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AXIS बैंक के विज्ञापन में नवरात्रि की धूम के बीच अचानक टपके सांता क्लॉज, फिर वही ‘हिंदू त्योहारों को निशाना बनाकर ‘सेक्युलरिज्म’ का पाठ

    एक्सिस बैंक के विज्ञापन में हिंदू त्योहार नवरात्रि और दीवाली के बीच सांता क्लॉड को दिखाया (साभार: Axis Bank)

हिंदू त्योहार दीवाली के मौके पर एक्सिस बैंक (Axis Bank) ने अपना नया विज्ञापन कैंपेन ‘दिल से ओपन सेलिब्रेशन 2025’ लॉन्च किया है। हैरानी की बात यह है कि इस विज्ञापन में दीवाली की रोशनी और नवरात्रि की धूम के बीच अचानक सांता क्लॉज टपक पड़ते हैं।

जाहिर है, यह वही सांता है जो आमतौर पर क्रिसमस का प्रतीक है। इन्हीं सांता को हिंदू त्योहारों के बीच लाकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि त्यौहार सबका है और उत्सव धर्म की सीमाओं से परे होना चाहिए। यानि वही हिन्दू त्योहारों पर सेक्युलरिज्म का भाषण।

इस विज्ञापन की वीडियो में दिखाया गया कि नवरात्रि के अवसर पर ‘गरबा डांस’ चल रहा होता है तभी अचानक सांता क्लॉज की एंट्री हो जाती है। इस विज्ञापन से एक्सिस बैंक ने अपने ऑफर्स प्रोमोट करने की कोशिश की है, जो नवरात्रि से लेकर दीवाली और फिर क्रिसमस तक चलेंगे।

हिंदू त्योहारों को निशाना बनाकर ‘सेक्युलरिज्म’ का पाठ

एक्सिस बैंक ने हिंदू त्योहारों पर सेक्युलरिज्म का वही पुराना पाठ पढ़ाने की कोशिश की है, जो पहले भी कई ब्रांड्स और कंपनियाँ दे चुकी है। यानि हिंदू त्योहार को निशाना बनाकर नीचा दिखाने का यह पहला मामला नहीं है। साल 2020 में ज्वैलरी ब्रांड ‘तनिष्क’ ने दीवाली पर लव जिहाद को प्रमोट करते विज्ञापन बनाया था।

इस विज्ञापन में एक हिंदू बहू को उसकी मुस्लिम सास के साथ मिलकर गोद भराई का जश्न मनाते हुए दिखाया गया था। यह वही सेकुलर प्रोपेगेंडा है, जिसके बाद हिंदू लड़कियाँ फ्रिज और सूटकेस में मिलती हैं।

ऐसे कई ब्रांड्स और कंपनियाँ हौ जो सेकुलर विज्ञापन के नाम पर हिंदुओं का अपमान करते हैं। इसमें सभी धर्मों को एक बताते हुए हिंदुओं को कट्टर और असहिष्णु दिखाया जाता है। वहीं मुस्लिम को ‘पीड़ित’ और शांतिप्रिय दिखाते हैं और यह सब केवल हिंदू त्योहारों को निशाना बनाकर किया जाता है।

गौर करने वाली बात यह भी है कि रमजान या ईद के विज्ञापन आते हैं तो उनमें किसी और धर्म का प्रतीक या त्योहार नहीं घुसाया जाता। क्रिसमस के विज्ञापन में कभी दीवाली की झलक नहीं मिलती। लेकिन दीवाली और नवरात्रि जैसे हिंदू त्योहारों पर अक्सर बड़ी-बड़ी कंपनियाँ सेक्युलरिज्म का झंडा लेकर आ धमकती हैं।

एक्सिस बैंक का यह विज्ञापन भी उसी सोच का हिस्सा लगता है, जहाँ हिंदू त्योहारों को किसी न किसी बहाने ‘सभी के’ त्योहार में बदलने की कोशिश की जाती है। यह एक सोची-समझी मार्केटिंग रणनीति है, जिसमें कंपनियाँ जानबूझकर हिंदू पर्वों पर ही ‘सेक्युलरिज्म’ का पाठ पढ़ाती हैं।

सोशल मीडिया पर एक्सिस बैंक के ‘ईसाई करण’ का विरोध

एक्सिस बैंक के इस विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया में बवाल मचा हुआ है। एक्सिस बैंक पर ईसाई करण को लेकर विरोध हो रहा है। नेटिजन्स एक्सिस बैंक से विज्ञापन हटाने की माँग कर रहे हैं। ट्विटर/एक्स पर बैंक को बॉयकाट करने का हैशटैग ट्रेंड भी चल रहा है।

एक्सिस बैंक के विज्ञापन पर एक्स यूजर The Jaipur Dialogues ने लिखा, “एक्सिस बैंक सांता क्लॉज के साथ नवरात्रि मना रहा है। यह हिंदू त्योहार को नीचा दिखाने की चरम सीमा है। एक्सिस बैंक इस विज्ञापन को तुरंत वापस ले वरना बहिष्कार का सामना करे। एक्सिस बैंक को सबक सिखाना जरूरी है।”

एक्स पर Treeni ने लिखा, “नवरात्रि का ईसाई करण? एक्सिस बैंक नवरात्रि के दौरान सांता क्लॉज को उपहार बाँटते हुए दिखाकर हिंदू धर्म का मजाक उड़ा रहा है और आने वाले सभी हिंदू त्योहारों में भी ऐसा ही करने की योजना बना रहा है!”

एक्स यूजर अभय प्रताप सिंह ने लिखा, “Axis Bank ने किया नवरात्रि का ईसाई करण आख़िर हिंदू त्योहारों के साथ ही ऐसा खिलवाड़ क्यों होता है? क्या ईद के एड में सेंटा क्लॉज केपी दिखा सकते हैं? क्या क्रिसमस के एड में इस्लामिक प्रतीकों को दिखा सकते हैं? फिर नवरात्रि के एड में सेंटा क्लॉज क्यों?”

अदवाएता नाम की एक्स यूजर ने लिखा, “मैं अपनी बीमा योजना की जाँच करवाती हूँ, तुम्हारी बेवकूफी के चलते अपना खाता बंद करवाऊँगी। पागल आदमी.. इस bugger का हमारे नवरात्रि से क्या संबंध है??”

रितु प्रिया नाम की एक्स यूजर ने लिखा, “ये क्या मजाक है?? थोड़ा दिन में रहना सीखो, हमारे पर्व त्यौहार पर अपनी रोटी सेंकने की कोशिश न करें।”

वामपंथियों के प्रोपेगेंडे की कई बार लगा चुके वाट पॉपुलर अकॉउंट True Indology की ट्विटर पर हुई वापसी : सच दिखाने की वजह से निशाने पर था

                                                                                                                        साभार: फाइल फोटो
विश्व में भारत ऐसा इकलौता देश है, जिसके अधिकांश वासियों को अपना वास्तविक इतिहास ही नहीं मालूम और जो जानकर बताने की कोशिश करता है, उसे गंगा-जमुनी तहजीब जैसे ठोंगी नारे से भ्रमित किया जाता है, फिरकापरस्त आदि से बदनाम किया जाता रहा है। लेकिन बदलते परिवेश में कल तक ट्विटर पर भारत के गौरवशाली इतिहास वाले अकॉउंट को ब्लॉक कर दिया जाता था, पॉपुलर अकॉउंट True Indology तक को ब्लॉक कर दिया गया था, परन्तु अब उसी ट्विटर पर पॉपुलर अकॉउंट True Indology की वापसी से वामपंथियों और छद्दम धर्म-निरपेक्षों की नींद और रोटी हराम होने के दिन आ गए हैं।  
टेस्ला (Tesla) और स्पेएक्स (SpaceX) के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) के अधिग्रहण से पहले माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर (Twitter) पर पक्षपात करने और कुछ हैंडल को प्रतिबंधित करने के आरोप लगते रहे हैं। कंपनी का स्वामित्व बदलने के साथ ही ऐसे हैंडलों पर से प्रतिबंध हटाने की कवायद शुरू हो गई है। ऐसे ही एक हैंडल TrueIndology है, जिसे फिर से रिस्टोर कर दिया गया है।

TrueIndology को बहाल करने की जानकारी प्रसिद्ध लेखक आनंद रंगनाथन ने दी है। इस हैंडल की वापसी का स्वागत करते हुए रंगनाथन ने लिखा, “आपका स्वागत है @TrueIndology, नए साल का सबसे अच्छा तोहफा, जिसकी उम्मीद की जा सकती थी। झोलाछाप वामपंथियों और इतिहासकारों के अंत का शुरू हो गया है।”

ट्विटर के प्रबंधन में बदलाव के साथ ही पक्षपातपूर्ण नीतियों की समीक्षा हो रही है। इसकी जानकारी ट्विटर ने दी है। ट्विटर सेफ्टी ने इसकी जानकारी देते हुए ट्वीट किया, “हमने ऐसी कई नीतियों की पहचान की है, जिनमें Twitter के नियमों को तोड़ने के लिए स्थायी निलंबन एक अनुचित कार्रवाई की गई थी।”

Twitter Safety ने आगे कहा, “हमने हाल ही में उन अकाउंट को बहाल करना शुरू किया है, जिन्हें इन नीतियों के उल्लंघन के कारण निलंबित कर दिया गया था और अगले 30 दिनों में साप्ताहिक रूप से और खातों में विस्तार करने की योजना है।”

ट्रूइंडोलॉजी एक प्रसिद्ध ट्विटर हैंडल है, जो वामपंथी और इस्लामवादियों की प्रोपेगेंडा को एक्सपोज करता रहा है। चाहे फर्जी समाचार हो, फर्जी इतिहास हो, हिंदुओं पर गलत आक्षेप हो या मुगलों का महिमामंडन, TrueIndolgy इनका फंडाभोड़ करता रहा है। यही कारण है कि वामपंथी बड़े पैमाने पर इस हैंडल को रिपोर्ट करते रहे हैं और सत्यता की जाँच किए बिना ट्विटर के पूर्व प्रबंधन द्वारा इसे सस्पेंड किया जाता रहा है।

जनवरी 2019 में NDTV की एक खबर को ट्रूइंडोलॉजी ने झूठा साबित किया था। एनडीटीवी ने अपनी खबर में बताया था कि जम्मू-कश्मीर के एक हिंदू बहुल गाँव ने एक मुस्लिम को जीता कर सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल कायम की है। इस पर यह हैंडल ने बताया था कि मुस्लिम बहुसंख्यक जम्मू-कश्मीर में कभी कोई हिंदू मुख्यमंत्री नहीं रहा।

इसी तरह की अप्रैल 2019 में एक फेक न्यूज का खुलासा ट्रूइंडोलॉजी ने किया था, जब द वायर की पत्रकार आरफ़ा खानम शेरवानी ने दावा किया था कि गोरखनाथ मंदिर को बनाने के लिए मुस्लिम नवाब आसिफ़-उद्-दौला ने जमीन दान की थी। तब ट्रूइंडोलॉजी ने आरफ़ा खानम के ट्वीट का फैक्ट-चेक कर बताया था कि यह मंदिर कम-से-कम 800 साल पुराना है, जबकि नवाब आसिफ़-उद्-दौला केवल सवा दो सौ साल पहले आया था।

इसी तरह की फर्जी खबरें और फर्जी इतिहास को ट्रूइंडोलॉजी एक्सपोज करता रहा है। इसके कारण यह वामपंथियों, इस्लामवादियों और फर्जी इतिहासकारों के निशाने पर रहा है। इन लोगों की रिपोर्ट के बाद ट्विटर पक्षपात करते हुए कई बार इस हैंडल को सस्पेंड कर चुका है। हालाँकि, नए प्रबंधन द्वारा ऐसी नीतियों की समीक्षा का हर जगह स्वागत हो रहा है।