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शरजील इमाम पर चलेगा देशद्रोह का केस: दिल्ली कोर्ट ने दिया आदेश

दिल्ली की एक अदालत ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों से जुड़े मुख्य आरोपित शरजील इमाम  के खिलाफ 24 जनवरी 2022 को देशद्रोह, गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा (UAPA) समेत कई अन्य धाराएँ लगाने का आदेश दिया है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (यूपी) और जामिया इलाके (दिल्ली) में एंटी-सीएए (Citizenship Amendment Act) प्रदर्शन के दौरान शरजील द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषणों को लेकर ये धाराएँ लगाई जाएँगी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने आदेश दिया है कि यूएपीए की धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा) के साथ आईपीसी की धारा 124ए (देशद्रोह), 153ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153बी (आरोप, राष्ट्रीय-एकता के लिए पूर्वाग्रह), 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए बयान) के तहत आरोप तय किए जाएँ।

वहीं शरजील इमाम की ओर से पेश हुए वकील तनवीर अहमद मीर ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल द्वारा दिए गए भाषणों में हिंसा को लेकर कुछ भी नहीं कहा गया था। अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोप केवल बयानबाजी थी, जिनका कोई आधार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की आलोचना करना देशद्रोह नहीं हो सकता है।

शरजील इमाम का नाम शाहीन बाग़ प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों में भी लिया जाता है। वह JNU का पूर्व छात्र है। 2013 में उसने जेएनयू में आधुनिक इतिहास से पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। इसी के साथ उसने एमटेक की पढ़ाई आईआईटी बॉम्बे से पूरी की। वह मूल रूप से वह बिहार के जहानाबाद स्थित गाँव काको का निवासी है। शरजील इमाम पर मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश में भी केस दर्ज हैं।

शरजील पर यह भी आरोप लगाया गया था कि उसने अपना भाषण ‘अस-सलामु अलैकुम’ बोल कर शुरू किया था, जो यह दिखाने के लिए पर्याप्त है कि वह एक विशेष समुदाय को भड़काने का प्रयास कर रहा था। इमाम को 13 दिसंबर, 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया में और 16 जनवरी, 2020 को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवसिर्टी में भड़काऊ भाषण देने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

शरजील इमाम को 28 जनवरी को बिहार के जहानाबाद के काको से गिरफ्तार किया गया था। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देते हुए उसने कहा था, “अब वक्त आ गया है कि हम गैर-मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं। अगर 5 लाख लोग हमारे पास ऑर्गेनाइज्ड हों तो हम नॉर्थ-ईस्ट और हिंदुस्तान को परमानेंटली काट कर अलग कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से काट ही सकते हैं। मतलब इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उनको हटाने में एक महीना लगे। जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से।” वह 28 जनवरी, 2020 से जेल में बंद है।

उत्तर प्रदेश : एएमयू के छात्रों ने यति नरसिंहानंद सरस्वती के विरोध में प्रदर्शन का ऐलान किया

महंत यति नरसिंहानंद के विरोध जमावड़ा शुरू होने लगा है, लेकिन अपने आपको हिन्दू संरक्षण कहने वाले आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद, हिन्दू महासभा और भाजपाई सच्चाई का साथ देने में अभी तक संकोच कर रहे हैं। क्या इस घमासान में फिर हौज़ काजी थाना में दर्ज 1986 दोहराया जाएगा? वह भी इन्हीं आयतों पर था, कलकत्ता हाई कोर्ट में 124 आयतों के विरुद्ध दर्ज था, जो Quran Petition के नाम से चर्चित था और अब वसीम रिज़वी ने भी उन्हीं आयतों के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। लेकिन वह कौन था जिसने 1986 में दिल्ली की एक कोर्ट के निर्णय को निरस्त कर दिया था? यदि उस समय उस निर्णय को स्वीकार लिया होता, आज भारत ही नहीं विश्व की स्थिति ही एकदम भिन्न होती। किसी को 'गंगा-जमुनी तहजीब' जैसे गुमराह करने वाले नारे नहीं लगाने पड़ते।   
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्रों ने डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के कथित इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद विरोधी टिप्पणी विरोध में प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रदर्शन रविवार (4 अप्रैल) को शाम 5 बजे बुलाया गया है।

प्रदर्शन से जुड़ा हुआ एक संदेश सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है जिसमें लिखा है, “पैगंबर मोहम्मद की खिलाफत में नरसिंहानंद सरस्वती के द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयान के विरोध में 4 अप्रैल 2021 को प्रदर्शन किया जाएगा।” 

इस वायरल हो रहे संदेश में लिखा है कि प्रदर्शन विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी कैंटीन से शुरू होकर डक प्वाइंट तक जाएगा। इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने सोशल मीडिया में यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ जान से मार देने की धमकी वाला एक पोस्ट भी लिखा था।

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उत्तर प्रदेश : नरसिंहानंद की गर्दन काटने की धमकी देने वाले अमानतुल्लाह खान के खिलाफ UP पुलिस से FIR

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उत्तर प्रदेश : नरसिंहानंद की गर्दन काटने की धमकी देने वाले अमानतुल्लाह खान के खिलाफ UP पुलिस से FIR
कुरान की 26 आयतों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज करने पर वसीम रिज़वी कहा- ये आतंक को
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कुरान की 26 आयतों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज करने पर वसीम रिज़वी कहा- ये आतंक को
इस्लामी आतंकवाद पर प्रश्नोत्तर को लेकर भड़की इस्लामी भीड़, प्रकाशन संस्थान के दफ्तर पर हमला: तोड़

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राजस्थान में मजहब के नाम पर इस्लामी भीड़ द्वारा
दिल्ली : ‘लड़कियों के कपड़े फाड़ कहा – हिन्दुओं के खून की होली खेलेंगे’: हरिजनों पर हमले में फरमान

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दिल्ली : ‘लड़कियों के कपड़े फाड़ कहा – हिन्दुओं के खून की होली खेलेंगे’: हरिजनों पर हमले में फरमान

अमानतुल्लाह ने यति के विरुद्ध शिकायत भी दर्ज कराई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने यति नरसिंहानंद सरस्वती के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की थी। वहीं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने यूपी पुलिस से अमानतुल्लाह के विरुद्ध कार्यवाई करने की माँग की है। अमानतुल्लाह ने सोशल मीडिया पर नरसिंहानंद की गर्दन काटने की धमकी दी थी।

AMU के फरार छात्र नेता फरहान जुबैरी की तत्काल गिरफ्तारी का आदेश

फ्रांस के बहाने देशविरोधी बयान देने वाले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के छात्र नेता फरहान जुबैरी की तत्काल गिरफ़्तारी का आदेश जारी किया गया है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन लोगों पर नकेल कसना शुरू किया है, जो फ्रांस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की आड़ में देशविरोधी गतिविधियाँ कर रहे हैं। फरहान जुबैरी पर कई गंभीर धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस्लामी कट्टरवाद पर एक के बाद एक कार्रवाई कर रहे फ्रांस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान AMU के छात्र नेता फरहान जुबैरी ने ईसाईयों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पुलिस ने जानकारी दी है कि अब फरहान जुबैरी फरार हो गया है।

मजे की बात इस प्रकरण में यह है कि इस्लाम के नाम पर लोगों में जहर उगलने वाला अब कार्यवाही होते देख छुपा फिर रहा है, मरती है जनता मरने दो, तुम तो पैसे के दम पर लोगों को भड़का कर कहीं किसी बिल में छुप जाओ और दंगा होने पर मरने वालों की लाशों पर सियासत कर अपनी तिजोरियां भरते रहो, ये हैं इन अराजक तत्वों की असलियत। जितनी जीवट के साथ प्यार का सन्देश दे रहा था, अब क्यों फरार हो गया?

उत्तर प्रदेश पुलिस उसकी गिरफ़्तारी के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। FIR के अनुसार, गुरुवार (अक्टूबर 29, 2020) को शाम 4 बजे AMU के छात्र नेता फरहान जुबैरी द्वारा डक प्वाइंट से बाब-ए सैय्यद गेट तक विरोध मार्च निकाला गया।

साथ ही फ्रांस की ‘शार्ली हेब्दो’ पत्रिका में छपे पैगम्बर मुहम्मद के कार्टून्स के लिए ईसाईयों को दोषी बताया गया और उनके जान-माल की क्षति की धमकी दी। FIR में जिक्र किया गया है कि इस आपत्तिजनक टिप्पणी से जनमानस में भय और असुरक्षा की भावना जन्म ले सकती है। इसलिए, पुलिस ने समुचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के वैधानिक कार्रवाई की बात कही है। अब उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है।

सोशल मीडिया पर भी उसका बयान खूब शेयर हुआ था, जिसमें वो ईसाईयों के कत्लेआम को जायज ठहरा रहा था। उसने कहा था कि पैगम्बर मुहम्मद के साथ बदसलूकी करने वाले का सिर कलम कर दिया जाएगा। कानपुर के विधनू के रहने वाला जुबैरी AMU छात्र संघ का पदाधिकारी रह चुका है और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन से जुड़ा हुआ है। CAA विरोधी उपद्रवों में उसकी सक्रिय भूमिका रही थी।

अलीगढ़ के सिविल लाइन थाने में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जुबैरी पर शिकंजा कसने के लिए कई पुलिस टीमों को लगाया गया है। उसने भड़काऊ बयान देते हुए कहा था कि हम जिसकी उम्मत में हैं, जिसकी खातिर ज़िंदगी में हैं, अगर उनके लिए कोई गलत बात करेगा तो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत के अन्य हिस्सों में भी मुस्लिम समुदाय के नेताओं और लोगों ने फ्रांस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है।

मई 2020 में भी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्र और पूर्व कैबिनेट सदस्य फरहान जुबैरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। AMU में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर हुए बवाल में वह शामिल था। उस पर कुल 11 मुकदमे दर्ज किए गए थे। एसपी सिटी की गाड़ी पर पथराव, पुलिस पर हमले सहित सात मुकदमों में वह वांछित चल रहा था। वो कुछ दिन जेल में भी रहा था। 

‘उसके (अल्लाह) खिलाफ गुस्ताखी की तो सिर तन से जुदा कर देंगे’ – AMU के छात्र नेता फरहान

AMU छात्र नेता फ़रहान ज़ुबैरी (फोटो साभार - ट्विटर)
फ्रांस के शिक्षक की गला काट कर हत्या कर दिए जाने के बाद फ्रांस की सरकार ने कट्टरपंथी मुस्लिमों के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा है। नतीजतन दुनिया भर के तमाम इस्लामी मुल्कों का कट्टर वर्ग फ्रांस के विरोध में नज़र आ रहा है। इसी तरह भारत में भी इस्लाम का एक कट्टरपंथी हिस्सा फ्रांस का विरोध कर रहा है जबकि भारत सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट रूप से फ्रांस का समर्थन करती है। हैरान कर देने वाले मामले में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्रसंघ सदस्य को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उसके (अल्लाह) खिलाफ़ कोई गुस्ताख़ी की, तो हम उसका सिर कलम कर देंगे।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र नेता फरहान ज़ुबैरी को वीडियो में और भी कई हैरान करने वाली बातें कहते हुए सुना जा सकता है। वीडियो की शुरुआत में वह कहता है:

“अगर उनके (अल्लाह) के खिलाफ़ कोई गुस्ताख़ी भरी हरकत की, तो हम उसका सिर कलम कर देंगे/उसका सिर तन से जुदा कर देंगे। क्योंकि हमारी बुनियाद, इस्लाम की बुनियाद कलमे से है और कलमा है ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदुर रसूलुल्लाह। तो जिसकी खातिर हम ज़िंदगी में हैं, जिसकी उम्मत में हैं, अगर उसके लिए कोई गलत चीज़ करेगा तो तो हम बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

इस घटनाक्रम के साथ और भी हैरानी की बात यह है कि मौके पर तमाम लोग मौजूद थे और वह छात्र की बात पर चिल्ला कर सहमति भी दर्ज कराते हैं। इसके बाद फरहान जुबैर ने कहा कि एक देश के राष्ट्रपति कहते हैं कि इमारत पर जो कार्टून दिखाया गया है, वह फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन (अभिव्यक्ति की आज़ादी) है।

इसके अलावा टाइम्स नाउ में हुई परिचर्चा के दौरान भी फरहान ज़ुबैरी की जहरीली बयानबाज़ी जारी रहती है। सिर तन से जुदा करने के बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उसने कहा, “बिलकुल! गुस्ताख़ी करने की हिम्मत कैसे होगी, क्यों करेगा कोई गुस्ताख़ी?” पूरी परिचर्चा के दौरान फरहान ज़ुबैरी ने चीखना और चिल्लाना जारी रखा। अपने बयान के लिए माफ़ी माँगना तो दूर उसने वीडियो में कई बार यहाँ तक कह दिया कि वह अपने बयान से पीछे नहीं हटेगा। 

वीडियो और प्रकरण के चर्चा में आने के बाद उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ पुलिस ने तत्काल प्रभाव से इसका संज्ञान लिया। अलीगढ़ पुलिस ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए कहा कि प्रकरण में जाँच हेतु एएमयू प्रशासन से पत्राचार किया जा रहा है।

ठीक इसी तरह महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई स्थित भिंडी बाज़ार में फ्रांस के राष्ट्रपति का पोस्टर सड़क पर चिपका कर विरोध किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन के वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि रास्ते पर मैक्रों के पोस्टर चिपके हुए हैं और उसके ऊपर से वाहन गुज़र रहे हैं। इस दौरान सबसे ज़्यादा हैरानी की बात तब हुई, जब एक मौलाना ने इस प्रकरण पर बयान दिया था। 

रज़ा एकेडमी के मौलाना अब्बास रिज़वी ने कहा, “फ्रांस के राष्ट्रपति ने अल्लाह के रसूल की शान में जो गुस्ताखी की है, उसको ऐसी ही सज़ा मिलनी चाहिए।” इसके अलावा मौलाना अब्बास रिज़वी ने मुंबई की सड़कों पर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का पोस्टर लगाए जाने और उसके ऊपर चप्पल-जूते पहन कर चलते लोगों के साथ कुत्ते-बिल्लियों के चलने का समर्थन भी किया था।

इसी तरह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस्लामी कट्टरपंथियों ने ‘अद्भुत मिसाल’ पेश की थी। भोपाल के इकबाल मैदान में कांग्रेस विधायक आरिफ़ मसूद की अगुवाई में हज़ारों की तादाद में लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया था। इतना ही नहीं, मौजूद लोगों ने फ्रांस के राष्ट्रपति से माफ़ी माँगने तक की बात कह दी थी।

इरफ़ान हबीब को नोटिस, AMU में दिया था ज़हरीला भाषण

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
हाल ही में इतिहासकार इरफ़ान हबीब ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान के साथ दुर्व्यवहार किया था। इरफ़ान हबीब राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान पर झपट पड़े थे और उनका कॉलर पकड़ कर नोचना चाहते थे। जब ख़ान ने मौलाना आज़ाद का जिक्र किया तो भड़के इरफ़ान हबीब ने कहा कि वो इन्हें नहीं सुनेंगे। अब इरफ़ान हबीब को उनके कई ज़हरीले बयानों के कारण यूपी के एक अधिवक्ता ने नोटिस भेजी है। आरोप है कि उनके बयानों से देश की अखंडता और सम्प्रभुता को ख़तरा पहुँचा है।
88 वर्षीय इरफ़ान हबीब पर आरोप है कि उन्होंने न सिर्फ़ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उपनाम को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी भला-बुरा कहा। लेकिन इससे भी बड़ा आरोप है कि लोगों को भड़का कर वो देश की अखंडता को नुकसान पहुँचाने का काम कर रहे हैं। अलीगढ़ सिविल कोर्ट के अधिवक्ता ने ये नोटिस भेजी। इरफ़ान हबीब ने ये ज़हरीला भाषण एएमयू में दिया था। एएमयू पहले से ही विवादित यूनिवर्सिटी रहा है और सीएए विरोध के दौरान भी यहाँ हिंसा भड़क गई थी।

वकील संदीप कुमार गुप्ता ने अपनी नोटिस में आरोप लगाया है कि सोमवार (जनवरी 13, 2020) को इरफ़ान हबीब के दिए भाषण से देश की ‘अखंडता और विविधता’ को ख़तरा पहुँचा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ये भाषण देश की सम्प्रभुता को भी ठेस पहुँचाने वाला है। गुप्ता ने अपनी नोटिस में इरफ़ान हबीब को सम्बोधित करते हुए लिखा है:
“आपने अमित शाह को सलाह दी कि वो अपने नाम से ‘शाह’ उपनाम हटा लें। आपने कहा कि ये फ़ारसी शब्द है। आपने ये भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गठन मुस्लिमों पर हमला करने के लिए किया गया। आपने वीर सावरकर को देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया। क्या आपको नहीं पता कि ‘टू नेशन थ्योरी’ मोहम्मद अली जिन्ना के दिमाग की उपज थी? आपने स्वच्छ भारत अभियान में महात्मा गाँधी के चश्मे के प्रयोग का मखौल उड़ाया।”
इसके अलावा इरफ़ान हबीब के कई ज़हरीले बयान अख़बारों में भी छपे हैं, ऐसा अधिवक्ता की नोटिस में दावा किया गया है। उन्होंने इरफ़ान हबीब से 7 दिनों के भीतर बिना शर्त माफ़ी माँगने को कहा है। उन्होंने कहा है कि अगर हबीब ने माफ़ी नहीं माँगी तो वे उनके ख़िलाफ़ लीगल एक्शन लेने के लिए बाध्य होंगे। इरफ़ान हबीब ने ये बयान सीएए के विरोध में दिए थे।
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ज्ञात हो, इरफ़ान जैसे कथित इतिहासकारों ने कांग्रेस और वामपंथियों से चंद चांदी के सिक्कों की खातिर भारत के वास्तविक इतिहास को धूमिल कर मुग़ल आतताइयों को महान बताकर गलत इतिहास पढ़ने के लिए मजबूर किया। लेकिन अब जब इन कथित इतिहास के भ्रमित इतिहास से  परतें हटती देख, हो रही बेचैनी को समझा जा सकता है।   

उपद्रव, उत्तेजक नारों के बाद जामिया कैंपस में दाखिल हुई दिल्ली पुलिस

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में रविवार को दिल्ली के जामिया इलाके में जमकर हिंसा हुई। रविवार (दिसंबर 15, 2019) शाम प्रदर्शनकारियों ने कई बसें और बाइक फूँक दी। उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने अराजक तत्वों के जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में घुसे होने के संदेह पर कैंपस से सभी छात्रों को बाहर निकाल दिया।
छात्रों ने एडमिशन ब्लॉक के बाहर निकलकर पुलिस पर पथराव और हवाई फायरिंग की। जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज कर रबर बुलेट दागी। यूनिवर्सिटी में माहौल बिगड़ता देख 5 जनवरी तक कॉलेज को बंद कर दिया गया और देर रात ही सभी हॉस्टल खाली कराए गए। इसके अलावा सुरक्षा लिहाज से अलीगढ़ में इंटरनेट सेवाएँ भी सोमवार तक बंद हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 6 जिलों मेरठ, बुलंदशहर, कासगंज, बागपत, सहारनपुर एवं बरेली में एहतियातन धारा 144 लागू की गई है।
CAA Protest: आज संभल कर घर से निकलें, दिल्‍ली के इन इलाकों में नहीं कर सकते प्रवेशरविवार शाम दिल्ली के जामिया इलाके में शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन पहले उग्र हुआ, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने बसों और वाहनों में आग लगा दी। जामिया में इस हिंसा के खिलाफ जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों के अलावा जेएनयू और दूसरे संगठनों के लोगों ने भी पुलिस मुख्यालय पर देर रात प्रदर्शन किया। देर रात पुलिस द्वारा 50 छात्रों को रिहा करने के बाद सोमवार (दिसंबर 16, 2019) सुबह 4 बजे प्रदर्शन खत्म हुआ।
हालाँकि जामिया इलाके में हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। दिल्‍ली सरकार ने इलाके में स्‍कूलों की छुट्टी कर दी है। जामिया कैंपस में 5 जनवरी तक छुट्टी घोषित कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने निष्‍पक्ष और स्‍वतंत्र जाँच की बात कही है। सोमवार को पुलिस और छात्रों के एक दल की मुलाकात हो सकती है। बता दें कि रविवार को जामिया में प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई हिंसा और पथराव में दक्षिण पूर्व जिला डीसीपी, अतिरिक्त डीसीपी (दक्षिण), 2 सहायक पुलिस आयुक्त, 5 स्टेशन हाउस अधिकारी और निरीक्षक सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
हिन्दुओं के विरुद्ध नारेबाजी 
इसी क्रम में एक नया वीडियो आया है। इसमें जामिया के छात्र हिन्दुओं के ख़िलाफ़ नारेबाजी कर रहे हैं। घृणा फैलाने वाले नारे लगा रहे हैं। इस वीडियो में जामिया के छात्रों को ‘हिन्दुओं से आज़ादी’ के नारे लगाते देखा जा सकता है। हालाँकि, नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध-प्रदर्शन में उन्होंने हिन्दुओं के प्रति घृणास्पद नारे क्यों लगाए, ये चर्चा का विषय है।
जामिया के छात्रों ने ‘हिन्दुओं से लेकर रहेंगे आज़ादी’ का नारा लगाया। इससे पता चलता है कि इन विरोध-प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध नहीं, बल्कि कुछ और है। अगर एक यूनिवर्सिटी में पढ़े-लिखे छात्र इस तरह की नारेबाजी कर सकते हैं तो फिर बंगाल में हजारों की संख्या में मस्जिद से निकल कर सार्वजनिक संपत्ति को तहस-नहस करने वाले मुस्लिम दंगाइयों के मन में क्या सब चल रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। पूरे बंगाल में कई रेलवे स्टेशनों में तोड़-फोड़ कर के यात्रियों को घंटों बंधक बनाए रखे जाने की ख़बरें आ रही हैं।
वहीं यूनिवर्सिटी ने पुलिस पर जबरन विश्वविद्यालय परिसर में घुसने और छात्रों के साथ मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। जिसका जवाब देते हुए दिल्ली पुलिस ने स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस का कहना है कि वे स्थिति को नियंत्रित करने के लिए परिसर में दाखिल हुए थे। उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों को हिरासत में लिया गया है।






दिल्ली पुलिस ने कहा, “हमने हिंसा के बाद स्थिति से निपटने के लिए कार्रवाई की। जामिया यूनिवर्सिटी में स्थिति नियंत्रण में है। यह हिंसक भीड़ थी, जिसमें से कुछ को हिरासत में लिया गया है।” दक्षिण पूर्व दिल्ली पुलिस के डीसीपी चिनमय बिस्वाल ने कहा, “किसी पर कोई फायरिंग नहीं की गई है। झूठी जानकारियाँ फैलाई जा रही हैं।” उन्होंने कहा, “भीड़ ने आगजनी की, मोटरसाइकलों में आग लगा दी गई, हम पर पथराव किया गया। हमारा एकमात्र उद्देश्य भीड़ को पीछे करना था, ताकि इलाके में कानून-व्यवस्था बरकरार रखी जाए। यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स से हमें कोई दिक्कत नहीं है।” दिल्‍ली पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिए गए 35 छात्रों को कालकाजी पुलिस स्‍टेशन से छोड़ दिया गया। इसके अलावा 15 छात्रों को न्‍यू फ्रेंड्स कॉलोनी से छोड़ा गया।
जहाँ पर हिंसा हुई थी, वहाँ पर आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान भी मौजूद थे। हालाँकि, अमानतुल्लाह ख़ान ने दावा किया है कि वो वारदात वाली जगह पर न तो विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे और न ही उसका हिस्सा थे। उन्होंने भले ही आरोपों से इनकार किया हो लेकिन वीडियो में उन्हें उस विरोध प्रदर्शन में देखा जा सकता है, जो बाद में इतना हिंसक हो उठा कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आँसू गैस का प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने कहा है कि इस पूरे मामले की जाँच की जा रही है
एएमयू, पुलिस प्रशासन
 के छात्रों ने किया पथराव, हवाई फायरिंग: कैंपस में दाखिल हुई पुलिस, हॉस्टल खाली कराए
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कल दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई पुलिस कार्रवाई पर आक्रोश जताते हुए प्रदर्शन के लिए निकली छात्रों की भीड़ परिसर का मुख्य गेट तोड़कर एएमयू सर्किल पर आ गई। जहाँ पुलिस ने इन्हें पानी की बौछार कर रोकने की कोशिश की, लेकिन छात्रों ने रुकने के बजाय पुलिस पर पथराव किया। हालाँकि, जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने लाठीचार्ज कर छात्रों को दौड़ाने का प्रयास किया। मगर इस बीच छात्र पथराव के अलावा हवाई फायरिंग करने लगे। जिसमें प्रॉक्टोरियल टीम, डीआइजी डॉ. प्रीतेंदर सिंह, एसपी सिटी अभिषेक कुमार के अलावा आरएएफ व पुलिस के 20 जवान घायल हो गए। इसके अलावा 30 छात्रों को भी चोटें आई। हालात काबू में पाने के लिए पुलिस आँसू के गोले छोड़ते हुए कैंपस में अंदर घुस गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रात 11 बजे तक चले इस टकराव के बाद पुलिस ने एएमयू के अंदर से 8 युवकों को गिरफ्तार किया और देखते ही देखते पूरा कैंपस छावनी में बदल गया। छात्रों की ओर से लगातार पथराव के बाद आरएएफ के दो वज्र वाहन, वाटर कैनन की गाड़ी और एक फायर ब्रिगेड की गाड़ी पुलिस बल के साथ कैंपस में घुस गई। ऐसा पहली बार हुआ है, जब एएमयू के अंदर व्रज वाहन गए। 
नागरिकता संशोधन विधेयक पर जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच कुछ वीडियो वायरल हो रही हैं। जिनमें पुलिस और छात्रों के बीच का टकराव नहीं, बल्कि कुछ लोगों द्वारा लगाए जा रहे आपत्तिजनक नारे सुनाई पड़ रहे हैं। इस वीडियो को सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लैटफॉर्म पर शेयर किया जा रहा है। साथ ही दावा किया जा रहा है कि ये छात्र जामिया और एएमयू के हैं।

अलीगढ़ से वायरल वीडियो में सुना जा सकता है कि छात्र परिसर में खड़े होकर कह रहे हैं, “हिंदुत्व की कब्र खुदेगी एएमयू की छाती पर, सावरकर की कब्र खुदेगी एएमयू की धरती पर, बीजेपी की कब्र खुदेगी एएमयू की छाती पर…।” यह वीडियो कब का यह साफ़ नहीं है।
टीम अशोक राजपूत की फेसबुक वाल से  to Nationalist Ashok Rajput Group - राष्ट्रवादी अशोक राजपूत ग्रुप
1 hr

Ashok Yadav
तीनों चित्र अलग-अलग दिन के है लेकिन तीनों में जो लड़कियां हैं वह समान है और यह इस उपद्रव का रोजाना का हिस्सा थीं जब इनके साथ सख्ती हुई तो सबको मानवता याद आ गई,क्या अपराध और दंगा इसके दोषियों को नियंत्रित करते समय महिला या पुरुष देखा जाएगा ? जब कानून व्यवस्था बिगाड़ोगे तो उसका दंड भी भुगतोगे !