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राहुल गाँधी के ‘सेनानी’ ने हमास आतंकियों की शहीद भगत सिंह से कर दी तुलना : मोदी की ‘बोटी-बोटी’ करने वाले इमरान मसूद की बातें आपने सुनीं क्या? देखिए वीडियो

         इमरान मसूद आतंकी संगठन हमास की तुलना शहीद भगत सिंह से कर रहे (साभार : Bhaskar & ABP)
कांग्रेस आतंकवाद पर शुरू से ही दोगला रवैया अपनाती रही है। Victim Card खेलकर आतंकियों के गुनाहों को जेब में रख बदला लेने वालों को ही गुनाहगार 
बताया जाता है। बेशर्मी से कहते है कि मासूम बेगुनाह मुसलमानों पर ज़ुल्म किया जा रहा है। यही वजह है कि देश में आतंकवाद बेगुनाहों का खून बहाता है। आखिर कुर्सी की खातिर कांग्रेस कितना नीचे गिरेगी?  

कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने 23 अक्तूबर 2025 को पत्रकार सुशांत सिन्हा के पॉडकास्ट में हिस्सा लिया। मसूद वही नेता हैं जिन्होंने एक समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टुकड़े-टुकड़े करने की धमकी दी थी। पॉडकास्ट के दौरान, एक चर्चा में मसूद ने आतंकी संगठन हमास की तुलना शहीद भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानी से कर दी। यह तुलना तब की गई जब भारत द्वारा पाकिस्तान में की गई हालिया पहलगाम आतंकी हमले के बाद की गई सैन्य कार्रवाई पर बात हो रही थी।

इस बातचीत में, पत्रकार सुशांत सिन्हा ने मसूद से कांग्रेस के शासन के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई न होने को लेकर सवाल किया। ऑपरेशन सिंदूर पर मसूद का विचार पूछा गया। सिन्हा ने बताया कि मसूद मानते हैं कि भारत को युद्धविराम पर सहमत नहीं होना चाहिए था। हालाँकि, मसूद ने यह भी स्वीकार किया है कि भारत की कार्रवाई से पाकिस्तान घुटनों पर आ गया था। सिन्हा ने सवाल किया कि इसका मतलब है कि मसूद मानते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर बेहद सफल रहा था।

ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान, कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने पत्रकार सुशांत सिन्हा पर पलटवार किया। मसूद ने दावा किया कि पाकिस्तान तो पिछले 15 सालों से ही दुनिया के मंच पर अलग-थलग पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का पाकिस्तान को घुटनों पर लाने में कोई हाथ नहीं था। इस पर सिन्हा ने कड़ा विरोध जताया। सिन्हा ने कहा कि मसूद का यह दावा सही नहीं है। सिन्हा ने याद दिलाया कि 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद, जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी, तब उन्होंने नाम मात्र की कार्रवाई की थी।

मसूद ने जवाब दिया कि 26/11 के बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले ही आतंकी देश घोषित कर दिया गया था, इसलिए कांग्रेस को और कुछ करने की जरूरत नहीं थी। सिन्हा ने इस दावे को गलत साबित किया। सिन्हा ने पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम के एक बयान का हवाला दिया। चिदंबरम ने खुद माना था कि कांग्रेस सरकार सैन्य कार्रवाई करना चाहती थी, लेकिन अमेरिका ने उन्हें रोक दिया था। सिन्हा ने मसूद से कहा, “यही है असली सरेंडर।” जवाब में, मसूद ने चिदंबरम पर निशाना साधा। मसूद ने इशारा किया कि चिदंबरम बूढ़े हो गए हैं और शायद उम्र के कारण ही वह गलत दावे कर रहे हैं।

राहुल गाँधी: ‘जनरल’ और ‘हथियार लॉबी’ का सवाल

ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के बाद, पत्रकार सुशांत सिन्हा ने कांग्रेस नेता इमरान मसूद से अगला सवाल पूछा। सिन्हा ने राहुल गाँधी के उस व्यवहार पर सवाल किया, जिसमें वह सैन्य कार्रवाई के बाद भारतीय सेना पर ही सवाल उठा रहे थे। सिन्हा ने आरोप लगाया कि राहुल गाँधी बार-बार यह सवाल पूछ रहे थे कि पाकिस्तान ने कितने राफेल विमान गिराए। सिन्हा ने कहा कि यह सवाल असल में हथियार लॉबी ने तैयार करवाया था।
इस विषय पर, इमरान मसूद ने चर्चा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय हित’ में वह इस मुद्दे पर बात नहीं करना चाहेंगे। मसूद के इस संयम की तारीफ करते हुए, सिन्हा ने उनसे कहा कि उन्हें यही सिद्धांत राहुल गाँधी को भी सिखाने चाहिए। इस पर मसूद ने तुरंत जवाब दिया। मसूद ने राहुल गाँधी को अपना ‘जनरल’ (सेनापति) बताया और खुद को ‘फुट सोल्जर’ (सैनिक) कहा।

राहुल गाँधी के कहने पर हुआ फिलिस्तीन का समर्थन?

अपने ‘जनरल’ राहुल गाँधी की महानता साबित करने के लिए, कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने एक अजीबोगरीब दावा किया। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी जो कुछ भी कहते हैं, मोदी सरकार अंत में वही करती है। इस बात को साबित करने के लिए मसूद ने इजरायल-हमास युद्ध का उदाहरण दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत द्वारा फिलिस्तीन का समर्थन करने का श्रेय राहुल गाँधी को दे दिया।

मसूद ने कहा, “जब एक विचारधारा के लोग इजरायल का समर्थन कर रहे थे, तो भारत को UN जाकर फिलिस्तीन का समर्थन करना पड़ा। क्योंकि यह हमारी विदेशी नीति की माँग है।” मसूद ने तर्क दिया कि हमास ने हमला किया और जवाब में इजरायल ने नरसंहार शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि भारत ने तब फिलिस्तीन का साथ दिया, जब प्रधानमंत्री मोदी के ‘दोस्त’ कहे जाने वाले पीएम नेतन्याहू ने भी मोदी का विरोध किया।

इमरान मसूद का यह दावा तर्कहीन लग रहा था। इस पर पत्रकार सुशांत सिन्हा ने जोर दिया। सिन्हा ने कहा कि हमास एक आतंकी संगठन है और उसे किसी भी तरह का समर्थन नहीं मिलना चाहिए।

पत्रकार सुशांत सिन्हा के साथ बहस के दौरान, कांग्रेस नेता इमरान मसूद आतंकी संगठन हमास के बचाव में उतर आए। मसूद ने सवाल किया कि क्या शहीद भगत सिंह भी आतंकवादी थे? इस तरह उन्होंने हमास को ‘आजादी के लिए लड़ने वाला संगठन’ बताया। जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या हमास की तुलना भगत सिंह से की जा सकती है, तो मसूद ने हाँ में जवाब दिया। उन्होंने तर्क दिया, “वे अपनी जमीन के लिए लड़ रहे हैं। भगत सिंह भी अपनी जमीन के लिए लड़ रहे थे।”

मसूद ने आगे कहा कि भगत सिंह ने अपनी जमीन के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने इजरायल को कब्जा करने वाला (Occupier) बताया। मसूद ने कहा, “आपके लिए हमास एक आतंकवादी संगठन है। मेरा मानना है कि हमास अपनी आजादी के लिए लड़ रहा है।” मसूद ने सिन्हा से कहा, “आप हमास द्वारा लिए गए 250 बंधकों को देख रहे हैं, लेकिन आप उन 1 लाख लोगों को नहीं देख रहे जिन्हें इजरायल ने मार डाला है।” जब पत्रकार सिन्हा ने हमास के आतंकी अत्याचारों की लिस्ट गिनाई, तब भी इमरान मसूद लगातार हमास का बचाव करते रहे।

UN रिपोर्ट: हमास के हमले में सामूहिक हत्या और यौन हिंसा

7 अक्टूबर 2023 की सुबह, आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर बड़ा हमला किया। पहले हमास ने रॉकेटों से हमला किया। इसी की आड़ में सशस्त्र आतंकवादी इजरायली क्षेत्र में घुस गए। हमास के साथ फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद जैसे कई दूसरे आतंकी संगठन भी थे। वे गाजा की सीमा बाड़ तोड़कर घुसे। उन्होंने सेना के ठिकानों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी निशाना बनाकर हमला किया।

इस सुनियोजित हमले में 1,300 से ज्यादा लोग मारे गए। मरने वालों में महिलाएँ, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल थे। हजारों लोग घायल हुए और सैकड़ों लोगों को हमास ने बंधक बना लिया। इन बंधकों को गाजा ले जाया गया। संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक मिशन ने बाद में पाया कि हमले में भयंकर यौन हिंसा की गई थी। रिपोर्ट में बलात्कार, सामूहिक बलात्कार और लाशों को क्षत-विक्षत करने जैसे क्रूर कृत्यों का पता चला। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों ने कम से कम तीन अलग-अलग जगहों पर ऐसे भयानक कृत्यों को होते देखा था।

7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में नोवा म्यूज़िक फेस्टिवल चल रहा था। इसमें इजरायल और अन्य देशों से करीब 3,500 लोग शामिल थे। यह फेस्टिवल गाजा सीमा बाड़ के पास था, इसलिए यह सामूहिक हत्या और यौन हिंसा का केंद्र बन गया।

संयुक्त राष्ट्र (UN) मिशन द्वारा जुटाए गए सबूतों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वहाँ बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की कई घटनाएँ हुईं। कई मामलों में, पीड़ितों को मारने से पहले उनके साथ ये क्रूरता की गई। सबसे परेशान करने वाली रिपोर्टों में से एक यह थी कि आतंकवादियों ने महिलाओं के शवों के साथ भी बलात्कार किया। कई शव कमर से नग्न पाए गए। उन्हें बाँधकर सिर में गोली मारी गई थी। इससे साफ पता चलता है कि यौन हिंसा का यह एक व्यवस्थित तरीका था।

फेस्टिवल में आए लोग और आस-पास के निवासी जान बचाने के लिए रोड 232 की ओर भागे। लेकिन भागने के इस रास्ते पर भी उन्हें अकल्पनीय क्रूरता का सामना करना पड़ा। इस पूरे रास्ते पर ऐसे शव मिले जिन पर गंभीर चोटें थीं, जिनमें जननांगों को काटना और जलने के गहरे निशान शामिल थे। रास्ता 232 से भागने वालों के साथ भी बलात्कार की घटनाएँ हुईं। UN टीम ने देखा कि कई शव आंशिक या पूरी तरह से नग्न थे, जो यौन हिंसा की घटनाओं की ओर इशारा करते हैं।

नोवा फेस्टिवल जैसी ही भयानक क्रूरता रे’इम, बे’एरी और कफ़र आज़ा के किबुत्ज़ (सामुदायिक बस्तियों) में भी रिपोर्ट की गई। किबुत्ज़ रे’इम में खबर मिली कि एक महिला के साथ बम शेल्टर के बाहर बलात्कार किया गया। किबुत्ज़ बे’एरी और कफ़र आज़ा में एजेंसियों को महिलाओं के नग्न शव मिले। ये शव बंधे हुए थे और उन्हें गोली मारी गई थी। यह साफतौर पर यौन हिंसा की ओर इशारा करता है।

नहल ओज सैन्य बेस पर भी बहुत ज़्यादा नुकसान हुआ और कई सैनिक मारे गए या उनका अपहरण हुआ। इस बेस पर भी बलात्कार और जननांगों को काटने की खबरें थीं। हालाँकि कुछ रिपोर्टों की पुष्टि नहीं हो पाई, लेकिन चोटों के निशान यौन हिंसा की संभावना बताते हैं।

मिशन टीम को स्पष्ट और ठोस सबूत मिले हैं कि गाजा ले जाए गए बँधकों को बलात्कार, यौन प्रताड़ना और अन्य अमानवीय व्यवहार का शिकार बनाया गया। मिशन का यह भी मानना है कि जिन बँधकों को अभी तक आजाद नहीं किया गया है, उनके खिलाफ ऐसी क्रूरता अभी भी जारी हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट ने 7 अक्टूबर के हमले के दौरान हमास और उसके सहयोगी आतंकी संगठनों द्वारा की गई क्रूरता की भयानक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल और अन्य देशों की महिलाओं के साथ यौन हिंसा की कई घटनाएँ दर्ज हुईं।

शवों के साथ बलात्कार और मृत शरीरों का अपमान करने जैसी क्रूरता सामने आई है। ये दस्तावेज दिखाते हैं कि पीड़ितों को न्याय दिलाने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की तत्काल जरूरत है।

रिपोर्ट में साफ है कि गाजा पर इजरायल का गुस्सा हमास की इन्हीं आतंकी हरकतों का नतीजा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि गाजा में इजरायल के हमलों में मारे गए लोग एक तरह से ‘संपार्श्विक क्षति’ (collateral damage) हैं। यह क्षति इजरायल के उस दृढ़ संकल्प के कारण हुई है, जिसके तहत वह हमास को धरती से मिटा देना चाहता है।

“नटवरलाल चालू माल केजरीवाल” पर भगत सिंह से संबंध जोड़ने के लिए “बैन” लगाए अदालत; मनमोहन सिंह भी मोदी पर बरसे और मोदी के “ध्यान” को अखिलेश ने कह दिया भाजपा की जीत निश्चित है

 सुभाष चन्द्र

केजरीवाल को अब “नटवरलाल” के साथ साथ “चालू माल” भी कहना उचित होगा। ये बार बार अपने को शहीद भगत सिंह का चेला कहता फिरता है और अब किसी वकील को कोर्ट में याचिका दायर कर मांग करनी चाहिए कि इस मक्कार को शहीद भगत सिंह से अपना किसी भी तरह का संबंध जोड़ने से रोक लगनी चाहिए। 

शहीद भगत सिंह का लेशमात्र अंश भी केजरीवाल में मौजूद नहीं है। भगत सिंह ने कभी किसी  विदेशी ताकत से देश के खिलाफ, उन्होंने कभी शराब को बढ़ावा नहीं दिया, वो किसी तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं रहे, जिन सावरकर को केजरीवाल गाली देता है, उनका भगत सिंह आदर करते थे। फिर कैसे अपने को शहीद भगत सिंह का चेला कह सकता है यह नालायक। वो तो देश के लिए फांसी पर लटक गए, उन्होंने कभी नहीं कहा कि असेंबली में बम उन्होंने नहीं फेंका जबकि केजरीवाल ढोल पीट रहा है कि कोई घोटाला हुआ ही नहीं जी और जेल जाने से बचने के लिए नए नए प्रपंच रच रहा है।

ये “चालू माल” घर में बुला कर स्वाति मालीवाल की अपने PA विभव कुमार से पिटाई करवाता है और पंजाब में इसका मंत्री बलकार सिंह नौकरी के लिए परेशान लड़की से वीडियो काल कर उसके सामने Sexual actions करता है। लेकिन केजरीवाल न स्वाति के बारे में कुछ बोलता है और न बलकार सिंह की हरकत पर। शहीद भगत सिंह के चेले ऐसे नहीं होते हैं और  इसलिए केजरीवाल पर अपने को भगत सिंह का चेला कहने पर रोक लगनी चाहिए।

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चर्चित YouTuber 
केजरीवाल में भगत सिंह पिन पॉइंट भी कोई लक्षण नहीं। भगत सिंह एवं अन्य स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा अपने दल में शामिल किसी भी महिला का यौनाचार करने की बजाए उन्हें अपनी माँ, बहन या भाभी की तरह इज्जत दी जाती थी, जबकि केजरीवाल की पार्टी में मालीवाल ही नहीं कोली आदि कई महिलाओं का यौन शोषण किया गया।   

केजरीवाल ने कल एक ही राग फिर अलापा है कि मोदी की तानाशाही और गुंडागर्दी के खिलाफ लड़ने के लिए 10 बार भी जेल जाना पड़े तो जाऊंगा जबकि एक से दूसरी बार जाने में ही पैंट गीली हो रही है। ये कह रहा है, मुझे चुनाव से दूर रखने के लिए भाजपा ने जेल भेजा था जबकि शराब घोटाले में जेल तुझे भेजा कोर्ट ने और छोड़ा भी कोर्ट ने। 

कल तक केजरीवाल मोदी से पूछ रहा था कि आपके रिटायर होने के बाद कौन प्रधानमंत्री बनेगा और आज भागवत जी से पूछ रहा है कि क्या मोदी को RSS वाले भगवान मानते हैं। भाई तू पागल हो रहा है, हमें पता है और इसलिए पहले अपना उत्तराधिकारी चुन ले क्योंकि तेरी गद्दी बस अब कुर्बान होने का समय आ गया।

मनमोहन सिंह ने कहा है मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने पद की गरिमा गिराई है। मनमोहन सिंह जी आप जब 10 वर्ष सत्ता में रह कर “चुप” रहे तो अब भी रह लेते जो ऐसी गिरी हुई बात कर रहे हो उस मोदी के लिए जिसने देश का डंका पूरे विश्व में बजा दिया। जबकि आपको तो अमेरिका में नवाज़ शरीफ ने बूढ़ी औरत कह दिया था लेकिन मोदी ने आपके लिए नवाज़ शरीफ का बाजा बजा दिया था और आप उस मोदी के लिए ऐसा बोल रहे हो।

अखिलेश यादव कह रहा है कि हार के डर से तपस्या करने चले गए मोदी जी। मतलब मोदी की जीत पक्की है क्योंकि इसी तरह मोदी 2019 का चुनाव प्रचार ख़त्म होते ही केदारनाथ धाम चले गए थे तपस्या के लिए और 2014 के मुकाबले 20 सीट ज्यादा जीते थे, मतलब तब भी हार के डर से गए होंगे लेकिन जीत गए और अब हार के डर से गए हैं, तब भी जीत पक्की है।

वैसे अखिलेश की जुबान जरूरत से ज्यादा चलती है। अखिलेश ने 8-9 जनवरी, 2022 को रामलला के दर्शनों के लिए जाना था जब मंदिर नहीं बना था। तब 13 दिसंबर को नरेंद्र मोदी को सलाह देते हुए कहा था कि अंतिम दिनों में रहने के लिए काशी उत्तम जगह है। मैंने तब जो लिखा था वह फिर लिख रहा हूँ कि अंतिम दिनों में रहने के लिए काशी सही जगह है या नहीं, इसे छोड़ कर इतना सोच लो कि भगवान् राम भी अंतिम समय में ही याद आते हैं। रावण ने भी अंतिम समय में पुकारा था -"श्रीराम"।

हर कोई चोर उचक्का भी अपने को भगत सिंह की औलाद समझने लगा है; 2 दिवंगत आत्माओं की फोटो के बीच जिसकी फोटो लग जाए क्या उसे भी मृत समझ लिया जाए; क्या सुनीता अपने आपको विधवा समझ चुकी है?

सुभाष चन्द्र

शहीद भगत सिंह और बाबा साहेब अंबेडकर जैसे देश भक्त दिवंगत नेताओं की फोटो के बीच में केजरीवाल की फोटो लगाने का मतलब यही निकाला जा सकता है कि जैसे उसकी पार्टी और परिवार ने उसे भी “दिवंगत” समझ लिया। 

जो इस बात को भी साबित करता है कि केजरीवाल परिवार ही नहीं, पार्टी में जितने भी हिन्दू हैं, किसी को भी हिन्दू संस्कृति की क,ख ग तक नहीं मालूम। सनातन धर्म के अनुसार कभी किसी जीवित की दिवंगत के साथ फोटो नहीं लगाई जाती। क्या पत्नी सुनीता स्वयं अपना अनर्थ कर रही है यानि विधवा मान रही है? क्यों नहीं केजरीवाल परिवार के बुजुर्गों ने सुनीता को ज्ञान दिया? क्या वो सब ढोंगी हिन्दू हैं?

फिर ऐसे महान लोगों के बीच में केजरीवाल की फोटो लगाने का यह भी मतलब निकलता है कि यह व्यक्ति खुद को भगत सिंह और अंबेडकर जैसा समझ रहा है। जबकि केजरीवाल इन महान हुतात्माओं के पैरों की धूल भी नहीं।  

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यानी आज कोई भी चोर उचक्का अपने को भगत सिंह की औलाद समझ लेता है, और यह बात खुलकर केजरीवाल ने कहते हुए वीर सावरकर का घोर अपमान किया था जब 22 जुलाई, 2022 को उपराज्यपाल ने शराब नीति की जांच CBI से कराने के आदेश दिए थे। 

केजरीवाल ने उस दिन कहा था “आजकल केंद्र सरकार का नया रूल चल रहा है, पहले वो फैसला करते हैं किसको जेल में डालना है फिर उसके खिलाफ केस बनाया जाता है, मैंने सिसोदिया के खिलाफ आरोप देखे हैं और पाया है कि सब “fake” हैं।

केजरीवाल ने आगे कहा कि “उन्हें (केंद्र) जेल जाने से डर लगता होगा, हम नहीं डरते, हम भगत सिंह के “पुत्र” हैं जिसने देश के लिए जीवन कुर्बान कर दिया, हम वीर सावरकर के मार्ग पर नहीं चलते जिसने अंग्रेज़ो से माफ़ी मांगी”। यानि केजरीवाल ने स्वयं मान लिया है कि इसे भारतीय इतिहास का ज्ञान नहीं। इस पागल मुख्यमंत्री बने केजरीवाल से पूछो कि "अगर सावरकर ने माफ़ी मांगी होती तो 10 साल काले पानी में रहने का शौक नहीं था, सावरकर को। ऐसे मूर्खों को वोट देने वाले मतदाताओं को भी शर्म से डूब मरना चाहिए। 

केजरीवाल, तुम और सारे आपिये मिलकर भी वीर सावरकर के चरणों की धूल के एक कण के एक करोड़वें अंश के बराबर भी नहीं हो। ऐ मूर्ख जिस सावरकर का तुम अपमान कर रहे हो वो अपने जीवन के 27 साल जेल में रहे और 11 साल तो “काला पानी” की सेलुलर जेल में रहे जहां अंग्रेजों ने उन्हें कोल्हू में बैल की जगह उपयोग कर तेल निकलवाया। तुम क्या मुकाबला करोगे सावरकर जैसी महान आत्मा से जब तुम्हारा 2 दिन के अंदर “शुगर लेवल” डगमगा गया वह भी घर का खाना खाते हुए। शर्म करो और डूब मरो सावरकर के लिए जहर उगलने से पहले।

तुम्हे यह भी आभास नहीं है कि शहीद भगत सिंह और वीर सावरकर एक दूसरे का पूरा सम्मान करते थे और सावरकर के जिस कथित माफीनामे का तुम ढोल पीटते फिरते हो, उसके विरुद्ध शहीदे आज़म ने एक शब्द भी नहीं कहा। वीर सावरकर के रत्नागिरी आवास पर हमेशा “भगवा” लहराता था परंतु 24 मार्च, 1931 को वहां “भगवा” की जगह “काला” ध्वज था 23 मार्च को भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी दिए जाने पर श्रद्धांजलि स्वरुप।

तुम भगत सिंह से भी क्या मुकाबला करोगे। वो देश के लिए शहीद हो गए जबकि तुमने तो सत्ता के 10 साल में देश को लूटने की सभी सीमाएं पार कर दी। तुम तो रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के दीवाने हो लेकिन भगत सिंह 1926 में एक लेख में लिखा था “Muslims lack a great deal of Indianness so they do not understand the importance of Indianness in all India and prefer the Arabic script and the Persian language. The importance of being one language of all India and that too Hindi they never understand”

शहीदे आज़म के पोते ने केजरीवाल की फोटो भगत सिंह के साथ लगाने पर ऐतराज किया है, उन्हें इसे शहीदे आज़म का अपमान कह कर भगत सिंह जी की मानहानि का केस दर्ज करना चाहिए और इसके लिए केजरीवाल को दंडित करने की मांग करनी चाहिए।

‘क्रांतिकारी केजरीवाल’ बन गए यू-टर्न के उस्ताद
केजरीवाल ने अपने बच्चों की कसम खाकर कहा था कि सरकार बनाने के लिए वो कांग्रेस को ना समर्थन देंगे ना कांग्रेस से समर्थन लेंगे। लेकिन सत्ता के लोभ में दिल्ली में कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाई। केजरीवाल कहा करते थे कि वो सरकारी बंगला, गाड़ी और लालबत्ती नहीं लेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री बनने पर न सिर्फ खुद के लिए बल्कि अपने तमाम मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के लिए भी सरकारी एश-ओ-आराम हासिल किए। इसी तरह शीला दीक्षित के खिलाफ 370 पन्नों का सबूत का दावा करने वाले केजरीवाल ने उनके भ्रष्टाचार के मुद्दे को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया। जन लोकपाल, जाति-धर्म की राजनीति न करने और भ्रष्टाचार का साथ नहीं देने जैसे कई मामलों पर केजरीवाल लगातार यू-टर्न लेते रहे।

‘मफलर मैन’ से ‘माफी मैन’ बन गए केजरीवाल
एक वक्त अरविंद केजरीवाल देश में ईमानदारी के उदाहरण के तौर पर स्थापित हो गए थे। अपनी हर बात में सबूतों का पिटारा साथ रखने का दावा करते थे। इसी क्रम में उन्होंने अपने विरोधी नेताओं पर तरह-तरह के आरोप भी लगाए। हालांकि उनकी कलई तब खुल गई, जब उनपर मानहानि करने वाले सभी नेताओं से उन्होंने एक-एक कर माफी मांगनी शुरू कर दी। सबसे पहले पंजाब के विक्रम सिंह मजीठिया के से माफी मांगी। इसके बाद तो कपिल सिब्बल, नितिन गडकरी और अरविंद केजरीवाल से भी माफी मांग ली। हालांकि यहां भी उन्होंने झूठ का ही सहारा लिया और कहा कि जनता का काम करने के लिए कोर्ट के चक्कर से बचना चाहते हैं। दरअसल जब यह साबित हो गया कि उनके पास किसी के विरुद्ध सबूत नहीं है, और उन्हें झूठे आरोप लगाने के चक्कर में जेल भी हो सकती है, तो उन्होंने यू टर्न ले लिया।

भ्रष्टाचारियों का साथ देने में गौरव महसूस कर रहे केजरीवाल
झूठ और मक्कारी केजरीवाल की रग-रग में बसी हुई है। भ्रष्टाचारियों का साथ नहीं देने का वादा भी वह नहीं निभा पाए। 2015 में चारा घोटाला के सजायाफ्ता लालू यादव से गलबहियां करते दिखे। वहीं अपने कई भ्रष्ट मंत्रियों को बचाने की वे पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। अब कांग्रेस की शरण में जाने की जुगत लगा रहे हैं। कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में मंच पर मौजूद तमाम भ्रष्टाचारी नेताओं के बीच खड़े होकर उन्हें गौरव का अनुभव हो रहा था। जहिर है राजनीति बदलने का वादा कर आए केजरीवाल राजनीति के लिए खुद एक ‘कलंक कथा’ साबित हुए हैं।

करप्शन में आकंठ डूब गई केजरीवाल की सरकार
सत्ता मिलते ही केजरीवाल ने ना सिर्फ जनता से किए अपने वादे को तोड़ा बल्कि खुद आकंठ भ्रष्टाचार में डूब गए। उन्होंने अपने सहयोगियों के भ्रष्टाचार से भी आंखें फेर लीं। पहले तो अपने रिश्तेदार सुरेन्द्र कुमार बंसल को अनैतिक रास्ते से भ्रष्टाचार में मदद पहुंचाई। इसके बाद सत्येंद्र कुमार जैन को भी बचाने की कोशिश की। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर भी विज्ञापन घोटाले के आरोप हैं, वहीं दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव रहे राजेंद्र कुमार भी भ्रष्टाचार के मामले में जांच के दायरे में हैं। इसी तरह दिल्ली में स्ट्रीट लाइट घोटाले की भी जांच चल रही है। इन सब मामलों में अरविंद केजरीवाल की भूमिका भी संदिग्ध रही है और आरोपियों को बचाने की उनकी कोशिश तो नैतिक गिरावट की पराकाष्ठा है।

अवलोकन करें:-

सुनीता केजरीवाल की ‘राजनीति’ पर भड़के भगत सिंह के पोते, कहा- महान लोगों से तुलना बंद करें

राजनीतिक गुरु अन्ना हजारे को केजरीवाल ने दिया धोखा
वर्ष 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में जन लोकपाल के लिए अन्ना हजारे के आंदोलन में आगे रहने वाले अरविंद केजरीवाल के जेहन में शुरू से ही अपनी अलग पार्टी बनाने की बात थी। अन्ना आंदोलन के दौरान केजरीवाल ने कई बार कहा कि वह राजनीति करने नहीं आए हैं, उन्हें ना सीएम-पीएम बनना है और न ही संसद में जाना है। अन्ना भी राजनीति में जाने के विरोधी थे। बाद में केजरीवाल की महात्वाकांक्षा ने जोर पकड़ा और अन्ना का इस्तेमाल कर अपना असली मकसद पूरा करने के लिए 26 नवंबर 2016 को आम आदमी पार्टी का गठन कर लिया। अरविंद केजरीवाल ने अपने गुरु को अकेला छोड़ दिया।

सुनीता केजरीवाल की ‘राजनीति’ पर भड़के भगत सिंह के पोते, कहा- महान लोगों से तुलना बंद करें

सुनीता केजरीवाल, युद्धविंदर सिंह (फोटो साभार : X_PTI/INDIA TV)
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल जेल में हैं। आम आदमी पार्टी उनकी जेल के सलाखों वाली फोटो इस्तेमाल कर रही है। इस बीच, 4 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वो अरविंद केजरीवाल की बातों को रख रही थी। इस वीडियो में पीछे की दीवार पर तीन तस्वीरें दिख रही थी, जिसमें अरविंद केजरीवाल की सलाखों वाली तस्वीर बीच में है। उस तस्वीर के एक तरफ शहीद भगत सिंह की तस्वीर है, तो दूसरी तरफ भारत रत्न बाबा साहेब डॉ भीमराम आंबेडकर की। अब इस मुद्दे पर लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। इसी वीडियो पर शहीद भगत सिंह के पोते युद्धविंदर सिंह संधू की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर आम आदमी पार्टी से ऐसा करने से बचने के लिए कहा है।

भगत सिंह के पोते युद्धविंदर सिंह संधू ने शहीद-ए-आजम के साथ अरविंद केजरीवाल की तुलना पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह देखकर उन्हें और भगत सिंह के प्रेमियों को बहुत बुरा लगा है। युद्धविंदर सिंह ने आम आदमी पार्टी से भविष्य में ऐसा नहीं करने की अपील की है।

आम आदमी पार्टी इस तरह के काम से बचे

युद्धविंदर सिंह ने वीडियो संदेश में कहा, “सुनीता केजरीवाल (अरविंद केजरीवाल की पत्नी) का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दीवार पर भगत सिंह और बाबा साहेब आंबेडकर के साथ अरविंद केजरीवाल की तस्वीर लगाई गई थी। उनकी तुलना दिग्गजों से करने की कोशिश की गई है। यह देखकर बहुत बुरा लगा। आम आदमी पार्टी को इस तरह नहीं करना चाहिए। किसी भी राजनेता को भगत सिंह जी और अंबेडकर जी के साथ अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “आप अपनी व्यक्तिगत राजनीति अपनी तरह करें, उसमें कोई हर्ज नहीं है, पर इन महान लोगों से तुलना नहीं करनी चाहिए। हम इनके दिखाए रास्तों पर चलने का प्रयास कर सकते हैं। और तो और मुझे पूरे भारतवर्ष से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। काफी सारे भगत सिंह और बाबा साहेब के प्रेमियों को बहुत बुरा लगा है कि उनके साथ अरविंद केजरीवाल जी की तुलना की गई है। भविष्य में आम आदमी पार्टी इससे बचे।”
अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। एक अप्रैल को कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। केजरीवाल फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। आम आदमी पार्टी केजरीवाल को सलाखों के पीछे दिखाकर अपने लिए सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही है।
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी भगत सिंह और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के विचारों पर चलने का दावा करती है। दिल्ली सरकार के दफ्तरों में दोनों महापुरुषों की तस्वीर लगाई गई है, लेकिन अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद उनकी तस्वीर इन दोनों महापुरुषों के बीच में लगाई जा रही है, जिसके बाद लोगों में नाराजगी है।

‘आंदोलन किसान का नहीं, पंजाब की आज़ादी का’: भगत सिंह का अपमान, मोदी को बताया 'आतंकी'

                              भिंड़रवाले के 'जयंती कार्यक्रम' में शामिल अकाली दल अमृतसर के नेता
‘किसान आंदोलन’ में शामिल कट्टर सिख संगठनों ने शुक्रवार (फरवरी 12, 2021) को शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के नेतृत्व में खालिस्तानी अलगाववादी जरनैल सिंह भिंडरावाले की जयंती कार्यक्रम मनाई। इसमें ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगे। ‘किसान आंदोलन’ को कौम और पंजाब की आजादी का आंदोलन करार दिया गया। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का अपमान करने वाले आरोपितों के परिजनों को सम्मानित किया गया। फेसबुक पर इसका लाइव प्रसारण भी हुआ।

जब किसान आंदोलन विरोधी इसे किसानों के कंधे बैठ खालिस्तान और अराजक तत्वों का जमावड़ा है, बता रहे थे, तब इस आंदोलन को समर्थन दे रहे सियासती पार्टियां इसे किसानों का अपमान बता कर आंदोलन को तेज करने की हवा दे रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे शीशे पर जमी धूल की परतें साफ होने लगी हैं। लेकिन अब जब कलई खुलने लगी है, तो क्या अभी भी कृषि कानून के विरोध में सियासत करने वाले देशहित में अपना समर्थन जारी रखेंगे?

दिल्ली की सीमाओं पर जारी कथित किसान आंदोलन के बीच इस कार्यक्रम का आयोजन एसएडी (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान की ओर से फतेहगढ़ साहिब में आयोजित किया गया। इस दौरान मंच से खालिस्तानी भिंडरावाले का गुणगान और भारत सरकार के खिलाफ जमकर जहर उगला गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे जो रह-रह कर खालिस्तान जिंदाबाद और भिंडरवाले के सम्मान में नारे लगा रहे थे।

इस कार्यक्रम में गणतंत्र दिवस के दिन (जनवरी 26, 2021) को दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा के अपमान करने वाले आरोपित जुगराज सिंह के दादा सरदार मेहल सिंह और एक अन्य आरोपी के भाई को सरदार सिमरनजीत सिंह मान ने सिरोपा और 50 हजार रुपए देकर सम्मानित किया। इसी दौरान बलजीत सिंह खालसा वंगार वाले की पुस्तक ‘राज करेगा खालसा’ का विमोचन भी किया गया। ये पुस्तक खालिस्तानी विचारधारा को आगे बढ़ाती है।

जो करना है कर लो 

सरदार सिमरनजीत सिंह मान ने मंच से वहाँ बैठे लोगों से शपथ दिलाई कि लाल किला पर ‘कौमी झंडा’ हर पंजाबी ने चढ़ाया है। मान ने मंच से कहा कि 26 जनवरी की हिंसा को लेकर दर्ज किए गए केस अगर मोदी सरकार ने 10 दिन में वापस नहीं लिए तो फतेहगढ़ साहिब गुरुद्वारा से सात सिखों को प्रधानमंत्री के दफ्तर भेजा जाएगा। ये सातों लाल किले पर ‘कौमी झंडा’ फहराने की जिम्मेदारी लेंगे और कहेंगे कि जो करना है कर लो।

एसएडी (अमृतसर) से जुड़े किसान नेता जसकरण सिंह ने इस कार्यक्रम में कहा ये ‘जंग’ किसान आंदोलन ना होकर कौम और पंजाब की आजादी की लड़ाई है। जसकरण सिंह ने कहा कि चाहे उन्हें संयुक्त किसान मोर्चा से बोलने दे या ना दें, लेकिन वे दिल्ली जीतकर जाएँगे। साथ ही कहा कि ज्यादा से ज्यादा पार्टी के लोग दिल्ली पहुँचें। उन्होंने ऐलान किया कि पार्टी जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुए हैं उनके साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ी है।

ट्रैक्टरों की अगुवाई अकाली दल अमृतसर ने ही की थी

जसकरण सिंह ने कहा कि दिल्ली में चल रहे किसान मोर्चा में वो अकेले नहीं गए थे। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी को पहला ट्रैक्टर हरजीतसिंह गगड़वाल का था, जिसने नाका तोड़ा। साथ ही बताया कि लाल किले के लिए ट्रैक्टरों की अगुवाई अकाली दल अमृतसर ने ही की थी और वहाँ कोई किसान नेता था ही नहीं। जसकरण सिंह ने मंच से संबोधित करते हुए कहा:

“दिल्ली में 26 जनवरी को कुछ हुआ, उसके लिए सबसे बड़ा रोल अकाली दल अमृतसर ने निभाया। मैं अपील करता हूँ कि सिमरनजीत सिंह मान के सर्मथन में लोगों को दिल्ली में पहुँचना चाहिए। वहाँ हमें आपकी जरूरत है। आप दिल्ली चलो। ये जंग हिंद और पंजाब के बीच है। कोई किसानी मसला नहीं है। अगर ये जंग हार गए तो सिख कौम हार जाएगी। हम जीत गए तो सिख कौम जीतेगी। ऐसे हर झंडे का खात्मा हो जाएगा जो खालिस्तान और खालसा का विरोध करेगा।”

                      ‘किसान आंदोलन’ में भी शामिल थे इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले अकाली नेता
खालिस्तानी अलगाववादी जसकरण सिंह ने मंच से लोगों को भड़काते हुए कहा कि अगर आपको खालिस्तान बनाना है तो इसके लिए जरनैल सिंह भिंडरावाले की बात को याद करना होगा, जिन्होंने कहा था कि जिस दिन दरबार साहिब पर हमला होगा उसी दिन खालिस्तान की नींव रखी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि खालिस्तान कहना, बोलना, सुनना ये सब मानवतावादी है। वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘आतंकवादी’ शब्द का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने ‘संविधान का उल्लघंन करके’ किसान मोर्चा के आगे बैरिकेड्स लगाए है।

भगत सिंह का अपमान 

कार्यक्रम में मंच से शहीद भगत सिंह का भी अपमान किया गया। अकाली दल अमृतसर के जसकरण सिंह ने कहा कि भगत सिंह ने शहीदी इंडिया के लिए दी थी, कौम के लिए नहीं दी थी। उन्होंने कहा, “कौम के लिए शहीदी जरनैल सिंह भिंडरावाले ने दी है। भगत सिंह को उस समय कहना चाहिए था कि गाँधी, नेहरू और RSS बुरे हैं। मुझे तो अपना घर खालिस्तान लेना है।” उन्होंने भगत सिंह पर ‘इंडिया के नीचे लगे रहने’ का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर वो उक्त बातें बोलते तो आज परिस्थिति कुछ और होती।


                                           वरिंदर सिंह सेखों गाजीपुर सीमा पर ‘किसान आंदोलन’ में भी शामिल था

इस कार्यक्रम के आयोजन में भूमिका निभाने वाले और लोगों को भड़काने वाले खालिस्तानी वरिंदर सिंह सेखों गाजीपुर बॉर्डर स्थित राकेश टिकैत के मंच पर भी मौजूद था। वो शिरोमणि अकाली दल अमृतसर यूथ विंग का प्रधान है। सेखों 26 जनवरी की हिंसा में भी शामिल था, जब पुलिस बैरिकेड्स तोड़े गए थे।