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केरल : वायनाड के किसान ने धान के खेत में उकेरी प्रधानमंत्री की तस्वीर


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। देश की जनता उनसे बेशुमार प्रेम करती है। प्रधानमंत्री मोदी 140 करोड़ से अधिक लोगों के दिल में बसते हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी के प्रति प्रेम ही है कि केरल के वायनाड जिले में बाथरी गांव के किसान थायिल प्रसीद ने अपनी रचनात्मकता का अनोखा उदाहरण पेश करते हुए अपने हरे-भरे धान के खेतों को एक विशाल जीवंत कलाकृति में बदल दिया है। प्रधानमंत्री मोदी के 75वें जन्मदिन पर उपहार स्वरूप उन्होंने धान की विभिन्न किस्मों से एक भव्य ‘पोर्ट्रेट आर्ट’ तैयार की। यह कलाकृति उनके 40 मीटर लंबे और 30 मीटर चौड़े खेत में फैली हुई है। प्रसीद ने 31 अगस्त 2025 को इस ‘लिविंग कैनवास’ की प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने धान के पौधों की बारीकी से रोपाई की ताकि उनके बढ़ने पर प्रधानमंत्री मोदी की छवि खेत में उभर सके। जैसे-जैसे पौधे बढ़ते गए, प्रधानमंत्री का छवि उभरती गई। लगभग 20 दिनों में खेत में हरे, सुनहरे और भूरे रंग के धान के पौधे इस अंदाज में विकसित हुए कि दूर से देखने पर प्रधानमंत्री का चेहरा साफ दिखाई देने लगा।

बेटे की शादी में मेहमानों से गिफ्ट में मांगा पीएम मोदी के लिए वोट
यह पीएम मोदी के प्रति लगाव ही है कि तेलंगाना के संगारेड्डी के नंदीकांति नरसिंहलू और निर्मला ने अपने बेटे की शादी में मेहमानों से गिफ्ट में नरेन्द्र मोदी के लिए वोट मांगा। नंदीकांति नरसिंहलू और निर्मला के बेटे साईं कुमार की शादी 4 अप्रैल, 2024 को हुई। साईं कुमार की शादी के लिए एक छपवाए गए निमंत्रण पत्र में उन्होंने एक अनोखा संदेश लिखवाया। शादी के कार्ड पर उन्होंने मेहमानों से गिफ्ट की जगह लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी को वोट देने का आग्रह किया। शादी के निमंत्रण पत्र पर लिखा गया- नरेन्द्र मोदी जी को आपका वोट ही इस शादी का गिफ्ट है। इस लाइन के ऊपर प्रधानमंत्री मोदी का फोटो लगा था और उनकी तस्वीर के बगल में हल्दी लगाई गई थी। शादी का यह कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

प्रधानमंत्री के कटआउट को पहनाया पारंपरिक परिधान फेरन
प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों के कारण जम्मू-कश्मीर में विकास की बहार बहने लगी है। राज्य में शांति बहाल होने से आम लोगों के जीवन में खुशहाली आई है। इलाके शांति-अमन आने से स्थानीय लोग काफी खुश हैं। ऐसे में फेरन डे के अवसर पर श्रीनगर के लालचौक पर घंटाघर के पास एक कश्मीरी युवा जमाल बडगामी उर्फ जमाल कश्मीरी ने प्रधानमंत्री मोदी के कटआउट को ना सिर्फ स्थानीय पारंपरिक परिधान फेरन पहनाया बल्कि उनके चेहरे को चूम कर अपना आभार भी जताया। कटआउट को किस करने के बाद जमाल ने कहा कि आजादी के बाद हमने ऐसा प्रधानमंत्री नहीं देखा है। मोदी जी किसी अवतार से कम नहीं हैं। युगों के बाद ऐसे लोग आते हैं। उन्होंने सारी दुनिया में भारत का सर ऊंचा किया है।

मोदी के लिए रखा उपवास, ट्रक ड्राइवरी छोड़ थामा झाडू
हरियाणा के चरखी दादरी के कारी मोद गांव के रहने वाले 71 साल के रामचंद्र स्वामी प्रधानमंत्री मोदी को भगवान कृष्ण और खुद को गरीब सुदामा बताते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होकर रामचंद्र स्वच्छाग्रही बनकर दूसरों के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं। उनकी मेहनत और समर्पण को देखते हुए कई पंचायतें उन्हें प्रशस्ति-पत्र दे चुकी हैं। वहीं गुजरात में भी स्वच्छता अभियान के लिए उन्हें कई बार प्रमाण-पत्र मिल चुका है।नदरअसल रामचंद्र स्वामी एक ट्रक ड्राइवर थे। अक्सर ट्रक लेकर गुजरात आते-जाते थे। गुजरात में विकास कार्यों से प्रभावित होकर उनके मन में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आस्था जगी। जब 2014 के आम चुनाव के लिए बीजेपी ने नरेन्द्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया तो उन्हें खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने उनके प्रधानमंत्री बनने की कामना करते हुए तीन महीने नौ दिन का उपवास रखा। करोड़ों लोगों की तरह रामचंद्र की भी कामना पूरी हुई और नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री निर्वाचित हो गए। इससे रामचंद्र का प्रधानमंत्री मोदी में अटूट आस्था बन गई,जो आज भी बनी हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की तो रामचंद्र ने ट्रक स्टेयरिंग छोड़कर हाथ में झाड़ू थाम लिया और स्वच्छता अभियान में जुट गए। बीते नौ सालों से रामचंद्र नि:स्वार्थ भाव से स्वच्छता का कार्य कर रहे हैं। अपनी एक ओमिनी कार में हमेशा अपने साथ एक झाड़ू रखते है और अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर मुख्य बाजारों, चौक-चौराहों के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर सफाई में जुटे रहते हैं। रामचंद्र ने हरियाणा के अलावा गुजरात में कई स्थानों पर लगातार स्वच्छता अभियान चलाया है।

100 वर्ष की बुजुर्ग महिला अपने सबसे प्यारे बेटे पीएम मोदी के नाम करना चाहती है 25 बीघा जमीन
प्रधानमंत्री मोदी जहां 140 करोड़ देशवासियों की उम्मीद है, वहीं गरीब बुजुर्गों के लिए बुढ़ापे का सबसे मजबूत सहारा है। उन्होंने अपनी गरीब कल्याण नीतियों और योजनाओं के माध्यम से गरीब बुजुर्गों को वो सारी सुख-सुविधाएं मुहैया कराई हैं, जिसकी सबसे अधिक जरूरत बुढ़ापे में होती है। जो बुजुर्ग शारीरिक रूप से असमर्थ है, उनका भी मोदी सरकार में पूरा ख्याल रखा जा रहा है। उनके जीवन में खुशहाली लाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। इसका परिणाम है कि मध्य प्रदेश की एक सौ साल की बुजुर्ग महिला प्रधानमंत्री मोदी पर अपनी ममता लूटा रही है। 14 बच्चों की माता होते हुए भी प्रधानमंत्री मोदी को अपना सबसे प्यारा बेटा मानती है। वो अपना 25 बीघा जमीन अपने इस प्यारे बेटे के नाम कर देना चाहती है। 

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के छोटे से गांव हरिपुरा जागीर में रहने वाली मांगीबाई तंवर प्रधानमंत्री मोदी को अपने बेटे की तरह मानती है। इस बात की जानकारी उस समय हुई,जब विकासकारी योजनाओं के पत्रक लेकर बीजेपी कार्यकर्ता मांगीबाई तंवर के घर पहुंचे। इस दौरान पत्रक लेकर मांगीबाई तंवर ने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी योजनाओं के बारे में जो कुछ कहां उसे सुनकर बीजेपी कार्यकर्ता हैरान थे। उन्होंने बुजुर्ग महिला के साथ बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो देखते-देखते वायरल हो गया। वीडियो में बुजुर्ग महिला को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि मोदी जी गेहूं, चावल, खाद-बीज देते हैं। फसल खराब होने पर मुआवजा देते हैं। बीमार पड़ने पर इलाज कराते हैं। उन्हें सरकार ने तीर्थ यात्रा करवाई। रहने के लिए घर दिया और विधवा पेंशन भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मैं अपनी 25 बीघा जमीन मोदी जी के नाम करना चाहती हूं, क्योंकि उनके 14 बेटे हैं, लेकिन जितना काम उनके बेटे कर रहे हैं, उससे ज्यादा मोदी जी कर रहे हैं।

न्यूजीलैंड में एक बुजुर्ग मां ने पीएम मोदी पर लुटाई अपनी ममता
न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में इसकी एक और झलक देखने को मिली। जहां सौ साल की एक बुजुर्ग महिला प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर पर इस कदर अपनी ममता लुटाती नजर आईं, मानो प्रधानमंत्री मोदी उनके सामने मौजूद हों। बुजुर्ग महिला का ममत्व देखकर पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी लोगों के दिलों में बसते हैं। यह सब ऐसे नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे प्रधानमंत्री मोदी के अपने देशवासियों और भारत के प्रति समर्पण और अथक परिश्रम है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जनसेवा से लोगों का भरोसा जीता है। यह भरोसा और प्यार ही विभिन्न रूपों में देश और दुनिया में प्रदर्शित होता रहता है।

दरअसल रविवार (30 अप्रैल, 2023) को प्रधानमंत्री मोदी के रेडिया कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 100 वें एपिसोड का प्रसारण किया गया। भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात सुनने के लिए लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में भी प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात सुनने के लिए एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर प्रवासी भारतीयों ने हिस्सा लिया। इसमें 100 साल की एक बुजुर्ग महिला रमी बेन भी शामिल थी। प्रधानमंत्री मोदी की मन की बात सुनने के बाद बुजुर्ग महिला रमी बेन काफी भावुक हो गई। प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर पर अपनी ममता लुटाते हुए रमी बेन ने कहा कि खुश रहो। रमी बेन सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देते और बार-बार ‘सुखी रहो, सुखी रहो’ कहती नजर आईं। बुजुर्ग महिला रमी बेन को देखकर प्रधानमंत्री मोदी की मां हीराबेन की याद ताजा हो गई। बुजुर्ग महिला का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में गूंजा- मोदी है तो मुमकिन है!
भारत में ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रशंसक दुनियाभर में हैं। और अब पाकिस्तान भी पीएम मोदी का मुरीद हो गया जो पिछले 75 सालों से भारत से दुश्मनी मोल लेता रहा है और कश्मीर के नाम पर चार जंग कर चुका है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित एक कार्यक्रम में मुसलमानों और ईसाइयों सहित विभिन्न धार्मिक समुदायों के सदस्यों ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की। मेलबर्न में 23 अप्रैल को हुए विश्व सद्भावना कार्यक्रम में एक बार फिर यह साबित हुआ कि पीएम मोदी “दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता” क्यों हैं। इसमें पाकिस्तानी मुसलमान भी विभिन्न धार्मिक समुदायों के साथ शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभी समुदायों का सम्मान करने के लिए प्रशंसा की। ऑस्ट्रेलिया में पाकिस्तानी मुसलमानों ने कहा- “मोदी है तो मुमकिन है।” इससे पता चलता है कि पीएम मोदी के दीवाने पाकिस्तान में भी बहुत हैं। वहां के मुस्लिमों ने सद्भावना कार्यक्रम में पीएम मोदी का खूब गुणगान किया।

“हमें सिर्फ प्राइम मिनिस्टर मोदी चाहिए”
प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तान में भी काफी लोकप्रिय है। अगर पाकिस्तानियों की बातों पर यकीन करें तो वो पाकिस्तान में चुनाव लड़कर प्रधानमंत्री बन सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी और भारत की तरक्की से प्रभावित एक पाकिस्तानी ने अपने देश की मीडिया से बात करते हुए कहा कि 1947 में भारत का विभाजन नहीं हुआ होता। सारा पाक और हिन्द एक होता और टमाटर आज 20 रुपये किलो होता। चिकन 150 रुपये किलो और पेट्रोल 150 रुपये लीटर मिलता। उनकी बदकिस्मती है कि पाकिस्तान में मुसलमानों वाला कोई सिलसिला ही नहीं है। इससे अच्छ तो प्रधानमंत्री मोदी है, जिन्हें वहां की जनता काफी सम्मान देती है। प्रधानमंत्री मोदी अपने लोगों के लिए शमशेर हैं। हमें मोदी मिल जाए। हमें न नवाज शरीफ चाहिए, न बेनजीर चाहिए, न हमें इमरान खान चाहिए। कोई भी नहीं, हमें मुसर्रफ भी नहीं चाहिए। हमें सिर्फ प्राइम मिनिस्टर मोदी चाहिए, जो इस मुल्क के टेढ़ों को सीधा करें। इस मुल्क को ऊपर लेकर जाए।

जिस वायनाड ने राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा को ‘शरण’ देकर लोकसभा पहुँचाया, वहाँ एक-एक कर खुद की ही जान क्यों ले रहे कांग्रेस कार्यकर्ता? कांग्रेस ने कराया जॉब स्कैम, बेरोजगारों से की ठगी


केरल के वायनाड जिले में कांग्रेस पार्टी इन दिनों भारी संकट से जूझ रही है। यह वही इलाका है जहाँ पहले राहुल गाँधी सांसद थे और उन्होंने दो बार यहाँ से चुनाव जीता। बाद में उन्होंने सीट छोड़ दी और अपनी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा को यहाँ से सांसद बनवाया। लेकिन अब वायनाड कांग्रेस का गढ़ कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। पार्टी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता लगातार आत्महत्या कर रहे हैं या सुसाइड की कोशिश कर रहे हैं।

इन सब के पीछे जो वजह हैं, वो हैं- पार्टी के अंदरूनी कलह, भ्रष्टाचार, कर्ज के जाल और वादाखिलाफी। कई कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पार्टी के काम के लिए करोड़ों का लोन लिया था, पार्टी ने वादा किया था कि पैसे लौटाने में मदद करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। कर्ज चुकाने के दबाव में पिता-पुत्र ने जान दे दी, अब बहू ने भी सुसाइड नोट लिखकर पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हुए जान देने की कोशिश की।

कुछ दिन पहले ही एक नेता को फर्जी केस में फँसाया गया, जिसके बाद दूसरे नेता ने जान दे दी। ये घटनाएँ कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं। केरल की वायनाड लोकसभा सीट से राहुल-प्रियंका को लगातार चुनाव जिताने के चक्कर में कार्यकर्ता कर्ज के बोझ तले दब गए और अब जान देने को मजबूर हो रहे हैं। पार्टी ने कर्ज चुकाने का वादा किया था, लेकिन पिता-पुत्र की मौत के बाद भी मदद नहीं की। कर्जदार पैसे माँग रहे थे, तो बहू ने सुसाइड नोट में कांग्रेस को कातिल बताया। ये सब पार्टी की खराब व्यवस्था की वजह से हो रहा है। प्रियंका गाँधी ने हाल ही में वायनाड का दौरा किया, लेकिन इन मुद्दों पर चुप्पी साधे रही।

वायनाड में कांग्रेस ने कराया जॉब स्कैम, बेरोजगारों से की ठगी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहली बड़ी घटना दिसंबर 2024 की है, जब पूर्व डिस्ट्रिक्ट कांग्रेस कमिटी (डीसीसी) ट्रेजरर एनएम विजयन और उनके बेटे जिजेश ने आत्महत्या कर ली। विजयन लंबे समय से कांग्रेस के वफादार कार्यकर्ता थे। उन्होंने पार्टी के काम के लिए करीब 2.5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।

ये कर्ज सुल्तान बाथेरी कोऑपरेटिव बैंक में नौकरियों के नाम पर लिया गया था। उन पर पार्टी के जिलाध्यक्ष एनडी अप्पाचन, पूर्व डीसीसी प्रेसिडेंट आईसी बालाकृष्णन एमएलए, पूर्व ट्रेजरर केके गोपीनाथन मास्टर और अन्य ने घोटाला करने के लिए दबाव डाला। उनसे जॉब के बदले कैश स्कैम कराया। लोग नौकरी के लिए लाखों रुपये देते थे, लेकिन नौकरी नहीं मिली। स्कैम फेल हो गया तो सारा बोझ विजयन पर आ गया।

विजयन ने अपनी संपत्ति गिरवी रख दी, लेकिन कर्ज चुकाने के लिए पैसे नहीं बचे। पार्टी ने वादा किया था कि कर्ज की जिम्मेदारी लेगी, लेकिन सिर्फ थोड़ी मदद की। केरल प्रदेश कांग्रेस कमिटी (केजेपीसीसी) ने कहा कि वो बाइंडिंग एग्रीमेंट नहीं था, सिर्फ मानवीय मदद है। विजयन ने 25 दिसंबर 2024 को जहर खाकर सुसाइड की कोशिश की, उनके बेटे जिजेश ने भी ऐसा ही किया। दोनों 27 दिसंबर को मर गए।

विजयन ने अपने सुसाइड नोट में सीधे अप्पाचन, बालाकृष्णन और गोपीनाथन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने लिखा कि इन नेताओं ने उन्हें फँसाया और अब मदद नहीं कर रहे। परिवार का कहना है कि विजयन ने पार्टी के लिए सब कुछ किया, लेकिन बदले में धोखा मिला।

पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर एमएलए बालाकृष्णन और तीन अन्य पर एबेटमेंट टू सुसाइड का केस दर्ज किया। लेकिन पार्टी ने इन नेताओं को अभी तक कोई सजा नहीं दी। परिवार आज भी कर्ज के बोझ तले दबा है। विजयन के बेटे ने कहा कि पिता ने पार्टी को बचाने के लिए खुद को झोंक दिया, लेकिन पार्टी ने पीठ दिखा दी। ये केस दिखाता है कि कैसे कांग्रेस पार्टी के अंदर के भ्रष्टाचार ने विजयन और उनके बेटे की जान ले ली।

बदनामी से परेशान नेता को देनी पड़ी जान

दूसरी घटना 12 सितंबर 2025 की है, जिसमें मुल्लानकोली पंचायत सदस्य जोस नेलेडम ने आत्महत्या कर ली। जोस कांग्रेस के स्थानीय नेता थे और मुल्लानकोली ग्राम पंचायत के वॉर्ड मेंबर थे। उनकी मौत पार्टी के अंदरूनी कलह की वजह से हुई।

दरअसल, कुछ दिन पहले जुलाई में एक डेवलपमेंट सेमिनार में डीसीसी प्रेसिडेंट अप्पाचन पर हमला हुआ था। ये फैक्शनल फाइट का नतीजा था। उसके बाद कनत्तुमालयिल थंकाचन, जो मारक्काडावु के लोकल कॉन्ग्रेस नेता हैं, को अवैध शराब और कंट्री बॉम्ब्स के केस में गिरफ्तार किया गया। थंकाचन 17 दिनों तक जेल में रहे। बाद में पुलिस ने कोर्ट में कहा कि केस फर्जी था और थंकाचन को रिहा कर दिया।

थंकाचन ने आरोप लगाया कि अप्पाचन गुट ने उन्हें फंसाया, जिसमें जोस भी शामिल थे। इसके बाद जोस पर साइबर अटैक शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर उन्हें बदनाम किया गया, अपमानित किया गया। जोस ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उन्होंने कहा कि पार्टी ने उनका साथ नहीं दिया। सुसाइड से पहले जोस ने जहर खाया, कलाई काटी और तालाब में कूद गए। पड़ोसी ने उन्हें पाया और हॉस्पिटल ले गए, लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई।

सुसाइड नोट में जोस ने लिखा, “पार्टी ने संकट में साथ नहीं दिया, साइबर अटैक ने तोड़ दिया।” डीसीसी प्रेसिडेंट अप्पाचन ने माना कि पार्टी के अंदर ताकतें जिम्मेदार हैं। लेकिन पार्टी ने इसे कवर-अप करने की कोशिश की। मलयाला मनोरमा और मथ्रुभूमि जैसे अखबारों में जोस के नोट को छिपाया गया। ये सब कुछ प्रियंका गाँधी के वायनाड दौरे के समय हुआ, लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी।

विजयन की परेशान बहू ने दी जान देने की कोशिश

वायनाड की तीसरी घटना 13 सितंबर 2025 की है, जब एनएम विजयन की बहू पद्मजा ने सुसाइड की कोशिश की। पद्मजा 2024 में आत्महत्या कर लेने वाले विजयन की बहू हैं। उन्हें उनका बेटा प्राइवेट हॉस्पिटल ले गया।

सुसाइड नोट में पद्मजा ने लिखा, “किलर कांग्रेस, यहाँ एक और विक्टिम।” उन्होंने कहा कि पार्टी ने कर्ज नहीं चुकाया, जिसकी वजह से परिवार टूट रहा है। पद्मजा ने 12 सितंबर को मीडिया से कहा था कि पार्टी ने 30 जून 2025 तक 2.5 करोड़ का कर्ज चुकाने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ 20 लाख दिए।

पद्मजा ने एमएलए टी सिद्दीक पर भी आरोप लगाया कि वो लिखित वादों को पूरा नहीं कर रहे। अस्पताल बिल तक के पैसे नहीं दे रहे। प्रियंका गाँधी ने परिवार को सपोर्ट का आश्वासन दिया था, लेकिन 13 सितंबर को वायनाड विजिट के दौरान भी नहीं मिलीं। पद्मजा ने पूछा, “क्या हमें मरना पड़ेगा तभी कांग्रेस को आँखें खुलेगी?”

                                            अस्पताल में पद्मजा (फोटो साभार: Deshabhimani)

पद्मजा ने एक ऑडियो क्लिप जारी की, जिसमें थिरुवनचूर राधाकृष्णन कह रहे हैं कि पार्टी को कर्ज चुकाना चाहिए था। लेकिन पार्टी कह रही है कि कुछ कर्ज सेटल हो गया। ये सुसाइड अटेम्प्ट ने वायनाड में विरोध प्रदर्शन भड़का दिए।

आत्महत्या के कम से कम 5 मामले, लेकिन राहुल-प्रियंका ने साधी चुप्पी

वायनाड में कांग्रेस का ये संकट नया नहीं है। पिछले दशक में कम से कम पाँच कार्यकर्ताओं ने आत्महत्या की है। 2015 में पीवी जॉन, मनांथावादी ब्लॉक कांग्रेस कमिटी के प्रेसिडेंट ने पार्टी ऑफिस में ही फाँसी लगा ली थी। वो लोकल बॉडी इलेक्शन में हार के बाद अपमानित हो रहे थे। इसके अलावा साल 2023 में राजेंद्रन नायर ने सुसाइड किया, क्योंकि कांग्रेस कंट्रोल्ड प्राइमरी कोऑपरेटिव बैंक पुलप्पल्ली में उनके लैंड डॉक्यूमेंट्स का दुरुपयोग करके लोन लिया गया। पूर्व डीसीसी प्रेसिडेंट केएल पौलोस और जनरल सेक्रेटरी केके अब्राहम पर केस हैं। ये सभी घटनाएँ फैक्शनल फाइट, भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी से जुड़ी हैं।

                                   पीवी जॉन, NM विजयन और बेटा जितेश (फोटो साभार: OnManorama)

प्रियंका बदलना चाहती हैं नेता, इतनी जान लेने बाद

प्रियंका गाँधी ने वायनाड की हालत पर नाराजगी जताई है। उन्होंने केपीसीसी से रिपोर्ट माँगी और डिस्ट्रिक्ट लीडरशिप चेंज की माँग की। अप्पाचन को हटाने की बात चल रही है। हटाए जाने वाले नामों में टीजे आइजैक और केई विनयान शामिल हैं। प्रियंका ने कहा कि मंडक्कई-चूरालमाला लैंडस्लाइड विक्टिम्स के लिए हाउसिंग प्रोजेक्ट में देरी हो रही है, क्योंकि डीसीसी साथ नहीं दे रही है। वो फंड्स जुटाने को तैयार थीं, लेकिन लोकल लीडर्स ने काम नहीं किया।

अंडरवर्ल्ड गैंग जैसी हो गई है कांग्रेस 

विपक्षी सीपीएम कह रहा है कि कांग्रेस अंडरवर्ल्ड गैंग जैसी हो गई है। सीपीएम लीडर एमवी जयराजन ने विजयन परिवार का कर्ज चुकाने का ऐलान किया। मंत्री वी शिवंकुट्टा ने कहा कि कांग्रेस मर्डर, सुसाइड एबेटमेंट और वायलेंस का प्रतीक है।

इन सबके बीच, कांग्रेस कार्यकर्ता निराश हैं। एक नेता ने कहा कि पार्टी ने अपना मास बेस खो दिया। केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) पंचायत इलेक्शन की तैयारी कर रहा है, लेकिन ये सुसाइड्स ने पार्टी को पैरालाइज्ड कर दिया।

कांग्रेस को अब अपनी कार्यप्रणाली सुधारनी होगी। कार्यकर्ता जो पार्टी के लिए जान देते हैं, उन्हें धोखा नहीं मिलना चाहिए। वायनाड जैसे ट्रेडिशनल स्ट्रॉन्गहोल्ड में ये संकट पार्टी की साख को बर्बाद कर रहा है। समाज को ऐसी पार्टी से उम्मीद नहीं करनी चाहिए जो अपने ही लोगों को मार डालती है। ये समय है कि कांग्रेस आँखें खोले और सुधार करे, वरना वायनाड में उनका गढ़ ढह जाएगा।

75 हजार रूपए में एक शव का अंतिम संस्कार, कपड़ों पर खर्च हुए 11 करोड़ रूपए : वायनाड की तबाही में भी ‘कमाई’ खोज रही केरल की वामपंथी सरकार

            केरल सरकार पर आपदा राहत में गड़बड़ी करने का आरोप लगा है (चित्र साभार: HT & Indiatoday)
केरल के वायनाड में भूस्खलन और बाढ़ के कारण हुई त्रासदी के राहत बचाव में किए गए खर्च के अनुमान पर वामपंथी सरकार घिर गई है। आलोचकों का कहना है कि केरल सरकार ने एक शव के अंतिम संस्कार के लिए 75000 रूपए खर्च कर दिए जबकि राहत बचाव कर्मियों के लिए टॉर्च और रेनकोट जैसी चीजें खरीदने पर 3 करोड़ 
रूपए खर्च हो गए। ये आँकड़े केरल वामपंथी सरकार द्वारा हाई कोर्ट में दिए गए एक कागज के आधार पर बताए गए हैं। हालाँकि, मुख्यमंत्री के दफ्तर ने इसका खंडन किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल हाई कोर्ट में वामपंथी सरकार ने वायनाड में राहत-बचाव कार्यक्रम सम्बन्धित एक हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में वित्तीय विवरण दिया गया है। इस हलफनामे में बताया गया कि वायनाड आपदा में जिन लोगों की मौत हुई, उनके अंतिम संस्कार के लिए 2.59 करोड़ रूपए के खर्च का अनुमान है।

इसके अलावा 4 करोड़ रूपए का खर्च अनुमान राहत एवं बचाव कर्मियों को यहाँ पहुँचाने के लिए बताया गया। इसके अलावा 10 करोड़ रूपए खर्च का अनुमान यहाँ राहत बचाव के काम के लिए पहुँचे सैनिकों और राहत बचावकर्मियों के रहने और खाने-पीने की बात कही गई। हलफनामे के अनुसार, भूस्खलन में फंसे लोगों को निकालने के लिए 15 करोड़ रूपए का खर्च का अनुमान है।

इसी हलफनामे में भूस्खलन से बचाए गए 4000 लोगों को कपड़े उपलब्ध करवाने पर खर्च किए जाने की बात कही गई है। इसी हलफनामे में कहा गया कि 8 करोड़ रूपए इन लोगों के मेडिकल और 3 करोड़ रूपए बाढ़ प्रभावित इलाके से पानी निकालने पर अनुमानित है। 17 करोड़ रूपए खर्च का अनुमान वायुसेना के विमान पर भी बताया गया।

इस हलफनामे के सामने आने के बाद केरल की वामपंथी सरकार घिर गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेन्द्रन ने कहा, “वायनाड भूस्खलन को लेकर केरल हाई कोर्ट में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा ‘राहत’ के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए खर्च से भ्रष्टाचार और हेराफेरी की बू आ रही है।”

उन्होंने आगे लिखा, “पिनाराई विजयन सरकार ने बेशर्मी से इस आपदा को पैसा हड़पने वाली योजना में बदल दिया है। जहाँ केरल के लोग वायनाड भूस्खलन पीड़ितों की मदद के लिए निस्वार्थ भाव से आगे आए, वहीं CPM सरकार ने इस त्रासदी का उपयोग अपने फायदे के लिए किया।”

केरल सरकार पर कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी वामपंथी सरकार पर हमला बोला है। वहीं वामपंथी सरकार इस मामले में बैकफुट है और मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले में एक प्रेस रिलीज जारी करके इन खबरों को गलत बताया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है जो कागज हाई कोर्ट को दिया गया है, उसमे इस आपदा होने वाली संभावित खर्च की जानकारी है और इसे केंद्र सरकार से सहायता लेने के लिए तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि यह कागज खर्चे प्रदर्शित नहीं करता और उन्होंने मीडिया से इस संबंध में सुधार की बात कही।

केरल : वायनाड पीड़ितों की मदद के नाम पर कांग्रेस नेता ने इकट्ठा किया चंदा दूसरी जगह लगा दिया: यूथ कांग्रेस अध्यक्ष ने ही खोली पोल, विवाद बढ़ने पर हटे पीछे

                                              केरल में पीड़ितों की मदद के नाम पर स्कैम
केरल के वायनाड में जो प्रकृति आपदा के कारण हुआ उसके बाद देश भर में कोशिश हो रही है कि पीड़ितों की कैसे भी हर संभव मदद की जा सके। इस क्रम में आरएसएस के स्वयंसेवक जमीन पर उतरकर अपनी जी-जान लगाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर कोझिकोड कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता हैं जिन्हें लेकर खबर फैली कि वो पीड़ितों के लिए राहत फंड एकत्रित करने के नाम पर घोटाला कर रहे हैं। बाद में इस खबर से यू-टर्न ले लिया गया, लेकिन चर्चा अब भी है कि कहीं कांग्रेस को बदनामी से बचाने के लिए कहीं ये पैसों का गबन न छिपाया जा रहा हो।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये जानकारी सामने आई थी कि कोझिकोड के चेलानूर निर्वाचन क्षेत्र के युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष ने पीड़ितों की मदद के नाम पर पैसे इकट्ठा करके उनका दुरुपयोग किया। रिपोर्ट्स ये भी बताती हैं कि इस बारे में शिकायत पहले खुद निर्वाचन क्षेत्र के अध्यक्ष अजल दिवानंदन ने ही की थी। हालाँकि बाद में वो पलट गए।

दिवानंदन की शिकायत के अनुसार, उपाध्यक्ष अश्विन एडावलथ और कार्यकर्ता अनस ने पीड़ितों की मदद के नाम पर पहले धन जुटाया और बाद में उसे गबन कर लिया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि दोनों व्यक्तियों ने आवश्यक वस्तुओं को इकट्ठा करने के लिए चेलनूर में कोई कागजी काम नहीं किया और विवादास्पद रूप से धन उगाही की, जिससे हकीकत में जो जरूरत के पैसे जमा होने थे वो नहीं हो पाए।

बताया जा रहा है कि इस मामले में विवाद बढ़ने और शिकायत लीक होने के बाद राज्य नेतृत्व ने हस्तक्षेप किया। पहले जहाँ खबर आई थी कि अध्यक्ष की शिकायत के खिलाफ उपाध्यक्ष ने कहा है कि वो जाकर प्रदेश नेतृत्व से शिकायत करेंगे वहीं बाद में पता चला कि शिकायत दर्ज कराने वाले निर्वाचन क्षेत्र के अध्यक्ष ने खुद ही इस मामले में यू-टर्न ले लिया है। उनका कहना है कि उसने ऐसी कोई शिकायत दी ही नहीं। वहीं युवा कांग्रेस के जिला नेतृत्व ने भी इनकार किया है और कहा कि चेनन्नूर में धन उगाही से संबंधित कोई भी शिकायत उनके संज्ञान में आई ही नहीं है।

केरल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के इस प्रकार के यूटर्न के बीच ये खबर सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही। आंध्र प्रदेश के भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष विष्णु वर्धन रेड्डी ने कहा, कांग्रेस न केवल भ्रष्टाचार में लिप्त है बल्कि अब अपने स्वार्थ के लिए एक आपदा का फायदा उठाकर नई नीचता पर उतर गई है। यह मानवता के साथ घिनौना विश्वासघात है!