Showing posts with label #vice president. Show all posts
Showing posts with label #vice president. Show all posts

गुजरात : AAP का उपाध्यक्ष हसमुख पटेल गिरफ्तार, बेनामी संपत्तियों को छिपाने से इनकार करने पर अपनी ही महिला अकाउंटेंट का किया अपहरण

                                                   बेनामी लेनदेन में पकड़े गए AAP प्रदेश उपाध्यक्ष
गुजरात के गाँधीनगर में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश उपाध्यक्ष हसमुख पटेल को एक महिला अकाउंटेंट के अपहरण, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। यह मामला बेनामी लेनदेन और संदिग्ध वित्तीय गड़बड़ियों के खुलासे से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। पुलिस ने केस दर्ज कर आगे की जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अहमदाबाद के गोटा इलाके में रहने वाली महिला गाँधीनगर के सेक्टर-25 GIDC स्थित HBC लाइफ साइंस कंपनी में अकाउंटेंट के रूप में काम करती थी। कंपनी के मालिक हसमुख पटेल हैं, जबकि उनके भाई हिमांशु पटेल ने महिला को अपनी दूसरी कंपनी मैक्सिएमएस हॉलीडे प्राइवेट लिमिटेड के ऑडिट का काम भी सौंपा था।

ऑडिट के दौरान महिला ने करीब 80 से 85 लाख रुपए के संदिग्ध लेनदेन और बिना बिल के भुगतान का खुलासा किया। इस खुलासे के बाद कंपनी प्रबंधन में हड़कंप मच गया और यहीं से पूरे विवाद की शुरुआत हुई।

अपहरण, मारपीट और धमकी देने का आरोप

शिकायत के मुताबिक, 26 मार्च 2026 को दोपहर के समय कंपनी के पार्किंग एरिया से महिला को जबरन एक हरे रंग की कार में बैठाकर अगवा कर लिया गया। चलती गाड़ी में आरोपितों ने महिला के साथ मारपीट की, उसके बाल खींचे और धमकी दी कि अगर उसने इस मामले की जानकारी किसी को दी तो उसे जान से मारकर कहीं दफना दिया जाएगा।

घटना के बाद डरी हुई महिला ने हसमुख पटेल को फोन कर पूरी जानकारी दी, लेकिन मदद करने के बजाय उस पर शिकायत न करने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि यह पूरी साजिश उन्हीं के इशारे पर रची गई थी।

बाद में महिला ने गाँधीनगर के सेक्टर-21 पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हसमुख पटेल को गिरफ्तार कर लिया। मामले में अन्य आरोपितों के खिलाफ भी जाँच जारी है।

भारत के इतिहास में पहली बार: उपराष्ट्रपति ने त्यागपत्र दिया : जब विपक्ष उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया; धनखड़ की मिमिक्री; लेकिन धनखड़ का त्यागपत्र राहुल गाँधी को बेनकाब कर गया

    संसद में सभापति जगदीप धनखड़ पर विपक्ष ने लगाए थे गंभीर आरोप ( फाइल फोटो, साभार- sansad tv n PTI )
2014 चुनाव के बाद से लगभग हर क्षेत्र में भारत में कई काम पहली बार हो रहे हैं। एक समय था जब आतंकी भारत में उनके आकाओं के दम पर बेगुनाहों के खून से सड़कें लाल करते थे, आतंकियों को प्रधानमंत्री आवास में बैठाकर सम्मान के साथ बिरयानी और कोरमा खिलाया जाता था। लेकिन कालचक्र ऐसा घुमा कि आतंकियों को गोला मिल रहा है, घर में घुसकर मारा जा रहा है। इन सब में सबसे प्रमुख बात सामने आयी कि भारत विरोधी देशों के हाथों कठपुतली बना विपक्ष। फिर कहते हैं "मोदी हटाओं, हमारे हाथ सत्ता दे दो।" लेकिन जनता इतनी महामूर्ख है कि आँखों देखी मक्खी खाने को पता नहीं क्यों मजबूर हैं? सड़क से लेकर लोक/राज्य सभा तक उपद्रव विदेशी चंदे को भुनाने के लिए होते हैं। एक समय था जब नेता विपक्ष की कही किसी बात पर सरकार सोंचने को मजबूर होती थी, परन्तु आज लगता नेता विपक्ष नहीं कोई गली का खलीफा बोल रहा है। जब LoP यह कहे कि "हमें nation के खिलाफ लड़ाई लड़नी है" LoP राष्ट्र को बताए कि कौन-से nation से लड़ रहे हो? यानि विपक्ष नेता की गरिमा बिलकुल तार-तार कर दिया।         

जगदीप धनखड़ ने भले ‘स्वास्थ्य कारणों’ से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया हो, पर विपक्ष इसमें ‘राजनीति’ देख रहा है। ये वही विपक्ष है जिसने न केवल धनखड़ की मिमिक्री कर सदन के बाहर उनका मजाक उड़ाया, बल्कि सदन के भीतर उन्हें ‘विपक्ष की आवाज दबाने वाला सभापति’ से लेकर ‘बीजेपी प्रवक्ता’ तक कहने में भी हिचक नहीं दिखाई।

यहाँ तक कि देश में पहली बार किसी उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश तक की। अब कांग्रेस नेता जयराम रमेश कह रहे हैं कि उन्होंने विपक्ष को मिलाकर चलने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य वजह से बजाए जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की वजह ‘गहरे’ हैं।

धनखड़ अविश्वास प्रस्ताव ला ला चुका है कांग्रेस 

कांग्रेस को जगदीप धनखड़ विपक्ष को साथ लेकर चलने वाले नजर आने लगे हैं। ये वही कांग्रेस है जिसने देश के इतिहास में पहली बार उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उनका ‘संवैधानिक अपमान’ किया । 72 साल के संवैधानिक इतिहास में धनखड़ पहले ऐसे उपराष्ट्रपति रहे जिनके खिलाफ प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस की अगुवाई वाली इंडी गठबंधन ने दिसंबर 2024 में सदन में महाभियोग प्रस्ताव लेकर आया था।

उस वक्त धनखड़ पर ‘पक्षपातपूर्ण तरीके’ से सदन चलाने और विपक्ष को ‘बोलने का मौका नहीं ‘देने का आरोप लगाया था। हालाँकि तकनीकी कारणों से महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो गया। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

लेकिन आज उपराष्ट्रपति धनखड़ कांग्रेस को सभी दलों को मिला कर चलने वाले नेता नजर आने लगे हैं। कांग्रेस के पूर्व नेता अब समाजवादी पार्टी के सांसद कपिल सिब्बल ने यहाँ तक कहा है कि धनखड़ सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलाकर चलना चाहते थे और दुनिया में भारत के लोकतंत्र की बेहतर छवि प्रस्तुत करना चाहते थे।

धनखड़ की मिमिक्री का मामला

उपराष्ट्रपति धनखड़ को विपक्ष ने आहत भी किया है। याद कीजिए मोदी सरकार 2.0 का वो आखिरी शीतकालीन सत्र जब सदन में हंगामे की वजह से राज्यसभा के 45 सांसदों समेत कुल 78 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। सभी निलंबित सांसद संसद भवन की सीढ़ियों पर बैठकर निलंबन का विरोध कर रहे थे।
इसी दौरान टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी उठे और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की मिमिक्री करने लगे। उनके बात करने और शारीरिक संरचना की खिल्ली उड़ाई। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गांधी खड़े होकर हँसते और मिमिक्री का वीडियो बनाते नजर आए।
इस पर जगदीप धनखड़ ने अपनी नाराजगी भी जताई। उन्होंने संसद में कहा था कि एक सांसद चेयरमैन का मजाक बनाता है और कांग्रेस के बड़े नेता हँसते हैं और उसका वीडियो बनाते हैं। उन्होंने इसे व्यक्तिगत और जाति आधारित अपमान बताया था। उन्होंने कहा था कि उनकी जाट पहचान और किसान बैकग्राउंड का मजाक उड़ाया गया। ये पूरे जाट समुदाय का अपमान है।
सांसद कल्याण बनर्जी ने इसके बाद भी कई बार जगदीप धनखड़ की मिमिक्री बनाई और कहा कि वो 1000 बार ऐसा करेंगे।

हाथ धोकर पीछे पड़ी रही टीएमसी

विपक्ष के हर उस दांव में टीएमसी साथ देती रही जो धनखड़ के खिलाफ थी। दरअसल उपराष्ट्रपति की मुखर आलोचक टीएमसी के साथ धनखड़ का रिश्ता उस वक्त से खराब रहा था, जब वह बंगाल के राज्यपाल थे। 2019 से 2022 के बीच राज्यपाल धनखड़ ने बंगाल की ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार की कई मुद्दों पर आलोचना की।
उन्होंने कहा था कि राज्य में संविधान का शासन नहीं है और अराजकता,गुंडागर्दी का बोलबाला है। इसको मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य का अपमान बताया था। उन्होंने सरकार के कामकाज में दखलंदाजी के आरोप भी लगाए। ऐसे में जब जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार बने तो उनका जमकर विरोध किया।

सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी को लेकर धनखड़ और विपक्ष के बीच बहसबाजी

सुप्रीम कोर्ट को लेकर उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा था कि संसद के बनाए कानूनों को अगर कोर्ट रोक देती है तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। धनखड़ के इस बयान का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया था। टीएमसी ने कहा था कि यह व्यक्ति बीजेपी का एजेंडा चला रहा है वहीं कांग्रेस ने कहा था, “उपराष्ट्रपति संवैधानिक मर्यादाओं को तोड़ रहे हैं।” अब वही कांग्रेस उपराष्ट्रपति का गुणगान करती नजर आ रही है। अब इसे दोगलापन नहीं कहा जाये तो क्या जाये? 

विश्वविद्यालयों पर धनखड़ की टिप्पणी पर विपक्ष हुआ था आग-बबूला

मार्च 2023 में जब शैक्षणिक संस्थानों और छात्र राजनीति पर राज्यसभा में बहस चल रही थी तो सभापति धनखड़ ने कहा था, “कुछ विश्वविद्यालय देशविरोधी विचारधाराओं को प्रश्रय देते हैं।” उनका इशारा जेएनयू की तरफ था। इस पर कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों ने उपराष्ट्रपति की भाषा को ‘संघी एजेंडा’ करार दे दिया और बयान वापस लेने पर अड़े रहे। इस दौरान संसद में कई दिनों तक व्यवधान रहा।

विपक्ष ने लगाया बीजेपी प्रवक्ता होने का आरोप

दिसंबर 2023 में शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष ने धनखड़ पर विपक्षी सांसदों को नहीं बोलने का आरोप लगाया था। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था, “ये उपराष्ट्रपति नहीं, बीजेपी प्रवक्ता की तरह बर्ताव कर रहे हैं।” आज वही कांग्रेस उनकी तारीफ के पुल बाँध रही है और ‘लोकतंत्र का सच्चा सिपाही’ कह रही है।

2022 में उपराष्ट्रपति बनने का भी विपक्ष ने किया था विरोध

मोदी सरकार ने 2022 में बंगाल के राज्यपाल से सीधे केन्द्र में उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया। इंडी गठबंधन ने कांग्रेस नेता मार्गेट अल्वा को अपना उम्मीदवार बनाया था। धनखड़ ने 725 में से 528 वोट पाकर जीत दर्ज की थी और 11 अगस्त 2022 को उपराष्ट्रपति बने।

लोकसभा स्पीकर के बराबर हैं CJI, फिर राष्ट्रपति को आदेश दे सकता है सुप्रीम कोर्ट? क्या है आर्टिकल 142? उपराष्ट्रपति ने क्यों बताया ‘न्यूक्लियर मिसाइल’?


केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बनाए गए वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 की संवैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति को भी समय सीमा देते हुए निर्देश जारी किया था। अब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने न्यायपालिका पर फिर से निशाना साधा है और कहा कि वह अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर विधायिका के मामले में हस्तक्षेप कर रही है।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ एक ‘परमाणु मिसाइल’ बन गया है, जो न्यायपालिका के पास 24 घंटे उपलब्ध होता है।। उपराष्ट्रपति का बयान ऐसे समय में आया है, जब संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित वक्फ अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई और उसे रोकने की बात कही।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा, “हाल ही में एक निर्णय के माध्यम से राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है। हम कहाँ जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? हमने लोकतंत्र के लिए इस दिन की कभी उम्मीद नहीं की थी। हमारे पास ऐसे न्यायाधीश हैं जो कानून बनाएँगे, कार्यकारी कार्य करेंगे, सुपर-संसद के रूप में कार्य करेंगे और उनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी, क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता है।”

उपराष्ट्रपति ने कहा, “हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते, जहाँ आप (सुप्रीम कोर्ट) भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें। वह भी किस आधार पर? संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है।” उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 145(3) के अनुसार किसी महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे पर कम-से-कम 5 न्यायाधीशों वाली पीठ द्वारा निर्णय लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब पाँच न्यायाधीशों वाली पीठों का निर्णय निर्धारित किया गया था, तब सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या आठ थी। धनखड़ ने बिल के संबंधित मामले को लेकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति के खिलाफ निर्णय दो न्यायाधीशों वाली पीठ द्वारा दिया गया था। अब सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।

उन्होंने यहाँ तक कहा कि संविधान पीठ में न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या बढ़ाने के लिए अनुच्छेद 145(3) में संशोधन करने की आवश्यकता है। उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के प्रशिक्षुओं के छठे बैच को संबोधित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति को बिल पर तीन महीने में निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो संबंधित राज्यपाल द्वारा भेजा गया विधेयक कानून बन जाता है।

न्यायपालिका की वर्तमान हालात पर बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने न्यायाधीश यशवंत वर्मा का भी जिक्र किया। ये वही जज हैं, जिनके घर पर इस साल होली के दिन नोटों से भरे बोरों में आग लग गई थी। मामले में भारी विवाद के बाद भी सुप्रीम कोर्ट उन्हें दिल्ली से इलाहाबाद हाई कोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया और मामले की जाँच के लिए आंतरिक कमिटी बना दी गई।

धनखड़ ने कहा, “14 और 15 मार्च की रात को नई दिल्ली में एक न्यायाधीश के निवास पर एक घटना घटी। सात दिनों तक किसी को इसके बारे में पता नहीं चला। हमें खुद से सवाल पूछने होंगे। इसमें हुई देरी को क्या समझा जा सकता है? क्या यह क्षमा योग्य है? क्या इससे कुछ बुनियादी सवाल नहीं उठते? किसी भी सामान्य स्थिति में और सामान्य परिस्थितियाँ कानून के शासन को परिभाषित करती हैं।”

अनुच्छेद 142, जिसे उपराष्ट्रपति ने परमाणु मिसाइल कहा

संविधान के अनुच्छेद 142 में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और डिक्री को देने का अधिकार और उसे लागू करने आदि से संबंधित से संबंधित है। अनुच्छेद 142 के उपबंध-1 सुप्रीम कोर्ट को ये अधिकार देता है कि उसके पास आए किसी भी मामले में वह न्याय के लिए डिक्री या आदेश पारित कर सकेगा। यह डिक्री या आदेश पूरे भारत में लागू होगा।
इसके उपबंध-2 में कहा गया है कि इस संंबंध में संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के अधीन रहते हुए सुप्रीम कोर्ट पूरे भारत के किसी भी क्षेत्र के किसी व्यक्ति को हाजिर होने, दस्तावेज प्रस्तुत करने, अवमानना की जाँच करने या दंड देने का समस्त अधिकार उसके पास होगा। इस तरह अनुच्छेद 142 में स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट को संसद द्वारा पारित कानून के दायरे में ही काम करना है।
हालाँकि, बात यहीं खत्म नहीं होती। कॉलेजियम के तर्ज पर सुप्रीम कोर्ट ने इसकी भी काट निकाली है। पिछले कुछ वर्षों में अनुच्छेद 142 की व्याख्या और उसके प्रयोग के विभिन्न उदाहरण पेश किए गए। हाल ही में भारत के सुप्रीम कोर्ट के पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में निर्णय देकर एक कानूनी ढाँचा विकसित किया।
यह ढाँचा संविधान के अनुच्छेद 142 की व्याख्या और उसके प्रयोग से संबंधित था। इस निर्णय ‘एशियन रीसर्फेसिंग ऑफ रोड एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य बनाम सीबीआई के पिछले निर्णय से बिल्कुल उलट था। सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट बार के फैसले में एशियन रीसर्फेसिंग के निर्णय को पलट दिया था। इसमें अनुच्छेद 142 के तहत नए दिशा-निर्देश जारी करने के अलावा अंतरिम आदेशों से संबंधित पहलुओं को भी शामिल किया।
इसमें विचार किया गया कि अंतरिम आदेश को रद्द करने या संशोधित करने का हाई कोर्ट का अधिकार क्या है और क्या अंतरिम आदेश किसी विशेष समय की समाप्ति पर खुद ही समाप्त हो सकता है। एशियन रिसर्फेसिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसी मुद्दे पर विचार किया था। उस दौरान शीर्ष न्यायालय ने माना था कि जब तक अंतरिम आदेश का समय ना बढ़ाया न जाए, वह आदेश की तारीख से 6 महीने बाद स्वतः समाप्त हो जाता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस फैसले को उलट दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एशियन रीसर्फेसिंग मामले में निर्धारित समय बीत जाने पर अंतरिम आदेशों की स्वतः समाप्ति की शर्त लागू रहने योग्य नहीं थी और इसलिए इसे खारिज कर दिया। इसके बाद अनुच्छेद 142 में दिए गए अधिकारों के तहत उसने नए दिशा-निर्देश जारी किए।
इसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्या कोई न्यायालय अंतरिम आदेश पारित करते समय कोई समय सीमा तय कर सकता है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि अनुच्छेद 142 के तहत शक्ति का उपयोग प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को दबाने या वादियों के मूल अधिकारों को दबाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार क्षेत्र का उपयोग विवेक से और केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए, ताकि विवादों का निष्पक्ष और न्यायपूर्ण समाधान निकाला जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि अनुच्छेद 142 द्वारा दी गई शक्तियों का उद्देश्यपूर्ण न्याय सुनिश्चित करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने एशियन रीसर्फेसिंग में पहले दिए गए निर्णय को खारिज करते हुए कहा कि अनुच्छेद 226(3) के तहत पारित स्थगन आदेश को रद्द करने के लिए अनिवार्य शर्त स्थगन आदेश हटाने के लिए आवेदन दाखिल करना और न्यायालय द्वारा न्यायिक विवेक का प्रयोग करना है। इस आवेदन पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय नहीं लिया जाता है तो स्थगन आदेश स्वतः समाप्त नहीं होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थगन आदेश तब तक प्रभावी रहता है, जब तक कि इसके रद्द करने के लिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए आवेदन का कारणों के साथ निपटारा नहीं हो जाता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालतों को मामलों के निपटान के लिए कठोर समय-सीमा नहीं लगानी चाहिए, जब तक कि कोई असाधारण परिस्थिति न हो।
अपने इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने जो नया गाइडलाइन तय किया उसके अनुसार, अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग न्यायालय द्वारा अपने समक्ष पक्षकारों के लिए पूर्ण न्याय करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन ऐसा करने में न्यायालय अन्य अधिकार क्षेत्रों में अन्य वादियों के पक्ष में पारित वैध न्यायिक आदेशों को रद्द नहीं करेगा।

राष्ट्रपति को निर्देश देने के लिए उपराष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट पर क्यों भड़के?

हमने अपने पिछले आर्टिकल में बताया था कि क्या सुप्रीम कोर्ट भारत के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति को निर्देश सकते हैं या नहीं। इस आर्टिकल में हमने कई कानून पहलुओं पर विचार किया था। कई लोगों के मन में सवाल उठता होगा कि भारत में पदों की वरीयता क्रम क्या है। इससे भी साफ हो जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति को निर्देश दे सकता है या नहीं।
अगर वरीयता क्रम की बात की जाए तो राष्ट्रपति को देश का सर्वोच्च पद है। राष्ट्रपति को भारत का पहला नागरिक कहा जाता है। इतना ही नहीं, राष्ट्रपति और संसद को मिलाकर ही भारत बनता है और वह संघ के प्रशासन का प्रमुख होता है। इसी प्रशासन का एक अंग न्यायपालिका भी है। इस तरह देश का सर्वोच्च राष्ट्रपति का होता है।
भारत में राष्ट्रपति और राज्यपाल ही ऐसे दो पद हैं, जिनके खिलाफ अदालती कार्रवाई नहीं की जा सकती है। भारत के संविधान ने अनुच्छेद 361 के तहत इसका प्रावधान किया है। यह अनुच्छेद राष्ट्रपति और राज्यपालों के खिलाफ अदालती कार्यवाही से सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ना ही इन दोनों को किसी मामले में नोटिस जारी कर सकता है और ना ही निर्देश दे सकता है।
राष्ट्रपति के बाद देश में दूसरा सर्वोच्च पद उपराष्ट्रपति का होता है। इसके बाद तीसरे नंबर पर प्रधानमंत्री आते हैं। देश का चौथा सर्वोच्च पद राज्यपाल का होता है, जो उनके कार्य वाले राज्यों में होता है। इसके बाद वरीयता क्रम में पाँचवें स्थान पर पूर्व राष्ट्रपति आते हैं। इसके बाद भारत के उपप्रधानमंत्री का पद वरीयता क्रम में 5A स्थान पर आता है।
                                    भारत में अधिकारियों का वरीयता क्रम (साभार: www.mha.gov.in)
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और लोकसभा स्पीकर का पद एक समान होता है। दोनों वरीयता क्रम में छठे नंबर पर आते हैं। इसके बाद सातवें नंबर पर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री अपने राज्यों में होते हैं। योजना आयोग के उपाध्यक्ष, पूर्व प्रधानमंत्री, राज्यसभा और लोकसभा में विपक्ष के नेता भी सातवें क्रम पर ही आते हैं।
भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति का क्रम 7A होता है। आठवें क्रम में राजदूत, भारत द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रमंडल देशों के आयुक्त, अपने राज्य के बाहर मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल होते हैं। नौंवें क्रम पर सुप्रीम कोर्ट के आते हैं। इसके बाद 9A पर संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, मुख्य चुनाव आयुक्त और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) आते हैं।
वरीयता क्रम मेें 10वें स्थान पर राज्यसभा के उपसभापति, राज्यों के उपमुख्यमंत्री, लोकसभा के उपसभापति, योजना आयोग (वर्तमान में नीति आयोग) के सदस्य और केंद्र सरकार के राज्यमंत्री आते हैं। वहीं, 11वें स्थान पर भारत के अटॉर्नी जनरल, कैबिनेट सचिव और अपने-अपने केंद्रशासित प्रदेशों के भीतर लेफ्टिनेंट गवर्नर (उपराज्यपाल) तक शामिल हैं। वरीयता क्रम में 12वें स्थान पर पूर्ण जनरल या समकक्ष रैंक के पद पर कार्यरत चीफ ऑफ स्टाफ।

सभापति ने लगाई कांग्रेस सांसद की क्लास, कहा- जयराम रमेश आपको किसान के बारे में क ख ग नहीं पता


उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने आज 26 जुलाई को सदन की कार्यवाही में व्यवधान डालने पर कांग्रेस सांसद की जमकर क्लास लगाई। राज्यसभा में किसानों की समस्या को लेकर सभापति जगदीप धनखड़ कुछ बोलने की कोशिश कर रहे ही थे कि राहुल गांधी के करीबी मार्गदर्शक जयराम रमेश में उन्हें टोकने की कोशिश की। इस पर सभापति ने उन्हें डपट दिया। सभापति धनखड़ राज्यसभा में सांसद को कह रहे थे कि भारत किसान प्रधान देश है। सदन के अंदर किसान की चर्चा के समय इतनी गुजारिश करूंगा कि हर व्यक्ति… सभापति इतना बोले ही थे कि कांग्रेसी सांसद जयराम रमेश टोका-टाकी करने लगे। इस पर सभापति ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि आप एक समस्या की तरह है। आप किसान के बारे में क्या जानेंगे? आपको किसान के बारे में क ख ग नहीं पता है।

जयराम रमेश को डपटने का ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। लोग वीडियो को शेयर कर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश पर तंज कस रहे हैं।

उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अपमान पर जाटों के सबसे बड़े खाप ने बुलाई पंचायत: ‘किसान मोर्चा’ करेगा प्रदर्शन

उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अपमान पर भाजपा का किसान मोर्चा करेगा प्रदर्शन, जाटों के खाप ने बुलाई पंचायत
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी के उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अपमान पर जाट समुदाय क्रोधित है। जाटों ने एक पंचायत बुला कर इस मामले में कल्याण बनर्जी से माफ़ी की माँग की है। वहीं भाजपा सांसदों ने उप-राष्ट्रपति के समर्थन में राज्यसभा में खड़े रह कर विरोध प्रदर्शन किया है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी उप-राष्ट्रपति से मुलाक़ात की है। गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नकल उतारी थी। उन्होंने उप-राष्ट्रपति के हावभाव की नक़ल उतारते हुए अभद्र तरीके से उनकी मिमिक्री की। इस दौरान राहुल गाँधी उनका वीडियो बनाते रहे जबकि अन्य सांसद भी उनका साथ देकर ठहाके लगाते रहे।

इस मामले में भाजपा के राज्यसभा सांसद उप-राष्ट्रपति के समर्थन में राज्यसभा में 20 दिसम्बर, 2023 को एक घंटा खड़े रहे। इसके द्वारा उन्होंने उप-राष्ट्रपति के साथ एकजुटता दिखाई। इस एक घंटे में सदन की कार्रवाई में भाजपा और इसके गठबंधन दलों के सांसद चलती हुई कार्रवाई में खड़े होकर हिस्सा लेते रहे।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी (प्रहलाद जोशी) ने कहा, “दूसरे सदन के सदस्य राहुल गाँधी ने उप-राष्ट्रपति का अपमान किया है। पहली बार विपक्ष इस स्तर जा रहे हैं कि कोई हद ही नहीं है।” प्रल्हाद जोशी से कल्याण बनर्जी से माफ़ी की माँग भी की।

वहीं उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अपमान पर जाट समुदाय भी आक्रोशित हो गया है। देश की सबसे बड़ी खाप पंचायत के उपाध्यक्ष प्रधान सुरेन्द्र सोलंकी ने इस मामले पर पंचायत बुलाई है। उन्होंने कहा है कि कल्याण बनर्जी ने उप-राष्ट्रपति का अपमान करके किसान समुदाय का अपमान किया है। उन्हें जल्द ही माफ़ी माँगनी होगी वर्ना तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों के घरों का घेराव किया जाएगा। उन्होंने राहुल गाँधी के व्यवहार की आलोचना भी की है। उन्होंने आगे बड़ी पंचायतों और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद उप-राष्ट्रपति धनखड़ के साथ लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी मुलाक़ात की। उन्होंने कल्याण बनर्जी की हरकत पर दुःख जताया। उन्होंने राहुल गाँधी द्वारा इस घटना की वीडियो बनाए जाने पर भी आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि यह नया निचला स्तर है लोकतंत्र में विश्वास करने वाले लोग इसकी कभी प्रशंसा नहीं करेंगे।

वहीं कल्याण बनर्जी ने अपने इस कृत्य पर माफ़ी माँगने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा, “मिमिक्री एक कला है, इसीलिए मैं माफ़ी नहीं माँगूँगा।” उन्होंने कहा कि मेरा उनकी भावनाएँ आहत करने का इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि मिमिक्री एक कला है इसलिए वो माफ़ी नहीं माँगेंगे।

भाजपा ने इस मामले पर विपक्ष को घेरने का भी इरादा बना लिया है। भाजपा का किसान मोर्चा इस मामले में अब प्रदर्शन करेगा और कल्याण बनर्जी का पुतला फूँकेगा।

केजरीवाल को एक और झटका, क्या भारत विरोधी अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ से सम्बन्ध चलते दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन पर ताला डाला?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इन दिनों झटके पर झटके लग रहे हैं। एक तरफ सत्येंद्र जैन जेल में हैं और उनका मसाज वाला वीडियो उनके गले की हड्डी बना हुआ है वहीं इस बीच दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के आदेश पर दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन के उपाध्यक्ष जैस्मीन शाह को उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है। जैस्मीन शाह के कार्यालय के कर्मचारियों को भी वापस बुला लिया गया है और उनके सिविल लाइंस स्थित कार्यालय पर भी ताला जड़ दिया गया है। भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने शिकायत की थी कि जैस्मीन शाह अपने कार्यालय का दुरुपयोग अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी) की राजनीतिक उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे थे। इससे केजरीवाल का अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ अब बेनकाब होने लगा है। विदेश में स्थित कई एनजीओ से केजरीवाल के संबंध रहे हैं और जैस्मीन शाह भी उसी इकोसिस्टम का हिस्सा रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने जैस्मीन शाह जैसे लोगों को अपने इकोसिस्टम में फिट करने के लिए दिल्ली डायलॉग कमीशन बनाया था। लेकिन अब इसके ऊपर से भी पर्दा उठने लगा है।

 जैस्मीन शाह पर पद के दुरुपयोग का आरोप

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने जैस्मीन शाह को दिल्ली संवाद एवं विकास आयोग के उपाध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया है। उन पर राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप है। कुछ दिन पहले जैस्मीन शाह पर आरोप लगे थे कि वह बतौर आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता भी बयान जारी कर रहे हैं और मीडिया से बात कर रहे हैं। इसी को लेकर उपराज्यपाल कार्यालय ने उन पर सवाल उठाए थे और नोटिस भेजकर जवाब तलब किया था। उपराज्यपाल ने डीडीसीडी के वाइस चेयरमैन जैस्मीन शाह को मिलने वाली सभी सरकारी सेवाओं और सुविधाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उन्होंने अफसरों को शाह के दफ्तर पर तुरंत ताला लगाने का निर्देश दिया है। उनका सरकारी वाहन और स्टाफ भी तुरंत वापस लेने का आदेश एलजी ने अधिकारियों को दिया है। दिल्ली सरकार डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन (DDC) अपना थिंकटैंक बताती रही है, लेकिन इसकी आड़ कुछ और ही कहानी चल रही थी यह अब सामने आ रहा है। दिल्ली की सत्ता में आने के बाद अरविंद केजरीवाल सरकार ने इसका गठन किया था।

इस तरह प्रकाशित होती है NYT और खलीज टाइम्स में पेड न्यूज

अब्दुल लतीफ जमील सऊदी अरब में स्थित एक पारिवारिक स्वामित्व वाला व्यावसायिक घराना है। अब इससे आप समझ सकते हैं कि दिल्ली एजुकेशन मॉडल को लेकर अमेरिका स्थित NYT और गल्फ स्थित खलीज टाइम्स में पेड न्यूज क्यों प्रकाशित की गई! अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने के बाद, J-PAL ने आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडु और गुजरात सहित कई राज्य सरकारों के साथ MOU किया है। लेकिन दिल्ली की नीति में जितनी दखलंदाजी इनकी है वैसी कहीं और नहीं दिखती। इस साल फरवरी में, डीडीसी ने फिर से J-PAL के साथ एक नया समझौता ज्ञापन किया और उन्हें सभी नीति और योजना डेटा तक पहुंच प्रदान की! यह हमारी चिंता होनी चाहिए! दिलचस्प बात यह है कि एमआईटी में ‘फोर्ड फाउंडेशन’ इंटरनेशनल के इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी 2019 में कांग्रेस की न्याय योजना के पीछे मास्टरमाइंड थे! अब, फोर्ड फाउंडेशन की ए और बी टीम कौन है? वहीं इकबाल धालीवाल अब J-PAL के वैश्विक कार्यकारी निदेशक हैं। वह गीता गोपीनाथ के पति हैं। वह एक अमेरिकी नागरिक हैं और एक कम्युनिस्ट परिवार से ताल्लुक रखती हैं!

केजरीवाल को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश का समर्थन !

अरविंद केजरीवाल हमेशा दावा करते हैं कि वह सिर्फ एक आम व्यक्ति हैं लेकिन ये सभी सबूत बताते हैं कि उन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश, एनजीओ, मीडिया और अन्य सभी विदेशी-वित्तपोषित संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है! इससे यह भी साबित होता है कि उनकी मुफ्तखोरी की राजनीति का सूत्रधार एक विदेशी चंदा देने वाली विदेशी संस्था है। वे अपने अंतरराष्ट्रीय तंत्र का उपयोग करके एक नकली शिक्षा और चिकित्सा मॉडल बनाने में उनकी मदद करते हैं। इस विदेशी संस्था ने उनकी पूरी सरकारी नीति भी तैयार की। वे न केवल नीति तैयार करते हैं, वे उसे ट्रैक भी करते हैं! तो अब बताइए दिल्ली सरकार कौन चलाता है?

इस तरह बना दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन

केजरीवाल के विदेशी संस्थाओं एवं एनजीओ से संपर्क बहुत पहले से हैं और अब भी बने हुए हैं। 2003 में अभिजीत बनर्जी को एमआईटी में ‘फोर्ड फाउंडेशन’ अर्थशास्त्र के अंतर्राष्ट्रीय प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था। उसी वर्ष, उन्होंने अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब (J-PAL) की स्थापना की। 2000 से 2010 के बीच केजरीवाल को अपने एनजीओ के लिए फोर्ड फाउंडेशन से सीधे फंडिंग मिली। उन्हें अशोका फेलोशिप और मैग्सेसे अवार्ड भी मिला है, जो फोर्ड फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित हैं। दिसंबर 2013 में फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल के प्रोफेसर और अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब (J-PAL) के संस्थापक ने मीडिया में आप के लिए समर्थन और लेख लिखे। फरवरी 2015 में चुनाव के दौरान उन्होंने आप का समर्थन करने के लिए एक लेख लिखा और लिखा कि “जो कोई भी भारतीय लोकतंत्र की परवाह करता है उसे 7 फरवरी को आप का समर्थन करना चाहिए।” फरवरी 2015 में केजरीवाल ने सरकार बनाई और दिल्ली के लिए एक नीति बनाने और उनकी सलाह और योजना पर दिल्ली सरकार चलाने के लिए एक थिंक टैंक दिल्ली डायलॉग कमीशन (DDC) भी बनाया।

नीति आयोग की तर्ज पर केजरीवाल ने बनाया था डायलॉग कमीशन

दरअसल, अरविंद केजरीवाल सरकार ने राजधानी में दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन की स्थापना की थी। नीति आयोग की तर्ज पर इस कमीशन का उद्देश्य राजधानी के विकास के लिए विभिन्न मुद्दों पर दिल्ली सरकार को सलाह देना था। इस कमीशन की सलाह पर ही राजधानी में विभिन्न कार्य किये जा रहे थे और इसकी चारों ओर चर्चा हो रही थी। लेकिन भाजपा नेताओं का आरोप रहा है कि इस कमीशन के चेयरमैन जैस्मिन शाह आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने का काम कर रहे थे। वे टीवी बहस में आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता के रूप में पार्टी का पक्ष रखा करते थे। इसके बाद ही प्रवेश वर्मा ने शिकायत दी जिस पर कार्रवाई करते हुए उन्हें उनके पद से हटा दिया गया।

जैस्मीन शाह अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ गठजोड़ का हिस्सा हैं

2016 में जैस्मीन शाह आप में शामिल हो गए और तुरंत उन्हें डिप्टी सीएम सिसोदिया के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया। जैस्मीन शाह आप में शामिल होने से पहले अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब (J-PAL) के साथ काम कर रहे थे। 2018 में केजरीवाल ने जैस्मीन शाह को डीडीसी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया और उन्हें दिल्ली के लिए नीति बनाने की पूरी जिम्मेदारी दे दी। 2019 में डीडीसी ने अपनी सभी योजनाओं की निगरानी के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण डेटा है लेकिन किसे परवाह है? कोई इस महत्वपूर्ण डेटा को किसी विदेशी संस्था को कैसे सौंप सकता है? ऐसा लगता है कि मुफ्त बिजली से लेकर ‘मीडिया’ शिक्षा मॉडल ‘फोर्ड फाउंडेशन’ इंटरनेशनल के प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी द्वारा विकसित किया गया है! बाद में 2019 में, उन्होंने अपने J-PAL प्रोजेक्ट के लिए अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीता।

सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और अमान्तुल्लाह खान पहले ही जांच के घेरे में

आम आदमी पार्टी के नेताओं मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और अमान्तुल्लाह खान पर विभिन्न मामलों में जांच चल रही है। एमसीडी चुनावों के कारण इन मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप गंभीर हो गए हैं। जैस्मिन शाह पर हुई कार्रवाई के बाद इस बात की पूरी संभावना है कि आम आदमी पार्टी यह आरोप लगाएगी कि उसे काम नहीं करने दिया जा रहा है और भाजपा उसके कार्यों में बाधा पहुंचाने का काम कर रही है। आम आदमी पार्टी इसके पहले भी इस तरह के आरोप लगाती रही है। वहीं, भाजपा इस पर आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार को जिम्मेदार बताती रही है। चुनावी मौसम में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर एक नई जंग देखने को मिल सकती है।