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बिहार : अब शरिया लागू करेगी चाचा-भतीजे की सरकार; रक्षाबंधन और छठ-दीपावली सहित कई छुट्टियाँ रद्द

बिहार सरकार ने राज्य के स्कूलों में रक्षाबंधन समेत 12 छुट्टियों को रद्द करने का आदेश जारी किया है। इस फैसले का शिक्षकों और भाजपा ने विरोध जताया है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के आदेश के मुताबिक, छात्र-शिक्षकों को रक्षाबंधन, तीज, जिउतिया, गुरु नानक जयंती में भी छुट्टी नहीं मिलेगी। वहीं, दुर्गा पूजा, छठ, दीपावली जैसे त्योहारों में दिनों की कटौती की गई है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने छुट्टियों को रद्द करने का कारण बताया है कि समय समय पर परीक्षा, त्योहार, चुनाव की वजह से पढ़ाई बाधित हो रही है। ऐसे में बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए छुट्टियों को रद्द करने का आदेश जारी किया गया है।

हिंदुओं को आहत करने से नहीं चूकती चाचा-भतीजे की सरकार

बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार को निशाने पर लिया है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “बिहार की यह घमंडिया सरकार लगातार तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। चाचा-भतीजे की सरकार हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने से बाज नहीं आती है। बिहार में अब क्या हिन्दू अपने धार्मिक त्यौहार भी नहीं मना सकते हैं? दीपावली, दुर्गा पूजा के अलावा महापर्व छठ की छुट्टियों में भी कटौती कर दी गई है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है। तुष्टिकरण की राजनीति के प्रणेताओं को बिहार की जनता 2024 और 2025 में करारा जवाब देगी।”

हो सकता है- “बिहार में शरिया लागू कर दिया जाए”

इधर शिक्षा विभाग के आदेश के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी बिहार सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा, “दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पूजा की छुट्टियाँ रद्द की गई हैं। कल संभव है कि बिहार में शरिया लागू कर दी जाए और हिंदू त्योहार मनाने पर रोक लग जाए।”
शिक्षा विभाग के फरमान के बाद एक बार फिर से बिहार के शिक्षकों का आक्रोश भड़क उठा है। उन्होंने सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। अभी 10 दिन पहले ही उन्हें मिड-डे मील के बोरों को बेचने का काम भी दिया गया था। मिड-डे मील योजना विभाग के निदेशक मिथिलेश मिश्रा ने कहा था कि टीचर इन बोरों को कम से कम 20 में बेचें। दरअसल, मिड-डे मील की सामग्री इन्हीं बोरों में आती है।

शिक्षकों ने दी आंदोलन की चेतावनी

शिक्षक नेता आनंद कौशल सिंह और राजू सिंह ने सरकार को शिक्षक और हिंदू विरोधी बताते हुए चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि केके पाठक का फरमान भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला है, शिक्षक इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा इसको लेकर जल्द ही शिक्षक संघ की आपात बैठक बुलाकर राज्यव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान राज्य भर के स्कूलों में तालाबंदी कर शिक्षा व्यवस्था को ठप किया जाएगा।
सरकार ने इन छुट्टियों को किया है रद्द
1- रक्षाबंधन- 30 अगस्त
2- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी- 07 सितंबर
3- हरितालिका तीज- 18, 19 सितंबर
4- जीवित पुत्रिका व्रत (जीउतिया)- 06 अक्टूबर
5- दुर्गा पूजा में 3 दिन की छुट्टी कम
6- दीपावली से छठ पूजा 5 दिन की छुट्टी कम
7- गुरुनानक जयंती/कार्तिक पूर्णिमा- 27 नवंबर
वहीं, सरकार ने 8 सरकारी छुट्टियाँ रखी हैं, जिनमें
1- चेहल्लुम- 06 सितंबर
2- अनंत चतुर्दशी/हजरत मोहम्मद का जन्म दिवस- 28 सितंबर
3- महात्मा गाँधी जयंती- 02 अक्टूबर 4- दुर्गा पूजा- 22-24 अक्टूबर
5- दीपावली- 12 नवंबर
6- चित्रगुप्त पूजा/भैया दूज- 15 नवंबर
7- छठ पूजा- 19-20 नवंबर
8- क्रिसमस डे- 25 दिसंबर
बिहार में छठ पूजा को महापर्व के तौर पर मनाया जाता है। इसकी छुट्टियों में कटौती की खबर आने के बाद सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए जा रहे हैं। पहले की तरह ही छुट्टी देने की माँग की जा रही है। दरअसल, बिहार में टीचरों को कुल 23 छुट्टियाँ साल में दी जाती थीं। अब उन्हें सिर्फ 11 छुटियाँ मिलेंगी।

रक्षाबंधन के नाम पर सेक्युलर घोटाला


डॉ विवेक आर्य, उगता भारत 

बचपन में हमें अपने पाठयक्रम में पढ़ाया जाता रहा है कि रक्षाबंधन के त्योहार पर बहने अपने भाई को राखी बांध कर उनकी लम्बी आयु की कामना करती है। रक्षा बंधन का सबसे प्रचलित उदहारण चित्तोड़ की रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूँ का दिया जाता है। कहा जाता है कि जब गुजरात के शासक बहादुर शाह ने चित्तोड़ पर हमला किया तब  चित्तोड़ की रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूँ को पत्र लिख कर सहायता करने का निवेदन किया। पत्र के साथ रानी ने भाई समझ कर राखी भी भेजी थी। हुमायूँ रानी की रक्षा के लिए आया मगर तब तक देर हो चुकी थी। रानी ने जौहर कर आत्महत्या कर ली थी। इस इतिहास को हिन्दू-मुस्लिम एकता  तोर पर पढ़ाया जाता हैं।

अब सेक्युलर घोटाला पढ़िए

हमारे देश का इतिहास सेक्युलर इतिहासकारों ने लिखा है। भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल कलाम थे। जिन्हें साम्यवादी विचारधारा के नेहरू ने सख्त हिदायत देकर यह कहा था कि जो भी इतिहास पाठयक्रम में शामिल किया जाये।  उस इतिहास में यह न पढ़ाया जाये कि मुस्लिम हमलावरों ने हिन्दू मंदिरों को तोड़ा, हिन्दुओं को जबरन धर्मान्तरित किया, उन पर अनेक अत्याचार किये। मौलाना ने नेहरू की सलाह को मानते हुए न केवल सत्य इतिहास को छुपाया अपितु उसे विकृत भी कर दिया।

रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूँ के किस्से के साथ भी यही अत्याचार हुआ। जब रानी को पता चला की बहादुर शाह उस पर हमला करने वाला है तो उसने हुमायूँ को पत्र तो लिखा। मगर हुमायूँ को पत्र लिखे जाने का बहादुर खान को पता चल गया। बहादुर खान ने हुमायूँ को पत्र लिख कर इस्लाम की दुहाई दी और एक काफिर की सहायता करने से रोका।

मिरात-ए-सिकंदरी में गुजरात विषय से पृष्ठ संख्या 382 पर लिखा मिलता है-

सुल्तान के पत्र का हुमायूँ पर बुरा प्रभाव हुआ। वह आगरे से चित्तोड़ के लिए निकल गया था। अभी वह गवालियर ही पहुंचा था। उसे विचार आया, "सुलतान चित्तोड़ पर हमला करने जा रहा है। अगर मैंने चित्तोड़ की मदद की तो मैं एक प्रकार से एक काफिर की मदद करूँगा। इस्लाम के अनुसार काफिर की मदद करना हराम है। इसलिए देरी करना सबसे सही रहेगा। " यह विचार कर हुमायूँ गवालियर में ही रुक गया और आगे नहीं सरका।

इधर बहादुर शाह ने जब चित्तोड़ को घेर लिया।  रानी ने पूरी वीरता से उसका सामना किया। हुमायूँ का कोई नामोनिशान नहीं था। अंत में जौहर करने का फैसला हुआ। किले के दरवाजे खोल दिए गए। केसरिया बाना पहनकर पुरुष युद्ध के लिए उतर गए। पीछे से राजपूत औरतें जौहर की आग में कूद गई। रानी कर्णावती 13000 स्त्रियों के साथ जौहर में कूद गई। 3000 छोटे बच्चों को कुँए और खाई में फेंक दिया गया।  ताकि वे मुसलमानों के हाथ न लगे। कुल मिलकर 32000 निर्दोष लोगों को अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ा।

बहादुर शाह किले में लूटपाट कर वापिस चला गया। हुमायूँ चित्तोड़ आया। मगर पुरे एक वर्ष के बाद आया।परन्तु किसलिए आया? अपने वार्षिक लगान को इकठ्ठा करने आया। ध्यान दीजिये यही हुमायूँ जब शेरशाह सूरी के डर से रेगिस्तान की धूल छानता फिर रहा था। तब उमरकोट सिंध के हिन्दू राजपूत राणा ने हुमायूँ को आश्रय दिया था। यही उमरकोट में अकबर का जन्म हुआ था। एक काफ़िर का आश्रय लेते हुमायूँ को कभी इस्लाम याद नहीं आया। और धिक्कार है ऐसे राणा पर जिसने अपने हिन्दू राजपूत रियासत चित्तोड़ से दगा करने वाले हुमायूँ को आश्रय दिया। अगर हुमायूँ यही रेगिस्तान में मर जाता। तो भारत से मुग़लों का अंत तभी हो जाता। न आगे चलकर अकबर से लेकर औरंगज़ेब के अत्याचार हिन्दुओं को सहने पड़ते। 

इरफ़ान हबीब, रोमिला थापर सरीखे इतिहासकारों ने इतिहास का केवल विकृतिकरण ही नहीं किया अपितु उसका पूरा बलात्कार ही कर दिया। हुमायूँ द्वारा इस्लाम के नाम पर की गई दगाबाजी को हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे और रक्षाबंधन का नाम दे दिया। हमारे पाठयक्रम में पढ़ा पढ़ा कर हिन्दू बच्चों को इतना भ्रमित  किया गया कि उन्हें कभी सत्य का ज्ञान ही न हो। इसीलिए आज हिन्दुओं के बच्चे दिल्ली में हुमायूँ के मकबरे के दर्शन करने जाते हैं। जहाँ पर गाइड उन्हें हुमायूँ को हिन्दूमुस्लिम भाईचारे के प्रतीक के रूप में बताते हैं।

त्यौहार और मुहूर्त

सोशल मीडिया के कुछ फायदे हैं तो नुकसान भी हैं। ऐसा ही एक बड़ा नुकसान पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला कि हमारे हर त्यौहार को मुहूर्त के नाम पर छोटा कर रहे हैं।

हम बचपन में पूरा दिन राखी दिवाली और होली मनाते थे। ना कोई मुहूर्त की बात करता था ना ही समय देखकर कोई त्यौहार मनाते थे।

पिछले कुछ वर्षों में अजीब सा चलन चला है -इतने समय से इतने समय तक शुभ मुहूर्त है मतलब आप के त्यौहार को एक डेढ़ घंटे का कर दिया।

30 अगस्त को राखी रात्रि 9 बजे के बाद या 31 अगस्त को सुबह 7 बजे से पहले कितनी बहने भाई को राखी बांधने जा सकेंगी?

न जाने इसके पीछे किसका हाथ है, जो हमारे त्योहारों को समयनुसार समेटते जा रहे हैं

क्या आपने कभी किसी और धर्म के त्योहारों पर इस प्रकार का संदेश देखा है?

इस राखी पर भी एक संदेश चल रहा है कि राखी इतने समय से इतने समय तक 

 अरे भैया क्या यह संभव है कि देश की सभी बहने एक ही मुहूर्त में अपने भाई को राखी बांधे।

क्या भाई बहन के प्रेम के बीच में मुहूर्त आ सकता है? दोस्तों दिल खोलकर राखी मनाईये  सुबह से लेकर रात तक 

ईश्वर का दिया हुआ हर क्षण शुभ होता है।