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तेलंगाना : भाजपा को बड़ी कामयाबी, पहली बार जीती MLC सीट

भारतीय जनता पार्टी को तेलंगाना में बड़ी कामयाबी मिली है। पहली बार एमएलसी चुनाव में पार्टी को जीत मिली है। महबूबनगर रंगारेड्डी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एवीएन रेड्डी ने जीत हासिल की है। इसे लेकर भाजपा कार्यकर्ता उत्साहित हैं। जीत पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत राज्य भाजपा के नेताओं ने खुशी जाहिर की है।

एमएलसी का चुनाव 13 मार्च 2023 को हुआ था। 16 मार्च 2023 को सुबह 8 बजे शुरू हुई वोटों की गिनती देर रात तक जारी रही। चुनाव के दौरान 25,868 वोट यानी 90 प्रतिशत से भी ज्यादा वोट डाले गए थे। जीत के लिए 12,709 वोटों की जरूरत थी। 21 राउंड की मतगणना के बाद भाजपा उम्मीदवार एवीएन रेड्डी को 13,436 वोट मिले। चुनाव में कुल 21 उम्मीदवार मैदान में थे। मुकाबला जी. चेन्ना केशव रेड्डी और एवीएन रेड्डी के बीच था।

भाजपा को मिली इस शानदार जीत पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एवीएन रेड्डी और भाजपा कार्यकर्ताओं को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “महबूबनगर रंगारेड्डी एमएलसी टीचर्स सीट पर ऐतिहासिक जीत के लिए एवीएन रेड्डी को बधाई। लोगों ने एक बार फिर से बीआरएस को छोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के साथ खड़े होने का फैसला किया है।”

तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बांदी संजय ने ट्विटर पर लिखा है कि यह तेलंगाना के एमएलसी चुनाव में भाजपा की पहली जीत है। इस चुनाव से साबित हो गया है कि राज्य के लोग भारत राष्ट्र समिति (BRS) के खिलाफ हैं। खासकर सरकारी कर्मचारियों और पढ़े-लिखे तबके में सत्ताविरोधी लहर चल रही है। यह सफलता धर्म के पक्ष में खड़े शिक्षकों की है।

बांदी संजय ने केसीआर की सरकार को शिक्षक विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भी इसी तरह के नतीजे सामने आने वाले हैं। इस जीत से हमें शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की प्रेरणा मिली है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने भी एवीएन रेड्डी और पार्टी के राज्य नेतृत्व को जीत पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह जीत भ्रष्ट, विकास विरोधी, वंशवादी और अभिमानी बीआरएस के खिलाफ जनादेश को दर्शाता है।

विधानसभा चुनाव से पहले एमएसली सीट पर भाजपा की यह जीत बेहद अहम मानी जा रही है। साल के अंत तक होने वाले असेंबली चुनावों के लिए भाजपा पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी के शीर्ष नेता लगातार राज्य के दौरे पर हैं। ऐसे में इस जीत से कार्यककर्ताओं का मनोबल बढ़ा है।

उत्तर प्रदेश : रामचरितमानस का विरोध करना डुबो रहा समाजवादी पार्टी को ; परिषद् चुनाव में चटा दी धूल

उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए विधान परिषद (MLC) चुनाव के परिणाम आ गए हैं। कुल 5 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। जहाँ 4 सीटों पर सत्ताधारी भाजपा को जीत मिली है, वहीं 1 सीट निर्दलीय के खाते में गई। इन सीटों में 3 स्नातक की थी और 2 सीटें शिक्षक कोटे की थी। सोमवार (30 जनवरी, 2023) को इसके लिए मतदान हुआ है। कानपुर स्नातक सीट पर भाजपा के अरुण पाठक ने सपा के कमलेश यादव को 9331 वोट से हरा दिया।

जैसी शंका थी, वह सर्वविदित होने जा रही है। जनता ने केवल विधान परिषद् में समाजवादी पार्टी को ही नहीं नकारा, बल्कि रामचरितमानस का विरोध करने वालों और उनका समर्थन कर रही पार्टियों का भी सामाजिक बहिष्कार करने की योजना चल रही है। जो केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं समस्त भारत में लागू होने वाली है।   

वहीं बरेली-मुरादाबाद खंड स्नातक MLC सीट पर भाजपा के ही डॉक्टर जय पाल सिंह की जीत हुई है। झाँसी-इलाहाबाद शिक्षक सीट से बीजेपी के बाबूलाल तिवारी विजयी रहे हैं। गोरखपुर-फैजाबाद खण्ड स्नातक से बीजेपी के देवेंद्र प्रताप सिंह जीत की हैट्रिक लगाने में कामयाब रहे हैं। निर्दलीय उम्मीदवार राज बहादुर चंदेल ने ने कानपुर शिक्षक MLC सीट पर जीत दर्ज की है। उन्होंने 1520 मतों के अंतर से अपने प्रतिद्वंद्वी को हराया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा की जीत पर बधाई देते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश विधान परिषद के चुनाव में विजयी सभी प्रत्याशियों को हार्दिक बधाई! राज्य विधान मण्डल के उच्च सदन के लिए हुए चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों को मिली यह जीत आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार के प्रति अथाह जन विश्वास की प्रतीक है।” 2022 विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने राज्य में बड़ी जीत दर्ज की थी। अब उनके शासन के प्रति फिर लोगों ने विश्वास जताया है।

उत्तर प्रदेश का हालिया विधान परिषद चुनाव तब हुआ है, जब तुलसीदास कृत रामचरितमानस को लेकर विवाद हो रहा है। सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस को लेकर विवादित बयान दिया, जिसके बाद पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी उनका समर्थन करते हुए पवित्र हिन्दू ग्रन्थ की चौपाइयों पर सवाल खड़े कर दिए। अब MLC चुनाव में सपा को हार मिली है। स्पष्ट है कि जनता को सपा का हिन्दू विरोधी रवैया पसंद नहीं आया।