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सत्ता में नहीं आए तो भाजपा से मिल जाऊंगा -- अजित जोगी

20 को है चुनाव
आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार 
चुनाव होने से पहले ही पूत के पाओं पालने में नज़र आने लगे। इसे कहते हैं, सत्ता  भूख। मोदी के विरुद्ध हो रहे गठबन्धन की असलियत भी जगजाहिर होने लगी। छत्तीसगढ़ में अजित जोगी और मायावती ने कितनी बेताबी से हाथ मिलाया, लेकिन मतदान पास आते और जनता के रुख को देख अजित जोगी ने अभी से अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए, जो सिद्ध करता है कि मोदी के विरुद्ध जनता को उकसा कर केवल सत्ता में बैठ मालपुए खाने की आदत इन्हे सता रही है। यानि मोदी का विरोध कर किसी भी तरह पुनः सत्ता प्राप्त करना है। 
क्या गठबंधन सत्ता पाने के लिए हो रहा है?
अगर किसी कारण छत्तीसगढ़ में त्रिशंकु बहुमत आता है, तो अजित सत्ता का सुख भोगने के लिए भाजपा से हाथ मिलाने में देर नहीं करेंगे। जब विधानसभा चुनावों में गठबंधन का यह हाल है, लोकसभा चुनाव में क्या होगा? यही स्थिति लोकसभा चुनाव में भी हुई, निश्चित रूप से महागठबंधन को ताश के पत्तों की तरह बिखरने में समय नहीं लगेगा। अब प्रश्न उत्पन्न होता है कि "क्या ऐसे अवसरवादी और सत्ता के भूखे नेताओं पर विश्वास किया जा सकता है?" वास्तव में इन बेपेंदी अवसरवादी नेताओं की "जहाँ दिखे तवा पलांत, वहीँ बिता सारी रात" वाली हालत है। ऐसे नेताओं को न देश से, न प्रदेश से और  न ही जनता से, इन्हे मतलब है केवल सत्ता में बैठकर मालपुए खाने की। मोदी विरोध बस जनता को गुमराह करना है, जो ये सत्ता के भूखे नेता अब तक करते आये हैं। 
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिस तरह से पूर्व में अजीत जोगी ने बयान दिया था कि अगर प्रदेश में खंडित जनादेश आया तो क्या वह भाजपा के साथ गठबंधन कर सकते हैं। उस वक्त उन्होंने कहा था कि कुछ भी संभव है। लेकिन मायावती के साथ आने के बाद अजीत जोगी ने साफ कर दिया है कि भाजपा के साथ गठबंधन कदापि नहीं हो सकता है। जोगी ने कहा कि मेरे बयान को गलत समझा गया, मैंने उसके बिल्कुल उलट कहा था।
मायावती के सामने बदला बयान 
मायावती के सामने बदला बयानजोगी ने कहा कि मैं खुद के बारे में और बहन मायावती के बारे में जानता हूं, हम विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे बजाए इसके कि भाजपा के साथ गठबंधन करें। अंग्रेजी में मेरे मुहावरे को गलत समझा गया, मैंने उसे दूसरे परिपेक्ष्य में कहा था, राजनीति में कुछ भी संभव है, ये सही है। अजीत जोगी ने जब यह बयान दिया तो बसपा सुप्रीमो मायावती उनके पास बैठी थीं। जोगी ने कहा कि जब मुझसे पूछा गया कि क्या मैं भाजपा या कांग्रेस के साथ गठबंधन करूंगा तो मैंने कहा किसी से नहीं करूंगा, हमारा गठबंधन मजबूत है, हम सरकार बनाएंगे।
क्या कहा था पहलेक्या कहा था पहले 
आपको बता दें जोगी और मायावती ने रायपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित किया, इसी दौरान जोगी ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि चुनाव के बाद गठबंधन एक काल्पनिक सवाल है। वहीं मायावती ने भी भाजपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना को इनकार करते हुए कहा किक हम उनके साथ गठबंधन करने की बजाए विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे। एक सांपनाथ है तो दूसरा नागनाथ, दोनों सांप हैं। आपको बता दें किक इससे पहले कांग्रेस और भाजपा के साथ गठबंधन की बात पर जोगी ने कहा था कि राजनीति में कुछ भी इनकार नहीं किया जा सकता है, कुछ भी हो सकता है।
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20 को है चुनाव 
वहीं मायावती के बारे में जोगी ने कहा कि मैंने कांग्रेस और भाजपा के बारे में मायावती से बात नहीं की है। आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं। यहां दो चरणों में चुनाव होना है, पहले चरण का मतदान 12 नवंबर को हो चुका है, जबकि 20 नवंबर को दूसरे चरण का चुनाव होगा, यहां चुनाव के नतीजे 11 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे।

कांग्रेस के पास नहीं हैं कार्यकर्ता, डॉ. रमन खो चुके हैं सीएम बने रहने का हक: अमित जोगी

znews.india.com पर प्रकाशित अजीत जोगी के सुपुत्र अमित जोगी का exclusive साक्षात्कार प्रस्तुत है। जो अपने आप में गठबन्धन में हो रही खींचतान को जगजाहिर कर रहा है। जिसे गम्भीरता से znews के इस लिंक http://zeenews.india.com/hindi/india/madhya-pradesh-chhattisgarh/chhattisgarh-elections-2018-dr-raman-has-lost-his-right-to-be-cm-amit-jogi/460060 (Oct 22, 2018, 04:00 PM IST)पर भी पढ़ा जा सकता है:--   
EXCLUSIVE: कांग्रेस के पास नहीं हैं कार्यकर्ता, डॉ. रमन खो चुके हैं सीएम बने रहने का हक: अमित जोगीजनता कांग्रेस के मुखिया अजीत जोगी ने चुनाव न लड़ने की घोषणा कर छत्‍तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के समीकरणों को बदल दिया है. कांग्रेस जहां एक ओर अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस पर बीजेपी की बी-टीम होने का आरोप लगा रही है, वहीं बीजेपी ने अजीत जोगी पर बसपा के हाथों की कठपुतली बनने का आरोप लगाया है. विधानसभा चुनाव 2018 से ठीक पहले सूबे के बदलते सियासी मिजाज के बारे में जी-डिजिटल के प्रिंसिपल कॉरेस्‍पोंडेंट अनूप कुमार मिश्र ने जनता कांग्रेस के सह-संस्‍थापक और पूर्व मुख्‍यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी से बातचीत की. प्रस्‍तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश:  
प्रश्‍न: कभी मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन सिंह को चुनौती देने की बात कहने वाले अजीत जोगी अब चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. अचानक इस फैसले की वजह क्‍या रही?
अमित जोगी: यह फैसला समय के अनुसार बदलती जरूरतों को देखते हुए लिया गया है. उन्‍होंने जब चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, तब हमारी पार्टी का किसी भी राजनैतिक दल के साथ गठबंधन नहीं हुआ है. मौजूदा समय में हमारा बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के साथ गठबंधन है. बीएसपी और सीपीआई के नेताओं का यह मानना था कि उनको एक सीट पर सीमित नहीं रहना चाहिए. उनको 90 विधानसभा क्षेत्रों में गठबंधन की तरफ से लड़ रहे सभी प्रत्‍याशियों के लिए प्रचार करना चाहिए. मौजूदा परिस्थितियों में गठबंधन को मजबूत करने के लिएअजीत जोगी ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है.
ajit jogi chप्रश्‍न: अजीत जोगी के चुनाव न लड़ने से गठबंधन कैसे मजबूत होगा?
अमित जोगी: गठबंधन के बाद परिस्थितियां बदली हैं. कई जगह हम लोगों को अपने प्रत्‍याशियों को ड्राप कर बीएसपी के प्रत्‍याशियों को लाना पड़ा है. उनके पक्ष में नए सिरे से प्रचार करना पड़ेगा. अगर अजीत जोगी एक सीट से लड़ते, भले ही मुख्‍यमंत्री की सीट से लड़ते, तो वहां उनको कम से कम छह दिन तो देना पड़ता. इन दिनों वे एक दिन में 4 विधानसभाओं में जनसभाएं कर रहे हैं. इस लिहाज से इन 6 दिनों में सीधे तौर पर 24 विधानसभा क्षेत्र प्रभावित हो रहे थे. अब वह अपना समय उन क्षेत्रों पर दे सकेंगे, जहां पर समयाभाव के चलते वह समय नहीं दे पा रहे थे.
प्रश्‍न: ऐसे कौन से इलाके हैं, जहां पर आप ध्‍यान नहीं दे पा रहे थे. अजीत जोगी चुनाव न लड़कर किन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं
अमित जोगी: पहले चरण में बस्‍तर के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित हो रहे थे. समयाभाव के चलते अमित जोगी अभी तक बस्‍तर के इलाकों में नहीं जा सके थे. अब कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के वहां से 4 प्रत्‍याशी गठबंधन की तरफ से चुनाव लड़ रहे हैं. उनके पक्ष में भी हमें प्रचार करना है. हमें बहुजन समाज के प्रत्‍याशियों के लिए भी प्रचार करना है. इन्‍हीं परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया कि अजीत जोगी कहीं से भी चुनाव नहीं लड़ेंगे. वे 90 विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रचार करेंगे. चूंकि यह चुनाव उनके चेहरे पर लड़ा जा रहा है, इस लिहाज से वह सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं.  
CH GRFप्रश्‍न: बसपा के साथ आपकी पार्टी ने कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के साथ भी गठबंधन किया है. कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का साथ आपको सत्‍ता के कितने करीब पहुंचा सकेगा.
अमित जोगी: छत्तीसगढ़ में बीएसपी और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के गठबंधन की लोकप्रियता को देखते हुए सीपीआई ने गठबंधन में शामिल होने का निर्णय लिया है. सीपीआई का साथ मिलने के बाद हमारे गठबंधन को बस्तर, सरगुजा और भिलाई के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में मजबूती मिलेगी. मजूदर और किसान वर्ग के बीच हमारे गठबंधन की ताकत और बढ़ेगी. बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाली कोंटा और दंतेवाड़ा विधानसभा क्षेत्रों में शुरू से सीपीआई की मजबूत स्थिति रही है. सीपीआई का साथ मिलने के बाद हमारे गठबंधन की ताकत दोगुनी हो चुकी है.  
प्रश्‍न: बीजेपी का आरोप है कि अभी तक अजीत जोगी दिल्‍ली के इशारों पर काम करते थे, अब उनका रिमोट लखनऊ पहुंच गया है. 
अमित जोगी: छत्‍तीसगढ़ के फैसले न ही लखनऊ से लिए जाएंगे और न ही पश्चिम बंगाल से लिए जाएंगे. हमारा रिमोट शुरू से हमारे पास था और भविष्‍य में भी हमारे पास रहेगा. आप हमारा चुनावी घोषणापत्र पढ़िए, जो इस महागठबंधन का न केवल ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट है, बल्कि जल्‍द ही उसको कॉमन मिनिमम प्रोगाम का रूप भी दिया जा सकता है. उसमें स्‍पष्‍ट तौर पर पहली बात यही लिखी है कि छत्‍तीसगढ़ के सारे फैसले छत्‍तीसगढ़ में छत्‍तीसगढ़ की जनता के द्वारा लिए जाएंगे. हम कमिटेड हैं कि हमारी सरकार बनेगी तो किसानों का धान 2500 रुपए समर्थन मूल्‍य में खरीदेंगे. हम कमिटेड हैं कि यहां पर‍ जितनी भी स्‍थानीय पोस्‍ट हैं, उनमें 100 फीसदी स्‍थानीय लोगों का आरक्षण होगा.
raman jogiप्रश्‍न: आपने जिन दो प्राथमिकताओं को गिनाया है, वह प्राथमिकताएं भी गठबंधन से पहले तय हुई थीं. गठबंधन की मजबूरी के चलते कहीं ये प्राथमिकताएं तो नहीं बदल जाएंगी.  
अमित जोगी: हम जब यह सब कमिटमेंट कर रहे हैं तो इसमें बहुजन समाज पार्टी और सीपीआई दोनों की सहमति शामिल है. इसमें तो कोई संशय नहीं है. हमारे नेता ने अपना कमिटमेंट चुनावी घोषणा पत्र के जरिए जनता के बीच नहीं रखा है. हमने अपने वादों का हलफनामा कोर्ट में दिया है. सरकार बनने पर यदि हम अपने वादों को पूरा नहीं करते हैं, तो कोई भी शख्‍स हमें कोर्ट के कटघरे में खड़ा कर सकता है. वहीं, इस गठबंधन की दूसरी महत्‍वपूर्ण बात है कि हम दरबारी की हैसियत से नहीं, बल्कि बराबरी की हैसियत से दिल्‍ली आना चाहते हैं. 
प्रश्‍न: कांग्रेस का आरोप है कि अजीत जोगी अपने इस फैसले से मुख्‍यमंत्री डॉ.रमन सिंह का कर्ज उतार रहे हैं. कांग्रेस के इन आरोपों को आप किस तरह देखते हैं. 
अमित जोगी: कांग्रेस एक डूबता जहाज है, छत्‍तीसगढ़ में उसका डूबना तय है. ऐसे में कांग्रेस के नेता इस तरह की बातें कर जनता को गुमराह करने का असफल प्रयास कर रहे हैं. जहां तक डॉ. रमन सिंह के नेतृत्‍व वाली बीजेपी सरकार की बात है तो मुख्यमंत्री पिछले 15 वर्षों में छत्तीसगढ़ में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर लोगों के लिए कुछ नहीं कर पाए. आज भी राज्य के 50 प्रतिशत लोग गरीबी के दलदल में फंसे हुए हैं. ऐसे में डॉ.रमन सिंह को मुख्यमंत्री बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. हमने अपनी हर जनसभा में डॉ रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की नीति और नियत दोनों को जनविरोधी करार दिया है. बीजेपी की हर नाकामी को हम जनता के बीच जोरदार तरीके से लेकर गए हैं.
maya jogiप्रश्‍न: इस चुनावी रण में कांग्रेस आपको कहां खड़ी नजर आती है.
अमित जोगी: कांग्रेस तो इतनी डरी हुई है कि कल नामांकन का आखिरी दिन है. कांग्रेस अभी तक सिर्फ 12 सीटों पर अपने प्रत्‍याशी घोषित कर पाई है. कई महीने पहले जब राहुल गांधी आए थे, तब उन्‍होंने बोला था कि 15 अगस्‍त से पहले 90फीसदी प्रत्‍याशियों के नाम घोषित कर देंगे. कांग्रेस की स्थिति यह है कि एक सीट पर उनके 40-40 दावेदार हैं. कांग्रेस बगावत से इतनी डरी और सहमी हुई है कि प्रत्‍याशियों का नाम अभी तक घोषित नहीं कर पाई है. कांग्रेस तो ऐसी स्थिति में खड़ी है, जहां उनका कार्यकारी अध्‍यक्ष भाजपा ज्‍वाइन करने की तैयारी में है. कांग्रेस में कार्यकर्ता नहीं बचे हैं, वहां सिर्फ नेताओं का हुजूम है. यह हूजूम टिकटों की चाहत में दिल्‍ली के दरबार के चक्‍कर लगा रहा है. यहां चुनाव प्रचार में कांग्रेस का एक भी नेता नजर नहीं आ रहा है. (साभार: http://zeenews.india.com)
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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में गुटबाजी रूकने का नाम नहीं ले रही है। स्टिंग के बाद हतोत्साहित पड़ी पार्टी में जोश भरने के ल...

छत्तीसगढ़: चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका

Ramdayal Uikeछत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के कद्दावर आदिवासी नेता और राज्य के कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल उइके ने कांग्रेस का साथ छोड़ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। उइके ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री रमन सिंह की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।  उइके चार बार कांग्रेस से विधायक रह चुके हैं और राज्य के आदिवासी मतदाताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
रामदयाल उइके कांग्रेस के अकेले नेता हैं जिन्होंने छत्तीसगढ़ में जीत की हैट्रिक लगाई है। उन्होंने 2013 में पाली-तानाखार सीट से गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) के हीरा सिंह मरकाम को 28,813 वोट से हराया था। भाजपा के श्यामलाल मारवी तीसरे नंबर पर रहे थे।
वहीं 2008 के चुनाव में उइके को 29,443 मतों से जीत मिली। तब भी उनका मुकाबला हीरा सिंह मरकाम से हुआ था। भाजपा तीसरे नंबर पर ही रही थी।
पाली तानाखार से विधायक रहे उइके के बारे में कहा जा रहा है कि वो भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। छत्तीसगढ़ में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं और पहले चरण का चुनाव 12 तथा दूसरे तथा अंतिम चरण का चुनाव 20 नवंबर को होगा।
इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक में छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनाव के पहले चरण के लिए उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन गई थी।
Congress Chhattisgarh working president and Pali-Tanakhar MLA, Ramdayal Uike joined BJP in presence of Amit Shah and CM Dr.Raman Singh pic.twitter.com/m2MuwrTraO
— ANI (@ANI) October 13, 2018
छत्तीसगढ़ में बीएसपी अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के साथ मिलकर चुनावी मैदान में हैं। 90 सदस्यों वाली विधानसभा में बीएसपी 35 सीटों पर चुनाव लड़ रही है तो 55 सीटों पर अजीत जोगी की पार्टी चुनावी मैदान में है। अजीत जोगी की पार्टी के साथ गठबंधन करने के बाद मायावती ने कहा था कि अगर उनके गठबंधन को बहुमत हासिल होता है तो अजीत जोगी राज्य के अगले सीएम होंगे। 
इस बार के हालात : जनता कांग्रेस और बसपा गठबंधन में हुए सीटों के समझौते में पाली-तानाखार विधानसभा बसपा की झोली में चली गई है। इसके साथ ही अब यहां चतुष्कोणीय मुकाबला होना तय हो गया है। पहले ही गोडवाना गणतंत्र पार्टी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर रही है। ऐसे में भाजपा के साथ बसपा के प्रत्याशी इस बार पूरे दमखम से मैदान में उतरेंगे। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,10,896 मतदाता हैं। जातीय समीकरण के लिहाज से यहां का मतदाता, गोंड़ और कंवर आदिवासी दो समूह में बंटा है।
रमन के खिलाफ अजीत जोगी की जमीन तैयार कर रही बहू ऋचा
बहू ऋचा जोगी को जकांछ ने राजनांदगांव का प्रभारी
नियुक्त किया है। दिन रात ससुर के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटी हैं।
रमन के खिलाफ अजीत जोगी की जमीन तैयार कर रही बहू ऋचा
वहीँ प्रदेश की सर्वाधिक हाईप्रोफाइल विधानसभा क्षेत्र राजनांदगांव से जकांछ प्रमुख अजीत जोगी ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के विरुद्ध दावेदारी कर वहां के चुनाव को और रोचक कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री के लिए राजनांदगांव में जमीन तैयार करने की जिम्मेदारी उनकी बहू ऋचा जोगी को सौंपी गई है।
ऋचा जोगी को जकांछ ने राजनांदगांव का प्रभारी नियुक्त किया है। बहू दिन रात ससुर के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटी हैं। हालांकि जोगी की अनुपस्थिति में राजनीति की नौसिखिया मानी जा रही ऋचा कितना माहौल खड़ा पाएंगी इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जोगी ने राजनांदगांव से ताल तो ठोंक दी है लेकिन वहां समय नहीं दे पा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री व जकांछ मुखिया अजीत जोगी ने यह घोषणा की है कि रमन सिंह जहां से चुनाव लड़ेंगे वे भी वहीं से चुनाव मैदान में उतरेंगे।
रमन सिंह राजनांदगांव से विधायक हैं, इसलिए जोगी ने वहीं से अपनी दावेदारी की है। राजनांदगांव प्रभारी ऋचा इन दिनों रमन सिंह के क्षेत्र में अपने ससुर अजीत जोगी की राजनीतिक जमीन तैयार कर रही हैं।
ऋचा ने वहां आम कार्यकर्ता की तरह महिला संगठनों व कार्यकर्ताओं के बीच पार्टी को मजबूत कर रही हैं। इन दिनों डोर-टू-डोर कंपेनिंग का कार्यक्रम ऋचा की अगुवाई में वहां चल रहा है। अजीत जोगी ने वहां से उम्मीदवारी तो कर दी है पर अभी तक वहां अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है।
अजीत जोगी पार्टी की कमान पूरे प्रदेश में संभाले हुए हैं, इसलिए उनके क्षेत्र की कमान उनकी बहू के पास है। रमन सिंह के विरुद्ध ऋचा अपने दल को कितनी प्रमुखता से वहां स्थापित कर पाती हैं यह तो वक्त बताएगा परंतु ऋचा जोगी इन दिनों राजनांदगांव में लगातार प्रवास कर लोगों के बीच पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
हालांकि रमन सिंह का विधानसभा क्षेत्र होने के नाते ऋचा का प्रयास बहुत परवान नहीं चढ़ रहा है। अजीत जोगी की अनुपस्थिति भी असर डाल रही है। देखना कम रोचक न होगा कि इस हाई प्रोफाइल सीट पर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी व वर्तमान मुख्यमंत्री रमन सिंह के बीच मुकाबला कैसा होगा।