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331करोड़ रूपए की मनी लॉन्ड्रिंग केस में राहुल गाँधी के करीबी गुजरात कांग्रेस नेता तक पहुँची ED: Rapido ड्राइवर के ‘म्यूल अकाउंट’ से लेनदेन

आदित्य जुला के साथ राहुल गाँधी (फोटो साभार: X_AmitMalviya)
दिल्ली की गलियों में रैपिडो जैसे ट्रांसपोर्ट ऐप के जरिए अपनी बाइक चलाकर परिवार का गुजारा करने वाले एक ड्राइवर की जिंदगी में तूफान आ चुका है। रोजाना 500-600 रूपए कमाने वाले इस बाइक राइडर की जिंदगी 2 कमरों की झोपड़ी में कटती है, लेकिन उसके बैंक खाते में आठ महीनों में 331 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन हो गया। दरअसल, ये कोई किस्मत का खेल नहीं था, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा जाल था, जिसके बाद में उसे खुद ही नहीं पता था।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जाँच ने खुलासा किया है कि ये ‘म्यूल अकाउंट’ अवैध सट्टेबाजी ऐप 1xBet से जुड़े काले धन को सफेद करने के लिए इस्तेमाल हुआ। और सबसे चौंकाने वाली बात इसी खाते से गुजरात यूथ कांग्रेस के नेता आदित्य जुला की नवंबर 2024 वाली उदयपुर की लग्जरी शादी पर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हुए। जुला पर फर्जी सिग्नेचर और 17 अलग-अलग PAN नंबर्स इस्तेमाल करने का आरोप है।

ईडी की ये जाँच 1xBet के अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से शुरू हुई, जो दिसंबर 2023 में भारत सरकार द्वारा बैन कर दिया गया था। जाँच एजेंसी ने पाया कि 1xBet ने 6,000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया, जिनमें यूजर्स से पैसे इकट्ठा कर उन्हें मल्टीपल पेमेंट गेटवे से घुमाया जाता था। कुल 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की लॉन्ड्रिंग का अनुमान है।

इसी चेन में दिल्ली के इस ड्राइवर का खाता फंस गया। 19 अगस्त 2024 से 16 अप्रैल 2025 तक उसके अकाउंट में अनजान सोर्स से बड़े-बड़े डिपॉजिट आते रहे, जो तुरंत संदिग्ध खातों में ट्रांसफर हो जाते।

ईडी अधिकारियों ने कहा, “ये क्लासिक म्यूल अकाउंट है। असली मालिक को पता भी नहीं चलता, लेकिन कानूनी कार्रवाई का खतरा हमेशा रहता है।” ड्राइवर को शायद कमीशन के लालच में या अनजाने में फँसाया गया।

युवा कांग्रेसी नेता की शादी में ₹1 करोड़ का खर्च

उदयपुर शादी का कनेक्शन सबसे बड़ा ट्विस्ट है। ताज अरावली रिसॉर्ट में हुई इस ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ पर 1 करोड़ रूपए से ज्यादा का खर्च इसी म्यूल अकाउंट से हुआ। ईडी ने पाया कि जुला ने रिसॉर्ट को कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए फर्जी सिग्नेचर इस्तेमाल किए। साथ ही ट्रैवल एजेंट को 18 लाख रुपये कैश और 17 फर्जी PAN नंबर्स दिए, ताकि बुकिंग एडजस्ट हो सके।

गुजरात यूथ कांग्रेस के अहम चेहरों में से एक है जुला

जुला गुजरात यूथ कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और राहुल गाँधी के करीबी माने जाते हैं। भाजपा आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने 01 दिसंबर 2025 को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर इसे हाईलाइट किया। उन्होंने लिखा, “ईडी जाँच में उदयपुर रॉयल वेडिंग का बड़ा खुलासा। रैपिडो ड्राइवर के खाते से 331 करोड़ का ट्रांजेक्शन और अब गुजरात यूथ कांग्रेस लीडर आदित्य जुला का नाम। फर्जी सिग्नेचर से टाज रिसॉर्ट को कॉन्ट्रैक्ट, 18 लाख कैश और 17 PAN नंबर्स। ये लॉन्ड्रिंग चेन का हिस्सा है।” मालवीय ने जुला की राहुल गाँधी के साथ फोटो भी शेयर की, जो वायरल हो गई।
फिलहाल, ईडी ने जुला को पूछताछ के लिए समन भेजा है और शादी से जुड़े परिवारों की जाँच तेज कर दी है। जाँच में ये भी पता लगाया जा रहा है कि क्या ये शादी लॉन्ड्रिंग का एंडपॉइंट थी या कवर-अप।

कैसे होता है म्यूल अकाउंट्स के जरिए पूरा खेल

म्यूल अकाउंट फ्रॉड का ये केस पूरे देश में फैले साइबर क्राइम का आईना है। म्यूल अकाउंट क्या है? सरल शब्दों में ये वो बैंक खाता होता है जो अपराधी काले धन को घुमाने के लिए ‘किराए’ पर लेते हैं। गरीब या बेरोजगार लोगों को 5-7% कमीशन का लालच देकर आधार, PAN, मोबाइल नंबर और बैंक डिटेल्स हासिल कर लेते हैं। फिर OTP चुराकर या पासवर्ड से कंट्रोल ले लेते। छोटे ट्रांजेक्शन से शुरू कर बड़े पैसे घुसेड़ते हैं।
ड्राइवर के केस में भी यही पैटर्न दिखा- अनजान सोर्स से डिपॉजिट और तुरंत सारे पैसे ट्रांसफर। ईडी अधिकारियों के मुताबिक, 1xBet ने ऐसे हजारों अकाउंट्स का नेटवर्क बनाया था। भारत में ऑनलाइन बेटिंग का बाजार 2023 में 1 लाख करोड़ का था, लेकिन ये ज्यादातर अवैध रूप से था। सरकार ने बैन भी लगाया लेकिन लॉन्ड्रिंग चेन शायद अब भी बरकरार है।

कई बड़े सितारे भी लपेटे में

ये पहला केस नहीं। 1xBet जाँच में ही पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन और सुरेश रैना के करोड़ों के एसेट्स अटैच हो चुके हैं। ईडी ने कई क्रिकेटरों और सेलिब्रिटीज से पूछताछ की थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, 1xBet ने सरोगेट ब्रैंडिंग और ऐड्स से भारतीय यूजर्स को टारगेट किया। कुल लॉन्ड्रिंग 1,000 करोड़ रूपए से ऊपर।

सामने आ चुके हैं म्यूल अकाउंट से जुड़े कई केस

म्यूल अकाउंट से जुड़े कई केस सामने आ चुके हैं। इसी तरह के केस में हैदराबाद में 120 म्यूल अकाउंट्स का गैंग पकड़ा गया था, जिसमें बैंक अफसर भी शामिल थे। वहीं, बेंगलुरु साइबर पुलिस ने गुजरात के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जो फेक कंपनियाँ बनाकर डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा करता था। सीबीआई ने 8.5 लाख म्यूल अकाउंट्स का पर्दाफाश किया, जिसमें बैंक स्टाफ ने मदद की थी।
इसी तरह वाराणसी के स्लम एरिया में SIM फ्रॉड से लोग फँसाए गए और कश्मीर में 7,000 अकाउंट्स सीज हुए। एक अन्य मामला चाइनीज हैंडलर्स से जुड़ा था, जिसमें 250 करोड़ फ्रॉड में तीन लोग पकड़े गए ते। ये लोग म्यूल अकाउंट्स सप्लाई करते थे। ऐसे ही एक मामले में लखनऊ में ‘युवा ग्लोबल नेटवर्क’ का हिस्सा बने युवा जेल पहुँच चुके हैं, तो मुंबई में 3.81 करोड़ के केस में KYC उल्लंघन केस में भी तीन गिरफ्तार हो चुके हैं।

अपराधियों के जाल में कैसे फँसते हैं आम लोग?

आम आदमी ज्यादातर लालच या अनजान में ऐसे मामलों में फँस जाते हैं। गाँवों और छोटे शहरों में ये ज्यादा होता है। किसी व्यक्ति का फोन आता है, “भाई, खाली खाता इस्तेमाल करेंगे, कमीशन मिलेगा।” और फिर लोग अपनी जानकारियाँ उनके साथ शेयर कर देते हैं। थोड़े से रुपयों यानी कमीशन के लालच में वो ऐसे गिरोह के हाथों फँस जाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें जेल की हवा तक खानी पड़ती है। सर्वे बताते हैं कि ग्रामीण भारत में 40% फ्रॉड कमीशन के चक्कर में होते हैं।
ईडी का कहना है, “ये चेन रिएक्शन है। एक म्यूल से पैसे दूसरे में घूमते हैं, ट्रेल गुम हो जाती है।” डिजिटल बैंकिंग के जमाने में रेगुलेटरी होल्स से ये आसान हो गया है।
इस केस से सवाल भी उठ रहे हैं कि एनजीओ फंडिंग से लेकर पॉलिटिकल शादियों तक काला धन कैसे घुसता है। ईडी अब बड़े नेटवर्क की तह तक पहुँच रही है। इस मामले में जुला जैसे नाम आने से राजनीतिक घमासान तेज हो गया हो गया है। बहरहाल, अभी जाँच चल रही है, जो जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इस मामले की व्यापकता सामने आती जाएगी।

विदेशी चंदा, करोड़ों की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप: सरकार से पारदर्शिता की माँग करने वाले सोनम वांगचुक खुद कितने साफ?

                     विदेशी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप (फोटो साभार : Amar ujala & Canva)
CAA विरोध में बने शाहीन बागों से वाया बुर्का/हिजाब उपद्रव, तथाकथित आन्दोलनजीवी किसान और पहलवानों द्वारा धरना/प्रदर्शन करने पर हर कोई मोदी सरकार की खूब आलोचना कर रहा था, सच्चाई जाने बिना आलोचना बेमतलब होती है। दरअसल, बिकाऊ उपद्रवी ज्यादा कहीं टिक नहीं पाते। हकीकत में आज विपक्ष जो कुछ भी बोल या कर रहा है अपनी अक्ल से नहीं बल्कि भारत विरोधियों से मिले चंदे पर कर रहा है। नतीजा सबके सामने है कि मोदी विरोध में देश को ही आग में झोंकने की कोशिश कर रहे हैं। 
देश में आग लगाने की हर तरह से कोशिश की जा रही है। हिन्दुओं को जातियों में बांटने का दुस्साहस करने ईसाई और मुसलमानों को जातियों में बाँटने की हिम्मत नहीं। जिगरा चाहिए। ये वीडियो देखिए मुस्लिम कट्टरपंथियों को बेनकाब कर रही है:-

     
लद्दाख में अस्थिरता के बीच सोनम वांगचुक पर गंभीर आरोप, असली जन आंदोलन और राजनीतिक हेरफेर के बीच की रेखाएँ धुँधली होने का खतरा।

लद्दाख में जारी अशांति ने अब एक नया और चिंताजनक मोड़ ले लिया है। जिस समय यह क्षेत्र पहले से ही तनाव और हिंसक झड़पों के कारण अशांत है, उसी समय कुछ ऐसे आरोप सामने आए हैं, जो इसकी राजनीतिक और सामाजिक दिशा को बदल सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनोवेटर और पर्यावरणविद् के रूप में पहचाने जाने वाले सोनम वांगचुक, जिन्हें लद्दाख के आंदोलनों का चेहरा माना जाता है, अब गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के केंद्र में हैं।

आंदोलन की आड़ में भावनाओं से खिलवाड़- बीजेपी

भाजपा के शीर्ष सूत्रों द्वारा लगाए गए ये आरोप महज गड़बड़ी का मामला नहीं हैं, बल्कि यह संकेत देते हैं कि वांगचुक ने आंदोलन की आड़ में जनता की भावनाओं को भड़काकर निजी और संगठनात्मक हित साधने का प्रयास किया। सबसे बड़ा और ताज़ा घटनाक्रम गृह मंत्रालय का वह निर्णय है, जिसमें उसने सोनम वांगचुक द्वारा स्थापित स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की एफसीआरए (FCRA) रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया।

यह फैसला विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (Foreign Contribution Regulation Act), 2010 के तहत कई गंभीर उल्लंघनों के बाद लिया गया। यह कोई साधारण प्रशासनिक कदम नहीं है- इसका सीधा असर SECMOL की विदेशी चंदा प्राप्त करने की वैधता पर पड़ा है। इसके अलावा, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भी जाँच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं विदेशी चंदा का दुरुपयोग तो नहीं हुआ। जाँच से जो आँकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं।

संस्थाओं के फंडिंग में गड़बड़ी और नियम तोड़ना

सोनम वांगचुक की प्रमुख संस्था हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) के फंडिंग में अचानक से होने वाली बढ़ोतरी देखी गई। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जहाँ यह राशि 6 करोड़ रुपए थी, वहीं अगले वर्ष यह बढ़कर 15 करोड़ रुपए से अधिक हो गई। पहली नजर में इसे जनता के बढ़ते समर्थन का नतीजा माना जा सकता है, लेकिन जाँच एजेंसियों का दावा है कि यह वित्तीय प्रवाह पूरी तरह पारदर्शी नहीं है।
HIAL से जुड़े सात बैंक खातों में से चार खाते कथित रूप से घोषित नहीं किए गए। और भी गंभीर बात यह है कि इस संस्था ने 1.5 करोड़ रुपए से अधिक विदेशी पैसा बिना FCRA रजिस्ट्रेशन के प्राप्त की, जो कि कानून की धारा 11 का सीधा उल्लंघन है।

9 बैंक खातों में से 6 की अधिकारियों को जानकारी नहीं

गड़बड़ी यहीं तक सीमित नहीं है। SECMOL के पास कुल नौ बैंक खाते बताए जा रहे हैं, जिनमें से छह खातों को अधिकारियों से छिपाया गया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं सुनियोजित तरीके से वित्तीय लेन-देन को छुपाने का प्रयास तो नहीं हुआ।
इसके साथ ही एक निजी कंपनी शेष्योन इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड (SIPL) भी जाँच के दायरे में आई है, जिसमें सोनम वांगचुक निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। आरोप है कि HIAL से इस निजी कंपनी में 6.5 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। इससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) और फंड के दुरुपयोग के सवाल खड़े हो गए हैं। इतना ही नहीं, इस कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) एक वर्ष में 6.13% से गिरकर सिर्फ 1.14% रह गया, जिससे संदेह और गहरा हो गया कि कहीं धनराशि को गलत तरीके से बाहर तो नहीं निकाला गया।
सबसे गंभीर आरोप सोनम वांगचुक की व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति पर हैं।

सोनम वांगचुक ने ₹2.3 करोड़ विदेश भेजा

भाजपा सूत्रों का कहना है कि उनके पास कुल 9 व्यक्तिगत बैंक खाते हैं, जिनमें से 8 खातों का खुलासा नहीं किया गया। इन खातों में ज्यादा संख्या में विदेशी पैसा आने का दावा किया गया है। और भी चिंताजनक बात यह है कि 2021 से अब तक सोनम वांगचुक ने 2.3 करोड़ रुपए से अधिक की पैसा विदेश भेजी, जिनके प्राप्तकर्ताओं की पहचान ‘अज्ञात संस्थाओं’ के रूप में बताई जा रही है।
यह सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका पैदा करता है। विडंबना यह है कि सोनम वांगचुक अक्सर कॉरपोरेट जगत और सरकारों की आलोचना करते रहे हैं, लेकिन आरोप है कि उनकी संस्थाओं ने सरकारी उपक्रमों (PSUs) और निजी कंपनियों से बड़ी मात्रा में CSR (कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड प्राप्त किए हैं। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह उनके सार्वजनिक बयानों और निजी कार्यों के बीच भारी विरोधाभास को उजागर करेगा।
इन आरोपों के असर बहुत दूरगामी हो सकते हैं। अब तक लद्दाख के आंदोलन को एक जमीनी स्तर का संघर्ष माना जाता था, जो स्थानीय लोगों की स्वायत्तता (खुद निर्णय लेने वाले), पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान की माँगों पर आधारित था। लेकिन अगर ये वित्तीय अनियमितताएँ साबित हो जाती हैं, तो यह आंदोलन एक व्यक्ति के निजी लाभ और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का माध्यम बनकर रह जाएगा। इसका सीधा नुकसान लद्दाख के आम लोगों की वैध माँगों को होगा, जो कमजोर पड़ सकती हैं।
यह भी सच है कि आरोप और सच्चाई में फर्क होता है। सोनम वांगचुक का काम और योगदान, विशेषकर शिक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में, अस्वीकार नहीं किया जा सकता। लेकिन जब कोई व्यक्ति सरकार और उद्योगों से पारदर्शिता की माँग करता है, तो उसे स्वयं भी उतनी ही पारदर्शिता दिखानी चाहिए। CBI की जाँच के परिणाम दो कहानियों में से एक को सामने लाएँगे या तो यह एक दूरदर्शी नेता के खिलाफ राजनीतिक साजिश का मामला होगा, या फिर एक आंदोलनकारी नेता के मुखौटे के पीछे छिपे वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश होगा।​ लद्दाख और देश की जनता को अब सत्य की प्रतीक्षा है, क्योंकि यही सच न केवल सोनम वांगचुक की छवि बल्कि लद्दाख के भविष्य को भी निर्धारित करेगा।

मुसलमान ही मुसलमान का हक़ डकार रहा : AAP विधायक अमानतुल्लाह खान की हेराफेरी ED ने बताई: दिल्ली दंगा ‘पीड़ितों’ के नाम पर फंड, वक्फ बोर्ड के नाम पर ‘बैंक अकाउंट’, दूसरी बीवी की जानकारी छिपाई…

मुस्लिमों के रहनुमा बन रहे मुस्लिम नेताओं और इनके इशारे पर नाचने वाले मौलाना, मौलवी और इमाम किस तरह अपनी तिजोरियां भरने के चक्कर में हिन्दू-मुसलमान कर देश का माहौल ख़राब करते है उसे आम मुसलमान नहीं समझ रहा। और दोष हिन्दुओं के सिर मढ़ दिया जाता है। जब तक आम मुसलमान इन लोगों के चुंगल से बाहर नहीं शक से दायरे में रहेगा। गुजरात में दंगा पीड़ितों के नाम पर चंदा इकट्ठा करने वाली तीस्ता स्तेवाल ने उन्ही पैसे से महंगे पर्स आदि पर खर्च कर दंगा पीड़ितों की निगाह में अच्छी बनी रही, ठीक उसी तरह दिल्ली दंगों के नाम पर चंदा जमा करने वाला आम आदमी विधायक अमानतुल्लाह खान ऐश कर रहा है, फिर भी मुसलमान इसे अपना हमदर्द समझ रहा है।     
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (30 अक्टूबर 2024) को ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक एवं दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री अमानतुल्लाह खान और उनकी पत्नी मरियम के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया। यह मामला दिल्ली वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष रहते हुए हेरफेर करने संबंधित है। अमानतुल्ला खान ने दिल्ली दंगा ‘पीड़ितों’ के लिए धन जुटाने के लिए एक ‘अनधिकृत’ बैंक खाता खोला था।

इसमें आए धन में से कुछ राशि निकालकर अमानतुल्लाह खान दी गई थी। इसके अलावा, 50 वर्षीय AAP विधायक अमानतुल्लाह खान पर दिल्ली वक्फ बोर्ड (डीडब्ल्यूबी) में ग्रुप सी और ग्रुप डी के कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति, डीडब्ल्यूबी की संपत्तियों के किरायेदारी के आवंटन में पद का दुरुपयोग, आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने सहित कई आरोप हैं।

ED ने मंगलवार (29 अक्टूबर 2024) को दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA Act) की एक विशेष अदालत के समक्ष अमानतुल्लाह खान और उनकी दूसरी पत्नी मरियम सिद्दीकी के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दायर की। मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला 2016-21 के बीच दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अमानतुल्लाह के कार्यकाल के दौरान की अनियमितताओं से संबंधित है।

एजेंसी ने कहा, “दिल्ली दंगा पीड़ितों के नाम पर धन जुटाने के लिए खान ने दिल्ली वक्फ बोर्ड राहत समिति के नाम से एक अनधिकृत बैंक खाता खोला और जनता से प्राप्त कुछ धन को खान के निर्देशों के तहत नकद में निकाल लिया गया और उसे सौंप दिया गया।” उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड से मंजूरी लिए बिना ही ‘दिल्ली वक्फ बोर्ड राहत समिति’ का गठन किया।

प्रवर्तन निदेशालय ने यह भी कहा कि एजेंसी ने अमानतुल्लाह पर अपने चुनावी हलफनामे में आश्रितों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी थी। एजेंसी के अनुसार, “मरियम सिद्दीकी की शादी अमानतुल्लाह खान से हुई थी और वह अमानतुल्लाह खान की पूरी तरह से आश्रित हैं। यह बताना चाहिए था कि उनके पास आय का कोई ज्ञात स्रोत नहीं है और उन्होंने कोई आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है।”

जाँच में यह भी पाया गया है कि अमानतुल्लाह खान ने साल 2020 में अपनी दूसरी बीवी मरियम सिद्दीकी के नाम पर 19 लाख रुपए की अचल संपत्ति खरीदी थी। उन्होंने इस संपत्ति का भुगतान आंशिक रूप से नकद और आंशिक रूप से अपने करीबी सहयोगी जीशान हैदर से ली गई राशि से किया गया था। जिस संपत्ति को उन्होंने खरीदा वह यह संपत्ति जावेद इमाम सिद्दीकी की थी।

एजेंसी का दावा है कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में विधायक के रूप में गलत तरीके से कमाए गए अमानतुल्लाह के पैसों का सारा प्रबंधन हैदर और दाऊद नासिर कर रहे थे। इसका इस्तेमाल उन्होंने कौसर इमाम सिद्दीकी के माध्यम से ओखला क्षेत्र में 275-276, टीटीआई तिकोना पार्क में एक संपत्ति खरीदने के लिए नकद भुगतान करने के लिए किया।

ED ने दावा किया है कि कौसर इमाम सिद्दीकी द्वारा हस्तलिखित सफेद डायरी को जब्त करने के बाद उससे पता चला है कि तिकोना पार्क में इस संपत्ति की खरीद के लिए अमानतुल्लाह के करीबी सहयोगियों द्वारा 27 करोड़ रुपए का नकद भुगतान किया गया था। ईडी ने कहा कि विक्रेता जावेद इमाम सिद्दीकी और उनकी बीवी के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में संदिग्ध नकदी जमा मिली है।

इस मामले में अमानतुल्लाह खान, हैदर, दाउद नासिर, कौसर इमाम सिद्दीकी और जावेद इमाम सिद्दीकी को ईडी ने गिरफ्तार किया था। ये सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में हैं। इस मामले में अमानतुल्लाह खान को छोड़कर सभी आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट ED ने इस साल जनवरी में ही दाखिल कर दी थी।

अमानतुल्लाह खान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामले है दर्ज हैं। एक वक्फ बोर्ड में कथित अनियमितताओं के संबंध में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) का मामला और दूसरी दिल्ली पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई द्वारा दर्ज कथित आय से अधिक संपत्ति का मामला है। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच ED कर रही है।

दिल्ली का हिंदू विरोधी दंगा फरवरी 2020 में हुआ था। हालाँकि, इसकी तैयारी महीनों पहले से की जा रही थी। इसमें हिंदुओं को निशाना बनाया था। हालाँकि, दिल्ली की सरकार ने मुस्लिमों के लिए कई तरह राहत कार्य उपलब्ध कराए थे। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने मुस्लिमों के लिए 800 महिलाओं और 700 पुरुषों वाला बिस्तर एक शिविर स्थापित किया था।

दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अमानतुल्लाह खान ने जिन मुस्लिमों के घर एवं दुकान बर्बाद हुए थे, उन्हें बनवाने एवं उनकी मरम्मत के लिए 50 लाख रुपए आवंटित किए थे। मार्च 2020 में अमानतुल्लाह खान ने कहा था कि जिन मुस्लिमों के घरों-दुकानों को नुकसान पहुँचा है, उनकी मरम्मत कराने में दिल्ली वक्फ बोर्ड मदद करेगा। इसके लिए कंस्ट्रक्शन समिति का भी गठन किया था।

इसी दौरान वक्फ बोर्ड ने कथित तौर पर क्षतिग्रस्त हुई 19 मस्जिदों की मरम्मत का काम भी शुरू किया था। अमानतुल्लाह खान ने कहा था, “मरम्मत का काम अशोक नगर की जामा मस्जिद से शुरू हुआ है। इसके लिए वक्फ बोर्ड ने 5 लाख रुपये की अग्रिम राशि जारी कर दी है।” बोर्ड ने  मुस्तफाबाद में भी मुस्लिमों के लिए एक राहत शिविर भी स्थापित किया था।