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आगरा के जिस पार्क से ताजमहल को निहारते थे सैलानी, उसकी 6 बीघा जमीन एक किसान ने ट्रैक्टर से जोत दी; बाड़ लगा प्रवेश किया प्रतिबंधित

                              अपनी जमीन बताते हुए किसान मुन्ना लाल ने लगाए बैरिकेड (फ़ाइल फोटो, साभार: NBT)
आगरा के ताजमहल के पास स्थित 11 सीढ़ी पार्क विवादों के घेरे में है। इस जगह से सैलानी सूर्यास्त के समय ताजमहल को निहारा करते हैं। एक स्थानीय किसान ने इस पार्क के एक बड़े हिस्से को निजी जमीन बताते हुए ट्रैक्टर से जोत दिया है। साथ ही बाड़ लगाकर सैलानियों का प्रवेश भी प्रतिबंधित कर दिया है।

इस किसान का नाम मुन्ना लाल है। उनका कहना है कि पार्क के अंदर 6 बीघा जमीन उनकी निजी भूमि है। इसको लेकर वे लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने और इस पर अधिकार हासिल करने का भी दावा कर रहे हैं। आगरा की कमिश्नर ने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 11 सीढ़ी पार्क की जमीन पर दावा करने वाले किसान मुन्ना लाल, कछपुरा के नगला देवजीत गाँव के मूल निवासी हैं। कथित तौर पर इस पार्क की करीब 6 बीघा जमीन पर कभी मुन्ना लाल के चाचा और पिता खेती किया करते थे। जमीन के कागजातों पर भी उन्ही के नाम हैं। साल 1976 की सीलिंग में यह जमीन मुन्ना लाल के परिवार के हाथ से निकल गई। इसके बाद जमीन वापस पाने के लिए मुन्ना लाल ने 40 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी।

मुन्ना लाल का कहना है कि साल 1998 और 2020 के जिला न्यायालय के दस्तावेजों में इस जमीन का ट्रांसफर ऑफ ओनरशिप उनके पक्ष में दर्ज हुआ। साल 2020 में SDM ने भी इस जमीन पर मुन्ना लाल के स्वामित्व की पुष्टि की थी। साथ ही यह जमीन रेवेन्यू रिकॉर्ड में भी अपने नाम पर दर्ज होने का वे दावा कर रहे हैं।

मुन्ना लाल का कहना है कि इस जमीन पर उनके स्वामित्व का अदालती आदेश है। उन्होंने ट्रैक्टर से पार्क में अपने कथित हिस्से को न सिर्फ जुतवा डाला है, बल्कि उसकी घेराबंदी भी कर दी है। इस क्षेत्र में अब आम लोगों का आना-जाना प्रतिबंधित है। आगरा की कमिश्नर ऋतु माहेश्वरी का कहना है कि जमीन आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) के अधीन आती है। इस पार्क की देखरेख का भी जिम्मा ADA का है। उन्होंने मुन्ना लाल के दावों की जाँच के आदेश जारी किए हैं। बताते चलें कि साल इसी पार्क में साल 2023 में ताज महोत्सव का आयोजन हुआ था। यहीं 1997 में ग्रीक संगीतकार यन्नी का कॉन्सर्ट भी हुआ था।

ताजमहल को शाहजहाँ ने नहीं बनवाया, यह था हिंदू राजा का महल… गलत लिखा इतिहास में: दिल्ली हाईकोर्ट में मामला, ASI करेगी विचार


दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (3 अक्टूबर 2023) को अपने एक फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को ताजमहल के ‘सही इतिहास’ को प्रकाशित करने वाले आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया। अपनी जनहित याचिका में हिंदू सेना ने कहा कि ताजमहल को मुगल बादशाह शाहजहाँ ने नहीं, बल्कि राजपूताना (वर्तमान राजस्थान) के कच्छावा वंश के क्षत्रिय राजा मान सिंह ने बनवाया था।

इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सतीशचंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने इस मामले में ASI को निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले भी इस तरह की प्रार्थनाओं के साथ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। शीर्ष अदालत ने तब संगठन से ASI के समक्ष एक आवेदन दाखिल करने को कहा था।

शुक्रवार को उच्च न्यायालय को याचिकाकर्ता ने बताया कि ASI ने अभी तक उनके प्रत्यावेदन पर निर्णय नहीं लिया है। इसलिए, बेंच ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से उस अभ्यावेदन पर गौर करने के लिए कहा है। हिंदू सेना के अध्यक्ष सुरजीत सिंह यादव ने दायर याचिका में कहा है कि ताजमहल मूल रूप से राजा मान सिंह का महल था और बाद में शाहजहाँ द्वारा इसका जीर्णोद्धार किया गया था।

यादव ने अपनी याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया कि इतिहास की किताबों से ताजमहल के निर्माण से संबंधित ‘ऐतिहासिक रूप से गलत तथ्यों’ को हटाने के लिए ASI, केंद्र सरकार, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार और उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दे। याचिका में ASI से ताजमहल की उम्र और राजा मान सिंह के महल के अस्तित्व के बारे में जाँच करने का निर्देश देने की भी माँग की गई है।

याचिकाकर्ता सुरजीत यादव का कहना है कि उन्होंने ताजमहल के बारे में ‘गहरा अध्ययन और शोध’ किया है। इसलिए इतिहास के तथ्यों को सुधारना और लोगों को ताजमहल के बारे में सही जानकारी देना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जेडए देसाई द्वारा लिखित ‘ताज संग्रहालय’ नामक पुस्तक का भी उल्लेख किया, जिसमें मुमताज महल को दफनाने के लिए एक ‘ऊँची और सुंदर’ जगह का चयन किया गया था।

इस पुस्तक का हवाला देते हुए उन्होंने अपनी याचिका में आगे कहा कि यह ऊँची और सुंदर जगह राजा मान सिंह की हवेली थी, जो उस समय उनके पोते राजा जय सिंह के कब्जे में थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस हवेली को कभी ध्वस्त नहीं किया गया था। यादव का कहना है कि ताजमहल की वर्तमान संरचना राजा मान सिंह की हवेली का एक संशोधन और नवीनीकरण भर है, जो पहले से मौजूद थी।

सुरजीत यादव ने कहा है, “ता संग्रहालय नामक पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि मुमताज महल का मृत शरीर राजा जय सिंह के भूमि परिसर के भीतर एक अस्थायी गुंबददार संरचना के तहत दफनाया गया था। यह उल्लेख करना उचित है कि ऐसा कोई विवरण नहीं है, जो बताता हो कि राजा मान सिंह की हवेली को ताजमहल के निर्माण के लिए ध्वस्त किया गया था।”

याचिकाकर्ता ने कहा है कि उन्होंने ताजमहल पर कई किताबों की जाँच की और एक किताब में कहा गया है कि शाहजहाँ की पत्नी आलिया बेगम थीं। मुमताज महल का कहीं कोई जिक्र नहीं है। ASI की वेबसाइट पर विरोधाभासी जानाकारी देने का आरोप लगाते हुए याचिका में कहा गया है कि ASI ने बेवसाइट पर कहा है कि 1631 में मुमताज महल की मृत्यु के 6 महीने बाद शव को ताजमहल के मुख्य मकबरे के तहखाने में दफनाने के लिए आगरा लाया गया था।
याचिका में कहा गया है कि ASI की उसी वेब पेज पर उल्टा जानकारी दी गई है, जहाँ कहा गया है कि 1648 में ताजमहल का निर्माण पूरा होने में लगभग 17 साल लगे थे। याचिका में कहा गया है कि जब ताजमहल को पूरा होने में 17 साल लगे और वह 1648 में बनकर तैयार हुआ तो मुमताज महल का शव 1631 ईस्वी में दफनाने के लिए आगरा कैसे लाया गया। यह विरोधाभासी और भ्रामक है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका - ताज महल या तेजो महालय? शाहजहाँ ने निर्माण करवाया इसके प्रमाण नहीं, बने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी

आगरा के ताज महल (Taj Mahal) का सच क्या है? इसका पता लगाने की अपील करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि शाहजहाँ (Shah Jahan) ने ताज महल का निर्माण करवाया था। विवाद निपटारे और इसकी असली पहचान का पता लगाने के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी (Fact Finding Committee) बनाने की माँग शीर्ष अदालत से की गई है।
आज चिंता का विषय यह है कि 'आखिर क्यों अपनी खोई धरोहरों को ठोस सबूतों के होते हुए वापस लेने के अदालतों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं? जबकि देश में पुरातत्व विभाग है, क्यों नहीं अदालतें इन विवादित बना दी गयी धरोहरों पर बहस करने की बजाए पुरातत्व विभाग को दो/तीन महीनों में जाँच-पड़ताल कर रिपोर्ट देकर जल्द अपना निर्णय देती?' जिस दिन अदालतों ने इन मामलों को लंबित करने की बजाए पुरातत्व विभाग को हरकत में लाकर देश में सांप्रदायिक ताकतें नेस्ताबूत हो जाएंगी। बहुत हो गया हिन्दू मुसलमान। दंगों में हमेशा बेगुनाह-चाहे हिन्दू हो या मुसलमान- मरता है, दंगों को हवा देने वाला नेता अथवा पार्टी नहीं।      

यह याचिका रजनीश सिंह ने वकील समीर श्रीवास्तव के माध्यम से दायर की है। याचिकाकर्ता ने बताया है कि उन्होंने ताज महल को लेकर आरटीआई के जरिए एनसीईआरटी से जानकारी माँगी थी। जवाब में उन्हें बताया गया कि ताज महल का निर्माण शाहजहाँ द्वारा करवाए जाने को लेकर कोई प्राथमिक स्रोत उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में याचिकाकर्ता ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से भी आरटीआई के तहत जानकारी माँगी थी। वहाँ से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की बात कही गई है।

याचिका में कहा गया है, “कहा जाता है कि ताज महल का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने बेगम मुमताज महल के लिए 1631-1653 के बीच करवाया। लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लिहाजा ताज महल के वास्तविक इतिहास का अध्ययन करने और विवाद समाप्त करने के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की जाए।”

इसी साल एक RTI के जवाब में ASI ने बताया था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि ताज महल में कब से और किसकी इजाजत से नमाज पढ़ी जा रही है। इस जवाब के बाद वहाँ मजहबी गतिविधियों को बंद करने की माँग उठी थी। इस संबंध में इतिहासकार राजकिशोर ने आरटीआई दाखिल की थी। इसी साल अगस्त में एक पार्षद ने आगरा नगर निगम में ताज महल का नाम ‘तेजो महालय’ करने का प्रस्ताव पेश किया था। प्रस्ताव लाने वाले पार्षद शोभाराम राठौर का कहना था कि ताज महल में हिंदू सभ्यता से जुडे़ कई चिन्ह मिलने की बात कही जाती है। इसे देखते हुए उन्होंने इसका नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था।

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 ताजमहल शाहजहाँ से 500 वर्ष पूर्व निर्मित

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
ताजमहल शाहजहाँ से 500 वर्ष पूर्व निर्मित
Original Rooms and Foundations \ that existed have been hiden and crudely covered up away from the public gaze आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ...

जयपुर के राजघराने की सदस्य और बीजेपी से सांसद दीया कुमारी ने दावा किया था कि जिस जगह पर ताज महल स्थित है, वो जमीन उनकी थी। दीया कुमारी ने ताज महल के बंद दरवाजों को खोलने के लिए दायर की गई याचिका की तारीफ करते हुए कहा था कि इससे सच निकलकर बाहर आएगा। साथ ही उन्होंने ये भी दावा किया था कि उनके पास ऐसे डॉक्यूमेंट्स हैं, जिससे ये साबित होता है कि ताज महल जयपुर के पुराने शाही परिवार का पैलेस था। हालाँकि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 12 मई 2022 को ताज महल के 20 कमरों को खोलने की याचिका खारिज कर दी थी। इस फैसले के खिलाफ ही अब सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है।

जिसे आज ताजमहल कहते हैं, वो शिव मंदिर ‘तेजो महालय’ है: शंकराचार्य


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
 

भाजपा पर इतिहास, भूगोल आदि को बदनाम करने पर आरोपित करने पर अपने इसी स्तम्भ में लाल किला से लेकर क़ुतुब मीनार तक के विषय में राष्ट्र के सच्चाई प्रस्तुत करने को कहा था, लेकिन झूठ के पैर कहाँ?सेवानिर्वित होने उपरांत हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते अपने स्तम्भ "झोंक आँखों में धूल" में लिखा था कि लाल किला शाहजहाँ ने नहीं बनवाया था, जिस कारण मेरा विरोध भी बहुत हुआ था, परन्तु जब

2014 चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा 

ताज महल पर कई वर्षों से शिवालय होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन तुष्टिकरण के चलते भारतीय इतिहास को दरकिनार किया जाता रहा। कहने को सियासत में बैठे हिन्दू अपने आपको हिन्दू किस आधार पर कहते हैं कि उनके सत्ता में रहते मुगलों द्वारा हिन्दू मंदिरों को मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान बनाए जाने पर चुप्पी साधे रहे। 

ओडिशा के पुरी में स्थित गोवर्धन मठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने ताजमहल को लेकर बड़ा दावा किया है। शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित मुगलिया इमारत के बारे में कहा कि ये प्राचीन काल में भगवान शिव का मंदिर था और इसका नाम ‘तेजो महालय’ था। उन्होंने कहा, “जिसे आजकल ताजमहल कहते हैं, उसका पुराना नाम तेजो महालय है। वहाँ शिवजी प्रतिष्ठित थे।“

शंकराचार्य ने कहा कि जयपुर राजपरिवार के पास ताजमहल का पूरा इतिहास सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि विदेशी यात्रियों ने भी अपनी यात्रा को लेकर जो संस्मरण लिखे हैं, उनसे ताजमहल का वास्तविक नाम ‘तेजो महालय’ ही सिद्ध होता है। उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना ‘सुपरिचित’ बताते हुए कहा कि उन्हें इस तथ्य पर ध्यान देना चाहिए और इतिहास के नाम पर जो दूषित प्रचार किया गया है, उस पर पानी फेरने के अविलम्ब प्रयास करें।

शंकराचार्य का ये बयान गोवर्धन मठ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक वीडियो के जरिए जारी किया गया है और योगी आदित्यनाथ को टैग भी किया गया है। शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के बयान के बाद सोशल मीडिया में ताजमहल को लेकर चर्चा फिर से शुरू हो गई। लोगों का मानना है कि ताजमहल को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है और भारत के सैकड़ों हिन्दू मंदिर कलाकारी और भव्यता में इससे खासे बढ़ कर हैं।

इससे पहले श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने आगरा को अग्रवन बताते हुए कहा था कि प्राचीन काल में जो स्थल हिन्दू नाम से जाने जाते थे, उनका नाम उन्हें वापस दिया जाना चाहिए। राजस्थान सरकार द्वारा लाल पत्थर के खनन पर रोक लगाए जाने के फैसले को लेकर उन्होंने कहा कि जल्द ही बातचीत के माध्यम से इसे सुलझाया जाएगा।

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लाल किला शाहजहाँ ने नहीं अनन्तपाल तोमर द्वितीयने बनवाया था

हाल ही में यूपी सीएम ने घोषणा की थी कि आगरा में निर्माणधीन म्यूज़ियम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम स्थापित किया जाएगा। ताजमहल के पूर्व में बन रहे इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 150 करोड़ रुपए है। इससे पहले इसका नाम ‘मुग़ल म्यूजियम’ रखा गया था, जिसे सीएम योगी ने बदल दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे नायक हैं, मुग़ल किसी भी स्थिति में हमारे नायक नहीं हो सकते हैं।