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कंगाल पाकिस्तान के आतंकी हाफिज सईद की धमकी : ‘मोदी तेरी जुबान खींच लूँगा, इंशाअल्लाह साँसें रोक दूँगा’

जिस तरह आतंकी सरगना हाफिज सईद धमकियाँ दे रहा है, उसे देख नहीं लगता कि पाकिस्तान कंगाली के दौर से गुजर रहा है, या फिर हो सकता है कि कंगाली का स्वांग कर victim card खेलकर दुनिया की सहानुभूति लेकर आतंकवादियों को पालने के लिए खैरात मांगी जा रही हो।  
पाकिस्तान के सरगना हाफिज सईद ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गीदड़-भभकी दी है। उसका एक वीडियो सामने आया है, जिसके बारे में ये नहीं पता चल रहा है कि ये कब का है। लेकिन, इसमें वो भड़काऊ बातें करता हुए दिख रहा है। हाफिज सईद ने इस वीडियो में पीएम मोदी को धमकी देता हुआ दिख रहा है कि अगर पाकिस्तान का पानी रोका गया, तो वो उनकी साँसें रोक देगा। हाफिज सईद 26/11 मुंबई हमले का साजिशकर्ता है।

हाफिज सईद लश्कर-ए-तैइय्याबा का मुख्य सरगना है। हाफिज सईद ने कहा कि तुम ढाका (बांग्लादेश की राजधानी) की यूनिवर्सिटी में खड़े होकर कह रहे हो कि तुमने पाकिस्तान को तोड़ा है और एक नया मुल्क बनाया है। हाफिज सईद ने पीएम मोदी को धमकाते हुए कहा कि हम चुप नहीं रहेंगे और तुम्हारी जुबान खींच कर ही रहेंगे। फ़िलहाल ये पुष्ट नहीं हुआ है कि ये वीडियो पाकिस्तान में कहाँ का है, लेकिन इससे इतना ज़रूर साफ़ होता है कि आतंकी वहाँ बेख़ौफ़ घूम रहे हैं।

हाफिज सईद ने इस वीडियो में किया कि पीएम मोदी ने ढाका यूनिवर्सिटी में बकवास किया। उसने दावा किया कि इस्लामाबाद पर दबाव बनाया जाता है कि हाफिज सईद क्यों बोल रहा है, लेकिन वो बोलता रहेगा। उसने दावा किया कि पानी रोक कर पाकिस्तान को तबाह करने के मंसूबे हैं। उसने कहा कि अगर तू चाहेगा कि तू चुप रहे, तो ऐसा नहीं हो सकता। उसने ‘दरियाओं में खून बहाने’ की भी धमकी दे डाली। हाफिज सईद के इस वीडियो पर लोग उसे खरी-खोटी सुना रहे हैं और पाकिस्तान को आईना दिखा रहे हैं।

 पाकिस्तान कंगाली की स्थिति में पहुँच गया है, ऊपर से तालिबान ने एक के बाद एक हमले कर के उसकी नाक में दम कर रखा है। खाने वाली वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं और नौकरियाँ जा रही हैं। पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है। टैक्स का बोझ भी बढ़ रहा है। कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने कम सैलरी में काम करने की शर्त रख कर अपनी नौकरी बचाई। महँगाई 35% से भी अधिक जा सकती है।

पाकिस्तान : हाफिज सईद का बैंक अकाउंट फिर से चालू, लश्कर और जमात के 4 और आतंकियों पर भी मेहरबानी

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जिस देश के शासकों को जनहित से अधिक आतंकवाद और उनके सरगनों की चिंता हो, उस देश का अंत निकट भविष्य में देखा जा सकता है। जिस आतंकवाद के कारण पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं निकल पाया और जिन कारणों से इसे ब्लैकलिस्ट से ग्रे में डाला गया, फिर भी आतंकवाद को समर्थन देने से बाज़ नहीं आ रहा। जो स्पष्ट साबित कर रहा है कि पाकिस्तान अधिक समय तक अपना अस्तित्व बचाने में सफल हो पाएगा। 
इसी आतंकवाद को संरक्षण देने के कारण पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो गयी है कि उसका शब्दों में उल्लेख करना असंभव है। आये दिन समाचारों में पढ़ते और सुनते रहते हैं।
2008 के मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का बैंक अकाउंट फिर से चालू कर दिया गया है। उसके अलावा लश्कर और जमात-उद-दावा के चार और आतंकियों पर पाकिस्तान ने यह मेहरबानी दिखाई है। यानि पाकिस्तान सरकार आतंक सरगनाओं की मर्जी के बिना जनहित में कोई निर्णय लेने में पूर्णरूप से असमर्थ है। 
इन आतंकियों में अब्दुल सलाम भुट्टवी, हाजी एम अशरफ, याह्या मुजाहिद, जफर इकबाल शामिल है। दावा किया जा रहा है कि यह कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की सेक्शन कमेटी की इजाजत से उठाया गया है।
इन आतंकियों ने परिवार का खर्च नहीं चला पाने का हवाला देते हुए बैंक अकाउंट पर लगी रोक हटाने की गुहार लगाई थी। जिन पर मेहरबानी दिखाई गई है वे सभी यूएनएससी के आतंकी लिस्ट में शामिल हैं।
इन पर टेरर फंडिंग का आरोप है। पाकिस्तान के पंजाब काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने इनके खिलाफ वित्तपोषण का मामला दायर किया था। इसके चलते ये सभी लाहौर के जेल में 1 से 5 साल की सजा काट रहे हैं। वहीं हाफिज को मई में कोरोना संक्रमण का खतरा बताकर लाहौर जेल से रिहा कर दिया गया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आतंकी सरगनाओं ने अपने बैंक खातों को बहाल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र से अपील की थी। उन्होंने कहा था कि परिवार के भरण-पोषण के लिए उन्हें बैंक खाते संचालित करने की इजाजत दी जाए।
एएनआइ को पाक मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार इन सभी ने पाकिस्तान सरकार से किए अनुरोध में अपनी वित्तीय आय और कमाई के सोर्सेज के बारे में जानकारी दी थी। जिसे इनके बैंक खातों के विवरण के साथ UN की समिति के पास भेज दिया गया था।


वहीं, दुनियाभर में टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पिछले दिनों पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखने का फैसला किया था। दरअसल, एफएटीएफ का मानना था कि पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। पाक अपने यहाँ लश्कर और जेईएम जैसे आतंकी समूहों की टेरर फंडिंग को रोकने में नाकामयाब रहा है।


आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज सईद भारत की सर्वाधिक वांछित अपराधियों की सूची में शामिल है। मुंबई की 26/11 की घटना में 166 लोग मारे गए थे। इसका मास्टरमाइंड हाफिज सईद था। उस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से उसे सौंपने को कहा था। वहीं अमेरिका ने दुनिया में ‘आंतकवाद के लिए जिम्मेदार’ लोगों की सूची में हाफ़िज़ सईद को दूसरे स्थान पर रखा है। सईद एक करोड़ डॉलर का इनामी भी है।
हाफिज सईद दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले का भी मास्टरमांइड था। इसके अलावा सईद जुलाई 2006 में मुंबई लोकल ट्रेनों में में हुए सिलसिलेवार धमाकों का आरोपी है। हाफिज सार्वजनिक कार्यक्रमों में अक्सर भारत के खिलाफ जहर उगलता है। भारत सहित अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, रूस और ऑस्ट्रेलिया ने उसके दोनों संगठनों जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा को प्रतिबंधित कर रखा है।

NIA की गिरफ्त में तानिया परवीन: हाफिज सईद को करती थी रिपोर्ट

तानिया परवीन, NIA
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब कभी इंडो-पाक युद्ध या पाकिस्तान के विरुद्ध कोई कार्यवाही, भारत में पल रहे पाकिस्तान के स्लीपर सैल्स हरकत में आ जाते हैं। और ये स्लीपर सामान्य जनजीवन से लेकर सियासत तक में फन फैलाए बैठे हैं। "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से हिन्दुत्व को बदनाम करने वाले यही स्लीपर सैल्स हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो किस धर्म अथवा जाति से हैं। 
ज्ञात हो, 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान भारत सरकार को दो स्तर यानि सीमा और देश के अंदर लड़ाई लड़नी पड़ी थी। घरों से ट्रांसमीटर पकडे गए थे, लेकिन ताशकंत से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के निधन ने उन सभी देशद्रोही को आज़ाद कर दिया। परन्तु वर्तमान सरकार पाकिस्तान से कोई युद्ध करने से पूर्व ही देशद्रोहियों पर नकेल डाल रही है। सरकार को उस समय की फाइल भी खोलनी होगी, ताकि उन पर भी नकेल डाली जा सके। 
तानिया परवीन को शुक्रवार (जून 12, 2020) को केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने अपनी हिरासत में ले लिया। वह दमदम सेंट्रल जेल में बंद थी। कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने उसे उत्तर 24 परगना जिले के बादुरिया से लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
NIA की पूछताछ में तानिया से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी काफी जानकारी मिल सकती है, जिसका खुलासा उसने अब तक नहीं किया है। उसने बंगाल समेत किन-किन राज्यों में कितने स्लीपर सेल तैयार किए हैं इसका भी पता लगाया जाएगा। इसके साथ ही NIA उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि उसने सेना के कितने कर्मचारियों को हनीट्रैप में फँसाया था एवं उसके इस अभियान में और कौन-कौन शामिल हैं।
तानिया परवीन को 20 मार्च 2020 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। बताया जाता है कि तानिया 10 साल पहले बांग्लादेश से घुसपैठ कर भारत में आई थी। वह लश्कर के लिए युवाओं की भर्तियाँ करती थी। सरकारी सूचनाओं को पाने के लिए वो हनी-ट्रैपिंग का सहारा लेती थी। कई बड़े अधिकारियों व नेताओं तक उसकी पहुँच होने की बात कही जाती है। 
तानिया के पास से कई पाकिस्तानी सिम कार्ड्स मिले थे। उसके पास से जब्त की गई डायरी और दस्तावेजों से पता चला है कि उसने काफ़ी संवेदनशील सूचनाएँ जुटा ली थी।

वह मुंबई के 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड और आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद से भी 2 बार बातचीत कर चुकी है। वो पिछले 2 साल से लश्कर के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही थी और उस क्षेत्र में कई बार भड़काऊ भाषण भी दे चुकी है।
पश्चिम बंगाल की सोशल टास्क फोर्स द्वारा पूछताछ में पता चला था कि आतंकी तानिया परवीन के व्हाट्सप्प ग्रुप में हाफ़िज़ सईद के दो करीबियों के नंबर मिले थे। इन्हीं दोनों के माध्यम से मुंबई हमले का मास्टरमंड तानिया को सन्देश भेजा करता था। तानिया को हवाला का जरिए रुपए भी भेजे गए थे। गिरफ़्तारी से पहले वो बांग्लादेश सीमा पर विभिन्न आतंकी संगठनों को एकजुट कर बड़े हमले की साजिश रचने में लगी हुई थी। उसके बैंक खाते में करोड़ों रुपए का लेन-देन हो रहा था, इसके बाद से ही परवीन की गतिविधियों पर संदेह होने लगा था।
तानिया का मुख्य लक्ष्य इस्लामिक राज्य की स्थापना करना था। इसके लिए उसे खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस से प्रेरणा मिली थी। वो उसी तर्ज पर काम करते हुए एक इस्लामिक स्टेट की स्थापना करना चाहती थी। पाकिस्तान से उसके आकाओं ने उसे कई भड़काऊ पुस्तकें भेजी थीं, जिसे पढ़ कर उसकी सोच और भी कट्टरवादी हो गई थी।
तानिया ने मुर्शिदाबाद में कई आतंकी शिविर भी बना रखे थे, जहाँ वो अपने लोगों को भड़काऊ भाषण देने के लिए प्रशिक्षण देती थी। वहाँ वो लोगों को ‘जिहाद’ सिखाती थी और आतंकी गतिविधियों के संचालन के गुर भी सिखाती थी। वो कुछ दिनों बाद अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान जाने वाली थी। वह बांग्लादेश होकर पाकिस्तान जाने वाली थी, जहाँ वो आईएसआई अधिकारियों से मिलने वाली थी। वो आतंकी संगठन के लिए मोटी रकम भी जुटा रही थी।
3 साल से लश्कर से जुडी तानिया को ‘जिहाद’ का प्रशिक्षण इन्हीं किताबों के जरिए मिला। पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए हमले के बाद उसकी फोटो शेयर कर के तानिया ने आतंकियों की प्रशंसा भी की थी। तानिया अक्सर मदरसों का दौरा करती थी और वहाँ भड़काऊ भाषण देकर लश्कर के लिए लोग जुटाती थी।
उसका उद्देश्य युवाओं, ख़ासकर छात्र-छात्राओं को कट्टरपंथी बना कर उन्हें आतंकी संगठनों से जोड़ना था। तानिया ने मुर्शिदाबाद में कई आतंकी शिविर भी बना रखे थे, जहाँ वो अपने लोगों को भड़काऊ भाषण देने के लिए प्रशिक्षण देती थी। वहाँ वो लोगों को ‘जिहाद’ सिखाती थी और आतंकी गतिविधियों के संचालन के गुर भी सिखाती थी। वो कुछ दिनों बाद अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान जाने वाली थी। वह बांग्लादेश होकर पाकिस्तान जाने वाली थी, जहाँ वो आईएसआई अधिकारियों से मिलने वाली थी। 

उत्तर प्रदेश : आतंकी हाफिज सईद के नाम से अलीगढ़ में जारी हुए फतवे

हाफिज सईद
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पुलिस ने मुम्बई हमले के मास्टरमइंड आतंकी हाफिज सईद के नाम से जारी कथित फतवे के सिलसिले में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। हाफिज सईद संयुक्त राष्ट्र में सूचित वैश्विक आतंकी है जिसके सिर पर अमेरिका ने एक करोड़ डॉलर का इनाम रखा हुआ है। जिले के एसपी अरविन्द कुमार ने मीडिया को बताया कि इस मामले की पड़ताल हम गहराई से कर रहे हैं। एसपी अरविन्द कुमार ने बताया कि जो पर्चा बाँटा गया है वह काफी आपत्तिजनक है और जिले में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला हो सकता था।
पुलिस ने लोगों के बीच डर फैलाने के लिए आईपीसी की दफा 505 (1)(b) और पब्लिक सर्वेंट के दिए आदेश की नाफ़रमानी के लिए दफा 188 के तहत कोतवाली पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया है। एफआईआर के अनुसार, बड़ी संख्या में पैम्प्लेट्स मिले हैं जो इस बात का साफ़ संकेत करता है ये शहर का माहौल बिगड़ना चाहते थे।

अलीगढ़ के ऊपरकोट इलाके में 23 फरवरी के बवाल के दौरान बाबरी मंडी में इलाके में सांप्रदायिक विवाद हुआ था। जिसमें एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई थी जिसके बाद से बाबरी मंडी में रह रही हिन्दू आबादी बेहद डरी सहमी रही थी। 11 मार्च को जुम्मे की नमाज से पहले स्थितियाँ ऐसी बनीं थीं कि मुस्लिम फ़सादियों के डर से लोगों ने रातभर जागकर काटीं। इसी दौरान यहाँ के बजरिया क्षेत्र में वो पर्चे बाँटे गए थे, जिसे आतंकवादी हाफिज सईद का फतवा कहा गया था और जिसके संबंध में पुलिस जाँच कर रही है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार बाँटे गए पर्चे में कहा गया था कि इस पत्र को भारत की साढ़े तीन लाख मस्जिद में जुमे के दिन पढ़ाया गया है। खबरों के अनुसार इस पर्चे में प्रधानमंत्री से लेकर देश के लिए आपत्तिजनक बातें लिखी हुईं थीं। यह पर्चे बजरिया के अलावा प्रमुख दुकानों पर भी बाँटे गए थे।

पाकिस्तान: हाफिज सईद को गुजराँवाला अदालत ने दोषी ठहराया, ट्रांसफर किया गया मामला

Breaking Newsजम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म करने के भारत के फैसले से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान ने अगस्त 6 को ही भारत को कश्मीर को लेकर युद्ध की गीदड़भभकी दी थी। वहीं पाकिस्तान आर्मी ने भी कश्मीर को लेकर हरसंभव कदम उठाने की धमकी थी। अब पाकिस्तान की एक अदालत ने हाफिज सईद को रिहा कर दिया है। पिछले महीने 18 जुलाई को ही पाकिस्तान ने हाफिज को लाहौर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आतंकी गतिविधियों को आर्थिक मदद देने के आरोपों के चलते पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने हाफिज की गिरफ्तारी की थी।
यदि सीमा पार से आने वाली यह खबर सच्ची है, तो डोनाल्ड ट्रम्प को इमरान खान से हाफिज की गिरफ़्तारी के नाटक पर प्रश्न कर, विश्व में पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश करना चाहिए। वैसे भी यह पहली बार नहीं है जब हाफिज को गिरफ्तार कर रिहा किया गया हो बल्कि कई बार पहले भी हाफिज के साथ ऐसा हो चुका है। लेकिन ऐसे समय में जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने यह बात स्वीकार की थी कि पाकिस्तान में इस समय 40 हजार से ज्यादा आतंकी सक्रिय हैं, ऐसे में हाफिज को जेल से रिहा करना पाकिस्तान के दोगलेपन को उजागर करता है। 
दूसरे चर्चा यह भी है कि हाफिज की गिरफ़्तारी महज अमेरिका और दुनियाँ को गुमराह करने के लिए की गयी थी ताकि अमेरिका से पाकिस्तान को कुछ मदद मिल जाए। उस मकसद पाकिस्तान सफल हो गया। पाकिस्तान द्वारा किसी आतंकवादी सरगना को गिरफ्तार करने का साहस ही नहीं है। जिस दिन पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर गंभीर हो गया, उसी दिन वहां तख्ता पलट दिया जाएगा। लेकिन भारत में मोदी सरकार ने आर्थिक तंगी से गुजर रहे पाकिस्तान पर कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर जख्मों पर नमक छिड़क दिया। उसी तड़पन में आतंकी सरगना को जेल से बाहर कर दिया। 
कई बार हो चुका है गिरफ्तार
हाफिज सईद ही वह सरगना है जो 26/11 मुंबई हमले  का मास्टरमाइंड था। इस हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे। हाफिज को गिरफ्तार कर रिहा करना अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। इससे पहले दिसंबर 2001, मई 2002, अक्‍टूबर 2002, अगस्‍त 2006 में दो बार, दिसंबर 2008, सितंबर 2009, जनवरी 2017 में भी हाफिज को गिरफ्तार किया गया था।
अमेरिका घोषित कर चुका है वांटेड
हाफिज को अमेरिका ने 2014 में अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया था। अमेरिकी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनता रहा।लश्कर-ए-तैयबा पर बैन लगने के बाद हाफिज ने अपने संगठन का नाम बदल कर जमात उद दावा और  फलह-ए-इंसानियत रख लिया था। धार्मिक संस्था की आड़ में वो गरीब युवाओं को आतंक की राह पर ले जाता है और आतंक की ट्रेंनिग देकर पाक आर्मी के जरिए कश्मीर में आतंकवाद फैलाता है।
 Pakistan PM Imran Khan threatens India of Pulwama type attack after scrapping article 370भारत सहित विश्व को पाकिस्तान प्रधानमंत्री की धमकी 
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। उसने भारत सहित दुनिया के देशों को धमकी दी है। अगस्त 6 को अपने पार्लियामेंट के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुले तौर पर धमकी दी कि भारत में पुलवामा जैसा अगर हमला हुआ तो इसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं होगा। 
शायद इसी मकसद से हाफिज सईद को जेल से बाहर किया है। 
इमरान खान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के इस फैसले से हालात और गंभीर होंगे और देश में पुलवामा जैसे आतंकवादी हमले हो सकते हैं। पाकिस्तानी पीएम ने कहा कि कश्मीर पर मध्यस्थता का अनुरोध उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से किया था। इमरान ने कहा, 'कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत बंद है और इसे देखते हुए मैंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मध्यस्थता करने का अनुरोध किया।'
सूत्रों के अनुसार, सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि यदि अब पाकिस्तान ने पुलवामा और कारगिल जैसी गलती दुबारा की, इसके भयंकर परिणाम भी भुगतने के लिए तैयार रहे। अब हमले की स्थिति में कहीं ऐसा न हो पाकिस्तान सिकुड़कर दिल्ली से छोटा हो जाये या पाकिस्तान ही नक़्शे से न मिट जाए। क्योकि आज परिस्थितियाँ पूर्व में हुए युद्धों के समय से एकदम विपरीप है। जहाँ तक परमाणु की बात है, यह पाकिस्तान ही नहीं, विश्व भी भलीभांति जानता है, परमाणु प्रयोग करते ही, पाकिस्तान आर्थिक संकट की इतनी खाई में चला जाएगा, जहाँ से निकलना पाकिस्तान के लिए जरुरत से ज्यादा कठिन होगा। और उसका जिम्मेदार प्रधानमंत्री इमरान खान, फौज और आईएसआई होगी। दूसरे, अगर युद्ध हुआ और विश्व ने युद्ध बंद करने का दबाव बनाया, उस स्थिति में भारत-पाक सीमा वहां से होगी, पाकिस्तान के अंदर जहाँ तक भारतीय सेना पहुँच चुकी होगी, वह धरती वापस नहीं होगी, बल्कि भारत में सम्मिलित होगी।   
इमरान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के फैसले को वह दुनिया के सभी मंच पर उठाएंगे। उन्होंने कहा, 'इस मसले को हम संयुक्त राष्ट्र, दुनिया के देशों सहित सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएंगे। इमरान ने आगे कहा, 'बिश्केक सम्मेलन के बाद मुझे इस बात का अंदेशा हो गया था कि भारत सरकार कश्मीर को लेकर कोई बड़ा फैसला कर सकती है। जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार ने अचानक फैसला नहीं किया बल्कि यह इनके चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा था। भाजपा की विचारधारा आरएसएस के नजरिए पर आधारित है। मोदी सरकार पूरी तरह से अपनी विचारधारा पर चल रही है। कश्मीर अब बहुत गंभीर मसला बन गया है।'
हकीकत यह है कि वाकई "कश्मीर अब बहुत गंभीर मसला बन गया है।" क्योकि कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त होते ही सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, भारत में भी कुछ पार्टियों की नींद हराम हो गयी है।  
जम्मू-कश्मीर पर बयान देने से पहले इमरान ने अपने देश की अर्थव्यवस्था और आर्थिक हालात पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार बनने पर सबसे बड़ी चुनौती लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की थी और हमने इसके लिए प्रयास किए। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए हम सभी पड़ोसी देशों के पास गए। हम हिंदुस्तान के पास गए और कहा कि आप एक कदम बढ़ाइए हम आपकी तरफ दो कदम आएंगे। मैंने अफगानिस्तान से मतभेद दूर करने और रिश्ते में नया अध्याय जोड़ने की पहल की। मैं ईरान गया उनसे मुद्दों पर बात की। चीन से ताल्लुकात हमारे हमेशा से अच्छे रहे हैं। इनके अलावा मैं अन्य मुल्कों में गया। अमेरिका जाकर उसके साथ रिश्ते अच्छे करने की कोशिश की। हमारी कोशिश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधारने और विकास दर बढ़ाने की रही है। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान में निवेश आए ताकि यहां गुरबत खत्म हो सके।'
पाकिस्तान के पीएम ने कहा कि दोनों देशों के बीच पारंपरिक युद्ध अगर हुआ तो पाकिस्तान के पास दो रास्ते बचेंगे। एक रास्ता होगा कि हम हार मानने के लिए अपने हाथ खड़े कर दें और दूसरा रास्ता होगा कि हम आखिरी खून तक लड़ते रहें। उन्होंने कहा कि दुनिया आज कार्रवाई नहीं करेगी तो भारत और आगे जाएगा।' इमरान ने धमकी भरे लहजे में कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति यदि गंभीर हुई तो उसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं होगा। 
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एक तरफ भारत में कांग्रेस और कुछ भाजपा विरोधी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A समाप्त होने पर जो विरोधी बातें कर रहे ह...

जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग किया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा युक्त केंद्रशासित प्रदेश होगा जबकि लद्दाख विधानसभा रहित केंद्रशासित राज्य होगा। संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को मंजूरी मिल गई है। अनुच्छेद 370 के समाप्त हो जाने पर अब जम्मू-कश्मीर में भारत का संविधान पूरी तरह से लागू हो सकेगा। अब बाहरी प्रदेश के लोगों को वहां की सरकारी नौकरियां मिल सकेगी और वे अपनी लिए जमीन खरीद सकेंगे। 

यूएस कमेटी ने ट्रम्प पर किया पलटवार: पाक हाफिज को तलाश नहीं रहा था, वह स्वतंत्र रूप से रह रहा था

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मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की गिरफ्तारी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के किए गए ट्वीट पर हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने पलटवार किया।
कमेटी ने कहा कि पाकिस्तान 26/11 आतंकी ह’मले के मास्टरमाइंड को 10 साल से नहीं खोज रहा था – जैसा कि ट्रम्प ने दावा किया था। उन्होंने कहा कि हाफिज देश में स्वतंत्र रूप से रह रहा था।
कमेटी ने ट्वीट किया,  "पाकिस्तान 10 साल से उसकी तलाश नहीं कर रहा था। वह स्वतंत्र रूप से रह रहा था और दिसंबर 2001, मई 2002, अक्टूबर 2002, अगस्त 2006 (दो बार), दिसंबर 2008, सितंबर 2009, जनवरी 2017 में गिरफ्तार कर रिहा कर दिया गया।" 
भारत द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से हाफिज की आवाज़ खामोश हो गयी थी या पाकिस्तान मीडिया द्वारा उसे प्रसारित नहीं किया जा रहा था, ये अलग बात है, लेकिन इतना तय है, हाफिज पाकिस्तान में बिल्कुल निडर होकर अपने मिशन पर कार्य कर रहा था। हाफिज कहीं छिपा हुआ नहीं था। गिरफ़्तारी भी एक नाटक है। जेल में उसको सब सुविधाएं उपलब्ध रहेंगीं। यह सब काम एक सोंची-समझी सियासत से हुआ है। वरना जो आदमी हज़ारों की भीड़ को सम्बोधित करता हो, उसकी गिरफ़्तारी पर कोई धरना या प्रदर्शन न होए, प्रमाणित करता है कि हाफिज और फौज के साथ मिलकर पाकिस्तान सरकार द्वारा विश्व को भ्रमित करने का नाटक है। अभी और आतंकी सरगनाओं के साथ इस तरह का ड्रामा होना बाकी है। वास्तव में अपने आपको ब्लैकलिस्ट होने से बचाने के लिए पाकिस्तान ने ड्रामा खेला है। क्योकि जिस दिन पाकिस्तान ब्लैकलिस्टेड हो गया, स्वयं अपनी मौत मर जाएगा। 
हाफिज सईद को जुलाई 17 को गिरफ्तार किया गया था। वह लाहौर से गुजरांवाला जा रहा था। वह गुजराँवाला में आतंकवाद निरोधी अदालत (एटीसी) में जमानत मांगने के लिए गया था। गिरफ्तारी के बाद हाफिज सईद को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। इस दौरान हाफिद सईद ने कहा कि मैं अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ कोर्ट जाऊंगा।
इस पर ट्रम्प ने ट्वीट किया था , "10 वर्ष की तलाश के बाद मुंबई आतंकवादी हमले के तथाकथित ‘मास्टरमाइंड को पाकिस्तान में पकड़ा गया। उसे तलाशने के लिए पिछले दो सालों में भारी दबाव डाला गया था।"
3 जुलाई को, सईद और नायब अमीर अब्दुल रहमान मक्की सहित प्रतिबंधित आतंकी संगठन के शीर्ष 13 नेताओं पर आतंकवाद निरोधी अधिनियम, 1997 के तहत टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लगभग दो दर्जन मामले दर्ज किए गए।
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अब इसे पाकिस्तान की कोई चाल कहें या आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई ये आने वाला समय बतायेगा। लेकिन जमात उद दावा सरगना हाफिज ....

ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में ट्रम्प और पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान के बीच आगामी बैठक के मद्देनजर कदम उठाए हैं । पाकिस्तान को डर है कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स कहीं उसे ब्लैकलिस्ट में न डाल दे। प्रधानमंत्री इमरान खान 21 जुलाई को अमेरिका की यात्रा पर जाएंगे और इस दौरान वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत करेंगे।

लश्कर सरगना हाफिज सईद गिरफ्तार : पाकिस्तान की चाल या भारत का दबाव

अब इसे पाकिस्तान की कोई चाल कहें या आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई ये आने वाला समय बतायेगा। लेकिन जमात उद दावा सरगना हाफिज सईद को टेरर फंडिंग केस में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने गिरफ्तार किया है। हाफिज सईद की गिरफ्तारी उस वक्त की गई जब वो लाहौर से गुंजरावाला जा रहा था।
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक हाफिज सईद के खिलाफ 2008 में टेरर फंडिंग का केस दर्ज किया गया था और उसी सिलसिले में उसकी गिरफ्तारी की गई है। अब सवाल ये है कि हाफिज सईद की गिरफ्तारी क्यों की गई है। इस सवाल का जवाब तलाशने से पहले हाफिज के कारनामों को जानना जरूरी है।
जमात-उत दावा (पहले लश्कर-ए तैयबा) का सरगना हाफिज सईद कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में जुटा और बाद में वो भारत के खिलाफ सीधे तौर पर क्षद्म युद्ध में जुट गया। पाकिस्तान की मस्जिदों में वो भारत के खिलाफ तकरीरें किया करता था। लेकिन 2008 में मुंबई को जब आतंकियों ने निशाना बनाया तो हाफिज का नाम सीधे तौर पर आया। हाफिज के खिलाफ भारत सरकार की तरफ से तमाम दस्तावेज दिए गए। लेकिन पाकिस्तान उन साक्ष्यों को मानने से इंकार करता रहा।
हाफिज के मुद्दे पर भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पूरजोर तरीके से उठाती रही और 2014 में इस मामले में बड़ी कामयाबी मिली। अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के साथ पाकिस्तान से स्पष्ट कहा कि अब सईद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ये बात अलग है कि पाकिस्तान की तरफ से टालमटौल देखने को मिला। 
पिछले वर्ष पाकिस्तान में इमरान खान के रूप में नई सरकार आई और उसके सामने अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती है। अमेरिका और दूसरे देशों ने भी पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी भी चाहिए। यही नहीं हाफिज के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई का असर भी दिखना चाहिए। इन सबके बीच फाटा ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल रखा है जिसमें उसके खिलाफ आंशिक आर्थिक पाबंदियां लगी हुई हैं। फाटा ने भी साफ कर दिया है कि अगर अक्टूबर तक आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा। 
Jamatud Dawa's Hafiz Saeed arrested and sent to judicial custody: Pakistan media (file pic)
Embedded video
Pakistan is fooling the world: Ujjwal Nikam, Special Public Prosecutor in the 26/11 Mumbai terror attack case on the arrest of Hafiz Saeed.
जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान के पीएम इमरान खान 21 जुलाई को अमेरिका जा रहे हैं तो ऐसा हो सकता है कि वो ट्रंप प्रशासन को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनका देश हाफिज सईद हो या मसूद अजहर किसी के भी लिए मुलायम नहीं है। इसके साथ ही सितंबर में संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में किसी तरह की आलोचना झेलने से पहले पाकिस्तान की तरफ से कार्रवाई की गई हो।
हाल ही में बिश्केस में एससीओ की बैठक और उससे पहले मालदीव की संसद को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि अगर आर्थिक और सामाजिक मसलों पर अंतरराष्ट्रीय कांन्फ्रेंस हो सकती है तो आतंकवाद के मुद्दे पर आयोग का गठन क्यों नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा जापान में भी जी-20 की बैठक में एक बार फिर पीएम मोदी ने आतंकी वारदातों के लिए परोक्ष तौर पर पाकिस्तान पर निशाना साधा था। 

हाफिज सईद को UN से झटका : प्रतिबंध हटाने की गुहार लेकर UN गया था

Hafiz Saeedमुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमलों का मास्‍टरमाइंड हाफिज सईद खुद पर लगे प्रतिबंध हटाने की गुहार लेकर संयुक्‍त राष्ट्र पहुंचा था। लेकिन इस वैश्विक संस्‍था से उसे करारा झटका मिला है। यूएन ने प्रतिबंधित आतंकियों की सूची से नाम हटाने की उसकी याचिका खारिज कर दी। बताया जाता है कि भारत की ओर से मिले विस्‍तृत साक्ष्‍यों के आधार पर यूएन ने यह फैसला लिया है, जिसमें उसकी गतिविधियों को लेकर विस्‍तृत जानकारी दी गई है। परन्तु तुष्टिकरण पुजारी भारतीय नेता भारतीयों की सहनुभूति बटोरने यूएनओ पहुंचे जरूर, उसके विपरीत उसी आतंकवादी हमले को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से दुष्प्रचार करते रहे। काश, कसाब जिन्दा न पकड़ा गया होता, पाकिस्तान समर्थक भारतीय नेताओं अपने दुष्प्रचार में सफल हो गए होते।   
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जबकि संयुक्‍त राष्‍ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति को जैश-ए-मोहम्‍मद सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के लिए नया प्रस्‍ताव मिला है। पाकिस्‍तान में सक्रिय स्थित जैश ने ही पुलवामा हमले की जिम्‍मेदारी ली है, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवानों की जान चली गई।
सूत्रों का कहना है कि भारत ने हाफिज की आतंकी गतिविधियों से जुड़ी 'गोपनीय जानकारियां' यूएन को सौंपी थीं, जिसके आधार पर इस वैश्विक संस्‍था ने उसे प्रतिबंधित सूची से हटाने का उसका आवेदन खारिज कर दिया। हाफिज लश्‍कर-ए-तैयबा का भी सह-संस्‍थापक है, जिसने 2008 में मुंबई हमले को अंजाम दिया था। इस हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद ही 10 दिसंबर, 2008 को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद ने उस पर प्रतिबंध लगाया था।
हाफिज ने लाहौर की संस्‍था मिर्जा एंड मिर्जा के जरिये 2017 में यह अपील दायर की थी, जो पाकिस्‍तान में नजरबंदी में रह रहा है। हालांकि यूएन ने हाफिज के वकील से यह स्‍पष्‍ट कर दिया कि उसके खिलाफ प्रतिबंध जारी रहेंगे। साथ ही यह भी कहा कि उसके खिलाफ प्रतिबंध जारी रखने को लेकर पर्याप्‍त और तर्कसंगत साक्ष्‍य हैं। प्रतिबंध सूची से हटाने के लिए हाफिज के आवेदन का विरोध भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने भी किया था। हालांकि पाकिस्‍तान ने इसका विरोध नहीं किया।
पुलवामा हमले के बाद अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन ने फरवरी में जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मसूद अजहर को भी प्रतिबंधित करने के लिए प्रस्‍ताव दिया है, जबकि जैश पहले से ही यूएन की प्रतिबंध सूची में शामिल है। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने हाल ही में एक इंटरव्‍यू में स्‍वीकार किया था कि जैश सरगना मसूद अजहर पाकिस्‍तान में ही है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरोधी पाकिस्तान को अप्रयत्क्ष रूप से हवाई हमलो.....

पाकिस्तान नेता आतंकी सरगनाओं को बचाने में व्यस्त हैं, उसके विपरीत भारत में मोदी विरोधी मोदी की कार्यवाही पर शंका कर भारतीय जनता और विश्व को भ्रमित कर रहे हैं। समझ नहीं आता इन मोदी विरोधियों में देश भावना कब जागृत होगी।