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’20 करोड़ हो, पुलिस से मत डरो, लड़ कर मरो: पूर्व जस्टिस बीजी कोलसे, बॉम्बे हाईकोर्ट

पूर्व जस्टिस कोलसे
CAA, NRC और NPR पर देश के तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग ने भी जनता को गुमराह करने और भड़काने का खूब प्रयास किया है। इसी का एक उदाहरण बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस बीजी कोलसे हैं। बीजी कोलसे का जनवरी माह में दिए गए भाषण का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। इसमें वे मुस्लिमों को उनका ‘संख्याबल’ याद दिलाते हुए उन्हें सड़कों पर उतरने की राय देते हुए देखे जा रहे हैं।
जिस विडियो से यह क्लिप ली गई है, उसमें पूर्व जस्टिस कोलसे मुसलमानों से यह शिकायत भी करते हैं कि वो लोग कभी इकट्ठे नहीं होते। इसके कारण उन्हें आदिवासियों को अपनी सभाओं में बुलाना पड़ता है। पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने पूर्व जस्टिस बीजी कोलसे के भाषण को ट्वीट करते हुए लिखा है, “इस देश की अदालतें यूँ ही आतंकवादियों के लिए रात को नहीं खुल जातीं। यूँ ही दंगाइयों के अधिकारों के लिए खड़ी नहीं होती। ज्यूडिशियरी में #UrbanNaxals घुसे पड़े हैं। महाराष्ट्र के पूर्व न्यायाधीश को सुनिए- कैसे मुसलमानों को भड़का रहे हैं- 20 करोड़ हो, पुलिस से मत डरो, लड़ कर मरो।”

इस विडियो में पूर्व जस्टिस कोलसे को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि आप लोग संख्या में कुछ कम नहीं हैं। 20-25 करोड़ की आबादी है, यदि रास्ते पर आते तो दुनिया हिल जाती लेकिन आप लोग डरते थे। कोलसे ने जनसभा को सम्बोधित करते हुए आपत्ति जताते हुए कहा है कि उन्हें अपने ‘आरएसएस मुक्त भारत’ की सभा मे आदिवासी लाने पड़े, क्योंकि मुस्लिम नहीं आते थे।
उन्होंने कहा कि यह आप लोगों को निर्णय लेना है कि आप लड़कर मरेंगे या सड़कर मरेंगे। यह विडियो जनवरी, 2020 का है। वह जमात-ए-इस्लामी हिन्द के कार्यक्रम में जनसभा को सम्बोधित कर रहे हैं। विडियो के पूरे भाग में उन्होंने ब्राह्मणवाद पर भी कटाक्ष करते हुए कहा है कि जहाँ ब्राह्मणवाद की सरकार हो, वहाँ से भ्रष्टाचार कभी जा ही नहीं सकता है। यह कार्यक्रम जमात-ए-इस्लामी हिंद मुंबई, मराठी पत्रकार संघ और एसोसिएशन ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) की ओर से संयुक्त रूप में किया गया था।
जस्टिस कोलसे हमेशा ही अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। इससे पहले उन्होंने जस्टिस लोया की मृत्यु पर आरोप लगाते हुए कहा था कि किसी दिन उन्हें भी मार दिया जाएगा।
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पूर्व जस्टिस बीजी कोलसे का यह पूरा भाषण आप इस लिंक पर देख सकते हैं

NRC-NPR वापस ले लें, मेरे पूरे परिवार के पास नहीं है जन्म प्रमाण पत्र: केजरीवाल

केजरीवाल
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
नागरिकता संशोधक कानून में हिन्दुत्व, मोदी, योगी और अमित का विरोध करने के साथ-साथ NPR और NRC का भी विरोध करने वालों को दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने बल ही नहीं बल्कि कहा जाए फूस में चिंगारी लगा दी है। जबकि गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 12 को राज्यसभा में स्पष्ट रूप से NPR और NRC के बारे में जनता विशेषकर मुस्लिम समाज को भ्रमित न करने के लिए निवेदन किया। लेकिन केजरीवाल अगले ही दिन वही काम कर अमित के निवेदन को नज़रअंदाज़ कर, आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। 
दिल्ली विधानसभा ने NPR और NRC के खिलाफ शुक्रवार (मार्च 13, 2020) को प्रस्ताव पारित किया। NPR और NRC पर चर्चा के लिए बुलाए गए एक दिवसीय विशेष सत्र में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से इन्हें वापस लेने की भी अपील की।
अरविंद केजरीवाल ने प्रस्ताव पर बहस के दौरान कहा कि उनके परिवार और पूरी कैबिनेट के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं हैं तो क्या सभी को NPR के तहत डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा? उन्होंने कहा कि ये डर सबको सता रहा है।

वहीं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर एक बार फिर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “चुनाव जीतते ही झूठ शुरू। केजरीवाल जी का कहना है, उनके, उनकी वाईफ के, पूरी कैबिनेट के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं। मतलब कोई भी दसवीं पास नही हैं? सब नौवीं फेल हैं? बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बचाने के लिए कुछ भी करेंगे ये लोग। CAA और NPR तो लागू होकर रहेगा।”
एक और ट्वीट करते हुए कपिल मिश्रा ने लिखा कि केजरीवाल में हिम्मत थी तो चुनाव घोषणापत्र में लिखते कि CAA, NPR, NRC का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि केजरीवाल दिल्ली की जनता की पीठ पे खंजर घोप रहे हैं।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली विधानसभा में 70 विधायक हैं, लेकिन सिर्फ 9 विधायकों ने कहा की उनके पास जन्म प्रमाण पत्र है। उन्होंने पूछा कि 90% लोगों के पास ये साबित करने के लिए कोई सरकारी जन्म प्रमाण पत्र नहीं है तो क्या सबको डिटेंशन सेंटर भेजा जाएगा?

चिदंबरम टोटल कनफ्यूज! : संजय निरुपम, वरिष्ठ कांग्रेस नेता

संजय निरुपम, चिदंबरम
गुरुवार (फरवरी 13, 2020) को जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के बाहर NSUI की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम के NPR पर दिए गए बयान के बाद पार्टी के बीच बहसबाजी का दौर शुरू हो गया है। चिदंबरम के बयान पर कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने उन्हें टोटल कन्फ्यूज बताया।
दरअसल चिदंबरम ने कहा था कि अगर सभी राज्य के लोग NPR के खिलाफ लामबंद हो जाएँ और राज्य सरकारें फैसला कर लें कि इसको लागू नहीं किया जाएगा, तो यह विफल हो जाएगा। राज्यों के सहयोग के बिना NPR को लागू नहीं किया जा सकता है।
इस पर संजय निरुपम ने चिदंबरम को आड़े हाथों लेते हुए ट्वीट किया, “टोटल कन्फ्यूजन! पी चिदंबरम चाहते हैं कि NPR का विरोध हो। इसके लिए उन्होंने जेएनयू के छात्रों को कुछ टिप्स दिए हैं। वहीं, महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने एक मई से 15 जून के बीच NPR कराने का ऐलान किया है। महाराष्ट्र की सत्ता में कॉन्ग्रेस पार्टी शिवसेना की साझेदार है। क्या दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व को इसकी जानकारी है?”

चिदंबरम ने जेएनयू के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि NPR, NRC और CAA तीनों अलग हैं लेकिन तीनो इंटरकनेक्टेड है, संविधान में नागरिकता का प्रावधान है और पूरे विश्व में हर जगह देश के अंदर रहने वाले नागरिकों को नागरिकता का प्रावधान होता है। अगर किसी के पिता, ग्रैंड पेरेंट्स इंडिया में रह चुके हैं तो उनके बच्चे यहीं के नागरिक होते हैं।
इसके साथ ही चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री पर तंज कसते हुए कहा था कि कुछ दिनों में जेएनयू का नाम मोदी यूनिवर्सिटी या फिर अमित शाह यूनिवर्सिटी हो सकता है। उन्होंने कहा कि सिटिजनशिप को टेरिटरी बेस की जगह रिलीजियस बेस पर दिया जा रहा है और कई देशों में धर्म के आधार पर नागरिकता दी जाती है। लेकिन भारत इस आधार पर नहीं बना था।
उन्होंने सवाल किया था कि अगर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान हमारे पड़ोसी हैं, तो क्या भूटान, म्यांमार, चीन, श्रीलंका और नेपाल हमारे पड़ोसी नहीं हैं? अगर अल्पसंख्यकों के रिलिजियस परसिक्यूशन पर ही नागरिकता दे रहे हैं, तो फिर पाकिस्तान के अहमदिया, म्यांमार के रोहिंग्या, तमिल हिन्दू-तमिल मुसलमान के लोगों के बारे में क्यों नहीं सोच रहे?