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‘हिंदू की हत्या छोटी बात, असली पीड़ित मुस्लिम परिवार’: दिल्ली के तरुण हत्याकांड में नया नैरेटिव फैलाने के लिए एक्टिव हुआ वामपंथी गिरोह

                          तरुण हत्याकांड पर नया Victim card नैरेटिव फैलाने पर लगे वामपंथी-कट्टरपंथी
दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन इस्लामी भीड़ द्वारा की गई हिंदू युवक की हत्या मामले में अब नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश शुरू हो गई है। एक तरफ जहाँ वामपंथी रिपोर्टिंग के लिए कुख्यात बीबीसी इस कोशिश में जुटा है कि कैसे पूरे मामले में मजहब वाले एंगल को साइड किया जाए, तो वहीं सोशल मीडिया पर वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथी समूह के लोग ये फैला रहे हैं कि तरुण हत्याकांड में असलियत में हिंदू पक्ष नहीं बल्कि मुस्लिम पक्ष पीड़ित है।

तरुण खटीक की मौत- मुस्लिम लड़की के लिए छोटी सी बात

इस नैरेटिव को गढ़ने के लिए सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से फैलाया जा रहा है। इस वीडियो में आरोपित मुस्लिम परिवार की महिला रोते-बिलखते यह दावा कर रही है कि हर कोई हिंदुओं का पक्ष दिखा रहा है जबकि असल में ‘पीड़ित’ उनका परिवार है। वह कहती है- हिंदू-मुस्लिम सबको उन लोगों के उनके समर्थन में सड़कों पर उतरना चाहिए और उनके लिए न्याय माँगना चाहिए।

वीडियो में ये लड़की उस घटना को, उस विवाद को, मजहबी कट्टरता को छोटी सी बात बता रही है जिसके कारण निर्ममता से तरुण की हत्या कर दी गई। सुन सकते हैं कि लड़की कहती है- छोटी सी बात को इस बढ़ा दिया, क्या किसी के घर पर बुलडोजर चलाया जाता है?

वीडियो में लड़की आगे मुस्लिम कार्ड खेलते हुए दोहराती है कि उन्हें सिर्फ मुस्लिम होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। असलियत ये है कि होली के दिन उसकी बुआ सहरी के लिए सामान लेने गई थी जब उनपर गंदे पानी का गुब्बारा फेंका गया। इसके बाद हिंदू परिवार ने लड़ाई शुरू की, उसके घर के लड़कों ने कुछ नहीं किया। यहाँ तक तरुण की हत्या का इल्जाम भी लड़की तरुण के घरवालों पर ही लगाती है।

इस्लामी कट्टरपंथी और वामपंथी हुए एक्टिव

अब यही वीडियो को साझा करते दिल्ली में AIMIM पार्टी के अध्यक्ष शोएब जमई ने संघ पर निशाना साधा है। जमई ने कहा है- संघ से जुड़े लोग एकतरफा नैरेटिव दिखाकर माहौल खराब करना चाहते हैं। उनके अनुसार सच्चाई जानने के लिए मुस्लिम पक्ष की इस लड़की की बात भी सुनी जानी चाहिए। जमई ने ये बताना चाहा कि मामला छेड़खानी से शुरू हुआ था और जो मुस्लिम भीड़ टूटी उसे हिंदू ‘आत्मरक्षा’ के नजरिए से देखें और दिल्ली सरकार मुस्लिम पक्ष के साथ न्याय करे।

इसी तरह मुस्लिम आईटी सेल से जुड़े कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने भी इस वीडियो को साझा किया। उनके दावों के अनुसार, गुब्बारा किसी बच्चे ने नहीं बल्कि 20 साल के युवक ने महिला पर फेंका था। विरोध करने पर नशे में धुत लोगों ने महिला के साथ बदसलूकी की और बाद में तरुण के घरवालों ने ही दूसरे पक्ष को बुरी तरह पीटा।

वामपंथी नेता सुभाषिनी अली की बात करें तो वो भी इस नैरेटिव को हवा देने में पीछे नहीं रहीं। उन्होंने अपने फॉलोवर्स को ये बताने की कोशिश की कि तरुण हत्याकांड बहुत जटिल है। मामले में मुस्लिम लोग भी घायल हुए हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ घरों को लूट लिया गया और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

सुहासिनी अली का प्रयास था कि कैसे भी करके जो तरुण के लिए आवाज उठा रहे हैं उनके भीतर एक ग्लानि आ जाए। ऐसी ग्लानि कि वो लोग भी तरुण हत्याकांड की बात छोड़कर उन लोगों की बात करने लगें जिन्हें चोट उस समय लगी जब वह तरुण को लाठी-डंडे और सरिए से मारने आए थे।

रिपोर्टिंग के नाम पर BBC की ओछी हरकत

अब बात करें मीडिया की तो वामपंथी मीडिया संस्थान बीबीसी की तो उन्होंने इस मुद्दे पर कितना बचाव करते हुए रिपोर्टिंग की है ये देखने लायक है। उन्होंने हिंदू युवक की हत्या केस में 3 मिनट की अपनी रिपोर्ट प्रसारित की है। इसके शीर्षक में उन्होंने ये नहीं बताया कि घटना में कौन मरा, किसने मारा। उन्होंने टाइटल में लिखा कि तरुण के साथ जो हुआ वो दो समुदायों की झड़प का नतीजा था, इसमें एक युवक की मौत हो गई है और जानिए पुलिस ने क्या बताया है।

रिपोर्ट देखते हुए पता चलेगा कि इसमें बीबीसी कुछ खंगालने की जगह ये कहते हुए बचता दिखा कि अभी इलाके में सुरक्षाबल तैनात है और किसी से बात नहीं करने दिया जा रही है। रिपोर्ट में पीड़िता पिता की बाइट लगाई गई। पुलिस का बयान लगाया जिससे कम्युनल एंगल खारिज हो और और बाद में दो ऐसे स्थानीयों की बाइट ली गई जो सिर्फ ये बताते रहे कि इलाके में शांति थी। शरारती तत्व तो हर समाज में होते हैं, उन्हें इंतजार है स्थिति दोबारा पहले जैसे होगी। इनमें एक हरीश और दूसरा अब्दुल है।

अब आएँगे सेकुलरों के न्यूट्रल पोस्ट

ध्यान देने वाली बात यह है उत्तम नगर में 4 मार्च 2026 को हुई तरुण की हत्या के बाद से आसपास के चश्मदीद, पीड़ित परिवार, पड़ोसी लगातार एक ही तरह की बात बता रहे हैं कि बच्ची ने गुब्बारा फेंका, बुर्काधारी महिला बिदकी और इस्लामी भीड़ आकर हिंदू परिवार पर टूट पड़ी।
इन सब बयानों के बावजूद सोशल मीडिया पर अब नई कहानी गढ़ी जा रही है, ताकि तरुण की मौत से ध्यान हटाया जा सके। नए नैरेटिव में ये बताने का प्रयास हो रहा है कि होली के दिन मुस्लिम परिवार शांति से ही था। लड़ाई हिंदू परिवार ने की थी। उन्होंने जानकर मुस्लिम महिला को निशाना बनाया, फिर विरोध करने पर मारपीट करने लगे।
4 मार्च के बाद से ये पूरा एंगल अब तक सामने नहीं आया था। घटना के 5 दिन बाद अचानक से ये कहानी फैलना शुरू हुई और इसे फैलाने वाले वही लोग हैं जिन्होंने इतने दिन से तरुण हत्याकांड पर एक शब्द नहीं बोला। शायद इन्हें इंतजार था कि ऐसा कुछ नैरेटिव सामने आए तो कुछ बोलें।
अब देखना है कि कि पूरे मामले पर तथाकथित ‘न्यूट्रल’ पत्रकार अपनी निष्पक्ष पत्रकारिता करते हुए आरफा खानम शेरवानी, आरजे सायमा और रवीश कुमार क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
संभव है कि इस मामले पर इन लोगों के ऐसे पोस्ट सामने आएँ- उत्तम नगर में तरुण की मौत होना दुखद है, लेकिन दूसरे पक्ष की आवाज भी सुनी जानी चाहिए। या कह दिया जाए कि जो दिख रहा है और जो लोग बता रहे हैं हो सकता है वो सच न हो… सच वो हो जो ये मुस्लिम लड़की बोल रही है।

कहीं खामेनेई के नाम पर रोना, कहीं लाशें बिछाने की धमकी: होली से पहले माहौल बिगाड़ने की तैयारी में फिर से इस्लामी कट्टरपंथी

                 होली में हिंदुओं को निशाना बनाने वाली घटनाएँ (प्रतीकात्मक फोटो साभार: AI-ChatGPT)
होली का त्योहार खुशियों, रंगों और मेल-मिलाप का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस बार माहौल सामान्य नहीं दिख रहा है। होली नजदीक आते ही कुछ जगहों पर अलग तरह की हलचल देखने को मिल रही है। कहीं ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का रोना लेकर सड़कों पर उतरने की अपील की जा रही है, तो कहीं होली को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। इसके मद्देनजर पुलिस प्रशासन भी सख्ती बरत रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब किसी हिंदू त्योहार के आसपास तनाव खड़ा करने की कोशिश हुई हो। पिछले सालों में भी होली के समय हिंदुओं को निशाना बनाकर हिंसा फैलाई जाती रही है। कभी धमकियों से काम चलाया जाता है, तो कभी होली मना रहे हिंदुओं पर सीधा हमला किया जाता है। इसीलिए बीते कुछ सालों की घटनाओं को समझना जरूरी है, ताकि इसके पीछे कट्टरपंथियों का मकसद समझा जा सके।

दुनिया में जंग के बीच भारत में कट्टरपंथी बना रहे माहौल

जहाँ आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और अस्थिरता का माहौल है, वहीं भारत शांति और सौहार्द के साथ होली की तैयारी कर रहा है। यह अपने आप में किसी अच्छे दिन से कम नहीं है। लेकिन कुछ कट्टरपंथी और वामपंथी समूहों को शायद यही बात खटक रही है। उन्हें यह स्वीकार नहीं हो पा रहा कि भारत में त्योहार शांति से मनाए जा रहे हैं, इसलिए होली से ठीक पहले माहौल बिगाड़ने की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं।

अमेरिका और इजरायल के हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत को लेकर कुछ समूहों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। दिल्ली के जामिया नगर, जंतर मंतर से लेकर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, लखनऊ और जम्मू-कश्मीर में बुर्का पहने महिलाएँ और कुर्ता-पायजामा पहने मर्द खामेनेई को ‘रहबर’ बताकर आँसू बहा रहे हैं और दूसरी तरफ अपने प्रधानमंत्री मोदी को गाली दे रहे हैं।

इस बीच सरकार ने संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि ईरान-समर्थक कट्टरपंथियों की पहचान करें। इसके अलावा प्रो-ईरान कट्टरपंथी संगठनों, वैश्विक आतंकी संगठनों जैसे ISIS और अल-कायदा से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है।

होली के मद्देनजर नूहं में 600 जवान तैनात

हरियाणा के नूहं का नाम बीते कुछ सालों में कई बार तनाव और सांप्रदायिक हिंसा की खबरों के कारण चर्चा में रहा है। खासकर मजहबी जुलूसों के दौरान यहाँ माहौल बिगाड़ने की घटनाएँ सामने आई थीं, जिसके बाद प्रशासन को कर्फ्यू, इंटरनेट बंदी और भारी पुलिस बल की तैनाती जैसे कदम उठाने पड़े थे। इन घटनाओं ने नूहं को संवेदनशील श्रेणी में ला खड़ा किया, जहाँ हर बड़े त्योहार से पहले अतिरिक्त सतर्कता जरूरी मानी जाती है।

इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए साल 2026 की होली से पहले भी नूहं में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस के 600 जवान तैनात किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की तैयारी है और अफवाहों पर नजर रखने के लिए साइबर टीम को सक्रिय किया गया है।

मथुरा की होली पर भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए 9 यूट्यूबरों पर FIR

मथुरा की विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार और लड्डूमार होली को लेकर सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 9 यूट्यूबरों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। इन लोगों ने पिछले साल के विवादित वीडियो क्लिप्स को इस साल 2026 की होली से जोड़कर वायरल किए।

इन एडिटेड वीडियो के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि बरसाना और नंदगाँव की होली के दौरान अव्यवस्था और अभद्रता हुई है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(2) (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना) और 353(2) के साथ-साथ IT ऐक्ट की धारा 67/67A के तहत मामला FIR दर्ज की है।

होली पर हिंदुओं को जान से मारने की धमकी

इसी तरह साल 2025 की होली में भी माहौल खराब करने का प्रयास किया गया था। उत्तर प्रदेश के बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र से 22 फरवरी 2025 को खबर आई थी कि वहाँ कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदू युवकों को धमकी दी कि अगर उन्होंने होली मनाई तो उनकी लाशें बिछा दी जाएँगी। जब मामला उठा तो पुलिस ने मामले की जाँच की और इस केस में अयान, सलमान, अमन, रेहान, समेत कई के खिलाफ एक्शन लिया गया।

AMU में हिंदुओं को होली मनाने से इनकार, बाद में मिली परमिशन

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हिंदू छात्रों ने होली मनाने की परमिशन माँगी थी, लेकिन प्रशासन ने ये कहकर साफ इनकार कर दिया कि वो नियमों में बदलाव नहीं करेंगे और जिसे होली मनानी है वो हॉस्टल में रहकर मनाए। हालाँकि, बाद में खबर आई कि वहाँ मशक्कत के बाद हिंदू छात्रों को होली खेलने की परमिशन दी गई।

हिंदू पिता और बेटी पर फैजान ने फेंका खौलता पानी

इसी तरह, साल 2024 में मध्यप्रदेश के धार के घाटाबिल्लोद गाँव से होली वाले दिन हिंदू बेटी-पिता पर खौलता पानी डालने का मामला प्रकाश में आया था। दरअसल, गाँव में पायल तिवारी नाम की लड़की और उसके पिता राकेश तिवारी ने अपने पड़ोसी फैजान से रंग धुलने के लिए पानी माँगा था, उस समय फैजान ने पानी देने की बजाए उनके ऊपर खौलता पानी डाल दिया था।इस घटना में लड़की का चेहरा बुरा तरह जल गया था।

‘नमाज के वक्त नहीं बज सकते गाने’

एक अन्य घटना 25 मार्च 2024 की है। तेलंगाना के मेडचल-मलकजगिरी जिले के चेंगिचेरला इलाके में होली का त्योहार मनाते समय हिंदुओं पर मुस्लिमों की भीड़ ने धावा बोल दिया था और धमकी देकर हिंदुओं को कहा गया था कि नमाज के वक्त कोई गाने नहीं बजा सकते। इस हमले के वक्त भीड़ ने महिलाओं को भी निशाना बनाया था।

होली के वक्त पथराव

साल 2024 में होली पर हिंदुओं को निशाना बनाने का एक मामला आगरा के रकाबगंज से भी आया था। इस घटना में मुस्लिम समुदाय के लगभद दो दर्जन उपद्रवियों ने जमील नामक व्यक्ति के नेतृत्व में हिंदुओं पर पथराव किया था जिसमें कई लोग घायल हुए थे। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए जमील, सलीम, रहीस, शौकत समेत 34 नामजद और 50 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

AMU में होली पर हमला

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में इस बार हिंदुओं को जहाँ पहले होली मिलन समारोह आयोजित करने से ही मना कर दिया गया था। वहीं, 2024 में 21 मार्च को जब एएमयू में हिंदुओं ने परिसर में होली खेलने का प्रयास किया था तो उस दिन उनपर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा बड़ा हमला कर दिया गया था। इस घटना में अलीगढ़ पुलिस ने मिसवा, जाकीउर्ररमान, जैद, शेरबानी, शाहरुख सबरी और अन्य मुस्लिम छात्रों पर एफआईआर भी की थी।

चंदा वसूली के दौरान टूटे इस्लामी कट्टरपंथी

2023 की बात करें तो होलिका दहन के दिन उत्तर प्रदेश के मेरठ में चंदा वसूली के दौरान हालात बिगड़े थे। उस समय चंदा इकट्ठा करने गए हिंदुओं पर मुस्लिम समूह ने न केवल होलिका पर लात मारी थी बल्कि हिंदुओं पर हमला किया था और फिर जमकर पत्थरबाजी हुई थी। पुलिस ने इस विवाद के बाद तीन लोगों को हिरासत में लेकर अपनी कार्रवाई की थी।

रंग लगने पर भड़का शब्बीर, दोस्त को पेट्रोल डाल जलाया

तेलंगाना के मेदक के मारापल्ली गाँव से विवाद 2023 में भी होली पर उठा था। उस समय होली के दिन एक मोहम्मद शब्बीर नामक मुस्लिम व्यक्ति ने रंग लगने से नाराज होकर दोस्त अंजैया को पेट्रोल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया था।

वैदिक युग में क्या कहते थे होली को?

'नवान्नेष्टि यज्ञ' यानी होली 

वैदिक युग में होली को 'नवान्नेष्टि यज्ञ' कहा गया था, क्योंकि यह वह समय होता है, जब खेतों में पका हुआ अनाज काटकर घरों में लाया जाता है। जलती होली में जौ और गेहूं की बालियां तथा चने के बूटे भूनकर प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं। होली की अग्नि में भी बालियां होम की जाती हैं।

यह लोक-विधान अन्न के परिपक्व और आहार के योग्य हो जाने का प्रमाण है इसलिए वेदों में इसे 'नवान्नेष्टि यज्ञ' कहा गया है यानी यह समय अनाज के नए आस्वाद के आगमन का समय है। यह नवोन्मेष खेती और किसानी की संपन्नता का द्योतक है, जो ग्रामीण परिवेश में अभी भी विद्यमान है। इस तरह यह उत्सवधर्मिता आहार और पोषण का भी प्रतीक है, जो धरती और अन्न के सनातन मूल्यों को एकमेव करती है।
होली का सांस्कृतिक महत्व : होली का सांस्कृतिक महत्व 'मधु' अर्थात 'मदन' से भी जुड़ा है। संस्कृत और हिन्दी साहित्य में इस मदनोत्सव को वसंत ऋतु का प्रेम-आख्यान माना गया है। वसंत यानी शीत और ग्रीष्म ऋतु की संधि-वेला अर्थात एक ऋतु का प्रस्थान और दूसरी का आगमन।

यह वेला एक ऐसा प्राकृतिक परिवेश रचती है, जो मधुमय होता है, रसमय होता है। मधु का ऋग्वेद में खूब उल्लेख है, क्योंकि इसका अर्थ ही है संचय से जुटाई गई मिठास। मधुमक्खियां अनेक प्रकार के पुष्पों से मधु को जुटाकर एक स्थान पर संग्रह करने का काम करती हैं। जीवन में मधु-संचय के लिए यह संघर्ष जीवन को मधुमय, रसमय बनाने का काम करता है।

'मदनोत्सव : होली पर्व को 'मदनोत्सव' भी कहा गया है, क्योंकि इस रात को चन्द्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है। चन्द्रमा के इसी शीतल आलोक में भारतीय स्त्रियां अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं। लिंग-पुराण में होली त्योहार को 'फाल्गुनिका' की संज्ञा देकर इसको बाल-क्रीड़ा से जोड़ा गया है।

मनु का जन्म फाल्गुनी को हुआ था इसे 'मन्वादि तिथि' भी कहा जाता है। इसके साथ ही भविष्य-पुराण में भूपतियों से आवाहन किया गया है कि वे इस दिन अपनी प्रजा के भयमुक्त रहने की घोषणा करें, क्योंकि यह ऐसा अनूठा दिन है जिस दिन लोग अपनी पूरे एक साल की सभी कठिनाइयों को प्रतीकात्मक रूप से होली में फूंक देते हैं। इन कष्टों को भस्मीभूत करके उन्हें जो शांति मिलती है, उसे पूरे साल अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए ही भविष्यपुराण में राजाओं से अपनी प्रजा को अभयदान देने की बात कही गई है।

भारतीय कुटुम्ब की भावना इस दर्शन में अंतरनिहित है यानी होली के सांस्कृतिक महत्व का दर्शन नैतिक, धार्मिक और सामाजिक आदर्शों को मिलाकर एकरूपता गढ़ने का काम करता है। कुल मिलाकर होली के पर्व की विलक्षणता में कृषि, समाज, अर्थ और सद्भाव के आयाम एकरूप हैं। इसलिए यही एक अद्वितीय त्योहार है, जो कि सृजन के बहुआयामों से जुड़ा होने के साथ-साथ सामुदायिक बहुलता के आयाम से भी जुड़ा हुआ है।

होली को पावन त्यौहार आज कछु ऐसे मनाऊँगी।

लगाकर सबके चंदन माथे,

सौम्य हो जाऊंगी।

बड़ों को करके ॐ नमस्ते, छोटों को हृदय लगाऊंगी।

नवान्न आटे की गुजिया बना,

प्रसाद बनाऊंगी।

वृहद यज्ञ सामूहिक कर के

नौत खिलाऊंगी।

उंच नीच का भेद भुलाकर,

प्रीति निभाऊंगी

उत्तम पेय पिला ठंडाई,

फाग गवाऊँगी।

पूरे वर्ष की लगी गन्दगी,

मैल छुटाऊँगी,

“विमल” वेद के पक्के रंग से,

रंगूं रंगाऊंगी।

होली को पावन त्यौहार,

आज कछु ऐसे मनाऊंगी।।
विमलेश बंसल ‘आर्या’

#वैदिक_पद्धति_के_अनुसार_होली_कैसे_मनायें

तदनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा- प्रातःजागरण – प्रातः जागरण के मंत्रों के साथ योगाभ्यास – प्राणायाम, आसन, ध्यान और भ्रमण करना। स्नान – रात्रि को पानी में पलाश के फूल, गुलाब फूलों की पंखुड़ियों को भिगो कर रखना और प्रातः काल उससे स्नान करना।

आयुर्वेद – खाली पेट नीम की कोमल पत्तियों का १५ दिन तक सेवन करना, नीम पर जो फूल आते हैं उसका सब्जी में प्रयोग करना और नीम की दातुन करना

उपासना – ध्यान, संध्या अथवा गायत्री का जप करना

देवपूजा – नवसस्येष्टि (यज्ञ) फाल्गुन पूर्णिमा को अपने-अपने घरों में वैदिक विद्वानों को बुलाकर यज्ञ करना।

विशेष सामग्री – हवन सामग्री में गेहूं की नई बाल, हरा-चना, मसूर, मूंग, अरहर, तिलहन, १०-१०ग्राम की मात्रा में मिलाना, धान की खिले लाजा (खोई) 50 ग्राम, खांड या बुरा अथवा गुड़ 50 ग्राम मिलाना इसका तात्पर्य यह है कि रवि की जो फसलें आई है उनका सबसे पहला अधिकार देवताओं को का होता है। देवताओं को उनका पहला भाग देना। वैदिक संस्कृति का पालन करना।

मोहनभोग – स्थालीपाक केसर युक्त मीठे चावल बनाना, खीरानंद दूध डालकर मोटी खीर बनानी और बृहद यज्ञविधि के पवमान वाले मन्त्रो से आहुतियां देवें।

सोमपान (अमृत) – यज्ञ के पश्चात गिलोय की टहनी का रस निकालकर १०० ग्राम रस में 30 ग्राम शहद मिलाकर हवन में उपस्थित लोगों को पान कराना जिससे वर्ष पर बुखार और दूसरी व्याधि ना हो।

दान एवं सहायता – होलिकोत्सव पर वेदों का प्रचार करने वाले पुरोहित, आचार्य, विद्वान, सन्यासी तथा गुरूकुलों, गौशाला, अनाथालय का यथासंभव सहायता करना

सामाजिक कृत्य – अपने अपने संस्थान, संगठन से जुड़े हुए समाजों के द्वारा विभिन्न कार्यक्रम कविता, भजन, प्रीति सम्मेलन, हास्य कविताएं (किंतु अश्लील ना हो) का आयोजन करना। परस्पर मिल कर एक दूसरे को शुभकामनाएं देना, दूर स्थित अपने मित्रों परिजनों को दूरभाष के द्वारा शुभकामनाएं प्रदान करना फोन करके उनका हाल चाल एवं स्वास्थ्य पूछना। परिवार समाज एवं व्यापार से संबंधित लोगों के साथ हुए गिले-शिकवे दूर करना, वैमनस्य ईर्ष्या के भाव को दूर करना, प्रेम एवं भाईचारा बढ़ाना, समाज के पिछड़े तबके एवं उपेक्षित लोगों को सम्मानित करना, उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयास करना।

होली जलाना- होली जलाना यद्यपि हवन का अपभ्रंश है बड़े-बड़े हवन का बिगड़ा हुआ रुप है तथापि उसको सुन्दर ढंग से करने में कोई हानि नही है जैसे सुगंधित पदार्थ गाय का घी, केसर, जायफल, जावित्री, लौंग, इलायची, तेजपत्ता, दालचिनी, सुखे मेवे, ताल मखाना, सुखा नारियल, गुग्गुल, चन्दन, धूप उपरोक्त हवन सामग्री एवं विशेष सामग्री में लिखे पदार्थ यथासंभव डाले जिससे बड़े पैमाने पर पर्यावरण शुद्ध हो। लोगों को दूसरों की लकड़ी नही चुरानी चाहिए। लकडी में सिर्फ आम, बेल, बड़, पीपल, पलाश की ही होनी चाहिए इसका विशेष रुप से ध्यान रखना चाहिए। कपूर का प्रयोग सिर्फ अग्नि जलाने के लिये करें।

रंगो की होली : 2 मार्च शुक्रवार को अच्छे पुष्प जैसे पलाश के फूल, गुलाब के फूल, चंपा, चमेली इत्यादि से बने गुलाल का प्रयोग करना। हानिकारक केमिकल वाले रंगों का बहिष्कार करना। जिसकी इच्छा न हो उनको जबरदस्ती रंग न लगाना। अगर लगा भी दिया तो कहना – “होली है भाई होली है बुरा न मानो होली है” किंतु महिलाओं के साथ अभद्रता नहीं करना, उनके सम्मान का ध्यान रखना।

बड़ी जिम्मेदारी के साथ, सोच समझकर के होली के वैदिक स्वरूप को लिखा गया है । आप लोगों को अवश्य अच्छा लगा होगा इसलिए, आइए परंपरागत अंधविश्वास पाखंड से ऊपर उठकर के होली के वैज्ञानिक एवं तर्कसंगत तथा आयुर्वेद से संबंधित भौगोलिक दृष्टि से संबंधित स्वरूप को समझें, समाज में जागरूकता बढ़ाएं और ऐसे ही व्यस्त रहिए स्वस्थ रहिए मस्त रहिए।  

रक्षाबंधन के नाम पर सेक्युलर घोटाला


डॉ विवेक आर्य, उगता भारत 

बचपन में हमें अपने पाठयक्रम में पढ़ाया जाता रहा है कि रक्षाबंधन के त्योहार पर बहने अपने भाई को राखी बांध कर उनकी लम्बी आयु की कामना करती है। रक्षा बंधन का सबसे प्रचलित उदहारण चित्तोड़ की रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूँ का दिया जाता है। कहा जाता है कि जब गुजरात के शासक बहादुर शाह ने चित्तोड़ पर हमला किया तब  चित्तोड़ की रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूँ को पत्र लिख कर सहायता करने का निवेदन किया। पत्र के साथ रानी ने भाई समझ कर राखी भी भेजी थी। हुमायूँ रानी की रक्षा के लिए आया मगर तब तक देर हो चुकी थी। रानी ने जौहर कर आत्महत्या कर ली थी। इस इतिहास को हिन्दू-मुस्लिम एकता  तोर पर पढ़ाया जाता हैं।

अब सेक्युलर घोटाला पढ़िए

हमारे देश का इतिहास सेक्युलर इतिहासकारों ने लिखा है। भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल कलाम थे। जिन्हें साम्यवादी विचारधारा के नेहरू ने सख्त हिदायत देकर यह कहा था कि जो भी इतिहास पाठयक्रम में शामिल किया जाये।  उस इतिहास में यह न पढ़ाया जाये कि मुस्लिम हमलावरों ने हिन्दू मंदिरों को तोड़ा, हिन्दुओं को जबरन धर्मान्तरित किया, उन पर अनेक अत्याचार किये। मौलाना ने नेहरू की सलाह को मानते हुए न केवल सत्य इतिहास को छुपाया अपितु उसे विकृत भी कर दिया।

रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूँ के किस्से के साथ भी यही अत्याचार हुआ। जब रानी को पता चला की बहादुर शाह उस पर हमला करने वाला है तो उसने हुमायूँ को पत्र तो लिखा। मगर हुमायूँ को पत्र लिखे जाने का बहादुर खान को पता चल गया। बहादुर खान ने हुमायूँ को पत्र लिख कर इस्लाम की दुहाई दी और एक काफिर की सहायता करने से रोका।

मिरात-ए-सिकंदरी में गुजरात विषय से पृष्ठ संख्या 382 पर लिखा मिलता है-

सुल्तान के पत्र का हुमायूँ पर बुरा प्रभाव हुआ। वह आगरे से चित्तोड़ के लिए निकल गया था। अभी वह गवालियर ही पहुंचा था। उसे विचार आया, "सुलतान चित्तोड़ पर हमला करने जा रहा है। अगर मैंने चित्तोड़ की मदद की तो मैं एक प्रकार से एक काफिर की मदद करूँगा। इस्लाम के अनुसार काफिर की मदद करना हराम है। इसलिए देरी करना सबसे सही रहेगा। " यह विचार कर हुमायूँ गवालियर में ही रुक गया और आगे नहीं सरका।

इधर बहादुर शाह ने जब चित्तोड़ को घेर लिया।  रानी ने पूरी वीरता से उसका सामना किया। हुमायूँ का कोई नामोनिशान नहीं था। अंत में जौहर करने का फैसला हुआ। किले के दरवाजे खोल दिए गए। केसरिया बाना पहनकर पुरुष युद्ध के लिए उतर गए। पीछे से राजपूत औरतें जौहर की आग में कूद गई। रानी कर्णावती 13000 स्त्रियों के साथ जौहर में कूद गई। 3000 छोटे बच्चों को कुँए और खाई में फेंक दिया गया।  ताकि वे मुसलमानों के हाथ न लगे। कुल मिलकर 32000 निर्दोष लोगों को अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ा।

बहादुर शाह किले में लूटपाट कर वापिस चला गया। हुमायूँ चित्तोड़ आया। मगर पुरे एक वर्ष के बाद आया।परन्तु किसलिए आया? अपने वार्षिक लगान को इकठ्ठा करने आया। ध्यान दीजिये यही हुमायूँ जब शेरशाह सूरी के डर से रेगिस्तान की धूल छानता फिर रहा था। तब उमरकोट सिंध के हिन्दू राजपूत राणा ने हुमायूँ को आश्रय दिया था। यही उमरकोट में अकबर का जन्म हुआ था। एक काफ़िर का आश्रय लेते हुमायूँ को कभी इस्लाम याद नहीं आया। और धिक्कार है ऐसे राणा पर जिसने अपने हिन्दू राजपूत रियासत चित्तोड़ से दगा करने वाले हुमायूँ को आश्रय दिया। अगर हुमायूँ यही रेगिस्तान में मर जाता। तो भारत से मुग़लों का अंत तभी हो जाता। न आगे चलकर अकबर से लेकर औरंगज़ेब के अत्याचार हिन्दुओं को सहने पड़ते। 

इरफ़ान हबीब, रोमिला थापर सरीखे इतिहासकारों ने इतिहास का केवल विकृतिकरण ही नहीं किया अपितु उसका पूरा बलात्कार ही कर दिया। हुमायूँ द्वारा इस्लाम के नाम पर की गई दगाबाजी को हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे और रक्षाबंधन का नाम दे दिया। हमारे पाठयक्रम में पढ़ा पढ़ा कर हिन्दू बच्चों को इतना भ्रमित  किया गया कि उन्हें कभी सत्य का ज्ञान ही न हो। इसीलिए आज हिन्दुओं के बच्चे दिल्ली में हुमायूँ के मकबरे के दर्शन करने जाते हैं। जहाँ पर गाइड उन्हें हुमायूँ को हिन्दूमुस्लिम भाईचारे के प्रतीक के रूप में बताते हैं।

त्यौहार और मुहूर्त

सोशल मीडिया के कुछ फायदे हैं तो नुकसान भी हैं। ऐसा ही एक बड़ा नुकसान पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला कि हमारे हर त्यौहार को मुहूर्त के नाम पर छोटा कर रहे हैं।

हम बचपन में पूरा दिन राखी दिवाली और होली मनाते थे। ना कोई मुहूर्त की बात करता था ना ही समय देखकर कोई त्यौहार मनाते थे।

पिछले कुछ वर्षों में अजीब सा चलन चला है -इतने समय से इतने समय तक शुभ मुहूर्त है मतलब आप के त्यौहार को एक डेढ़ घंटे का कर दिया।

30 अगस्त को राखी रात्रि 9 बजे के बाद या 31 अगस्त को सुबह 7 बजे से पहले कितनी बहने भाई को राखी बांधने जा सकेंगी?

न जाने इसके पीछे किसका हाथ है, जो हमारे त्योहारों को समयनुसार समेटते जा रहे हैं

क्या आपने कभी किसी और धर्म के त्योहारों पर इस प्रकार का संदेश देखा है?

इस राखी पर भी एक संदेश चल रहा है कि राखी इतने समय से इतने समय तक 

 अरे भैया क्या यह संभव है कि देश की सभी बहने एक ही मुहूर्त में अपने भाई को राखी बांधे।

क्या भाई बहन के प्रेम के बीच में मुहूर्त आ सकता है? दोस्तों दिल खोलकर राखी मनाईये  सुबह से लेकर रात तक 

ईश्वर का दिया हुआ हर क्षण शुभ होता है। 

रामचरितमानस : अब सपा के लालजी पटेल ने OBC-दलितों को उकसाया, स्वामी प्रसाद मौर्य का किया समर्थन

                     सपा नेता लालजी पटेल ने रामचरितमानस पर उकसाया (फोटो साभार: @SantoshGaharwar)
जनवरी 31 को News18 पर एंकर अमिश देवगन ने अपने शो में लालू यादव की पार्टी 
राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं का एक ऑडियो प्रस्तुत किया था, जिसमें कहा जा रहा है कि "राम पर कटाक्ष करने से बचना चाहिए अन्यथा समस्त हिन्दू हमारे विरुद्ध खड़े होंगे, हमें सवर्णों के विरुद्ध काम करना है...", यानि यह बिकाऊ अपनी तिजोरी किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। जातियों के नाम पर बनी ये पार्टियां जातियों का उद्धार करने की बजाए देश को जातियों में बांट अपनी तिजोरियां ही भरते रहे। दूसरे, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव कहते हैं कि रामायण की हम भी इज्जत करते हैं, लेकिन उन्ही के नेता रामायण को जलाने की बात बोल जनभावनाओं को भड़काने का काम कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी वही पार्टी है जिसके तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री रहते निहत्ते रामभक्तों पर गोलियां चलवा दी थी। यानि इन बिकाऊ नेताओं जो नोटों के लालच में अपने ही धर्म पर प्रश्नचिन्ह लगाकर उपद्रव करवाने की गन्दी सियासत करते हो, इनका और इनकी पार्टियों को चुनावों में धूल चटवानी चाहिए।    

समाजवादी पार्टी (SP) के नेताओं द्वारा रामचरितमानस को अपमानित करने का सिलसिला जारी है। लालजी पटेल ने स्वामी प्रसाद मौर्य का समर्थन करते हुए मंगलवार (31 जनवरी 2023) को श्रीरामचरितमानस की प्रतियाँ जलाने के लिए दलितों को उकसाया। उन्होंने कहा, “रामचरितमानस कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं है। यह एक ऐसी किताब है, जिससे समाज में भेदभाव को बढ़ावा मिलता है। यह पिछड़ी जाति और दलितों का अपमान करती है। इसे जलाया जाना चाहिए।”

उन्होंने पिछड़े वर्ग के लोगों को भी हिंदू त्योहार होली पर श्रीरामचरितमानस की प्रतियाँ जलाने के लिए उकसाया। पटेल ने कहा, “यह किताब धार्मिक ग्रंथ नहीं है। तुलसीदास जी ने अपना विचार व्यक्त किया था। हिंदू धर्म के प्रचार के लिए इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारा धर्म हिंदू सनातन धर्म है। सनातन धर्म हजारों, लाखों वर्ष पुराना धर्म है और तुलसीदास जी की यह किताब 500 साल पुरानी है। यह कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि समाज को बाँटने वाली एक पुस्तक है। यह पिछड़े वर्ग के लोगों और दलितों को अपमानित करती है। होलिका दहन पर रामचरितमानस की प्रतियों को जलाया जाना चाहिए। तभी पिछड़े वर्ग के लोगों और दलितों को उनका अधिकार मिलेगा।”

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पीजीआई कोतवाली क्षेत्र के वृंदावन योजना में रामचरितमानस की प्रतियाँ जलाने के मामले में सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और नौ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। भाजपा नेता सतनाम सिंह लवी ने मौर्य और नौ अन्य के खिलाफ 142 (गैरकानूनी सभा), 295 (धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को अपवित्र करना), 153-ए (दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295-ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया दुर्भावनापूर्ण कार्य) और 506 (आपराधिक धमकी) समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

इस मामले के नौ अन्य आरोपितों की पहचान देवेंद्र प्रताप यादव, यशपाल सिंह लोधी, सत्येंद्र कुशवाहा, महेंद्र प्रताप यादव, सुजीत यादव, नरेश सिंह, एसएस यादव, संतोष वर्मा और सलीम के रूप में हुई है। पुलिस ने सोमवार (31 जनवरी 2023) को इस मामले के 10 आरोपितों में से पाँच को गिरफ्तार कर लिया।

29 जनवरी 2023 को लखनऊ के वृंदावन योजना में अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ने समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में रामचरितमानस की प्रतियाँ जलाई थीं। ओबीसी महासभा के एक सदस्य ने कहा था, “इसमें नारी शक्ति, शूद्रों, दलित समाज और ओबीसी समाज के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी हैं। हम इन टिप्पणियों को रामचरितमानस से निकलवाना चाहते हैं। जब निकाला जाएगा तभी ये विरोध प्रदर्शन शांत होगा। नहीं तो जगह-जगह विरोध प्रदर्शन होगा।”

होली से पहले अलीगढ़ में मस्जिदें ढंकी गईं, लखनऊ में जुमे की नमाज का वक्त बदला

                                   अलीगढ़ में प्रशासन ने 2 मस्जिदों को ढ़ंका (चित्र साभार - @AshrafFem)
साम्प्रदायिक रूप से अतिसंवेदनशील माने जाने वाले उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ (Aligarh, Uttar Pradesh) में प्रशासन ने होली को देखते हुए 2 मस्जिदों को कपड़े से ढंक दिया है। प्रशासन के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि एक साथ पड़ रही होली और शब–ए–बारात में कोई साम्प्रदायिक तनाव न फैले। वहीं, लखनऊ में 22 मस्जिदों ने होली के कारण अपने जुमे की नमाज के समय को बदल दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन मस्जिदों को कपड़े से ढंका गया है, उनके नाम शीशे वाली मस्जिद और बाबरी मंडी की मस्जिद है। अलीगढ़ के एसपी सिटी कुलदीप सिंह के मुताबिक, “ऐसा कदम इसलिए उठाया गया है, ताकि कोई शरारती तत्व मस्जिद पर रंग न डाल पाए। होली और शब-ए-बारात साथ पड़ने के चलते पुलिस अतिरिक्त सावधानी बरत रही है। होलिका दहन में कोई साम्प्रदायिक तनाव न फैले इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल मिश्रित आबादी वाले इलाकों में तैनात किया गया है। पुलिस द्वारा ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी।”

एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि ऐसा पिछले 5 सालों से होता आ रहा है। यह कदम मस्जिद को गंदगी और रंगों से बचाने के लिए उठाया जाता है। इसमें मस्जिद को कपड़े और पन्नी से ढंका जाता है।

10 मार्च 2020 को भी अलीगढ़ के अति संवेदनशील अब्दुल करीम चौराहे की हलवाईयाँ मस्जिद को शामियाने से ढंक दिया गया था। तब भी पुलिस ने इसे मस्जिद पर रंग न गिरने के लिए उठाया गया कदम बताया था। उस समय CAA-NRC में हुई हिंसक झड़पों के बाद प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरती थी।

लखनऊ में जुमे की नमाज का समय बदला

वहीं, होली, शब-ए-बारात और जुमा एक ही दिन पड़ने के कारण 22 मस्जिदों ने नमाज के समय में बदलाव कर दिया है। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के सुन्नी मौलवी और लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि देश की गंगा-जमुनी तहजीब को ध्यान में रखते हुए किया गया है। उन्होंने मुस्लिमों से होली के दिन दूसरी मस्जिदों में जाने के बजाए अपने-अपने इलाके की मस्जिदों में नमाज अता करने को भी कहा। साथ ही 5 बजे होली खेलने का वक्त समाप्त होने के बाद ही मस्जिदों और अपने लोगों की कब्रों पर जाएँ।
नमाज का समय बदलने वाले मस्जिदों में जामा मस्जिद ईदगाह, मस्जिद ऐशबाग, अकबरी गेट पर एक मीनारा मस्जिद, मस्जिद शाहमीना शाह और मस्जिद चौक प्रमुख हैं। इन 22 मस्जिदों में जुमे की नमाज का दोपहर 1.30 बजे के बाद कर दिया है। वहीं, ईदगाह स्थित जामा मस्जिद में नमाज दो बजे पढ़ी जाएगी। बता दें कि जुमे की दिन ‘खुतबा’ के साथ नमाज दोपहर 12.30 बजे के बाद की जाती है। अब यह 1:30 बजे के बाद की जाएगी।

काशी में क्यों खेली जाती है चिता-भस्म की होली, भूतभावन महादेव अब भी आते हैं महाश्मशान मणिकर्णिका?

                                                           काशी की चिता-भस्म की होली
भूतभावन बाबा विश्वनाथ के बिना काशी अधूरी है। यही वजह है कि आदिकाल से ही महादेव की नगरी में होली सहित किसी उत्सव की शुरूआत भी ‘बाबा’ से ही होती है। रंगभरी एकादशी से ही बाबा के साथ अबीर-गुलाल खेलकर होली का आगाज हो जाता है। यहाँ यह बता देना जरूरी है कि ‘बाबा’ बनारस में भगवान भोलेनाथ, काशी विश्वनाथ को कहते हैं।

महाश्मशान की नगरी काशी में अन्नपूर्णा के रूप में निवास करने वाली देवी गौरी के पहली बार काशी आगमन के साथ ही बनारस में होली का आगाज़ हो जाता है। इसी दिन से बनारस में रंग खेलने का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है जो लगातार छह दिनों तक चलता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव माता पार्वती से विवाह के बाद पहली बार काशी पधारे थे। इस खुशी में भगवान शिव के भक्त-गण रंग-गुलाल उड़ाते हुए और खुशियाँ मनाते हुए आए थे। यहाँ बता दें कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष रंगभरी एकादशी बुधवार (मार्च 24, 2021) थी और महाश्मशान की होली गुरुवार (मार्च 25, 2021) को है।

मस्तानों की नगरी काशी में रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन महाश्मशान में होली खेली जाती है। यह दुनिया की सबसे अनूठी होली है। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान शिव रंगभरी एकादशी के दिन माता पार्वती और पुत्र गणेश के साथ गौना कराकर काशी लौटते हैं तो उनका स्वागत सभी लोकों के लोग करते हैं लेकिन उसमें शिव के भूत-पिशाच भक्त गण और दृश्य-अदृश्य आत्माएँ मौजूद नहीं होतीं। इसलिए रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन महाश्मशान में महादेव अपने भक्तों के साथ भस्म से होली खेलते हैं। यह भस्म कोई साधारण भस्म नहीं होती, बल्कि इंसान के शव जलने के बाद पैदा होने वाली राख होती है।

इस सनातनी धरा की उसी परंपरा का निर्वाह करते हुए आज भी काशी में हर वर्ष रंगभरी एकादशी को बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाता है। वे दूल्हे के रूप में सजाए जाते हैं। फिर विधिपूर्व​क हर्षोल्लास से बाबा विश्वनाथ के संग माता गौरा का गौना कराया जाता है। पूरी परंपरा का बनारस में विधिवत पालन होता है।

                                 गौना के लिए जाते भक्त गण और बाबा काशी विश्वनाथ का भव्य शृंगार
काशीवासी आज भी बाराती, भक्त तो शिव के गण बनते हैं। महाशिवरात्रि पर जो गण बाराती बनकर शिवविवाह में शामिल हुए थे वही अब बाबा की पालकी लेकर गौना कराने निकलते हैं। माँ गौरी की विदाई कराकर शिव जब मंदिर की तरफ प्रस्थान करते हैं तो काशी में शिव के गण बने शिव-भक्त रंग-गुलाल उड़ाते हुए साथ चलते हैं।

बनारस में कहा जाता है कि महादेव कितनी भी मस्ती में क्यों न हों लेकिन अपने दृश्य-अदृश्य उन गणों को उत्सव में बिसरा दें यह हो नहीं सकता। वे गण जो थोड़े डरावने हैं। वही जो बिना बुलाए जब शिव बारात में सब चलें गए तो द्वारचार में माँ गौरा की माँ ऐसी बारात और बारातियों को देखकर बेहोश हो गई थीं। इसलिए, कहा जाता है कि गौना में ऐसे भूत-पिचास, अदृश्य आत्माएँ थोड़ी दूरी बना लेती हैं ताकि सब सकुशल संपन्न हो जाए।

                                                               मसाने की होली
अब अपने उन्हीं गणों के लिए भूतभावन भगवान महादेव गौना के अगले दिन यानी रंगभरी एकादशी के एक दिन बाद महाश्मशान मणिकर्णिका पर स्वयं अपने दृश्य-अदृश्य गणों के साथ उत्सव मनाने अर्थात होली खेलने आते हैं।

भारतीय सनातन संस्कृति की इसी परंपरा पर बात करते हुए पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र बताते हैं कि बनारस की होली भी बनारस के मिजाज के अनुसार ही अड़भंगी है। दुनिया का इकलौता शहर जहाँ अबीर, गुलाल के अलावा धधकती चिताओं के बीच चिता भस्म की होली होती है। घाट से लेकर गलियों तक होली के हुड़दंग का हर रंग अद्भुत होता है। महादेव की नगरी काशी की होली भी अड़भंगी शिव की तरह ही निराली है।

                                                       डमरू की नाद पर उत्सव का आगाज
वह कुछ याद करते हुए गुनगुनाने लगते हैं कि खेले मसाने में होरी दिगंबर, खेले मसाने में होरी, भूत पिशाच बटोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी…। वह कहते हैं कि लखि सुंदर फागुनी छटा के, मन से रंग-गुलाल हटा के चिता भस्म भर झोरी… दिगंबर खेले मसाने में होरी….। आखिर ऐसा दृश्य कहाँ देखने को मिलेगा कि भगवान शिव के गण अपने झोली में चिता भस्म की राख भरकर मन भर होली खेलकर तृप्त हो जाते हैं। उनका कहना है कि काशी की होली में राग और विराग दोनों नजर आते हैं।

पंडित छन्नूलाल मिश्र ठहरकर कुछ समझाते हुए आगे गुनगुनाते लगते हैं कि गोप न गोपी श्याम न राधा, ना कोई रोक ना कवनो बाधा, ना साजन ना गोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी…। भावविभोर हो वह कह उठते हैं कि शिव की नगरी काशी की होली की बात ही निराली है। जब महादेव महाश्मशान में उतरते हैं तो भूतनाथ की मंगल-होरी, देखि सिहाएं बिरिज के गोरी, धन-धन नाथ अघोरी… दिगंबर खेलैं मसाने में होरी।

                                                   हरिश्चंद्र घाट के श्मशान में भस्म होली खेलते भक्त गण
परंपराओं के अनुसार, आज भी महाश्मशान मणिकर्णिका पर, भगवान शिव के स्‍वरुप बाबा मशाननाथ की पूजा कर श्‍मशान घाट पर चिता भस्‍म से उनके गण होली खेलते हैं। शैव-शाक्त, अवघड़ से लेकर तमाम महादेव के भक्त-गण इस अवसर का साक्षी होने के लिए कई जन्मों तक प्रतीक्षा करते हैं। कहा तो यह भी जाता है जब तक महादेव न बुलाएँ तब तक किसी को ऐसा सौभाग्य नहीं मिलता कि वह स्वयं काशी में महादेव संग होली खेलने का पुण्य अवसर प्राप्त करे।

काशी मोक्ष की नगरी है और दूसरी मान्‍यता यह भी है कि यहाँ भगवान शिव स्‍वयं तारक मंत्र देते हैं। लिहाजा यहाँ पर मृत्‍यु भी उत्‍सव है और होली पर चिता की भस्‍म को उनके गण अबीर और गुलाल की भाँति एक दूसरे पर फेंककर सुख-समृद्धि-वैभव संग शिव की कृपा पाने का उपक्रम भी करते हैं।  

खेले मसाने में होरी दिगंबर, खेले मसाने में होरी
भूत पिसाच बटोरी दिगंबर, खेले मसाने में होरी
लखि सुंदर फागुनी छटा के, मन से रंग-गुलाल हटा के चिता-भस्‍म भर झोरी,
दिगंबर खेले मसाने में होरी
गोपन-गोपी श्‍याम न राधा, ना कोई रोक ना कौनऊ बाधा ना साजन ना गोरी
दिगंबर खेले मसाने में होरी
नाचत गावत डमरूधारी, छोड़ै सर्प-गरल पिचकारी पीतैं प्रेत-धकोरी
दिगंबर खेले मसाने में होरी
भूतनाथ की मंगल-होरी, देखि सिहाएं बिरिज कै गोरी धन-धन नाथ अघोरी
दिगंबर खेलैं मसाने में होरी

खैर, चलते-चलते आपको यह भी बता दूँ कि होली बनारस और बिहार के गया में बुढ़वा मंगल तक चलता है। होली के बाद आने वाले मंगलवार को काशीवासी बुढ़वा मंगल या वृद्ध अंगारक पर्व भी कहते हैं। होली युवाओं के जोश का त्यौहार है, लेकिन बुढ़वा मंगल में बुजुर्ग लोगों का उत्साह भी दिखाई पड़ता है।

बनारस में बुढ़वा मंगल के अवसर पर गीत-संगीत की महफ़िलों के साथ मेला भी लगता है। बनारस के इस पारम्परिक मेले से प्रमुख साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र भी सम्बद्ध रहे हैं और आज भी बनारस के संगीत घराने के अलावा तमाम सम्बुद्ध काशीवाशी इस आयोजन का हिस्सा होते हैं।(साभार)

उत्तर प्रदेश : सिटी मजिस्ट्रेट साहब क्या ‘होली ड्रग्स का त्योहार है’? : शब-ए-बारात और होली को लेकर पीस कमिटी की बैठक में सिटी मजिस्ट्रेट

                                                 हिंदू संगठनों ने सिटी मजिस्ट्रेट का पुतला फूँका
जब भी हिन्दुओं के बहुचर्चित त्यौहार शिव रात्रि, करवाचौथ, रक्षा बंधन, होली और दीपावली आते हैं, लिबरल और छद्दम धर्मनिरपेक्ष एकदम सक्रिय हो जाते हैं। क्या किसी अन्य के धर्म के बारे में बोलने का ये पाखंडी हिन्दू बोलने का साहस कर सकते हैं? शब-ए-बारात पर होते हुड़दंग के बारे में क्या सिटी मजिस्ट्रेट बोलने का साहस कर सकते हैं? 

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद मेंं सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार मौर्य ने पीस कमेटी की बैठक को संबोधित करते हुए होली को नशे का त्योहार बताया। बैठक होली और शब-ए-बारात के मद्देनजर नगर में होने वाले इंतजामों की चर्चा को लेकर हो रही थी। हालाँकि, मजिस्ट्रेट ने इंतजामों पर बात करते हुए हिन्दुओं के त्योहार होली के लिए विवादित बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि होली नशे का त्योहार है, इसलिए सभी लोग अपने अपने बच्चों का स्वयं ध्यान रखें।

जानकारी के अनुसार, मजिस्ट्रेट अशोक मौर्या ने बैठक में कहा कि होली एक ऐसा त्योहार है जिसमें लोग शराब पीतें हैं और नशा करते हैं। वह बोले, “होली ड्रग्स का त्योहार है, इसलिए उत्सव के दौरान शहर में होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधियों पर प्रशासन को कड़ी निगरानी रखनी होगी।” मौर्य ने आगे कहा, “अगर आपको कहीं भीं शराब या ड्रग की बिक्री को लेकर को कोई भी जानकारी मिले तो आप फौरन पुलिस को सूचित करें।”

सिटी मजिस्ट्रेट के इस बयान को सुनने के बाद वहाँ बैठे एक वकील डॉ. दीपक द्विवेदी भड़क गए। डॉ. दीपक ने आपत्ति जाहिर करते हुए मौर्य से माफी माँगने को कहा। जवाब में मौर्य ने कहा कि उनके कहने का यह मतलब नहीं था। इसके बाद हिन्दू जागरण मंच के सदस्यों ने भी सिटी मजिस्ट्रेट के खिलाफ़ प्रदर्शन किया। चौक बाजार इलाके में मजिस्ट्रेट के पुतले जलाए गए। 

पहले भी होली पर लिबरल प्रोपेगेंडा

ये पहली बार नहीं जब हिंदू त्योहारों को बदनाम करने का प्रयास हुआ है। इससे पूर्व भी वामपंथी-कट्टरपंथी प्रोपेगेंडा के तहत हिन्दू त्योहारों को बुरा भला कहा जाता रहा है। पिछले साल सोशल मीडिया पर होली को रेप और शोषण का त्योहार बता दिया गया था।
लिबरलों ने यहाँ तक कहा था कि होली पर महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है। वहीं इस्लामियों ने दावा किया था कि हिन्दू पुरुष मुस्लिम पुरुषों से जलते हैं इसलिए वह उनकी औरतों के साथ होली खेलना चाहते हैं।
द क्विंट ने होली पर हिन्दू फोबिया कंटेंट को बढ़ावा देते हुए इस त्योहार को एक ऐसा अवसर कहा था जहाँ बच्चे सड़कों पर आतंक मचाते हैं। फिर स्क्रॉल ने भी इस त्योहार पर ऐसी रिपोर्ट छापी थी जिससे पता चले कि आखिर किस तरह देश में पानी के लिए हाहाकार है और त्योहार को मनाने के लिए हिन्दू उसे ही बर्बाद कर देते हैं।