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सोरोस से भीख आते ही आन्दोलनजीवी हरकत में : राहुल गाँधी-तेजस्वी यादव ने बिहार पर शुरू किया प्रोपेगेंडा, अब योगेंद्र यादव से लेकर ADR तक सारे ‘आंदोलनजीवी’ भी एक्टिव: जॉर्ज सोरोस के पैसों से चलता है ‘भारत को बदनाम करो’ का धंधा

                                                                                                                        साभार: Mint & FT
बिहार में होने वाले चुनावों में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता को update करना क्या गलत है? दरअसल ये सब रोना इसलिए हो रहा है कि वोटर लिस्ट में डाले गए घुसपैठियों के वोट खोने से INDI गठबंधन के पेट में इतनी जबरदस्त मरोड़ होने लगी जो इन्हे रोटी खाना तो दूर सोने भी नहीं दे रही। घुसपैठियों को तो 
INDI गठबंधन अपना सरपरस्त मानता है, उसके लिए तो उल्टे भी खड़े होने को तैयार रहते हैं। कोई इनसे पूछे कि दुनिया में कोई एक देश बता दो जहाँ घुसपैठियों को वोट देने का अधिकार है। 

जॉर्ज सोरोस जो दुनिया में सरकारें गिराने में बदनाम है, उसकी मिली भीख पर विपक्ष उपद्रव कर रहा है। फिर कहते हैं संविधान की रक्षा करने इसे हाथ में लेकर चलते हैं। जब गली-कूचे से लेकर देश का हर शीर्ष नेता तक जानता है कि 2014 से लेकर वर्तमान बिहार उपद्रव INDI गठबंधन भीख में मिले धन की वजह से होते हैं, फिर क्यों नहीं हाथ में लठ लेकर इन आन्दोलनजीवियों से निपटा जाता। LoP राहुल ने इस पद की गरिमा को गटर में फेंक दिया है। 

दिल्ली में सत्ता परिवर्तन होते ही विधवा पेंशन घोटाला सामने आ गया। लानत तो उन 60,000 सुहागनों को है जिन्होंने टके की खातिर अपने जीवित सुहाग के रहते विधवा हो गयीं। विवाह के समय जब औरत की मांग में भरवा रही होती है, सामने अग्नि के आगे प्रार्थना करती है कि इसी तरह सिन्दूर भरी मांग चिता में भेजना। ऐसी लानत औरतों के DNA पर ही शंका होती है। यानि सियासतखोरों के इस गंदे खेल में जनता भी साथ देती है।           

बिहार में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं। इसके लिए चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियाँ चालू कर दी हैं। इसी कड़ी में चुनाव आयोग मतदाता सूची को सही कर रहा है। इस कदम का राहुल गाँधी, तेजस्वी यादव और पप्पू यादव समेत कई नेताओं ने विरोध करना चालू कर दिया है।

मतदाता सूची से अपात्र और अवैध लोगों को हटाने के फैसले को यह पूरा गुट ऐसे पेश कर रहा है जैसे यह उनके वोट काटने की साजिश हो। इस खेल में अब आंदोलनजीवी और चन्दाजीवी गैंग भी कूद गया है। उसने इस मामले को कोर्ट तक पहुँचा दिया है।

चुनावी प्रकिया को सुप्रीम कोर्ट में RJD, कॉन्ग्रेस, TMC की महुआ मोइत्रा और NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स(ADR), पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज और योगेन्द्र यादव जैसे आंदोलनजीवी लेकर पहुँचे हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को रोकने की माँग की है।

इस संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई 10 जुलाई, 2025 को होनी है। बिहार चुनाव से पहले मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने से जुड़ी इस प्रक्रिया को मुद्दा बनाने की शुरुआत राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव जैसे विपक्षी नेताओं ने की थी।

NRC-CAA जैसा प्रोपेगेंडा खड़ा करने का हो रहा प्रयास

विपक्षी नेताओं के प्रोपेगेंडा को आगे ले जाने का बीड़ा अब इन संस्थाओं ने उठाया है। इनमें NGO, आंदोलनजीवी और एक्टिविस्ट टाइप जमात शामिल है। यह सब तब हो रहा है जब चुनाव आयोग इस मामले पर सभी शंकाएँ दूर कर चुका है और प्रक्रिया अभी भी सुचारू ढंग से चल रही है।

चुनाव आयोग ने मतदाताओं को अपने दस्तावेज देने के लिए 25 जुलाई, 2025 तक का समय भी दे रखा है। इसके लिए मतदाताओं को जागरूक भी किया जा चुका है। चुनाव आयोग ने खुद बताया है कि वह अब तक 2.88 करोड़ से अधिक मतदाताओं का सत्यापन कर चुका है। यह बिहार में कुल मतदाताओं का 38% है।

इस सबके बावजूद भी पूरी प्रक्रिया को कोर्ट में ले जाना दिखा रहा है कि इस पर विपक्ष और NGO-आंदोलनजीवी गैंग NRC-CAA जैसा बवाल खड़ा करना चाहते हैं। इसे भी मुस्लिम विरोधी कदम करार दिए जाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि मजहबी आधार पर ध्रुवीकरण किया जा सके।

NGO-आंदोलनजीवी बस मुखौटा भर

इस काम के लिए यह NGO और आंदोलनजीवी गैंग मुखौटा बना है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका ले जाने वाले यह गैंग पहले भी चुनावी प्रक्रिया पर अड़ंगे लगाते रहे हैं और इनका इतिहास मोदी सरकार के विरोध का रहा है। इस मामले में याचिका लगाने वाला एक NGO तो जॉर्ज सोरोस से फंडिंग लेता है।

सुप्रीम कोर्ट में बिहार में चुनाव आयोग के कदमों के खिलाफ याचिका लगाने वाला ADR इससे पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी अड़ंगा लगा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए मोदी सरकार से कानून बनाने को कहा था, जब तक क़ानून ना बने, तब तक एक समिति बनाई थी, जिसमे प्रधानमंत्री और नेता विपक्ष को रखा था।

इस समिति में CJI भी रखे गए थे। यह व्यवस्था तब तक ही चलनी थी जब तक सरकार कानून ना बना दे। मोदी सरकार ने इस पर कानून बनाया था और CJI को इसमें नहीं रखा था। इसके खिलाफ ADR याचिका लेकर पहुँच गया था। गौरतलब है कि यह कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पूरी तरह से सरकार के पास थी।

इसकी मदद भी प्रशांत भूषण जैसे वकील करते आए हैं, जिनका काम ही एजेंडा चलाना है। प्रशांत भूषण पर दिल्ली दंगों से पहले हुई बैठक आयोजित करने का आरोप है। प्रशांत भूषण लगातार देश विरोध में खड़े देखे जाते हैं।

जॉर्ज सोरोस से है याचिका डालने वाले NGO का लिंक

बिहार में चुनाव आयोग की प्रक्रिया के खिलाफ याचिका डालने वाले NGO का लिंक जॉर्ज सोरोस से भी है। ADR असल में एक ऐसा NGO है जिसके पास FCRA लाइसेंस है। इसने लगातार मोदी सरकार को निशाने पर लिया है।

ADR को चुनावी और ‘राजनीतिक सुधार’ और ‘चुनावी निगरानी’ के लिए फोर्ड फाउंडेशन, गूगल, हिवोस और ओमदियार नेटवर्क से बड़ी मात्रा में धन प्राप्त होता है। हिवोस संगठन जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से जुड़ा हुआ है और विभिन्न सरकारों से पैसा पाता है।

HIVOS की 2018 की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह डच विदेश मंत्रालय, ग्लोबल फंड, स्वीडिश इंटरनेशनल डेवलपमेंट एड, मिलेनियम चैलेंज अकाउंट, द स्विस एजेंसी फॉर डेवलपमेंट एंड कोऑपरेशन, अमेरिकी विदेश मंत्रालय और बाकी जगहों से पैसा लेता है।

इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि कि उसकी कमाई के प्रमुख जरिए में फोर्ड फाउंडेशन भी था। ADR सीधे तौर पर फोर्ड फाउंडेशन और ओमदियार नेटवर्क से पैसे लेता रहा है। उसने
2016-2017 में फोर्ड फाउंडेशन से ₹70 लाख और और ओमदियार नेटवर्क से ₹2 करोड़ मिले हैं।

इसके अलावा वर्ष 2017-18 ने ADR को फोर्ड फाउंडेशन से ₹2 करोड़ मिले हैं। 2018-19 में भी ADR को फोर्ड फाउंडेशन से ₹60 लाख से अधिक मिला। वित्त वर्ष 2020-21 में भी ADR को ओमदियार नेटवर्क से ₹1.13 करोड़ मिले।

ADR को पैसा देने वाले उस द वायर को भी पैसा देते हैं जो फर्जी खबरें गढ़ता है। अब यही ADR बिहार चुनाव के मामले में कूद गया है और एक कहानी गढ़ना चाह रहा है। जॉर्ज सोरोस से जुड़े संगठन से पैसा लेता था। यही जॉर्ज सोरोस भारत में मोदी सरकार को कमजोर करने की बात कर रहा था।

जहाँ एक ओर ADR कोर्ट में इस मामले को फँसा रही है तो वहीं राहुल गाँधी 9 जुलाई, 2025 को चुनाव आयोग की प्रक्रिया के विरुद्ध बिहार जा रहे हैं।

भाजपा यह भी आरोप लगा चुका है कि सोनिया गाँधी का लिंक भी उस संस्थान से है जो जॉर्ज सोरोस से फंडिंग लेता है। जॉर्ज सोरोस का लम्बे समय से प्रयास भारत में अस्थिरता पैदा करने का रहा है। इस बार उसने यह दाँव बिहार चुनाव पर लगाया है। बिहार इसलिए क्योंकि यहाँ के चुनाव देश की राजनीति पर असर डालते हैं।

क्या बिहार में हार का विपक्ष ने खोज लिया बहाना?

बिहार में यदि NDA चुनाव हारती है तो इसका असर सीधे तौर पर केन्द्र सरकार पर पड़ेगा। केन्द्र सरकार में JDU बड़ी सहयोगी। चुनावी लिस्ट को लेकर हो रही हुआ-हुआ उससे ही संबधित दिखाई पड़ती है। ADR, योगेन्द्र यादव जैसे एक्टिविस्ट और राहुल गाँधी मतदाता लिस्ट का मुद्दा तब उठा रहे हैं जब चुनाव आयोग सब जानकारियाँ स्पष्ट कर चुका है।

राहुल गाँधी इससे पहले महाराष्ट्र चुनाव पर भी भ्रम की स्थिति बनाने का प्रयास कर चुके हैं। राहुल गाँधी ने यह प्रयास तब चालू किए हैं जब उनको विश्वास हो गया है कि मृतप्राय हो चुकी उनकी पार्टी सीधे तौर पर भाजपा से मुकाबला नहीं कर सकती। अब उन्होंने चुनाव और चुनावी प्रक्रिया को निशाना बनाना चालू किया है।

बिहार में वोटर लिस्ट का विरोध करना उसी कड़ी का हिस्सा है। पहले राहुल गाँधी का चुनावी रोना सिर्फ EVM मशीनों तक सीमित था, लेकिन अब यह बढ़ कर वोटर लिस्ट और कुछ दिनों में इससे भी आगे पहुँचेगा, ऐसा लगता है।

RAW को भी पूछना चाहिए कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA, फोर्ड फाउंडेशन और केजरीवाल में क्या है कनेक्शन?


दिल्ली शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हो चुके हैं। अब RAW को भी केजरीवाल से पूछताछ करनी चाहिए। भारत में पाकिस्तानी गुप्तचरों पर तो चर्चा होती रहती है, लेकिन RAW और KGB दलालों के बारे में पूछताछ जरुरी है। आम आदमी पार्टी पर खालिस्तान समर्थक होने के आरोप लगते रहे हैं। इसका ताजा सबूत हाल ही में देखने को मिला जब आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा आंख का आपरेशन कराने ब्रिटेन पहुंचे और वहां पहुंचते ही उन्होंने खालिस्तान समर्थक ब्रिटिश सांसद प्रीत गिल से मुलाकात की। यह भी किसी से छुपा नहीं है भारत में खालिस्तान आंदोलन को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA हवा देती रही है। अमेरिका जिस तरह से खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू का बचाव करती है उससे भी साफ है कि पन्नू उसका एसेट है। क्या भारत में भी अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के एसेट हैं। केजरीवाल जब एक सरकारी कर्मचारी थे उसी समय से अपने एनजीओ के लिए फोर्ड फाउंडेशन से फंडिंग लेते रहे। फोर्ड फाउंडेशन को CIA फंडिंग करती है। ऐसे में सवाल उठता है कि CIA, फोर्ड फाउंडेशन और केजरीवाल के बीच कोई कनेक्शन है क्या? केजरीवाल के आवास से ईडी अधिकारियों से जुड़े दस्तावेज बरामद होना क्या इस ओर इशारा कर रही है कि भारत के खिलाफ कोई बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश रची जा रही है। 

फोर्ड फाउंडेशन को फंड करती है CIA
अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के डिक्लासीफाइड दस्तावेज के अनुसार, फोर्ड फाउंडेशन की परियोजनाओं के वित्तपोषण में CIA उनका भागीदार था। परियोजनाएं राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक युद्ध में शामिल हैं।

CIA, फोर्ड फाउंडेशन और मैग्सेसे पुरस्कार के बीच संबंध के सबूत
अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के कई दस्तावेज हैं, जो स्पष्ट रूप से CIA, फोर्ड फाउंडेशन और मैग्सेसे पुरस्कार के बीच संबंध दिखाते हैं।

केजरीवाल के एनजीओ की फंडिंग फोर्ड फाउंडेशन से
जनवरी 2000 में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने एक एनजीओ ‘संपूर्ण परिवर्तन’ उर्फ ​​’परिवर्तन’ शुरू किया। इसकी शुरुआत ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ की मदद से की गई थी लेकिन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल को फंडिंग कौन कर रहा था? फंडिंग कर रहा था फोर्ड फाउंडेशन और डीप स्टेट एजेंट जार्ज सोरोस!

केजरीवाल जब सरकारी कर्मचारी थे तभी से मिल रही फंडिंग
वर्ष 2002 में, फोर्ड फाउंडेशन ने केजरीवाल के वित्त पोषित एनजीओ ‘संपूर्ण परिवर्तन’ उर्फ ​​’परिवर्तन’ को सीधे फंड देना शुरू कर दिया। कृपया ध्यान दें कि वह उस समय भी एक सरकारी कर्मचारी थे!

केजरीवाल अशोका ‘फेलो’ बने, फंडिंग फोर्ड फाउंडेशन से
वर्ष 2004 में अरविंद केजरीवाल अशोका ‘फेलो’ बने। क्या आप जानते हैं कि अशोका में फेलोशिप का वित्तपोषण कौन करता है? यहां भी फोर्ड फाउंडेशन ही फंडिंग करता है।

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की फंडिंग फोर्ड फाउंडेशन से
अरविंद केजरीवाल को 2006 में इमरजेंट लीडरशिप की श्रेणी में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला। आप यह जान कर चौंक जाएंगे कि इस पुरस्कार के लिए फंडिंग फोर्ड फाउंडेशन ही करता है।

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता एल रामदास AAP से जुड़े
वर्ष 2004 में, एडमिरल लक्ष्मीनारायण रामदास, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीआरसी, वीएसएम (सेवानिवृत्त), पूर्व नौसेना प्रमुख को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला। बाद में एल रामदास AAP के आंतरिक लोकपाल बने!

एल रामदास की बेटी फोर्ड फाउंडेशन में सलाहकार
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता एल रामदास की बेटी कविता रामदास, फोर्ड फाउंडेशन के अध्यक्ष की वरिष्ठ सलाहकार हैं और पहले कई वर्षों तक भारत में फोर्ड फाउंडेशन के देश प्रतिनिधि के रूप में काम कर चुकी हैं। उन्होंने जार्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के साथ भी काम किया है!

केजरीवाल Aid Sathi चुने गए
केजरीवाल को 2006 में एड-इंडिया एनजीओ द्वारा Aid Sathi के रूप में चुना गया था। Aid Sathi को बिना किसी विशिष्ट परियोजना के धन, प्रचार और समर्थन प्राप्त होता है!
फिर, इस एनजीओ को फोर्ड फाउंडेशन से भी फंड मिलता है!

मेधा पाटकर को AID-इंडिया फंडिंग
मेधा पाटकर को भी AID-इंडिया फंडिंग कर रही थी। केजरीवाल उसके काम को बढ़ावा देने में भी पूरी तरह शामिल थे। एक समय गुजरात में मेधा पाटकर को आम आदमी पार्टी की मुख्यमंत्री चेहरा बनाने की भी बात चल रही थी वहीं मेधा पाटकर ने भी आम आदमी पार्टी का खुलकर समर्थन किया है।