं।

बच्चों को अपनी राजनीति में घसीट रहे हैं राहुल गाँधी

उम्मीदों के मुताबिक, इस बार भी रायबरेली के सांसद राहुल गाँधी का बनाया हुआ राजनीतिक ड्रामा हकीकत से कोसों दूर है। अब वो कह रहे हैं कि बच्चे भी उन्हें ‘वोट चोरी’ की बात बता रहे हैं।

24 अगस्त को बिहार के अररिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने कहा, “एक बहुत ही मजेदार बात सामने आ रही है, जो मेरी पिछली दो यात्राओं में नहीं थी। बच्चे मेरे पास आ रहे हैं। ये बहुत अजीब बात है। वो कह रहे हैं, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’। ये बड़े लोग नहीं हैं, छोटे-छोटे बच्चे हैं। अब छह साल का एक बच्चा ये बात समझ गया, और सिर्फ एक नहीं, हज़ारों बच्चे। अब चुनाव आयोग को इन बच्चों से जाकर बात करनी चाहिए। उन्हें सब पता चल जाएगा।”

राहुल ने आगे कहा, “नरेंद्र मोदी सरकार ने पहले सरकारी कंपनियों को प्राइवेट किया, अब वो चुनाव आयोग की मदद से गरीबों के वोट चुराना चाहती है।” उन्होंने दावा किया कि विपक्ष बिहार में ऐसा नहीं होने देगा। उन्होंने कहा, “संविधान हर नागरिक को बराबर हक देता है। ये एसआईआर संविधान के खिलाफ है। बिहार के लोग विधानसभा चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगियों को करारा जवाब देंगे।”

जब एक बच्ची ने सचमुच राजीव गाँधी को कहा था चोर

हालाँकि ये पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस नेताओं ने बच्चों के नाम पर अपनी झूठी कहानियाँ और गलत मकसद फैलाए हों। 1988 में एक बड़ी घटना हुई थी, जब एक बच्ची ने ऑल इंडिया रेडियो पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को चोर कहा था।

राहुल गाँधी शायद भूल गए हों कि एक बच्ची ने उनके पिता के लिए कहा था, “गली-गली में शोर है, राजीव गाँधी चोर है।” ये बात एक लाइव शो में कही गई थी। मजेदार बात ये है कि ‘फासिस्ट’ कहलाने वाली बीजेपी सरकार ऐसी बातों पर कोई कार्रवाई नहीं करती, लेकिन ‘उदार और लोकतांत्रिक’ राजीव गाँधी और उनकी पार्टी ने उस वक्त इसका जवाब बहुत सख्ती से दिया था।

साल 1988 में “गली-गली में शोर है, राजीव गाँधी चोर है” का नारा राजीव सरकार के खिलाफ बहुत मशहूर हो गया था। ये बोफोर्स घोटाले के खुलासे के बाद हुआ था। 27 मई 1988 को पटना रेडियो स्टेशन पर एक प्रोग्राम हुआ, जिसमें एक छोटी बच्ची से मजाक सुनाने को कहा गया। उसने जवाब में यही नारा बोल दिया। iChowk.in के मुताबिक, इस प्रोग्राम को आयोजित करने वाली ऑल इंडिया रेडियो की टीम को इसकी सजा भुगतनी पड़ी। लेकिन और भी बुरा होना बाकी था।

इस घटना के बाद सागर यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के प्रवेश परीक्षा में एक सवाल पूछा गया – “कौन सा ऑल इंडिया रेडियो स्टेशन ‘राजीव गाँधी चोर है’ वाक्य प्रसारित करने के लिए जाना गया?” ये सवाल पत्रकारिता विभाग के हेड, प्रोफेसर प्रदीप कृष्णात्रेय के लिए बहुत भारी पड़ा। कॉन्ग्रेस ने उन्हें जमकर निशाना बनाया।

यूथ कांग्रेस के लोग पत्रकारिता विभाग में घुस गए और प्रोफेसर को पीटा। उनका मुँह काला किया गया और पूरे कैंपस में घुमाया गया। सागर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रायग दास हजेला ने इस घटना के विरोध में इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा, “ये सिर्फ एक व्यक्ति की बात नहीं है। देश में राजनीति में गुंडागर्दी को जोड़ने की कोशिश हो रही है।”

यूनिवर्सिटी ने एकजुट होकर हड़ताल शुरू की और सभी फैकल्टी मेंबर्स ने क्लास का बहिष्कार किया, जब तक कि प्रोफेसर के अपमान के जिम्मेदार लोगों को पकड़ा नहीं गया। पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन जल्द ही उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रोफेसर के खिलाफ जाँच शुरू कर दी। उन्हें जवाब देने के लिए बुलाया गया, लेकिन पुलिस ने उन्हें और परेशान किया।

प्रोफेसर कृष्णात्रेय को भारतीय दंड संहिता की धारा 294 और 504 के तहत गिरफ्तार किया गया। उन पर अशोभनीय व्यवहार, अपमान और शांति भंग करने के इल्ज़ाम लगाए गए। इस कार्रवाई की हर तरफ निंदा हुई। 8 अगस्त को प्रोफेसर ने अपनी सफाई में कहा, “मुझे इस सवाल से जुड़ी समस्याओं की जानकारी नहीं थी। मेरा कोई गलत इरादा नहीं था। मैंने ये सवाल इसलिए पूछा क्योंकि ये एक बड़ी घटना थी, और मैं उम्मीदवार की सतर्कता और याददाश्त जाँचना चाहता था।”

लेकिन 8 अगस्त की सुबह, जिला यूथ कांग्रेस के प्रमुख राकेश शर्मा की अगुवाई में एक भीड़ वाइस चांसलर के दफ्तर पहुँची और हजेला पर चिल्लाने लगी। वो तुरंत कृष्णात्रेय को हटाने की माँग कर रहे थे। हजेला ने मना कर दिया और कहा, “उनके खिलाफ कोई कार्रवाई जाँच पूरी होने और 17 अगस्त 2025 को यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद में रिपोर्ट पेश होने के बाद ही होगी। मैं उन्हें सिर्फ इसलिए नहीं हटा सकता क्योंकि कुछ नेता चाहते हैं।”

इस बीच, शर्मा ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के गलत काम को खारिज किया और कहा कि प्रोफेसर ने खुद ऐसा किया और तस्वीरें भी खिंचवाईं। दूसरी तरफ कृष्णात्रेय अपने चेहरे पर काला पेंट लिए बिना ही इलाज के बाद घर लौटे। उसी शाम वो टीचर्स यूनियन की मीटिंग में भी उसी हालत में गए। एक और प्रोफेसर ने उनके समर्थन में अपना चेहरा काला किया।

अगले दिन से टीचर्स ने हफ्ते भर तक क्लास का बहिष्कार करने का फैसला किया, जब तक कि जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जाता। लेकिन गवर्नर ने यूनिवर्सिटी की कार्यकारी और शैक्षणिक परिषद को भंग कर दिया और सारी ताकत नए वाइस चांसलर एमएल जैन को दे दी। इसके बाद कैंपस में एक अजीब सा सन्नाटा छा गया।

कांग्रेस जोसेफ गोएबल्स की प्रचार नीति से प्रेरणा ले रही है और बीजेपी पर वही इल्ज़ाम लगा रही है, जो उसकी अपनी भ्रष्टाचार भरी हुकूमत में उस पर लगे थे। बच्चों के नाम पर पीएम मोदी पर हाल का हमला भी उसी का हिस्सा है।

झूठों के सरगना राहुल गाँधी ने बिहार में जीप पर चढ़वाकर जिससे कहलवाया ‘वोट चोरी’, वो निकला बड़ा फ्रॉड: चुनाव आयोग ने राजद BLA सुबोध कुमार के हर झूठ की खोली पोल

बिहार के नवादा में वोट अधिकार यात्रा में सुबोध कुमार से वोट चोरी का आरोप लगवाते राहुल गाँधी की तस्वीर (साभार : X_@RahulGandhi)
SIR को लेकर राहुल गाँधी और INDI गठबंधन जो हंगामा कर उपद्रव कर रहे हैं, लेकिन इनका हर प्रोपेगंडा बेनकाब हो रहा है। फिर भी झूठ का पुलंदा लिए राहुल गुमराह कर अपने LoP पद को कलंकित कर रहे हैं। 

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी इस समय बिहार के नवादा में ‘वोट अधिकार यात्रा’ पर निकले हुए है। रैली के दौरान राहुल गाँधी की गाड़ी पर एक शख्स सवार होता है और चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर कहता है कि ‘वोट चोरी’ हुई है और उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।

आश्चर्य नहीं कि चुनाव आयोग की फैक्ट चेक में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला। चुनाव आयोग ने बताया कि सुबोध कुमार नाम का यह शख्य कोई आम मतदाता नहीं है, बल्कि ये राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का बूथ लेवल एजेंट (BLA) हैं और उसका नाम कभी भी वोटर लिस्ट में था ही नहीं।

चुनाव आयोग पर राहुल गाँधी का ‘नकली ड्रामा’

राहुल गाँधी को तथ्यों से कोई लेना-देना नहीं। वो हर चुनाव से पहले बच्चों जैसी जिद पर अड़े रहते हैं कि ‘वोट चोरी हो गई’ और हर बार चुनाव आयोग फैक्ट चेक कर उनके झूठ को उजागर करता है, फिर भी वो वही रट लगाते रहते हैं।

दरअसल, अपनी ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ के दौरान नवादा में एक शख्स को मंच पर माइक थमाकर राहुल गाँधी ने कहा, “इनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है, यही लाखों लोगों के साथ हो रहा है।” यह शख्स सुबोध कुमार था, जिसने राहुल गाँधी के रथ पर चढ़ते ही कैमरे के सामने आरोप जड़ा कि उसका नाम वोटर लिस्ट से गायब है।

राहुल गाँधी ने इस पूरे वाकये को रैली से लाइव दिखाया और फिर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलाया। X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, “जो सुबोध कुमार जी के साथ हुआ, वही लाखों लोगों के साथ बिहार में हो रहा है। वोट चोरी भारत माता पर आक्रमण है– बिहार की जनता ये होने नहीं देगी।”

सुबोध कुमार नाम के व्यक्ति को मंच पर बुलाना, माइक थमाना और कैमरे के सामने आरोप लगवाना… यह सब पहले से स्क्रिप्टेड था। राहुल गाँधी ने इसे ‘भारत माता पर हमला‘ बताया। लेकिन असल हमला जनता की समझदारी पर किया गया छल था। रंजू देवी के झूठ के बाद अब सुबोध कुमार पर राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ की कहानी हर बार फेल होती है।

फैक्ट चेक: चुनाव आयोग ने आरोपों को किया तार-तार

चुनाव आयोग की विस्तृत जाँच रिपोर्ट के अनुसार, सुबोध कुमार नाम का व्यक्ति कोई आम मतदाता नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का बूथ लेवल एजेंट है। 29 अक्तूबर 2024 को प्रकाशित सूची और फिर 2025 के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में भी सुबोध कुमार का नाम कभी भी मतदाता सूची में नहीं था। उसके परिवार के कुछ सदस्य सूची में शामिल है, लेकिन खुद उसका नाम कभी दर्ज नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रकाशित विलोपित मतदाताओं की सूची में भी उसका नाम दर्ज नहीं है।

चुनाव आयोग बताता है कि सुबोध कुमार ने ना तो फॉर्म-6 भरा और ना ही किसी प्रकार का घोषणा पत्र (Annexure-D) दिया। जब बीएलओ ने विलोपित मतदाताओं की सूची बूथ पर चिपकाई तब सुबोध वहीं मौजूद था, लेकिन उसने कोई आपत्ति नहीं दर्ज की। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि वह स्वयं हस्ताक्षर कर चुका है, फिर भी मंच पर दावा किया कि उसका नाम हटा दिया गया। चुनाव आयोग ने कहा कि सुबोध कुमार ने जो आरोप लगाए, वो निराधार एवं असत्य है। यदि वे भविष्य में नियमानुसार फॉर्म-6 एवं घोषणा पत्र प्रस्तुत करेंगे तो उनका नाम जोड़ा जा सकता है।

बार-बार दोहराया गया झूठ

यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गाँधी ने इस तरह का निराधार आरोप लगाया है। इससे पहले, औरंगाबाद में उन्होंने रंजू देवी नाम की एक महिला का मामला उठाया था, यह दावा करते हुए कि उनका नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। लेकिन बाद में रंजू देवी ने खुद एक वीडियो में बताया कि उनका नाम मतदाता सूची में मौजूद है और उन्हें गुमराह किया गया था।

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सोरोस के हाथ बिकाऊ विपक्ष वोट चोरी पर कर रहा उपद्रव; CSDS का ट्वीट, राहुल का वोट चोरी राग और विपक्षी
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राहुल गाँधी का बार-बार एक ही तरह के निराधार आरोप लगाना, एक बच्चे की तरह रट्टा लगाने जैसा लगता है, जो ‘फैक्ट चेक’ के बाद भी अपनी बात पर अड़े रहते हैं। यह न सिर्फ उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर भी गलत आरोप लगाने का प्रयास करता है।

सुर्खियों में कर्नाटक के ‘शशि थरूर’: मंत्री राजन्ना ने Rahul Gandhi के वोट चोरी के दावों पर मारा झन्नाटेदार धप्पड़, अभी और भी आने है; जो चुनाव आयोग और मोदी सरकार की सबसे जीत है; विपक्ष जनतंत्र, लोकतंत्र और संविधान की उडा रहा धज्जियां

कांग्रेस समेत सारा विपक्ष नरेंद्र मोदी का तब से विरोध करता रहा है जब मोदी संघ के सिर्फ एक प्रचारक थे। विपक्ष की आंख का कांटा मोदी बन गए गुजरात के मुख्यमंत्री। 2002 गुजरात दंगे करवा मोदी को लपेटने के साम, धाम, दंड और भेद सारे हतकंडे बुरी तरह से फेल होकर औंधे मुंह गिर गए। फिर इसी विपक्ष ने भारत का विदेशों में इतना बड़ा अपमान किया कि देशविद्रोहियों ने अमेरिका को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को वीसा नहीं देने के लिए एक बार नहीं कई बार पत्र लिखे। लेकिन उसी अमेरिका ने मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही सबसे पहले अमेरिका आने का निमंत्रण देकर इस देश विरोधी विपक्ष के जोरदार झन्नाटेदार धप्पड़ मारा। जिसका ना ही देश की बेशर्म जनता और ना ही विपक्ष पर कोई असर नहीं पड़ा। लेकिन महामूर्ख बेशर्म जनता जनतंत्र, लोकतंत्र और संविधान की धज्जियां उडाने वाले विपक्ष को वोट दे देते हैं। 
जो ड्रामेबाज़ विपक्ष बिहार में SIR को लेकर हंगामा कर रहा है ये ही विपक्ष बंगाल में SIR होने पर आपस में लड़ते चुनाव आयोग को गुप्त समर्थन देंगे। आगे आगे देखिए होता है क्या?

अगर जनता अपनी बंद अक्ल को खोल SIR पर हो रहे हंगामे की असलियत को जानेगी तो राहुल गाँधी सारे विपक्ष की बर्बादी करने वाले साबित होंगे। कांग्रेस और अन्य पार्टियों में नेता ही वोट चोरी को बेनकाब करने लगे हैं। जो चुनाव आयोग और मोदी सरकार की सबसे जीत है। राहुल की hit and run चाल को विपक्ष भी समझ रहा है। लेकिन विपक्ष और राहुल के बीच सांप और छछूंदर की लड़ाई चल रही है। 

अब यह साफ हो गया है कि राहुल गांधी को दूसरे दलों में राजनीतिक विरोधियों की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनकी खुद की पार्टी में एक के बाद एक उनके और उनकी विचारधारा के धुर-विरोधी सामने आ रहे हैं। दरअसल, राहुल गांधी जिन बैसिर-पैर के मुद्दों को उठाते हैं, उनपर कई कांग्रेस नेताओं का ही मतैक्य नहीं होता। जो चापलूस और दब्बू स्वभाव के कांग्रेसी हैं, वे चुप्पी साध जाते हैं और कुछ सिर उठाकर राहुल गांधी की गलतियों और कांग्रेस की नाकामियों को गिनाकर राहुल को ही कठघरे में ले आते हैं। तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर तो इस मामले में काफी सुर्खियों में रहे हैं, लेकिन उन पर राहुल गांधी का अभी कोई बस नहीं चला है। थरूर के ही नक्शेकदम पर चलते हुए कर्नाटक सरकार के सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना ने वोट चोरी के मुद्दे पर राहुल गांधी को ही सच का सामना करा दिया। राजन्ना ने स्पष्ट शब्दों में राहुल गांधी की ओर से लगाए गए वोट चोरी के आरोपों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ही चुनाव से पहले मतदाता सूची में कथित खामियों को दूर करने में विफल रही। इसके लिए पार्टी को शर्मिंदा होना चाहिए। क्योंकि यदि कुछ ऐसा है तो ये अनियमितताएं हमारी आंखों के सामने हुईं हैं। कांग्रेस के युवराज राहुल को अपना ऐसा विरोध बहुत ही नागवार गुजरा। उन्होंने कर्नाटक के सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करवा दिया!

हमारी थी जिम्मेदारी, उस समय हम चुप क्यों रहे- राजन्ना
कांग्रेस नेता केएन राजन्ना ने कहा, ‘कांग्रेस ने उस समय इस पर ध्यान नहीं दिया, इसलिए आगे फिर तैयार रहना होगा।’ चुनाव में गड़बड़ी को लेकर उन्होंने कहा कि महादेवपुरा में सचमुच धोखाधड़ी हुई थी। एक शख्स तीन अलग-अलग जगहों पर पंजीकृत था और उसने तीनों जगह वोट दिया। जब मतदाता सूची का मसौदा तैयार हो रहा हो तो हमें नजर रखनी चाहिए और आपत्तियां दर्ज करानी चाहिए थीं, जो हमारी जिम्मेदारी है। उस समय हम चुप क्यों रहे, लेकिन अब उसके बारे में बात कर रहे हैं। वहीं राजन्ना की इस टिप्पणी से कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता नाराज हैं। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि राजन्ना पूरी तरह से दोषी हैं और पार्टी नेतृत्व उनकी टिप्पणी का जवाब देगा। राजन्ना का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। दिल्ली में विपक्ष के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्च निकाला।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बहुत करीबी माने जाते हैं केएन राजन्ना
कर्नाटक कांग्रेस नेता केएन राजन्ना ने सोमवार (11 अगस्त) को सिद्धारमैया सरकार में सहकारिता मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। दावा किया जा रहा है कि केएन राजन्ना ने पार्टी आलाकमान की ओर से इस्तीफा देने की मांग के बाद पद छोड़ने का फैसला किया। राजन्ना का इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया है। खास बात है कि राजन्ना को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है, लेकिन कहा जा रहा है कि वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस को ही घेरने के चलते उनके खिलाफ राहुल गांधी के कहने पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, इसे लेकर कांग्रेस या राज्य सरकार ने साफतौर पर कुछ नहीं कहा है।

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राहुल जी नेहरू थे बूथ कैप्चरिंग(वोट चोरी) के मास्टरमाइंड; जिसे राहुल गाँधी बता रहे थे ‘एटम बम’, उ
राहुल जी नेहरू थे बूथ कैप्चरिंग(वोट चोरी) के मास्टरमाइंड; जिसे राहुल गाँधी बता रहे थे ‘एटम बम’, उ
 

राजन्ना ने राहुल के वोट चोरी के आरोपों की आलोचना भी की
एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी चाहते थे कि राजन्ना को निकाल दिया जाए। खास बात है कि राहुल दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ वोट चोरी के मुद्दे पर ही प्रदर्शन कर रहे हैं। सूत्रों ने यह भी बताया है कि राजन्ना कई मौकों पर नेतृत्व परिवर्तन की बात कह चुके थे। इसके अलावा केएन राजन्ना ने राहुल गांधी की ओर से लगाए गए वोट चोरी के आरोपों की आलोचना की थी। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा था कि कांग्रेस पार्टी चुनाव से पहले मतदाता सूची में कथित खामियों को दूर करने में विफल रही। इसके लिए तो पार्टी को शर्मिंदा होना चाहिए, क्योंकि ये अनियमितताएं हमारी आंखों के सामने हुईं। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची तब तैयार की गई थी, जब कांग्रेस सत्ता में थी। ऐसे में चुनाव आयोग या बीजेपी को घेरने का कोई औचित्य ही नहीं है।

कांग्रेस के सत्ता में रहते तैयार हुई थी मतदाता सूची
कांग्रेस नेता केएन राजन्ना ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘क्या उस समय हर कोई आंखें बंद करके चुपचाप बैठा था? पार्टी को शर्म आनी चाहिए।’ कर्नाटक मंत्री ने पीटीआई को बताया कि अगर हम ऐसी बातों पर यूं ही बात करने लगे तो अलग-अलग राय सामने आएगी। मतदाता सूची तब तैयार हुई थी, जब हमारी सरकार सत्ता में थी। उस समय क्या कांग्रेस अपनी आंखें बंद किए चुपचाप बैठी थी? उन्होंने आगे कहा कि ये अनियमितताएं हुई थी, यही सच है। इसमें कुछ भी झूठ नहीं है। हमारी जिम्मेदारी है और हमें शर्म आनी चाहिए। क्योंकि ये अनियमितताएं हमारी आंखों के सामने हुईं। ऐसे समय में जब पार्टी को आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी, वह चुप रही।

अगर हमारी आंखों के सामने गड़बड़ियां हुईं तो आपत्ति नहीं की
राजन्ना ने अपनी ही पार्टी पर आरोप लगाते हुए तुमकुरु में पत्रकारों से कहा था, मतदाता सूची तब बनाई गई थी, जब कर्नाटक में पार्टी सत्ता में थी। तब उन्होंने इस पर आंखे क्यों मूंद लीं। अगर हमारी आंखों के सामने गड़बड़ियां हुईं और हमने तब आपत्ति नहीं जताई, तो आज शिकायत करने का क्या औचित्य है। तब कम आबादी वाले इलाकों में संदिग्ध नाम जोड़े गए। ये सब हमारी आंखों के सामने हुआ, लेकिन निगरानी नहीं की गई। ये पार्टी की नाकामी है।

राजन्ना बोले- ये मेरे खिलाफ साजिश, थोड़े दिन में खुलासा करूंगा
इस्तीफा देने के बाद राजन्ना ने कहा, ‘मैं अब आपसे पूर्व मंत्री के रूप में बात कर रहा हूं। मेरे हटाए जाने के पीछे एक बड़ी साजिश है, मुझे पता है इसके पीछे कौन है और क्या किया गया। पूर्व मंत्री कहलाने में मुझे खुशी है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मुझे मौका दिया, इसके लिए मैं उनका और सभी मंत्रियों का धन्यवाद करता हूं। आने वाले दिनों में मैं इस साजिश का पूरा खुलासा करूंगा।’ यह हाईकमान का फैसला है। मैं पार्टी के फैसले के प्रति वफादार हूं। मैं दिल्ली जाकर राहुल गांधी से बात करूंगा।

राहुल ने बेंगलुरु में 8 अगस्त को की थी ‘वोट अधिकार रैली’
इससे पहले 8 अगस्त को राहुल ने कर्नाटक के बेंगलुरु में फ्रीडम पार्क में आयोजित कांग्रेस की ‘वोट अधिकार रैली’ की थी। इस दौरान उन्होंने अनर्गल आरोप लगाया कि तीसरी बार 25 सीट के मार्जिन से प्रधानमंत्री बने हैं। 25 सीट ऐसी हैं, जिन्हें भाजपा ने 35 हजार या कम वोट से जीतीं। अगर हमें इलेक्ट्रानिक डेटा मिल जाए तो हम साबित कर सकते हैं। राहुल ने कहा, ‘चुनाव आयोग को पिछले 10 साल की देश की सारी इलेक्ट्रॉनिक वोटर लिस्ट और वीडियोग्राफी देनी चाहिए। ये सब नहीं देंगे तो क्राइम है।