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कांग्रेस के हारते ही शुरू हो गई दिल्ली को ब्लॉक करने की साजिश, बरेली के जहरीले मौलाना ने खोला ‘टूलकिट’: तौकीर रजा ने कहा- देशभर से मुस्लिम पहुँचे रामलीला मैदान


इस्लामी संगठन इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल के प्रमुख और बरेली के रहने वाले मौलाना तौकीर रजा ने एक बार फिर धमकी दी है। उसने कहा है कि मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ यति नरसिंहानंद द्वारा दिए गए कथित अपमानजनक बयान के विरोध में दिल्ली मार्च किया जाएगा और देश को जाम किया जाएगा। इसके पहले वो इस्लामी धर्मांतरण कराने और देश विरोधी भड़काऊ बयान दे चुका है।

 हरियाणा चुनाव में कांग्रेस के हारते ही काउंसिल के 24वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में तौकीर रजा ने अपना एजेंडा खोल दिया। उसने कहा कि यति नरसिंहानंद जैसे लोग पैगंबर-ए-इस्लाम मोहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी कर रहे हैं। ऐसा करने वालों के विरुद्ध कोई धरना या फिर ज्ञापन नहीं होगा। अब दशहरा होने के बाद दिल्ली जाकर रामलीला मैदान में घेराव करके प्रदर्शन किया जाएगा।

मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन बरेली के आसपास के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कोने-कोने से लोग आएँगे। मौलाना तौकीर ने कहा, “इस समय देश के लोगों में गुस्सा भरा हुआ है। नबी की शान में गुस्ताखी करने वाले आजाद घूम रहे हैं। हमारे नौजवानों के साथ मॉब लिंचिंग हो रही है। दाढ़ी वाले को ट्रेन के अंदर पीटने की घटना हो रही है।”

अपनी उत्तेजक एवं कट्टरपंथी बयानों के लिए कुख्यात मौलाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया। उसने कहा कि देश के वजीरे आजम समुदाय विशेष (मुस्लिम) के साथ पक्षपात कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश का माहौल खराब करना चाहते हैं। ये सब पब्लिसिटी के लिए कर रहे हैं। यही वजह है कि महापुरुषों की शान में गुस्ताखी करते हैं।

इतना ही नहीं, बरेली दंगे के मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर ने इस्लाम छोड़कर दूसरे धर्म में शादी करने वाली मुस्लिम लड़कियों को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा, “मजहब छोड़कर दूसरे धर्म के लोगों के साथ शादी करने वाली लड़कियों की इस्लाम में कोई जरूरत नहीं है। ऐसे कमजोर लोगों की इस्लाम में कोई जगह नहीं है। अच्छा रहा कि वे खुद ही इस्लाम को छोड़कर चली गईं।”

इससे पहले इस मौलाना ने कहा था, “हम 20 करोड़ हैं या 30 करोड़…मैं नहीं जानता, लेकिन हम में से सिर्फ 1 प्रतिशत ही घरों से बाहर निकल आएँ और दिल्ली कूच कर दें और ऐलान करें कि जब तक नरेंद्र मोदी इस्तीफा नहीं देते, तब तक धरना खत्म नहीं करेंगे। हमारे सब्र का इम्तिहान लिया जा रहा है। अगर जो पैमाना छलक गया तो नतीजे बहुत खराब हो सकते हैं।”

बता दें कि कुछ दिन पहले तौकीर रजा ने कुछ हिंदू लड़कियों का सार्वजनिक तौर पर इस्लाम में धर्मांतरण कराने का ऐलान किया था। इसके साथ ही उनका निकाह मुस्लिम युवकों से कराने की बात भी कही थी। इसको लेकर बड़े पैमाने पर बवाल हुआ था। तौकीर रजा ने कहा था कि दूसरे धर्म के 15 लड़के और 8 लड़कियाँ इस्लाम कबूलना चाहते हैं। ये सभी बालिग़ हैं और इन्होंने पहले से ही शादी कर रखी है।

मौलाना ने कहा था कि उन्होंने जिला प्रशासन से सामूहिक निकाह की अनुमति माँगी है। तौकीर ने कहा था इन सबने धर्मांतरण पहले ही कर लिया है। कार्यक्रम में सिर्फ इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक रूप से सामूहिक निकाह कराया जाएगा। मौलाना ने कहा कि जिन 5 जोड़ों का पहले निकाह कराया जाएगा उनमें 1 मध्य प्रदेश से है, बाकी बरेली के आसपास के जिलों के हैं।

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उन्होंने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के दौरान ये लड़के-लड़कियाँ प्रेम में पड़े। हालाँकि, हिंदुओं के विरोध के बाद प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी थी। इतना ही नहीं, प्रशासन ने भी कहा था कि माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने साफ कह दिया था कि बिना अनुमति के इस प्रकार के किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं करने दिया जाएगा। 

पाकिस्तान : ‘पैगंबर मुहम्मद न लिखना जानते थे, न पढ़ना… कुरान लिखने में कई गलती हुई वो अब तक ठीक नहीं किया गया’: मौलाना का ही सिर माँग रहे मुस्लिम कट्टरपंथी

            मौलाना तारिक मसूद के खिलाफ कट्टर इस्लामी कर रहे 'सर तन से जुदा' की माँग (भीड़ प्रतीकात्मक)
पाकिस्तानी मौलाना तारिक मसूद पर इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद और कुरान के अपमान के आरोप लगे हैं। तारिक मसूद के एक बयान पर इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए हैं। वह मसूद के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगा रहे हैं। तारिक मसूद के माफी माँगने के बाद भी मामला शांत नहीं हो रहा। मौलाना तारिक मसूद इससे पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुका है।

मौलाना तारिक मसूद का हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में मौलाना मसूद ने कथित तौर पर एक सभा में इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद की शैक्षणिक स्थिति पर टिप्पणी की। मौलाना तारिक मसूद ने कहा, “हमारे नबी के बारे में पूरी उम्मत का मानना है कि ना वो लिखना जानते थे ना पढ़ना। वह उम्मी (अरबी में इसका अर्थ अशिक्षित या ऐसे आदमी से होता है जो लिखना ना जानता हो) थे। कुरान कहता है कि पैगम्बर जो कुरान पेश कर रहे हैं, उसका एक इनके दाएँ हाथ ने नहीं लफ्ज लिखा है।”

आगे तारिक मसूद ने कहा, “जैसे ही कोई नई आयत बनती तो किसी को बुला रहे हैं, भाई लिखो। हमारे नबी ने जब कुरान लिखवाया, चूँकि आप लिखना-पढ़ना नहीं जानते थे तो कई बार लिखने वालों से कुरान में व्याकरण की गलती हुई। हमारे नबी ने उसको सही नहीं करवाया, आपको नहीं पता चला कि ये व्याकरण के रूप से गलत है, वो आज तक चला आ रहा है।”

तारिक मसूद ने इसके बाद कुरान की कुछ आयतों के उदाहरण दिए जिनमें वह मानते हैं कि गलतियाँ हैं। मसूद ने इसके बाद कहा कि इन गलतियों को कोई सुधार नहीं पाया क्योंकि अल्लाह ने बता दिया कि नबी उम्मी थे। इसने बताया कि हमने कुरान की हिफाजत की है।

तारिक मसूद के इस बयान पर पाकिस्तान में विवाद हो गया। उन पर कई अन्य मौलानाओं और आम लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने पैगम्बर और कुरान का अपमान किया है। लोगों ने कहा कि तारिक मसूद ने उन पर टिप्पणी करके एक सीमारेखा पार कर दी है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उनके खिलाफ कई संगठनों ने कार्रवाई की माँग की।

तारिक मसूद का यह बयान वायरल होने के बाद उन्हें जान के लाले पड़ गए हैं। तारिक मसूद ने इसको लेकर माफ़ी भी माँगी है। तारिक मसूद ने एक वीडियो जारी करके कहा है कि वह अपने शब्द वापस ले रहे हैं और उनसे गलती हुई है। मौलाना तारिक मसूद ने कुरान का हवाला देकर माफ़ी माँगी है।

उन्होंने पिछले 48 घंटों में कई बार माफी माँगी है। उन्होंने ट्विटर पर भी एक बयान जारी किया है। मसूद ने कहा है कि वह नबी के अपमान के बारे में सोच तक नहीं सकते हैं।

माफ़ी के बाद भी तारिक मसूद के खिलाफ मामला ठंडा नहीं हो रहा है। लोग उनके ही पुराने बयानों को उनके खिलाफ उपयोग में ला रहे हैं। इन बयानों में मौलाना तारिक खुद ईशनिंदा करने वालों के खिलाफ कड़े कानून बनाने की माँग कर रहे हैं। एक और वीडियो में उन्हें ईशनिंदा करने वाले को मारने की वकालत करते तक सुना गया। इस वीडियो में वह कहते हैं कि अगर आप किसी को पैगम्बर मुहम्मद का अपमान करते सुने तो उसे मौत के घाट उतार दें।

मौलाना तारिक मसूद इससे पहले निकाह पर दिए बयानों को लेकर चर्चा में रहा है। पाकिस्तान में मौलाना तारिक मसूद पर ईशनिंदा का आरोप ऐसे समय में लगा है जब पिछले ही कुछ दिनों में दो लोगों की इन्हीं आरोपों पर हत्या हो चुकी है। पाकिस्तान में हाल ही में एक व्यक्ति को एक पुलिसवाले ने ही पुलिस हिरासत में मार दिया था।

उस व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप था। वहीं एक और मामले में एक डॉक्टर को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस ने कहा कि ईशनिंदा का आरोपित भागने का प्रयास कर रहा था, इसके बाद उसे मार दिया गया। पाकिस्तान में इन सभी पुलिस वालों का सम्मान किया गया।

हिंदुओं की आवाज उठाने वाली नाजिया इलाही खान पर ‘झूठा’ ईशनिंदा का केस, गिरफ्तारी के बाद बात लिंचिंग तक पहुँची

                                                 नाजिया इलाही खान को मिल रही धमकियाँ
नूपुर शर्मा विवाद से लगातार मुस्लिम कट्टरपंथियों पर हमले करने वाली नाज़िया इलाही खान निशाने पर रही हैं। नूपुर विवाद पर सोशल मीडिया पर अकेली नाज़िया ही नहीं एक्स मुस्लिम भी लगातार कट्टरपंथियों और देश में तुष्टिकरण करने वालों को भी नहीं बख्शा। कई बार लिखा कि अनेकों मौलानाओं/इमामों और इस्लामिक विद्वानों को Jaipur Dialogue, Sach और NewsNation पर 'इस्लाम क्या कहता है' पर एक्स मुस्लिमों के आगे बेबस देखा। 
सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाने वाली नाजिया इलाही खान को 10 सितंबर को ईशनिंदा मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया। उनके विरुद्ध शिकायत वकील नूर महविश ने दर्ज कराई थी।

शिकायत में कहा था कि नाजिया देश में सांप्रदायिक हिंसा और मजहबी तनाव पैदा करना चाहती हैं। महविश ने शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 299, 353 और 362 के तहत केस को दर्ज कराया था। इस मामले में अलीपुर कोर्ट में पेश होने के बाद नाजिया को भले जमानत मिल गई लेकिन कट्टरपंथियों की नफरत उनके लिए कम नहीं हुई।

नाजिया पर ये केस 3 अगस्त 2024 को दिए एक इंटरव्यू के बाद दर्ज हुआ था। अपने इंटरव्यू में उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि आखिर हिंदू नाम से मुस्लिम दुकान क्यों खोल रहे हैं। उन्होंने पूछा था कि आखिर वो सलीम जो हिंदुओं को काफिर समझता है, उसने महादेव के नाम पर ढाबा क्यों खोला है।

जब पत्रकार ने उनसे कहा कि ये तो लोगों की इच्छा है कि वो क्या नाम रखेंगें, क्या नहीं… इस पर नाजिया ने कहा था कि फिर तो हिंदू भी अपनी मनमर्जी का नाम लिख सकते हैं।

नाजिया ने इस दौरान कुछ उदाहरण ऐसे दिए जिन्हें लेकर विवाद उपजा। उन्होंने कहा था कि अगर हिंदू कोई मुस्लिम नाम के साथ दुकान का नाम रख लेंगे तो हल्ला मच जाएगा और गुस्ताख-ए-रसूल की एक सजा सिर तन से जुदा के नारे लगने लगेंगे।

वीडियो में हालाँकि सुना जा सकता है कि नाजिया सिर्फ मुस्लिम नाम लगाकर उदाहरण दे रही हैं उन्होंने कहीं पैंगबर मोहम्मद के बारे में कुछ नहीं कहा है। उन्होंने मुस्लिम नाम के साथ दुकान का नाम जोड़ सिर्फ पूछा कि क्या अच्छा लगेगा अगर हिंदू ऐसे नाम से दुकान खोल लें। मगर, इस्लामी कट्टरपंथी इसी बात से नाराज हो गए और मामला थाने तक पहुँच गया।

नाजिया ने अपनी वीडियो में थूक जिहाद का खतरा बताते हुए कहा था कि नाम बदलकर कारोबार करने की क्या जरूरत है जिसके मन में चोर होता है वो ही ऐसा करता है। इस दौरान उन्होंने योगी आदित्यनाथ के फैसले का समर्थन किया था जहाँ दुकानों पर मालिक का असली नाम लिखने को कहा गया था।

इस इंटरव्यू के बाद इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें सोशल मीडिया पर गाली देने लगे। क्रिकेटर शिवम दुबे की बीवी अंजुम खान तक ने उनके खिलाफ जहर उगला। अपनी स्टोरी में अंजुम ने कहा- “अगर नबी के शान में गुस्ताखी होने पर आपको गुस्सा नहीं आता तो अपना ईमान मर चुका है और अगर आपका ईमान जिंदा है तो नाजिया की गिरफ्तारी की माँग करिए।”

इसी तरह अन्य मुस्लिम समूहों ने भी नाजिया के खिलाफ जहर उगला। नतीजा ये हुआ कि नाजिया को धमकियाँ आने लगीं। एजाज असलम नाम के मुस्लिम यूट्यूबर ने भी धमकी दी।

4 सितंबर को सोशल मीडिया पर नाजिया ने बताया जहाँ पूरा देश आरजी कर अस्पताल की डॉक्टर के लिए इंसाफ माँग रहा है, वहीं बंगाल के मुस्लिम उनके खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में कोलकाता पुलिस और टीएमसी नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया था। 

उन्होंने ये भी बताया कि जब उन्हें अलीपुर कोर्ट ले जाया जा रहा था तब लोगों ने उनकी लिंचिंग की कोशिश की। उन्होंने कहा, “पहले मुझे पोर्ट एरिया गार्डन रीच पुलिस स्टेशन से झूठे ईशनिंदा मामले में गिरफ्तार किया गया, फिर कोलकाता पुलिस के गार्डन रीच पुलिस स्टेशन के अधिकारी की मिलीभगत से अलीपुर कोर्ट में लाखों मुसलमानों को इकट्ठा करके मेरी मॉब लिंचिंग की साजिश रची गई। मेरा गला काटने की साजिश में कई टीएमसी विधायक, मुस्लिम महिला टीएमसी नेता का सीधा हाथ है!”

पाकिस्तान : चीफ जस्टिस का सिर काटने पर 1 करोड़ रुपए, इस्तीफे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में घुसी ‘भीड़’

             पाकिस्तान के चीफ जस्टिस के सर पर 1 करोड़ का ईनाम (फोटो साभार: X_AjayKauljourno)
पाकिस्तान के चीफ जस्टिस काजी फैज ईसा के सिर पर 1 करोड़ का ईनाम रख दिया गया है, जिन्होंने एक अहमदिया व्यक्ति मुबारकी सानी को ‘राइट टू रिलीजन’ के तहत ‘ईशनिंदा’ के आरोपों से बरी कर दिया था। यही नहीं, अब हजारों कट्टरपंथियों की भीड़ सुप्रीम कोर्ट में घुस आई है और चीफ जस्टिस काजी फैज ईसा के इस्तीफे की माँग कर रही है। उन्हें पीछे ढकेलने के लिए वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा है।

काजी फैज ईसा पिछले साल ही पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए थे, लेकिन फरवरी 2024 में उनके एक फैसले की वजह से आज उनकी जान पर बन आई है। इस मामले में उन्होंने फरवरी में उसकी सजा पर रोक लगाई थी और फिर 29 मई को मामले की सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। उनके साथ सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस इरफान सआदत खान और जस्टिस नईम अख़्तर अफगान भी शामिल थे।

ताजा विरोध प्रदर्शन 24 जुलाई को शुरू हुए, जब उन्होंने इस मामले में पंजाब सरकार की याचिका स्वीकार कर ली। इसके साथ ही कई इस्लामी संगठनों ने भी याचिकाएँ दायर की और सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले की समीक्षा की माँग की। इन मामलों में सुनवाई 22 अगस्त 2024 को होगी, लेकिन उससे पहले ही हजारों कट्टरपंथियों की भीड़ ने इस्लामाबाद के अति सुरक्षित रेड-जोन को पार कर लिया और सुप्रीम कोर्ट के बाह पड़ाव डालकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

 

इस्लामिक कट्टरपंथियों की नाराजगी की वजह

जानकारी के मुताबिक, 19 अगस्त 2024 को इस्लामिक कट्टरपंथियों के बड़े समूह ने इस्लामाबाद के आत्यधिक सुरक्षित माने जाने वाले रेड-जोन की सुरक्षा को तोड़ दिया और सुप्रीम कोर्ट के गेट पर धावा बोल दिया। इस्लामिक कट्टरपंथियों की माँग है कि चीफ जस्टिस तुरंत इस्तीफा दें। दरअसल, फरवरी के फैसले में जस्टिस ईसा ने अहमदिया व्यक्ति मुबारक अहमद सानी को जमानत दे दी थी, जिस पर साल 2019 में ईशनिंदा का आरोप लगा था। उसने अहमदियों से जुड़े पर्चे बाँटे थे। सानी को पंजाब पवित्र कुरान (प्रिंटिंग एंड रिकॉर्डिंग) (संसोधन) एक्ट, 2021 के तहत सजा सुनाई गई थी।
हालाँकि जस्टिस ईसा की अगुवाई में तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि सानी को उस कानून के तहत सजा दी गई है, जो साल 2021 से पहले थी ही नहीं। इसके बाद कोर्ट ने सानी को जमानत देते हुए उसकी तुरंत रिहाई का आदेश दिया था। इसके तुरंत बाद तहरीक-ए-लब्बैक-पाकिस्तान और अन्य इस्लामिक संगठनों ने काजी फैज ईसा के खिलाफ नफरती अभियान चलाना शुरू कर दिया। फरवरी 2024 में पेशावर में 3 हजार से अधिक इस्लामिक कट्टरपंथियों ने रोड़ ब्लॉक करके ‘कादियानों को मौत’ के नारे लगाए। इस प्रदर्शन के बाद सुप्रीम कोर्ट को बाकायदा बयान जारी कर अपने फैसले पर सफाई देनी पड़ी थी।

चीफ जस्टिस का सर काटने पर 1 करोड़ का ईनाम

पाकिस्तान के कट्टरपंथी इस्लामी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) ने पाकिस्तान के चीफ जस्टिस ईसा के सिर पर 1 करोड़ का ईनाम घोषित किया है। टीएलपी के दूसरे नंबर के नेता पीर जहीरुल हसन शाह ने ये ईनाम घोषित किया। उसने अपने बयान में कहा, “टीएलपी को छोड़िए, एक मोमिन और प्रोफेट मोहम्मद का गुलाम होने के तौर पर, मैं अपनी हैसियत से घोषणा करता हूँ कि जो फैज ईसा का सिर कलम करेगा, उसे मैं 1 करोड़ रुपए दूँगा।” उसने अहमदियों को मरजई भी कहा।
इस बीच, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने शाह की भड़काऊ टिप्पणी का एक वीडियो साझा किया और कहा, “पाकिस्तान राज्य में इस तरह के बयानों के लिए कोई जगह नहीं है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। काजी साहब ने किसी समूह या समूह के पक्ष में कोई फैसला नहीं दिया। जिस आधार पर यह घृणित कथा प्रचारित की जा रही है, हम इस तरह के बयानों की कड़ी निंदा करते हैं और इसका पुरजोर खंडन करते हैं, ऐसी मानसिकता पाकिस्तान को गंभीर नुकसान पहुँचा रही है। इस झूठे नरेटिव के पीछे राजनीतिक मकसद हैं।”
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के लोगों को 1974 में राज्य द्वारा औपचारिक रूप से गैर-मुस्लिम घोषित किए जाने के बाद से ही गंभीर उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है और उनके खिलाफ नियमित रूप से ईशनिंदा कानून का इस्तेमाल किया जाता है। यहाँ अहमदिया समुदाय को काफिर माना जाता है। ये विडंबना ही है कि जिस अहमदिया समुदाय ने पाकिस्तान के निर्माण में सबसे ज्यादा अहम भूमिका निभाई थी, आज वही पाकिस्तान में गैर-मुस्लिम हो गए हैं। वैसे, इस्लामिक कट्टरपंथियों के दबाव की वजह से सुप्रीम कोर्ट बैकफुट पर दिख रहा है। ऐसे में इस बात की संभावना कहीं अधिक है कि सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले को बदल दे और आरोपित अहमदिया व्यक्ति को फिर से जेल में डाल दे।

 



नेपाल : सुप्रीम कोर्ट के जज को घोषित किया ‘गुस्ताख़-ए-रसूल, ’‘अल्लाह-हू-अकबर’ के साथ ‘सर तन से जुदा’ के नारे

नेपाल में सुप्रीम कोर्ट जज को बता गुस्ताख़ ए रसूल, लगाया 'सिर तन से जुदा' का नारा (चित्र साभार- FB/Farhad Ahmad )
नेपाल में वहाँ के सुप्रीम कोर्ट के जज कमलनारायण दास के नाम से एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस पोस्ट के खिलाफ मुस्लिम समुदाय सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहा है। उन्मादी भीड़ ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा लगा कर कई जगहों पर सड़क जाम कर रही है। भीड़ में शामिल लोग पोस्ट में लिखी बातों को अपने पैगंबर का अपमान बता कर पुतले जला रहे हैं। सोशल मीडिया पर ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लिखे जा रहे हैं। नेपाल के मुस्लिम आयोग ने भी इस मामले में अपनी सरकार से कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

इस घटना पर नेपाल के मुस्लिम आयोग ने सरकार को एक शिकायती पत्र दिया है। पत्र में बताया गया है कि फेसबुक पर कमल नारायण दास के नाम से इस्लाम को बदनाम करने के लिए झूठी और भ्रामक बातें लिखी गईं है। इस पोस्ट में मुस्लिम समुदाय द्वारा रखे जाने वाले रोजा पर टिप्पणी की गई है। मुस्लिम आयोग ने इस पोस्ट पर रमजान में शेयर करने के पीछे नेपाल के भाईचारे को खत्म करने की साजिश करार दिया है। मुस्लिम आयोग ने दुःख प्रकट करते इसे नेपाल में साम्प्रदायिकता फैलाने की साजिश बताया है।

                                                        नेपाली मुस्लिम आयोग का बयान

नेपाल में सभी मत-मजहबों को एक जैसा बताते हए मुस्लिम आयोग ने कहा है कि कुछ लोग कमल नारायण दास के नाम से वायरल हो रही पोस्ट को अभिव्यक्ति की आज़ादी बता रहे हैं। मुस्लिम आयोग ने अभिव्यक्ति की आज़ादी जैसे तर्कों को इस मामले में गलत बताते हुए इसको अपनी संस्कृति पर हमला करार दिया है। मुस्लिम आयोग का मानना है कि ऐसी पोस्ट को अभिव्यक्ति की आज़ादी बताना नेपाली कानून और संविधान का उल्लंघन होगा। अंत में मुस्लिम आयोग ने आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पत्र पर अध्यक्ष के तौर पर शमीम मियाँ अंसारी के दस्तखत हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जज की गिरफ्तारी की माँग

यह पोस्ट जिस हैंडल किया किया गया है वह नॉन-वेरिफाइड है। अभी तक नेपाली पुलिस या कोई जाँच एजेंसी आधिकारिक तौर पर यह नहीं बता पाई है कि पोस्ट किसके द्वारा लिखी गई है। इसके बावजूद नेपाल के एक बड़े हिस्से में मुस्लिम वर्ग वहाँ की सुप्रीम कोर्ट के जज कमल नारायण दास के खिलाफ सड़क पर उतर कर कार्रवाई की माँग कर रही है। ‘नेपाली मुस्लिम शांति समाज सरलाही मलंगवा’ नाम के फेसबुक पेज पर तो ‘Arrest Kamal Naranyan Das’ नाम से कैप्शन भी दे दिया गया है। 12 अप्रैल (शुक्रवार) को इस कैप्शन से साथ अटैच वीडियो में मुस्लिम भीड़ चौराहे पर आग जला कर नारेबाजी कर रही है।

कमल नारायण ‘गुस्ताख़ ए रसूल’ घोषित

फरहाद अहमद नाम के व्यक्ति ने शनिवार (13 अप्रैल, 2024) को अपने फेसबुक पर कमलनारायण दास के खिलाफ नेपाल के सरलाही जिला स्थित मलंगवा में निकले जुलूस के वीडियो शेयर किए हैं। यह जुलूस मुस्लिम बोर्ड नेपाल द्वारा निकाला गया है। इस प्रदर्शन के जुलूस में छपे बैनरों पर ‘गुस्ताख-ए-रसूल के खिलाफ कार्रवाई’ लिखा हुआ है। जुलूस में कई मौलवी और मौलाना शामिल दिख रहे हैं। ये सभी पुलिस के आगे ही उत्तेजक नारे लगा रहे हैं।
इन नारों में अल्लाह हु अकबर, नारा ए तकबीर के साथ ‘तेरा मेरा रिश्ता क्या, ला इलाह इल्ललाह’ जैसी बातें बोली जा रहीं हैं। बीच में से एक व्यक्ति ने कहा, ‘सर तन से जुदा’ वाला लगाओ। फ़िलहाल अभी तक नेपाली पुलिस द्वारा किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

मुस्लिम कट्टरपंथियों को मोसाब हसन की फटकार, उसने कहा- निर्दोष हिन्दू के पीछे क्यों पड़े हो, मेरे पीछे लगो, वीडियो मेरा है, तंग आ गया हूँ मुस्लिमों की धमकी से

NIT श्रीनगर में हुए बवाल पर बोले मोसाब हसन युसूफ
श्रीनगर के NIT में पढ़ने वाले हिंदू छात्र प्रथमेश शिंदे द्वारा एक वीडियो स्टेटस पर लगाने के बाद जिस तरह कट्टरपंथी उन पर हमलावर हुए हैं, उसे देख मोसाब हसन युसूफ का बयान आया है। मोसाब वहीं शख्स हैं जो उस वीडियो में थे जो प्रथमेश ने लगाई। इसके अलावा हमास नेता का बेटा होने के नाते भी उनकी पहचान होती है।

हमास नेता के बेटे मोसाब हसन ने प्रथमेश को टारगेट करने वाले कट्टरपंथियों को लेकर लिखा- “कश्मीर के इस्लामी कट्टरपंथी हिंदू छात्र को मारने के लिए धमकी दे रहे हैं जिसने मेरे एक बयान को अपने सोशल मीडिया पर लगा दिया था। क्या ये कट्टरपंथी भूल चुके हैं कि ये हिंदू बहुल देश में अल्पसंख्यक हैं। मेरे पीछे लग जाओ, लेकिन हिंदू छात्र को छोड़ दो”

उन्होंने आगे लिखा, “मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ मुस्लिमों की धमकी से तंग आ गया हूँ। एक निर्दोष हिंदू छात्र और कश्मीर की पूरी आबादी।”

कश्मीर में हिंदू छात्र के खिलाफ ईशनिंदा मामले में केस हुआ है। निग्नीन पुलिस थाने में उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 295ए, 153ए, 153 लगाकर केस दर्ज किया गया है। इस मामले पर राजनीति भी हो रही है और पूर्व मेयर शेख इमरान ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। NIT की अनुशासनात्मक समिति ने उक्त हिंदू छात्र को कॉलेज से 1 साल के लिए निकाल दिया है।

इन एक्शन के बावजूद कट्टरपंथी शांत नहीं हैं। हिंदू छात्र को मारने की धमकियाँ आ रही हैं। उससे पहले ये कट्टरपंथी ‘अल्लाहू अकबर, सर तन से जुदा, लब्बैक या रसूल अल्लाह’ के नारे लगाते हुए घूम रहे थे।

लड़के की गलती बस इतनी थी कि उसने मोसाब हसन के कॉन्फ्रेंस की क्लिप को अपने सोशल मीडिया पर डाल दिया। स्टोरी के साथ उसने कुछ लिखा नहीं लेकिन फिर भी कट्टरपंथी बिदक ही गए। इसके अतिरिक्त उसपर ये भी इल्जाम लगाए जा रहे हैं कि उसका संबंध मुस्लिम लड़की से था। स्थानीय मुस्लिमों ये कहकर आग में घी डाल रहे हैं कि प्रथमेश मुस्लिम लड़की को भगवा ट्रैप में फँसाना चाहता था।

मोसाब की विवादित वीडियो क्लिप साल 2012 की है। लॉस एजेंल्स में उन्होंने एक कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए पैगंबर पर कुछ टिप्पणी की थी। इसके अलावा उन्होंने शरीया लॉ की भी आलोचना की थी।


श्रीनगर : हिंदू छात्र ने किया पैगंबर मोहम्मद का अपमान? नेटिजन्स ने बताया – हमास संस्थापक के बेटे की वीडियो और मुस्लिम लड़की का कनेक्शन

NIT श्रीनगर में हिन्दू छात्र पर ईशनिंदा के आरोप के बाद प्रदर्शन (चित्र साभार- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में NIT (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी) के छात्रों ने एक हिन्दू छात्र पर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया है। उनका आरोप है कि छात्र ने सोशल मीडिया पर पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है। इस प्रदर्शन के दौरान ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ के नारे लगे। इस प्रदर्शन के लिए हमास समर्थकों और पाकिस्तानियों की प्रोफ़ाइल फोटो वाले हैंडलों से भी हवा दी गई।

पैगंबर मोहम्मद के कथित अपमान को लेकर श्रीनगर के NIT में बवाल और प्रदर्शन के बाद पुलिस ने आरोपित छात्र के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। साथ ही आरोपित को इंस्टिट्यूट से सस्पेंड करते हुए आने वाले सेमेस्टर के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। यह पूरी घटना मंगलवार (28 नवंबर 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोप है कि यहाँ पढ़ने वाले एक छात्र (जो हिंदू है) ने इस्लाम के नबी पैगंबर मोहम्मद के विरुद्ध आपत्तिजनक वीडियो अपने व्हाट्सएप स्टेस्ट्स और इंस्टाग्राम पर डाला था। इसके उलट हालाँकि सोशल मीडिया पर कई लोग उस वीडियो का स्क्रीनशॉट लगा कर यह दावा कर रहे हैं कि वो वीडियो हमास के संस्थापक के बेटे का है, खुद आरोपित लड़के ने अपनी ओर से कोई बात नहीं कही है।

सोशल मीडिया में आरोपित लड़के से संबंधित जिस स्क्रीनशॉट को शेयर किया जा रहा है, उसके अनुसार इस वीडियो में हमास संस्थापक का बेटा इस्लाम के बारे में कुछ बता रहा है। कट्टर मुस्लिमों ने इसे पैगंबर मोहम्मद की आपत्ति से जोड़ दिया, ईशनिंदा का आरोप लगा दिया। ऊपर के सोशल मीडिया पोस्ट में आरोपित लड़के और उसकी मुस्लिम गर्लफ्रेंड के बारे में भी लिखा गया है। नेटिजन्स इस पर भी बात कर रहे हैं कि स्थानीय कट्टर मुस्लिम भीड़ को इस बात से दिक्कत है कि एक हिंदू लड़के की गर्लफ्रेंड मुस्लिम क्यों?

ईशनिंदा की बात सुन कट्टर मुस्लिमों की भीड़ जुट गई। कुछ ही देर में इस वीडियो को ईशनिंदा बताते हुए श्रीनगर NIT के तमाम मुस्लिम छात्र ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ (रसूल अल्लाह हम तेरे लिए हाजिर हैं) का नारा लगाते हुए प्रदर्शन करने लगे।

ये सभी प्रदर्शनकारी यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस से आरोपित छात्र पर कड़ा एक्शन लेने की माँग कर रहे थे। सोशल मीडिया पर भी ‘NIT चलो’ का ट्रेंड चलाया जाने लगा। इस ट्रेंड को चलाने में कुछ ऐसे वेरिफाइड हैंडल भी शामिल हैं, जो खुल कर आतंकी समूह हमास का समर्थन कर रहे हैं और पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाडियों की प्रोफ़ाइल फोटो लगा रखी है।

ऊपर के सोशल मीडिया पोस्ट में आप देख सकते हैं कि लोग आरोपित हिंदू लड़के को फाँसी देने का ट्रेंड भी सोशल मीडिया पर चला रहे। NIT श्रीनगर कैम्पस में माहौल गर्म होता देख कर पुलिस ने हालात को संभाला और प्रदर्शनकरियों को समझा-बुझा कर शाँत करवाया।

मीडिया से बातचीत में पुलिस ने बताया कि आरोपित छात्र के खिलाफ केस दर्ज करके जाँच की जा रही है। कार्रवाई के लिए पत्र NIT के रजिस्ट्रार की तरफ से पुलिस को दिया गया है। वहीं NIT ने आरोपित छात्र को बाकी सेमेस्टरों से अयोग्य घोषित करते हुए संस्थान से निकाल दिया है।

साल 2016 में भी NIT श्रीनगर में क्रिकेट में वेस्टइंडीज से भारत की हार पर जश्न मनाया गया था। तब कुछ छात्रों ने इसका विरोध किया था, जिससे विवाद खड़ा हो गया था।