Showing posts with label justify. Show all posts
Showing posts with label justify. Show all posts

इजरायल ने पत्र लिखकर भारत सरकार से की संजय राउत की शिकायत, कहा- उन्हें बताए हम आहत हुए: यहूदियों के नरसंहार को ठहराया था जायज

हाल ही में शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने हिटलर द्वारा यहूदियों के होलोकॉस्ट अर्थात नरसंहार को जायज ठहराया था। वहीं अब इस मामले में इजरायली दूतावास ने विदेश मंत्रालय और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर शिवसेना नेता संजय राउत की ‘यहूदी विरोधी’ पोस्ट के बारे में शिकायत की है। 

द प्रिंट की खबर के अनुसार, इस मामले में इजरायल ने भारत सरकार से यह अपील की है कि शिवसेना सांसद को बताया जाए कि उनके यहूदी नरसंहार को जायज ठहराने वाले पोस्ट ने उस देश को किस तरह आहत किया है जो हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है। 

इजराइल द्वारा हमास पर हुई कार्यवाही का विरोध करने वाले क्या आतंकवाद समर्थक हैं? क्यों हमास ने बेकसूर 1400 लोगों को मौत की नींद सुला दिया था? क्यों हमास स्कूल, मदरसों और हॉस्पिटल को अपना अड्डा बना रहा है? जो कार्यवाही इजराइल ने आतंकवाद के खिलाफ की है, इन्हे वही कार्यवाही भारत सरकार को दंगाइयों और आतंकवादियों के विरुद्ध करने की सलाह देनी चाहिए? जैसे कश्मीर में आतंकवादी घरों में छुपकर हमले कर रहे हैं, सरकार को उस क्षेत्र की बिजली, पानी और खाद्य पदार्थों की पूर्ति को बंद कर आतंकवादियों पर कार्यवाही करे, कोई नहीं बोलेगा, क्योकि उनका वोट बैंक नाराज हो जाएगा, डर है कि कहीं उन्हें रोजी-रोटी के लाले न पड़ जाएं। अगर ये वास्तव में जनहितैषी नेता/पार्टियां है तो जनहित में नगर निगम से लेकर लोक/राज्य सभा में सरकार पर दंगाइयों, भ्रष्टाचारी और आतंकवाद समंर्थको को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा से हमेशा के लिए वंचित किया जाए का प्रस्ताव पारित कानून बनाने के लिए विवश करें। नहीं करेंगे, क्योकि इनकी दुकानें(पार्टियां) बंद हो जाएँगी। जनता मरती है, मरने दो।   

इस मामले की जानकारी देते हुए पत्रकार आदित्य राज कौल ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, “नई दिल्ली में इजरायली दूतावास ने यहूदी समुदाय के खिलाफ नरसंहार को उचित ठहराने वाली यहूदी विरोधी टिप्पणियों के लिए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के खिलाफ विदेश मंत्रालय को कड़े शब्दों में एक वर्बल नोट और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजा है।”

यह मामला दरअसल, 14 नवंबर, 2023 का है। उस दिन शिव सेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अपने एक्स हैंडल से यहूदियों के खिलाफ हिटलर के नरसंहार को उचित ठहराते हुए एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने एक्स हैंडल ‘आर्टिकल19 इंडिया’ की एक पोस्ट शेयर की थी जिसमें समय से पहले जन्मे बच्चों का एक वीडियो शेयर किया गया था और यह दावा किया गया था कि इजरायली सशस्त्र बलों ने इन शिशुओं के इनक्यूबेटर की बिजली काट दी है।

वहीं संजय राउत ने अपने पोस्ट में कहा था कि यहूदियों को हिटलर ने ऐसे ही कार्यों के लिए मार डाला था। उन्होंने पोस्ट शेयर करते हुए कमेंट में यह लिखा था, ”हिटलर को यहूदी समुदाय से इतनी नफरत क्यों थी? क्या यह अब समझ में आ रहा है?”

संजय राउत ने अपने पोस्ट में कहा कि हिटलर ने यहूदियों को नरसंहार में मार डाला क्योंकि उन्होंने ऐसे कृत्य किए थे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर द्वारा यहूदियों के नरसंहार को उचित ठहराया। हिटलर ने होलोकॉस्ट में 60 लाख से अधिक यहूदियों की जान ले ली थी, जिसमें उन्हें गैस चैंबर में बंद करके मार दिया गया। हालाँकि, इस पोस्ट के बाद विवाद बढ़ने पर संजय राउत ने पोस्ट हटा दिया था लेकिन तब तक इज़रायली अधिकारियों ने स्क्रीनशॉट ले लिया था। 

आर्टिकल 19 इंडिया ने अपने पोस्ट में लिखा था, ”अल-शिफा अस्पताल में समय से पहले पैदा हुए बच्चे  चीख रहे हैं। जिस इनक्यूबेटर में उन्हें रखा गया था उसकी बिजली इजरायल ने काट दी है। सशस्त्र बलों ने अस्पताल को चारों तरफ से घेर लिया है। अस्पताल के अंदर किसी भी खाद्य पदार्थ, दूध या पानी की अनुमति नहीं है।” पोस्ट में एक वीडियो भी था जिसमें दावा किया गया कि यह अल शिफ़ा अस्पताल का है।

वहीं इस मामले में खबर आई थी कि अल शिफा अस्पताल में 39 बच्चों की मौत नहीं हुई है, बल्कि यह कहा गया था कि ऑक्सीजन और बिजली की कमी के कारण ये खतरे में हैं। जबकि इस मामले में आईडीएफ ने शिफ़ा अस्पताल को ऑक्सीजन और सहायता प्रदान करने की भी पेशकश की थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

इस मामले में सैन्य प्रवक्ता ने कहा था, “आईडीएफ नागरिकों और हमास आतंकवादियों के बीच अंतर करने की अपनी नैतिक और पेशेवर जिम्मेदारियों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। आईडीएफ इनक्यूबेटरों के हस्तांतरण को सुनिश्चित करने के लिए किसी भी विश्वसनीय मध्यस्थ पक्ष के साथ काम करने को तैयार है।”


आतंकी महिलाओं की हत्या कर नग्न घुमा रहे, भारत-पाकिस्तान से लेकर लंदन तक कट्टर मुस्लिम हमास के समर्थन में उतरे

हमास का समर्थन करते भारतीय लिबरल और मुस्लिम (चित्र साभार: reallyswara/instagram & @007AliSohrab/X)
फिलिस्तीन के इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला कर दिया। इस हमले में हमास के आतंकी आम नागरिकों और सैनिकों को मारने के अलावा कई महिलाओं और बच्चे-बच्चियों को बंधक बनाकर अपने साथ ले गए। अब सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी मुस्लिम हमास के हमले के जायज ठहरा रहे हैं।

हमास के आतंकियों ने इनमें से एक जर्मन नागरिक शानी लौक को मारकर उसके नग्न शव की परेड निकाली। जहाँ हमास के आंतकियों के इस कृत्य की विश्व भर में निंदा हो रही है, वहीं भारत से लेकर पाकिस्तान और लंदन तक के कट्टरपंथी मुस्लिम इन कबीलाई सोच वाले आतंकियों के समर्थन में उतर आए हैं।

महिलाओं को अगवा करने, उनके साथ दुर्व्यवहार करने, उन्हें मारने और शवों तक के साथ बर्बरता करने वालों का खुला समर्थन किया जा रहा है। भारत के कई कट्टर मुस्लिम सोशल मीडिया अकाउंट यही करते पाए गए हैं। उन्होंने महिलाओं के साथ इस व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश भी की है।

हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलने वाला अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का छात्र रहा शरजील उस्मानी इनमें सबसे आगे है। उसने वीडियो सामने आने के तुरंत बाद फिलिस्तीन के समर्थन को लेकर एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया।

शरजील ने तर्क दिया कि भारत के दक्षिणपंथी लोग इजरायल का समर्थन कर रहे हैं। इसलिए वह मुस्लिम होने के नाते फिलिस्तीन का समर्थन करेगा, भले ही हमास जैसे आतंकी संगठन महिलाओं को नंगा क्यों ना घुमाएँ।

वहीं, अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने हमास के इन हमलों में मारे गए इजरायलियों की पीड़ा का जिम्मेदार उन्हें खुद बता दिया है।

एक व्यक्ति ने नग्न परेड कराई जा रही महिला के वीडियो के नीचे लिखा, “इसका फिर से बलात्कार करो।”

खुद को पत्रकार बताकर हिन्दुओं के विरुद्ध लगातार जहर उगलने वाले ‘अली सोहराब’ ने भी हमास के इन कृत्यों को सही ठहराया है। उसने दावा किया कि हमास द्वारा परेड कराया जा रहा शव महिला का ना होकर किसी पुरुष का है। हालाँकि, वह ये बताना भूल गया कि महिला या पुरुष किसी के शव के साथ यह बर्बरता गलत है।

आगे वह इस कदम को यह कहकर सही ठहरा देता है कि क्या महिलाओं का फूल-माला से स्वागत होना चाहिए।

एक अन्य कट्टर मुस्लिम प्रोफ़ेसर नूरुल ने लिखा है कि इजरायल में महिला कम कपड़े पहनती हैं। इसलिए उनके शवों को नग्न करके परेड करवाना उचित है।

हमास के इन कृत्यों की तुलना कट्टर मुस्लिम पत्रकार सदफ आफरीन ने भारत की आजादी की लड़ाई से कर दी। हालाँकि, उसने यह नहीं बताया कि भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने कभी ऐसा सुलूक किसी महिला के साथ नहीं किया।

एक और कट्टर मुस्लिम महिला लालिबा फिरदौस ने हमास के आतंकियों की तुलना भारत के स्वतंत्रता सेनानियों की। वहीं, हमास के आतंकी हमले की तुलना 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से कर दी। इस तरह इसने भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को भी बदनाम करने की कोशिश की।

कट्टर मुस्लिम शाहनवाज अंसारी ने इसे अब्राहमिक धर्मों का आपसी मामला बताते हुए कहा कि वो इसे आपस में निपट लेंगे। उसने एक हिन्दू शख्स पर तंज कसा और उसे गौमूत्र और गोबर खाने वाला बता दिया।

यह नीचता भारत तक ही सीमित है, ऐसा नहीं है। हमास के आतंकियों के समर्थक भारत से लेकर ईरान और लन्दन तक हैं। लन्दन में रहने वाली पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की तलाकशुदा बीवी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने हमास के आतंकियों की सफलता की कामना अल्लाह से की।

style="font-family: verdana; font-size: medium;">अधिकांश मुस्लिम देशों में हमास के आतंकी हमले के समर्थन में रैलियाँ निकाली गई हैं और नमाज पढ़ी गई। लेबनान, तुर्की और ईरान में इजरायली महिलाओं की हत्या और उनको नग्न करने का जश्न मनाया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर हमास के आतंकियों का समर्थन कर रहे कट्टर मुस्लिम हमास के कुकृत्यों को यह कहकर छुपा रहे हैं कि इससे पहले इजरायल ने भी फिलिस्तीन पर हमले किए हैं। हालाँकि, वे ये बताना भूल जाते हैं कि इजरायल द्वारा हमले गाजा से रॉकेट फायरिंग के बाद होते हैं।

ALLAHU AKBAR ALLAHU AKBAR ! Ooh Allah give victory to our Palestinians brothers and sisters 
 #Israel #gaza #طوفان_الأقصى #FreePalestine #Palestina #Palestine #PalestineUnderAttack

pic.twitter.com/f4X4etcgft

— Jemima Goldsmith (@jemimakhan09) October 7, 2023

अवलोकन करें:-

गोधरा में हिंदुओं को जलाना जिस Milli Gazette के लिए ‘जायज’, इसके फाउंडर जफरूल इस्लाम को केजरीवाल ने दिया था ओहदा

हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने वाले स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी के बचाव में मीडिया का एक हिस्सा इतना पागल हो गया है कि अब गोधरा में रामभक्तों को ट्रेन में ज़िंदा जलाए जाने वाली घटना का भी समर्थन कर रहा है। ये करतूत ‘मिली गैजेट’ नाम के एक मीडिया संस्थान ने की है, जिसके संस्थापक डॉक्टर जफरुल इस्लाम खान दिल्ली सरकार की ‘दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग’ के अध्यक्ष रह चुके हैं। वो फ़िलहाल इस वेबसाइट के ‘संस्थापक संपादक’ के पद पर भी हैं।

असल में ये सब आनंद रंगनाथन के एक ट्वीट से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि इजरायल में यहूदी एक वेब सीरीज को काफी पसंद कर रहे हैं, जिसमें अडोल्फ हिटलर के ‘मानवीय पक्ष’ को दिखाया गया है। उसके ‘शाकाहार’ और ‘कुत्तों के प्रति प्यार’ को भी इसमें दर्शाया गया है। उन्होंने लिखा कि इस वेब सीरीज का नाम ‘The Empire’ रखा जाना था, लेकिन फिर किसी ने इसका नाम ‘The Reich’ रखना पसंद किया। उन्होंने लिखा कि अगर आप यहूदी हैं तो इस वेब सीरीज को ज़रूर देखें।

इसके बाद JNU के प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने लिखा, “मुनव्वर फारुकी के लिए 59 हिन्दू पुरुषों-महिलाओं-बच्चों-शिशुओं को को गोधरा में ज़िंदा जलाया जाना ऑशविच कैंप में नाजियों द्वारा यहूदियों के नरसंहार के समान ही है। अगर वो सोचते हैं कि ऐसी घटनाओं का अमानवीयकरण करना मजाक-मस्ती है, तो फिर आप एक मानसिक पागल हैं। आपको मेडिकल मदद की ज़रूरत है।” ज़फरुल इस्लाम द्वारा संचालित ‘मिली गैजेट’ ने इसी ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी।

मीडिया संस्थान ने संवेदनहीनता का परिचय देते हुए लिखा, “क्या मुनव्वर फारुकी ने इस तरह की टिप्पणी की कि अगर उनकी कार के नीचे एक कुत्ता भी आ जाता है तो वो दुःखी हो जाते हैं। इससे ज्यादा अमानवीयकरण क्या हो सकता है? क्या गोधरा और ऑशविच समान हैं? वाऊ, यहूदी ट्रेन में ठेले वालों और लोगों पर हमले कर रहे थे। साथ ही वो रेलवे स्टेशनों पर हमले कर के एक धार्मिक इमारत को गिराए जाने का जश्न मना रहे थे?” लोगों ने ‘मिली गैजेट’ से पूछा कि क्या हिन्दुओं को ज़िंदा जलाया जाना उसके लिए एक दुःख भरी घटना नहीं है?

दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने मीडिया संस्थान के बयान की आलोचना करते हुए लिखा, “59 मासूम, जिनसे 27 महिलाएं और 10 छोटे बच्चे थे, उनकी हत्या को सही साबित किया जा रहा हैं इस मिल्ली गैजेट का संपादक जफरुल इस्लाम जिसको दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया।” लोगों ने मीडिया संस्थान को हिन्दूफोबिक करार दिया। लोगों ने पूछा कि मुस्लिम भीड़ द्वारा हिन्दुओं को ज़िंदा जलाए जाने की घटना को वो जायज क्यों ठहरा रहा है?

28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के समुदाय विशेष ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के लोग एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे। जफरुल खान के समर्थन में 8 मई को 20 मौलवियों और नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए उनके खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मुकदमे को वापस लेने की माँग की थी।