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विवेक हत्याकांडः विरोध करने वालों पर योगी सरकार सख्त


लखनऊ में हुए विवेक हत्याकांड के बाद सिपाहियों पर हुई कार्रवाई के बाद से लगातार पुलिसकर्मियों द्वारा सोशल मीडिया पर टिप्पणी की जा रही है. इसी कड़ी में अमेठी जिले के जामो थाने में तैनात थानाध्यक्ष गजेंद्र सिंह की तल्ख टिप्पणी वाली पोस्ट सार्वजनिक हुई है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि यूपी के कानून मंत्री ‘बृजेश पाठक और डिप्टी सीएम केशव मौर्या को अपने यहां से पुलिस सुरक्षा हटाकर प्राइवेट गार्ड रख लेना चाहिए. दोमुहा नजरिया ठीक नहीं है. फेसबुक पर वायरल हुई यह पोस्ट ने बाद एसपी अनुराग आर्य ने थानेदार को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया. साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट की जांच अपर पुलिस अधीक्षक के साथ ही साइबर सेल को भी सौंप दी है.
इस मामले में एसपी अनुराग आर्य ने बताया कि सोशल मीडिया पर चल रहे संदेश का विश्लेषण कराया जाएगा. जिले में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है. कोई भी पुलिसकर्मी अगर अनुशासनहीनता करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल थानेदार गजेंद्र सिंह की फेसबुक वाल से अब उक्त पोस्ट हटा ली गई है. एसपी ने कहा कि थानेदार को लाइन हाजिर कर दिया गया है. वहीं जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
विवेक तिवारी हत्याकांड में बर्खास्त सिपाहियों प्रशांत चौधरी व संदीप कुमार के पक्ष में खड़े हो रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ शुक्रवार को विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ के तीन थानेदारों को हटा दिया गया और इन्हीं थानों के तीन सिपाहियों को निलंबित भी किया गया। इसके साथ ही वाराणसी व मीरजापुर में दो बर्खास्त सिपाही भी गिरफ्तार कर लिए गए। दरअसल इस मामले में पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह का अनुशासन का डंडा बेजान निकला। गुरुवार को की गई उनकी अपील के बाद भी सिपाहियों ने शुक्रवार को काली पट्टी बांधकर अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाल दीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार शाम मुख्य सचिव अनूपचंद्र पांडेय, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार व डीजीपी ओपी सिंह को तलब कर तस्वीरों व कार्रवाई के बारे में पूरी जानकारी ली। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने डीजीपी से कड़ी नाराजगी जताई। 
अकेले मेरी जिम्मेदारी नहीं 
डीजीपी मुख्यालय में शुक्रवार को हुई पुलिस अधिकारियों की साप्ताहिक बैठक में भी सिपाहियों में पनप रहे असंतोष का मुद्दा छाया रहा। सूत्रों के अनुसार डीजीपी ने अधीनस्थ अधिकारियों से कहा कि यह अकेले उनकी जिम्मेदारी नहीं है। आप लोग भी पुलिसकर्मियों के बीच जाकर सीधे संवाद करें और उनकी समस्याओं को समझें। 
तस्वीरें वायरल होने के बाद इसके नतीजे में अन्य शहरों से भी काली पट्टी बांधे जाने की खबरें आने लगीं। दोपहर बाद तीन महिला सिपाहियों की भी ऐसी ही फोटो सोशल मीडिया पर चलने लगी। इन घटनाओं ने ही डीजीपी के नेतृत्व पर सवालिया निशान लगा दिया। डीआइजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार त्रिपाठी के अनुसार लखनऊ में नाका, अलीगंज व गुडंबा थानों की वायरल तस्वीरें सही पाई गईं लिहाजा अलीगंज इंस्पेक्टर अजय कुमार यादव, इंस्पेक्टर गुडंबा धर्मेश कुमार शाही व इंस्पेक्टर नाका परशुराम सिंह को शिथिल पर्यवेक्षण (काम में ढिलाई) के लिए उनके पदों से हटा दिया गया। पुलिसकर्मियों में असंतोष फैलाने के दोषी अलीगंज थाने के सिपाही जितेंद्र कुमार वर्मा, गुडंबा थाने के आरक्षी सुमित कुमार व नाका कोतवाली के सिपाही गौरव चौधरी को निलंबित कर दिया गया है। लखनऊ, सीतापुर सहित कई अन्य जिलों की तस्वीरें भी वायरल हुई हैं, जिनके बारे में जांच की जा रही है।
कई तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ 
प्रवीण त्रिपाठी के अनुसार कई तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करके भी उनको वायरल किया जा रहा है। कई पुरानी फोटो भी वायरल हो रही हैं। जांच में जो फोटो सही पाई गई हैं, उनमें शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जायेगी। कुछ स्थानों पर पुलिसकर्मियों ने हाथ में काली पट्टी बांधकर फोटो खिंचवाने के बाद तस्वीर वायरल की और फिर पट्टी उतार दी थी। हजरतगंज कोतवाली में दर्ज कराये गये मुकदमे के तहत सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों व पोस्टों की जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को विवेक हत्याकांड के आरोपित सिपाही के पक्ष में फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले एटा में तैनात 2011 बैच के सिपाही सर्वेश चौधरी को निलंबित किया गया था। 

एपल मैनेजर हत्याकांड: फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पलटकर रख दी पूरी कहानी

मृतक एपल मैनेजर विवेक तिवारी (बाएं), आरोपी कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी
मृतक एपल मैनेजर विवेक तिवारी (बाएं), आरोपी कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी
28 सितंबर की देर रात इसी कार में थे विवेक, जिस पर कॉन्स्टेबल प्रशांत ने गोली चलाई थी।
28 सितंबर की देर रात इसी कार में थे विवेक,
 जिस पर कॉन्स्टेबल प्रशांत ने गोली चलाई थी।
एपल मैनेजर हत्याकांड मामले में सामने आई फॉरेंसिक रिपोर्ट ने कहानी पलटकर रख दी है। रिपोर्ट से हत्याकांड के मेन आरोपी कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी की वो दलील खारिज होती दिख रही है, जिसमें उसने विवेक द्वारा तीन बार कुचलने के प्रयास के बाद सेल्फ डिफेंस में गोली चलाने की बात कही थी। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाइक से उतरते ही विवेक पर प्रशांत ने पिस्टल तानी होगी। जिससे घबराकर मैनेजर ने भागने की कोशिश की होगी। रिपोर्ट यह भी कहती है कि गोलीकांड के बाद कॉन्स्टेबल की बाइक और विवेक की कार में तोड़फोड़ की गई है। फिलहाल, फॉरेंसिक रिपोर्ट के हिसाब से जानते हैं आखिर क्या हुआ होगा उस रात।
कार के बोनेट से की गई छेड़छाड़
कार के बोनेट से की
गई छेड़छाड़
28 सितंबर की देर रात गोमतीनगर इलाके में एपल मोबाइल लॉन्चिंग कार्यक्रम से लौटने के दौरान कॉन्स्टेबल प्रशांत की गोली से एपल सेल्स मैनेजर विवेक की मौत हो गई थी।
फॉरेंसिक टीम के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कॉन्स्टेबल प्रशांत ने विवेक की कार से तकरीबन ढाई से तीन फीट आगे बाइक खड़ी की।
इसके बाद हाथ में पिस्टल लिए विवेक की ओर पहुंचा। लेकिन उसने कार का शीशा नहीं उतारा। पिस्टल देख विवेक घबराया होगा और डर से भागने की कोशिश में कार आगे बढ़ा दी।
घबराहट में विवेक ने कार की स्टीयरिंग पूरी तरह से घुमाई, लेकिन बाइक पास खड़ी होने से कार का बायां पहिया बाइक के अगले पहिए से टकराया और बाइक गिर गई।
लेकिन विवेक को जाने नहीं देना चाहता था प्रशांत: एक्सपर्ट
फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक, बाइक से टकराने के बाद विवेक ने कार बैक कर फिर से आगे बढ़ाई। लेकिन प्रशांत उसे भागने नहीं देना चाहता था।
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लखनऊ में हुए विवेक हत्याकांड के बाद सिपाहियों पर हुई कार्रवाई के बाद से लगातार…
इस कारण प्रशांत पिस्टल तानकर कार के सामने आ गए। फिर फायर करने के इरादे से ट्रिगर दबा दी। जिसके बाद गोली विंड स्क्रीन को चीरते हुए सीधे विवेक की ठोड़ी में जा लगी।
हत्याकांड की इकलौती गवाह सना ने बताया था, सफेद अपाचे सवार दो कॉन्स्टेबल गुस्से में हमारी कार की ओर आए। फिर कार के सामने बाइक खड़ी कर दी। वो हमें रोकना चाहते थे। हमें पता नहीं था कि आखिर हमें क्यों रोका जा रहा है।
एक्स्पर्ट्स का कहना है, जिस दूरी से खड़े होकर प्रशांत ने विवेक पर गोली चलाई थी बुलेट उसकी गर्दन को चीरती हुई पार हो जाती। लेकिन विंड स्क्रीन में टकराने के बाद रेंज कम हो गया और गोली गर्दन में फंसी रह गई।
प्रशांत के पास 9 एमएम पिस्टल थी। जो 50 मीटर तक इफेक्टिव फायर कर सकती है। हालांकि, इसकी अधिकतम रेंज 1800 मीटर है।
हड़बड़ी में पुलिस ने छोड़ दिए कई सुराग
वारदात को सेल्फ डिफेंस का रूप देने के लिए पुलिस ने स्क्रिप्टिंग करना शुरू कर दी थी। लेकिन इस दौरान कई बड़ी गलती कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, उस रात मौके पर पड़ी बाइक में कार के बंपर के नीचे लगे सपोर्टर को फंसा दिखाया गया।
जबकि फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि बंपर में अगर बाइक फंसती, तो वह घिसटती जाती या फिर कार उसके ऊपर से होकर निकल जाती। लेकिन कार के नीचे से ऐसे कोई निशान नहीं मिले, जिससे कॉन्स्टेबल के बयान पर मुहर लगे।
मतलब, घटना के बाद बाइक से तोड़फोड़ की गई। यह भी कहा जा रहा है कि विवेक की कार से भी तोड़फोड़ की गई थी। पिलर से टकराने के बाद की फोटो और दूसरे दिन की तस्वीर में अंतर है।

विवेक तिवारी हत्याकाण्ड: सर में जितनी जान थी वो बचाने में लगे रहे

sana khanएप्पल कंपनी में एएसएम पद पर तैनात विवेक तिवारी अब इस दुनिया में नहीं है। बीते शुक्रवार(सितम्बर 28) की रात मोबाइल लॉन्चिंग के कार्यक्रम के बाद उनकी जिंदगी की पटकथा पर पूर्णविराम लगाने वाली घटना इंतजार कर रही थी। उनके साथ मौजूद रही एकमात्र चश्मदीद गवाह लड़की ने बताया कि सिपाही प्रशांत ने सामने से विवेक को गोली मारी। उसने दावा किया कि घटना के समय वहां कुछ ट्रक वाले भी मौजूद थे लेकिन उन्होंने कोई मदद नहीं की।यूपी पुलिस के एक कॉन्सटेबल प्रशांत चौधरी की सनक की वजह से उनकी जान चली गई। प्रशांत चौधरी अपने बयान के जरिए मामले को उलझाने की कोशिश करता रहा। लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ है विवेक तिवारी की थुड्डी की बाईं तरफ गोली मारी गई थी। इन सबके बीच विवेक तिवारी के साथ कार में मौजूद उनकी दोस्त ने उन हालातों का जिक्र किया जिसे सुनकर आप को दर्द होगा, गुस्सा आएगा और शब्दों के जरिए आप अपनी भड़ास निकाल सकते हैं। 
'बेदम है पुलिस की थ्योरी'
मृतक विवेक तिवारी की दोस्त बताती हैं कि पुलिस की इस थ्योरी में दम नहीं है जिसमें पुलिस का कहना था कि प्रशांत चौधरी ने जिस वक्त गोली चलाई उस समय कार रुकी हुई थी। सच तो ये है कि गोली लगने के बाद भी विवेक तिवारी ने उसे बचाने के लिए कार चलाते रहे। कुछ सफर तय करने के बाद कार एक खंबे से टकरा गई और विवेक सीट पर पीछे की तरफ गिर गए और उनका सिर एक तरफ लुढ़क गया। उस वक्त भी उनकी सांसें चल रही थी। 
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एपल मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने लखनऊ पुलिस की स्क्रिप्टेड कहानी की धज्जियां ....

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए साक्षात्कार में विवेक की दोस्त बताती हैं कि जितनी भी जान  उनमें बची थी, उतने में वो गाड़ी आगे बढ़ाते गए। वो बताती हैं कि पुलिस और मीडिया के कुछ हिस्सों में जो खबरें चल रही है कि कार रुकी थी पूरी तरह गलत है। सड़क के मध्य में कार नहीं चल रही बल्कि सड़क के बाएं हिस्से में कार थी और सिपाहियों को भड़काने वाला काम उन लोगों की तरफ से नहीं किया गया था।

मृतक विवेक की दोस्त बताती हैं कि कार को उस तरह से नुकसान नहीं पहुंचा था जो खबरों में बताया या दिखाया जा रहा था। अगर कार को नुकसान पहुंचता तो उसे खुद चोट लगती। विवेक की दोस्त कहती हैं कि जब वो आंखें बंद करती हैं तो पूरा सीन उनके सामने नजर आने लगता है। पिछले चार दिनों से वो ठीक से सो नहीं पा रही हैं और ना ही कुछ खाया है। 

एपल मैनेजर हत्याकांड: PM रिपोर्ट ने लखनऊ पुलिस की स्क्रिप्टेड कहानी की उड़ाई धज्जियां

कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी और मृतक विवेक की फैमिलीएपल मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने लखनऊ पुलिस की स्क्रिप्टेड कहानी की धज्जियां उड़ा दी हैं। उनके मुताबिक, विवेक ने कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी को कार से कुचलने की कोशिश की थी। कॉन्स्टेबल ने महज सेल्फ डिफेंस में गोली चलाई थी। जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है कि विवेक पर गोली ऊपर से नीचे की ओर चलाई गई थी। मतलब, साफ है कि कॉन्स्टेबल सेफ जगह पर था और उसने सिर्फ तैश में आकर फायर किया था।
ये है उस रात की हकीकत
28 सितंबर की देर रात गोली चलाते वक्त कॉन्स्टेबल प्रशांत डिवाइडर पर खड़ा था। मतलब, उसे किसी तरह की जान का खतरा नहीं था। विवेक द्वारा कार से कुचलने की बात स्क्रिप्टेड थी।
अक्टूबर 1 को चश्मदीद सना खान ने अपने बयान में साफतौर पर कहा, जिस कॉन्स्टेबल (प्रशांत) ने विवेक की कार पर फायर किया था वो डिवाइडर पर खड़ा था।
गोमतीनगर विस्तार में जो डिवाइडर बने हैं, उसकी ऊंचाई करीब एक से डेढ़ फीट के करीब है। मतलब, डिवाइडर पर खड़े होने से कॉन्स्टेबल कार की ऊंचाई से अधिक ऊंचाई पर था। इससे पता चलता है कि आरोपी कॉन्स्टेबल प्रशांत ने सिर्फ और सिर्फ तैश में आकर विवेक पर गोली चलाई थी। 
उस रात गाड़ी नहीं रोकने के सवाल पर सना का कहना था- रात का वक्त था और कोई भी आदमी जिसके साथ कोई महिला हो, दोस्त हो या बहन हो बीवी हो, वो गाड़ी नहीं रोकता। विवेक को भी उस वक्त गाड़ी रोकना सही नहीं लगा। उन्होंने बस साइड से गाड़ी निकालने की कोशिश की थी। थोड़ी ही देर बाद कॉन्स्टेबल ने फायर कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से क्या खुलासा हुआ?
विवेक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुलिस का झूठ सामने आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक पर गोली ऊपर से नीचे की दिशा में चली थी जो विवेक की कुलीग सना के बयान की पुष्टि करती है।
मतलब, साफ है कि विवेक पर गोली चलाने वाला ऊंचाई पर खड़ा था और फायर करते हुए उसका हाथ नीचे की ओर झुका हुआ था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉन्स्टेबल की गोली विवेक की ठोढ़ी पर लगते हुए नीचे गर्दन में जाकर फंस गई।
विवेक पीछे छोड़ गए पत्नी और दो बच्चे
मृतक विवेक तिवारी सुलतानपुर के शंकरपुरम करौंदिया के रहने वाले थे। उनके पिता उदय नारायण बैंक में मैनेजर रहे हैं। विवेक दो भाई हैं। दूसरा भाई नीरज उनसे छोटा है। पत्नी ने बताया, विवेक एपल कंपनी में एरिया मैनेजर पद पर कार्यरत थे। विवेक घर में पत्नी कल्पना, बेटी शिवी और सानू के साथ रहते थे। वे 4 साल से एपल कंपनी में एरिया सेल्स मैनेजर थे।

विवेक तिवारी की हत्या पर टिप्पणी के बाद केजरीवाल के खिलाफ शिकायत दर्जविवेक तिवारी की हत्या पर टिप्पणी के बाद केजरीवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज

एपल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल धार्मिक रंग देने की टिप्पणी पर घिर गए हैं। दिल्ली के एक वकील अश्विनी उपाध्याय ने केजरीवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। वकील ने तिलक मार्ग पुलिस थाने में केजरीवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A, 295A, 504 और 505 के अलावा आईटी सेक्शन की धारा 67 के तहत जाति धर्म के नाम पर वैमनस्य फैलाने और भाजपा नेताओं को बदनाम करने की शिकायत दर्ज हुई है।
केजरीवाल ने पूरे मामले को सांप्रदायिक एंगल दे दिया था जिसके बाद इस पर भाजपा ने जहां उन्हें आड़े हाथों लिया वहीं सोशल मीडिया ने भी उन्हें आईना दिखा दिया। लोगों ने इस कृत्य पर केजरीवाल को जम कर खरी खोटी सुनाई। इसके बाद केजरीवाल देर शाम तक अपने ट्वीट पर सफाई देते दिखे। केजरीवाल ने सितम्बर 30 को ट्वीट कर सवाल किया था कि विवेक तिवारी हिंदू थे तो फिर उन्हें क्यों मार दिया। 
उन्होंने कहा कि भाजपा ने एक हिंदू के हितों की रक्षा नहीं की। इसके बाद केजरीवाल ने मृतक विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी से फोन पर बात की। 
लेकिन यही केजरीवाल उस समय मौन व्रत धारण किये हुए थे, जब इनके वोट बैंक(मुसलमानों) ने विकासपुरी, दिल्ली में डॉ नारंग की हत्या कर दी थी। 
उधर, केजरीवाल के इस हत्याकांड को हिंदू की हत्या बताने के बाद दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्वीट कर कहा कि केजरीवाल घटिया राजनीति न करें।
दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि विवेक तिवारी की हत्या हुई है और कसूरवार को सजा मिलेगी। हम उनके परिवार के साथ खड़े हैं। ऐसे में दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा हत्या को सांप्रदायिक रंग देना उनकी ओछी मानसिकता का प्रतीक है।