ईरान के सपोर्ट में शिया आबादी पाकिस्तान में कल्तेआम न मचा दे, इसलिए डरे असीम मुनीर ने NYT की रिपोर्ट ही उड़ा दी


पाकिस्तान में एक बार फिर मीडिया सेंसरशिप की बड़ी घटना सामने आई है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की एक रिपोर्ट को पाकिस्तान के प्रिंट एडिशन में छपने से रोक दिया गया। यह रिपोर्ट पाकिस्तान के शिया समुदाय के बढ़ते गुस्से पर आधारित थी।

रिपोर्ट का शीर्षक था- ‘Pakistan’s Leaders Try to Contain Rising Anger Over Iran War at Home’ यानी ‘पाकिस्तान के नेता ईरान युद्ध पर घरेलू गुस्से को काबू में करने की कर रहे कोशिश’। इस रिपोर्ट के लेखक हैं पाकिस्तानी फ्रीलांस पत्रकार जिया उर रहमान और ये रिपोर्ट 20 अप्रैल 2026 को न्यूयॉर्क टाइम्स की वेबसाइट और अंतरराष्ट्रीय संस्करण में छपी, लेकिन पाकिस्तान में बिकने वाले प्रिंट संस्करण से पूरी तरह हटा दी गई।

NYT के पाकिस्तान और अफगानिस्तान ब्यूरो चीफ एलियन पेल्टियर ने खुद एक्स पर पोस्ट करके इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि रिपोर्ट अमेरिका और बाकी दुनिया में तो छपी, लेकिन पाकिस्तान के प्रिंट एडिशन से हटा दी गई। स्थानीय प्रकाशक (एक्सप्रेस ट्रिब्यून या ट्रिब्यून ग्रुप) ने इसे हटाया।

पन्ने पर खाली जगह छोड़ दी गई और नीचे छोटा डिस्क्लेमर छपा- “यह लेख हमारे पाकिस्तानी प्रकाशन साझेदार द्वारा प्रिंट के लिए हटा दिया गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स और इसके संपादकीय स्टाफ की इसमें कोई भूमिका नहीं है।” यह घटना पाकिस्तान में प्रेस की आजादी और धार्मिक संवेदनशीलता पर नई बहस छेड़ गई है।

NYT की रिपोर्ट में क्या लिखा था?

रिपोर्ट में साफ कहा गया कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का मुख्य बिचौलिया बन गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस डिप्लोमेसी को लेकर काफी सक्रिय हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पाकिस्तान की इस भूमिका की तारीफ की है। लेकिन घरेलू स्तर पर हालात बिगड़ रहे हैं।

पाकिस्तान में करीब 3.5 करोड़ (35 मिलियन) शिया मुसलमान रहते हैं। वे ईरान से गहरे आध्यात्मिक संबंध रखते हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और अन्य टॉप क्लेरिक्स की अमेरिकी-इजरायली हमलों में मौत के बाद पाकिस्तान के शिया इलाकों में भारी आक्रोश फैल गया।

दरअसल, 18 मार्च 2026 को आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने खुद शिया मौलानाओं की एक अहम मीटिंग बुलाई। मीटिंग का मकसद शिया समुदाय का गुस्सा शांत करना था ताकि शिया-सुन्नी टकराव न भड़के। मिलिट्री मीडिया विंग के मुताबिक आसिम मुनीर ने शिया मौलानाओं को चेतावनी दी कि किसी दूसरे देश में हुई घटनाओं के आधार पर पाकिस्तान में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हालाँकि कुछ शिया मौलानाओं ने मीटिंग को तनावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पाकिस्तान के प्रति वफादारी पर सवाल उठाए गए। कुछ ने दावा किया कि आसिम मुनीर ने कहा कि जो ईरान के प्रति वफादार हैं, उन्हें पाकिस्तान छोड़ देना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया कि शिया समुदाय का गुस्सा बढ़ रहा है। ईरान युद्ध अब पाकिस्तान में ईंधन की महंगाई और बिजली कटौती के बाद दूसरा सबसे बड़ा घरेलू मुद्दा बन गया है। अधिकारी डर रहे हैं कि यह गुस्सा शिया-सुन्ना हिंसा को फिर भड़का सकता है। शिया अल्पसंख्यक पहले से ही आतंकवादी हमलों का शिकार होते रहे हैं।

रिपोर्ट में आगे लिखा गया कि पाकिस्तान बाहर शांति का दूत बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन घर में आग लगी हुई है। अगर घरेलू स्तर पर ही संप्रदायिक तनाव बढ़ा तो बाहर की डिप्लोमेसी कैसे काम करेगी? यह रिपोर्ट पाकिस्तान की आंतरिक कमजोरियों को उजागर करती है- जहाँ एक तरफ आर्मी चीफ ट्रंप के ‘फेवरेट फील्ड मार्शल’ बनने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ 3.5 करोड़ शियाओं का गुस्सा काबू में करने के लिए मीटिंगें बुलानी पड़ रही हैं।

पहले भी ऐसी हरकतें कर चुका है पाकिस्तान

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने NYT की रिपोर्ट को सेंसर किया हो। 2017 में मई महीने में पाकिस्तानी पत्रकार मोहम्मद हनीफ ने NYT के पाकिस्तान एडिशन में एक आर्टिकल लिखा था। उसका शीर्षक था ‘Pakistan Triangle of Hate: Taliban, Army and India’। इसमें पाकिस्तानी सेना के भारत विरोधी एजेंडे, तालिबान के साथ गठजोड़ और एहसानुल्लाह एहसान (टीटीपी नेता, जो लाहौर हमले और मलाला यूसुफजई पर हमले का जिम्मेदार था) जैसे आतंकियों से संबंधों का जिक्र था। लोकल पब्लिशर ने इसे छापने के बाद पन्ने से पूरी तरह साफ कर दिया। जगह खाली छोड़ दी गई। नीचे नोट लिखा गया कि NYT का इसमें कोई हाथ नहीं है।

जनवरी में जेन-जी के लिए लेख को हटवाया गया

जनवरी 2026 में एक और बड़ा मामला सामने आया। पाकिस्तानी पीएचडी स्कॉलर जोरैन निजामानी (अमेरिका में पढ़ रहे, अभिनेता फाजिला काजी और कैसर खान निजामानी के बेटे) ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून में ‘It Is Over’ नाम का लेख लिखा था। लेख में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की पुरानी पीढ़ी और सत्ता पर काबिज लोग युवाओं (Gen Z) पर अब कोई असर नहीं छोड़ रहे।

उन्होंने लिखा कि जबरन देशभक्ति, भाषण और सेमिनार अब काम नहीं कर रहे। युवा इंटरनेट और जानकारी की वजह से सब समझ रहे हैं। वे बराबरी, अधिकार और सही व्यवस्था चाहते हैं। जो बोलता है उसे चुप करा दिया जाता है, इसलिए कई युवा चुपचाप देश छोड़ रहे हैं।

इस लेख को भी कुछ ही घंटों में वेबसाइट से हटा दिया गया था। हालाँकि इसके बाद इस लेख के स्क्रीनशॉट वायरल हो गए। सोशल मीडिया पर जोरैन को नेशनल हीरो कहा जाने लगा। PTI, मानवाधिकार संगठनों और पत्रकारों ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया।

ये सभी घटनाएँ एक पैटर्न दिखाती हैं कि पाकिस्तान में आर्मी चीफ आसिम मुनीर के नेतृत्व में मीडिया पर सख्त नियंत्रण है। संवेदनशील मुद्दे चाहे सेना की आलोचना हो, युवाओं का असंतोष हो या शिया समुदाय का गुस्सा, इन सबको दबाया जा रहा है।

सरकार का तर्क है कि ऐसी रिपोर्ट्स से संप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है, लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह असल में सच्चाई छिपाने की कोशिश है। पाकिस्तान प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 180 देशों में 158वें स्थान पर है। स्वतंत्र पत्रकारों पर दबाव, बैंक खाते फ्रीज करने, सरकारी विज्ञापन रोकने और झूठी खबर फैलाने के कानून के तहत गिरफ्तारियाँ आम बात हैं।

पाकिस्तान की कथनी और करनी में अंतर, खोल रहा खुद के चैनल

अब सवाल यह है कि पाकिस्तान बाहर दुनिया के सामने ‘शांति का दूत’ और ‘मॉडर्न डिप्लोमेटिक पावर’ का चेहरा दिखाने की कोशिश क्यों कर रहा है, जबकि अंदर मीडिया को इतना कस रहा है?

इस सवाल का जवाब NYT का एक और आर्टिकल देता है जो मार्च 2026 में छपा था- ‘How Pakistan Is Trying to Reshape Its Image Abroad’। इस रिपोर्ट में एलियन पेल्टियर और जिया उर रहमान ने विस्तार से बताया कि पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ विदेशी छवि सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर मीडिया अभियान चला रही हैं।

पाकिस्तान ने इंडिया और अफगानिस्तान के तालिबान सरकार के खिलाफ नई अंग्रेजी न्यूज चैनल शुरू किए हैं। PTV (पाकिस्तान टीवी) को फिर से लॉन्च किया गया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद चैनल के हेडक्वार्टर जाकर कहा कि इसका डिजिटल डिपार्टमेंट विदेशी प्रोपगैंडा का मुकाबला करेगा और पाकिस्तान का मैसेज दुनिया तक पहुँचाएगा। सुरक्षा एजेंसियाँ पत्रकारों से संपर्क करके स्टेट-फ्रेंडली चैनल शुरू करने को कह रही हैं। टैक्स छूट और फंडिंग का लालच दिया जा रहा है।

इन चैनल्स का मुख्य टारगेट भारत और अफगानिस्तान में तालिबान है। वे पाकिस्तानी मिलिट्री की भाषा में खबरें चला रहे हैं, जैसे भारत पर हमले, तालिबान के खिलाफ कार्रवाई आदि। लेकिन स्वतंत्र मीडिया पर दबाव बढ़ रहा है। डॉन अखबार की सरकारी विज्ञापन बंद कर दिए गए। कई पत्रकार गिरफ्तार कि गए। रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान ट्रकी और कतर जैसे देशों की तरह स्टेट-बैक्ड चैनल (TRT, अल जजीरा) की नकल करना चाहता है, लेकिन फंडिंग और विजन की कमी है।

पाकिस्तान में दूर नहीं ‘कयामत’ के दिन!

यह पूरा मामला दिखाता है कि पाकिस्तान दोहरी नीति चला रहा है। बाहर ट्रंप से दोस्ती और शांति की बातें, लेकिन वो अंदर से सेंसरशिप और दबाव की नीति लागू कर रहा है। वैसे, माना ये भी जा सकता है कि कहीं NYT की रिपोर्ट हटाने से शिया समुदाय का गुस्सा और बढ़ गया तो? इतिहास गवाह है कि दबाया हुआ सच एक न एक दिन बाहर आता ही है। पाकिस्तान की मीडिया स्ट्रैटजी कितनी कामयाब होगी, यह भविष्य बताएगा, लेकिन फिलहाल यह साफ है कि आसिम मुनीर की कठपुतली सरकार अभिव्यक्ति की आजादी को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का नाम देकर कुचल रही है।      (साभार) 

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