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बंगाल : BJP के डर से भागने लगे बांग्लादेशी, उत्तर 24 परगना जिले में 100+ घुसपैठिए परिवारों की भीड़ जमा दिखी

जिस बंगाल-बांग्लादेश बॉर्डर पर बांग्लादेशी घुसपैठियों की भीड़ लगने उन सभी सनातन विरोधियों के मुंह में जम गया है। अब नहीं कह पा रहे कि घुसपैठियों के नाम पर बीजेपी हिन्दू-मुस्लिम कर मुसलमानों को डरा रही है। प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरुरत नहीं होती। ये CAA विरोध में बने शाहीन बागों से लेकर तथाकथित किसान आंदोलन आदि जितने भी धरने और प्रदर्शन हुए उन सब में  अधिकतर जमावड़ा पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों का होता था। धीरे-धीरे जितने भी आन्दोलनजीवी हैं सब घरों में छुपकर बैठ जाएंगे। 
सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि घुसपैठियों के निकलने पर भारत में उपद्रवों पर लगने वाली लगाम से परेशान होकर विदेशों में बैठे भारत विरोधी ताकतों ने क्रॉकरोच जनता पार्टी बनाई है।      
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनते ही बांग्लादेशी घुसपैठियों को डर सताने लगा है, इसीलिए ये लोग वापस अपने देश लौट रहे हैं। ताजा नजारा उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर चेक पोस्ट का है, जहाँ 100 से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठी अपने परिवारों के साथ बांग्लादेश लौटने के लिए इकट्ठे हुए।

दरअसल, यह नजारा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का हालिया आदेश के बाद सामने आया है। 21 मई 2026 को सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को आदेश दिया कि कहीं भी कोई बांग्लादेशी घुसपैठी पकड़ा जाए, तो सीधा सीमा सुरक्षा दल (BSF) को सौंप दो। उन्होंने कहा कि अब इन्हें अदालत नहीं ले जाया जाएगा बल्कि सीधे वापस बांग्लादेश भेजा जाएगा।

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने यह आदेश पिछले साल अप्रैल में संसद में पारित आव्रजन और विदेशी अधिनियम 2025 के तहत दिया। इस कानून के तहत विदेशियों के भारत में प्रवेश, प्रवास और निकास को नियंत्रित किया जा सकता है। इस आदेश के बाद बंगाल सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए ‘होल्डिंग सेंटर‘ बना रही है, जिसमें ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ के तहत देश से निकाला जाएगा।

ओडिशा : बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने वाले सरगना सिकंदर आलम समेत 2 गिरफ्तार; घुसपैठियों को भारत में घुसाकर करवाता था अपराध: सरकारी जमीन पर बना रखी थी अवैध बस्ती

बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने वाला सरगना सिकंदर आलम (साभार: एक्स @otvkhabar, indian express)
ओडिशा पुलिस ने शनिवार (22 नवंबर 2025) को एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को शरण देता था और उन्हें आपराधिक गतिविधियों में शामिल करता था। पुलिस ने गिरोह के मुख्य आरोपित सिकंदर आलम उर्फ सिको को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह 16 नवंबर 2025 को जगतसिंहपुर जिले के बहरामपुर झुग्गी बस्ती में हुई छापेमारी के बाद से फरार था। पुलिस ने बताया कि टीम ने लगातार कई स्थानों पर छापेमारी की और अंत में बार-बार ठिकाना बदल रहे सिको को जाजपुर से पकड़ा।

पुलिस ने उसके पास से पासपोर्ट और कई संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए हैं। सिको के छोटे भाई अब्दुल मोतालिफ खान उर्फ टिकी को भी खोरधा से गिरफ्तार किया गया है।

जाँच में हुआ महिलाओं की तस्करी का खुलासा

जाँच में सामने आया है कि सिको और उसके साथी बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में लाने, उन्हें रहने की जगह देने और गलत कामों में लगाने की साजिश का हिस्सा थे। पुलिस ने यह भी बताया कि बाहर से तस्करी कर लाई गई कुछ महिलाओं का लंबे समय से शोषण किया जा रहा था।

पुलिस ने बताया कि सिकंदर ने घुसपैठियों को पनाह देने के लिए सरकारी जमीन पर झोपड़ियाँ बनवाई थी। छापेमारी के समय घर में लगभग 30 बांग्लादेशी रह रहे थे और वे सभी भागने में सफल रहे। पुलिस उन सब की भी तलाश कर रही है।

पुलिस को सिकंदर के घर से क्या मिला?

इससे पहले पुलिस ने 16 नवंबर 2025 की छापेमारी के दौरान सिको के घर से पाँच तलवारें, एक देशी तमंचा और सात धारदार हथियार भी बरामद किए थे। इसके बाद 17 नवंबर 2025 को जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए कई मकानों को ध्वस्त कर दिया। इनमें सिको का 10 कमरों वाला पक्का मकान और सात अन्य झोपड़ियाँ शामिल हैं।

ऐसे में ज्वलंत प्रश्न है कि किसी भी अपराधी के पकडे पर ही क्यों अवैध निर्माण का पटाक्षेप होता है? इससे पहले प्रशासन कहां कुंभकरण की नींद में सो रहा होता है? जबकि आप वैध निर्माण करो या अवैध पुलिस सबसे पहले आती है, रिश्वत जरूर चाहिए, क्यों नहीं पुलिस को भी कटघरे में खड़ा किया जाता?     

इससे पहले इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि वे यह भी जाँच कर रहे हैं कि क्या सिको को इस अवैध नेटवर्क को चलाने के लिए विदेश से फंडिंग मिलने के अलावा किन-किन नेताओं और पार्टियों का संरक्षण मिलता था। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट के बाद, झारखंड हाई कोर्ट का आदेश :बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर करो ; ST लड़कियों को फँसाकर बना रहे मुस्लिम, खुल रहे मदरसे

                                                         बांग्लादेशी रोहिंग्याओं पर हाई कोर्ट सख्त
लगता है देश संविधान से नहीं कोर्ट के आदेश से चलेगा या कहे चल रहा। जो विपक्ष संविधान हाथ में लेकर झुनझुना बनाकर लहरा रहा है, को पता नहीं संविधान में क्या लिखा है? इन पाखंडियों से पूछो "क्या संविधान घुसपैठियों को अवैध रूप से रहने या रखने की इजाजत देता है?" यदि नहीं, फिर क्यों 
'घुसपैठियों-बांग्लादेशी और रोहिंग्यों- को अपना वोटबैंक बनाकर आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य भारतीय पहचान-पत्र बनवाए जा रहे हैं? क्या इसी तरह संविधान की रक्षा होती है?  

भारत में घुसने वाले बांग्लादेशियों के खिलाफ झारखंड कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वो गैर कानूनी रूप से भारत में घुसे हुए बांग्लादेशियों को चिह्नित करें और उनपर कार्रवाई करके उन्हें वापस भेजने के लिए कार्ययोजना तैयार करें।

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की पीठ ने बुधवार (3 जुलाई 2024) को डानियल दानिश की याचिका पर सुनवाई के बाद ये निर्देश दिए। याचिका में अदालत को बताया गया था कि संताल परगना जैसे जिले जो बांग्लादेश से सटे हुए हैं, उनमें बांग्लादेश के प्रतिबंधित संगठन सुनियोजित तरीके से झारखंड की जनजातीय लड़कियों से शादी करके उनका धर्मांतऱण करवा रहे हैं। इसे रोका जाना अनिवार्य है।

इसमें ये भी कहा गया था कि संताल परगना के बांग्लादेश की सीमा से सटे हुए जिलों में अचानक मदरसों में भी बढोतरी हुई । नए 46 मदरसे हैं। याचिका में कहा गया कि इन मदरसों के जरिए देश विरोधी कार्य हो रहे हैं। न केवल जनजातीय महिलाओं का शोषण हो रहा है बल्कि घुसपैठिए जमीन पर कब्जा भी कर रहे हैं।

अदालत ने इस मामले में सरकार को दो सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है जिसमें उन्हें बताना है कि उन्होंने कितने बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिह्नित किया, उनमें से कितनों को रोका और कितनों को वापस भेजने का प्रयास हो रहा है।

इसके अलावा कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से भी जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि ये बहुत गंभीर मसला है। इसको सिर्फ राज्य की सरकारें नहीं हैंडल कर सकतीं। केंद्र को भी इसमें राज्य के साथ काम करना चाहिए। इसलिए वो भी उन्हें रिपोर्ट दें कि केंद्र इस मामले में क्या-क्या कदम उठा सकता है।

इस सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से भी अदालत में बात रखी गई। केंद्र ने कोर्ट को बताया कि घुसपैठ के मामले में केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को अधिकार दिए हैं वो ऐसे लोगों को खुद चिह्नित करके कार्रवाई कर सकते हैं। हालाँकि याचिका डालने वाले व्यक्ति ने बताया कि राज्य सरकार तो राज्य में घुसपैठ से ही इनकार कर रही है। वो संताल इलाके में किसी धर्मांतरण की बात भी नहीं स्वीकार कर रही। ऐसे में केंद्र को ही घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए जाने चाहिए। अब मामले में अगली सुनवाई 18 जुलाई को होनी है।

धर्मांतरण के मसले पर इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी की थी। उन्होंने ईसाई धर्मांतरण के खतरे को देख कहा था कि अगर अगर इसी तरह से धर्मांतरण का खेल जारी रहा तो आने वाले समय में देश में बहुसंख्यक जनसंख्या अल्पसंख्यक हो जाएगी। कोर्ट में ये महत्वपूर्ण टिप्पणी जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने की थी। उन्होंने कहा था कि जहाँ भी और जैसे भी भारतीय लोगों का धर्मांतरण करवाया जाता है उसे फौरन रोका जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश : आगरा में बांग्लादेशियों ने बसा रखी बस्ती

                                                                                                                    साभार: आगरा पुलिस
2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से तथाकथित देशप्रेमी नेता और पार्टियां धर्म-निरपेक्षता और संविधान की दुहाई देकर जनमानस को भ्रमित करते आ रहे हैं। वर्तमान में विदेशी हिंडनबर्ग की रपट से देश को लाभान्वित करने वाले गौतम अडानी के विरुद्ध खुले मोर्चे को तो देख ही रहे हैं, इससे पूर्व देश नागरिक संशोधक कानून के विरोध में जगह-जगह बने शाहीन बागों को भी देखा। ये शाहीन बाग बने थे अवैध रूप से रह रहे 
रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानियों को संरक्षण देने के लिए।  

उत्तर प्रदेश के आगरा में बांग्लादेशी घुसपैठियों की एक बस्ती मिली है। पुलिस ने 28 घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है। एक खाली जमीन पर झुग्गी बनाकर ये बस गए थे। इनके पास से फर्जी आधार, पैन कार्ड और वीजा भी मिला है। पूछताछ में बताया है कि बॉर्डर पार करने के लिए 15 से 20 हजार रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब उन्होंने हालिम को दिए थे।

आगरा पुलिस ने 5 फरवरी 2023 को इस बस्ती का पर्दाफाश किया। आगरा सिटी के DCP विकास कुमार ने बताया कि फर्जी दस्तावेज बनाने वालों की भी तलाश की जा रही है। हालिम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह आगरा में 12 साल से स्वीपर बनकर रह रहा है। उसके बैंक अकाउंट में पैसों का अच्छा-खासा लेन-देन भी हुआ है। ये पैसे हवाला के माध्यम से बांग्लादेश भेजे गए हैं। हालिम के साथ बाकी अन्य आरोपितों के भी बैंक खातों की जाँच करवाई जा रही है।

मामला सिकंदरा थाना क्षेत्र का है। गिरफ्तार हुए सभी 28 बांग्लादेशियों ने आगरा की आवास-विकास कॉलोनी सेक्टर 14 के ग्राउंड को अपना ठिकाना बना लिया था। इनके पास से 35 फर्जी आधार कार्ड और एक फर्जी पैन कार्ड बरामद हुआ है। इन सभी पर IPC की धारा 419, 420, 467, 471 के साथ 14 (C) विदेशी विषयक अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। DCP विकास के मुताबिक इन सभी के प्रत्यर्पण के लिए भी संबंधित विभाग को पत्र लिखा जाएगा।

कुछ रिपोर्टों में बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या 32 बताई गई है। समूह में 15 पुरुष, 13 औरतें और 12 साल से ज्यादा उम्र वाले 4 बच्चे बताए जा रहे हैं। 8 ऐसे भी बच्चे हैं जिनकी उम्र 1 से 8 साल के बीच की है। पुलिस ने बताया कि ये घुसपैठिए कूड़ा बीनने का काम करते थे। गिरफ्तार लोगों में अभी तक बबलू, फारुख, रवीउल शेख जैसे नाम सामने आए हैं। इनका कहना है कि इन्हें नदी के रास्ते नाव से पश्चिम बंगाल में बॉर्डर पार करवाया गया था।

पुलिस द्वारा शेयर अख़बारों में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार रास्ते में चेकिंग होने पर ये लोग खुद को मछुआरा बताते हैं। जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश की रहने वाली रहीमा इन घुसपैठियों के फर्जी कागजात तैयार करती है।