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हमास आतंकी महमूद अमीन याकुब अल मुहतादी को अमेरिकी जेल में मिलेगा हलाल खाना और शरिया वाली सुविधाएँ, 60 यहूदियों की हत्या में शामिल होने का आरोप

                                                   आतंकी को स्पेशल ट्रीटमेंट ( फोटो साभार- abc news)
हमास का मोस्ट वांडेट आतंकवादी महमूद अमीन याकूब अल मुहतादी को गिरफ्तार कर लिया है। इसने 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हुए हमले का नेतृत्व किया था। 20 अक्टूबर 2025 को उसकी गिरफ्तारी हुई है। 33 वर्षीय महमूद वर्तमान में लाफायेट लुइसियाना में रह रहा था।

अटॉर्नी जनरल पामेला बोंडी ने कहा, “अमेरिका में छिपने के बाद, इस खूँखार आतंकी को खोज लिया गया और 7 अक्टूबर की आतंकी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। होलोकॉस्ट के बाद यहूदियों पर ये सबसे बड़ा हमला था।” इसमें दर्जनों अमेरिकी नागरिकों की जान गई। अटॉर्नी जनरल के मुताबिक, “हम यहूदी अमेरिकियों और विश्व भर के यहूदी लोगों के साथ यहूदी-विरोधी और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ खड़े रहेंगे।”

17 अक्टूबर को जारी प्रेस रिलीज में नेशनल सिक्योरिटी के सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन ए. आइज़ेनबर्ग ने कहा, “जैसा कि कल दायर दस्तावेजों में बताया गया है, 7 अक्टूबर को, जब अल-मुहतादी को इजराइल और कई देशों के नागरिकों, जिसमें अमेरिका शामिल है, पर हो रहे बर्बर हमले की जानकारी मिली, तो वह तुरंत सक्रिय हो गया। हथियारों से लैस होकर अपनी टीम में कुछ लोगों को शामिल किया और फिर इज़राइल में प्रवेश किया, उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत थे।”

अल-मुहतादी बाद में अमेरिका में प्रवेश के लिए गलत तरीके से वीजा प्राप्त किया। वह छिप कर रहने लगा। यह गिरफ्तारी उस दिन अमेरिकियों को नुकसान पहुंचाने वालों को न्याय के कटघरे में लाने की दिशा में पहला सार्वजनिक कदम है।

हालाँकि न्याय विभाग ने हमास आतंकवादियों को नरसंहार के लिए जिम्मेदार ठहराने की बात कही, लेकिन अब यह खुलासा हुआ है कि लुइसियाना में जेल में बंद इस हमास आतंकवादी को उसकी माँग पर धार्मिक सुविधाएँ दी गई हैं।

न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को महमूद अमीन याकूब अल-मुहतादी ने अदालत से अनुरोध किया कि यूएस मार्शल्स को उसे धार्मिक सुविधाएँ प्रदान करने और जेल में रहते हुए अपने धार्मिक कर्तव्यों को पूरा करने की अनुमति दी जाए। यह ध्यान देने योग्य है कि महमूद अमीन याक़ूब अल-मुहतादी ने न केवल इज़राइल में रक्तपात किया, बल्कि अमेरिकी वीजा आवेदन के वक्त भी झूठ बोला, जिसमें उसने 7 अक्टूबर के नरसंहार में अपनी संलिप्तता से इनकार किया था।

हमास आतंकवादी ने अदालत से हलाल माँस देने, उपवास करने और जेल में अपने धार्मिक कर्तव्यों को पूरा करने की अनुमति देने का अनुरोध किया।

अदालत ने आरोपी के अनुरोध को स्वीकार करते हुए कहा, “यूएस मार्शल्स को प्रतिवादी को वह सुविधाएँ देनी चाहिए, जो वे दे सकते हैं।” अदालत ने आतंकवादी के वकील को यूएस मार्शल्स के साथ संपर्क में रहने और इन माँगों को पूरा करने की उनकी क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए भी कहा।

महमूद अमीन याक़ूब अल-मुहतादी कौन है

महमूद अमीन याक़ूब अल-मुहतादी उस समय गाजा में रहता था। उसने 7 अक्टूबर के नरसंहार में हिस्सा लिया था, जिसमें इजराइल के कफर आजा किबुत्ज में रहने वाले 60 लोगों की हत्या की थी। शिकायत के अनुसार, 7 अक्टूबर के नरसंहार से पहले, उसने अपने एक साथी आतंकवादी से खुशी-खुशी कहा था कि यह नरसंहार ‘तीसरे विश्व युद्ध’ को भड़काएगा।

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, “अल-मुहतादी, जो नेशनल रेसिस्टेंस ब्रिगेड्स (NRB), डेमोक्रेटिक फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फिलिस्तीन (DFLP) की सैन्य शाखा में युवाओं का नेतृत्व करता था, ने उस दुखद दिन हमास कमांडर मोहम्मद देइफ के हथियार उठाने के आह्वान को सुना और पास के किबुत्ज़ पर हमला करने के लिए लोगों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया, जैसा कि फेड्स ने दावा किया।”

शिकायत में यह भी खुलासा हुआ कि केवल कफर आज़ा किबुत्ज़ में 60 लोग मारे गए और 19 को अगवा कर लिया गया। मारे गए लोगों में 4 अमेरिकी नागरिक थे। कफर आज़ा से अगवा किए गए 19 लोगों में एक अमेरिकी नागरिक था।

सेलफोन डेटा से पता चलता है कि अल-मुहतादी उस दिन सुबह कफर आज़ा में मौजूद था। उसने नरसंहार से पहले अपने साथी आतंकवादियों को राइफल, बुलेटप्रूफ वेस्ट और गोला-बारूद लाने का निर्देश भी दिया था।

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर की सुबह एक अन्य आतंकवादी के साथ फोन पर बातचीत में अल-मुहतादी ने कहा: “बहुत सारे इज़राइल डिफेंस फोर्सेस के सैनिक अगवा किए गए हैं, यह एक गेम है।”

उसने कॉल के दौरान कहा, “अगर सब कुछ ठीक रहा, तो सीरिया हिस्सा लेगा, लेबनान हिस्सा लेगा … यह तीसरा विश्व युद्ध होगा।”

आतंकवादी हमले के एक साल से भी कम समय में अल-मुहतादी अमेरिका चला गया। अपने वीजा आवेदन में, उसने दावा किया था कि वह किसी आतंकवादी समूह का हिस्सा नहीं था, उसने कभी किसी की हत्या नहीं की थी या किसी आपराधिक गतिविधि में भाग नहीं लिया था। ये साफ झूठ था। वह सितंबर 2024 में अमेरिका चला गया।

यह गौरतलब है कि हमास यहूदियों को नष्ट करना और इजराइल पर कब्जा करना अपना धार्मिक कर्तव्य मानता है। 1988 में अपनाया गया हमास चार्टर इजराइल, फिलिस्तीन, और यहूदियों और मुसलमानों के बीच व्यापक संघर्ष के बारे में हमास के वैचारिक दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। चार्टर का एक प्रमुख दावा यह है कि जॉर्डन नदी से भूमध्य सागर तक का पूरा इजराइल वक्फ भूमि है, जो विशेष रूप से मुसलमानों की है।

यहूदियों के कत्लेआम का इरादा जताया

हमास ने यहूदियों की हत्या का आह्वान भी किया और दावा किया कि ‘जजमेंट डेट’ तब तक नहीं आएगा, जब तक मुसलमान यहूदियों से लड़कर उन्हें मार नहीं डालते। हिंसा का समर्थन करने के लिए उसने इस्लामी ग्रंथों का हवाला दिया।
हमास चार्टर का अनुच्छेद 7 कहता है: “जजमेंट डे तब तक नहीं आएगा जब तक मुसलमान यहूदियों से लड़कर उन्हें मार नहीं डालते। तब यहूदी चट्टानों और पेड़ों के पीछे छिपेंगे, और चट्टानें और पेड़ पुकारेंगे: ‘ऐ मुसलमान, मेरे पीछे एक यहूदी छिपा है, आओ और उसे मार डालो।’”
हमास चार्टर में उल्लिखित इस्लामी आयत सहीह अल-बुखारी (हदीस और सुन्नत की किताब का संग्रह) से ली गई है, जिसमें लिखा है: “वह घड़ी तब तक नहीं आएगी जब तक मुसलमान यहूदियों से नहीं लड़ते और उन्हें मार नहीं डालते, जब तक कि यहूदी पत्थरों और पेड़ों के पीछे नहीं छिपते और पत्थर या पेड़ नहीं कहते, ‘ऐ मुसलमान, ऐ अल्लाह के दास, मेरे पीछे एक यहूदी है, आओ और उसे मार डालो।”

इजरायल ने पत्र लिखकर भारत सरकार से की संजय राउत की शिकायत, कहा- उन्हें बताए हम आहत हुए: यहूदियों के नरसंहार को ठहराया था जायज

हाल ही में शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने हिटलर द्वारा यहूदियों के होलोकॉस्ट अर्थात नरसंहार को जायज ठहराया था। वहीं अब इस मामले में इजरायली दूतावास ने विदेश मंत्रालय और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर शिवसेना नेता संजय राउत की ‘यहूदी विरोधी’ पोस्ट के बारे में शिकायत की है। 

द प्रिंट की खबर के अनुसार, इस मामले में इजरायल ने भारत सरकार से यह अपील की है कि शिवसेना सांसद को बताया जाए कि उनके यहूदी नरसंहार को जायज ठहराने वाले पोस्ट ने उस देश को किस तरह आहत किया है जो हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है। 

इजराइल द्वारा हमास पर हुई कार्यवाही का विरोध करने वाले क्या आतंकवाद समर्थक हैं? क्यों हमास ने बेकसूर 1400 लोगों को मौत की नींद सुला दिया था? क्यों हमास स्कूल, मदरसों और हॉस्पिटल को अपना अड्डा बना रहा है? जो कार्यवाही इजराइल ने आतंकवाद के खिलाफ की है, इन्हे वही कार्यवाही भारत सरकार को दंगाइयों और आतंकवादियों के विरुद्ध करने की सलाह देनी चाहिए? जैसे कश्मीर में आतंकवादी घरों में छुपकर हमले कर रहे हैं, सरकार को उस क्षेत्र की बिजली, पानी और खाद्य पदार्थों की पूर्ति को बंद कर आतंकवादियों पर कार्यवाही करे, कोई नहीं बोलेगा, क्योकि उनका वोट बैंक नाराज हो जाएगा, डर है कि कहीं उन्हें रोजी-रोटी के लाले न पड़ जाएं। अगर ये वास्तव में जनहितैषी नेता/पार्टियां है तो जनहित में नगर निगम से लेकर लोक/राज्य सभा में सरकार पर दंगाइयों, भ्रष्टाचारी और आतंकवाद समंर्थको को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा से हमेशा के लिए वंचित किया जाए का प्रस्ताव पारित कानून बनाने के लिए विवश करें। नहीं करेंगे, क्योकि इनकी दुकानें(पार्टियां) बंद हो जाएँगी। जनता मरती है, मरने दो।   

इस मामले की जानकारी देते हुए पत्रकार आदित्य राज कौल ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, “नई दिल्ली में इजरायली दूतावास ने यहूदी समुदाय के खिलाफ नरसंहार को उचित ठहराने वाली यहूदी विरोधी टिप्पणियों के लिए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के खिलाफ विदेश मंत्रालय को कड़े शब्दों में एक वर्बल नोट और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजा है।”

यह मामला दरअसल, 14 नवंबर, 2023 का है। उस दिन शिव सेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अपने एक्स हैंडल से यहूदियों के खिलाफ हिटलर के नरसंहार को उचित ठहराते हुए एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने एक्स हैंडल ‘आर्टिकल19 इंडिया’ की एक पोस्ट शेयर की थी जिसमें समय से पहले जन्मे बच्चों का एक वीडियो शेयर किया गया था और यह दावा किया गया था कि इजरायली सशस्त्र बलों ने इन शिशुओं के इनक्यूबेटर की बिजली काट दी है।

वहीं संजय राउत ने अपने पोस्ट में कहा था कि यहूदियों को हिटलर ने ऐसे ही कार्यों के लिए मार डाला था। उन्होंने पोस्ट शेयर करते हुए कमेंट में यह लिखा था, ”हिटलर को यहूदी समुदाय से इतनी नफरत क्यों थी? क्या यह अब समझ में आ रहा है?”

संजय राउत ने अपने पोस्ट में कहा कि हिटलर ने यहूदियों को नरसंहार में मार डाला क्योंकि उन्होंने ऐसे कृत्य किए थे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर द्वारा यहूदियों के नरसंहार को उचित ठहराया। हिटलर ने होलोकॉस्ट में 60 लाख से अधिक यहूदियों की जान ले ली थी, जिसमें उन्हें गैस चैंबर में बंद करके मार दिया गया। हालाँकि, इस पोस्ट के बाद विवाद बढ़ने पर संजय राउत ने पोस्ट हटा दिया था लेकिन तब तक इज़रायली अधिकारियों ने स्क्रीनशॉट ले लिया था। 

आर्टिकल 19 इंडिया ने अपने पोस्ट में लिखा था, ”अल-शिफा अस्पताल में समय से पहले पैदा हुए बच्चे  चीख रहे हैं। जिस इनक्यूबेटर में उन्हें रखा गया था उसकी बिजली इजरायल ने काट दी है। सशस्त्र बलों ने अस्पताल को चारों तरफ से घेर लिया है। अस्पताल के अंदर किसी भी खाद्य पदार्थ, दूध या पानी की अनुमति नहीं है।” पोस्ट में एक वीडियो भी था जिसमें दावा किया गया कि यह अल शिफ़ा अस्पताल का है।

वहीं इस मामले में खबर आई थी कि अल शिफा अस्पताल में 39 बच्चों की मौत नहीं हुई है, बल्कि यह कहा गया था कि ऑक्सीजन और बिजली की कमी के कारण ये खतरे में हैं। जबकि इस मामले में आईडीएफ ने शिफ़ा अस्पताल को ऑक्सीजन और सहायता प्रदान करने की भी पेशकश की थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

इस मामले में सैन्य प्रवक्ता ने कहा था, “आईडीएफ नागरिकों और हमास आतंकवादियों के बीच अंतर करने की अपनी नैतिक और पेशेवर जिम्मेदारियों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। आईडीएफ इनक्यूबेटरों के हस्तांतरण को सुनिश्चित करने के लिए किसी भी विश्वसनीय मध्यस्थ पक्ष के साथ काम करने को तैयार है।”


गाजा पर कब्जे के लिए तैयार इजरायल, उधर NBC ने हमास के 2 हमदर्द एंकरों के शो को किया बंद

अयमान मोहयेल्दीन (बाएँ), मेहदी हसन (बीच में) और अली वेल्शी (दाएँ) को प्रसारण से हटा लिया गया है (चित्र साभार: MSNBC, @AliVelshi & @mehdirhasan/X)
इस्लामी आतंकी संगठन हमास के इजरायल पर हमले के बाद अब इजरायल गाजा के भीतर सेना भेजने जा रहा है। इसके लिए तैयारियाँ अंतिम चरणों में हैं। उधर अमेरिकी टीवी नेटवर्क NBC ने हमास से हमदर्दी रखने वाले दो टीवी एंकरों के शो बंद कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, NBC समूह के टीवी चैनल MSNBC पर से टीवी एंकर मेहदी हसन और अयमान मोहयेल्दीन के शो टीवी पर प्रसारित नहीं किए गए। यह दोनों एंकर लम्बे समय से इजरायल पर प्रश्न उठाते आए हैं और हमास का भी समर्थन करते रहे हैं। एक अन्य एंकर अली वेल्शी को भी प्रसारण से हटा लिया गया है।

अयमान को जहाँ एक अन्य शो की एंकरिंग करने को कहा गया है तो वहीँ मेहदी हसन का शो प्रसारित ही नहीं किया गया। हालाँकि, NBC ने इसे मात्र एक संयोग करार दिया है। NBC का कहना है कि उनके शो के हटने और इजरायल-गाजा के बीच युद्ध का आपस में कोई सम्बन्ध नहीं है।

मेहदी हसन लगातार हमास जैसे संगठनों का समर्थन करते रहे हैं। हाल ही में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों ने हमास के इजरायल पर हमले में इजरायल को ही दोषी ठहरा दिया था। इसके पश्चात कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने इन छात्रों को अपने यहाँ नौकरी ना देने का ऐलान किया था तब मेहदी इन छात्रों के बचाव में उतर आए थे।

मेहदी हसन का एक पुराना वीडियो भी वायरल है जिसमें वह इस्लाम के बारे में कुछ ऐसे चमत्कारी दावे करते दिख रहे हैं जिसे पचा पाना मुश्किल है। उनका दावा था कि इसको गलत सिद्ध करने के लिए अभी कोई सबूत नहीं है।

मेहदी गैर इस्लामी लोगों को पशुओं की तरह रहने वाला मानते हैं।

मुस्लिम एंकरों को प्रसारण से हटाने के विवाद के बीच इजरायल ने गाजा में सेना भेजने की तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। रिजर्व सैनिकों को वापस बुलाने के बाद अब उन्हें इजरायल की सेना हथियार और युद्ध के अन्य साजोसामान दे रही है। इजरायली सुरक्षा बलों का कहना है कि वह गाजा के भीतर जमीन, समुद्र और हवाई तीनों माध्यम से हमला करेंगे।

इजरायल ने उत्तरी गाजा के नागरिकों को चेतावनी दी है कि वह अपना इलाका छोड़ कर दक्षिणी गाजा में चले जाएँ। इसके लिए गाजा में पर्चे गिराए गए हैं और लगातार गाजा के नागरिकों के लिए समय बढ़ाया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इजरायल गाजा के भीतर दसियों हजार सैनिक भेज कर गाजा को अपने कब्जे में ले लेगा। इजरायल के रक्षा मंत्री याओव गैलेंट ने पहले ही आदेश दिया था कि गाजा को पूरी तरह से कब्जे में ले लिया जाए। कुछ इलाके में इजरायल के टैंक आगे भी कर दिए गए हैं। गाजा से 7 अक्टूबर को इजरायल के भीतर घुसे हमास के हमले में अब तक 1300 इजरायली नागरिकों की मौत हो चुकी है। 3000 से अधिक लोग घायल हैं जबकि लगभग 150 लोग हमास ने बंधक बनाए हुए हैं।

इजरायल द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में अब तक 2300 से अधिक फिलीस्तीनी आतंकी मारे जा चुके हैं जबकि लगभग 9000 से अधिक घायल है। इजरायल ने गाजा के भीतर पानी-बिजली-गैस और इन्टरनेट भी देने से मना कर दिया है।

कनाडा : ‘या अल्लाह… काफिरों का कर दो सफाया’ ; गैर-मुस्लिमों को समझें अपना दुश्मन : इमाम शेख यूनुस का भड़काऊ बयान

साभार शेख यूनुस कथराडा फेसबुक
कनाडा के इमाम शेख यूनुस कथराडा ने गैर-मुस्लिमों के लिए आग उगला है। इससे जुड़ा उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में इमाम यूनुस मुस्लिमों को गैर-मुस्लिमों के खिलाफ भड़का रहा है। शेख यूनुस कह रहा है, “हमारे बच्चों को यह समझना चाहिए कि गैर-मुस्लिम अल्लाह के दुश्मन हैं इसलिए वे हमारे दुश्मन हैं।”

अमेरिका स्थित मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के ट्विटर हैंडल MEMRI से एक वीडियो पोस्ट किया गया। सबटाइटल में वीडियो में कही गई बातों का अंग्रेजी अनुवाद भी था। रिपोर्ट्स के मुताबिक कनाडाई इमाम शेख यूनुस कनाडा के विक्टोरिया में मुस्लिमों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में खिताब कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गैर-मुस्लिमों को लेकर काफी भड़काने वाली बातें कहीं। उनके निशाने पर सबसे ज्यादा ईसाई थे। अपने खिताब में इमाम ने कहा कि अल्लाह की तौहीन करने वाले अल्लाह के दुश्मन हैं। अल्लाह ने कुरान में कहा है कि उन्हें किसी ने पैदा नहीं किया, न वो किसी के बच्चे हैं न उनकी कोई औलाद है। लेकिन ईसाई कहते हैं कि अल्लाह का एक बेटा है। क्या यह अल्लाह का अपमान नहीं है?

2 मिनट 12 सेकेंड के इस वीडियो में इमाम ने कहा, “गैर मुस्लिम, जिनमें ईसाई, यहूदी और दूसरे नास्तिक शामिल हैं वो अल्लाह के दुश्मन हैं। क्या आपको लगता है कि वे आपके दोस्त हैं? नहीं, अगर वे अल्लाह के दुश्मन हैं तो आपके दोस्त कैसे हो सकते हैं? मैं चाहता हूँ कि हमारे बच्चे इस बात को अच्छी तरह समझ लें। वे अल्लाह के दुश्मन हैं इसलिए आपके भी दुश्मन हैं। उनमें से कुछ लोग तो अल्लाह के अस्तित्व पर ही विश्वास नहीं करते। क्या आप ऐसे किसी शख्स को अपना दोस्त बनाना चाहते हैं?”

वीडियो के अंत में शेख यूनुस ने अरबी में दुआ पढ़ते हुए कहा, “या अल्लाह, इस्लाम और मुस्लिमों को ताकत दो, काफिरों और अनेक देवी देवताओं की पूजा करने वाले को अपमानित करो, इस्लाम के दुश्मनों और काफिरों का सफाया करो!”

इमाम शेख यूनुस के सोशल मीडिया अकाउंट्स इस तरह के नफरती वीडियो से भरे पड़े हैं। सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर है कि कनाडा में रहने वाला शेख यूनुस लगातार जहरीले बयान देता रहता है। लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है जबकि कनाडा एक ईसाई बहुल देश है।

मुस्लिम शासक ‘दोस्त’ फिर भी इस्लामी भीड़ ने मार डाले 4000 यहूदी, क्रॉस पर लटकाया: 956 साल पहले ग्रेनाडा में हुआ था एक नरसंहार

                                      ग्रेनाडा (प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार: डैन पोराज का ट्विटर अकाउंट)
दुनियाभर के देश इस्लामिक हिंसा का शिकार रहे हैं। स्पेन का ग्रेनाडा भी इस्लामवादियों की हिंसा का गवाह रहा है। ग्रेनाडा में यहूदियों और इस्लामवादियों के बीच लंबे समय तक संघर्ष हुआ। लेकिन, 30 दिसंबर 1066 को, मुस्लिमों ने यहूदियों को टारगेट करते हुए भीषण नरसंहार किया।

स्पेन में मुस्लिम शासन और यहूदियों का नरसंहार

सिएरा नेवादा पहाड़ों की तलहटी में 4 नदियों के संगम पर स्थित ग्रेनाडा शहर, एक हजार से अधिक वर्षों तक प्रमुख शहरी बस्ती और स्पेन के अंडालूसी क्षेत्र की राजधानी रहा है। 711 ईस्वी की शुरुआत में मुस्लिम उमय्यद ने इबेरियन प्रायद्वीप पर जीत हासिल करते हुए यहाँ कब्जा कर लिया था। इबेरियन में यहूदियों की एक छोटी सी बस्ती प्राचीन काल से रह रही है।

11वीं शताब्दी में, ग्रेनाडा शहर मुस्लिमों के दो समूहों, उत्तरी अफ्रीकी अरब और बर्बर समुदाय के बीच राजनीतिक संघर्ष का केंद्र रहा। उत्तरी अफ्रीकी मुस्लिमों का बर्बर समूह जिसे जिरिड्स भी कहा जाता था, वह कॉर्डोबा के खलीफा का समर्थक था। यह समूह इस क्षेत्र में बस गया, इन लोगों को एल्विरा प्रांत का नियंत्रण दे दिया गया। 

1009 ईस्वी में खलीफा के पतन के बाद, जिरिड नेता ने अपने लिए एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की, जिसे ‘ग्रेनेडा का तैफा’ कहा गया। मुसलमानों, ईसाइयों और यहूदियों की मिश्रित आबादी वाला यह शहर धीरे-धीरे इस क्षेत्र की मुख्य शहरी बस्ती बन गया।

इसके बाद, 1020 ईस्वी में, सैमुअल हा-नागिद को मुस्लिम राजा हब्बस इब्न मकसन के मुख्य सचिव के रूप में नियुक्त किया गया। सैमुअल हा-नागिद एक पढ़ा-लिखा यहूदी नेता था। जो खलीफा के पतन के बाद वह कॉर्डोबा से भाग गया था। सैमुअल हा-नागिद (अरबी में इस्माइल इब्न नघरेला) को न केवल टैक्स वसूलने बल्कि अगले शासक बद्दिस के शासन में सेना पर नियंत्रण सहित कई जिम्मेदारी सौंपी गईं।

जब सैमुअल सत्ता में था, तो ग्रेनाडा में यहूदियों को पूरी तरह से धार्मिक स्वतंत्रता थी। यहाँ तक कि यहूदियों को दूसरे दर्जे के नागरिकों (मुस्लिम शासन के अंतर्गत रहने वाले गैर-मुस्लिम) के रूप में भी नहीं देखा गया। सैमुअल के पास ऐसी शक्ति थी कि मुस्लिम शासक को केवल एक व्यक्ति के रूप में देखा जाता था।

1056 ईस्वी में सैमुअल हा नागिद की मृत्यु हो गई। इसके बाद, उनका बेटा जोसेफ हा-नागिद (अरबी में जोसेफ इब्न नघरेला) वहाँ का वजीर बन गया। जोसेफ हा-नागिद मुस्लिम शासक बद्दीस का बेहद करीबी माना जाता था।

विश्वासघात के आरोप में इस्लामवादियों की भीड़ ने जोसेफ को पीट-पीट कर मार डाला

मुस्लिम शासक बद्दिस पर जोसेफ का प्रभाव बढ़ता जा रहा था। इस दौरान, ग्रेनाडा में बर्बर मुसलमानों के बीच जोसेफ के खिलाफ नाराजगी शुरू हो गई। मुस्लिमों ने जोसेफ को अभिमानी और सभी धर्मों के प्रति अनादर करने वाला बताया। जोसेफ पर ग्रेनेडा के विरोधियों और अलमीरा के पड़ोसी ताइफा के मुस्लिम शासक को पत्र भेजने का आरोप लगाया गया। 

अरबी रिकॉर्ड के अनुसार, जोसेफ ने खुद को शासक बनाने के लिए दुश्मनों के साथ सौदा किया था। इसके बदले उसने दुश्मनों के लिए शहर के द्वार खोलने की बात कही थी। हालाँकि, वह योजना में सफल नहीं हुआ। अलमीरा के ताइफा के शासक ने ऐन वक्त पर सौदे को नामंजूर कर दिया। इसक बाद, यह खबर लीक हो गई कि जोसेफ ने इस्लामिक शासक बद्दिस को मारने और दुश्मनों का समर्थन करने की योजना बनाई थी।

30 दिसंबर, 1066 को शहर के बहुसंख्यक बर्बर मुसलमानों की एक गुस्साई भीड़ ने शाही महल पर धावा बोलते हुए जोसेफ को पकड़ लिया और मार डाला। इसके बाद, उसके शरीर को एक क्रॉस से लटका दिया गया। हालाँकि, इस्लामवादी यहीं नहीं रुके, उन्होंने शहर के सभी यहूदी परिवारों को घेर लिया। यहूदियों के रिकॉर्ड बताते हैं कि उस एक दिन में 4000 से अधिक यहूदियों को मुसलमानों द्वारा क्रूरता से मार डाला गया था।

इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि ग्रेनेडा में मुसलमानों द्वारा जोसेफ और यहूदियों के खिलाफ जहर उगला गया था। इस्लामवादी लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रहे थे कि ग्रेनाडा में यहूदियों को जो सम्मान मिल रहा है वह उसके लायक नहीं हैं। इतिहासकार बर्नार्ड लुईस द्वारा तैयार किए दस्तावेज और अबू इशाक द्वारा लिखित एक कविता में दर्शाया गया है कि यहूदी मुसलमानों से ‘हीन’ हैं और उन्हें मार दिया जाना चाहिए।

यह कविता है, “उन्हें (यहूदियों को) मारना मजहब का उल्लंघन मत समझो, उन्हें जीने देना मजहब का उल्लंघन होगा। उन्होंने हमारे साथ किए वादे को तोड़ा है फिर तुम ऐसे लोगों के विरुद्ध कैसे दोषी ठहराए जा सकते हो? जब हम अस्पष्ट हैं और वे प्रमुख हैं तो उनका कोई समझौता कैसे हो सकता है? अब हम उनके सत्य में विनम्र हैं, जैसे हम गलत थे और वे सही थे “

यूरोप में पहली बार हुआ यहूदियों का नरसंहार…

1066 ईस्वी में ग्रेनाडा में हुए नरसंहार को यहूदियों के खिलाफ यूरोप में हुई पहली हिंसा के रूप में बताया जाता है। यहूदी रिकॉर्ड के अनुसार, जोसेफ की पत्नी अपने बेटे के साथ शहर से भाग गई थी। इसके बाद, उसे दूसरे शहर में शरण मिल गई थी। हालाँकि, उसके बेटे की कम उम्र में ही मौत हो गई।

इस नरसंहार के बाद बचे हुए यहूदी अपनी संपत्ति बेचकर ग्रेनाडा और आसपास के क्षेत्रों को छोड़कर भाग गए। हालाँकि, बाद में कुछ लोग ग्रेनाडा लौट आए लेकिन उन्हें कभी भी वह सामाजिक दर्जा नहीं मिला, जो उन्हें सैमुअल हा-नागिद के दौर में मिला था।

ग्रेनाडा में 1492 तक इस्लामिवादी शासन करते रहे। हालाँकि इसके बाद, स्पेन के ईसाई शासक फर्डिनेंड और इसाबेला की सेना ने कई महीनों तक ग्रेनाडा की घेराबंदी कर रखी थी। इस घेराबंदी के बाद, ग्रेनाडा के मुस्लिम शासक ने हार मान ली और आत्मसमर्पण कर दिया। 

इस्लामिक शासन की समाप्ति के बाद 2 जनवरी 1492 को स्पेन के कुछ हिस्सों में कैथोलिक रिकोनक्विस्टा के रूप में मनाया गया। ईसाई आज भी कैथोलिक रिकोनक्विस्टा एक खुशी के रूप में मनाते हैं। वहीं, मुस्लिम इसे शोक के रूप में मनाते हैं। 1492 की शुरुआत में ग्रेनाडा में जो हुआ वह शहर के इतिहास में हिंसा की एक नई कहानी थी। इस कहानी में, हिंसा करने वाले ईसाई शासक इसाबेला के वफादार कैथोलिक कट्टरपंथियों ने मुस्लिमों को धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने फरमान जारी कर दिया। जिन मुस्लिमों ने ईसाई बनने से इनकार दिया उन्हें मार दिया गया। हालाँकि, कुछ लोग यहाँ से भागने में कामयाब रहे।(साभार)

‘जहाँ भी कोई हिन्दू या यहूदी दिखे, उन्हें मार डालो’: ‘दुनिया में इस्लामी शासन के लिए ज़रूरी है मुस्लिम आर्मी : फिलिस्तीन के डॉक्टर का वीडियो

                                                       मोहम्मद अफीफ शदीद (फोटो साभार: MEMRI TV)
फिलिस्तीन के इस्लामी विद्वान डॉक्टर मोहम्मद अफीप शदीद (Palestinian Islamic Scholar Dr. Mohammed Afeef Shadid) का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह हिंदुओं और यहूदियों को मारने की बात कर रहा है। शदीद का कहना है कि दुनिया में इस्लाम का राज स्थापित करने के लिए हिंसक आर्मी बनाने की जरूरत है।

शदीद ने यह बयान वेस्ट बैंक में तुल्कर्म शहर के बिलाल बिन रबाह मस्जिद में 17 अगस्त 2022 को दिया था। यह वीडियो अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। शदीद ने मुस्लिमों के मजहबी किताब कुरान की कई आयतों का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिमों एक हिंसक और आक्रामक सेना का गठन करना चाहिए और गैर-मुस्लिमों को मारकर इस्लाम को पूरी दुनिया में फैलाना चाहिए।

शदीद ने अपनी तकरीर में पर्शिया और बैजेंटाइन साम्राज्य का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन दोनों साम्राज्यों पर मुस्लिमों ने इसलिए नहीं हमला किया कि वे लुटेरे थे, बल्कि इन्हें जीतने और वहाँ इस्लाम का राज फैलाने के लिए हमला किया गया था।

शदीद ने कहा, “हम (मुस्लिम) मदीना से फारसी और बैजान्टाइन से लड़ने के लिए इसलिए नहीं निकले, क्योंकि उन्होंने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया और लूट लिया। हमने उनकी जमीन को जीतने के लिए किया और उन्हें इस्लाम में प्रवेश कराकर अल्लाह के धर्म का प्रसार किया।”

शदीद ने कहा कि फिलिस्तीन को सिर्फ वही आजाद करा सकेगा, जो अपने हथियार उठाएगा और इजरायल के तमाम यहूदियों को मार डालेगा। उन्होंने कहा कि जल्दी ने इस दुनिया में एक शक्तिशाली खलीफा का उदय होगा और वह पूरी दुनिया पर राज करेगा और इस्लाम का परचम फहराएगा।

उन्होंने आगे कहा, “उमय्यैद खलीफा के शासन में इस्लामी राज्य 1.10 करोड़ वर्ग किलोमीटर में फैला था। अब्बासिद खलीफा के दिनों में यह 3.30 करोड़ वर्ग किलोमीटर में फैला था। ऑटोमन साम्राज्य में यह एक करोड़ वर्ग किलोमीटर में फैला था।”

पेशे से दंत चिकित्सक डॉ. मोहम्मद शदीद ने आगे कहा, “दूसरा खिलाफत, जो जल्द ही हमारे दिनों में उठेगा, इंशाल्लाह 51 करोड़ वर्ग किलोमीटर तक पहुँच जाएगा, जो पूरे विश्व को कवर करता है।” उन्होंने कहा कि इसके लिए जहाँ कहीं भी बहुदेववादी (जो कई देवताओं को पूजते हैं) मिलें, उन्हें मार डालना चाहिए।

शदीद ने कहा, “हमारा लक्ष्य पूरी दुनिया में अल्लाह के दीन को फैलाना है। हम एक हिंसक सेना बनाएँगे और उन सभी से लड़ेंगे जो अल्लाह को नहीं मानते। हम उन सबसे भी लड़ेंगे, जो अल्लाह और उनके आखिरी पैगंबर के आदेश का पालन नहीं करते। हम तब तक इस लड़ाई को लड़ेंगे, जब तक कि यह संघर्ष खत्म नहीं हो जाता।”