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उत्तर प्रदेश : रोहिंग्या और उनके मददगारों की तलाश : नकली दस्तावेजों से बने भारत के वोटर, ATS की पड़ताल से सामने आया फर्जीवाड़ा

संविधान की शपथ लेकर नेता संविधान का मजाक क्यों बनाते हैं? क्यों ऐसे लोगों का जनता समर्थन करती हैं? क्या ऐसे लोग नेता बनने योग्य हैं? यदि संविधान विरोधी काम विदेश के किसी भी देश में किसी नेता ने किया होता, वह जेल में डाल दिया होता, लेकिन भारत में संविधान और सेकुलरिज्म का मजाक बनाने वाले खुले घूमते हैं, जो भारत सरकार और जनता के लिए बहुत शर्म की बात हैं।  
बिहार की पटना पुलिस के बाद अब उत्तर प्रदेश ATS की लखनऊ यूनिट ने घुसपैठियों को लेकर अहम खुलासा किया है। एटीएस जाँच में रोहिंग्या मुस्लिमों का फर्जी मतदाता पहचान-पत्र बनवाने की बात सामने आई है। 

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक रोहिंग्या मुस्लिमों ने फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर वोटर कार्ड बनवा लिया है। इससे यह भारत के मतदाता बन गए हैं। इससे इनकी पहचान काफी मुश्किल हो गई है। इसका खुलासा तकरीबन एक साल पहले पकड़े गए रोहिंग्या से पूछताछ के दौरान हुआ। लखनऊ एटीएस ने इन घुसपैठियों के पास से भारत का फर्जी वोटर कार्ड बरामद किया था। इसके बाद अब प्रदेश भर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या की तलाश की जा रही है। उनका रिकॉर्ड निकाला जा रहा है, ताकि इन घुसपैठियों और उनके मददगारों की पहचान की जा सके।

जून 2021 में रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत लाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड नूर आलम को यूपी एटीएस ने साथी समेत गाजियाबाद के डासना से गिरफ्तार किया था। नूर आलम फर्जी दस्तावेजों पर रोहिंग्या को भारत लाता था। एटीएस ने आरोपितों के कब्जे से आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल और 70 हजार रुपए बरामद किया था।

नूर आलम से पहले 6 जनवरी 2021 को एटीएस ने उसके साले अजीजुल्लाह को पकड़ा था। अजीज फर्जी दस्तावेजों के सहारे बीते 20 साल से भारत में रह रहा था। वहीं 28 फरवरी 2021 को मोहम्मद फारूक और हसन को अलीगढ़ से गिरफ्तार करने के बाद फारूक के भाई को 1 मार्च को उन्नाव से गिरफ्तार किया गया था। शाहिद को फर्जी भारतीय दस्तावेजों और 5 लाख रुपए के साथ पकड़ा गया था। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि इन घुसपैठियों को प्रतिबंधित सिमी समर्थित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का संरक्षण प्राप्त है।

PFI की संलिप्तता हाल ही में बिहार से भी सामने आई है। पटना पुलिस की जाँच में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा अपने संगठन में भर्ती करने के लिए रोहिंग्या मुस्लिमों और बांग्लादेशी घुसपैठियों का आधार कार्ड बनवाने की बात सामने आई थी। पटना पुलिस ने इस बात की भी आशंका जताई थी कि पीएफआई आधार कार्ड बनवाने के लिए फर्जी कागजात तैयार करवाने के साथ ही ऐसे तरीके अपना रहा है, जिससे घुसपैठियों की पहचान बेहद मुश्किल होगा। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट में इस कड़ी में बिहार के सीमांचल क्षेत्र खासतौर से किशनगंज, दरभंगा, कटिहार, मधुबनी, सुपौल और पूर्णिया जिलों को टारगेट करने की बात कही गई थी।

15 अगस्त को बम ब्लास्ट की साजिश रचने वाला ISIS आतंकी निकला ओवैसी की पार्टी का नेता

 ISIS आतंकी सबाउद्दीन (फोटो साभार: News 18)
उत्तर प्रदेश ATS ने आजमगढ़ से ISIS के आतंकी सबाउद्दीन आजमी को गिरफ्तार किया है, जो स्वतंत्रता दिवस पर बम ब्लास्ट की साजिश रच रहा था। ये गिरफ़्तारी 9 अगस्त, 2022 को हुई है। देश 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है और देश भर में इसके लिए कई कार्यक्रमों की योजनाएँ है, कई चल रहे हैं। ये भी पता चला है कि ISIS आतंकी सबाउद्दीन आजमी असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का भी सक्रिय सदस्य है।

अब आतंकरोधी दस्ते की टीम सबाउद्दीन आजमी को लेकर मुख्यालय पहुँची है, जहाँ उनसे पूछताछ जारी है। इस दौरान ATS ने उनके मोबाइल फोन का डेटा भी खँगाला है। वो आतंकी जिहाद करने के लिए युवाओं का ब्रेनवॉश भी कर रहा था। ISIS द्वारा तैयार किए गए टेलीग्राम चैनल से भी वो जुड़ा हुआ है। इस चैनल का नाम ‘अल स्वायर मीडिया’ है। ATS पता कर रही है कि सबाउद्दीन आजमी कहाँ बम विस्फोट करने की साजिश रच रहा था।

जम्मू कश्मीर में जिस तरह से आतंकियों पर कार्रवाई हो रही है, इस पर वो कश्मीर के लोगों से भी बातचीत कर के उन्हें भड़का रहा था। राजनीति को ही उसने युवाओं का ब्रेनवॉश का माध्यम बनाया था। AIMIM से जुड़े हुए वो अन्य लोगों को भी अपनी आतंकी गतिविधियों में जोड़ रहा था। नगर पालिका माहुल के वार्ड नंबर 9 से उसने सभासद का चुनाव भी लड़ा था। चुनाव के प्रचार-प्रसार को जरिया बना कर वो जिहादी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।

आतंकी गतिविधियों के लिए वो खुद का संगठन भी तैयार कर रहा था। पार्टी के नाम से उसने अपना एक व्हाट्सएप्प ग्रुप भी बना रखा था। इसमें से इसके गिरोह के कई लोगों का खुलासा होने की आशंका है। इसके कई साथियों को जल्द ही दबोचा जा सकता है। आजमगढ़ जिले की ख़ुफ़िया यूनिट और पुलिस ने भी इस गिरफ़्तारी के बाद सक्रियता और सतर्कता बढ़ा दी है। इस गिरफ़्तारी से इस गिरोह द्वारा बम ब्लास्ट की साजिश विफल हो गई है।

उत्तर प्रदेश : रोहिंग्या की घुसपैठ कराने वाले बांग्लादेशी बाप-बेटे गिरफ्तार : बंगाल का वोटर कार्ड, मस्जिद के पास डेरा

नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में जगह-जगह बन शाहीन बाग़ बनाने का असली मकसद सामने आना शुरू हो गया है। असल में देशहित से खिलवाड़ और संविधान की धज्जियाँ उड़ाने वाले कुर्सी के भूखे नेता और अपने आपको धर्म-निरपेक्ष कहलानी वाली पार्टियां पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बचाने के लिए इनके द्वारा गन्दा खेल खेला जा रहा था। इन्हीं घुसपैठियों को बचाने 'कागज नहीं दिखाएंगे', और हिन्दू और हिन्दुत्व को गालियां दी जा रही थीं। कोई भी असली भारतीय मुसलमान हिन्दू और हिन्दुत्व के विरुद्ध इतने अपमानित शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेगा, जिन अपमानित शब्दों को शाहीन बाग़ों में इस्तेमाल कर नौटंकियां की जा रही थीं।  

संविधान की दुहाई, देशहित की बात करने वाले, गंगा-जमुनी तहजीब का ढोंगी नारा लगाने वालों की छद्दम धर्म-निरपेक्षता का नकाब हटना शुरू हो गया है। अब जनता को इनकी असलियत देख कर इन पार्टियां का बहिष्कार ही नहीं, वोट देने से बचे। ये लोग देशवासियों से अधिक घुसपैठियों के सगे हैं। 

उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने पिछले दिनों दो रोहिंग्या भाइयों को गिरफ्तार किया था। दोनों रोहिंग्याओं की अवैध एंट्री करवाकर उन्हें बसाने, उनके लिए रोजगार और फर्जी दस्तावेज तैयार करवाने तक का काम करते थे। अब एटीएस ने बांग्लादेशी बाप-बेटे की एक जोड़ी को गिरफ्तार किया है। बाप-बेटे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराकर उन्हें यूपी में बसाने में संलिप्त थे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार एटीएस ने सहारनपुर से उमर मुहम्मद उस्मानी और उसके बेटे तनवीर को गिरफ्तार किया है। बांग्लादेशी नागरिक उस्मानी ने पश्चिम बंगाल में अपना वोटर आईडी कार्ड भी बनवा रखा था। आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज भी बाप-बेटे के पास ​से मिले हैं। दोनों सहारनपुर की नदीम कॉलोनी में मुजफ्फर मस्जिद के पास रह रहे थे।

रिपोर्ट के अनुसार ये ठेके पर घुसपैठ कराते थे और कमीशन लेकर रोजगार की व्यवस्था करते थे। एटीएस आज (13 मार्च 2021) दोनों को लखनऊ की कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेगी। एटीएस के आईजी जीके गोस्वामी के हवाले से बताया गया है कि बाप-बेटे के गैरकानूनी तरीके से रहने और देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने को लेकर सूचना मिली थी। इसके बाद शुक्रवार को एटीएस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

दोनों मूल रूप से बांग्लादेश के कॉक्स बाजार के रहने वाले हैं। एटीएस ने उमर का भारतीय वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड और उसके बेटे तनवीर का आधार कार्ड, बांग्लादेश का नागरिक कार्ड, दो बांग्लादेशी सिम और पंजाब नेशनल बैंक की चेकबुक बरामद की है।

इससे पहले इसी महीने की शुरुआत में ATS ने नोएडा से रोहिंग्या हसन अहमद उर्फ मोहम्मद फारुख और उन्नाव से शाहिद को गिरफ्तार किया था। दोनों सगे भाई हैं। पूछताछ में पता चला था कि इनकी माँ और बहन अलीगढ़ में रहती हैं। इनके पास से 5 लाख रुपए व तमाम भारतीय दस्तावेज बरामद किए गए थे। दोनों भाई पहचान बदलकर रह रहे थे और सिंडीकेट के तहत रोहिंग्या को सूबे के कई जिलों में लाकर बसाने और काम दिलाने की गतिवधियों में लिप्त थे। फारुख ने स्वीकार किया था कि वह अपने भाई शाहिद के साथ मिलकर रोहिंग्याओं को बांग्लादेश बॉर्डर से भारत लाता था। दैनिक जागरण ने एटीएस अधिकारियों के हवाले से बताया है कि हसन जिस सिंडीकेट से जुड़ा था, उसमें शामिल कई लोगों से बांग्लादेशी उमर के भी सीधे संपर्क थे। अब इनके आपसी कनेक्शन और अन्य सहयोगियों की तलाश की जा रही है।

हाल ही में करीब 155 रोहिंग्या को जम्मू कश्मीर में होल्डिंग सेंटर में भेजा गया है। इनकी तत्काल रिहाई को लेकर रोहिंग्या की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (मार्च 11, 2021) को एक याचिका दायर की थी। इसमें शीर्ष अदालत से जम्मू-कश्मीर में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या को तुरंत रिहा करने और उन्हें प्रत्यर्पित करने के आदेश को लागू करने से केंद्र सरकार को रोकने की गुहार लगाई गई है। कथित तौर पर यह याचिका रोहिंग्या मोहम्मद सलीमुल्ला ने दायर की है और एडवोकेट चेरिल डीसूजा (Cheryl Dsouza) ने इसे तैयार किया है।