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मोदी को अपशब्द बोलकर गुजरात में चुनाव जीतना संभव नहीं

जैसाकि सर्वविदित यह कि समय परिवर्तनशील है। वो समय गया जब शेख जी फाख्ता उड़ाते थे। मुख्यमंत्री से लेकर अब प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी को अगर मोदी को गाली देकर चुनाव जीतना आसान है, उनसे बड़ा मुर्ख अथवा पागल दुनियां के परदे पर नहीं मिलेगा। बन्दे ने केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि पुरे गुजरात के लिए काम किया। 

गोधरा दंगे पर आज भी मोदी को मुस्लिम कट्टरपंथियों के साथ-साथ सेक्युलरिस्ट्स अपमानित करते हैं, लेकिन उन दंगों ने मोदी के चरित्र को चमकाया है। चमकने का कारण है। ऐसा नहीं 2002 से पहले गुजरात में दंगे नहीं हुए, बहुत हुए, लेकिन यही एक ऐसा दंगा ऐसा था, जो गिनती के दिन चला और कसूरवार ही नपे, बेकसूर नहीं। अक्सर देश में हुए आतंकवादी हमलों में इस्लामिक आतंकवादियों को संरक्षण देने बेकसूर हिन्दू, साधु और साध्वियों को जेल में डाल "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर भारत ही नहीं विश्व को गुमराह किया जाता था। परन्तु गोधरा कांड में ऐसा नहीं हुआ, मोदी ने केवल दंगाइयों को ही पकड़ा, जिन्होंने साबरमती ट्रेन में 59 रामभक्तों को जिन्दा जलाया था, जिस कारण गुजरात में दंगे हुए। 
गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए अभी तारीख का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। गुजरात के सियासी रण में उतरी आम आदमी पार्टी के नेताओं ने बदजुबानी में सबको पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया ने तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधने में सरी हदें पर कर दीं। ऐसे में एबीपी न्यूज़ के लिए सी-वोटर ने गुजरात और हिमाचल दोनों राज्यों का साप्ताहिक चुनावी सर्वे किया है। 
सर्वे में सवाल किया गया कि क्या  प्रधानमंत्री मोदी को अपशब्द बोलकर गुजरात में चुनाव जीतना संभव है? इस सवाल के जनता ने चौंकाने वाले जवाब दिए हैं।

सी-वोटर के सर्वे में 61 प्रतिशत लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी को अपशब्द बोलकर गुजरात में चुनाव जीतना संभव नहीं है, जबकि 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि हां, प्रधानमंत्री मोदी को अपशब्द बोलकर गुजरात में चुनाव जीतना संभव है। सर्वे में गुजरात के 1425 और हिमाचल प्रदेश के 1,361 लोगों की राय ली गई। सर्वे में मार्जिन ऑफ एरर प्लस माइनस 3 से प्लस माइनस 5 प्रतिशत है।

इससे पहले 12 से 14 अक्टूबर,2022 के बीच C-Voter ने गुजरात चुनाव को लेकर एक और सर्वे किया था। इसमें प्रधानमंत्री मोदी के लिए आम आदमी पार्टी नेता गोपाल इटालिया द्वारा कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के बाद पार्टी को कितना नुकसान हो सकता है, इस पर लोगों की राय ली गई थी। इस सर्वे में गुजरात के 1 हजार 337 लोगों से राय ली गई थी। इस सवाल के जवाब में 58 प्रतिशत लोगों ने अपने जवाब में कहा- ‘हां, AAP ने प्रधानमंत्री के लिए अपशब्द का इस्तेमाल करके सेल्फ गोल किया है’। वहीं इस सवाल पर 42 प्रतिशत लोगों का मानना था कि इससे आम आदमी पार्टी ने कोई सेल्फ गोल नहीं किया है।

आम आदमी पार्टी इस बार बीजेपी के गढ़ में सेंध मारने के पूरे-पूरे चक्कर में है। जहां, अरविंद केजरीवाल स्वयं को योगी राज श्री कृष्णजी के रूप में दर्शा रहे हैं, वहीं वो बीजेपी को वह ‘कंस’ का रूप देने को तत्पर हैं। साथ ही साथ, जिस प्रकार से गोपाल इटालिया ने कुंठित शब्द, ‘नीच’ का प्रयोग और इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की मां का अपमान किया, उससे गुजराती जनता में काफी रोष है। लोगों का कहना है कि इसके लिए आप नेता गोपाल इटालिया को जनता माफ नहीं करेगी।

गौरतलब है कि गुजरात चुनाव में जब विरोधी दलों की दाल नहीं गल रही है तो वे अब गाली देने के स्तर तक नीचे गिर गए हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी और गुजरात AAP के अध्यक्ष गोपाल इटालिया उस वीडियो पर बुरी तरह घिर गए हैं, जिसमें वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘नीच किस्म का आदमी’ बताते हुए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। वीडियो वायरल होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे पीएम मोदी के लिए जातिसूचक गाली करार दिया। इससे गुजरात एवं देश की जनता खासी नाराज हो गई। इसके बाद गोपाल इटालिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। हालांकि इसमें उन्होंने पीएम मोदी से माफी नहीं मांगी और जाति से लेकर गांव के होने तक की अजब दलीलें दीं। 

मोदी एक नीच शख्स: गुजरात आप प्रमुख

इस वीडियो में गोपाल इटालिया को कहते हुए सुना जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘नीच’ व्यक्ति हैं। मैं पुष्टि नहीं कर सकता लेकिन मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या देश का कोई पूर्व प्रधान मंत्री है जिसने वोट डालने के लिए इतनी नौटंकी की है? यह ‘नीच’ किस्म का शख्स यहां रोड शो कर रहा है। और वह दिखा रहा है कि मैं इस देश को कैसे C… बना रहा हूं। आप मेरे कहने का अर्थ को बेहतर ढंग से समझते हैं। वह डिजिटल इंडिया के बारे में बात करते हैं और वोट डालने के लिए दिल्ली से गुजरात जाते हैं। इस तरह वह देश को AAP के C… बना रहे हैं। तो, यह ‘नीच’ प्रकार का व्यक्ति देश को यह संदेश दे रहा है कि वह इस देश को कैसे C… बना रहा है।

2017 में मणिशंकर अय्यर ने भी कहा था नीच

यह पहली बार नहीं है जब किसी विपक्षी नेता ने पीएम नरेंद्र मोदी के लिए ‘नीच’ का इस्तेमाल किया है। 2017 में कांग्रेस के दिग्गज नेता मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी को नीच आदमी कहा था। जिसे उन्होंने 2019 के चुनावों से पहले भी दोहरया था। उस वक्त भारत की जनता ने पीएम मोदी को ऐतिहासिक फैसला सुनाकर अय्यर को करारा जवाब दिया था। अब नरेंद्र मोदी के खिलाफ गोपाल इटालिया की इस ‘नीच’ टिप्पणी पर गुजरात के लोग माकूल जवाब देंगे।

मेरे सिर्फ शब्द खराब, इनके तो करम खराब : केजरीवाल का मोदी पर हमला

न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के आवास पर छापे मारने पर 2015 में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि राजेंद्र तो बहाना है केजरीवाल उनका निशाना है। उन्होंने कहा कि मेरे तो सिर्फ शब्द खराब थे, लेकिन इनके तो कर्म ही खराब हैं।

मोदी देशद्रोही हैः केजरीवाल

इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि मोदी देशद्रोही है, मोदी ने आतंकवादियों के साथ सेटिंग कर रखी है। यही नहीं, केजरीवाल ने पीएम मोदी को कायर, मनोरोगी, पाकिस्तान से हाथ मिलाने जैसे आक्रामक और उत्तेजक शब्दों का प्रयोग कर भड़काऊ बयानबाजी से नफरत फैलाने और समाज में शांति भंग करने की कोशिश की है।

मोदी एक बेशर्म तानाशाहः केजरीवाल

न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल ने 2017 में आयकर विभाग द्वारा आम आदमी पार्टी (आप) का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए कहे जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बेशर्म तानाशाह करार दिया। आयकर विभाग ने पार्टी को मिलने वाले चंदे के बारे में झूठी और गलत ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की वजह से निर्वाचन आयोग से आप का राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रेशन रद्द करने को कहा है।

मोदी के कारण भारत को दुनिया में होना पड़ा शर्मिंदा : संजय सिंह 

पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल के करीबी और आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि भाजपा की नफरत की राजनीति के कारण भारत का सिर शर्म से झुक गया है। संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की अंतर्राष्ट्रीय बेइज्जती कराई है। भाजपा के कामों और नफरत की राजनीति के कारण भारत का सिर शर्म से झुक गया है। आजादी के 75 वर्षों में आज तक किसी प्रधानमंत्री ने भारत को इतना अपमानित नहीं किया और भारत का सिर इस तरीके से दुनिया के सामने नहीं झुकाया जितना मोदी ने झुकाने का काम किया है।

गोधरा में हिंदुओं को जलाना जिस Milli Gazette के लिए ‘जायज’, इसके फाउंडर जफरूल इस्लाम को केजरीवाल ने दिया था ओहदा

हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने वाले स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी के बचाव में मीडिया का एक हिस्सा इतना पागल हो गया है कि अब गोधरा में रामभक्तों को ट्रेन में ज़िंदा जलाए जाने वाली घटना का भी समर्थन कर रहा है। ये करतूत ‘मिली गैजेट’ नाम के एक मीडिया संस्थान ने की है, जिसके संस्थापक डॉक्टर जफरुल इस्लाम खान दिल्ली सरकार की ‘दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग’ के अध्यक्ष रह चुके हैं। वो फ़िलहाल इस वेबसाइट के ‘संस्थापक संपादक’ के पद पर भी हैं।

असल में ये सब आनंद रंगनाथन के एक ट्वीट से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि इजरायल में यहूदी एक वेब सीरीज को काफी पसंद कर रहे हैं, जिसमें अडोल्फ हिटलर के ‘मानवीय पक्ष’ को दिखाया गया है। उसके ‘शाकाहार’ और ‘कुत्तों के प्रति प्यार’ को भी इसमें दर्शाया गया है। उन्होंने लिखा कि इस वेब सीरीज का नाम ‘The Empire’ रखा जाना था, लेकिन फिर किसी ने इसका नाम ‘The Reich’ रखना पसंद किया। उन्होंने लिखा कि अगर आप यहूदी हैं तो इस वेब सीरीज को ज़रूर देखें।

इसके बाद JNU के प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने लिखा, “मुनव्वर फारुकी के लिए 59 हिन्दू पुरुषों-महिलाओं-बच्चों-शिशुओं को को गोधरा में ज़िंदा जलाया जाना ऑशविच कैंप में नाजियों द्वारा यहूदियों के नरसंहार के समान ही है। अगर वो सोचते हैं कि ऐसी घटनाओं का अमानवीयकरण करना मजाक-मस्ती है, तो फिर आप एक मानसिक पागल हैं। आपको मेडिकल मदद की ज़रूरत है।” ज़फरुल इस्लाम द्वारा संचालित ‘मिली गैजेट’ ने इसी ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी।

मीडिया संस्थान ने संवेदनहीनता का परिचय देते हुए लिखा, “क्या मुनव्वर फारुकी ने इस तरह की टिप्पणी की कि अगर उनकी कार के नीचे एक कुत्ता भी आ जाता है तो वो दुःखी हो जाते हैं। इससे ज्यादा अमानवीयकरण क्या हो सकता है? क्या गोधरा और ऑशविच समान हैं? वाऊ, यहूदी ट्रेन में ठेले वालों और लोगों पर हमले कर रहे थे। साथ ही वो रेलवे स्टेशनों पर हमले कर के एक धार्मिक इमारत को गिराए जाने का जश्न मना रहे थे?” लोगों ने ‘मिली गैजेट’ से पूछा कि क्या हिन्दुओं को ज़िंदा जलाया जाना उसके लिए एक दुःख भरी घटना नहीं है?

दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने मीडिया संस्थान के बयान की आलोचना करते हुए लिखा, “59 मासूम, जिनसे 27 महिलाएं और 10 छोटे बच्चे थे, उनकी हत्या को सही साबित किया जा रहा हैं इस मिल्ली गैजेट का संपादक जफरुल इस्लाम जिसको दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया।” लोगों ने मीडिया संस्थान को हिन्दूफोबिक करार दिया। लोगों ने पूछा कि मुस्लिम भीड़ द्वारा हिन्दुओं को ज़िंदा जलाए जाने की घटना को वो जायज क्यों ठहरा रहा है?

28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के समुदाय विशेष ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के लोग एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे। जफरुल खान के समर्थन में 8 मई को 20 मौलवियों और नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए उनके खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मुकदमे को वापस लेने की माँग की थी।