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प्रियंका गांधी वाड्रा के काले कारनामे


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत की राजनीति में कई दशकों से नेहरू-गांधी परिवार का प्रभुत्व रहा है। परिवार ने राजनीतिक प्रभाव के बल पर संवैधानिक संस्थाओं का उपयोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिए किया है। इस काम में गांधी परिवार में कोई भी अपवाद नहीं है। जिसका जब मन चाहा और जहाँ चाहा जनता को भ्रमित कर लूटमार करने का कोई अवसर नहीं छोड़ा। हाल ही में राजनीति में फुलटाइम प्रोफेशनल की तरह कदम रखने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा को राहुल गाँधी द्वारा सक्रिय राजनीती में पदापर्ण करने पर स्पष्ट था कि राबर्ट वाड्रा के बाद अगला नम्बर बहन प्रियंका का ही है। जैसाकि सर्वविदित है कि कांग्रेस बहुत ही सुनियोचित ढंग से कोई कदम उठाती है। गाँधी परिवार को पूर्व ज्ञान हो गया था कि मोदी सरकार की वापसी हो रही है और राबर्ट के बाद प्रियंका भी निशाने पर आने वाली है, इसलिए सडकों पर शोर-शराबा की तैयारी हो रही है। परदे के पीछे प्रियंका के भी काले कारनामों की एक लंबी सूची है।
व्यापारिक जगत में जमीन की दलाली करने वाले राबर्ट वाड्रा, प्रियंका गांधी के पति हैं। प्रियंका गांधी के काले कारनामें -
*शिमला से 13 किलोमीटर दूर छरबड़ा में 2007 में नियमों को ताक पर रखकर गैरकानूनी तरीके से अतिसंवेदनशील क्षेत्र में कई एकड़ जमीन लेकर अपना मकान बनाया। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में जमीन खरीदने के लिए यूपीए सरकार की वजह से प्रियंका गांधी को कानूनी रूप से विशेष ढील दी गई थी।
*पति राबर्ट वाड्रा पर आरोप है कि उसने राजस्थान और हरियाणा में कांग्रेस सरकारों के सहयोग से कौड़ियों के भाव किसानों की जमीन खरीद कर हजारों करोड़ में बड़े व्यापारियों को बेच दिया। कहा जाता है कि दलाली के इसी पैसे से उसने लंदन जैसे शहरों में आलीशन घर खरीदे हैं। इन्ही मामलों में वाड्रा अभी जमानत पर चल रहे हैं।
*श्रीलंका में आतंकी घटना के लिए जिम्मेदार जाकिर नाईक केदान से चल रहे राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट की संचालक हैं प्रियंका वाड्रा
*यह वही जाकिर नाईक है जिसके इस्लामिक कट्टरपंथी विचारों को सुनकर श्रीलंका में कुछ सिरफिरे मुस्लिम लोगों ने आत्मघाती हमले में 380 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
*प्रियंका वाड्रा के इस ट्रस्ट पर जमीन हेराफेरी करने का आरोप है। जिला प्रशासन ने अमेठी के रोखा गांव में 1.0360 हेक्टेयर जमीन व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को दिया था। लेकिन कागजों में हेराफेरी कर राजीव गांधी ट्रस्ट के नाम कर दिया गया। जिसे बाद में ट्रस्ट ने उस जमीन को एक निजी कंपनी के हाथों बेच दिया।
*इसी तरह प्रियंका गांधी के ट्रस्ट ने हरियाणा के उल्लावास गांव की 4.8 एकड़ जमीन हरियाणा की कांग्रेसी हुड्डा सरकार से मिलकर 2009 में लीज के नाम पर हड़प ली।
*इसी तरह राजीव गांधी ट्र्स्ट के नाम पर प्रियंका वाड्रा ने राय बरेली में भी 10,000 वर्गमीटर जमीन की हेराफेरी की। उन्होंने कागजों में हेराफेरी कर उस जमीन को ट्रस्ट के नाम करा लिया।

चुनौतियों के चक्रव्यूह से जूझती कांग्रेस की आखिरी उम्मीद प्रियंका गांधी

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
प्रियंका वाड्रा जब छोटी थीं तो दादी इंदिरा की तरह राजनीति में आना चाहती थीं। लेकिन, समझ बढ़ी तो कहने लगीं कि राजनीति उनकी मूल जगह नहीं। पर, नियति देखिये कि यह उन्हें राजनीति में ही खींच लाई। 20 साल पहले से बेल्लारी रायबरेली से लेकर अमेठी तक मां और भाई का प्रचार-प्रबंधन संभालते-संभालते वह औपचारिक रूप से कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव बना दी गईं और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी भी। उनके आने से लगा कि बेदम-बेजान और बिस्तर पर पड़ी कांग्रेस को थोड़ी प्राणवायु-सी मिल गई है।
लखनऊ में पांच घंटे के रोड शो से लेकर काशी तक जनसमूह का उमड़ना यह इशारा करता है कि चुनौतियों के चक्रव्यूह के बावजूद कांग्रेस की यह वीरांगना खाली हाथ नहीं लौटने वाली। उनके भाषणों में नयापन है और सियासी हथियारों में थोड़ी धार भी। कांग्रेसी उनमें इंदिरा की छवि देखते हैं। 
एक बार लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि राजनीति में चेहरे इसलिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि उनसे विचार जुड़े होते हैं। प्रियंका के साथ भी खास परिवार और विचार जुड़ा हुआ है। पर, कड़वी राजनीतिक सच्चाई यह भी है कि प्रियंका के आगमन मात्र से कांग्रेस में कोई चमत्कार नहीं होने वाला। जिसे वह स्वयं भी कई बार कहा चुकी हैं कि "मै कोई चमत्कार नहीं कर सकती।" चुनावी महासमर की चुनौतियां बेहद कठिन हैं। जनता भी जीत के मुहाने पर खड़े दल के साथ ही नजर आती है।
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मोदी के सम्मोहन से निपटना कठिन काम 
यहां तो मुकाबिल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, उनका विराट व्यक्तित्व है। शायद इसीलिए प्रियंका भाजपा को उतना नहीं कोसतीं, जितना कि प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की नीतियों को। उन्हें बखूबी मालूम है कि भाजपा के मजबूत संगठन से पार पाने से कहीं ज्यादा कठिन मोदी के सम्मोहन से निपटना है। उन्हें भविष्य की संभावनाओं को देखकर सपा-बसपा गठबंधन पर नरम होना था, सो हैं भी। शायद यही कारण है कि कांग्रेस के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए उन क्षेत्रीय और अन्य छोटी पार्टियों से समझौते को मजबूर होना पड़ रहा है, जो यूपीए के कार्यकाल तक कांग्रेस के इशारे पर नाचा करती थीं। परन्तु बदलते परिवेश में आज वही पार्टियाँ कांग्रेस को आँख दिखा रही हैं, गठबंधन से बाहर कर रही हैं और जहाँ गठबंधन में शामिल भी किया गया है, पुरानी पार्टी होने के नाते उतनी सीटें देने को कोई तैयार नहीं। जिस तरह बुरे समय में साया भी साथ छोड़ देता है, उसी तरह कल तक सहयोगी रही पार्टियाँ भी कांग्रेस का साथ छोड़ रहे हैं।  
यह और बात है कि भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर से जब अचानक मिलने मेरठ पहुंचती हैं तो गैर-सियासी भेंट को बताने के बावजूद गठबंधन के खेमे को खूब मिर्च लगती है। चिढ़ी बसपा एलान कर देती है कि उत्तर प्रदेश के बाहर किसी भी राज्य में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। शायद बसपा को यह डर है कि दलित-प्रेम दिखाकर प्रियंका कहीं उसका वोट न छीन लें। गठबंधन का आधार भी अनुसूचित जाति-जनजाति, मुस्लिम व यादव पर ही टिका है। इसमें तनिक भी टूट-फूट किसे बर्दाश्त। इसलिए, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी नसीहत देने से नहीं हिचके। अभी कुछ समय पूर्व जब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी में हुए समझौते पर राहुल और अखिलेश दोनों ने ही कहा था, "अब ये साथ लम्बा चलेगा। कोई साइकिल और हाथ को एक-दूसरे से जुदा नहीं कर पाएगा।" लेकिन चार दिन की चाँदनी फिर वही अँधेरी रात।" 
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जनता को भ्रमित करता तथाकथित गठबन्धन। 
ये वही कांग्रेस पार्टी है, जो सपा और बसपा के घोटालों पर पर्दा डाले हुई थी, और आज वो ही कांग्रेस को आँख दिखा रहे हैं। बीती बात है, पर कांग्रेस का मूल जनाधार ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम ही हुआ करते थे। इसे वापस हासिल करना पहाड़-सी चुनौती बेशक है, लेकिन प्रियंका बढ़ चली हैं। सुर्खियां भी बटोर रही हैं। उनका बढ़ता आकर्षण और अल्पसंख्यकों में बढ़ती पैठ ने गठबंधन की चिंता बढ़ाई है। जनता भी कांग्रेस के दिखावटी हिन्दू प्रेम को भी समझ चुकी है। इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने के लिए हिन्दू धर्म को कलंकित करने का कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने कोई मौका नहीं छोड़ा। 
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार औरंगजेब, अन्य मुगलों तथा मुस्लिम हमलावरों ने भारत में हिन्दुओं का नरसंहार किया, हिन्दू महिलाओं के साथ बल...
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अक्टूबर 13 को प्रणब मुखर्जी की किताब का विमोचन हुआ। उस किताब में प्रणब मुखर्जी ने यूपीए सरकार और उसकी कई नीतियों और फैसलों के बारे में जिक...
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अभी उनमें खांपों-जातियों में बंटे उप्र के जातीय परिदृश्य को बदल देने का माद्दा नहीं दिख रहा। पांच बरस पहले मोदी ने जातीय गोलबंदी तोड़ी थी तो अपने बूते सत्ता तक पहुंच गए थे। पर, अभी प्रियंका से ऐसे प्रदर्शन की उम्मीद ज्यादती होगी। यह जरूर संभव है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में पहले के मुकाबले कुछ ज्यादा सीटें हासिल कर ले, लेकिन उसका सुखद कारण प्रत्याशी का निजी दम-खम ही बनेगा। रिकॉर्ड बताता है कि 2014 में पार्टी को सूबे से सात फीसद वोट मिले थे और अमेठी-रायबरेली की दो परंपरागत सीटें हासिल हुई थीं। वह भी तब, जबकि सपा-बसपा ने उनके खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारे थे। 2009 के नतीजे जरूर स्वर्णिम रहे थे। तब, पार्टी की झोली में करीब 18 फीसद वोट और 21 सीटें आई थीं।
यही प्रदर्शन दोहराने की तगड़ी चुनौती है। इसके लिए बोट-यात्रा कर चुकीं प्रियंका अब ट्रेन यात्रा की तैयारी में हैं। राम की शरण में हैं और रहीम की भी। नरम हिंदुत्व की पोटली भी करीने से संभाले हुए हैं। कांग्रेसी खेमे को यह डर जरूर रहेगा कि प्रियंका सिर्फ सियासी बुलबुला बनकर न रह जाएं क्योंकि 30 साल से सूबे में सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस में न कार्यकर्ता बचे हैं, न ही कैडर। कुछ भी हो, मगर राजनीति में कैडर के बिना चमत्कार तो नहीं हुआ करते।

प्रियंका का मास्टरस्ट्रोक! जल्दी एक होना वाला है गाँधी परिवार

लंबे इंतज़ार के बाद प्रियंका गाँधी का सक्रीय राजनीति में पदापर्ण हो ही गया है. प्रियंका का राजनीती में आना कांग्रेस पार्टी के लिए संजीवनी बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि, प्रियंका के आने से पार्टी को और मज़बूती मिलेगी और कई राज्यों में जनाधार खो चुकी पार्टी उठ खड़ी होगी. सूत्र तो ये तक बता रहे हैं की प्रियंका जल्द बड़ा धमाका भी कर सकतीं हैं.
फिलहाल वो अपना राजनितिक सफर अपने भाई राहुल गाँधी की तर्ज पर सॉफ्ट हिंदुत्व कि राह पर चलकर आगे बढ़ेंगी. अपना पदभार ग्रहण करने से पहले प्रियंका कुंभ में डुबकी भी लगाएंगी. कहा तो ये भी जा रहा है कि पदभार ग्रहण करते ही प्रियंका गाँधी का भी एक मास्टरस्ट्रोक सामने आने वाला हैं. सूत्र बताते है कि प्रियंका अपने चचेरे भाई वरुण गाँधी को कांग्रेस में लाने के लिए पूरी जुगत लगा ली हैं. सिर्फ कुछ मुद्दों पर ही बातचीत बाकी है. कोंग्रेसी के अंदरूनी सूत्र तो ये तक बता रहे हैं की बहन प्रियंका ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को भी मना लिया है. बात सिर्फ वरुण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पुराने पारिवारिक भेदभाव भुला कर चाची मेनका को भी वापस बुलाने की कोशिशें तेज हो चुकी है. और इनको माध्यम बनाकर मेनका के प्रभाव में कुछ छोटी पार्टियों को भी एनडीए से अपनी ओर खींचने का प्रयास हो रहा है. अब यही देखना है कि औपचारिक घोषणा कब होती है.
गली-कूचे से लेकर भाजपा उच्च पदाधिकारी तक प्रियंका पर वाद-प्रतिवाद करते नज़र आते हैं, लेकिन घर में लगने वाली आग को नहीं देख रहे। .उस समय सत्ता के लालच में जनसंघ के कार्यकाल से कमर्ठ कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज कर अवसरवादियों को सिर का ताज बनाकर मस्ती में मस्त हो गए.  और यही मस्ती चुनाव दिनों में संकट उत्पन्न कर रातों की नींद हराम कर देती है.
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इस वेबसाइट का परिचय
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बीजेपी के युवा नेता वरुण गांधी पिछले कुछ समय में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर आलोचक रहे हैं। कई मौकों पर उन्‍हो.....

खबर ये भी है कि, प्रियंका और वरुण के बीच इसको लेकर कई बार बात भी हुई हैं. वैसे यह सब जानते है कि प्रियंका और वरुण के बीच रिश्ते हमेशा से अच्छे रहे हैं. इसलिए ये कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी 10 फ़रवरी को लखनऊ में होने वाले रैली वरुण गाँधी उपस्थित रहे रहेंगे. कहा जा रहा है उसी मंच से वरुण गाँधी रैली को सम्बोधित भी करेंगे .

पिछले कई सालों से बीजेपी ने वरुण गाँधी को अलग-थलग कर दिया हैं, ना ही उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई ना ही कोई बड़ा पद दिया गया है. खुद वरुण गाँधी पार्टी से नाराज चल रहे हैं. इन सब के बीच वरुण का कांग्रेस में शामिल होने कि खबर काफी तेज़ हो गयी हैं. अगर प्रियंका वरुण गाँधी के गुस्से को भुनाने में कामयाब हुई तो ये कोंग्रेस के किये उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ी जीत होगी. साथ ही उत्तर प्रदेश में मर चुकी कांग्रेस अपने पैरों पर उठ खड़ी होगी.
कांग्रेस नेता के भी आपत्तिजनक बोल : BJP के पास चिकने नहीं खुरदरे चेहरे
अब कांग्रेस के नेता ने ही उनको लेकर अजीबो-गरीब प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर जवाब देते हुए मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री सज्जन सिंह वर्मा कुछ ऐसा बोल गए, जो कि उनकी पार्टी को भी पसंद ना आए। 
सज्जन सिंह वर्मा ने कहा, 'बीजेपी का दुर्भाग्य है कि उनकी पार्टी में खुरदरे चेहरे हैं, ऐसे चेहरे जिनको लोग नापसंद करते हैं। एक हेमा मालिनी है, उसको जगह-जगह साहित्य नृत्य कराते रहते हैं, वोट कमाने की कोशिश करते हैं। चिकने चेहरे उनके पास नहीं हैं।' 
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Sajjan Singh Verma, MP minister: Mera ye kehna hai ki eshwar ke pradatt manav hota hai...Arey sarahna karo ki eshwar ne Priyanka Gandhi ko itna sundar banaya hai jisse mamatva, sneh jhalakta hai. Aise shabdon ka istemal karke apni garima Kailash ji aur BJP gira rahi hai. (2/2) pic.twitter.com/YrzKzlSPTA
उन्होंने कहा, 'मेरे ये कहना है कि ईश्वर के प्रदत्त मानव होता है...अरे सराहना करो कि ईश्वर ने प्रियंका गांधी को इतना सुंदर बनाया है, जिससे ममत्व, स्नेह झलकता है। ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करके अपनी गरिमा कैलाश जी और बीजेपी गिरा रहे हैं।'

प्रियंका गांधी को है ये बीमारी, लोगों की कर देती हैं पिटाई : सुब्रमण्यम स्वामी

Priyanka Gandhiबीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रियंका गांधी को लेकर हैरान कर देने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि उसे एक बीमारी है, जिसे बाइपोलरिटी कहते हैं। ये बीमारी सार्वजनिक जीवन में अनुकूल और उपयुक्त नहीं है। स्वामी ने कहा कि अभी तक वो निजी जीवन में थी तो मैंने बोला नहीं, लेकिन अब सार्वजनिक जीवन में है तो बोलना पड़ेगा, पब्लिक को पता होना चाहिए।
स्वामी ने कहा, 'उसको (प्रियंका) एक बीमारी है जो सार्वजनिक जीवन में अनुकूल और उपयुक्त नहीं है, उसको बाइपोलरिटी कहते हैं, यानी उसकी हिंसावादी चरित्र दिखाई पड़ती है, लोगों को पीटती है। पब्लिक को पता होना चाहिए कि कब संतुलन खो बैठेगी, किसी को पता नहीं।' 
प्रियंका गांधी 4 फरवरी को कुंभ मेले में गंगा में पवित्र डुबकी लगाने के बाद अपने राजनीतिक करियर की औपचारिक शुरुआत कर सकती हैं। प्रियंका उसी दिन पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव का पदभार भी संभालेंगी। इसी दिन प्रियंका लखनऊ में राहुल के साथ संवाददाता सम्मेलन को भी संबोधित करेंगी।
हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी को पार्टी महासचिव पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी नियुक्त कर सक्रिय राजनीति में उनका प्रवेश सुनिश्चित कर दिया था। राजनीति में प्रवेश के साथ ही वो लगातार बीजेपी नेताओं के निशाने पर है। 


S Swamy on : Usko 1 bimari hai jo sarvjanik jivan mein anukool aur upyukt nahi hai, usko bipolarity kehte hain yaani uski hinsawadi charitra dikhai padti hai, logon ko peet'ti hai. Public ko pata hona chaiye ki kab santulan kho baithegi, kisi ko pata nahi.
इससे पहले बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने उनकी तुलना करीना कपूर और सलमान खान जैसे फिल्मी सितारों से करते हुए कहा कि कांग्रेस 'चॉकलेटी चेहरों' के बूते अगला लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती है। विजयवर्गीय ने कहा, 'कभी कोई कांग्रेस नेता मांग करता है कि करीना कपूर को भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़वाया जाए, तो कभी इंदौर से चुनावी उम्मीदवारी को लेकर सलमान खान के नाम पर चर्चा की जाती है। इसी तरह, प्रियंका को कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में ले आया जाता है। लोकसभा चुनाव के मैदान में उतारने के लिए कांग्रेस के पास मजबूत नेता नहीं हैं, इसलिए वह ऐसे चॉकलेटी चेहरों के माध्यम से चुनाव लड़ना चाहती है।'