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78 वर्ष बर्बाद कर दिए भारत का वास्तविक इतिहास सामने लाने का शंखनाद करने में ; ऐय्याश अकबर को महान बताने वाले इतिहासकारों का बहिष्कार हो; अकबर ने 30000 काफिरों (हिन्दू) का नरसंहार करवाया, औरंगजेब ने तोड़े मंदिर: 8वीं के बच्चों को मुगलों का असली इतिहास पढ़ाएगा NCERT, इस्लामी सल्तनत में हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों का भी जिक्र

                                                                                                                              साभार - वेदांतु
भारत ने 78 वर्ष बर्बाद कर दिए भारत के गौरवशाली इतिहास को सामने लाने में। यह भारत का दुर्भाग्य है कि झूठा इतिहास लिखने और बताने वालों को देश अपने सिर पर बैठाये रहा। 1555 में फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस की भविष्यवाणी सच साबित हो रही है कि हिन्द(हिन्दुस्तान) को असली आज़ादी 2014 में मिलेगी। देशहित में जितनी जल्दी हो असली इतिहास सामने लाना चाहिए। एक लम्बे समय से भारत के गौरवशाली इतिहास को सामने लाने के लिए देशप्रेमी चीख रहे थे। लेकिन मुस्लिम कट्टरपंथ के पैरों में अपनी पगड़ी रख चुके पाखंडी धर्मनिरपेक्ष और देशप्रेम से जनता को गुमराह करने वाले नेता और उनकी पार्टियां वास्तविक इतिहास बताने वालों को फिरकापरस्त, साम्प्रदायिक और हिन्दू मुस्लिम एकता के दुश्मन बताकर बदनाम किया जाता रहा। अब जो देश का असली इतिहास सामने आना शुरू हुआ है निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को सच्चाई से रूबरू होकर हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों पर जल्दी निर्णय करना चाहिए। बहुत हो गयी हिन्दू मुस्लिम की नौटंकी।  
इतना ही नहीं जिसे देखो यही यह कहता/सुनाता नज़र आता है कि जो जीता वही सिकंदर। मेरे पिताश्री के अनुसार सच्चाई यह कि सिकंदर द्वारा भारत की पावन धरती पर पैर रखते ही हिन्दू सम्राट पोरस ने इतनी कुटाई की कि ज़िंदगी में भारत की और मुड़कर नहीं देखने की हिम्मत नहीं हुई। अब असली इतिहास सामने आने का शंखनाद हो चुका है। इतिहास के नाम हुए सारे पाखंड क़दमों में रोंदे जायेंगे।  

देखिए ऊपर 2013 में लिखा मेरा स्तम्भ। जो इस हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते लिखा था। इससे पहले लिखा था शीर्षक लाल किला किसने और कब बनवाया? जिस पर मेरे अपनी गली में कुछ जेहादी प्रवत्ति के लोगों ने सिर्फ मुझे, संपादक को गालियों देने के अलावा मेरे मृतक परमपूजनीय माता-पिता के लिए भी अपमानित शब्दों का इस्तेमाल किया। आक्रांताओं जिन्हे मुग़ल बादशाह के नामों से पढ़ाया गया, नहीं मालूम पाखंडी इतिहासकारों को कि इन सनातन विरोधियों के समय में यमुना नदी सुभाष मैदान तक बहती थी। यानि लालकिला यमुना नदी के बीच था। ये तो ब्रिटिश काल में यमुना नदी का कटाव किया गया था। इसीलिए सुभाष पार्क से शांतिवन के क्षेत्र को दरिया गंज कहा जाता है। लेकिन जब उपरोक्त  स्तम्भ आया सबकी बोलती बंद हो गयी। 

जब शाहजहां ने दिल्ली की सल्तनत ली तब फारस(जिसे आज ईरान कहते हैं) के राजदूत का लालकिला में मिलन होता है। अब पूछो कि शाहजहां क्या लाल किला अपनी माँ के पेट से लेकर आया था?   


 

यदाकदा ब्लॉग भी लिखता रहा हूँ कुछ का नीचे लिंक दिया गया है। ऐय्याश अकबर को महान बताने वालों से पूछो कि वो सिर्फ औरतों के लिए मीना बाजार क्यों लगाता था। जिसमे दूध पीते लड़के तक को ले जाने की इजाजत नहीं थी। और खुद बुरका ओढ़ ख़ूबसूरत हसीन लड़कियों/औरतों को तलाशता था, मिलने पर परदे में चल रहे अपने सिपाहियों को हरम में लेकर जाने का इशारा करता था। इस ऐय्याशी के मीना बाजार को बंद करवाने में हिन्दू शेरनी किरण देवी की वीरता थी। जमीन पर पटक कर अपनी कटारों से जैसे ही मारने जाने पर जिन्दगी की भीख मांगी थी कि आज के बाद कभी मीना बाजार नहीं लगाने का वायदा किया था। देखिए ऊपर पेंटिंग जो शायद बीकानेर म्युसियम में है।   

चरित्रोपाख्यान: अकबर और रंग कुमारी की कहानी

आगरा स्थित अकबराबाद में एक साहूकार रहा करता था। रंग कुमारी उसी की बेटी थी। कहते हैं उसका सौंदर्य ऐसा था कि जो भी एक बार देख ले मोहित हो जाता। उस समय आगरा अकबर की राजधानी थी और वह वहीं से शासन चलाया करता था। वह फतेहपुर सीकरी में अपना दरबार लगाया करता था। अकबर को शिकार का शौक था और वह अक्सर शिकार खेलने जाया करता था।
एक बार शिकार खेलने के दौरान ही अकबर की नज़र रंग कुमारी पर पड़ी और वह तुरंत ही उस पर मोहित हो गया। अकबर उसे हर हाल में पाना चाहता था। अकबर के बारे में पुस्तक लिख चुके डर्क कोलियर कहते हैं कि अकबर के महल में कम से कम 5000 महिलाएँ होती ही होती थीं। बेल्जियम के लेखक के अनुसार, अकबर अनगिनत महिलाओं के साथ सो चुका था और यह सब तभी शुरू हो गया था जब वह काफ़ी कम उम्र का था। इतिहासकारों की मानें तो अकबर की 300 के क़रीब पत्नियाँ थीं।
अकबर ने कई राजपूत राजघरानों की लड़कियों से शादी कर रखी थी। ख़ैर, वापस रंग कुमारी की कहानी पर आएँ तो अकबर ने अपनी एक दासी को उसके पास भेजा। वह दासी अकबर का सन्देश लेकर रंग कुमार के पास गई। सन्देश यही था कि अकबर ने रंग कुमारी को अपने महल में बुलाया है। रंग कुमारी चालाक महिला थीं। उन्होंने अकबर के पास जाना स्वीकार नहीं किया, लेकिन वह जानती थीं कि वह एक शक्तिशाली बादशाह है। इसीलिए, रंग कुमारी ने अकबर को अपने घर पर बुलाया।
दासी ने अकबर को जाकर रंग कुमारी का सन्देश कहा। जब अकबर रंग कुमारी के पास पहुँचा तो वह बिस्तर लगा रही थी। फिर क्या था, अकबर की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। उसे लगा कि वह अपने उद्देश्य में सफल हो रहा है। लेकिन, रंग कुमारी भी पतिव्रता हिन्दू महिला थीं। रंग कुमारी ने अकबर को काफ़ी इज्जत दी। बिस्तर लगाने के बाद अकबर से कहा कि वह शौचालय से निपट कर आना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्दी ही आ जाएँगी।
                                  ‘चरित्रोपाख्यान’ के अंग्रेजी अनुवाद का अंश (अनुवादक: प्रीतपाल सिंह बिंद्रा )
शौचालय जाने के बहाने निकली रंगा कुमारी ने दरवाजा तेज़ी से बंद कर दिया और इस तरह से अकबर अंदर कमरे में ही क़ैद हो गया। इसके बाद कुमारी अपने पति को लेकर उस कमरे में आ गईं। अपनी पत्नी के साथ छेड़छाड़ से क्रुद्ध रंग कुमारी के पति ने गुस्से में न सिर्फ़ अकबर के ताज को ज़मीन पर पटक कर अपने पैरों तले रौंद डाला बल्कि अपना जूता निकाल कर अकबर को कई जूते लगाए भी।
बादशाह अकबर अपनी इज्जत और प्रतिष्ठा के डर से यह सब बर्दाश्त करता रहा। कहीं न कहीं उसके मन में यह एहसास भी हो गया कि उसने ग़लत किया है। लज्जा के मारे वह चुपचाप खड़ा रहा। इसके बाद रंग कुमारी और उसके पति ने मिल कर अकबर को एक भू-गर्भित कालकोठरी में क़ैद कर दिया। हिंदुस्तान का बादशाह होकर औरतों पर ग़लत नज़र डालने वाले अकबर की ये कहानी शायद ही कहीं और पढ़ी-पढ़ाई गई हो।
अगले दिन की सुबह होते ही पति-पत्नी अकबर को लेकर शहर के क़ाज़ी के पास पहुँचे। न्यायालय में रंग कुमारी और उसके पति ने अकबर के कुकृत्यों को बताने के बाद कहा, “यह एक संत है, चोर है, साहूकार है या फिर बादशाह है, आप ख़ुद पता कर लीजिए।” इतना कह कर निकल गए। लज्जा के मारे अकबर का सिर ऊपर उठ ही नहीं रहा था। पूरे प्रकरण के दौरान वह सिर झुकाए खड़ा रहा।
‘चरित्रोपाख्यान’ में पूछा गया है कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह से पराई स्त्री पर नज़र डालता है और उसके घर में घुस जाता है, क्या उसे दण्डित नहीं किया जाना चाहिए? बादशाह अकबर को इस घटना के बाद अच्छी सीख मिली और उसके बाद उसने किसी पराई स्त्री के घर में घुसना बंद कर दिया। उपर्युक्त कहानी सिख ग्रन्थ ‘चरित्रोपाख्यान’ में वर्णित है, जिसके रचयिता गुरु गोविन्द सिंह माने गए हैं।

Rang Kumari’s husband had no idea the intruder pursuing his wife was Emperor Akbar. He thrashed Akbar with shoes and locked him inside the room.

The next day he informed the civil judge (Qazi) and handed over the intruder. Akbar was totally humiliated and couldn’t speak a word. pic.twitter.com/1H9MHSZHdn

— True Indology (@TIinExile) August 21, 2019    

NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब अब मुग़ल तथा इस्लामी आक्रान्ताओं की सच्चाई बताएगी। ‘समाज की खोज: भारत और उससे आगे भाग 1’ किताब में मुस्लिम आक्रांताओं की क्रूरता को भी बच्चों को पढ़ाया जाएगा। इस किताब में दिल्ली सल्तनत और मुगलों के शासनकाल को एक नए दृष्टिकोण से दिखाया गया है।

इस पुस्तक में बाबर को ‘क्रूर विजेता’, अकबर के शासन को ‘क्रूरता और सहिष्णुता का मिश्रण’ और औरंगजेब को ‘मंदिरों व गुरुद्वारों को नष्ट करने वाला’ बताया गया है। किताब में सल्तनत काल को लूट, विध्वंस और धार्मिक असहिष्णुता से भरा बताया गया है।

इंडियन एक्स्प्रेस के अनुसार, NCERT ने बताया है कि यह नई पुस्तक 13वीं से 17वीं शताब्दी के बीच के राजनीतिक घटनाक्रम, विद्रोहों और धार्मिक संघर्षों को केंद्र में रखती है, जिसे अब पहली बार कक्षा 8 में पढ़ाया जा रहा है। इससे पहले इसे 7वीं कक्षा में पढ़ाया जाता था।

सल्तनत काल और धार्मिक स्थलों पर हमले

नई पुस्तक में बताया गया है कि अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफूर ने श्रीरंगम, मदुरै, चिदंबरम और संभवतः रामेश्वरम जैसे प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थलों पर आक्रमण किए। दिल्ली सल्तनत के दौरान बौद्ध, जैन और हिंदू मंदिरों पर कई बार हमले हुए। किताब के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य केवल लूट नहीं था, बल्कि मूर्तिभंजन यानी धार्मिक प्रतीकों का विनाश भी इसका मुख्य उद्देश्य था।

जजिया कर और गैर-मुस्लिम प्रजा

पुस्तक में ‘जजिया’ कर के बारे में भी बताया गया है। बताया गया है कि कुछ मुस्लिम शासकों द्वारा गैर-मुसलमानों (हिन्दुओं) पर लगाया गया था। किताब के अनुसार, यह कर उनके लिए सार्वजनिक अपमान का कारण भी बन गया। नई किताब के अनुसार, इस कर ने इस्लाम अपनाने के लिए एक प्रकार का वित्तीय और सामाजिक दबाव पैदा किया। कक्षा 7 की पुरानी किताब में जज़िया को भूमि कर के साथ वसूला गया कर बताया गया था, जबकि नई किताब इसे एक स्वतंत्र और अलग कर के रूप में पेश करती है।

बाबर – एक विजेता की दोहरी छवि

बाबर की आत्मकथा में उसे एक सुसंस्कृत और बौद्धिक रूप से जिज्ञासु व्यक्ति बताया गया है, लेकिन नई किताब में कहा गया है कि वह एक क्रूर विजेता था। किताब में बताया गया है कि उसने कई शहरों में नरसंहार किए, महिलाओं और बच्चों को गुलाम बनाया और लूटे गए शहरों के मारे गए लोगों की खोपड़ियों से मीनारें बनवाने पर गर्व महसूस किया। वहीं, पुरानी किताब में बाबर को केवल एक ऐसा शासक बताया गया था जिसे अपने सिंहासन से हटने के बाद काबुल और फिर दिल्ली और आगरा पर कब्ज़ा करने का अवसर मिला।

अकबर – सहिष्णुता और क्रूरता का मिश्रण

अकबर को नई किताब में एक ऐसा शासक बताया गया है जिसमें सहिष्णुता और क्रूरता दोनों के तत्व थे। नई किताब बताती है कि जब उसने चित्तौड़गढ़ के किले पर आक्रमण किया, तो लगभग 30,000 नागरिकों के नरसंहार का आदेश दिया।
किताब के अनुसार, अपनी जीत की घोषणा करते हुए उसने कहा कि उसने काफिरों के किलों और कस्बों पर कब्जा कर इस्लाम की स्थापना की और तलवार के बल पर मंदिरों को नष्ट कर काफिरों के प्रभाव को मिटा दिया। फिर अकबर ने बाद में विभिन्न धर्मों के प्रति सहिष्णुता दिखाई, फिर भी प्रशासन में गैर-मुसलमानों की संख्या अल्प ही रही।

औरंगजेब – धार्मिकता और राजनीति

नई किताब औरंगजेब के शासन को राजनीतिक और मजहबी दृष्टिकोणों से देखती है। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि उसके कई निर्णय राजनीतिक थे, उसके फरमान यह भी दिखाते हैं कि उसमें मजहबी कट्टरता भी थी।
उसने अपने राज्य के गवर्नरों को मंदिरों और धार्मिक शिक्षण संस्थानों को नष्ट करने के आदेश दिए। उसने काशी, मथुरा, सोमनाथ के मंदिरों, जैन धार्मिक स्थलों और सिख गुरुद्वारों को ध्वस्त करने का आदेश दिया।

आर्थिक और सामाजिक स्थिति

पुस्तक यह भी बताती है कि सल्तनत और मुगल शासन के अधीन एक मजबूत प्रशासनिक ढाँचा था और 13वीं से 17वीं शताब्दी के बीच आर्थिक गतिविधियाँ काफी जीवंत थीं। शहरों और बुनियादी ढाँचे में काफी प्रगति हुई, लेकिन 1600 के दशक के अंत में आर्थिक संकट और दबाव का दौर शुरू हुआ। इसके बावजूद, भारतीय समाज ने कस्बों, मंदिरों और अर्थव्यवस्था के अन्य पहलुओं के पुनर्निर्माण में लचीलापन और अनुकूलन क्षमता दिखाई।

मराठा और शिवाजी का योगदान

अध्याय के अंत में मराठों का वर्णन किया गया है, जिसमें शिवाजी को एक कुशल रणनीतिकार और दूरदर्शी नेता कहा गया है। उन्हें एक धार्मिक हिंदू बताया गया है जो अन्य धर्मों का सम्मान करते थे और अपवित्र हो चुके मंदिरों का पुनर्निर्माण करवाते थे।
किताब के भीतर मराठों को भारत के सांस्कृतिक विकास में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता माना गया है। पुरानी किताब में शिवाजी को केवल एक कुशल प्रशासक और मराठा राज्य की नींव रखने वाला बताया गया था, लेकिन नई किताब में उनके धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को भी महत्व दिया गया है।
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ऐय्याश अकबर को महान बताने वाले इतिहासकारों का बहिष्कार हो
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ऐय्याश अकबर को महान बताने वाले इतिहासकारों का बहिष्कार हो
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बादशाह अकबर की जूतों से क्यों हुई पिटाई?: कौन थी किरण देवी जिससे अय्याश अकबर ने ज़िंदगी की भीख मां


नई किताब में दिल्ली सल्तनत के उत्थान-पतन, विजयनगर साम्राज्य, मुगलों का शासन, उनके खिलाफ हुए प्रतिरोध और सिखों के उदय को विस्तार से दर्शाया गया है। गौर करने वाली बात यह भी है कि पहले दिल्ली सल्तनत और मुगल इतिहास की पढ़ाई कक्षा 7वीं में होती थी।
लेकिन अब नए पाठ्यक्रम संरचना में बदलाव करते हुए, इसे 8वीं कक्षा में शामिल किया गया है। यह नई किताब पहले से कहीं ज्यादा आलोचनात्मक, विश्लेषणात्मक और तथ्यों पर आधारित है। इसमें शासकों की धार्मिक और सैन्य नीतियों का खुलकर अंदाजा लगाया गया है, जिसकी जानकारी पहले की किताबों में हल्की फुलकी ही दी गई थी।

India नहीं अब भारत लिखेंगे-पढ़ेंगे-बोलेंगे छात्र, किताब में मोहम्मद गोरी जैसों को हराने वालों की भी होगी बात

                                                                                                                              सांकेतिक तस्वीर
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) अपने पुस्तकों के अगले सेट में इंडिया के बजाय ‘भारत’ मुद्रित करेगा। पैनल के इस प्रस्ताव को इसके सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है। इसके साथ ही समिति ने इतिहास की किताबों में ‘हिंदू विजय’ को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है।

पैनल के सदस्यों में से एक सीआई इस्साक के मुताबिक, NCERT की नई किताबों के नाम में बदलाव होगा। इस्साक ने कहा, यह प्रस्ताव कुछ महीने पहले रखा गया था और अब इसे स्वीकार कर लिया गया है।

इस्साक ने कहा कि इंडिया शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी और 1757 के प्लासी युद्ध के बाद होना शुरू हुआ था। वहीं, भारत का जिक्र विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों में हैं, जो सात हजार साल से भी पुराने हैं।

 NCERT पैनल की सिफारिश इन अटकलों के बीच आई है कि क्या देश का नाम बदलकर ‘भारत’ रखा जाएगा। इस साल की शुरुआत में यह चर्चा तब शुरू हुई जब केंद्र ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित जी-20 रात्रिभोज के निमंत्रण पत्र में President of India की जगह President of Bharat लिखा गया था।

इसके बाद इसको लेकर देश भर में बहस शुरू हो गया था। इन सबके बीच राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई थी। दरअसल, भारत के संविधान के अनुच्छेद 1(1) में हमारे देश के नाम को ‘इंडिया अर्थात भारत, राज्यों का एक संघ’ के रूप में परिभाषित किया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरह ही इस साल सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेज पर लगे नेमप्लेट पर ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ लिखा हुआ देखा गया था। दरअसल, दिल्ली के प्रगति मैदान में स्थित भारत मंडपम में जी-20 नेताओं का शिखर सम्मेलन था।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विश्व के नेताओं को संबोधित करने के दौरान कैमरे में ‘Bharat’ नाम वाला नेमप्लेट विशेष रूप से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इससे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया तो कुछ लोगों ने इस पर खुशी जाहिर की।

इस बीच एनसीईआरटी समिति ने अपनी पाठ्य-पुस्तकों में ‘हिंदू योद्धाओं की जीत’ को उजागर करने वाले पाठ्यक्रमों को विशेष रूप से शामिल करने की सिफारिश की है। समिति ने पाठ्य-पुस्तकों में ‘प्राचीन इतिहास’ के स्थान पर ‘शास्त्रीय इतिहास’ को शामिल करने की भी सिफारिश की है।

इस्साक ने कहा कि फिलहाल किताबों में हमारी असफलताओं के बारे में ही बताया गया है। सुल्तानों और मुगलों पर हमारी जीत के बारे में नहीं बताया गया है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किताबों में पढ़ाया जाता है कि मुहम्मद गोरी ने भारत पर आक्रमण किया था, लेकिन ये नहीं पढ़ाया जाता कि 1206 में गोरी की हत्या खोकरों (पूर्वी-मध्य एशिया की एक जनजाति) ने उस समय कर दी थी, जब वह भारत के रास्ते में था।

इस्साक ने कहा कि इतिहास को अब प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक में विभाजित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने ऐसा किया था और उन्होंने भारत को वैज्ञानिक प्रगति और ज्ञान से अनभिज्ञ अंधकार में दिखाया था। समिति ने सभी विषयों के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) को शामिल करने की भी सिफारिश की है।

यह समिति उन 25 समितियों में से एक है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार पाठ्यक्रम को बदलने के लिए केंद्रीय स्तर पर NCERT के साथ काम कर रही है। सिफारिश के बाद नवीतनम पुस्तकें बाजार में आएँगी।

‘मुगलों-औरंगजेब ने करवाई मंदिरों की मरम्मत’ – NCERT को लीगल नोटिस, बिना सबूत के पूरे देश को पढ़ा रहा था गलत इतिहास

भारतीय राजनीति अपने स्वार्थ में कितनी नीचे गिर सकती है, उसका ज्वलंत उदाहरण इतिहास को ही देखने से मिल जाता है। इसे देश का दुर्भाग्य कहा जाए फिर इतिहासकारों की अज्ञानता अथवा शिक्षित होते हुए भी अशिक्षित। जिन्होंने चंद चांदी के सिक्कों की खातिर देश के गौरवमयी इतिहास को दरकिनार कर आतताई मुगलों का महिमामंडन कर देश को गलत इतिहास पढ़ने को मजबूर कर दिया। शर्म आती है ऐसे इतिहासकारों और राजनेताओं पर। 

जिस तरह NCERT को लीगल नोटिस दिया गया है, कोर्ट को चाहिए विषय की गंभीरता को देखते हुए, इतिहास से छेड़छाड़ करने वाले इतिहासकारों पर भी सख्ती से पेश आकर उनको मिल रही सरकारी सुविधाओं को वापस लेकर दण्डित किया जाए। भारत की छवि को धूमिल करने के इस षड़यंत्र के ऊपर से पर्दा हटाकर दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए, ताकि देश के इतिहास से खिलवाड़ करने वालों के लिए उदाहरण बने।  
किताबों में मुगलों का महिमामंडल करने वाली NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एड्यूकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) को भरतपुर के एक RTI कार्यकर्ता ने लीगल नोटिस भेजा है। NCERT को ये नोटिस मुगलों पर अप्रमाणित कंटेंट छापने को लेकर भेजा गया है।

दरअसल, NCERT की कक्षा-12 की इतिहास की पुस्तक में यह दावा किया गया है कि जब (हिंदू) मंदिरों को युद्ध के दौरान नष्ट कर दिया गया था, तब भी उनकी मरम्मत के लिए शाहजहाँ और औरंगजेब द्वारा अनुदान जारी किए गए।

अब इसी दावे को लेकर भरतपुर के एक्टिविस्ट दपिंदर सिंह ने एनसीईआरटी के विरुद्ध ये कदम उठाया है। इससे पहले उन्होंने एक RTI लगाई थी, जिसमें उन्होंने सवाल किया था कि कक्षा 12 की इतिहास की पुस्तक में जो दावे किए गए हैं, उसके स्रोत और उसके पीछे के तथ्य क्या हैं, जिनके आधार पर ये पढ़ाया जा रहा है?

                                        NCERT कक्षा-12 की पुस्तक का हिस्सापेज -234 (हिंदी)
इस आरटीआई के जवाब में जब NCERT ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और कहा कि उनके पास इसका कोई रेफरेंस मौजूद नहीं है, तो दपिंदर सिंह ने उन्हें यह नोटिस भेजा। उनका मत है कि आखिर क्यों गलत इतिहास बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। क्यों स्पष्ट तौर पर न केवल बच्चों को खुलेआम बरगलाने का काम हो रहा है बल्कि उनके साथ भी खिलवाड़ हो रहा है, जो किसी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

दपिंदर ने किताब में पढ़ाए जाने वाले कंटेंट में संशोधन की माँग की है। उनका मानना है कि बिना प्रमाण कैसे मुगल शासक जैसे औरंगजेब व शाहजहाँ को महान दिखाया गया। इतिहास तो तथ्यों व सूचनाओं पर आधारित होता है, यदि ऐसे जानकारी दी जाएगी तो ये इतिहास से खिलवाड़ होगा।

इस पूरे मामले में जनवरी में एक आरटीआई लगाई गई थी। याचिकाकर्ता की पहली माँग थी कि वह सोर्स बताया जाए, जिसमें ये बातें कही गई हैं और उन मंदिरों की संख्या बताई जाए, जिन्हें औरंगजेब और शाहजहाँ ने मरम्मत करवाई। NCERT का दोनों सवालों के जवाब में कहना है कि इसकी जानकारी उनके विभाग के पास नहीं है।

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ऐय्याश अकबर को महान बताने वाले इतिहासकारों का बहिष्कार हो
पिताश्री एम.बी.एल. निगम श्री केवल रतन मलकानी अस्सी के दशक में विश्व चर्चित पत्रकार श्री केवल रतन मलकानी, मुख्य सम्प....

इस पर एक एक्टिविस्ट संजीव वकील कहते हैं कि छात्रों को कल्पना आधारित इतिहास पढ़ाया जा रहा है। वह कहते हैं, ” शिक्षा लिहाज से NCERT किताबों को बेंचमार्क समझा जाता है। इन्हें सिविल परीक्षा की तैयारी करने वाले भी पढ़ते हैं और अन्य परीक्षा की तैयारी करने वाले भी। आगामी पीढ़ी को गलत दिशा में ढकेला जा रहा है और इसके परिणाम बहुत भयानक हो सकते हैं।”

मोदी सरकार के राज में जम्मू कश्मीर और अनुच्छेद 370 को लेकर NCERT में किए गए भ्रामक दावे

NCERT, अनुच्छेद 370 कश्मीर
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कश्मीर में हुए इतने ऐतिहासिक बदलाव के बाद भी क्यों छात्रों को भ्रमित किया जा रहा है? क्यों गलत बातों को पढ़ाया जा रहा है? क्या सरकार को नहीं मालूम कि इस गलत पाठ्यक्रम का कितना खतरनाक दूरगामी दुष्परिणाम होगा?  
NCERT भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एक स्वायत्त संस्था है, जो छात्रों के पाठ्यक्रम के लिए पुस्तकों को तैयार करता है। अब तक इसकी पुस्तकों मे वामपंथी लेखकों और इतिहासकारों के प्रभाव के बारे में चर्चा होती आई है। मोदी सरकार से लोग माँग कर रहे हैं कि NCERT के पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए समिति गठित की जाए। अब जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लेकर पाठ्यक्रम में हुए बदलाव पर विवाद खड़ा हो गया है।
12वीं कक्षा की पुस्तक ‘स्वतंत्र भारत की राजनीति’ में NCERT ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के संबंध मे कुछ बदलाव किया है। लेकिन, बदलाव के नाम पर मोदी सरकार के इस बड़े कदम की कोई पृष्ठभूमि नहीं दी गई और सीधा बता दिया गया है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख नामक दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए हैं। अमित शाह ने संसद में इस बारे में हर सवाल का जवाब देते हुए लंबा भाषण दिया था लेकिन NCERT उदासीन बना रहा।
‘दैनिक जागरण’ में वरिष्ठ लेखक अनंत विजय के लेख के अनुसार, इस पुस्तक के ‘क्षेत्रीय आकांक्षाएँ’ नामक अध्याय में ‘जम्मू और कश्मीर’ वाले सेक्शन में ये तो बताया गया है कि अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा दिया गया था लेकिन बड़ी चालाकी से ये छिपा लिया गया है कि ये एक अस्थायी प्रावधान था। वो लिखते हैं कि इस बारे में अर्धसत्य पढ़ाया जा रहा है क्योंकि इसे संविधान के बाकी प्रावधानों की तरह ही प्रदर्शित किया गया है।


उन्होंने पूछा है कि अगर बच्चों के मन मे ये शंका उठेगी कि किसी प्रदेश को मिले संवैधानिक दर्जे को क्यों खत्म किया गया, तो उन्हें कौन जवाब देगा? साथ ही पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू कश्मीर के संबंध में NCERT में लिखा है कि ‘भारत दावा करता है कि इस पर गैर-कानूनी कब्जा किया गया है’। भारत के पक्ष को ‘दावे’ के रूप में दिखाने का औचित्य क्या है? सवाल ये उठता है कि क्या ये भारत से बाहर की पुस्तक है?
जब NCERT की पुस्तक में ये चर्चा की जाती है कि जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री रहे शेख अब्दुल्ला की पार्टी ‘सेक्यलर’ है तो फिर छात्रों को इस बात की भी जानकारी तो दी ही जानी चाहिए कि पहले इसका नाम ‘मुस्लिम कॉन्फ्रेंस’ क्यों था? शेख अब्दुल्ला को भारत सरकार ने 14 वर्ष के लिए जेल में रखा था, इस बारे में कोई जानकारी क्यों नहीं दी गई है? इस तरह से छात्रों को भ्रमित किया जा रहा है।
साथ ही इसमें ये भी लिखा है कि जम्मू कश्मीर के बाहर के लोगों का सोचना था कि अनुच्छेद 370 के कारण ही जम्मू कश्मीर का भारत में पूर्ण एकीकरण नहीं हो पा रहा है। यहाँ जम्मू कश्मीर और वहाँ के बाहर के लोगों को अलग-अलग बता कर दिखाया गया है और ऐसा प्रदर्शित किया गया है कि दोनों की देश को लेकर सोच अलग है। पृष्ठ 155 पर लिखा है कि भारतीय संघ में जम्मू कश्मीर के दर्जे को लेकर विवाद है।
अनंत विजय ने सवाल उठाया है कि नामवर सिंह से लेकर रोमिला थापर तक NCERT की पुस्तकों के लिए नीति निर्धारण करते रहे हैं और इसका ही परिणाम है कि आज बच्चों को ये सब पढ़ाया जा रहा है। जिन पुस्तकों में ये सब दिया गया है, उन्हें केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के छात्र पढ़ते हैं। इससे ये सवाल उठता है कि आधी-अधूरी जानकारी देकर छात्रों को भ्रमित क्यों किया जा रहा है? सरकार इस पर कब विचार करेगी?