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भारत विरोधी मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू द्वारा बीमार भारतीय के लिए भारतीय विमान को इलाज के लिए इजाजत न देने से तड़प-तड़प कर मर गया बीमार बच्चा

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने एक बीमार बच्चे की मेडिकल इमरजेंसी के दौरान भारत के प्लेन में ले जाने की मंजूरी ना देकर इंसानियत को शर्मसार करने का काम किया है। मुइज्जू के इस निर्णय के कारण 14 साल के बच्चे को वक्त पर इलाज नहीं मिला पाया और शनिवार (20 जनवरी 2024) को उसकी मौत हो गई।

दरअसल, मोहम्मद मुइज्जू को भारत विरोधी माना जाता है। वे जब से मालदीव राष्ट्रपति बने हैं, तभी से भारत द्वारा दिए गए हेलीकॉप्टरों और प्लेनों का इस्तेमाल इमरजेंसी निकासी (Emergency Evacuation) के लिए नहीं किया जाता है। इनका इस्तेमाल केवल राष्ट्रपति से सीधे मंजूरी मिलने पर ही किया जा सकता है।

चीन की कठपुतली राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने इस बीमार बच्चे को एयरलिफ्ट करके एक द्वीप से मुख्य द्वीप पर भारत के डोर्नियर प्लेन से ले जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। बच्चे के लिए मालदीव के रक्षामंत्री ने मुइज्जू से इसके लिए अनुमति माँगी थी। मुइज्जू के इस निर्णय के भारत ही नहीं, बल्कि मालदीव में भी आलोचना हो रही है।

ब्रेन ट्यूमर और फिर स्ट्रोक से पीड़ित इस बच्चे के परिवार ने मालदीव के एविएशन अधिकारियों पर तुरंत चिकित्सा निकासी मुहैया न कराने का आरोप लगाया है। मालदीव की समाचार एजेंसी अधाधु ने बच्चे के पिता के हवाले से लिखा है कि आइलैंड एविएशन ने परिवार की कॉल का तुरंत जवाब नहीं दिया।

उन्होंने कहा, “स्ट्रोक के तुरंत बाद बेटे को माले ले जाने के लिए हमने आइलैंड एविएशन को फोन किया था, लेकिन उसके कर्मचारियों ने हमारी कॉल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने गुरुवार सुबह 8:30 बजे फोन का जवाब दिया। ऐसे मामलों के लिए समाधान केवल एक एयर एम्बुलेंस ही है।”

मालदीव के सांसद मीकैल नसीम ने मिहारू न्यूज की रिपोर्ट को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रीट्वीट कर लिखा है, “भारत के लिए राष्ट्रपति की दुश्मनी को संतुष्ट करने के लिए लोगों को अपनी जान की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।”

परिवार के आपातकालीन निकासी का आग्रह करने के 16 घंटे बाद बीमार बच्चे को माले ले जाया गया। निकासी आग्रह लेने वाली आसंधा कंपनी लिमिटेड ने दावा किया कि विमान में तकनीकी दिक्कत की वजह से देरी हुई।

इस पर रक्षा मंत्री मोहम्मद घासन ने सफाई में कहा है कि 93 फीसदी निकासी अभी भी मालदीव एयरलाइंस ही करती है। उन्होंने कहा, “मेडिकल ऑपरेशन के एसओपी (मानक संचालन प्रक्रियाओं) में राष्ट्रपति को सूचित करने या उनसे इजाजत लेने की जरूरत नहीं है। यह संबंधित संस्थानों के समन्वय के जरिए किया गया काम है।”

जनवरी 2024 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद से ही भारत और मालदीव के बीच तनाव का माहौल है। वहाँ की सरकार के तीन मंत्रियों ने पीएम मोदी को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ की थी। इसके बाद इन्हें निलंबित कर दिया गया था, लेकिन दोनों के बीच राजनयिक टकराव अभी चल ही रहा है।

मुइज्जू की पार्टी ने बीते साल 2023 में इंडिया आउट आंदोलन के आधार पर चुनाव जीता था। इसके तहत मालदीव में तैनात लगभग 100 भारतीय सैनिकों को देश से हटाना था। राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू ने भारतीय सशस्त्र बलों को मार्च 2024 तक मालदीव छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। मुइज्जू ने हाल ही में अपनी पहली आधिकारिक यात्रा चीन से शुरू की थी और वहाँ कई समझौतेे किए।

कोरोना पर भी अरविन्द केजरीवाल द्वारा निचले स्तर की राजनीति ; Live कर दी मीटिंग

                                                 पीएम के साथ मीटिंग का वर्जन केजरीवाल ने करवाया प्रसारित!
देश में कोरोना महामारी के कारण हर जगह हालत बिगड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र ने इसी स्थिति को देखते हुए शुक्रवार (अप्रैल 23, 2021) को सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग की। इस बैठक में महाराष्ट्र, उतर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल के मुख्यमंत्री शामिल हुए।

बैठक में ऑक्सीजन आपूर्ति, रमेडेसिविर जैसी आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता पर बात हुई। इससे पहले पीएम अधिकारियों से मीटिंग कर स्थिति के बाबत उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट माँग चुके थे। बैठक में शामिल सभी मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने सुझाव दिए। 

मसलन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पीएम मोदी के साथ चल रही बैठक में कहा कि केंद्र और राज्य को मिलने वाली वैक्सीन की कीमत एक होनी चाहिए। वहीं एक मई से 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को लगने वाली वैक्सीन के लिए कोरोना के टीके की उपलब्धता को लेकर केंद्र राज्य सरकारों को एक्शन प्लान जारी करे।

लेकिन, इस बैठक के बाद जो बात चर्चा में आई, वह अरविंद केजरीवाल और हर मामले में राजनीति करने वाली उनकी आदत थी। दरअसल, इस बैठक में केजरीवाल ने लाचारों की तरह पहले पीएम मोदी से ऑक्सीजन को लेकर अपील की और बाद में क्लोज डोर मीटिंग की बातचीत पब्लिक कर दी।

इस हरकत के बाद सरकारी सूत्रों ने केजरीवाल पर राजनीति करने का आरोप मढ़ा। टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल ने पीएम से हुई अपनी बातचीत का प्रसारण कर दिया, जो कि नहीं होना था। बाकी लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं थी कि अरविंद केजरीवाल क्या कर रहे हैं। किसी को सूचना दिए बगैर पीएम के साथ हुई बैठक में अपनी बात का सीएम ने प्रसारण किया।

पिछले 1 वर्ष से भी अधिक समय से लगातार कोरोना पर योजनाएँ बन रही हैं और उसे लागू किया जा रहा है, तभी देश पहली लहर से भी बाहर निकला था और अब तक 13.54 करोड़ लोगों का टीकाकरण भी हो चुका है। बैठक में अरविंद केजरीवाल कोरोना के कारण दिवंगत आत्माओं की शांति की बातें कर रहे थे। जबकि वो खुद PM के साथ बैठक के प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रहे थे।

स्थिति ये आ गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हें टोकना पड़ा। पीएम ने AAP सुप्रीमो को याद दिलाया कि अब तक की जो परंपरा रही है, प्रोटोकॉल रहा है – ये उसके बिलकुल ही खिलाफ हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कोई मुख्यमंत्री इस तरह की ‘इन हाउस मीटिंग’ का लाइव प्रसारण कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सब को संयम का पालन करना चाहिए। उन्होंने इस हरकत को अनुचित बताया।

इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस बैठक का ‘शोक सभा’ की तरह प्रयोग करते हुए कोरोना से मृत लोगों की आत्माओं की शांति से लेकर उनके परिजनों को दुःख सहने की क्षमता देने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की बातें करने लगे। केजरीवाल ने कहा, “अगर मेरी तरफ से कोई गुस्ताखी हो गई है, अगर मैंने कुछ कठोर बोल दिया हो या मेरे आचरण में कोई गलती हो तो मैं उसके लिए आपसे माफ़ी चाहता हूँ।”

इसके अलावा केजरीवाल की स्पीच भी पूर्णत: राजनीति से प्रेरित थी। ऐसा पहली बार हुआ है कि पीएम के साथ हुई ऐसी निजी बातचीच को प्रसारित कर दिया गया हो। टेलीविजन वाले भी नहीं समझ पाए कि आखिर ये फुटेज आ कहाँ से रही है। लेकिन केजरीवाल को मालूम था कि उनकी स्पीच सार्वजनिक हो रही है। 

केजरीवाल द्वारा की गई इस हरकत के बाद इसे विश्वास के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने अरविंद केजरीवाल को एक आपदा कहा है। मालवीय के अनुसार, केजरीवाल बिना तैयारी के पीएम के साथ बैठक में बैठते हैं। उन्हें चीजों की कोई जानकारी नहीं है कि राजधानी में ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए पहले ही चीजें की जा रही हैं और टीकों की कीमत से भी वह बेखबर हैं। मालवीय का पूछना है कि आखिर ये शख्स दिल्ली को कैसे बचाएगा।

केजरीवाल ने इस बैठक में दिल्ली में हो रही ऑक्सीजन की कमी को उजागर कर राजनीति करनी चाही और इस तरह से ये दर्शाया कि उन्हें मदद नहीं मिल रही। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, केजरीवाल ने एक जगह कहा, “दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी कमी है। क्या अगर यहाँ कोई ऑक्सीजन प्रोड्यूसिंग प्लांट नहीं होगा तो दिल्ली को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी। कृपया मुझे बताएँ कि जब दिल्ली आने वाला ऑक्सीजन सिलिंडर दूसरे राज्य में रोका जाए तो केंद्र सरकार से इस संबंध में किससे बात करें।”

केजरीवाल की इस नासमझी पर सरकारी सूत्रों ने उन पर निशाना साधा। सूत्रों ने कहा कि केजरीवाल ने जानबूझकर वैक्सीन की कीमत पर झूठ बोला। सीएम केजरीवाल ने एयरलिफ्ट की बात कही लेकिन वो नहीं जानते कि ये पहले से हो रहा है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि केजरीवाल एकदम निचले स्तर पर गिर गए हैं। उनका पूरा भाषण किसी समाधान के लिए नहीं बल्कि राजनीति खेलने और जिम्मेदारी से बचने के लिए था।

भाजपा नेता संबित पात्रा ने केजरीवाल की इस हरकत को घटिया राजनीति कहा। उन्होंने कहा कि क्लोज डोर मीटिंग को सार्वजनिक करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए। ताकि राजीनित में नंबर बढ़ाए जा सकें।

दिल्ली के हालात अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत बदतर हो रहे हैं। गुरुवार को यहाँ 26 हजार से ज्यादा केस आए हैं। कुल संक्रमितों की संख्या अब बढ़कर 956,348 हो गई और सबसे चिंताजनक बात ये है कि यहाँ संक्रमण दर रिकॉर्ड भी 36 प्रतिशत हो गया है, जिसके बाद कल राजधानी में 306 मृत्यु हुई।

केजरीवाल को मोदी के विकल्प के रूप में देख रहे हैं लोग : मनीष सिसोदिया

ऊंट अपने आपको हमेशा सबसे बड़ा समझता है, वही स्थिति आम आदमी पार्टी की है, जिसे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अरविन्द केजरीवाल की तुलना नरेंद्र मोदी से करके सिद्ध कर दी। बड़बोले मनीष को शायद नहीं मालूम की मोदी कभी यू-टर्न नहीं लेते, जबकि केजरीवाल पता नहीं बार यू-टर्न ले चुके हैं; दूसरे, केजरीवाल अराजकताओं का समर्थन करते हैं, जबकि मोदी ऐसे तत्वों को बख्शते नहीं; तीसरे, जिन कृषि सुधारों को लाने का पिछले पंजाब चुनावों में आम आदमी पार्टी के घोषणा-पत्र में उल्लेख था, उसी को मोदी द्वारा कानून का रूप देते ही, सबसे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने लागु किया, लेकिन आंदोलन होते देख आन्दोलनजीवी ने तुरंत यू-टर्न ले, आंदोलन को समर्थन देना शुरू कर दिया। 

अगर जनता केजरीवाल में मोदी का विकल्प देख रही होती, 2014 में पंजाब से लोकसभा की 4 सीटें 2019 में मात्र एक नहीं रह जाती। इतना ही नहीं, आम आदमी पार्टी ही एक मात्र ऐसी पार्टी है जिसके 96+ प्रतिशत उम्मीदवारों की जमानत जब्त होती है। अभी गुजरात में हुए चुनावों में 500+ उम्मीदवारों में से लगभग 492 उम्मीदवारों की जमानत जब्त। 2014 और 2019 लोक सभा चुनावों में कितने उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई थी, यह भी आंकड़ा देकर मोदी का विकल्प बताते, तब अधिक अच्छा लगता। इतना ही नहीं, हैदराबाद में हुए निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार आज़ाद उम्मीदवार की हैसियत से लड़े। कोई आप समर्थित आज़ाद उम्मीदवार भिन्न-भिन्न चिन्हों पर मैदान में थे। दिल्ली की तरह कोई मुफ्त की रेवड़ियां नहीं खाने के चक्कर में फंसता।     

लोकसभा के बाद राज्यसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक, (GNCTD) बिल 2021, पास होने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। 

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस विधेयक के पास होने से पता चलता है कि भाजपा सरकार सीएम अरविंद केजरीवाल और उनके कामों से कितना असुरक्षित महसूस कर रही है। लोग इस बात को कहने लगे हैं कि अरविंद केजरीवाल, मोदी के विकल्प हो सकते हैं। ये बिल मुख्यमंत्री केजरीवाल को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाया गया है।

मनीष सिसोदिया ने कहा, “पीएम मोदी आज नकारात्मक राजनीति में उतर आए हैं। तो उन्हें राजनीतिक जवाब मिलेगा। हम अपने कानूनी विशेषज्ञों से बात कर रहे हैं और हमारे विकल्प तलाश रहे हैं। सीएम केजरीवाल एक योद्धा हैं, पिछले 6 वर्षों में उनकी कोशिशों के बावजूद उन्होंने अपने सभी वादे पूरे किए जिनका मेनिफेस्टो में उल्लेख था।”

केंद्र सरकार ने GNCTD विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा से पारित करवा लिया है। ये नया बिल एजली को विशेष शक्ति देने वाला विधेयक है। विधेयक में यह स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली में सरकार का मतलब उप राज्यपाल है। इसके पास होने पर आम आदमी पार्टी के नेता जमकर विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे सीएम की शक्तियाँ कम हो जाएँगी। राज्यसभा में विधेयक पेश होने के वक्त भी विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने भी इस दौरान भाजपा सरकार पर सवाल उठाए।

सुशील गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की जनता ने धर्म और जाति की राजनीति को फेल करके अरविंद केजरीवाल के विकास के मॉडल को तवज्जो दी है। आज दिल्ली का विकास मॉडल जिस तरीके से पूरे देश में फैल रहा है। अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता से घबराकर मोदी जी ने इस सवाल का जवाब संसद में खुद दे दिया।

आगे आप नेता सुशील ने भी PM मोदी का विकल्प अरविंद केजरीवाल को बताया और कहा कि दिल्ली मॉडल को रोकने के लिए यह बिल पास किया गया है। उनके अनुसार, आदमी जिस से डरता है, उसका रास्ता रोकता है। दिल्ली में किस तरीके से विकास हुआ, उस विकास को पसंद कर अब देश के अन्य राज्य भी अरविंद केजरीवाल की तरफ बढ़ रहे हैं।

बंगाल में दिखा किसान नेताओं का असली रंग, भाजपा को वोट न देने की अपील

बंगाल चुनावों में भाजपा विरोधी प्रचार करने से इन तथाकथित किसानों ने सिद्ध कर दिया है कि इनको कृषि कानून से नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध प्रदर्शन करना है। उस मोदी के खिलाफ जिसने इनकी दलाली की दुकानदारी बंद कर दी है।  ये वही राकेश टिकैत है, जिसने आंदोलन के चलते चीनी मिलों को अपना गन्ना बेचा है।  

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले नंदीग्राम में हुई किसान महापंचायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध जमकर आवाज उठीं। किसान नेता राकेश टिकैत ने जहाँ मीडिया से बात करते हुए भाजपा के विरुद्ध वोट करने की अपील की। वहीं दूसरे किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिंदुस्तान के लिए पाकिस्तान से भी बड़ा खतरा करार दिया।

राजेवाल ने मोदी के लिए कहा कि देश को पाकिस्तान या किसी देश से उतना खतरा नहीं है, जितना नरेंद्र मोदी से है। वे महापंचायत में बोले, “आज हमें महसूस हुआ कि यह सरकार सिर्फ वोट लेना ही जानती है। इसे वोट की चोट देनी चाहिए। आप जिसे चाहो उसे वोट दे दो, मोदी को वोट मत दो। मोदी देश के लिए आज सबसे बड़ा खतरा है। हमें पाकिस्तान से खतरा नहीं है, हमें किसी देश से कोई खतरा नहीं है, खतरा है अगर देश को तो नरेंद्र मोदी से।”

इसी प्रकार नंदीग्राम में रैली करते हुए सीएम ममता बनर्जी की चोट को लेकर इशारों में बीजेपी पर हमला करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि उन्होंने एक औरत को चोट पहुँचाई है और उन्हें घायल कर दिया।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी अकेली महिला हैं। क्रांतिकारी महिला हैं, जो सरकार के खिलाफ लड़ रही हैं तो हो सकता है कोई साजिश हो, जिसके तहत चोट लगी है। वहीं भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी का नाम लिए बगैर टिकैत ने उन्हें भगोड़ा बताया, जो एक पार्टी से दूसरे पार्टी में भागते फिर रहे हैं।

वह बोले, “यहाँ पर खेल होगा। बड़ी बड़ी कंपनी आएँगी। वो समुद्र से मछली पकड़ने आएँगी। तालाब यहाँ बंद हो जाएँगे। कंपनियाँ ऐसे ही यहाँ काम करेंगी। किसी पार्टी की सरकार नहीं, बड़ी-बड़ी कंपनी सरकार को चलाने का काम कर रही हैं। एयरपोर्ट, रेलवे सब बिक गया है, अब किसानों की बारी है।”

उन्होंने भाजपा के ख़िलाफ़ भड़काते हुए कहा कि वे एक मुट्ठी चावल माँगते हैं आपसे, आप सवाल करें कि जो चावल की एमएसपी है वो कब मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की फसलें एमएसपी पर नहीं खरीदी जा रही हैं। ऐसे में जब वो हमें एमएसपी नहीं दे पा रहे हैं तो आपको भी उनको (बीजेपी) को वोट नहीं देना चाहिए।

अमेरिकी संसद में उत्पात के बीच गोलीबारी में एक की मौत: ट्विटर ने ट्रंप पर लगाया 12 घंटे का बैन

                                                ट्रंप समर्थकों का हंगामा (साभार: reuters)
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा। चुनावी नतीजों पर अमेरिकी संसद में बुलाई गई बैठक से पहले डोनाल्ड ट्रंप समर्थकों की भीड़ ने व्हाइट हाउस और कैपिटल भवन को घेर लिया। ट्रंप के समर्थकों ने कैपिटल भवन पर जम कर हंगामा किया। वाशिंगटन डीसी स्थित कैपिटल में अमेरिकी कॉन्ग्रेस के लोग बैठते हैं।

विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, हंगामे के बीच एक नागरिक (महिला) को गोली भी लगी है। जिसकी अस्पताल में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। अमेरिकी राजधानी में हंगामे और हिंसा के बीच कई लोग घायल भी हुए हैं। 

उपद्रव और हंगामे की इन घटनाओं के बाद वाशिंगटन डीसी में कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी नतीजों में धांधली का आरोप भी लगाया। हाल ही में हुए चुनावों के दौरान राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित जो बायडेन ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आह्वान करता हूँ कि वह शपथ पूरी करें, संविधान की रक्षा करें और इस घेराव को बंद ख़त्म करने की माँग उठाएँ। कैपिटल भवन पर जिस तरह का हंगामा हुआ है हम असल में वैसे नहीं हैं। यह क़ानून का पालन नहीं करने वालों की छोटी संख्या है। इस तरह की घटना राजद्रोह है।”

इस घटना पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “वाशिंगटन में हुई दंगों और हिंसा की घटनाओं से निराश हूँ। सत्ता का स्थानान्तरण आदेशानुसार और शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। संवैधानिक प्रक्रिया को इस तरह के असंवैधानिक प्रदर्शन से तबाह नहीं किया जा सकता है।”

हालाँकि, ट्रंप ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने का निवेदन किया था। उन्होंने कहा, “प्रदर्शन के बीच हिंसा नहीं होनी चाहिए, याद रखें हम एक क़ानून और व्यवस्था की पार्टी हैं।” कैपिटल भवन में हिंसा के दौरान ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर एकाउंट भी ब्लॉक कर दिया। ट्विटर ने ‘नागरिक एकता और चेतावनी भरी हिंसात्मक नीतियों’ का हवाला देते हुए ट्रंप का एकाउंट 12 घंटे के लिए बंद किया था।

ट्विटर ने स्पष्ट किया कि इस तरह के भड़काऊ विचारों को बढ़ावा देने पर एकाउंट स्थाई रूप से रद्द किया जा सकता है। ट्विटर के बाद फेसबुक ने भी डोनाल्ड ट्रंप का वीडियो हटा दिया था। अमेरिकी राजधानी में उपद्रव और हिंसा के दौरान ट्रंप ने समर्थकों को सम्बोधित किया था। जिस पर फेसबुक ने कहा था, “ट्रंप का वीडियो हिंसा और हंगामे को कम करने की बजाय बढ़ाने में मदद कर रहा था।”

PM मोदी कहाँ-कैसे-कब हवाई जहाज से गए…: वायु सेना ने कहा – ‘नहीं दे सकते, देश के लिए खतरा है’

2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से इनकी विरोधियों रोटी-पानी के साथ-साथ रातों की नींद भी हराम हो चुकी है। मोदी शायद ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके खानपान से लेकर उनके आने-जाने पर विरोधी गिद्ध की नज़र रखने को आतुर हैं। पहले इनके खाने-पीने की जानकारी और फिर इनकी माताश्री के दिल्ली अपने पुत्र के पास और रुकने आदि तक की RTI डाली जा चुकी हैं, लेकिन PMO से हर बार एक ही जवाब मिला कि "पता नहीं, प्रधानमंत्री जी अपने निजी करते हैं, किसी को नहीं पता।" लेकिन अब जो सूचना मांगी गयी है, उसमे जहाज से आने-जाने की सूचना। आखिर विरोधी क्यों और किस कारण जानकारी लेना चाह रहे हैं। ऐसे में प्रश्न होता है कि क्या जानकारी लेने वाला कोमोडोर (रिटायर्ड) लोकेश के बत्रा क्यों लेना चाहता है? यह गंभीर जाँच का विषय है।     

PM मोदी कहाँ गए थे, कब गए थे, कैसे गए थे और किस-किस रूट से गए थे – RTI करके एक शख्स ने यह जानकारी माँगी थी। आश्चर्य की बात यह है कि यह RTI एक ऐसे शख्स ने डाली थी, जो खुद भारतीय वायुसेना के कोमोडोर रह चुके हैं, नाम है – लोकेश के बत्रा।

कोमोडोर (रिटायर्ड) लोकेश के बत्रा ने PM मोदी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में भी यह सब जानकारी माँगी थी – 2013 से लेकर अब तक जब RTI डाली गई थी, उस तिथि तक)। आश्चर्य यह कि केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने 8 जुलाई 2020 को भारतीय वायु सेना को यह जानकारी देने के लिए निर्देश भी जारी कर दिया।

अब भारतीय वायु सेना ने CIC के इस निर्देश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। भारतीय वायु सेना का कहना है कि प्रधानमंत्री से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री की हवाई यात्रा से संबंधित जानकारी साझा नहीं की जा सकती है। वायु सेना ने इसे ‘सेंसिटिव डिटेल’ की कैटेगिरी में बताया है।

भारतीय वायु सेना ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री के साथ चलने वाले SPG ग्रुप के जवान और पूरी यात्रा डिटेल को सार्वजनिक करने से न सिर्फ प्रधानमंत्री की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी बल्कि देश की अखंडता और संप्रभुता पर भी खतरा बन सकता है।

कोमोडोर (रिटायर्ड) लोकेश के बत्रा ने PM मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे इस तरह की जानकारी के लिए जून 2018 में RTI डाली थी। भारतीय वायु सेना ने कोर्ट को यह बताया कि RTI एक्ट के तहत इस तरह की जानकारी को निषेध बताया गया है। अपने तर्क में वायु सेना ने कहा कि CIC ने निर्देश देने में भयंकर चूक की है क्योंकि SPG को RTI एक्ट के तहत छूट दी गई है।

RTI एक्टिविस्ट और सुप्रीम कोर्ट 

दिसंबर 2019 में मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने प्रशांत भूषण को उनकी एक याचिका के लिए फटकार लगाई। यह याचिका प्रशांत भूषण की ही एक पुरानी याचिका के बारे में थी। उस पुरानी याचिका को दायर कर प्रशांत भूषण ने आरटीआई एक्ट के संबंध में राज्यों के सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बारे में सवाल उठाए थे।

इसके जवाब में सीजेआई ने माना था कि आरटीआई को लेकर कुछ गंभीर चिंताएँ अवश्य जायज़ हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोग सूचनाएँ माँग रहे हैं, जिनका मामले से कोई लेना-देना ही नहीं है। उन्होंने भूषण को लेकर नाराज़गी जताते हुए कहा, “कुछ लोग खुद को ‘आरटीआई एक्टिविस्ट’ कहते हैं। मुझे बताइए, ये कोई व्यवसाय है क्या?” 

कर्नाटक: कलबुर्गी में दीवार पर लिखे ‘पाकिस्‍तान जिंदाबाद’ के नारे और मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी

कलबुर्गी में घर की दीवार पर लिखे गए पाक समर्थित नारे (फोटो साभार: The Hindu)
कर्नाटक के कलबुर्गी में रविवार (मार्च 1, 2020) की सुबह पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे और दीवार पर मोदी विरोधी टिप्पणी करने की एक और घटना सामने आई है। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस ने इसके पीछे जिम्मेदार अपराधियों को पकड़ने के लिए जाँच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक कलबुर्गी के हफ्त गुम्बज इलाके के एक स्थानीय निवासी किशन राव हगरगुंडगी के घर की दीवार पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का विवादास्पद नारा लिखा हुआ पाया गया। इसके अलावा अज्ञात बदमाशों ने दीवार पर चारकोल से पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी हुई थी। मकान में रहने वाले किराएदार मनोज चौधरी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। जिसके बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 153A, 153B, 124A, और 505 (2) के तहत चौक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया।
स्थानीय लोगों ने पुलिस से तुरंत कारर्वाई की माँग करने के साथ ही पुलिस को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ न हों। पुलिस ने स्थानीय लोगों को इसका आश्वासन दिया और फिर दीवार पर लिखे हुए शब्दों को मिटा दिया। 
इस घटना के सामने आने के बाद बीजेपी नेता दिव्या हगारगी ने चौक पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया। उन्होंने और भाजपा की अन्य महिला कार्यकर्ताओं ने दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की माँग की। दिव्या ने पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि 15 फरवरी को कलबुर्गी में आपत्तिजनक भाषण दिया था तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हेने के बाद ही मामला दर्ज किया गया था।
कुछ दिन पहले ही कर्नाटक के हुबली ग्रामीण तालुक के बुदरसिंगी गाँव में एक स्कूल की दीवारों पर पाकिस्तान समर्थक नारे लिखे गए थे। बताया जा रहा है कि शिक्षकों और छात्रों ने स्कूल की दीवारों पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ और ‘टीपू सुल्तान शाले’ लिखा था।
वहीं पिछले दिनों वामपंथी कार्यकर्ता अमूल्या लियोना ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ बेंगलुरु में आयोजित AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की रैली में मंच से ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए थे। फिलहाल वो देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद है। अमूल्या के गिरफ्तारी के बाद उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अमूल्या ने हाल ही में खुलासा किया है कि वो एक पेड प्रोटेस्टर है। उसने पुलिस को बताया कि पिछले साल दिसंबर में सीएए के खिलाफ आंदोलन शुरू होने के बाद से सीएए के विरोध में रैली आयोजित करने वाले आयोजक उसका खर्च उठा रहे हैं।

CJI, मोदी ने किया साफ़: अब काशी, मथुरा सहित किसी धार्मिक स्थल पर विवाद के लिए तैयार नहीं है देश

रंजन गोगोई
अयोध्या फैसले में 9 नवंबर को कोर्ट ने सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया और इसके बाद न्यायपालिका, सरकार एवं RSS जैसे संगठन सब एक मत देते नजर आए। दरअसल, अलग-अलग बयानों में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरसंघ संचालक मोहन भागवत ने संदेश दिया कि विवादों को पीछे छोड़कर अब देश के आगे बढ़ने का वक्त है। जिसके बाद ऐसा मानकर चला जा रहा है कि भविष्य में सांप्रदायिक धार्मिक स्थलों के नामपर विवाद होने की गुंजाइश कम है। फिर चाहे मामला मथुरा-काशी से संबंधित ही क्यों न हो।
बता दें कि अयोध्या की तरह काशी के विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद और मथुरा में भी मस्जिद विवाद सालों से चल रहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1,045 पेज के फैसले में 11 जुलाई, 1991 को लागू हुए प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 1991 का जिक्र करते हुए साफ कर दिया है कि काशी और मथुरा के संदर्भ में यथास्थिति बरकरार रहेगी।

शनिवार को फैसला सुनाते हुए जस्टिस गोगोई ने 1991 के पूजा स्थल कानून का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि संसद का यह कानून साफ करता है कि 15 अगस्त 1947 के दिन तक जिस भी पूजा स्थल की जो भी स्थिति है, उसमें कोई धार्मिक बदलाव की इजाजत नहीं हैं। इसलिए इन मामलों से जुड़े सभी मुकदमें अब खत्म माने जाएँगे। उल्लेखनीय है कि इस कानून से सिर्फ़ राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद को ही छूट थी। जिसका मतलब साफ है कि कोर्ट अब ऐसे किसी भी मुद्दे को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को संबोधित करते हुए उसी दिन कहा कि अब देश में कटुता के लिए स्थान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब नए भारत के निर्माण में सबको जुटना है। इस दौरान उन्होंने करतारपुर कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के दिन का संदेश जोड़ने का है, जुड़ने का है और मिलकर जीने का है। सभी कटुता को तिलांजलि देने का वक्त है। नए भारत में कटुता, नकारात्मकता पर कोई स्थान नहीं होगा।
वहीं संघ संचालक ने भी अपने बयान में इस मामले से आरएसएस के जुड़ने को एक अपवाद बताया। उन्होंने कहा है कि संघ आंदोलन नहीं करता, राम मंदिर से जुड़ना केवल अपवाद था। जिससे साफ होता है कि संघ किसी और पूजा स्थल के लिए होने वाले आंदोलन से जुड़ने पर विचार नहीं कर रहा है।
इधर, मुस्लिम पक्षकारों ने भी इस फैसले को स्वीकारा है और कहा है कि ये सर्वोच्च न्यायालय का फैसला देशहित में हैं, जिसे शांति से ही स्वीकारा जाना चाहिए। हाँ, ये बात और है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड इसपर याचिका डालने पर विचार कर रहा है। लेकिन जिस तरह देश के अन्य मुसलमानों ने इसपर सहमति जताई है, उनकी ओर से भी संदेश आ रहा है कि ऐसे मामलों पर आगे विवाद से बचा जाएगा।

पी. चिदंबरम ने की प्रधानमंत्री मोदी की तीन बातों की तारीफ

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने की प्रधानमंत्री मोदी की तीन बातों की तारीफकांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम  ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की तारीफ की है जो 15 अगस्त को लाल किले से दिया था. पी. चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री के तीन घोषणाओं का सभी को स्वागत करना चाहिए. जिनमें छोटा परिवार देशभक्ति का कर्तव्य, वेल्थ क्रिएटर्स का सम्मान और प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक. आम तौर पर पी. चिदंबरम पीएम मोदी और उनकी सरकार की बड़े आलोचकों के तौर पर जाने जाते हैं. लेकिन अब उनका पीएम मोदी के भाषण की तारीफ करना कई लोगों को हैरान कर सकता है. जब भी आर्थिक नीतियों के मुद्दे पर पी. चिदंबरम संसद से लेकर अखबारों तक में मोदी सरकार को जमकर घेरा है.  हालांकि इसी ट्वीट के साथ उन्होंने यह भी लिखा है कि वे उम्मीद करते हैं कि वित्त मंत्री, उनके टैक्स अधिकारियों की फौज और जांचकर्ता पीएम मोदी के संदेश को साफ तौर पर सुना होगा. यहां पर पी. चिदंबरम 'वेल्थ क्रिएटर्स के सम्मान' वाली बात का इशारा कर रहे थे.
पी. चिदंबरम ने इसके साथ ही एक और ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा कि पहला और तीसरी बात (छोटा परिवार और प्लास्टिक के न इस्तेमाल) जनता का आंदोलन बनना चाहिए. उन्होंने कहा कि करीब 100 स्वंयसेवी संस्थान इस पर स्थानीय स्तर पर इस आंदोलन की अगुवाई करना चाहते हैं. 
स्‍थानीय चीजों को बढ़ावा
पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि हमें स्थानीय चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने भारत के हर जिले में एक छोटे देश के बराबर ऊर्जा है. हर जिले की अपनी खासियत है कहीं हैंडीक्रॉफ्ट बनता है तो कहीं मिठाई बनती है. हमें इन उत्पादों को ग्लोबल मार्केट में ले जाना है इससे रोजगार के भी अवसर पैदा होंगे.

'डिजिटल पेमेंट को हां नगदी को ना' 
डिजिटल भारत अभियान पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमें डिजिटल पेमेंट की आदत डालनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अकसर दुकानों में लिखा होता है 'आज नगद, कल उधार'. लेकिन अब दुकानों में लिखा हो 'डिजिटल पेमेंट को हां नगदी को ना'
छोटा परिवार रखने वाले देश भक्‍त की तरह 
जनसंख्या विष्फोट का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने उन लोगों को भी देशभक्त बताया जो छोटा परिवार रखते हैं. उन्होंने कहा कि समाज में एक छोटा वर्ग भी ऐसा भी है जो घर में शिशु के आने से पहले यह भी जो सोचते हैं कि क्या वह उसकी आशाओं और अपेक्षा को पूरा कर पाएंगे या उसको बेहतर शिक्षा दे पाएंगे. वह उन लोगों को तरह नहीं होते हैं जो बच्चे पैदा करने के बाद उनको उसके नसीब पर छोड़ देते हैं. उन्होंने कहा सीमित परिवार रखने वाले भी देशभक्त की तरह होते हैं. 
प्‍लास्टिक को ना कहें 
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा प्लास्टिक से हो रहे पर्यावरण के नुकसान का जिक्र करते हुए देशवासियों से अपील की वे 2 अक्टूबर से प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद कर दें और गिफ्ट देने के लिए जूट के थैले का इस्तेमाल करें. उन्होंने कहा इसके लिए दुकानदारों से भी अपील की है.
स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा
पीएम मोदी ने कहा भारत में पर्यटन उद्योग की अपार संभावनाएं हैं. लेकिन पिछले 70 सालों में इस दिशा में ज्यादा काम नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि पर्यटन से रोजगार की संभावना बढ़ती है और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है. पीएम मोदी ने अपील करते हुए कहा कि 2022 तक 15 पर्यटन स्थलों पर जाएं. उन्होंने कहा कि इसमें दिक्कतें आएंगी, हो सकता है कि आप जहां जाएं वहां पर होटल न हो, पानी न हो लेकिन फिर भी जाएं. 

कांग्रेस की डिस्कवरी चैनल से मांग : मोदी के शूटिंग कार्यक्रम को सार्वजनिक करें

कांग्रेस ने डिस्कवरी चैनल से की मांग, पीएम मोदी के शूटिंग वाले दिन का कार्यक्रम सार्वजनिक करेंप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी वाले डिस्कवरी के मशहूर शो 'मैन वर्सेज वाइल्ड' का टीजर सामने के बाद कांग्रेस ने जुलाई 29 को कहा कि संबंधित चैनल को शूटिंग वाले दिन के अपने पूरे कार्यक्रम का ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि 'पुलवामा आतंकी हमले वाले दिन मोदी कितने बजे तक शूटिंग करते रहे' पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि पुलवामा हमले के दिन(14 फरवरी) हमने इस मुद्दे पर कहा था कि हमले के समय प्रधानमंत्री मोदी शूटिंग में व्यस्त थे उन्होंने कहा, 'शूटिंग के बाद साढ़े पांच बजे प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड में एक जनसभा को संबोधित किया था, लेकिन उसमें उन्होंने न तो पुलवामा हमले की निंदा की और न ही शहीदों को श्रद्धांजलि दी
दरअसल, कांग्रेस को मोदी के हर कदम में शंका करने की आदत पड़ गयी है। जिस कारण विरोध के असली मुद्दे उजागर नहीं हो रहे ताकि जनहित को कुछ लाभ हो। बढ़ती महंगाई, टूटी सड़कें, भ्रष्टाचार, पानी की समस्या, सीवर की सफाई और अधिक्रमण आदि से जनता को होती परेशानी मुद्दे उछाल भाजपा प्रशासन को बेनकाब कर जनता का दिल जीतें बल्कि मोदी के हर कदम को विवादित कर अपनी पार्टी को क्षति पहुँचाने का काम कर रही है।  
तिवारी ने कहा कि डिस्कवरी चैनल को उस दिन के अपने शूटिंग का कार्यक्रम सार्वजनिक कर बताना चाहिए कि शूटिंग कितने बजे तक चली थी ताकि प्रधानमंत्री की उस दिन की दिनचर्या का पता चल सकेदरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब जल्द ही डिस्कवरी के मशहूर शो 'मैन वर्सेज वाइल्ड' के एक एपिसोड में नजर आएंगे यह खास एपिसोड 12 अगस्त को प्रसारित किया जाएगा यह 180 से अधिक देशों में डिस्कवरी नेटवर्क के चैनलों पर दिखाया जाएगा। डिस्कवरी चैनल की ओर से जारी किए गए एक बयान में कहा गया कि इस खास एपिसोड की शूटिंग बेयर ग्रिल्स ने भारत के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में की हैइसमें हल्के-फुल्के अंदाज में वन्यजीव संरक्षण पर प्रकाश डाला जाएगा 
भारत में बाघों की संख्या पर बोले पीएम मोदी - अभी भी काफी कुछ करने की जरूरत
बेयर ग्रिल्स ने जुलाई 29 को ट्विटर पर इसका टीजर साझा किया 45 सैकंड के इस टीजर में मोदी और ग्रिल्स जंगल में घूमते और रबर की नौका में बैठे नजर आ रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी ने एक बयान में कहा कि कई सालों तक प्रकृति के बीच, पहाड़ों और जंगलों में रहा हूं. उन दिनों का मेरे जीवन पर गहरा प्रभाव हैइसलिए जब मुझसे राजनीति से परे जीवन पर आधारित इस खास एपिसोड में हिस्सा लेने के लिए पूछा गया और वह भी प्रकृति के बीच में तो मैं इसमें भाग लेने को बहुत इच्छुक था 

BJP से हाथ मिला सकती है AIADMK

दिल्ली के सियासी गलियारे में अक्टूबर 8 को एक बड़ी हलचल देखने को मिली। इस हलचल का असर दक्षिण की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एदापल्ली के. पलानीस्वामी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद पलानीस्वामी ने भी चर्चाओं के बाजार को और हवा देते हुए संकेत दिए कि गठबंधन के लिए वह चुनावों की तारीख घोषित होने के बाद विचार करेंगे 
हालांकि, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात को औपचारिक मुलाकात बताया। के. पलानीस्वामी ने कहा कि उन्होंने तमिलनाडु के कई मुद्दों को प्रधानमंत्री के समक्ष रखा। साथ ही उन्होंने कहा, 'हमने भूतपूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता(अम्मा) तथा अरईनार अन्ना (सीएन अन्नादुरई) को 'भारत रत्न' दिए जाने की मांग की है, साथ ही चेन्नई रेलवे स्टेशन का नाम AIADMK के संस्थापक एमजी रामचंद्रन के नाम पर रखा रखने की मांग की है।'
पत्रकारों ने जब दक्षिण में एआईएडीएमके और भाजपा के साथ तालमेल पर सवाल किया तो उन्होंने इस बात से इंकार नहीं किया बल्कि कहा कि गठबंधन के बारे में चुनावों की तारीख की घोषणा होने के बाद विचार किया जाएगा 
पलानीस्वामी के गठबंधन को लेकर इस संकेत से दिल्ली के साथ दक्षिण की राजनीति में हलचल मचने लगी है। क्योंकि बीजेपी दक्षिण में अपनी पैठ जमाने के लिए किसी सहारे की तलाश में हैं और दक्षिण की राजनीति में तमिलनाडु एक मुख्य केंद्र है। कर्नाटक के बाद बीजेपी की नजर तमिलनाडु पर लगी हुई हैं। और वह लगातार ऐसे मौके तथा दल की तलाश में है, जिसके सहारे दक्षिण की राजनीति में कमल खिलाया जा सके।उधर, एआईएडीएमके को भी किसी मजबूत सहारे की दरकार है 
जब जयललिता ने किया अटल बिहारी वाजपेयी को सत्ता से बाहर
राजनीति के अखाड़े में ना कोई किसी का दोस्त और न ही कोई दुश्मन। कौन कब किसका सहारा बन जाये अथवा ले, कहना कठिन है। 
इतिहास के पन्ने टटोलें तो एआईएडीएमके और बीजेपी नीत एनडीए का पुराना और कटु संबंध रहा है। किसी समय में एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता केंद्र में एनडीए का एक हिस्सा थीं। जयललिता और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच अच्छा तालमेल भी था, लेकिन इस तालमेल के बीच तत्कालीन कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी आ गईं 
1999 में तमिलनाडु में एआईएडीएमके की सत्ता थी और जयललिता मुख्यमंत्री थीं। उनके समर्थन के साथ केंद्र में एनडीए की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थी। लेकिन जयललिता और सोनिया गांधी के बीच एक मुलाकात के बात जयललिता ने केंद्र सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया और एनडीए सरकार अल्पमत में आ गई 
राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री वाजपेयी को बहुमत साबित करने के लिए कहा। वाजपेयी सरकार ने विश्वास प्रस्ताव रखा और 17 अप्रैल, 1999 को लोकसभा में इस पर वोटिंग हुई। लेकिन वाजपेयी सरकार केवल एक वोट से बहुमत साबित नहीं कर पाई और उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 269 और विरोध में 270 वोट पड़े थे और इस तरह से 13 महीने की पुरानी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार महज एक वोट गिर गई 
पहले भी दे चुके हैं गठबंधन के संकेत
तमिलनाडु में सत्ताधारी दल अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) पहले भी बीजेपी के साथ गठबंधन के संकेत दे चुका है। इसी साल अप्रैल में जब तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी दल डीएमके की अगुआई में कावेरी विवाद को लेकर धरने-प्रदर्शन चल रहे थे, तब एआईएडीएमके ने कहा था कि विपक्षी दल कितना भी विरोध-प्रदर्शन करें, लेकिन बीजेपी के साथ उनके संबंध खराब नहीं हो सकते हैं। एआईएडीएमके के मुखपत्र 'नामादु पुराची थलैवी अम्मा' के एक लेख में लिखा गया था कि केंद्र और राज्य सरकार के मजबूत और मधुर संबंधों को कोई कमजोर नहीं कर सकता है। मुखपत्र में लिखा था कि ऐसे संकेत और साफ होते जा रहे हैं कि देश की राजनीति में एआईएडीएमके और बीजेपी, दोनाली बंदूक की दोनों नालों की तरह काम करें