Showing posts with label Ayodhya dispute. Show all posts
Showing posts with label Ayodhya dispute. Show all posts

CJI, मोदी ने किया साफ़: अब काशी, मथुरा सहित किसी धार्मिक स्थल पर विवाद के लिए तैयार नहीं है देश

रंजन गोगोई
अयोध्या फैसले में 9 नवंबर को कोर्ट ने सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया और इसके बाद न्यायपालिका, सरकार एवं RSS जैसे संगठन सब एक मत देते नजर आए। दरअसल, अलग-अलग बयानों में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरसंघ संचालक मोहन भागवत ने संदेश दिया कि विवादों को पीछे छोड़कर अब देश के आगे बढ़ने का वक्त है। जिसके बाद ऐसा मानकर चला जा रहा है कि भविष्य में सांप्रदायिक धार्मिक स्थलों के नामपर विवाद होने की गुंजाइश कम है। फिर चाहे मामला मथुरा-काशी से संबंधित ही क्यों न हो।
बता दें कि अयोध्या की तरह काशी के विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद और मथुरा में भी मस्जिद विवाद सालों से चल रहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1,045 पेज के फैसले में 11 जुलाई, 1991 को लागू हुए प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 1991 का जिक्र करते हुए साफ कर दिया है कि काशी और मथुरा के संदर्भ में यथास्थिति बरकरार रहेगी।

शनिवार को फैसला सुनाते हुए जस्टिस गोगोई ने 1991 के पूजा स्थल कानून का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि संसद का यह कानून साफ करता है कि 15 अगस्त 1947 के दिन तक जिस भी पूजा स्थल की जो भी स्थिति है, उसमें कोई धार्मिक बदलाव की इजाजत नहीं हैं। इसलिए इन मामलों से जुड़े सभी मुकदमें अब खत्म माने जाएँगे। उल्लेखनीय है कि इस कानून से सिर्फ़ राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद को ही छूट थी। जिसका मतलब साफ है कि कोर्ट अब ऐसे किसी भी मुद्दे को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को संबोधित करते हुए उसी दिन कहा कि अब देश में कटुता के लिए स्थान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब नए भारत के निर्माण में सबको जुटना है। इस दौरान उन्होंने करतारपुर कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के दिन का संदेश जोड़ने का है, जुड़ने का है और मिलकर जीने का है। सभी कटुता को तिलांजलि देने का वक्त है। नए भारत में कटुता, नकारात्मकता पर कोई स्थान नहीं होगा।
वहीं संघ संचालक ने भी अपने बयान में इस मामले से आरएसएस के जुड़ने को एक अपवाद बताया। उन्होंने कहा है कि संघ आंदोलन नहीं करता, राम मंदिर से जुड़ना केवल अपवाद था। जिससे साफ होता है कि संघ किसी और पूजा स्थल के लिए होने वाले आंदोलन से जुड़ने पर विचार नहीं कर रहा है।
इधर, मुस्लिम पक्षकारों ने भी इस फैसले को स्वीकारा है और कहा है कि ये सर्वोच्च न्यायालय का फैसला देशहित में हैं, जिसे शांति से ही स्वीकारा जाना चाहिए। हाँ, ये बात और है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड इसपर याचिका डालने पर विचार कर रहा है। लेकिन जिस तरह देश के अन्य मुसलमानों ने इसपर सहमति जताई है, उनकी ओर से भी संदेश आ रहा है कि ऐसे मामलों पर आगे विवाद से बचा जाएगा।

अशोक सिंघल को भारत रत्न दो, तुरंत करो घोषणा: सांसद सुब्रमण्यम स्वामी

सुब्रमण्यम स्वामी
भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्य सभा के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल को भारत रत्न दिए जाने की माँग की है। साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इसके लिए तुरंत घोषणा की भी माँग की है। उनकी यह माँग राम जन्मभूमि आंदोलन की दशकों की माँग पर आज सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति की मुहर के आलोक में आई है।
गौरतलब है कि हार्वर्ड से पीएचडी अर्थशास्त्री सुब्रमण्यम स्वामी खुद भी आज अंततः सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुलझाए गए राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद के पक्षकारों में से एक हैं। उन्होंने एक याचिका दायर कर अपने आस्था के आधार पर जन्मभूमि स्थल पर बनाने के मूलभूत संवैधानिक अधिकार को हिन्दू-मुस्लिम दोनों पक्षों के सम्पत्ति अधिकार से बड़ा बताया था। हालाँकि उनकी खुद की याचिका तो अदालत ने अंततः एक दूसरी बेंच के पास भेज दी, लेकिन इसके बाद इस मामले की प्रगति में अभूतपूर्व तेज़ी आई थी। 
Image result for ashok singhal
तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह
की पुलिस ने अशोक सिंघल का बहाया था खून 
इस बारे में स्वामी हमेशा दावा करते रहे हैं कि उन्हें यह मामला सुलझवाने की ज़िम्मेदारी जन्मभूमि आंदोलन के आर्किटेक्ट माने जाने वाले सिंघल ने ही अपने अंतिम दिनों में सौंपी थी। बकौल स्वामी, सिंघल ने अपनी मृत्यु आसन्न देख उनसे वादा लिया था कि वे इस मामले का हल निकलवा कर राम मंदिर बनवाने का प्रयास करेंगे, जिसके बाद स्वामी ने उक्त याचिका डाली। 
सिंघल के योगदान को आज फैसला आने के बाद स्वामी ही नहीं, कई अन्य भाजपा और हिंदूवादी संगठनों के नेताओं ने याद किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सिंघल की रामशिला पूजन की फोटो अपने गुरु के गुरु योगी दिग्विजयनाथ के साथ ट्वीट की। संघ के विचारक केएन गोविंदाचार्य ने भी भाजपा के पितृ-पुरुष लाल कृष्ण आडवाणी के साथ सिंघल के योगदान को इस आंदोलन और इस क्षण के लिए सबसे अधिक श्रेय दिया।
 
2015 में अपनी मृत्यु को प्राप्त होने वाले सिंघल 1942 में संघ प्रचारक से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने के बाद विभिन्न संघ परिवार के पदों से होते हुए 1981 में वीएचपी के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बने थे। आडवाणी के साथ उन्होंने जन्मभूमि आंदोलन का नेतृत्व किया था। 
इसके अलावा उनके लिए भारत रत्न की माँग करने वाले सुब्रमण्यम स्वामी का भी मामले से पुराना संबंध रहा है ,एक ट्विटर हिअंडल ने आज सुबह स्वामी और तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के बीच 1992 में हुए पत्राचार को ट्विटर पर साझा किया था, जिसका स्वामी अकसर उल्लेख करते हैं। उसे रीट्वीट करते हुए स्वामी ने दस्तावेज़ों की वैधता पर मुहर भी लगा दी। 

सुन्नी वक्फ बोर्ड दूसरी जगह मस्जिद बनाने को तैयार: सूत्र

Image result for सुन्नी वक्फ बोर्ड
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अयोध्या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन तक चलने के बाद खत्म हो गई है। सुप्रीम कोर्ट नवंबर में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद फैसला सुनाएगा। सूत्रों के मुताबिक मध्यस्थता पैनल ने भी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। इसमें एक बड़ी ख़बर सामने आ रही है कि सुन्नी वक्फ़ बोर्ड (Sunni Waqf Board) सरकार को जमीन देने को तैयार हो गया है। साथ ही वक्फ बोर्ड दूसरी जगह मस्जिद बनाने के लिए भी तैयार है। बता दें कि इससे पहले CJI रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने इस मामले में 40 दिन तक सुनवाई करने के बाद दलीलें पूरी कर लीं
बेंच ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। इस पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं। बता दें कि कोर्ट ने पहले ही कहा था कि सुनवाई 17 अक्टूबर को पूरी हो जाएगी। बाद में इस समय सीमा को एक दिन पहले कर दिया गया
पांच जजों की बेंच ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला-के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश देने संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई की है।
अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार योगी सरकार ने शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में अनियमितता क.....

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के इस निर्णय ने हिन्दू-मुस्लिम सभी को चकित कर दिया है। चर्चा यह है भी है कि "जब यह कदम लेना था, फिर किस कारण इसे इतने वर्षों तक लंबित कर, हिन्दू-मुसलमानों के बीच नफरत फ़ैलाने का काम करता रहा। इस विवाद में जो लाखों जानें गयीं, उनका कौन जिम्मेदार है? अब से पहले भाईचारा और गंगा-यमुना तहजीब कहाँ थी? क्या इस मुद्दे को विवादित बनाने के लिए इनको कहीं से फंडिंग हो रही थी, जो मोदी सरकार की कूटनीति के कारण बंद होने के कगार पर थी? 
रामजन्म स्थान को विवादित बनाकर राम विरोधियों ने मक्का पर भी ऊँगली उठवा दी है। अक्टूबर 16 को रिपब्लिक भारत चैनल पर अयोध्या और फैज़ाबाद से जनता की लाइव कवरेज में जनता ने मक्का मदीना में हज के दौरान बंद कमरे के आगे सजदा किया जाने पर सवाल खड़ा कर दिया है।   
सूत्रों का यह भी कहना है कि योगी सरकार द्वारा वक़्फ़ बोर्ड सम्पत्तियों में धांधली और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सीबीआई से जाँच के आदेश ने अपने आपको इस बचाने रखने के दबाव में यह कदम उठाया है। क्योकि सीबीआई जाँच में समस्त धांधलियों के उजागर होते ही मुस्लिम समाज में इनका दबदबा समाप्त होते ही कोई इनको टके के लिए भी नहीं पूछेगा। योगी-मोदी सरकारों द्वारा साम, दाम, दण्ड और भेद नीति ने इनको घुटनों के बल आने को मजबूर किया है कि जिस तरह मुस्लिम एनजीओस की जाँच होने प्रारम्भ हुई है, इन मुस्लिम एनजीओस के पदाधिकारियों को अपनी इज्जत बचाने की खातिर सबकी नींद हराम हो चुकी है। इतना बड़ा कदम उठाने के पीछे कोई न कोई राज जरूर है।  

अयोध्‍या विवाद कांग्रेस की वजह से हल नहीं हो पाया, उसने हमेशा हिंदू-मुस्लिमों को लड़ाया- इकबाल अंसारी

अयोध्‍या विवाद कांग्रेस की वजह से हल नहीं हो पाया, उसने हमेशा हिंदू-मुस्लिमों को लड़ाया- इकबाल अंसारी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
चलो देर आए, दुरुस्त आए। इतने वर्षों उपरान्त बाबरी मस्जिद पक्षकार इक़बाल अंसारी ने अयोध्या विवाद की असलियत से पर्दा हटा ही दिया। लेकिन अब जनता अंसारी और कांग्रेस दोनों से पूछना चाहती है, कि "इस विवाद में जिन हिन्दुओं की जानें गयीं और मन्दिरों को क्षति पहुंची, उसका कौन जिम्मेदार होगा?" अंसारी की आवाज़ पहले क्यों नहीं निकली? इससे पहले तो अंसारी खुद भी खूब मालपुए खा रहे थे, लेकिन केन्द्र और प्रदेश में सख्त प्रशासक के होने से इतने वषों बाद सच्चाई सामने आयी। 
ज्ञात हो, जब प्रधानमन्त्री चन्द्रशेखर इस विवाद को समाप्त करने वाले ही थे कि कांग्रेस के समर्थन से चल रही चंद्रशेखर सरकार से राजीव गाँधी ने समर्थन वापस लेकर, सरकार गिरा दी थी। क्योकि चंद्रशेखर ने मुख्य न्यायधीश को प्रधानमन्त्री आवास पर बुलाकर कहा था कि "मुझे रामजन्मभूमि पर अब फैसला चाहिए, तारीख नहीं। "  और राजीव गाँधी से यह बर्दाश्त नहीं हुआ। जबकि हर राजनीतिक दल भलीभाँति सच्चाई जानता है, लेकिन कांग्रेस सहित समस्त गैर-भाजपाई पार्टियाँ अपने वोट बैंक को सेधने के चक्कर में अयोध्या मसले को सुलझाने की बजाए विवादित बनाते रहे। पुरुषोत्तम श्रीराम और रामसेतू को लेकर उल्टा-पुल्टे बयान देते रहे, परन्तु अब जब विवाद पैदा करने वालों की असलियत सामने आ गयी है, कांग्रेस, समाजवादी, बसपा, वामपंथी और अन्य दलों की मानसिकता भी जगजाहिर हो गयी है यानि साम्प्रदायिक न भाजपा है, न आरएसएस है और न ही कोई अन्य हिन्दू संगठन, बल्कि इनके विरोधी स्वयं साम्प्रदायिक हैं। इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है। 
अंसारी ने उगल दी सच्चाई  
अयोध्‍या विवाद में बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कांग्रेस पर हमला बोला है अंसारी ने कहा है कि कांग्रेस की वजह से अयोध्‍या विवाद हल नहीं हो पाया उन्‍होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा हिंदू-मुस्लिमों को लड़ाया है। उन्‍होंने कहा कि अयोध्‍या विवाद कांग्रेस की ही देन है। अयोध्‍या में प्रियंका गांधी सिर्फ राजनीति कर रही हैं। वह वहां केवल राजनीति करने गई हैं. दर्शन पूजा का कोई राजनीतिक फायदा नहीं होगा। 
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश दौरे पर हैं और दौरे के तीसरे दिन वह अयोध्या पहुंची हैंअमेठी के मोहनगंज पहुंची कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओं से स्वागत किया। जानकारी के मुताबिक, प्रियंका गांधी हनुमानगढ़ी के दर्शन कर वहां पूजन करेंगी, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं करेंगी। प्र‍ियंका गांधी हनुमानगढ़ी में महंत ज्ञानदास से भी मुलाकात करेंगीं। इस मुलाकात में महंत ज्ञानदास राम मन्दिर पर चर्चा करेंगे। आपको बता दें कि प्रियंका गांधी से पहले प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राहुल गांधी ने भी हनुमानगढ़ी अयोध्या के राजा हनुमान जी का दर्शन कर आशीर्वाद लिया है। 
उल्‍लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने बीते 8 मार्च को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद अयोध्या विवाद मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय समिति से मध्यस्थता कराए जाने का आदेश दिया। इस समिति के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ.एम.आई. कलीफुल्ला हैं और उनके साथ आर्ट ऑफ लीविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर व वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू इसके सदस्य हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय पैनल ने बीते 13 मार्च को बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि विवाद को सुलझाने के लिए बुधवार को अपनी पहली बैठक फैजाबाद में की। अवध विश्वविद्यालय परिसर में गेस्ट हाउस की ओर जाने वाले मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। 
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने आदेश में कहा था, "हमने विवाद की प्रकृति पर विचार किया हैइस मामले में पक्षकारों के बीच सर्वसम्मति की कमी के बावजूद, हमारा विचार है कि मध्यस्थता के जरिए विवाद को सुलझाने का एक प्रयास किया जाना चाहिए"
मुस्लिम वादकारियों ने मध्यस्थता पर सहमति जताई थी, लेकिन हिंदू वादकारियों ने इसका विरोध कियाहिंदू पक्ष ने कहा था कि उनके लिए भगवान राम का जन्मस्थान निष्ठा व मान्यता का विषय है और वे इस मध्यस्थता में विपरीत स्थिति में नहीं जा सकते। 
अवलोकन करें:-

आर.बी.एल.निगम श्री श्री रविशंकर ने अयोध्‍या विवाद के समाधान की पेशकश के साथ नवम्बर 16 को अयोध्‍या में सभी पक्षकारों से मुलाकात की. श्र..


आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर द्वारा मन्दिर मसला सुलझाने के लिए दर-दर जाना, शायद बाबरी समर्थकों को राहत दे रहा है, क्योकि उन्हें मालूम...
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने 2010 के फैसले में विवादित स्थल को तीन समान भागों में बांटा है, जिसमें निर्मोही अखाड़ा, रामलला व सुन्नी वक्फ बोर्ड प्रत्येक को एक-एक भाग दिया है। 

बाबर ने जो किया उसे बदल नहीं सकते : सुप्रीम कोर्ट

अयोध्‍या विवाद: पढ़ें- SC में हिंदू पक्षकारों की वह दलीलें, जिसमें उन्‍होंने मध्‍यस्‍थता से इनकार कर दियाअयोध्या विवाद मामले में मध्यस्थता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज जारी (मार्च 6 को) सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकार ने मध्‍यस्‍थता से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू महासभा मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं हुई. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई और कहा कि विकल्प आज़माए बिना मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है? कोर्ट ने कहा कि अतीत पर हमारा नियंत्रण नहीं है, लेकिन हम बेहतर भविष्य की कोशिश जरूर कर सकते हैं. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए. बोबड़े, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय पीठ कर रही है.
जस्टिस एस.ए बोबड़े ने सुनवाई के दौरान कहा कि बाबर ने जो किया उसे बदल नहीं सकते. हमारा मकसद विवाद को सुलझाना है. इतिहास की जानकारी हमें भी है. उन्‍होंने आगे कहा कि मध्‍यस्‍थता का मतलब किसी पक्ष की हार या जीत नहीं है. ये दिल, दिमाग, भावनाओं से जुड़ा मामला है. हम मामले की गंभीरता को लेकर सचेत हैं.
जस्टिस बोबड़े ने कहा कि जब मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही हो तो उसमें क्या कुछ चल रहा है, यह मीडिया में नहीं जाना चाहिए. जस्टिस बोबड़े ने मध्यस्थता की विश्वसनीयता को बरकरार रखने पर जोर देते हुए कहा कि जब अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता चल रही हो तो इसके बारे में खबरें न लिखी जाएं और न ही दिखाई जाएं.
जस्टिस ने आगे कहा कि हम मीडिया पर प्रतिबंध नहीं लगा रहे, लेकिन मध्यस्थता का मकसद किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होना चाहिए. 
एक हिंदू पक्षकार ने कोर्ट में दलील दी कि मध्यस्थता के लिए आदेश जारी करने से पहले पब्लिक नोटिस जारी करने की जरूरत होती है. हिंदू पक्षकारों ने दलील दी कि अयोध्या मामला धार्मिक और आस्था से जुड़ा मामला है. यह केवल संपत्ति विवाद नहीं है. हिंदू पक्षकार के वकील ने कहा कि मध्यस्थता से कोई फायदा नहीं, कोई तैयार नहीं होगा. इस पर CJI ने कहा, अभी से यह मान लेना कि फायदा नहीं, ठीक नहीं है
अवलोकन करें:-


आर.बी.एल.निगम श्री श्री रविशंकर ने अयोध्‍या विवाद के समाधान की पेशकश के साथ नवम्बर 16 को अयोध्‍या में सभी पक्षकारों से मुलाकात की. श्र..



आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर द्वारा मन्दिर मसला सुलझाने के लिए दर-दर जाना, शायद बाबरी समर्थकों को राहत दे रहा है, क्योकि उन्हें मालूम...
NIGAMRAJENDRA28.BLOGSPOT.COM

आखिर हिंदुओं से इतनी नफरत क्यों करती है कांग्रेस? इस सच्चाई को जानने के लिए निम्न लेखों का अवलोकन करें :--
हिंदू पक्षकारों की तरफ से दी गई दलील...
-इस मामले में मध्‍यस्‍थता का कोई फायदा नहीं है.
-हिंदू पक्षकारों ने दलील दी कि अयोध्या मामला धार्मिक और आस्था से जुड़ा मामला है.
-यह केवल सम्पत्ति विवाद नहीं है.
-मध्यस्थता से कोई फायदा नहीं, कोई तैयार नहीं.
-एक हिंदू पक्षकार ने कोर्ट में दलील दी कि मध्यस्थता के लिए आदेश जारी करने से पहले पब्लिक नोटिस जारी करने की जरूरत होती है.
मुस्लिम पक्ष की तरफ से दी गई दलीलें...
-हम मध्यस्थता के लिए तैयार हैं.
-मध्यस्थता के लिए सबकी सहमति जरूरी नहीं है.
-सुब्रमण्यम स्वामी: कोर्ट ने इसे अपने फैसले में दर्ज किया था, वहां सुलह करने जैसा कुछ नहीं. 
-सुब्रमण्यम स्वामी: नरसिंह राव सरकार कोर्ट में वचन दे चुकी है कि कभी भी वहां मंदिर का सबूत मिला तो वो जगह हिंदुओं को दे दी जाएगी.  
-बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की दलील- अयोध्या एक्ट से वहां की सारी ज़मीन का राष्ट्रीयकरण हो चुका है.

मुस्लिम संगठन का दावा, अयोध्या में दोबारा बनाएंगे बाबरी मस्जिद, जुटाएंगे 25 लाख लोग

मुस्लिम संगठन का दावा, अयोध्या में दोबारा बनाएंगे बाबरी मस्जिद, जुटाएंगे 25 लाख लोग
एसडीपीआई 6 दिसंबर को दिल्ली में बाबरी मस्जिद के हक में रैली निकालेगी
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग के बीच एक मुस्लिम संगठन ने दोबारा से बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा की है. इतना ही नहीं, इस मुस्लिम संगठन ने अयोध्या में 25 लाख लोगों को जुटाने का दावा किया है. मुस्लिम संगठन ने कहा कि अगर वीएचपी ने आयोध्या में 5 लाख लोग जुटाए हैं तो हम 25 लाख लोग जुटाकर दिखाएंगे. अयोध्या मामले में गर्माते माहौल के बीच मुसलमानों की नुमाइंदगी का दावा करने वाली सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया का बड़ा बयान सामने आया है.
एसडीपीआई ने कहा है कि अयोध्या में वो 5 लाख नहीं, बल्कि 25 लाख लोग इकट्ठा कर सकते है. मंगलवार (27 नवंबर) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उन्होंने ये बात कही. एसडीपीआई ने कहा कि उन्होंने कभी बाबरी मस्जिद पर दावा नहीं छोड़ा. हम दोबारा बाबरी मस्जिद बनाएंगे. उनकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी. एसडीपीआई 6 दिसंबर को दिल्ली में बाबरी मस्जिद के हक में रैली निकालेगी. 
इस मौके पर एसडीपीआई के नेशनल सेक्रेटरी तस्लीम रहमानी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि पीएम राजधर्म का पालन नहीं कर रहे हैं. वो आरएसएस के प्रचारक की तरह बयान दे रहे हैं. अलवर में अदालत पर उठाया गया उनका सवाल इसी बात की तरफ इशारा करता है. तस्लीम रहमानी यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि ये बाबरी मस्जिद पर हमारा दावा हमेशा रहेगा, क्योंकि पूर्व पीएम नरसिम्हा राव ने बाबरी मस्जिद को बनाने का वादा किया था. तस्लीम रहमानी ने कहा कि वो 25 लाख लोग अयोध्या में इकट्ठा कर सकते है, लेकिन कानून इसकी इजाजत नहीं देता.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसडीपीआई के जनरल सेक्रेटरी अब्दुल मजीद ने कहा कि वो न सिर्फ बाबरी मस्जिद बनाने की कोशिशों को बढ़ाएंगे, बल्कि उन्होंने मांग रखी कि अयोध्या में रखी गई मूर्तियों को तब तक हटाया जाए, जब-तक ये मामला अदालत में चल रहा है. 
6 दिसम्बर को एसडीपीआई देश की राजधानी दिल्ली में बड़ी रैली करने जा रही है. जो मंडी हाउस से संसद तक जाएगी. एसडीपीआई का दावा है कि इसमें सभी धर्मों के लोग शामिल होंगे. 
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया दक्षिण भारत में लगातार चुनाव लड़ती रही है. केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में एसडीपीआई ने चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे थे. एसडीपीआई को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की राजनीतिक इकाई माना जाता है. पीएफआई को झारखंड सरकार ने बैन किया था, बाद में अदालत ने बैन हटा दिया था.
ऐसी स्थिति में देखना यह है कि भाजपा का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, संघ का राष्ट्रीय मुस्लिम मंच एवं इन दोनों संगठनों से जुड़े लोगो के मुस्लिम एनजीओस इसके विरोध में खड़े होते हैं या गुप्त रूप से इसका समर्थन करते हैं। भाजपा और संघ को भले ही वोट न देते हों, लेकिन इनकी गोदी में बैठ मालपुए खाने वालों की यह होगी अग्नि परीक्षा।