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हिज़ाब हथियार बन रहा है देश में अशांति फैलाने का ; बेवजह मुद्दा बनाया जा रहा है ; जबकि मुस्लिम देशों में हिजाब और बुर्का बैन हो रहा है

सुभाष चन्द्र

(गतांक से आगे)

मैंने सुप्रीम कोर्ट में हिज़ाब पर चल रहे मामलों पर लेख में कहा था कि अगले अंक में प्रस्तुत करूंगा कि हिज़ाब के मामले और कहां शुरू किए गए अन्य राज्यों में जो अगले अंक में प्रस्तुत करूंगा और यह भी बताऊंगा कि इस्लामिक देशों समेत किन देशों में हिज़ाब और बुरके पर बैन है।  

Organiser साप्ताहिक के संपादक प्रो वेद प्रकाश भाटिया(स्व) अपने बहुचर्चित स्तम्भ Cabbages & Kings के लगभग हर 10वें कॉलम में लिखते थे "...burka is not an Islamic culture...at times attractive and charming boys were kept in purdah to save them from lust of mughal", किसी ने कभी विरोध नहीं किया। विस्तार से Organiser साप्ताहिक दफ्तर जाकर पढ़ लो।   

फरवरी 2022 में कर्नाटक में हिज़ाब का सबसे बड़ा फसाद शुरू किया गया जबकि उसके पहले कभी स्कूलों में हिज़ाब का मामला खड़ा नहीं हुआ था;

फरवरी, 2022 में ही आंध्र प्रदेश के Prakasam District के एक प्राइवेट स्कूल में कुछ लड़कियां हिज़ाब पहन कर पहुँच गई जिन्हें स्कूल प्रशासन ने रोका। इसके विरोध में लड़कियों ने अपने Parents के साथ प्रदर्शन शुरू कर दिया;

उसी महीने में विजयवाड़ा जिले के Andhra Loyola College में final year of Bachelor of Science (B.Sc.) में कुछ लड़कियां बुरका और हिज़ाब पहन कर पहुँच गई जिन्हें security staff ने गेट पर ही रोक दिया;

लेखक 
चर्चित YouTuber 
22 जून, 2022 को ही हयातनगर तेलंगाना के एक प्राइवेट स्कूल में 2 लड़कियां (जिनमे एक जज की बेटी थी) को स्कूल प्रशासन ने हिज़ाब पहनने को मना किया तो अगले दिन वो Head scarves पहन कर पहुँच गई, जब उन्हें रोका गया तो एक लड़की ने प्रिसिंपल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कर दी। आगे पता नहीं क्या हुआ, प्रिंसिपल शिकायत भुगत ही रहा होगा।

कर्नाटक के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में कल विस्तार से बता दिया था मैंने।

जहां कुछ लड़कियों को आगे करके भारत में हिज़ाब को हथियार बनाया जा रहा है माहौल बिगाड़ने के लिए, वहीँ 16 सितंबर, 2022 को ईरान में एक 22 वर्षीय लड़की Mahsa Amini की हिज़ाब न पहनने पर पुलिस कस्टडी में मौत के बाद पूरा ईरान anti-hijab के विरोध प्रदर्शनों की आग में लिपट गया।

दिसंबर, 2023 में भाजपा की नई सरकार बनी थी राजस्थान में और तब से पहले कभी हिज़ाब का कोई मामला सामने नहीं आया था लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद 17 फरवरी, 2024 को जोधपुर की पिपरी सिटी के Government Higher Secondary School No 2 में 19  मुस्लिम लड़कियां हिज़ाब पहन कर स्कूल पहुंच गई। यानी सरकार बदलते ही कलेश शुरू कर दिया - इसे बदनीयती से फैलाया गया बवाल नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे।

इसके बाद 23 जून, 2024 को एक जम्मू कश्मीर की लड़की सादिया इशक जयपुर के झोटवाड़ा में पूजा पब्लिक स्कूल में राजस्थान Judicial Services-2024 की परीक्षा में हिज़ाब पहन कर पहुंच गई और जब अनुमति नहीं दी गई तो हल्ला मचा दिया। 

जहां भारत में हिज़ाब को लेकर कहीं न कहीं बवाल खड़ा किया जा रहा है, वही जून, 2024 में 

Tajikistan, a Central Asian country with a 95% Muslim population ने हिज़ाब पर बैन लगा दिया। इसके अलावा भी कई मुस्लिम बहुल देशों ने अपने देश में स्कूलों और सरकारी संस्थानों में  बुरके और हिज़ाब पर बैन लगाया हुआ है जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं Tunisia, Kosovo, Azerbaijan, Kazakhstan, Kyrgyzstan और Cameroon (जहां मुस्लिम 30% हैं) 

Chad में मुस्लिम 52% हैं लेकिन वहां भी हिज़ाब पर बैन है।

Bosnia and Herzegovina में 51% मुस्लिम हैं लेकिन वहां भी हिज़ाब और बुरका बैन है। 

इन सब देशों का इस्लाम क्या अलग है और भारत का इस्लाम अलग? कौन सही है, इसका फैसला कौन करेगा?

इसके अलावा यूरोपीय देशों में France Italy, Germany, Belgium, Norway and Bulgariya ने हिज़ाब और बुरका बैन किया हुआ है।

भारत में समस्या यही हैं की हर बात को इस्लाम से जोड़कर देख लेते हैं। एक स्कूल कॉलेज में यदि ड्रेस कोड है तो वहां कैसे हिज़ाब और बुरका पहनने की अनुमति दी जा सकती है जो ड्रेस कोड को बिगाड़ देता है। ऐसी ही बात है तो मुस्लिम के लिए अलग स्कूल कॉलेज खोलिए और उनमे ही पढ़िए लेकिन माहौल ख़राब नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट पहले यह विचार करे कि क्या वह अपने ड्रेस कोड के खिलाफ हिज़ाब और बुरका पहनने की अनुमति देगा?

इस्लाम और हिजाब पर ज्ञान देने वाली राना अयूब की खुद के मजहब वालों ने लगा दी बत्ती, लेकिन 'सिर तन से जुदा' नहीं

राना अयूब (Rana Ayyub) को मुस्लिमों ने इस्लाम से खारिज कर दिया है… कम से कम सोशल मीडिया वाले मुस्लिमों ने तो जरूर। चौंकिए मत। नीचे सारे प्रमाण हैं। हुआ यह कि वो हिजाब या बुरके को लेकर ज्ञान बाँट रही थीं। ट्विटर पर मौजूद मुस्लिमों ने कुरान का हवाला देकर राना अयूब की बत्ती लगा दी। लेकिन किसी ने नूपुर शर्मा की तरह राना अयूब के विरुद्ध न कोई प्रदर्शन किया और न ही 'सिर तन से जुदा' की आवाज़ निकालने की किसी कट्टरपंथी मुस्लिम की हिम्मत हो रही, क्योकि राना अयूब एक हिन्दू नहीं बल्कि मुस्लिम है, क्यों? 

वित्तीय धोखाधड़ी की आरोपित और वाशिंगटन पोस्ट में लेख लिख कर पैसे कमाने वाली राना अयूब ने 22 सितंबर 2022 को सूरा बकराह की आयत का मतलब अंग्रेजी में ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “मजहब में कोई मजबूरी नहीं है।” दरअसल यह ईरान में चल रहे हिजाब या बुरके के विरोध-प्रदर्शन से संबंधित था।

                                                                  राना अय्यूब का ट्वीट

इस तरह का ट्वीट लिख राना अयूब यह दिखाना चाह रही थी कि वो विकासशील मानसिकता की महिला है। ट्विटर पर मौजूद मुस्लिम यूजरों ने उनको अच्छे ढंग से समझा दिया कि विकासशील मानसिकता अपनी जगह है, कुरान की अपनी जगह।

इस ट्वीट को लेकर हिंदुओं का मजाक उड़ाने वाली राना अयूब सोशल मीडिया पर मुस्लिम यूजर्स के निशाने पर आ गईं। बिंट नूह नाम के यूजर ने लिखा: “मुखौटा उतर चुका है, हकीकत सबके सामने है। इसके बावजूद बड़े हैंडल राना अय्यूब पर अभी भी चुप क्यों हैं… जाहिर है कि वह आयत से जुड़े संदर्भ को जानती हैं, बावजूद इसमें कोई संदेह नहीं है कि गुस्ताख लोगों के भले की कामना करने वाली यह महिला इस्लाम के कट्टर दुश्मनों में से एक है। हमें उन लोगों को समझना-जानना होगा, जो अभी भी इस्लामी विरोधी नैरेटिव में इस महिला का समर्थन करते हैं। राना अय्यूब एक फिल्टर है!”

बिंट नूह का ट्वीट

सनिफ सुल्तान लिखते हैं, “यह आयत गैर-मुस्लिमों के लिए है। मुस्लिमों को मजहब के तौर पर इस्लाम का अनुसरण करने और चुनने की आजादी नहीं है। अपने दोहरे मापदंड के लिए संदर्भ से बाहर इस आयत का इस्तेमाल एक मुस्लिम नहीं कर सकता।”

                                                                          सनिफ सुल्तान का ट्वीट

एक और मुस्लिम यूजर ने राना अय्यूब को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “यह पूरी आयत है (सूरा बकराह, आयत-256, कुरान)। देश भर में और विश्व स्तर पर हाल की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, मुझे लगता है कि मुस्लिमों को कुरान का हवाला देते समय सावधान रहना चाहिए।”

                                                                        ZAyesha का ट्वीट

इसके अलावा कई मुस्लिम यूजर्स ने राना को ट्विटर पर जमकर लताड़ा है। एक ने लिखा, “मुशरिक के ओपिनियन की जरूरत नहीं।” एक ने उन पर तंज कसते हुए कहा, “ये मुस्लिमों की संरक्षक है।”

                                                   3 अलग-अलग ट्विटर यूजर्स का राणा अयूब को जवाब

नयमारा नाम की यूजर ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर राना के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर हुए उन्हें इस्लाम, अल्लाह और कुरान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने सवाल किया, “क्या तुम कुरान की आयत को नकार रही हो? क्या तुम मुस्लिम भी हो।”

                                           नयमारा नाम की ट्विटर यूजर ने धोया राणा अयूब को

राना अयूब (Rana Ayyub) को लताड़ने वाले सभी ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

झूठ पर 4 मिनट कायम नहीं रह पाईं

इससे पहले राना अयूब ने अपने एक इंटरव्यू में इतने झूठ बोले कि वो खुद आँकड़ों में कन्फ्यूज हो गईं थी। उन्होंने इंटरव्यू में शुरुआत में कहा था कि 100 हिंदुओं ने एक मुस्लिम लड़की को घेरा और इंटरव्यू के आखिर में वो बोलती नजर आईं कि ये संख्या 200 थी। उन्होंने कहा था, “ये वो भारत नहीं है, जिस पर हमें कभी गर्व होता था। ये दक्षिणपंथी आतंकियों का भारत है।”

धोखाधड़ी करने पर जब्त हुई 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति

झूठ फैलाने में माहिर राना अयूब वित्तीय धोखाधड़ी की आरोपित हैं। उनकी 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति ईडी द्वारा जब्त की गई थी। कथित तौर पर ये सारा पैसा उन्होंने कीटो पर फंड इकट्ठा करने का नाम पर एकत्रित किया था। मगर, सारे पैसे का इस्तेमाल किए बिना उन पैसों को अयूब ने अपने अकॉउंट में रखे रखा। जब विवाद बढ़ा तो उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया।

घूँघट प्रथा ख़त्म करने पर गहलोत से पूछा : बुर्का प्रथा कब?

देश के आज़ाद होने से लेकर आज तक समय-समय पर केवल हिन्दू संस्कारों पर ही प्रहार होते हैं, किसी दूसरे धर्म पर नहीं, आखिर क्यों? हिन्दू होते हुए, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को घूँघट के महत्व को समझना चाहिए। घूँघट किस से और कहां-कहां किया जाता है, इस बात की गहलोत को समझ होनी चाहिए। आखिर भारतीय संस्कृति ही क्यों आँखों में खटक रही है? आखिर भारतीय संस्कृति को त्याग पश्चिमी संस्कृति की ओर क्या इतना आकर्षण क्यों? 
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहा हैं। कांग्रेस नेता गहलोत ने एक ट्वीट में लिखा कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए घूंघट प्रथा को बंद करना जरूरी है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सशक्तिकरण के लिए ये पांच पॉइंट्स आवश्यक हैं:

1. घूंघट प्रथा दूर हो।
2. छुआछूत खत्म हो।
3. सैनेटरी नेपकिन्स के उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़े।
4. महिला शिक्षा को बढ़ावा मिले, गांव-कस्बों तक महिला कॉलेज खुलें।

5. मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आए।

गहलोत के यह ट्वीट करते ही यूजर्स ने उन्हें खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी। लोगों ने पूछना शुरू कर किया की घूंघट पर तो बोल दिया, बुर्का पर कब बोलोगे। आप भी देखिए…